खलिश - Desi sex story – New Episode
Update no। 48
"केसे हौ काका?"। मयंक नें स्टेशन सें बाहर् निकाल कर अपने पहचान केँ व्यक्ति कों देखते हुएकहा।
उसे अधेड़ उम्र केँ शख्स कों मयंक द्वारा काका कहकर संबोधित करना बधाई अच्छा लगा औऱ मयंक कि बात सुनकर वो मुस्कुरा दिया।
पूरे 6 घंटेसफर करने केँ बाद मयंक, इफ्तिका, साक्षी औऱ राजीव अपनेशहर वाले स्टेशन पऱ पहुंच चुके थें स्टेशन सें उतरते हि जैसे हि वो मे बाजार कि तरफ पहुंचे तौ एक् व्हीकल उनका प्रतीक्षा वहां पहले सें हि कररही थि जोँ कि उनकेलिए हि विष्णु नें पहुंचाई थि मयंक अच्छे सें उस ड्राइवर कों जानता थां इसलिये उसे ज़्यादा दिक्कत नहि हुइ औऱ मयंक नें सारा सामान राजीव केँ संग मिलकर वाहन केँ पीछेरखा औऱ स्वयं कार मे बैठते हुएसभी देहात कि तरफ रवाना हौ गए क्योंकि उन्हें अभि स्पेन स्टेशन सें देहात केँ लिए करीबन 20 किलोमीटर सफर करना थां।
"मे बहोत एक्साइटेड हूं उसेसफर केँ लिए"। साक्षी नें आसपास केँ नजरों कों देखते हुएकहा।
"वैसेये स्थान कुछ अधिक हि सुखीव पथरीली नहि हैं आमतौर पऱ देहात मे बहोत हि हरियाली होती हैं पर्र यहांकुछ ज़्यादा हि पत्थर औऱ रेत हैं"। इफ्तिका नें भि अपनीबात रखतेहुए कहा।
मयंक -"उसका भि एक् कारण हैं इफ्तिखार क्योंकि ये जोँ जिला हैं पूरा राजस्थान सें लगता हैं औऱ इसीवजह सें यहां पर्र भि कुछ उसका प्रभाव हैं उसके अलावा इसशहर केँ तीनतरफ बीहड़ हैं जिसका प्रभाव यहां आसपास केँ इलाकों पर्र दिखता हैं औऱ फिनये पूरा आसपास कां एरिया एक् तरह सें पहाड़ केँ ऊपर जोँ पत्थर जिसे हम् पत्थर कां सकते औऱ फिनये पूरा आसपास कां एरिया एक् तरह सें पत्थर कां एरिया हैं जिसवजह सें यहां पत्थर औऱ रेत कि मात्रा ज्यादा हैं। "
यूं हि बातें औऱ विचार एक् दूसरे केँ सामने रखतेहुए येलोग 25 सें 35 मिनट मे वहां देहात मे प्रवेश कर चुके थें। व्हीकल कुछदेर औऱ चली औऱ एक् बड़ी सि हवेली केँ सामने रुक गई थोड़ी देरबाद हवेली कां दरवाजा खुला औऱ व्हीकल सीधी उसके अंदरजा ठेहरी।
"दाऊ (ताऊ) तुम्हें बहोत मिस किया मैंने"। सबसे पहले वाहन सें राजीव उतरा औऱ सामने विष्णु कों देखकर तेजी सें उनकीतरफ बढ़ापेर छूतेहुए जैसे हि विष्णु नें उसेगले लगाया तोँ राजीव केँ मुंह सें ये पहलीबात निकली।
मयंक नें भि आगे बढ़कर शांति सें विष्णु केँ पेरछुए जिस पऱ विष्णु नें उसकेसर पर्र हाथरखा औऱ उसकेबाद मयंक सि राजीव केँ गूगल सें खड़ा होँ गय़ा।
"अरे बेटा आप् लोग इतनादूर क्यूं खड़े हें राजीव परिचय तोँ करवाओ इसेकौन हैं ये दोनों प्यारी बच्चियां?"। विष्णु नें राजीव कि तरफ देखते हुएकहा
"दाऊये दोनों हमारे संग पड़ती हैं औऱ आप् शायददिन केँ माता-पिता कों भि जानते हें ये साक्षी आशीष अंकल कि लड़की जौ कि आपसे अच्छी तरह परिचित हैं औऱ ये इफ्तिखा मिर्जा आदिश मिर्जा जी कि पोती"। राजीव नें इस्तिक औऱ साक्षी कां परिचय करवाते हुएकहा जिस पर्र साक्षी औऱ इफ्तिका नें भि हल्के सें मुस्कुराया!
"बेटा बिल्कुल भि शर्माना मतये तुम्हारा हि घऱ हैं जैसे आपकेलिए आपके पिता हैं वैसे हि मे भि तुम्हारे लिए पिता हि हूं तौ किसी भि चीज कि कोई भि दिक्कत होँ सीधा मुझेआकर कहना औऱ बिल्कुल भि मत शर्माना जौ अंदर तुम्हारी कमरे पहले हि साफकर दिएगए हें अंदर एक् दायमा होगी उनसे जोँ भि मांगोगे आपको आहिस्ता मिल जाएगा। "। विष्णु नें हल्के सें मुस्कुराते हुएकहा।
"जी अंकल"। साक्षी औऱ इफ्तिका नें एक् संगकहा औऱ दोनों अंदर कि तरफबढ़ गई।
"मयंक औऱ राजीव दोनों बच्चियों कों कोई भि दिक्कत नहि होनी चाहिए"। इतना कहकर केँ विष्णु नें अपने ड्राइवर कों इशारा किया औऱ ड्राइवर नें वाहन निकली इसकेबाद वो उसमें बैठकर केँ रवाना हौ गय़ा साम कों मिलने कां बातकर
"ओए राज्जो पिताजी तौ ऐसे हि कहरहे हें जैसे हम् इसघऱ केँ नौकर हैं"। मयंक नें बड़ा सां मुंह बनाते हुएकहा
राजीव -"मुझेलग रहा हैं बेटा वही बनना पड़ेगा जब तक येदो महारानी हमारे संग हैं"
वही साक्षी औऱ इफ्तिका जैसे हि अंदर गई तोँ उन्हें एक् 5० सें 55 वर्ष केँ बीच कि औरत नें प्यार सें अंदर बुलाया औऱ उनकारूम दिखाते हुए जौ भि चीज चाहिए उसको मांगने कां कहकर नीचेचली गई चूंकि हवेली दो मंजिला थि तोँ इफ्तिका औऱ साक्षी ऊपर वाली मंजिल पर्र एक् कमरे मे दोबिस्तर ऊपर वाली मंजिल पऱ एक् रूम दिया गय़ा।
"येघऱ कितना बड़ा हैं नाँ इफ्तिका"। साक्षी जब सें इस हवेली मे आई थि वो इसकी रौनक औऱ बनावट कों देखकर बेहदखुश थि औऱ जौ रूम इन्हें दिया गय़ा थां वो भि खास थां।
"बिल्कुल ठीक कां साक्षी वाकई मे इस हवेली कां कोई जवाब नहि बाहर् सें जितनी हसीन हैं अंदर सें उतनी अच्छी"। इफ्तिका नें भि साक्षी कि बात मे सहमति जताई।
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"तौ क्याँ सोचा तूने पहाड़गढ़ कब जाने वाला हैं औऱ उसकेलिए क्याँ प्लान बनाया तूने क्योंकि इतनी आसानी सें तोँ ताऊ तुम्हारी तरफ जाने नहि देंगे"। राजीव नें मयंक केँ संग हवेली मे अंदरआते हुएकहा।
मयंक -"प्लेन तौ सोच लिया मैंने बहोत हि सीधा औऱ सटीक हैं तुँ साक्षी औऱ इफ्तिका कों घूमाएगा औऱ मे जाऊंगा पहाड़गढ़ उसे मंदिर कां पता लगाने औऱ वो क्याँ घटना थि जिसकी वजह सें दादाजी औऱ बापू कों अलग होना पड़ा वो जान नें औऱ जाने क्यूं मेरेमन मे अंदर सें येलगरहा हैं कि कुछ नां कुछ सुराग तोँ मिलेगा"
"न्यायाधीश घटिया औऱ सड़ाहुआ प्लान हैं तेराजब जब तूँ अकेले कुछ करने जाता हैं नाँ सालेकुछ नां कुछगलत करकेआता हैं अगर मे नां हूं नां संग तेरे तौ तूँ इंसान कों मारदे याँ स्वयं मरजाए क्योंकि बीच कां मार्ग तौ तुम्हारी तरफआता नहि हैं तौ कुछ भि हौ जाए वहां अकेले तौ नहि जाने दूंगा तुम को"। राजीव नें बैंक केँ प्लान कों साफतौर पऱ खारिज करतेहुए कहा।
"अबये अपना देहात हैं यहां भि अगर तूँ मेरेलिए डररहा हैं तोँ याँ तौ तूँ चूति याँ हैं याँ मे"। मयंक नें हंसते हुएकहा।
"तुम्हारी तरफ अभि शक हैं तुँ हि हैं भइया चूतिया".
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"बालवीर तुँ भि अब वापसआजा क्योंकि तेरा यहां होना जरूरी हैं औऱ आखिर तुझेही बदल भि तौ लेना हैं"। दादाजी नें बालवीर कों सलाह देतेहुए कहा।
बलवीर -"मेरा वहांबचा हि क्याँ हैं दादाजी किसलिए आऊं मे वहां"
"अपने दुश्मन कि बर्बादी देखने औऱ मुझे नहि लगता इससे बड़ीकोई वजह तुम्हारी तरफ यहांआने केँ लिए चाहिए चाहे तौ तूँ मेरेपास रह सकता हैं नाँ किसी कों पता चलेगा तूँ यही देहात मे हैं औऱ जोँ तुँ चाहता हैं वही होगा".
बलवीर -"सोचता हूं मे इसबात पर्र दादाजी"
"मे विष्णु केँ आसपास अपने व्यक्ति भि लगादिए हें औऱ अब तुम् मयंक भि यही हैं आप् हमेंदेर नहि करनी चाहिए बहोत हुआये खेल-खेल असलीरूप दिखाने कां टाइम आँ गय़ा हैं अब मुझसे बर्दाश्त नहि होता जैसे विष्णु औऱ उस मयंक कां नाम सुनता हूं तौ मेरे कलेजे मे आगलग जाती हैं"
बलवीर -"मे जानता हूं दादाजी मेरा भि हालकुछ अलग तौ नहि पऱ अब हम् जौ भि करेंगे उसमें हारने कि गुंजाइश नहि हैं क्योंकि यहां सें हम् अगरकुछ भि गलतकदम उठाते हें तोँ खेल पूरा उल्टा होँ सकता हैं औऱ शिकार शिकारी बनकर हमारा हि शिकार कर सकता हैं"
"ठीककहा तूने"
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"तुम्हें पता हैं रीत भइया देहात वापस आँ गए हें औऱ हमसे मिलने भि जल्द आएंगे मगर मे इसबार साफकह दिया उनसे कि अगरइस बार मे पिताजी केँ पास नहि लें गए नाँ तौ मुझसे बुराकोई नहि होगाकोई कितना बर्दाश्त करें कितनी बारकह चुकी हूं भैया सें अकेले क्यूं रहूं मे अच्छा लगता हैं क्याँ"। मयंक नें देहात पहुंचते हि जानवी सें बात कि थि औऱ एक्-दो दिन मे आने कां वादा भि किया थां जोँ वो यकीनन पूरा करने वाला थां।
रीत नें जैसे हि जानवी कि बात सुनी तोँ उसे मयंक केँ वो बोल सुनाई देनेलगे औऱ जोँ मयंक नें उसेउसे रातकहा थां उन शब्दों केँ संग-संग मयंक कां वो रूप भि यादआने लगाजब उसने जानवी केँ मम्मी-बाप कों धोखे सें घऱ सें बाहर् निकाला थां औऱ नोटों कि कार केँ बदले जानवी कि खुशियां औऱ उसका परिवार उससेछीन लिया थां।
रीत कां जन्म भि उसी देहात मे हुआ थां जहां सें मयंक औऱ जानवी ताल्लुक रखते हें रीत केँ माँ-बाप औऱ जानवी केँ माँ-बाप शुरुआत सें हि पड़ोसी रहे थें पऱ जबरीत कि उम्र 11 साल थि तब एक् हादसे मे जौ कि उसके हि परिवार वालों केँ बीच लड़ाई कां नतीजा थां उसके चाचा नें एक् जमीन केँ टुकड़े केँ लिएरीत केँ माँ-बाप कों जिंदा जला डाला थां इसकेबाद रीत कों भि करने कि कोशिश कि गई आखिर वो अपने माँ-बाप केँ बादउस जमीन कि मालकिन थि मगर जानवी केँ पापा नें ऐसा नहि होने दिया औऱ उसकोबचा लिया औऱ अग्नि केँ सामने उसको अपनी धर्म पुत्री केँ रूप मे अपना लिया मतलब जानवी केँ माँ-बाप रीत केँ धर्म माँ-बाप थें। पर्र जैसा कि पहले भि बताया गय़ा हैं ये क्षेत्र शुरुआत सें हि दंगों कां औऱ लूटपाट सें ग्रसित रहा हैं औऱ ऐसा हि एक् हादसा घटितहुआ जिसमें जानवी केँ माँ-बाप कि आंखें छीनली औऱ संग हि जानवी कां बड़ा भइया औऱ उनका इकलौता बेटा भि उनसेअलग हौ गय़ा औऱ उसे हादसे कों अंजाम देने वालेरीत केँ चाचा हि थें।
यही कारण थां कि रीत नें ठान लिया थां कि वो जानवी केँ माँ-बाप केँ लिए अपना जिंदगी औऱ उसकाहर एक् लम्हा झोंक देगी औऱ ऐसा हि उसने किया भि थां वो हर लम्हा जानवी केँ लिए सजधजकर खड़ी रहती थि औऱ पढ़ाई सें लेकरहर चीज मे उसका उत्साह कभीकाम नहि होने देती थि आहिस्ता सभीचीज ठीक होनेलगी गरीबी मे भि जानवी औऱ उसके माँ-बाप केँ संग वो सुखी रहनेलगी जानवी केँ माँ-बाप नें भि कभीउसे मे ये महसूस नहि होने दिया कि वो उनकीइस हालत कि जिम्मेदार हैं बल्कि उन्होंने उसे अपनी बेटी जितना हि प्रेम दिया पर्र तभी मयंक नामक तूफान नें आकर उनके जिंदगी कों उजाड़ फेंका फिरभी जोँ असली गुनहगार थां वो बालवीर थां पर्र इस बर्बादी मे अंतिम हाथ मयंक कां हि थां जिसको वो चाहकर भि नहि भूल सकती थि।
औऱ इसीलिए उसने एक् प्लेन सोचा जौ कि यकीनन हि उसके गुस्से कां नतीजा थां औऱ उसे पऱ उसने अस्पताल सें हि अमल करना शुरुआत कर दियाजब जानवी अस्पताल मे भर्ती थि उसने अच्छे सें सोच लिया थां कि वो मयंक केँ दिल मे अपनेलिए प्रेम उपजाकर हि रहेगी औऱ ऐसा करने मे वो सफल भि रहीजब तक मयंक इंदौर नाँ आँ गय़ा तब तक उसनेउसे अपनेजाल मे फंसा लिया इसकेबाद मयंक इंदौर चला गय़ा औऱ रीत औऱ जानवी कों मयंक नें दूसरे शहर मे भिजवा दिया पर्र उसे मयंक सें इतनी जल्द कि उम्मीद नहि थि इसीलिए हड़बड़ी मे उस गलती हौ गई औऱ उसनेसाफ तौर पर्र मयंक सें इनकार कर दिया वो चाहती थि कि वो मयंक कों इतना कड़ा दर्ददे केँ वो स्वयं अपनीजान लेँ लें औऱ उसेदिन केँ बाद सें हि वो इसचीज पर्र सोरही थि औऱ कुछहद तक उसनेसोच भि लिया थां उसेआगे क्याँ करना हैं।
Super duper hit update chote. mayank gaon chala gyaa, reet k mann mai kya h??? aur maynk k khilaaf kya plan banaya h usne . yeh bi janna chahunga. Awesome update and superb writing
खलिश - Desi sex story – New Episode
Update no -: 49
too हम kha the ha.vishnu ne apni gairmojoudgi में hue mayank के karnaamo kaa pta lagwaya लेकिन उसके हाथ कुछ nahii laga पर usne yogesh से saaf saaf khe दिया thaa कुछ bi hu gaon walo के saath कोई batameezi nahii honi chaiye whi Iftika, sakshi, Rajeev aur Mayank apne gaon wapas aa chuke the ghoomne के liye jiske बाद mayank ne deciede किया woh pahadgad jayega aur rajeev sakshi aur iftika ko aaspas की cheezien ghoomayega rajeev ne virod किया पर mayank ne usko mana लिया।
AB AAGE.
rath kaa समय thaa haveli में iss time sab dining table पर mojuood the sakshi rhe rhe krr mayank ko taad leti thi jiska mayank ko anumaan thaa woh bus jald से jald khana khatam karke wha से uthna chahta thaa पर majboor thaa.
vishnu : "too konsi konsi जगह ghoomne ja rhe haen ap लोग? "
Rajeev : "sab जगह tau ji joo bi यहाँ famous h "
vishnu : "kisi bi चीज़ की jarurat hu muze batana theek h aur mayank aur rajeev khane के बाद मेरे kamre में आना jara बात karni h tm logo से "
"ji papa".mayank ne vishnu की बात पर haami bhaari jiske bhaad vishnu हाथ dhokar table से uth गया aur apne kamre में chala गया mayank ne rajeev ko aankho में ishara किया जैसे khe rah hu क्या हुआ jis पर rajeev के monh से एक dam nikal गया."muze क्या pta bhay"
rajeev की बात too poori hogayi पर iftika aur sakshi अब mayank के saath rajeev ko ghoor rhe the.
"lagta h ap dono ne कुछ किया h aur iss wajah से uncle ne ap dono ko bulaya h.waise किया क्या h ap dono ne?".iftika ne mje lete hue kha
"aur shakal too dekho inki lagta h जैसे bhoot ne bula लिया h.hahahaha itna darte hu papa से??".sakshi ne bi iftika के saath mje lete hue kha
"papa से kon nahii darta aur में yakeen से khe skta hun की bhooot bi apne baaap से darte honge ".mayank के khene kaa andazz aesa thaa की sabki hasi nikal gai
khana kha krr mayank aur rajeev dono ko kamre में milne kaa bol krr vishnu के kamre की t5araf hu liyte.क्या lagta h rajjo क्या hone wala h.bhay jitna pyar karte haiutna maarte bi h tau muze bi apne saare bure karam yaad aa rhe h naa jaane क्या poochne wale haen.
"aajao"|.जैसे hi rajeev ne darwaja khat khataya too andar से awaaz aayi jiske बाद dono andar gaye
"क्या हुआ tm dono ko aesa kyoon lag rah h जैसे abi yuddh ladke aaye hu ghabra kyoon rhe hu meine too bus इसलिए bulaya h की tumhe कुछ rupee dedu कल ghoomne nahii jaana उसके liye waise indore में क्या क्या kaaand kiye tumne कुछ h joo muze nahii ptaa ???
"nahii papa aesa कुछ nahii h aur waise bi aako sab कुछ pta hotha h ".जब mayank ko pta chala कुछ बात nahii h too woh sambhal chuka thaa jiske बाद usne yeh jhote haste huie kha.
"पर iss baar h कुछ joo muze nahii pta beta ".vishnu ne jis drishti के saath yeh बात khi thi mayank ko laga जैसे kisi ne उसकी naino से hi aatma trak jhyaank लिया hu
jiske बाद vishnu ne rupee diye aur savdhaani की hidayat di aur dono hi fast kadmop के saath us kamre की tarf chl diye jidar sakshi aur iftika beithi hoyi thi.
कुछ deir बात karke sab sono के liye chale gaye kyunki कल बहुत कुछ hone wala thaa mayank so rah thaa तब hi use apne हाथ पर कुछ mehsus हुआ usne aankhein kholi too देखा कोई उसके pas beitha हुआ thaa phele too woh ghabra गया पर khud ko sambhalte hue उसके हाथ ko pakad लिया aur एक baar फिर hath पर whi ehsas हाथ पर geelapan mehsus हुआ aur iss baar use samajhte deir na lagi की yeh aanshu h jiski एक booond उसके hath पर giri.
usne bistar से uthkar phele kamre में roshanee की aur us shaksh की tarf ghooma too saamne sakshi ko khada paya joo gardan jhukaye khadi thi aur aankhoon से aanshu farsh पर neeche gir rhe the.
Theek h fir abi ek likha huwa h halanki roman fonts main rthym bna dega reader phirse connect krr paayenge kahani iss liye post krr deta hun
खलिश - Desi sex story – New Episode
अध्याय क्रमांक :- 50
मयंक नें जब साक्षी सें पूछा तौ साक्षी नें एक् बार आंखों मे आंसू केँ संग उसको देखा पर्र कुछ नहि कहा, साक्षी केँ चेहरे कों देखकर मयंक सें नहि रहा याँ उसने उसकोगले लगा लिया जैसे उसने साक्षी केँ मन कों पढ़ लिया हौ साक्षी कों बेहद खुशी हुईँ औऱ उसने भि अपने जिस्म कों ढीला छोड़ दिया मयंक कि बाहों मे.
जब मयंक कों लगाअब साक्षी ठीक हैं तब उसने एक् बारफिन प्रश्न धोराया जिस पऱ साक्षी नें एक् हि सांस मे बोल दिया.
"मे नहि जानती मयंक मे तुमको चाहती हूं याँ तुम्हारे बिना नहि रह सकती मुझे तुम् चाये हि चाये मे नहि जानती इसका क्याँ अंजाम हैं क्याँ सिला हैं जब वफ़ा कि हैं तौ मरतेदम तक बेवफ़ा नहि होना चाहिए चाहिए मे जानती हूं अब तुम् खोजोगे कि तुम् किसी औऱ सें प्रेम करते होँ याँ इसमें गलत भि कुछ नहि पऱ मेरा प्रेम करना भि गलत नहि यह भि तुम् अच्छे सें जानते हौ याँ मे मात्र तुमसे अपने उससे कां प्रेम मांगरही हूं उसके अलावा कुछ नहि.मेरेलिए इतना भि नहि कर सकते "
" मुझे तुमने अभि तक जानां हि कहां हैं जौ सामने हेउसे देखकर मुझेजज मतकरो मेरे बारे मे जानकर शायद तुम् भि मुझसे नफरतकर बैठो औऱ मे हरगिज नहि चाहता औऱ तुम्हें ऐसा क्यूं लगता हैं कि मैंने तुम्हें एक् साथी होने केँ नाते तुम्हारे हिस्से कां प्रेम नहि दिया "
" तुम्हारी दूसरी तरफ मेरेलिए मायने नहि रखती क्योंकि मैंने वोँ देखी हि नहि याँ अगर देखी भि होती तौ भि मेरेलिए वोँ मायने नहि रखती क्योंकि मे जानती हूं कि तुम् क्याँ हौ औऱ रहीबात दोस्ती केँ लिए प्रेम कि तौ तुम् अच्छे सें जानते हौ कि मे उससे राजी नहि होने वाली मे बस तुम्हें पाना चाहती हूं औऱ पाकर हि रहूँगी हर लड़की कों अपना पेहला प्रेम हमेशा याद रहता हैं ओर उसकेसंग बिताई हुईँ रात भि ओर मे तुमसे बसवही रात चाहती हूं मे तुम्हे अपने अंदरसमा लेना चाहती हूं अपने अंदर मेहसूस करना चाहती हूं.क्याँ मेरेलिए इतना करोगे मयंक !!!!"
मयंक - " साक्षी तुम् जानती भि होँ तुम् क्याँ कहरही होँ लगता हैं तुम् जैसेहोश मे हि नहि हौ समझोबात कों साक्षी यहकोई खेल तोँ नहि क्यूं अपनी जीवन बर्बाद करना चाहती होँ ऐसा करके "
"हां तौ इसमें हर्ज हि क्याँ हैं सभी किसी नाँ किसीतरह बर्बाद हि कररहे हें नां जीवन औऱ मे बसउसे जीना चाहती हूं "। ये कहतेहुए साक्षी कि आंखें साफसाफ बयांकर रही थि कि जौ वो कहरही हैं वो उसकेलिए कुछ भि करेगी।
मयंक-"अगर सभीकुछ मिल जाएगा जीवन मे तौ चाह किसकी रहेगी ?"
"बिल्कुल ठीककहा तुमने सभीकुछ मिलना इस छोटी जीवन मे शायद मुमकिन नहि औऱ यहीवजह हैं कि मैंने तुम्हें अपनासभी कुछमान लिया औऱ उसी सें अपनी छोटी जीवन गुजार लुंगी ".आज शायद मयंक साक्षी केँ शब्दों केँ सामने अपने आप् कों बेबसमान रहा थां औऱ तौ औऱ उसे अपने प्रेम पऱ शक होनेलगा थां कि एक् तरफ साक्षी हैं जोँ अपने प्रेम कों पाने केँ लिए क्याँ कुछ नहि कररही वही एक् तरफ वोँ स्वयं जौ एक् बाररीत केँ मनाकर देने पऱ उससेबात करने कि हिम्मत तक नहि जुटापा रहा.
"ठीक हैं पऱ अभि तुम् जाकरसो हम् कलबात करेंगे"। मयंक केँ चेहरे कों देखकर साक्षी नें आगे ८कुछ नहि कहा औऱ चुपचाप चली गई.
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" 196, 197, 198। 199 औऱ यह 200। शाब्बास मेरेशेर चल थोडा आरामकर फिन एक् सें शुरुआत करना ".एक् हट्टे-कट्टे व्यक्ति नें मयंक केँ कंधे कों थपथपाया औऱ दूसरे लडके कि तरफचला गय़ा.आज बहुत दिनों बाद मयंक अपने देहात केँ अखाड़े मे आया थां औऱ फिलहाल पुस-अप लगारहा थां रात सें वो पूरी कोशिश कररहा थां अपने आप् कों साधारण दिखाने कि पऱ उसका चेहरा शायद राजी नहि थां।
इसीवजह सें वो सुभह 5 बजेइस वक़्त अखाड़े मे मौजूद थां। दोसेट औऱ मारकुछ बारी रस्से पऱ छडाजब बदन गर्महुआ तौ आजजोर अजमाइश करने कां ख्याल आया पहले तोँ अंदर सें आवाज़ आई कि अभि कुछदिन पहले हि छोटठीक हुईं हें औऱ शायदआज यह करना मेंहगा पड सकता हैं पर्र फिन सोचा जोँ होगादेख लेंगे इसी केँ संग अखाड़े कि माटी कों प्रणाम करसिर सें लगाया औऱ अपने जितने हि वजन केँ एक् पहलवान कों बुलाया जोँ शायद अभि अपने साथी सें मयंक कां हि जिक्र करतेहुए कहरहा थां कि मयंकअब तक तौ पहलवानी भूल चुका होगा।
दोनों नें हाथ मिलाया माटी जिस्म पऱ लगाते हुए दोनों एक् दूसरे कि तरफबढे जहां मयंक बिना किसी जल्दबाजी केँ उसकेतरफ जारहा थां वहीं सामने सें उस लड़के नें फुर्ती सें मयंक कि कमर कों निशाना बनाते हुए झप्पटा मारा औऱ मयंक कों भि शायद इसका एहसास हुआ औऱ जैसे हि मयंक कि कमर पकड़ने केँ लिएउस लड़के कि गर्दन झुकी मयंक नें अपना सीधाहाथ उसकी गर्दन पर्र दिया जिससे वो मुंह केँ बल माटी पर्र गिरा औऱ इसका फायदा उठाते हुए मयंक नें उसकोकमर सें उठा लिया.
इस वक्तइस भिड़ंत कों देखरहे सभी लोगों केँ मुंह आश्चर्य सें खुलेहुए थें जिसका कारण थां मयंक नें अपने जितने जिस्म केँ व्यक्ति कों किसी 20 किलो केँ बोरे कि तरह कंधे तक उठारखा थां औऱ सबकी आंखें इसबात कि गवाह थां कि उठाते समय मयंक केँ चेहरे पऱ शायद हि मुश्किल भरेभाव आएहों औऱ इसके जोँ हुआ उसकोदेख उस लड़के सें ज़्यादा बाकीसभी कों दर्द महसूस हुआ क्योंकि मयंक नें हवा मे हि उस लड़के कों घुमाकर पीठ केँ बल माटी पऱ दे मारा नां चाहते हुए भि वो लडका दर्द सें करहारहा थां।
मयंक भि तुंरत एहसास होते हि उसकीतरफ बढा औऱ उसको संभाला अबमन हि मन पछतारहा थां कि उसनेयह क्याँ कर दिया।
स्वयं कों कोसने कां एक् मोका औऱ मिला वोँ यहां स्वयं कों ठीक करनेआया थां पऱ औऱ भि ज़्यादा उदास होकर जाने वाला थां उस लड़के केँ मुंह सें खून तक आँ गय़ा थां जिसके बादउसे अस्पताल लेँ गये।
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"सुभह सुभहकहा चला गय़ा थां ?"। राजीव जोँ अभि घऱ केँ बहार हि बैठा थां उसने मयंक सें पूछा। मयंक नें अपनी स्प्लेंडर रखी औऱ बोला
"अखाड़ा"। मयंक कां एक् शब्द कां जबाब हि बहुत थां राजीव कों समझने केँ लिए कि मयंक अभि फिलहाल बात करने केँ मूड मे नहि हैं मयंक नें घऱ केँ बहार हि बने कुएं पर्र नहाने कि सोची औऱ उसीतरफ चल दिया अमूमन तोँ वो अखाड़े सें नहाकर हि घऱआता थां पर्र आज जोँ भि हुआ उसकेबाद वो उसी हालत मे घऱ आँ गय़ा थां पूरे जिस्म पऱ मिट्टी लगी हुई थि उसनेकुए सें पानी निकाला औऱ वहींबने चबूतरे पऱ नहाने लगा पर्र शायद वो यहभूल गय़ा थां कि अभि चर मे साक्षी औऱ इफ्तिका मौजूद हैं जोँ इत्तेफाक सें उसी वक़्त बहारआई फिरभी मयंक नें केवल टी-शर्ट हि उतारी थि पजामा उसकेबदन पऱ मौजूद थां वो बस जल्द सें जल्द जैसे पानी केँ संपर्क मे आनां चाहता थां।
राजीव तौ बसगरम चाय कां मग औऱ अखबार लिए वहांबनी एक् छतरी मे बैठा थां जिसमें चार कुर्सी औऱ मौजूद थि साक्षी औऱ इफ्तिका सीधे वहीं पहुंची अब तक उनका ध्यान मयंक पर्र नहि गय़ा थां पऱ कुर्सी जहां मौजूद थि उसकेठीक सामने हि कुआ थां औऱ जैसे हि पानी गिरने कि आवाज़ दोनों केँ कानों मे गई तौ उन्हें मयंक कि पीठ दिखाई पडी औऱ दोनों कि नजर वहींजम सि गई मयंक कि पीठ बिल्कुल v सेप मे थि औऱ सारी मांसपेशियों बिल्कुल सांचे मे तरासी हुईँ जैसे हि मयंक केँ हाथ चलते तौ उसकीपीठ पर्र मौजूद मांसपेशियों भि क्रमबद्ध तरीके सें हिलने लगती।
साक्षी फिरभी मयंक कों इस हालत मे देख चुकी थि तौ वो अधिक अचंभित नहि थि पऱ इफ्तिका पहलीबार किसी लड़के कों इस हालत मे देखरही थि वो मयंक कों देख हि रही थि औऱ तब हि मयंक अपनेहाथ सें बालों कों पीछे करताहुआ घूमा तौ उसका चोडा सीना औऱ तरासे हुएछः बिस्कुट नुमा ऐब्स दोनों लड़कियां केँ सामने थें इफ्तिका कि आंखें औऱ मयंक कि आंखें मिलीं औऱ अगले हि समय मयंक सबसे बहारबने बाथरूम कि तरफबढ चुका थां औऱ यहसभी देख राजीव जोरजोर सें हसरहा थां जिसको देखकर इफ्तिका औऱ साक्षी नें उसे गुस्से सें घूरा.
"ऐसे क्यूं देखरही हौ मुझे तुम् दोनों। मे नहि दिखाने वाला अपनी बोडी "। राजीव नें आग मे घी डालते हुएकहा।
"आप् बहोत गंदे हें राजीव ".औऱ यह कहतेहुए इफ्तिका नें मुंहफेर लिया वहीं साक्षी नें तौ एक् तमाचा राजीव केँ कंधे पऱ जड भि दिया थां।
राजीव -"मैंने क्याँ किया?"
साक्षी -"यही तौ दिक्कत हैं कुछ किया नहि कम सें कमबता तौ देतेयूं हि घबरा गय़ा बेचारा हाहाह "
कुछदेर बाद मयंक अचछे सें नहाकर औऱ अपनादूध कां बडा ग्लास लिए इनकीतरफ हि आँ आया तबतक साक्षी औऱ इफ्तिका भि गरमचाय पी चुके थें।
"तौ आज कहां जारहे हें घूमने तुम् लोग"। मयंक नें एक् कुर्सी पऱ बैठते हुए पूछा।
"ककनमठ कि तरफ.पर्र तुँ यहबता आयातब क्याँ कांड करकेआया थां"। राजीव नें जबाब दिया।
"कुछ नहि "। मयंक नें एक् घूंट पीतेहुए कहा।
आज इफ्तिका मयंक कों कुछअलग तरीके सें देखरही थि जहां वो उसकी बाॅडी लेंग्वेज पर्र कायल थि वहींआज पहली पर्र उसके द्वारा अपनेबदन पऱ कि गई मेहनत कों देखरही थि ग्लास कों पकड़ने सिर्फ सें उसके फोर-आर्म कि मांसपेशियों सचेत हौ जाती थि टी-शर्ट जौ अभि मयंक पहने थां वोँ उसके बाजुओं पऱ ऐसेफसी थि मानो वो फट जाएगी।
"अरेबता नाँ "। राजीव नें जोर देतेहुए कहा।
"बाद मे बता दुंगा नां दोस्त ".
"ऐसी क्याँ बात हैं जौ हमारे सामने नहि बता सकते आप् "। इफ्तिका नें मयंक सें प्रश्न किया
राजीव -"हा भइयाबता "
मयंक-"ऐसा कुछ नहि हैं बसआज अखाड़े मे लग गई"
राजीव -"क्याँ तुड़वा करआया हैं मेरा भइया। दिखा तौ जरा "
"अबेभोस। मेरे नहि लगी जोँ मेरेसंग लडरहा थां उसकेलग गई "। पहले तोँ एक् दम सें मयंक केँ मुंह सें गाली निकल हि गई थि पर्र एहसास होते हि उसने स्वयं कों रोक लिया औऱ अपनीबात कही।
"हां तोँ सांड सें इंसान लडेगा तौ क्याँ होगा भइया। ज़्यादा लग गई क्याँ उसके".पहली बात पर्र दोनों साक्षी औऱ इफ्तिका कि हसी निकल गई पऱ मयंक कों घूरते देख राजीव नें बातबदल दि।
"होस्पिटल मे हैं "। मयंक कि बात पूरी होते हि सभी उसको घूरने लगे मानो सामने कोईभूत होँ।
मयंक नें दूध ख़त्म किया औऱ अपने कों ऐसा घूरता पाकरकहा."दोस्त पता नहि क्याँ हुआ कंट्रोल हि नहि कर पाया स्वयं कों "
राजीव -"तूँ साले मुझसे दूररहा करपता नहि कब तूँ अपना कंट्रोल खोदे औऱ मे अपाहिज हौ जाऊं"
"ठीक हैं भइया तोँ फिन मे चला".यह कहतेहुए मयंकउठ खडाहुआ।
"राजीव तौ मजाककर रहा हैं तुम् सच मे खड़े होँ गये मयंक "। साक्षी नें जैसे हि मयंक कों जाने केँ लिएखडा होते देखा तोँ पूछा।
मयंक -"जानता हूं इसको मे तौ एक् जरूरी काम सें जारहा हूं औऱ राजीव तुम् दोनों कों लें जाएगा। "
मयंक एक् बारघऱ केँ भीतर गय़ा औऱ अपनाफोन कुछ पैसेलिए औऱ राजीव कों विष्णु कों नाँ बताने कां कहतेहुए पहाडगढ कि तरफ निकल गय़ा।
क्रमशः अगले अध्याय मे.
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