खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story - Real Story Continue Part 1
दोस्तों
आप् लोग अच्छे होंगे मै भि अच्छी हु|
सभी सें पहेले मै आप् सभी कां “आभार”मान रहीहु कि आप् सब नें मेरी स्टोरी “तीनो कि संमति सें.” कों बहुत सराहा औऱ आप् सब नें मेरी किस्सा कों प्यार दिया औऱ उस प्यार सें मेरी किस्सा कों पढ़ा|मगर उतना हि दुःखहुआ कि एक् इगो कि वजह सें वोँ कथा अधूरी रह गई औऱ उस किस्सा कां सस्पेंस पाठको कों पढ़ना नहि मिला कि कौन थें वोँ “तीनो”!!!!खेर अभि वोँ किस्सा यहा पर्र फ्रिज कर दि गई हैं मगर अन्य भाषा मे चालु हैं| (पता नहि यह केसे नियम हैं, एक् भाषा मे फ्रिज कर दि गई हैं औऱ दूसरी भाषाओं मे चालू रखने कि मंजूरी दि गई हैं)|
खेर अभि वोँ स्टोरी तोँ मैंने लिखना छोड़ दिया हैं, लकिन आप् लोगो केँ लिए एक् औऱ कथा लेकेआई हु शायद आप् कों मनपसंद आये औऱ जोँ प्रेम मेरीउस कथा कों मिला वैसा हि प्रेम इसकथा कों भि मिलेऐसी उम्मीद केँ संगलिख रहीहु|
यह किस्सा ऐसीकथा हैं कि जिस मे रोमांच, प्यार, थ्रिल, औऱ ऑफकोर्स सेक्स हैं.केसे एक् ससुरजी औऱ बहु अपने दुश्मन सें लड़ते हैं औऱ अपनी जीवन मे सें केसे केसे कांटे हटाते हैं.
वैसेइस किस्सा मे सेक्स होगामगर उतनी मात्रा मे शायद नां हौ जितनी केँ पाठको कों उम्मीद होँ.फिन भि कोशिश करुँगी.
आपके कोमेंट पे आधारित हु.
धन्यवाद दोस्तों
जल्द हि एपसोड दूंगी.
dosto,
You all will be good and I am also good.
First of all I am “thankful” too all of you that you all appreciated my kahani “Tino की Sammati से…” and you all loved my kahani and read it with that love। lekin I am equally saddened that due too an ego that kahani remained incomplete and the readers did not get too read the suspense of that kahani about who were those “three”!!!! Well, right now that kahani has been frozen here lekin iss running in other languages। (I don’t know what kind of rule iss this, it has been frozen in one language and permission has been given too continue in other languages).
Well, right now I have stopped writing that kahani, lekin I have brought another kahani for you all, maybe you will like it and I am writing with the hope that this kahani will also get the same love as my that kahani got। This kahani iss such that it has adventure, love, thrill, and of course sex। How a father-in-law and daughter-in-law fight their enemy and how they remove the thorns from their life.
Although there will be sex in this kahani, lekin it may not be as much as the readers expect.still I will try.
I am based on your comments.
Thank you dosto (copied fr net)
I will update soon.
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
आज राजपुरा गाव केँ राजा यशवीरसिंग कां महल दुल्हन कि तरह सज़ाहुआ हैं औऱ क्यू नां सजता, आज राजासाहब कां बेटा विश्वजीत विवाह करने केँ बाद अपनी नयी-नवेली दुल्हन कों लेकरआया थां| राजासाहब केँ घऱ मे अरसेबाद खुशियों नें कदमरखा थां वरना पिछले दो सालों मे तोँ उन्हे बसदुख हि देखने कों मिले थें|
मेहमानों कि भीड़ हवेली केँ बड़े सें बाग मे दूल्हा-दुल्हन कों बधाईदे रही थि औऱ जश्न कां लुत्फ़ उठारही थि| राजासाहब नें मेहमानों कि खातिरदारी मे कोईकसर भि नहीं छोड़ी थि|
जब तक राजासाहब मेहमानों कि खातिरदारी करते हें, आइएतब तक हम् उनके बारे मे कुछजान लेते हें|
राजासाहब अपने पिता कि एकलौती औलाद थें| उनके पिता पूरे राजपुरा केँ मलिक थें| उन्होने राजासाहब कों विदेश मे तालीम दिलवाई पऱ हमेशा सें एक् बात उन्होने यशवीरसिंग केँ दिमाग़ मे डाली कि चाहेकुछ भि हौ जाए रहना उन्हे राजपुरा मे अपनी जनता केँ बीच मे हि रहना होगा| पर्र फिन रजवाड़ों कां चलन ख़तम हौ गय़ा तौ बाप-बेटे नें बड़ी होशियारी सें अपने आप् कों बिज़्नेस्मेन मे तब्दील कर लिया|जहा कई राजाओं कि हालतआम आदमियो सें भि बदतर हौ गई वही राजासाहब औऱ उनके पिता नें अपनी पोज़िशन औऱ भि मज़बूत करली|
गाव मे गन्ने कि खेती होती थि तोँ राजासाहब नें शुगरमिल लगा दि औऱ गाव वालों कों उसमे रोज़गार दे दिया| उनकी ज़मीन पे बड़े जंगल थें तौ एक् पेपरमिल भि स्टार्ट कर दि, वहा भि गाववाले हि काम करते थें| खेतों मे तोँ वोँ पहले सें हि लगेहुए थें| इसतरह पिता कि मौत केँ बाद राजा यशवीर राजपुरा केँ बेताज बादशाह बनगये| लोकल MLA औऱ MP भि उनकेआगे हाथ जोड़े खड़े रहते थें| वक्त केँ संग-संग राजासाहब लगभग 5 मिल्स केँ मलिकबन गये|
राजासाहब कां शादी एक् बड़ी हि धर्म परायण औरत सरिता देवी सें हुआ| राजासाहब व्यभिचारी तोँ नहीं थें फिन भि आम मर्दों कि तरह सेक्स मे काफ़ी दिलचस्पी रखते थें, पऱ पत्नि केँ लिए चुदाई बसवंश बढ़ने कां ज़रिया थां औऱ कुछ नहीं| इसलिये राजासाहब अपनेशौक शहर मे पूरे करते थें| पर्र उन्होने अपनी पत्नि कों कभी इसकीभनक भि नहीं लगने दि नां हि उन शहरी वेश्याओ सें कोई बहोत गहरा संबंध बनाया| वोँ तौ बस उनकेकुछ शौक पूरे करती थि जौ उनकी पत्नि नहीं करती थि| अगर रानीसाहिबा राजासाहब कि इच्छायें पूरी करती तौ राजासाहब कभी किसी औऱ महिला केँ पास नहीं जाते| राजासाहेब अपनेगाव केँ किसी महिला कों कभी भि गंदी दृष्टि सें नहीं देखते थें| यहसभी उनकी विशेषता याँ विशिष्टता थि|
पऱ इस अच्छे इंसान कों पहला बड़ा झटका उपरवाले नें आज सें दोसाल पहले दिया| राजासाहब कां बड़ा बेटा यूधवीर एक् गाड़ी आक्सिडेंट मे मारा गय़ा| लोग कहते हें कि वोँ ऐक्सिडेंट नहीं बलकी मर्डर थां- किसी नें यूधवीर कि गाड़ी केँ संग छेड़खानी कि थि| खैरइस बारे मे हम् स्टोरी मे आगेबात करेंगे| बेटे कि मौत कां सदमा रानी सरितादेवी सह नहींपाई औऱ उसकानाम लें-लेँ कर ईश्वर कों प्यारी होँ गई| येसभी एक् साल केँ भीतरदो घटनाए घट गई| उस टाइम विश्वजीत विदेश सें पढ़ाई करके लौटा थां औऱ आते हि उसे पिता कां सहारा बनना पड़ा|
ऐसा नहीं हैं कि राजपुरा मे राजासाहब कां एकछत्र राज्य हैं| जब्बार सिंगनाम कां एक् ठाकुर बहोत दिनों सें उनसे उलझता आँ रहा हैं| लोग तौ कहते हैं कि यूधवीर कि मौत मे उसी कां हाथ थां| जब्बार राजासाहब केँ दबाव कों ख़तमकर स्वयं राजपुरा कां बेताज बादशाह बनना चाहता हैं| पऱ राजासाहब नें अभि तक उसकेमन कि होने नहीं दि हैं|
आप् जैसी अप्सराओं कि कृपा सें हि मे कामदेव हूं ऐसे हि कृपादृष्टि बनाए रखें मेरे वजूद कों बचाए रखें
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
चलिएअब वापस चलते हें महल कों।
अरेयह क्याँ! जश्न तोँ ख़तम हौ गयीँ,। सारे मेहमान भि चलेगये। नौकर-नौकरानी भि महल केँ कम्पाउंड मे हि बने अपनेरूम मे चलेगये हें। रात केँ खाने केँ बादमहल केँ अंदर सिर्फ राजासाहब औऱ उनके परिवार एवंखास मेहमानों कों हि रहने कां हुक्म हैं।
पर्र मे आपकोमहल केँ अंदर लेँ चलती हूं, सीधे विश्वजीत केँ कमरे मे क्यू कि अब मेनका सें मिलने कां समय आँ गय़ा हैं।
मेनका-विश्वजीत कि दुल्हन, बला कि सुंदर। सफ़ेद रंग, खड़ीनाक, बड़ीबड़ी काली आँखें, हाइट 5'5"। मस्त फिगर कि मल्लिका। बड़ेमगर बिल्कुल टाइट स्तनों औऱ गांड कि मालकिन। मेनका एक् बहुत कॉन्फिडेंट लड़की हैं जौ कि अपनेमन कि बातसाफ साफ़मगर शालीनता सें कहने मे बिल्कुल नहीं हिचकति।
मेनका सुहाग सेज पे सजी-धजी बैठी अपने पति कां इंतेज़ार कररही हैं। यह लीजिए वोँ भि आँ गय़ा।
मेनका औऱ विश्वजीत विवाह केँ पहलेकई बार एक् दूसरे सें मिले थें सो अजनबी तोँ नहीं थें पर्र अभि इतने करीबी भि नहींहुए थें। विश्वा नें 4-5 बार उसके गुलाबी मुलायम होठों कों चूमा थां। याँ यह कहीऐ कि उसका होठो कां रसपान किया थां। उसके नशीले कसे शरीर कों अपनी बाहों मे भरा थां पर्र इससे ज्यादा मेनका कुछ करने हि नहीं देती थि। पऱ आज तोँ वोँ सोचकर आया थां कि उसे पूरीतरह सें अपनीबना केँ रहेगा। औऱ क्यूं नां हौ?
विश्वा बिस्तर पे मेनका केँ पासआकर बैठ गय़ा।
"विवाह मुबारक होँ, दुल्हन", कह केँ उसने अपनी मेनका कां गालचूम लिया।
"मुबारकबाद देने कां यहकौन सां तरीका हैं?", मेनका बनावटी नाराज़गी सें बोलि।
"अरे, मेरीजान। यह तोँ शुरूआत हैं, पूरी मुबारबादी देने मे तोँ हम् रात निकाल देंगे"। कह केँ उसने मेनका कों बाहों मे भर लिया औऱ उसे बेतहाशा चूमने लगा। गालों पे, माथे पे, उसकी लंबी सुरहिदार गर्दन पे, उसके होठों कों चूमते हुए वोँ उन पऱ अपनीजीभ फिराने लगा औऱ उसे उसके मुँह मे डालने कि कोशिश करनेलगा।
मेनका इतनी जल्द इतने तेज़ हमले सें चौंक औऱ घबरा गई औऱ अपने कों उससेअलग करने कि कोशिश करनेलगी।
"क्याँ हुआजान? अब कैसीशरम! चलोअब औऱ मत तड़पाओ", विश्वा उसके होठों कों आज़ाद मगर बाहो कि गिरफ्त औऱ मज़बूत करतेहुए बोला।
"इतनी जल्द क्याँ हैं? मैकही भाग जाने वाली नहि हु"।
"मे अब औऱ इंतेज़ार नहींकर सकता, मेनका प्लीज़!" कहके वोँ फिन अपनी पत्नि कों चूमने लगा। पऱ इसबार जंगली कि तरह नहीं बल्कि आहिस्ता थोडा धीरे-धीरे धीरे-धीरे।
थोड़ी हि देर मे मेनका नें अपनेहोठ खोलदिए औऱ विश्वा नें अपनीजीभ उसके मुँह मे दाखिल करा दि औऱ उसे पलंग पे लिटा दिया। वोँ मेनका कां रसपान करनेलगा। उसकी बाहें अभि भि मेनका कों कसेहुए थि औऱ उसकीजीभ मेनका कि जीभ केँ संगखेल रही थि। उसका सीना मेनका केँ स्तनों कों दबारहा थां औऱ दाईं टाँग उसकी टाँगों केँ उपर थि। हलाकि जैसेहर औरत अपनेरस कों अपने पार्टनर सें रसपान कराने मे खुश होती हैं वैसे हि मेनका भि चाहती थि कि उसकारस कां पान होँ।
थोड़ी देरऐसे हि चूमने केँ बाद वोँ अपनेहाथ आगे लेँ आया औऱ ब्लाउस केँ उपर सें हि अपनी पत्नि कि बोबले दबाने लगा, फिन उसने अपनेहोठ उसके क्लीवेज पऱ रखदिए, मेनका कि साँसें भारी हौ गयीँ,, धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ भि गर्म हौ रही थि। औऱ वोँ अपनीइस रात कों यादगार रात बनाना चाहती थि जोँ हर स्त्री चाहती हैं।
पर्र विश्वजीत बहोत बेसबरा थां औऱ उसने जल्द सें मेनका कां ब्लाउस खोल दिया औऱ फिनरेड ब्रा मे क़ैद उसकी जूसी बोबले पर्र टूट पड़ा। मेनका कि नहीं नहि कां उसकेउपर कोईअसर नहीं थां।
मेनका केँ लिएयह सभी बहुत जल्द थां। वोँ एक् कॉनवेंट मे पढ़ी लड़की थि। सेक्स केँ बारे मे सभी जानती थि पर्र कुछ लज्जा औऱ कुछ अपने खानदान कि मर्यादा कां ख़याल करतेहुए उसने अभि तक किसी सें चुदवाया नहीं थां। विदेश मे कॉलेज मे कभी-कभार किसी लड़के केँ संग किसिंग कि थि औऱ अपने स्तनों कों दब्वाया थां बस। विश्वा कों भि उसने विवाह सें पहेले किसिंग सें आगे नहीं बढ़ने दिया थां। औऱ वोँ जानती थि कि सुहागरात मे कोई जल्द नहि होतीसभी कुछ प्यार सें एक्-दूसरे मे खो जानां होता हैं। अपने सपनो कों प्यार कि डोरी सें एक् होने कि मंशा होती हैं औऱ वोँ दोनों साइड सें होती हैं। जैसेसभी दुल्हन अपने आप् कों मन सें सोचती हैं कि पतिदेव ऐसा करेगा वैसा करेगा, प्यार सें एक् एक् करके कपडे उतारेगा उसके यौवन कि प्रशंशा करतेहुए स्वयं भि नंगा होगा औऱ मुझे भि करेगा औऱ फिन हम् एक् हौ जायेंगे। मगरयह बात तोँ हैं कि कोई भि औरत अपनी सुहागरात मे बेसब्री औऱ हमला जैसा नहि सोचती।
सो उसके हमले सें वोँ थोडा अनसेटल्ड हौ गई,। इसी कां फायदा उठाकर विश्वजीत नें उसके साडी औऱ पेटीकोट कों भि उसके सुंदर जिस्म सें अलगकर दिया। अब वोँ मात्र रेड ब्रा औऱ पेंटी मे थि। टांगे कसकर भीची हुई, हाथों सें अपने सीने कों ढकति हुईँ। लज्जा सें उसका चेहरा ओर भि अधिक गुलाबी होँ गय़ा थां औऱ आँखें बंद थि। मेनका सचमुच ईश्वर इन्द्र केँ दरबार कि अप्सरा मेनका जैसी हि लगरही थि।
विश्वा नें एक् नज़रभर करउसे देखा औऱ अपने कपड़े निकाल कर पूरा नंगा होँ गय़ा। उसका 4 एक्/2 इंच कां लन्ड प्रिकम सें गीला थां। उसनेउसी जल्दबाज़ी सें मेनका केँ ब्रा कों नोच फेका औऱ उसका मुँह उसकी स्तनों सें चिपक गय़ा। वोँ उसके हल्के गुलाबी रंग केँ निपल्स कों कभी चूसता तोँ कभी अपनी उंगलियों सें मसलता। मेनका उसकीइन हरकतों सें औऱ ज़्यादा गर्म होँ रही थि। फिन विश्वा उसकी चूचियो कों छोड़ उसकेपेट कों चूमता हुआ उसकी गहरी नाभि तक पहुचा।
जब उसनेजीभ उसकी नाभि मे फिराई तौ वोँ सीत्कार कर उठी, "आँ.आँ.आहह-आहह."।
फिन वोँ औऱ नीचे पहुचा, पेंटी केँ उपर सें उसकी बुर पऱ एक् किस ठोकी तोँ मेनका लज्जा मारे कराह उठती हुई उसकासर पकड़कर अपने सें अलग करनेलगी पऱ वोँ कहा मानने वाला थां। उसनेउसे फिन लिटाया औऱ एक् झटके केँ संग उसकी पेंटी खीचकर फेक दि। मेनका कि बुर पे झांट हार्ट शेप मे कटी हुइ थि। हालाकि वोँ शेप उसकी बुर केँ ऊपर केँ हिस्से मे बनवाई थि, यह उसकी सहेलियों केँ कहने पऱ उसने किया थां। फनलव कि पेशकश।
"वाउ! मेरीजान", विश्वा केँ मुँह सें निकला, "वेरी ब्यूटिफुल पऱ प्लीज़ तुम् इन बालों कों साफ़कर लेना। मुझेसाफ़ औऱ बिना बालों कि बुर पसन्द हैं। "
यहबात सुनकर मेनका कि लज्जा औऱ बढ़ गयीँ,। एक् तोँ वोँ पहलीबार किसी केँ सामने ऐसे नंगी हुईँ थि उपर सें ऐसी बाते!खेर ऐसा भि नहि थां कि वोँ इस शब्दों कों जानती नहि थि याँ बोलती नहि थि। मगर पति केँ मुह सें औऱ ज़्यादा तोँ लज्जा।
विश्वा नें एक् उंगली उसकी बुर मे डाल दि औऱ दूसरे हाथ सें उसके बूब्स मसलने लगा। मेनका पागल होँ गई,। तभी वोँ उंगली हटाकर उसकी टांगो केँ बीचआया औऱ उसकी बुर मे जीभ फिराने लगा। अब तौ मेनका बिल्कुल हि बेक़ाबू हौ गई,। उसेअब बहोत मजा आँ रहा थां। वोँ चाहती थि कि विश्वजीत ऐसे हि देर तक उसकी बुर चाटता रहे, पऱ उसीसमय विश्वा नें अपनामुह उसकी बुर सें हटा लिया।
मेनका नें आँखें खोली तोँ देखा कि वोँ अपना लन्ड उसकी बुर पर्र रखरहा थां।
वोँ मना करने केँ लिए नहीं बोलते हुए उसकेपेट पर्र हाथ रखनेलगी पऱ बेसब्र विश्वा नें एक् झटके मे उसकी कुँवारी नाज़ुक बुर मे अपनाआधा लन्ड घुसेड दिया। यूँ तोँ मेनका कि बुर गीली थि पऱ फिन भि पहली चुदाई केँ दर्द सें उसकीचीख निकल गयीँ,, "उउउइईईईई.माअ। अनन्न्न्न्न। न्न्न्न.नां.शियीयियी"। औऱ अब वोँ कुवारी लड़की नहि रही थि बल्कि एक् स्त्री बन गई थि क्यूं कि विश्वा केँ लन्ड नें उसकी बुर कि झिल्ली तोड़ दि थि। बुर सें थोडा खून भि बाहर् आया औऱ उसके लन्ड कों खून सें भर दिया।
विश्वा उसके दर्द सें बेपरवाह धक्के मारता रहा औऱ थोड़ी देर मे उसके अंदरझड़ गय़ा। फिन वोँ उसके सीने पे गिरकर हाँफने लगा।
मेनका नें ऐसी सुहागरात कि कल्पना नहीं कि थि, उसने सोचा थां कि विश्वा पहले उससे प्यारी-प्यारी बातें करेगा। फिनजब वोँ थोडा कम्फर्टेबल होँ जाएतब बड़े प्रेम सें उसकेसंग चुदाई करेगा। पऱ विश्वा कों तोँ पता नहींकिस बात कि जल्द थि।
"अरे। तुम्हारी हुस्न कां रस पीने केँ चक्कर मे तोँ मे यहभूल हि गय़ा!", विश्वा अपने ज़मीन पऱ पड़े कुर्ते कों उठाकर उसकीजेब सें कुछ निकालते हुए बोला तौ मेनका नें एक् चादर खीचकर अपने नंगेपन कों ढकतेहुए उसकीतरफ देखा।
"यह लो अपना वेडिंग तोहफा। ", कहतेहुए उसने एक् छोटा सां बॉक्स मेनका कि तरफ बढ़ा दिया।
मेनका नें उसे खोला तौ अंदर एक् बहोत सुंदर औऱ कीमती डाइमंड ब्रेस्लेट थां। ऐसा लगता थां जैसे किसी नें मेनका सें हि मनपसंद करवा केँ खरीदा हौ। वोँ बहोत खुश होँ गई, औऱ अपना दर्दभूल गई,। उसेलगा कि अभि बेसब्री मे विश्वजीत नें ऐसा प्रेम किया।
"वाह! इट'ससो ब्यूटिफुल। आपको मेरी मनपसंद कि केसेपता चली?", उसने ब्रेस्लेट अपनेहाथ मे डालते हुए पूछा। प्रस्तुतकर्ता फनलव।
"अरे भइया, मुझे तोँ तुमहरे उपहार कां ख़याल भि नहीं थां", विश्वा नें उसकीबगल मे लेटते हुए जवाब दिया। "वोँ तोँ मेरे कज़िन्स विवाह केँ एक् दिन पहलेमुझ सें पूछने लगे कि मैने उनकी भाभी केँ लिए क्याँ उपहार लिया तोँ मैनेकह दिया कि कुछ नहीं। दोस्त, मुझेलगा कि अब उपहार क्याँ देना। पर्र पापा नें मेरीबात सुनली। वोँ उसीसमय शहरगये ओरयहला कर मुझे दिया। कहा कि बहू कों अपनीतरफ सें तोहफा करना", इतनाकह कर वोँ सोनेलगा।
जारी हैं बने रहिये.आपके कोमेंट कि इंतज़ार हैं.
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story - Aage kya hua? Next part padhiye
अच्छी शुरुआत हैं कथा मे सैक्स केँ संग थ्रिल, सस्पेंस औऱ फैमिली ड्रामा कि संभावना हैं अगले अध्याय कां इन्तज़ार रहेगा
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