दास्तान - वक्त के फ़ैसले Complete Story - Vakt Ke Faisle - Real Kahani Part 1
दास्तान - समय केँ फ़ैसले (भाग-१)
लेखक:राज अग्रवाल
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ज़ूबी नें अपने चेहरे पऱ आतेहुए अपने बालों कों हटाया औऱ कंप्यूटर मे रिपोर्ट रेडी करने मे जुट गई,। ज़ूबी कों चारसाल हौ गये थें “रविएंड देव” कंपनी केँ संगकाम करतेहुए। “रविएंड देव”देश कि मानी हुइ लॉ फ़र्म थि। ज़ूबी कों यहजॉब अपनी मेहनत औऱ लगन सें हासिल हुईँ थि। काम कां बोझ इतना अधिक थां कि कभी-कभी तोँ उसे१८ घंटे तक काम करना पड़ता थां। वोँ पूरी मेहनत सें कामकर रही थि औऱ उसका लक्ष्य अपनी मेहनत सें फ़र्म कां पार्टनर बनने कां थां। उसकी गहरी नीली आँखें कंप्यूटर स्क्रीन पऱ गड़ी हुइ थि कि उसकी सेक्रेटरी नें उसे आवाज़ दि, “ज़ूबी रविसर अपने केबिन मे तुमसे मिलना चाहेंगे। ”
ज़ूबी नें मुड़कर सेक्रेटरी कि तरफ़ देखा, “क्याँ तुम्हें पता हैं वोँ किस विषय मे मिलना चाहते हें?”
“नहि मुझे सिर्फ़ इतनाकहा कि मे तुम्हें ढूँढकर उनसे मिलने कों कहदूँ” सेक्रेटरी नें जवाब दिया।
“धन्यवाद रजनी, मे अभि उनसेमिल करआती हूं। मेरे जाने केँ बाद मेरे केबिन कों बंदकर देना, ” इतना कहकर वोँ कमरे मे लगे शीशे केँ सामने अपना मेक-अप ठीक करनेलगी। प्रोफेशन मे होने केँ बावजूद ज़ूबी अपने पहनावे कां औऱ दिखावे कां पूरा ख्याल रखती थि। उसने अपने पतले औऱ हसीन होठों कों खोलकर उन पर्र हल्के गुलाबी रंग कि लिपस्टिक लगायी। ज़ूबी नें फिन अपने सिल्क केँ टॉप कों दुरुस्त किया जोँ उसकी भारी औऱ गोल चूचियों कों ढकेहुए थां। २८साल कि उम्र मे भि उसका जिस्म एक् कॉलेज मे पढ़ती लड़की कि तरह थां।
उसने अपनीहाई हील कि सैंडल पहनी जौ उसने अपने पैरों कों आराम देने केँ लिएकुछ देर पहलेखोल दि थि। वोँ रवि केँ केबिन कि औऱ जातेहुए सोचरही थि, “पता नहि रविसिर मुझसे क्यूं मिलना चाहते हें, इसके पहलेऐसा कभी नहि हुआ हैं। ”
दफ़्तर केँ हाल सें गुजरते हुएउसे पता थां कि सब मर्दउसे हि घुररहे हें। सबकी निगाहें उसके चूत्तड़ कि गोलाइयों पे गड़ी रहती थि। वोँ हमेशा चाहती थि कि उसकी लंबाई पाँचफुट पाँचइंच सें कुछ अधिक हौ जाये। इसी लिए वोँ हाईहील कि सैंडल पहना करती थि।
ज़ूबी केबिन केँ दरवाजे पऱ दस्तक देतेहुए केबिन मे पहुँची। रवि नें उसे बैठने केँ लियेकहा।
“ज़ूबी! मिस्टर राज केँ केस मे कुछ प्रॉब्लम क्रियेट हौ गई, हैं” रवि नें कहा।
ज़ूबी रवि कि बात सुनकर चौंक पड़ी। मिस्टर राज हज़ारों करोड़ रुपैयों कि एक् मीडिया कंपनी केँ मालिक थें। मिस्टर राज कि कंपनी रवि कि कंपनी केँ बड़े ग्राहकों मे सें थि बल्कि उनकी सिफारिश सें भि कंपनी कों बहुत बिज़नेस मिलता थां। ज़ूबी पिछले एक् साल सें मिस्टर राज कि कंपनी केँ टेलीविज़न औऱ रेडियो स्टेशन केँ लायसेंस कों सरकार सें रीन्यू (नवीकरण) केँ काम मे लगी हुईँ थि।
“ज़ूबी मुझे अभि-अभि खबर मिली हैं कि सरकार शायद मिस्टर राज कि रीन्यूअल ऐप्लीकेशन कों रद्दकर दे। कारण उनकी ऐप्लीकेशन मे बहोत सि बतों कां खुलासा करनारह गय़ा हैं” रवि नें घूरते हुए उसकी तरफ़ देखा।
ज़ूबी घबरा गई,। उसने पूरेसाल भर मेहनत करकेसभी ऐप्लीकेशंस सजधजकर कि थि। उसेयाद नहि आँ रहा थां कि उससे गलती कहां हुई हैं पऱ रवि केँ गुस्से सें भरे चेहरे सें पताचल रहा थां कि गलती कहीं न् कहीं तोँ हौ चुकी हैं।
रवि नें उसे थोडा नम्र स्वर मे कहा, “देखो ज़ूबी मुझेपता हैं कि तुमने बहुत मेहनत सें यह ऐप्लीकेशंस रेडी कि थि। मे हमेशा सें तुम्हारी मेहनत औऱ लगन कां कायलरहा हूं। पर्र कभीकभी गलतियाँ घऱचलकर आँ जाती हें। ”
ज़ूबी जानती थि कि यहबात कहां जाकर ख़त्म होगी, “सर अगरइस गलती कां दंड किसी कों मिलना हैं तौ वोँ मुझे मिलना चाहिए, क्योंकि सही ऐप्लीकेशंस सजधजकर करने कि जिम्मेदारी मेरी थि औऱ मे हि अपनाकाम अच्छी तरह नहि कर पायी। ”
ज़ूबी नें हिम्मत सें यहकह तौ दिया थां, पर्र वोँ जानती थि कि इससे उसका भविष्य बर्बाद होँ जायेगा। जोँ ख्वाब उसनेइस कंपनी केँ संग रहतेहुए देखे थें वोँ सभीचूर होँ जायेंगे औऱ शायदउसे किसी दूसरी कंपनी मे भि जॉब नहि मिलेगी।
तभीरवि नें उसपर दूसरी बिजली गिरायी।
“ज़ूबी जैसे तुम्हें पता हैं कि ऐप्लीकेशन पर्र तुम्हारे औऱ मिस्टर राज केँ दस्तखत हें, डिपार्टमेंट वालेसोच रहे हें कि जानबूझ कर ऐप्लीकेशन मे कुछ बातें छिपायी गयीँ, हें। औऱ इसवजह सें तुम् दोनों कों हिरासत मे भि लियाजा सकता हैं औऱ मुकदमा भि चल सकता हैं। ”
ज़ूबी यहसुन करदहल गयीँ,। उसकी आँखों मे दहशत केँ भाव आँ गये। उसकी बदनामी, गिरफतारी, मुकदमा सभीसोच कर वोँ डर गयीँ,। कोईबात खुलासा करनारह गयीँ, वोँ फ्रॉड केसे हौ सकता हैं। “सर आप् तौ जानते हें कि मैंने यहसभी जानबूझ कर नहि किया, गलती हि सें रह गय़ा होगा। ” वोँ रोनेलगी, “सर आप् हि बतायें कि मे क्याँ करूँ?”
“मे जानता हूं कि तुम् एक् मेहनती औऱ इमानदार स्त्री हौ, पऱ पहले हमें मिस्टर राज कि चिंता करनी चाहिए। अगर सरकार नें हमारी फ़र्म औऱ मिस्टर राज कों जिम्मेदार ठहरा दिया तौ हम् सभी बर्बाद होँ जायेंगे। ” रवि नें अपनीबात जारीरखी, “एक् कामकरो। तुम् अपने केबिन मे जाकर शांति सें बैठजाओ, औऱ इसबात कां जिक्र किसी सें भि नहि करना। यह बहोत हि नाजुक मामला हैं। अगर एक् शब्द भि लीक होँ गय़ा तोँ हम् बर्बाद होँ जायेंगे। ”
ज़ूबी नें सहमती मे अपनी गर्दन हिला दि।
“अपने केबिन मे जाओ औऱ मेरे मोबाइल कां इंतजार करो। मे मिस्टर राज सें कॉन्टेक्ट करता हूं औऱ उन्हें सारीबात समझाता हूं। फिन सोचते हें कि हमें क्याँ करना चाहिए” रवि नें कहा।
ज़ूबी वापस अपने केबिन मे पहुँची। उसका दिमगकाम नहि कररहा थां कि वोँ क्याँ करे। उसे पता नहि थां कि अगर वोँ गिरफ़्तार होँ गई, तौ उसका मंगेतर आगे उससे नाता रखेगा कि नहि। वोँ अपनी कुर्सी पऱ बैठकर बाहर् देखने लगी। उसे महसूस हुआ कि उसकाबदन डर केँ मारे काँपरहा थां।
लगभग एक् घंटे केँ लंबे इंतजार केँ बादरवि कां मोबाइल आया, “ज़ूबी राज एक् कॉनफ्रेंस केँ सिलसिले मे होटल अंबेसडर केँ सुइट नंबर १५०४ मे हैं। उसने तुम्हें जल्दी ऐप्लीकेशन कि कॉपी लेकर बुलाया हैं। तुम् जल्दी चलीजाओ। मे थोड़ी देर मे आता हूं। ”
“ठीक हैं सर! मे अभि चली जाती हूं। ”
मोबाइल पऱ थोड़ी देर खामोशी छायीरही।
“ज़ूबी तुम्हें पता हैं नां कि यह मीटिंग हमारी फ़र्म केँ लिये कितनी महत्वपूर्ण हैं। ” थोड़ी औऱ खामोशी केँ बाद, “औऱ तुम्हारे लिए भि। ”
ज़ूबी नें रवि कों बताया कि उसेपता हैं।
काँपती हुइ ज़ूबी नें फाइल उठाई औऱ होटल अंबेसडर कि ओरचल दि।
लगभग डेढ़ घंटे कि बहस केँ बाद भि ज़ूबी मिस्टर राज कों यह नहि समझा पायी कि उससे गलती केसे औऱ कहां हुइ। यहबात राज कों झल्लाय जारही थि औऱ आखिर वोँ गुस्से मे बरस पड़ा। “क्याँ तुम् मुझेयह बताने कि कोशिश कररही हौ कि तुम्हें यह नहि पता कि क्याँ औऱ कौनसी बातें ऐप्लीकेशन मे छूट गई, हें। मे हि बेवकूफ़ थां जौ इतने महत्वपूर्ण काम पऱ “रविएंड देव” पऱ भरोसा किया। क्याँ तुम् कोई जवाबदे सकती होँ?” राज गुस्से मे जोर सें बोला।
ज़ूबी कि आँखों मे आँसू आँ गये। आज तक राज नें उसे बहोत इज्जत औऱ अच्छे बर्ताव सें ट्रीट किया थां। ४५साल कां राज एक् कसरती जिस्म कां मर्द थां। वोँ गुस्से मे अपनेहाथ कां मुक्का बनाकर दूसरी हथेली पे माररहा थां जैसे कि एक् हि वार मे ज़ूबी कों मार गिरायेगा।
राज ज़ूबी कि ओरदेख कर अपने आप् सें कहरहा थां, “क्याँ शरीर हैं इसका। भारी-भारी चूचियाँ औऱ इतनी पतलीकमर। पता नहि पलंग मे कैसी होगी। ”जब ज़ूबी कागज़ों सें भरी टेबल पऱ झुकी तौ राज कों उसकी लंबी टाँगें औऱ बड़े-बड़े कुल्हों कि झलक मिली। “थोड़ी देर मे हि इसकीगोल गाँड ऐसे मारूँगा कि यहयाद रखेगी। ”
“ज़ूबी! मैंने अपने क्रिमिनल लॉयर सें बातकर ली हैं, उसका कहना हैं कि अगर मैंने तुम् पे औऱ तुम्हारी फ़र्म पे भरोसा करके साइन किये हें तौ मुझ पर्र कोई इल्ज़ाम नहि आता हैं। अब तुम् फँस चुकी हौ। मे नहि। मुझे टेंशन हैं कि मेरा करोड़ों कां नुकसान हौ जायेगा। ” राज नें उसे घूरते हुएकहा।
“मे समझ सकती हूं सर” ज़ूबी अपनी गर्दन झुकाते हुए बोलीं।
“क्याँ समझती होँ तुम्, कि तुम्हारी जैसी नासमझ वकिल कि वजह सें मे अपना करोड़ों कां नुकसान होने दूँगा। याद रखना तुम् कि अगर मेरा एक् पैसे कां भि नुकसान हुआ तौ मे तुम्हारी पूरीलॉ फ़र्म बंद करवा दूँगा। ”
“सर मे कुछ भि करने कों सजधजकर हूं। ” ज़ूबी गिड़गिड़ाते हुए बोलि, “सरकुछ भि जोँ आप् कहें। ”
राज थोड़ी देर तक कुछ सोचता रहा, “ठीक हैं मे अपने क्रिमिनल लॉयर सें बात करता हूं कि वोँ तुम्हें केसेबचा सकता हैं। जब तक मे बात करता हूं, तुम् एक् कामकरो। अपने कपड़े उतारकर नंगी होँ जाओ औऱ मेरे लन्ड कों चूसो। सिर्फ़ इसीतरह तुम् मेरी सहायता कर सकती होँ। ”
ज़ूबी पत्थर कि बुतबन कर खड़ी थि। राज मोबाइल पऱ अपने वकिल सें बातकर रहा थां, “हाँ वोँ तौ फँसेगी हि पऱ उसकी फ़र्म कों भि बहुत नुकसान होगा, क्याँ कोई तरीका नहि हैं कि इन सबसे छुटकारा मिलसके?”
“थोडा उसकी उम्र औऱ उसके भविष्य कां ध्यान दो, बेचारी मर जायेगी। उसकी फ़र्म केँ बारे मे सोचता हूं कि मुझे क्याँ करना चाहिए। हाँ वोँ इस वक़्त मेरेपास हि खड़ी हैं। ”
“क्याँ तुम् यह कहना चाहते हौ कि अब उसका औऱ उसकी फ़र्म कां भविष्य मेरेहाथ मे हैं.? तौ ठीक हैं मे सोचुँगा कि इस लड़की कों इस समस्या सें बचाना चाहिए कि नहि। ”
राज ज़ूबी कों घुरेजा रहा थां, जैसे वोँ उसकेआगे बढ़ने कां इंतजार कररहा होँ। राज होटल कि कुर्सी पे अपनी दोनों टाँगों कों फैलाये बैठा थां।
अपने आपको भविष्य केँ सहारे छोड़ते हुए ज़ूबी नें अपनी ज़िंदगी कि राह मे अपना पहलाकदम बढ़ा दिया। उसने गहरी साँस लेतेहुए अपनेहाथ अपनेटॉप केँ ऊपर केँ बटन पर्र रखे औऱ बटन खोलने लगी। थोड़ी हि देर मे उसकाटॉप खुल गय़ा औऱ उसनेउसे अपने कंधों सें निकाल करउसे उतार दिया। फिन उसने अपनी स्कर्ट केँ हुकखोल करउसे नीचे गिरा दिया। अपनीहाई हील्स कि सैंडल निकाले बगैर उसने स्कर्ट कों उतारा औऱ सैंडलों केँ अलावा सिर्फ़ ब्रा औऱ पैंटी मे राज केँ सामने खड़ी थि।
ज़ूबी राज कों देखरही थि कि उसकीओर सें कोई प्रतिक्रिया होँ पऱ वोँ वैसे हि अपनी कुर्सी पऱ बैठारहा।
ज़ूबी सोचरही थि कि आगे वोँ क्याँ करे कि इतने मे राज नें मोबाइल केँ माउथपीस पर्र हाथरख करकहा, “अब तुम् किसका इंतजार कररही होँ। जल्द सें अपनी पैंटी औऱ ब्रा उतार केँ मेरेपास आओ। ”
ज़ूबी नें अपनी ब्रा केँ हुकखोल कर अपनी ब्रा उतार दि। उसकीगोल -गोल चूचियाँ बाहर् निकल पड़ी। फिन उसने अपनी पैंटी नीचेकर केँ उतार दि। उसने देखा कि राज उसकी बुर कों ताड़रहा थां। उसने अपने मंगेतर केँ कहने पर्र कल हि अपनी बुर केँ बलसाफ किये थें। उसेशरम आँ रही थि कि आजकोई मर्द उसकी बुर कों इसतरह देखरहा हैं।
राज अभि भि मोबाइल पऱ बातकर रहा थां। वोँ अपनी कुर्सी सें उठा औऱ ज़ूबी कों देखकर अपनी पैंट कि ज़िप कि ओर इशारा किया। ज़ूबी उसकेपास आँ घुटनों कलबैठ गयीँ,। फिन उसने उसकी पैंट केँ बटन खोले औऱ उसके सुस्त पड़े लन्ड कों अपने हाथों मे लेँ लिया। फिन अपने होठों कों खोलकर अपनीजीभ सें उसके लन्ड केँ सुपाड़े कों चाटने लगी।
ज़ूबी नें आज सें पहले अपने मंगेतर केँ सिवाय किसी औऱ केँ लन्ड कों नहि चूसा थां। अपने मंगेतर कां भि सिर्फ़ एक् बारजब वोँ बहुतनशे मे हौ गय़ा थां औऱ उसे चूसने कि जिद कि थि। पर्र आज उसकेपास कोई चारा नहि थां। उसने अपना पूरा मुँहखोल करराज केँ लन्ड कों मुँह मे लें लिया औऱ चूसने लगी। उसकीजीभ कां स्पर्श पाते हि लौड़े मे जान आँ गयीँ, औऱ वोँ ज़ूबी केँ मुँह मे पूरातन गय़ा।
राज नें अपनी पैंट नीचे खिसका दि। ज़ूबी एक् हाथ सें उसके लन्ड कों पकड़े हुए थि औऱ अपने मुँह कों ऊपर नीचेकर रही थि जैसेकोई लॉलीपॉप चूसरही होँ। राजहाथ बढ़ाकर उसकी चूचियों केँ निप्पल कों अपने अंगूठे औऱ अँगुली मे लेँ कर भींचने लगा। उसके छूते हि निप्पल मे जान आँ गयीँ, औऱ वोँ खड़े होँ गये।
राज नें मोबाइल पर्र बात करना जारीरखा।
“ज़ूबी खाननाम हैं उसका। हाँ दोस्त तुम् जानते होँ उसे.वही जिसने लॉ परीक्षा मे स्टेट मे टॉप किया थां। हाँवही.। अरे वोँ यहीं हैं इस टाइम। मेरे लन्ड कों चूसरही हैं। तुम्हें क्याँ लगता हैं। मे मजाककर रहा हूं.? थोड़ी देर मे मे उसकी बुर चोदने वाला हूं। ”
राज कि बातें सुनकर ज़ूबी कां चेहरा लज्जा सें लाल होँ गय़ा। फिन भि वोँ जोरों सें उसके लन्ड कों चूसरही थि। वोँ जानती थि कि उसकेपास बस एक् यही उपाय हैं अपने आप् कों इस मुसीबत सें बचाने कां। उसने लन्ड चूसना जारीरखा।
राज नें मोबाइल नीचेरखा औऱ अपने दोनों हाथ ज़ूबी केँ सिर पऱ रखकर अपने लन्ड कों औऱ अंदर उसकेगले तक डाल दिया। उसकी बढ़ती हुईँ साँसों केँ देखकर ज़ूबी समझ गयीँ, कि उसका लन्ड अब पानी छोड़ने वाला हैं।
“हाँआँआँआँ चूऊऊसो ओहहहहह औऱ जोर सें चूसो”राज अपने लन्ड कों औऱ अंदर तक घुसेड़ कर बड़बड़ा रहा थां।
ज़ूबी एक् हाथ सें उसके लन्ड कि गोलियों कों सहलारही थि औऱ दूसरे हाथ सें उसके लन्ड कों पकड़े चूसरही थि। थोड़ी देर मे राज कां लन्ड अकड़ना शुरुआत होँ गय़ा। राज नें अपने दोनों हाथों कां दबाव ज़ूबी केँ सिर पर्र रखकर अपने लौड़े कों औऱ अंदरगले तक डाल दिया औऱ अपने वीर्य कि पिचकारी छोड़ दि।
ज़ूबी नाँ चाहते हुए भि उसके लन्ड सें निकला पूरा पानीगटक गयीँ,। राज अपने लन्ड कों उसके मुँह मे तब तक अंदर बाहर् करतारहा जब तक कि उसका लन्ड थोडा ढीला नहि पड़ गय़ा। ज़ूबी उसके लन्ड कों अपने मुँह सें निकालने कों डररही थि कि कहीं वोँ नाराज़ नाँ होँ जाये पर्र राज नें अपना लन्ड उसके मुँह सें निकाल लिया। उसके लन्ड केँ निकलते हि उसके पानी कि धार ज़ूबी केँ चेहरे सें होती हुइ उसकी छाती औऱ टाँगों पऱ चू पड़ी।
तभी मोबाइल कि घंटीबजी औऱ राज मोबाइल उठाबात करनेलगा। बात करतेहुए उसने ज़ूबी कों उसके कंधों सें पकड़कर खड़ाकर दिया। राज नें उसे घुमाकर इसतरह खड़ाकर दिया कि ज़ूबी कि पीठ उसकी तरफ़ थि।
मोबाइल पऱ बात करतेहुए राज पीछे सें अपनेहाथ उसकी छाती पर्र रखकर उसके मम्मे मसलरहा थां। ज़ूबी नें महसूस किया कि उसका लन्ड उसकी मोटी गाँड कि दरार पर्र रगड़खा रहा हैं। राज उसकेकान मे धीरे-धीरे सें बोला, “जाओ जाकर पलंग पऱ लेटजाओ, अब मे तुम्हें चोदूँगा। ”
जैसे हि ज़ूबी पलंग कि ओर बढ़ी, राज उसके जिस्म कों घुरेजा रहा थां। क्याँ पतलीकमर हैं औऱ क्याँ गोलगोल चूत्तड़। उसनेऐसे शरीरजिम मे कई देखे थें। उसकेभरे चूत्तड़ों कों देखकर राज केँ मुँह मे पानी आँ रहा थां, “आज मे इसकीगोल गाँड मार केँ रहुँगा” वोँ सोचरहा थां।
ज़ूबी जैसे हि बैड पर्र लगेकवर कों हटाकर उसमें घुसने लगी तौ राज बोला, “ज़ूबी तुम् बेड केँ ऊपर नंगी हि लेटीरहो। मे तुम्हारे नंगे शरीर कों देख्ना चाहता हूं औऱ अपने सैंडल मत उतारना। ”
राजउसे घुरेजा रहा थां। वोँ जानता थां कि ज़ूबी आजहर वोँ काम करेगी जोँ वोँ कहेगा। उसकी उभरी औऱ भरी हुईँ चूचियाँ फिन एक् बार उसके लन्ड मे जान फूँकरही थि।
पिछले आधे घंटे सें राज ज़ूबी केँ ऊपर लेटाहुआ अपने भारी लन्ड कों उसकी बुर मे अंदर बाहर् कररहा थां। ज़ूबी कि दोनों टाँगें राज कि कमर सें लिपटी हुईँ थि। राज अपने हाथों सें उसके दोनों चूत्तड़ों कों पकड़े हुए थां औऱ अपने लन्ड कों आधा बाहर् निकालते हुए पूरी ताकत सें उसकी बुर मे पेलरहा थां।
ज़ूबी केँ दोनों हाथराज कि पीठ पऱ थें औऱ राजजब पूरी ताकत सें धक्का लगाता तोँ ज़ूबी कों अपना जिस्म पिसता हुआ महसूस होता। वोँ दिवार पर्र लगे शीशे मे देखरही थि कि राज कां भारीबदन केसे उसके नाज़ुक शरीर कों रौंदरहा थां।
मन मे डर औऱ इस बे-इज्जती केँ बावजूद अब उसके जिस्म औऱ टाँगों नें विरोध करना छोड़ दिया थां। चुदाई इतनीदेर चलरही थि कि अबउसे भि मजा आँ रहा थां। वोँ भि अपने कुल्हे उछालकर उसकासंग देरही थि। उसेऐसा लगरहा थां कि राज कां लन्ड नहि बल्कि उसके मंगेतर कां लन्ड उसेचोद रहा हैं। जब भि राज कां लन्ड उसकी बुर कि जड़ पर्र ठोकर मारता तौ उसके मुँह सें सिस्करी निकलरही थि, “ओहहहहहहह आहहहहहहह”
आखिर मे राज कां बदन अकड़ने लगा औऱ उसने ज़ूबी कों जोर सें बाँहों मे भींचते हुए अपना लन्ड पूरा अंदरडाल कर अपना पानी छोड़ दिया। ज़ूबी नें भि सिस्करियाँ भरतेहुए उसकेसंग हि पानी छोड़ दिया।
राज थोड़ी देर उसके जिस्म पर्र लेटा अपनी साँसों कों काबू मे करतारहा औऱ फिनपलट करबैड पर्र लेट गय़ा। जैसे हि राज उसके जिस्म सें हटा, ज़ूबी खाट सें लड़खड़ाते हुएउठी औऱ अपने कपड़े लें कर बाथरूम मे घुस गयीँ,।
ज़ूबी अपने कपड़े पहनकर बाथरूम सें बाहर् आयी तौ देखा कि राज अभि भि बैड पऱ नंगा लेटा हैं औऱ वोँ टेलीविज़न कां रिमोट पकड़े चैनलबदल रहा हैं।
“देखोइसे?” राज नें कहा।
ज़ूबी कि नज़रें जैसे हि टेलीविज़न स्क्रीन पऱ पड़ी तौ उसने देखा कि वोँ उसकी औऱ राज कि चुदाई कि फ़िल्म थि। राज नें उसकेसंग चुदाई कां पूरा वीडियो टेपबना लिया थां।
“ज़ूबी” उसनेकहा, “आज सें मे “रविएंड देव” कंपनी कों अपने इशारों पऱ नचा सकता हूं औऱ संग हि आज सें तुम्हें हर वोँ काम करना हैं जोँ मे चाहुँगा। ”
ज़ूबी यहटेप देखकर घबरा गई, थि औऱ अपनी क़िस्मत कों कोसरही थि कि वोँ कहां तोँ एक् सफ़ल वकील बननेआयी थि औऱ अब हालात उसे एक् वेश्या बनारहे थें।
“तुम् अपना मोबाइल नंबर, घऱ कां पता औऱ फोन नंबरलिख करदेदो औऱ जब मे तुम्हें बुलाऊँ, तुम्हें आनां पड़ेगा” राज नें उसे घूरते हुएकहा।
ज़ूबी समझ गई, थि कि उसकेपास कोई चारा नहि थां, इसलिये उसने जल्द सें सभी लिखा औऱ करीब भागते हुए कमरे सें बाहर् चली गयीँ,।
राज केँ होठों पऱ एक् सफ़ल मुस्कान थि।
दूसरे दिन ज़ूबी अपने दफ़्तर पहुँच कर मिस्टर रवि सें मिली, “सर हालातों कों देखते हुए मिस्टर राज केँ संगकल कि मीटिंग अच्छी गयीँ,। मुझे लगता हैं कि समस्या कां कोई नां कोईहल निकल हि आयेगा। ”
जोँ कुछ भि उसके औऱ राज केँ बीचहुआ थां वोँ उसने नहि बताया औऱ नां हि टेप केँ बारे मे। यह भि नहि बताया कि राज कां मोबाइल सुभहआया थां औऱ उसनेकहा थां कि आज सें जब भि वोँ उससे मिले तोँ ब्रा औऱ पैंटी नाँ पहने।
“मेरी मिस्टर राज केँ संग थोड़ी देर मे मीटिंग होने वाली हैं। ज़ूबी तुम् यहीं दफ़्तर मे रहना। हौ सकता हैं मिस्टर राज कों तुम्हारी ज़रूरत पड़े”रवि नें उससेकहा।
ज़ूबी डरी औऱ सहमी हुईँ अपने केबिन मे पहुँची। उसेराज केँ रुतबे केँ बारे मे मालूम थां औऱ वोँ जानती थि कि अगर उसने उसकीबात नहि मानी तौ वोँ कुछ भि कर सकता थां।
अपने केबिन मे दाखिल होने सें पहले वोँ संग मे लगे बाथरूम मे गई, औऱ अपनी ब्रा औऱ पैंटी उतार दि। उसने दीवार पऱ लगे शीशे मे अपने आप् कों देखा तौ शर्मा गई,। उसके सिल्क केँ टॉप मे सें उसके मम्मे साफ़झलक रहे थें। उसके निप्पल साफ़टॉप मे सें बाहर् कों निकालते दिखायी पड़रहे थें।
ज़ूबी जल्द सें अपनी ब्रा औऱ पैंटी अपने हाथों मे लिए दौड़ती हुई अपने केबिन मे वापस आँ गयीँ,। केबिन मे आने केँ बाद उसने अपना बिज़नेस कोटपहन लिया जिससे उसकेटॉप मे सें छलकती चूचियों कों ढांपा जासके।
ज़ूबी अपनी कुर्सी पर्र बैठकर काम करने कि कोशिश कररही थि पऱ उसका सारा ध्यान मिस्टर राज औऱ मिस्टर रवि केँ बीचचल रही मीटिंग पऱ थां। थोड़ी देरबाद मिस्टर रवि कां मोबाइल आया, “ज़ूबी मिस्टर राज तुमसे अभि तुम्हारे केबिन मे मिलना चाहेंगे। ”
“ठीक हैं सर। उन्हें भेज दीजिए, मे इंतजार कररही हूं” ज़ूबी नें जवाब दिया।
ज़ूबी अपनी कुर्सी पे चिंतित बैठी थि। हज़ारों ख्याल उसके दिमाग़ मे घूमरहे थें। फिन भि वोँ पूरी कोशिश कररही थि कि वोँ चेहरे सें चिंतित नाँ दिखे। थोड़ी देर मे उसके केबिन केँ दरवाजे पर्र दस्तक हुई औऱ उसकी सेक्रेटरी मिस्टर राज केँ संग अंदरआयी। राज केँ पीछे एक् औऱ शख्स केबिन मे दाखिल हुआ जिसेदेख कर एक् बार केँ लिये ज़ूबी कों थोड़ी राहत मिली।
राज नें उस आदमी कों द्वार (दरवाज़ा) बंद करने केँ लियेकहा औऱ ज़ूबी सें उसका परिचय कराया। “ज़ूबी यह मिस्टर अमित मेरे साथी हें जोँ लायसेंस रीन्यूअल डिपार्टमेंट मे काम करते हें। इन्होंने हि हमारी ऐप्लीकेशन कि गल्तियों कों पकड़ा हैं। ” ज़ूबी नें एक् मुस्कान केँ संग उससेहाथ मिलाया।
मिस्टर अमित दिखने मे हि एक् सरकरी मुलाज़िम लगरहा थां। पुराने स्टाइल केँ कपड़े, बालों मे मनभरतेल औऱ नाक पर्र मोटे काँच कां चश्मा। पर्र अपनी पोज़िशन कि वजह सें थोडा कठोर स्वभाव कां लगरहा थां। ज़ूबी नें देखा कि उसकी पैंट जौ उसकेपेट केँ नीचेलटक रही थि, शायदतब खरीदी गयीँ, थि जब उसका साइज़ ३४ थां जौ कि आज करीब४० थां।
राज नें धीरे-धीरे सें ज़ूबी सें कहा, “ज़ूबी हम् जिस विषय पऱ बात करने वाले हें उसमें थोडा टाइमलग सकता हैं। ”
ज़ूबी नें अपनी सेक्रेटरी कों मोबाइल लगाया, “मेरेआने वालेहर मोबाइल कों रोक देना, मे मिस्टर राज औऱ मिस्टर अमित केँ संग एक् जरूरी मीटिंग मे हूं। ”
“ज़ूबी मिस्टर अमित चाहते हें कि हम् तीनों मिलकर इस समस्या कां हल निकाल लें। पर्र किसी कों मालूम नहि होना चाहिए कि हमनेसंग मे मुलाकात कि हैं। औऱ मैंने इन्हें यह भि बता दिया हैं कि सारी ऐप्लीकेशन तुमने हि रेडी कि हें। ” राज नें मीटिंग शुरुआत करतेहुए कहा।
लगभग एक् घंटे कि बहस केँ बाद ज़ूबी कों पताचला कि अगर लायसेंस रीन्यू नहि हुए तोँ राज कि कंपनी कों कितना घाटा हौ सकता हैं। मिस्टर अमितअगर नयी ऐप्लीकेशन सें पुरानी वालीबदल भि देते हें तोँ इन्हें अपने औऱ दोस्त कों मिलाना होगा। जैसे-जैसे वक़्त गुज़र रहा थां, राज केँ चेहरे पर्र झल्लाहट केँ भावआते जारहे थें।
“अमित ज़ूबी कों हमारी परिस्थिति केँ बारे मे अच्छी तरह मालूम हैं। उसेयह भि मालूम हैं कि गलती उससे हुइ हैं। वोँ अच्छी तरह जानती हैं कि मे इसकी कंपनी कों बर्बाद कर सकता हूं पर्र इन सबसे मेरा जौ घाटा होगा वोँ तौ पूरा नहि होगा नां” राज कां क्रोध साफ़ दिखायी देरहा थां।
“ज़ूबी इस कंपनी केँ बोर्ड पर्र हैं औऱ हमारी हरतरह सें मदद करने कों रेडी हैं। हैं नं ज़ूबी। ” ज़ूबी नें हाँ मे अपनी गर्दन हिला दि।
राज नें अपना अगलाकदम बढ़ाया। वोँ खड़ा होकर ज़ूबी केँ डेस्क केँ पासचहल कदमी करनेलगा, “अमित हमेंइस काम कों अंजाम देना हैं। तुम्हें अच्छी तरहपता हैं कि केसे अंजाम दिया जाता हैं। ”
फिन उसने ज़ूबी कि तरफ़ देखा, “ज़ूबी जरा खड़ी हौ जाओ। ”
ज़ूबी काँपती टाँगों पऱ उसकीबात मानते हुए खड़ी होँ गयीँ,।
राज चलतेहुए ज़ूबी केँ पीछे आँ गय़ा औऱ अमितउसे घुरेजा रहा थां। उस करोड़पति नें ज़ूबी कां कोट उतार दिया औऱ उसकेटॉप मे सें झलकती चूचियाँ साफ़ दिखायी देनेलगी।
“अमित मैंने इस गुड़िया सें कहा थां कि आज वोँ ब्रा नहि पहने। ” ज़ूबी केँ निप्पल अचानक हि तनगये थें। राज नें पीछे सें उसकेटॉप कि ज़िपखोल दि औऱ ज़ूबी पत्थर कि मुरतबनी सहमी सि खड़ी थि। ज़ूबी कि निगाहें अमित केँ चेहरे पर्र टिकी थि जोँ हैरत सें उसकी औऱ ताड़रहा थां।
राज नें ज़ूबी केँ टॉप कों उसकी दोनों बाँहों सें अलग करतेहुए उतार दिया। अब वोँ कमर सें उपर तक पूरीतरह नंगी खड़ी थि। पता नहि डर केँ मारे याँ ठंड केँ मारे उसके निप्पल पूरीतरह सें खड़े थें।
राज नें पीछे सें उसकी चूचियों कों मसलते हुएकहा, “अमित तुम्हें नहि लगता कि हम् इस मामले कों सुलझा लेंगे। ”
“हाँ.हाँ! हम् सुलझा लेंगे मिस्टर राज। आप् चिंता नां करें। ” अमित एक् भूखे शिकारी कि तरह ज़ूबी केँ शरीर कों घूरते हुएकहा।
“ज़ूबी तुम्हें नहि लगता कि हम् इस दलदल सें बाहर् आँ जायेंगे। ” राज नें उसके स्कर्ट केँ हुक कों खोलते हुएकहा।
“हाँ मिस्टर राज हम् जरूर बाहर् आँ जायेंगे। ” ज़ूबी नें उसकी हरकतों कां बिनाकोई विरोध करतेहुए कहा।
ज़ूबी नें अमित कि ओर देखा जोँ कामुक निगाहों सें उसके जिस्म कों घुरेजा रहा थां। थोड़ी देर मे उसने उसकाहाथ अपने चूत्तड़ पऱ रेंगते हुए महसूस किया। उसके एक् चूत्तड़ पऱ राजहाथ फिरारहा थां औऱ दूसरे पऱ अमित कां।
इतने मे राज नें अपनी एक् अँगुली ज़ूबी कि बुर मे घुसा दि औऱ अंदर बाहर् करनेलगा। ज़ूबी कि निगाहें अपने केबिन केँ दरवाजे पऱ लगी हुईँ थि औऱ वोँ अल्लाह सें दुआकर रही थि कि उसके केबिन मे कोई नाँ आये। वोँ मात्र हाईहील केँ सैंडल पहने मेज़ कां सहारा लेँ कर घोड़ी बन गई, थि।
ज़ूबी नें अपने पीछे कपड़ों कि सरसराहट सुनी। राज नें थोड़ी देर केँ लिए अपनेहाथ उसके चूत्तड़ सें हटाकर अपनी बेल्ट कों खोला औऱ अपनी पैंट केँ बटनखोल करउसे नीचे सरका दिया। उसने अपने खड़े लन्ड कों ज़ूबी कि बुर केँ छेद पऱ टिका दिया।
दास्तान - वक्त के फ़ैसले Complete Story - Vakt Ke Faisle – New Episode
“नहि प्लीज़ नहि” वोँ धीरे-धीरे सें बोलि।
“अमित हम् यह मामला सुलझा कर रहेंगे। मे जानता हूं कि जोँ लोग मेरेलिए कम करते हें वोँ हरहाल मे मेराकहा मानेंगे। ” कहकरराज नें अपने हाथों सें उसके चूत्तड़ कों थोडा फ़ैलाया औऱ अपने लन्ड कों उसकी बुर मे घुसा दिया। ज़ूबी केँ मुँह सें एक् चींख निकल पड़ी।
राज नें अपना लन्ड थोडा बाहर् निकाला औऱ जोर केँ धक्के केँ संग पूरा लन्ड उसकी बुर मे डाल दिया। चींख कि स्थान एक् सिस्करी निकल पड़ी ज़ूबी केँ मुँह सें।
“साली कुत्तिया! अपनी टाँगें फ़ैला” राज गुस्से मे बोला, “जब तक तुँ अपनी टाँगें नहि फ़ैलायेगी, मे अपना लन्ड तेरी बुर कि जड़ तक केसे पेलूँगा। ”
राज कां आधा लन्ड उसकी बुर मे घुसाहुआ थां। बड़ी मुश्किल सें ज़ूबी नें अपनी टाँगें फ़ैलायीं। जैसे हि उसकी टाँगें फ़ैलीं, राज नें उसे कंधों सें पकड़ा औऱ जोर केँ धक्के लगाने लगा। उसकेहर धक्के केँ संग ज़ूबी कि चूचियाँ उछलरही थीं।
राज नें उसकी एक् चूंची मसलते हुएजोर कां धक्का मारकर अपना पानी उसकी बुर मे छोड़ दिया। जब उसके लन्ड सें एक्-एक् बूँद निकल चुकी थि तौ वोँ अपने लन्ड कों बाहर् निकाल कर उसके चूत्तड़ पर्र रगड़ने लगा।
ज़ूबी नें थोड़ी राहत कि साँसली। राज टाइम सें पहले हि झड़ गय़ा थां। वोँ सीधी होँ कर अपने कपड़े पहनने कां विचार बना हि रही थि कि, “तुम् यह क्याँ कररही हौ?” राज नें पूछा।
“कपड़े पहनरही हूं औऱ क्याँ!” ज़ूबी नें जवाब दिया।
“यह अमित केँ संग नाइंसाफ़ी होगी ज़ूबी डियर!”राज नें जैसे हि यहकहा ज़ूबी नें अमित कि तरफ़ देखा औऱ वोँ दंगरह गई,। अमित अपने कपड़े उतारकर अपने लन्ड कों सहलारहा थां औऱ ज़ूबी केँ नंगे शरीर कों देखेजा रहा थां।
“तुम् जहाँ होँ वहीं रुको?”राज नें जैसेउसे आदेश दिया।
ज़ूबी केँ पास औऱ कोई चारा नहि थां उसकीबात मानने केँ सिवा। वोँ उसी अवस्था मे केवल सैंडल पहने नंगी खड़ीरही, टेबल कां सहारा लिए अपनी भारी गाँड हवा मे उठाये हुए। राज केँ लन्ड सें चूता पानी अभि भि ज़ूबी कि जाँघों पऱ बहरहा थां। उसने टेबल सें एक् टिशू पेपर लिया औऱ पानी कों पौंछने लगी।
अमित बिनाकोई टाइम गंवाय उसके पीछेआया औऱ उसके चूत्तड़ चूमने लगा। “मेरीजान। अपनी टाँगों कों थोडा फ़ैलाओ जिससे मे अपना लन्ड तुम्हारी बुर मे डाल सकूँ। ” उसने अपना लन्ड ज़ूबी कि बुर केँ मुहाने पर्र रखा औऱ एक् हि धक्के मे अपना लन्ड उसकी बुर मे पेल दिया।
ज़ूबी नें महसूस किया कि उसका लन्ड राज केँ लन्ड जितना मोटा औऱ लंबा नहि थां। ज़ूबी जानती थि उसका लन्ड उसेकोई नुकसान नहि पहुंचा सकता औऱ यह भि जानती थि कि अगरउसे इस जिल्लत सें छुटकारा पाना हैं तौ वोँ उस मर्द केँ पानी कों छुड़ा दे।
यहीसोच कर ज़ूबी नें अपनी टाँगों कों थोडा सिकोड़ औऱ अपनी बुर मे उसके लन्ड कों जकड़ लिया। अब वोँ उसकेहर धक्के कां संग अपने कुल्हों कों पीछे कि ओर धकेलकर संगदे रही थि।
अमित नें अपनेहाथ बढ़ाकर उसकेममे पकड़लिए औऱ उन्हें मसलते हुएकस केँ धक्के मारने लगा।
ज़ूबी कों अपने आप् पर्र विश्वास नहि होँ रहा थां। वोँ हमेशा सें हि एक् साधारण औऱ संस्कृति कों मानने वाली लड़कीरही थि। औऱ आज वोँ दिन केँ टाइम अपने हि दफ़्तर मे दो लौड़ों सें अपने आप् कों चुदवा रही थि। ऐसा नहि थां कि इतनी भयंकर चुदाई उसेमजा नहि देरही थि पर्र इस वक्त उसका ध्यान अमित कां पानी छुड़ाने पर्र ज़्यादा थां।
अमितजोर कि हुंकार भरतेहुए ज़ूबी कों चोदेजा रहा थां। दोतीन कस केँ धक्के मारने केँ बाद उसके लन्ड नें ज़ूबी कि बुर मे पानी छोड़ दिया। जैसे हि उसने अपना मुर्झाया लन्ड बाहर् निकाला तौ उसके वीर्य कि बूँदें दफ़्तर केँ कारपेट पऱ इधरउधर गिर पड़ी।
ज़ूबी बड़ी मुश्किल सें अपनी उखड़ी साँसों पर्र काबूपा रही थि। उत्तेजना मे उसका चेहरा लाल होँ चुका थां। बड़ी मुश्किल सें उसने अपने आप् कों संभाला औऱ अपने कपड़े पहने। उसने अपने कपड़े पहने हि थें कि दरवाजे पर्र दस्तक हुईँ, “क्याँ मे अंदर आँ सकती हूं?” ज़ूबी कि सेक्रेटरी नें पूछा।
बड़ी मुश्किल सें ज़ूबी नें कहा, “हाँ आँ जाओ। ”
ज़ूबी कि सेक्रेटरी केबिन मे आयी औऱ ज़ूबी सें पूछा कि क्याँ वोँ खाने कां ऑर्डर देना चाहेगी। ज़ूबी नें उसेमना कर दिया कि मीटिंग समाप्त होँ चुकी हैं औऱ खाने कि ज़रूरत नहि पड़ेगी। मगर वोँ जानती थि कि हवा मे फ़ैली चुदाई कि खुश्बू औऱ उसके बिखरे हुएबाल उसकी सेक्रेटरी कों सभी स्टोरी कह देंगे।
ज़ूबी नें अपने आपको इतना अपमानित औऱ गिराहुआ कभी महसूस नहि किया थां। किसतरह उसकी तकदीर उसकेसंग खेलरही थि। एक् इंसान उसके जज़बात औऱ जिस्म केँ संगखेल रहा थां औऱ वोँ मजबूरी वश उसकासंग देरही थि। अब उसका एक् हि मक्सद थां कि किसीतरह राज कि हरबात मानते हुए वोँ उससे वोँ टेप हासिल कर लेँ जौ उसने होटल केँ रूम मे रिकॉर्ड करली थि।
दास्तान - वक्त के फ़ैसले Complete Story - Vakt Ke Faisle – New Episode
दास्तान - वक़्त केँ फ़ैसले (भाग-२)
लेखक:राज अग्रवाल
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ज़ूबी अपने आप् पऱ बहोत शर्मिंदा थि। मजबूरी मे उसे अपने मंगेतर सें झूठ केहना पड़रहा थां कि मिस्टर राज कि दफ़्तर मे देररात तक मीटिंग चलती हैं जिसवजह सें वोँ उससेमिल नहि पा सकती थि। आज उसनेफिन झूठ बोला थां कि एक् अर्जेंट मीटिंग कि वजह सें वोँ उससेमिल नहि पायेगी। कभी उसकेदिल मे विचार आता कि वोँ इस्तफा देदे पऱ मामले कि नज़ाकत कों समझते हुए वोँ चुपरह जाती।
आजराज नें उसेरात कों अपने होटल केँ सुइट मे बुलाया थां। उसकीबात मानने केँ अलावा उसकेपास कोई चारा नहि थां। जैसे हि उसने होटल मे कदमरखा, सबकी निगाहें उस पर्र जम गयीँ,। सभी जानते थें कि जब एक् अमीर व्यक्ति किसी लड़की कों रात केँ समय बुलाता हैं तौ उसका एक् हि मक्सद होता हैं।
ज़ूबी राज सें होटल केँ रेस्टोरेंट मे मिली। राज किसी सें मोबाइल पऱ बात करतेहुए अपनेपैड पर्र कुछलिख रहा थां। ज़ूबी नें वही ड्रेस औऱ सैंडल पहनी थि जोँ राज नें उसे पहनने केँ लिएकहा थां। वोँ बिना ब्रा औऱ पैंटी पहने उसकी टेबल केँ पास खड़ी थि।
जबराज कि नज़रें ज़ूबी पर्र पड़ी, “अरे तुम् खड़ी क्यूं हौ, बैठो नाँ। ”
ज़ूबी राज केँ कहने पऱ सीट पऱ बैठ गयीँ,। राज नें मोबाइल पर्र अपनीबात समाप्त कि औऱ खाने कां ऑर्डर कर दिया। जिस टेबल पऱ वोँ बैठे थें वोँ बहुत बड़ी थि औऱ एक् सफ़ेद टेबल क्लॉथ सें ढकी हुइ थि। ज़ूबी राज केँ बगल कि सीट पऱ बैठ गई,।
राज नें खानां खातेहुए ज़ूबी कों बताया कि उसकी एप्लीकेशन कां क्याँ हाल हैं। उसने बताया कि जोँ नया टी.वी चैनल वोँ शुरुआत करना चाहता हैं वोँ एप्लीकेशन कि वजह सें रुकाहुआ थां। उसने बताया कि किसतरह उसने अधिकारियों सें बातचीत करली हैं औऱ शायद मामला जल्द हि सुलझ जायेगा।
ज़ूबी शांति सें खानां खातेहुए उसकीकथा सुनरही थि। पऱ उसका पूरा ध्यान अपने आप् मे हिम्मत जुटाने मे लगाहुआ थां कि किसतरह वोँ राज सें उसटेप कि बातकरे। डर औऱ खौफ़ केँ मारे उसकी ज़ुबान सूखीजा रही थि। वोदका केँ पैग भि उसे राहत नहि देपारहे थें। आखिर मे उसने हिम्मत जुटाते हुए अपनी हकलाती ज़ुबान सें कहा, “राज मे हरहाल मे वोँ वीडियोटेप वापस पाना चाहती हूं। ”
“जरूरमिल जायेगी” राज नें उसे देखकर मुस्कुराते हुएकहा। “अगर तुम् मेरीमदद करोगी तौ वोँ टेप तुम्हें जरूरमिल जायेगी। पऱ थोड़े वक्त केँ बाद। औऱ मे तुमसे यह वादा करता हूं कि वोँ टेप केँ बारे मे नाँ तौ तुम्हारे दफ़्तर मे किसी कों पता चलेगा औऱ नाँ हि तुम्हारे मंगेतर कों। पर्र तभी तक जब तक तुम् मुझे मजबूर नाँ करदो। ”
ज़ूबी चुपचाप उसकीबात सुनती रही औऱ जैसा उसनेसोच रखा थां वहीहुआ। राज नें टेबल केँ नीचे सें अपनाहाथ उसकी गोरी जाँघों पर्र रख दिया। अचानक राज नें उसे अपने नज़दीक खींचा औऱ अपने होंठ उसके होंठों पर्र रखकर चूसने लगा। ज़ूबी नें उसे रोकने कि चेष्टा नहि कि। राज नाराज़ नाँ हौ जाये, सोच कर वोँ उसकासंग देनेलगी।
ज़ूबी भि अपना मुँहखोल कर उसकीजीभ कों चूसने लगी। अब राज नें अपना दूसरा हाथ उसकी शर्ट मे डाल दिया औऱ उसकी चूचियों कों मसलने लगा। उसके हाथों केँ स्पर्श नें ज़ूबी केँ जिस्म मे एक् सिरहन सि दौड़ा दि जिससे उसके निप्पल एक् दम सख्त होँ गये। राज उसकी आँखों मे देखते हुए उसकी चूचियों कों जोरों सें मसलरहा थां। जब उसने वेटर कों टेबल केँ नज़दीक आते देखा तौ अपनाहाथ हटा लिया।
राज नें दोनों केँ लिए एक् औऱ ड्रिंक कां ऑर्डर दिया। “अपनी टाँगों कों थोडा फ़ैलाओ” उसने ज़ूबी कि टाँगों कों सहलाते हुएकहा।
नाँ चाहते हुए भि ज़ूबी नें अपनी टाँगें फैला दि। राज केँ हाथअब उसकी बुर सें खेलरहे थें। वोँ रहरहकर अपनी हथेली सें उसकी बुर कों दबा देता। ज़ूबी केँ जिस्म मे भि गर्मी आँ रही थि। इसका सबूतयह थां कि उसकी बुर गीली होँ चुकी थि। कईबार राज अपनी गीली हुईँ अँगुलियों कों उसकी स्कर्ट सें पौंछ चुका थां।
ज़ूबी कां दिमाग़ काम नहि कररहा थां। दिमाग़ कहरहा थां कि वोँ राज कां संग नाँ दे, पर्र जिस्म कि गर्मी औऱ काम वासना उस पऱ हावी होतीजा रही थि। वोँ जानती थि कि आज कि रातराज उसे चोदेगा औऱ उसकेपास उसकेसंग सोने केँ अलावा कोई चारा भि नहि थां। उसे तौ हरहाल मे चुदवाना थां चाहेमन सें याँ बेमन सें।
“ओहहहह आहहहह” ज़ूबी केँ मुँह सें सिसकरी निकली। राज अपनीदो अँगुलियाँ उसकी बुर मे डाले अंदर बाहर् कररहा थां। जैसे-जैसे राज कि अँगुली उसकी बुर मे घुसती, उतनी हि उसकी वासना औऱ भड़कती। उसकी सिसकरियाँ यहबता रही थि कि अब वोँ भि चुदवाने कि लिए पूरीतरह सजधजकर होँ गई, हैं।
राज उसकी हालतदेख कर मुस्कुरा रहा थां। वोँ जानता थां कि थोड़ी हि देर मे ज़ूबी कां पानीछूट जायेगा। पर्र उसका मक्सद यह नहि थां, वोँ तौ उसे बताना चाहता थां कि वोँ अपनी हरकतों सें उसे कहीं भि चुदवाने कों सजधजकर कर सकता थां।
“ज़ूबी एक् कामकरो। यह चाबीलो औऱ रूम नंबर२१३ मे चलीजाओ। औऱ हाँ! जाकरबेड पऱ रखी ड्रेस औऱ सैंडल पहन लेना जोँ मे तुम्हारे लिए लाया हूं। मे थोड़ी देर मे आता हूं। ” राज नें उसे चाबी पकड़ाते हुएकहा।
ज़ूबी खड़ी होकरऊपर रूम मे जाने केँ लियेचल दि। जैसे हि वोँ खड़ी हुइ, उसे अपनी बुर सें पानी बहता महसूस हुआ। उसकी जाँघें औऱ बुर पूरीतरह सें गीली होँ चुकी थि।
राज मुस्कुराते हुए ज़ूबी कों पीछे सें देखरहा थां। उसने देखा कि उसकी स्कर्ट उसके चूत्तड़ कि गोलाइयों कों नहि छुपापा रही थि।
ज़ूबी जब कमरे मे दाखिल हुई तोँ उसेबेड पऱ एक् छोटी सि सफ़ेद पैंटी औऱ उतनी हि छोटी ब्रा नज़रआयी। संग हि उनसे मैचिंग सफ़ेद रंग केँ बहोत हि हाईहील केँ सैंडल रखे थें। इन अंडरगार्मेंट्स कों देखकर वोँ समझ गयीँ, कि राज जानबूझ कर इतने छोटे लें करआया हैं ताकि उसके मम्मे औऱ चूत्तड़ साफ़ दिखायी देसके।
रूम केँ बीचों बीच खड़े होकर उसने अपने कालेहाई हील केँ सैंडल उतारे औऱ फिन अपनी स्कर्ट कि ज़िपखोल दि। उसका स्कर्ट फिसलकर नीचेगिर पड़ा। उसने स्कर्ट कों अपनी टाँगों सें निकाल कर उतार दिया औऱ फिन अपनाटॉप भि उतार दिया। कमरे मे चलतेएयर कंडीशनर कि ठंडीहवा नें एक् सिरहन सि भर दि उसके जिस्म मे।
ज़ूबी कमरे मे बिछे कार्पेट पर्र नंगी हि चहल कदमीकर रही थि। उसनेबेड पऱ सें कपड़े औऱ सैंडल उठाये औऱ पहनने लगी। वोँ समझ गयीँ, थि कि राजउसे अपनीकाम वासना कि पूर्ति केँ लिए इस्तमाल करना चाहता हैं। ज़ूबी यह भि जानती थि कि राज केँ हाथजब उसके शरीर कों सहलाते थें तौ अपने जज़बतों कों नहि रोक पाती थि। उसकी भि जिस्मनी ख़्वाहिश औऱ बढ़ जाती थि।
ज़ूबी नें जैसे हि अपने कपड़े समेटकर साइड कि टेबल पर्र रखे तोँ राज कों कमरे मे दाखिल होते देखा। ज़ूबी नें देखा कि राज नें शराब कि बोत्तल अपनीबगल मे दबारखी थि औऱ उसके पीछेदो हट्टे तगड़े व्यक्ति सूट पहने कमरे मे आँ गये।
“ज़ूबी इनसे मिलो.यह हमारे टी.वी चैनल केँ नये पार्टनर हें” राज नें कहा।
“करनयह मेरी वकील ज़ूबी हैं” राज नें उसका परिचय कराया। ज़ूबी चुपचाप खड़ी थि। उसकामन कररहा थां कि वहा सें भाग जाये पर्र जानती थि कि वोँ ऐसा नहि कर सकती थि। उसने अपने आप् कों इतना मजबूर कभी नहि पाया थां। उसकी आँखों मे पानी आँ गय़ा थां। ज़ूबी काँपती टाँगों सें साइड मे पड़ी कुर्सी पर्र बैठ गयीँ,।
राज ज़ूबी केँ पास आँ गय़ा औऱ उसकी चूचियों कों मसलने लगा। ज़ूबी नें एक् बार चाहा कि वोँ उसके हाथों कों झटकदे पऱ वोँ ऐसाकर नाँ सकी, बल्कि उसने महसूस किया कि राज केँ हाथों कां स्पर्श उसे अच्छा लगरहा हैं औऱ उसके निप्पल एक् बारफिन खड़े होँ रहे हें।
राज नें ज़ूबी कों कुर्सी पऱ सें उठाया औऱ उसके शरीर कों सहलाने लगा। फिन उसने अपने कपड़े उतारे औऱ नंगा हौ गय़ा। राजअब स्वयं कुर्सी पऱ बैठ गय़ा औऱ ज़ूबी कों कंधे सें नीचेकर केँ अपनी फैली जाँघों केँ बीच बिठा दिया। ज़ूबी कां चेहरा राज केँ लन्ड सें कुछ हि इंच केँ फ़ासले पर्र थां।
“अब मेरे लन्ड कों अपने मुँह मे लेँ कर चूसो। ”राज नें अपना लन्ड उसके गुलाबी होंठों पऱ रगड़ते हुएकहा।
ज़ूबी कों अपने आप् सें इतनी शर्मिंदगी महसूस होँ रही थि कि वोँ अपने आँसू बड़ी मुश्किल सें रोकपा रही थि। राज उसकेसंग ऐसा बर्ताव कररहा थां जैसे वोँ कोई वेश्या हौ, “प्लीज़ मुझे पराये मर्दों केँ सामने इतना जलीलमत करो” ज़ूबी गिड़गिड़ाते हुए बोलीं।
राज नें उसकीबात कां कोई जवाब नहि दिया, बस उसे घूरता जारहा थां।
ज़ूबी नें जब देखा कि उसकी बातों कां राज पर्र कोईअसर होने वाला नहि हैं तौ उसने अपने आप् कों हालात केँ सहारे छोड़ दिया।
अब ज़ूबी केँ पासकोई चारा नहि थां, उसनेराज केँ लन्ड कों अपने हाथों मे लिया औऱ अपना मुँहखोल करउसे चूसने लगी। ज़ूबी केँ माथे पर्र पसीना आँ गय़ा थां पऱ वोँ अपना मुँहऊपर नीचेकर केँ उसके लन्ड कों जोरों सें चूसती जारही थि।
राज नें अपनेहाथ उसकेसिर औऱ गर्दन पर्र टिकारखे थें, पर्र उसकी निगाहें ज़ूबी केँ चेहरे पर्र थि जोँ उसके लन्ड कों चूसरही थि। राज कों उसके रसीले जिस्म कां स्पर्श अच्छा लगरहा थां, केसे वोँ बीच मे अपनी आँखें ऊपरउठा करउसे देख लेती थि।
जब वोँ अपनीजीभ कों उसके लन्ड केँ चारों तरफ़ घुमाने लगीतब राज कों महसूस होनेलगा कि वोँ अब झड़ने वाला हैं। ज़ूबी केँ एक् हाथ नें उसका लन्ड नीचे सें पकड़ा हुआ थां औऱ दूसरा हाथ उसकी जाँघों कों पकड़े हुए थां। ज़ूबी नें उसके पाँव कों अकड़ते देखा औऱ वोँ समझ गयीँ, कि अबराज झड़ने वाला हैं।
“चूसती रहो। रुकोमत” राज नें उसकेसिर कों औऱ दबाते हुएकहा।
“हे। ईश्वर। ओहहहह हाँ आआहहहह” कहकर उसका लन्ड वीर्य कि पिचकारी छोड़ने लगा। उसके कुल्हे ज़ूबी केँ चेहरे पऱ गड़ेहुए थें। उसने उसकेसिर कों इतनाकस कर पकड़रखा थां कि ज़ूबी कों मजबूरी मे उसका वीर्य निगलना पड़रहा थां।
जैसे हि उसके पाँव थोड़े ढीले पड़े, ज़ूबी नें अपने गुलाबी होंठ उसके लन्ड सें हटाये औऱ घिसटती हुइ सोफ़े पर्र जाकरबैठ गयीँ,।
“यह मे क्याँ कररही हूं?” उसे अपने आप् सें घृणा हौ रही थि कि वोँ यहसभी केसेकर सकती हैं। पऱ अभि वोँ अपनी हालत कों संभाल भि नहि पायी थि कि दो तगड़े मर्दों नें उसे अपनी बांहों मे भर लिया औऱ उसके दोनों बूब्ज़ कों भींचने औऱ मसलने लगे। दोनों उसकी चूचियों कों इसतरह चूसरहे थें जैसेदो जुड़वां बच्चे अपनी मम्मी कां मम्मों चूसते हें।
तभी ज़ूबी कों राज कि आवाज़ सुनायी दि, “आहिस्ता दोस्तों, सबको मौका मिलेगा इसे चोदने कां। ”
ज़ूबी कि आँखें घबड़ाहट मे फट सि गयीँ, औऱ उसे अपनी साँसें घुटती सि महसूस हुईँ, “ओह अल्लाह यह मेरी सामुहिक चुदाई करेंगे” उसने सोचा, “अरे रब्बा, सभी मिलकर चोदेंगे मुझे। ”
ज़ूबी आँखें फाड़े उनदो मर्दों कों अपनी चूचीयाँ चूसते हुएदेख रही थि। पऱ वोँ इसबात सें भि इनकार नहि कर सकती थि कि उसके निप्पल तनकर खड़े हौ गये थें औऱ उसकी बुर उत्तेजना मे गीली होँ चुकी थि। उसने तिरछी आँखों सें देखा कि अब दोनों मर्द अपने कपड़े उताररहे थें।
ज़ूबी नें अपने छोटे हाथों कों उन मर्दों केँ कंधों पर्र रखा औऱ उन्हें हटाने कि कोशिश करनेलगी, “प्लीज़ रुक जाइये, रुक जाइये। ” पऱ उसकी कोशिश नाकामयाब रही। वोँ दोनों मर्द उसकी चूचियों कों चूसेजा रहे थें।
ज़ूबी कां विरोध देखकर राज उसकेपास आया औऱ बोला, “ज़ूबी मेरीबात सुनो, तुम्हें इन मर्दों कों सहयोग देना होगा?अगर तुमने ऐसा नहि किया तोँ यह तुम्हारे लिए बुरा होगा। मेरेलिए नहि, तुम्हारे लिए.यह, समझी तुम्। ”
ज़ूबी कि आँखों मे आँसू आँ गये, उसनेराज कि आँखों मे देखा कि शायदरहम नज़र आँ जाये। पर्र राज कि आँखों मे रहमनाम कि कोई चीज़ नहि थि। ज़ूबी कों मालूम थां कि राज कि बात मानने केँ अलावा उसकेपास कोई मार्ग नहि थां। उसकेदिल नें कहा कि किसीतरह इसरात कों गुज़ार लो।
उसेपता थां कि उसकी बुर कि आजजमकर धुनाई होने वाली हैं। उसके जिस्म कि ऐसी दुर्गति बनने वाली हैं जौ उसने ड्रीम्स मे भि नां सोची होगी। वोँ अपने आप् मे इनसभी केँ लिए हिम्मत जुटाने लगी।
वैसे तौ राज कों उसकी सहमती कि जरूरत नहि थि, फिन भि ज़ूबी नें उसकी औऱ देखते हुए अपनी गर्दन हाँ मे हिला दि। दोनों मर्द जौ उसकी चूंची चूसरहे थें, एक् नें उसकाहाथ पकड़कर अपने खड़े लन्ड पर्र रख दिया। ज़ूबी समझ गई, कि वोँ क्याँ चाहता हैं औऱ वोँ उसके लन्ड कों पकड़कर हिलाने लगी।
राज नें जब ज़ूबी कों लन्ड हिलाते देखा तोँ उसकी नंगी जाँघों कों सहलाते हुए बोला, “अब हुई नां अच्छी लड़की वालीबात। ”
तभी दूसरा मर्द उसकी टाँगों केँ बीच आँ गय़ा। उसने देखा कि वोँ अपने खड़े लन्ड कों उसकी गीली हुई बुर पऱ रगड़रहा हैं। उस मर्द नें उसकी टाँगों कों थोडा ऊपरउठा कर उसके कुल्हे पकड़लिए औऱ अपने लंबे मोटे लन्ड कों उसकी बुर मे घुसाने लगा।
“ओहहहहहह मरररर गयीईईईई। ” दर्द केँ मारे वोँ चींख पड़ी।
“फाड़दो इसकी बुर कों!” राज नें उस मर्द सें कहा। राज जानता थां कि यह वकील लड़की कि बुर इतने लंबे औऱ मोटे लन्ड कि आदी नहि हैं। पर्र वोँ यह भि जानता थां कि इस खिलाड़ी लड़की कि बुर बहोत गहरी हैं, अगर पूरा घुसाया जाये तोँ उसकी बुर पूरा लन्ड निगल लेगी।
वोँ मर्दजोर लगाकर अपने लन्ड कों उसकी बुर मे घुसाने लगा औऱ ज़ूबी कों ताज्जुब हुआजब उसकी बुर फ़ैलते हुए उसके लन्ड कों निगलने लगी। तभी दूसरे मर्द नें उसकी चूंची चूसते हुएउसे लिटा दिया। पहले वाला मर्दअब जोरों सें उसकी बुर चोदरहा थां। वोँ इतनी बेरहमी सें उसेचोद रहा थां कि उसकी बुर मे एक् दर्द सां भरताजा रहा थां।
दूसरे मर्द नें उसकी चूचियों कों चूसना बंद किया औऱ उसके चेहरे केँ पास आँ गय़ा। अब वोँ अपने खड़े लन्ड कों उसके होंठों पर्र रगड़रहा थां। ज़ूबी अपना मुँह खोलना नहि चाहती थि, पऱ उसकेपास कोई चारा नहि थां। उसने अपना मुँहखोल करउस मुसल जैसे लन्ड कों अपने मुँह मे लेँ लिया। एक् अजीब सि दुर्गंध उसके नथुनों सें टकरायी। पऱ इनसभी बातों पर्र ध्यान नाँ देकर वोँ उस लन्ड कों जोरों सें चूसने लगी।
ज़ूबी कों पता भि नहि लगा कि कब उसकेबदन केँ दर्द औऱ घबड़ाहट नें उत्तेजना औऱ मादकता कां रूप लेँ लिया, औऱ वोँ झड़ने केँ कगार पऱ पहुँच गई,।
“ओहहहहह आआआहहहह ओओओओहहहहह” वोँ सिसकी औऱ उसकी कमसिन औऱ प्यारी बुर नें पानी छोड़ दिया।
जैसे हि उसकी बुर नें पानी छोड़ा, पहले मर्द केँ लन्ड नें उसके मुँह मे वीर्य कि पिचकारी छोड़ दि। नाँ चाहते हुए भि ज़ूबी कों उस कसैले वीर्य कों पीना पड़ा। जितनी जल्द होँ सकता थां वोँ उस कड़वे पानी कों निगल गयीँ, जिससे उसका स्वाद उसकीजीभ पऱ अधिकदेर नाँ रहे।
दूसरा मर्द उसकी बुर मे अपने लन्ड कों अंदर बाहर् होतेदेख रहा थां। उसने हमेशा सें एक् नौजवान लड़की कों चोदने कां सपना देखा थां, औऱ आज उसका वोँ सपना पूरा हौ रहा थां। उसका मोटा औऱ लंबा लन्ड ज़ूबी कि बुर केँ अंदर बाहर् होताहुआ उसे बहोत अच्छा लगरहा थां। जब उसने ज़ूबी केँ जिस्म कों अकड़ते औऱ झड़ते देखा तौ वोँ स्वयं पर्र काबू नाँ रख पाया औऱ उसके लन्ड नें पानी छोड़ दिया।
उस दूसरे मर्द नें अपने अर्ध-मुर्झाये लन्ड कों उसकी बुर केँ बाहर् खींचा औऱ उसके वीर्य कि एक् जटा सि बाहर् कों निकल पड़ी। ज़ूबी नें महसूस किया कि वोँ वीर्य उसकी नंगी जाँघों पऱ बहरहा थां। वोँ अजीब नज़रों सें उस लन्ड कों देखरही थि औऱ सोचरही थि कि उसकी बुर नें किसतरह इस विशाल लन्ड कों अंदर लिया होगा।
उसका पूराबदन पसीने सें भीगाहुआ थां। इस भयंकर चुदाई सें उसकी साँसें उखड़ चुकीथीं। उस मर्द नें उसे अपनीगोद मे उठाया औऱ लेजाकर उसे पलंग पऱ पेट केँ बलपटक दिया।
ज़ूबी नें महसूस किया कि उसने उसके कुल्हे हवा मे उठा दिये औऱ अपना लन्ड पीछे सें उसकी बुर मे घुसा दिया। अब वोँ उसे कुत्तिया कि तरह पीछे सें चोदरहा थां। ज़ूबी कों अपनेबदन केँ संग होतेइस दुर्व्यवहार पे इतनीशरम आँ रही थि कि उसने अपना चेहरा पलंग कि चादर मे छुपा लिया।
पर्र थोड़ी हि देर मे उसका जिस्म उसके धक्कों केँ संगआगे पीछे हौ करसंग देनेलगा। उस मर्द नें उसकीकमर मे हाथ डाला, “गुड़िया थोडा घुटनों केँ बल होँ जाओ?”जब ज़ूबी नें वैसा किया तोँ उसने उसकी चूचियों कों पकड़ लिया औऱ मसलने लगा।
जिसतरह सें वोँ उसकी चूचियों कों मसलरहा थां, ज़ूबी कों अपने आप् सें नफ़रत सि होँ रही थि पऱ उसका जिस्म थां जौ उसकीसोच केँ विपरीत चलरहा थां। उसके निप्पल इतने नाज़ुक थें कि थोड़ी रगड़ा मसली सें हि तनकर खड़े होँ गये औऱ उसकी टाँगें स्वयं-ब-स्वयं उत्तेजना मे फ़ैल गयीँ,।
वोँ मर्दअब एक् नयी ताकत सें उसेचोद रहा थां। वोँ ज़ूबी कि रसीली गाँड केँ छेद कों देखरहा थां जोँ उसकेहर धक्के सें खुलबंद होँ रही थि। उसने अपनी एक् अँगुली उसकी भारी गाँड केँ चेद मे डाली औऱ दुगनी ताकत सें धक्के लगाने लगा। दस पंद्रह धक्के मारने केँ बाद उसके लन्ड नें पानी छोड़ दिया।
एक् मर्दउसे चोदकर अलग होता औऱ दूसरा अपने लन्ड कों उसकी बुर मे पेल देता। वोँ अब तोँ गिनती भि भूलने लगी थि कि उसे कितनी बार किसने चोदा। वोँ बेहोश सि होनेलगी थि।
उसे इतनापता थां कि एक् लन्ड उसकी बुर केँ अंदर बाहर् होँ रहा हैं। उसने अपनी अधखुली आँखों सें देखा कि होटल केँ रूम सर्विस स्टाफ सें एक् जवान लड़का शराब औऱ ब्रेकफास्ट लेकररूम मे दाखिल हौ रहा थां।
उसरूम अटेंडेंट नें जब ज़ूबी कों इसतरह सें चुदते देखा तौ उसने अपनी आँखें शरम सें झुकाली।
“जोँ देखा वोँ मनपसंद आया क्याँ?” राज नें उस लड़के सें पूछा।
“हाँसर, यह बहोत खूबसूरत हैं, यह किसके लिएकाम करती हैं? मैंने इसे पहलेकभी यहा नहि देखा” लड़के नें जवाब दिया।
ज़ूबी समझ गयीँ, कि वोँ लड़काउसे वेश्या समझरहा हैं।
“वैसेयह लड़कीकोई रंडी नहि हैं। बल्कि यहइसशहर कि एक् वकील हैं” राज नें उस लड़के सें कहा।
वोँ लड़का गहरी नज़रों सें ज़ूबी कों देखरहा थां। देखरहा थां कि किसतरह एक् मूसल लन्ड उसकी बुर केँ अंदर बाहर् होँ रहा हैं।
“क्याँ तुम्हारे पास थोडा वक़्त हैं, मे तुमसे कुछबात करना चाहता हूं, ” राज नें उस वर्दी धारी लड़के सें कहा।
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ज़ूबी होटलरूम केँ बाथरूम केँ आइने केँ सामने खड़ी थि। वोँ इसतरह झुकी हुई थि कि उसकी चूचियाँ लटकरही थि औऱ उसकेभरे औऱ मांसल चूत्तड़ों केँ पीछे वोँ रूम अटेंडेंट खड़ा थां।
वोँ लड़का शायद उन्नीस बीससाल कां होगा, औऱ शायदउसे चुदाई कां अनुभव नहि थां, पऱ उसका लन्ड एक् दम घोड़े केँ लन्ड कि तरह सवारी करने कों रेडी थां। उसने ज़ूबी सें अपना लन्ड स्वयं कि बुर मे डालने कों कहा तौ ज़ूबी नें उसके लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर केँ मुँह पर्र रख दिया।
उस अनाड़ी लड़के नें एक् हि धक्के मे अपना लन्ड उसकी बुर मे घुसाने कि कोशिश कि औऱ उसका लन्ड फिसलकर रह गय़ा। उस लड़के नें फिन अपना लन्ड उसकी बुर केँ दीवार पर्र लगाया औऱ इसबार अंदर घुसा दिया। ज़ूबी सिसकी औऱ उसकी बुर नें उसके लन्ड कों जैसेगले लगा लिया। दो धक्कों मे उसका लन्ड पूरा बुर केँ अंदर थां।
जब उसका लन्ड पूरा अंदरघुस गय़ा तोँ वोँ एक् कुशल घुड़सवार कि तरह उसकी बुर कि सवारी करनेलगा। ज़ूबी भि उसके धक्कों कां संग अपने कुल्हे आगे पीछेकर केँ देरही थि।
उस लड़के नें ज़ूबी केँ चेहरे पऱ आये उसके बलों कों हटाते हुएकहा कि वोँ उसका चेहरा आइने मे देख्ना चाहता हैं। ज़ूबी भि उसेदेख रही थि कि किसतरह वोँ अपने लन्ड कों उसकी बुर केँ अंदर बाहर् कररहा थां। सबसे बड़ीबात कि बाथरूम केँ खुले दरवाजे सें रूम मे बैठे तीनों मर्दउसे चुदवाते देखरहे थें।
वोँ जवान लड़का उसके कुल्हों कों पकड़कर इतने करारे धक्के माररहा थां कि ज़ूबी कि बुर नें थोड़ी देर मे हि पानी छोड़ दिया। वोँ लड़का भि औऱ दो धक्के मारकर उसकी बुर मे झड़ गय़ा।
ज़ूबी इसकदर थक गयीँ, थि कि वोँ अपनी कमजोर टाँगों सें खड़ी नहि होँ पायी औऱ बाथरूम कि ज़मीन पर्र लुढ़क गयीँ,। उसकी हालत बेहोशी जैसी थि। तभीउसे राज कि आवाज़ सुनायी दि, “ज़ूबी एक् अच्छे मेहमान नवाज़ कि तरह इसके लौड़े कों चाटकर साफ़करो। ”
बिनाकुछ कहे ज़ूबी नें अपना मुँह खोला औऱ उस लड़के कां लन्ड अपने मुँह मे लें कर चूसने लगी। जब उस लड़के कां लन्ड एक् दम साफ़ होँ गय़ा तौ उसने महसूस किया कि किसी केँ हाथों नें उसे उठाया औऱ खाट पऱ लिटा दिया हैं। उसरात कितनी बार किसने उसे चोदाउसे याद नहि थां औऱ वोँ एक् गहरी नींद मे सो गयीँ,।
कईं घंटे तक ज़ूबी सोतीरही। पूरीरात मर्दों नें उसे रगड़ा औऱ मसला थां। पूरा जिस्म दर्द केँ मारे कराहरहा थां। वोँ उठी औऱ नहाने केँ लिये बाथरूम मे घुस गई,। वोँ अपनेबदन सें गुनाहों केँ उन निशानों कों मिटाने कि कोशिश करनेलगी जौ उससे जबरदस्ती करवाये गये थें।
ज़ूबी कां पूरा जिस्म दर्द केँ मारे कराहरहा थां। उसकी बुर सूजकर फूल गई, थि। लन्ड चूस-चूस केँ उसके मुँह मे औऱ जबड़ों मे भि दर्द हौ रहा थां। उसने गर्म पानी सें स्नान किया जिससे उसके शरीर कों राहतमिल सके। अपने जिस्म कों अच्छी तरह टॉवल सें पोंछने केँ बाद वोँ बेडरूम मे आँ गई,।
बेडरूम मे आते हि उसकेदिल कि धड़कनें तेज हौ गयीँ,। उसके कपड़े कहीं दिखायी नहि देरहे थें। शायद दूसरे मर्द उसकी चुदाई कररहे थें तबराज उसके कपड़ों कों अपनेसंग लें गय़ा थां। राज केँ द्वारा लायेहुए सफ़ेद हाईहील केँ सैंडल जरूरवहा मौजूद थें क्योंकि पुरीरात चुदते टाइम वोँ उन्हें पहनेहुए थि औऱ अभि नहाने केँ पहले हि उसने वोँ उतारे थें।
ज़ूबी केँ माथे पर्र पसीना आँ गय़ा। अपने आपको बेइज्जती सें बचाने केँ लियेउसे कुछ सोचना होगा। ज़ूबी नें घड़ी कि तरफ़ देखा। सुभह केँ साड़े सातबज चुके थें। ज़ूबी जानती थि कि वोँ किसी कों अपनी सहायता केँ लिये नहि बुला सकती थि, वरनाउसे कईं सवालों केँ जवाब देनेपड़ सकते थें।
अपने किसी परिचित कों बुलाने केँ बजाय उसनेउस नौजवान लड़के कों बुलाना उचित समझा जोँ रात कों उसेचोद चुका थां। ज़ूबी नें मोबाइल उठाया औऱ रूम सर्विस कां नंबर मिलाया। वोँ अल्लाह सें दुआ करनेलगी कि वही लड़का मोबाइल उठाये। उसकी भाग्य नें संग दिया औऱ उसी लड़के नें मोबाइल उठाया। ज़ूबी नें उसे अपने कमरे मे आने केँ लियेकहा।
ज़ूबी रात कि घटनायाद कररही थि कि किसतरह वोँ उस लड़के केँ सामने घुटनों केँ बल एक् रंडी कि तरह उसके लन्ड कों चूसरही थि। ज़ूबी जोँ एक् कामयाब वकील थि। अपने हालत पर्र उसे रोना आँ गय़ा।
तभी दरवाजे पर्र दस्तक हुई। ज़ूबी नें पैरों मे वही सफ़ेद सैंडल पहने औऱ कसकर अपने शरीर कों टॉवल सें ढका औऱ दरवाजे केँ छेद सें देखने लगी। जब उसे तस्सली हौ गई, कि आने वाला लड़कारात वाला हि हैं तोँ उसने द्वार (दरवाज़ा) खोल दिया। वोँ नौजवान कमरे केँ अंदर आँ गय़ा।
ज़ूबी उस नौजवान लड़के कों, जोँ सुभह कि रोशनी मे औऱ भि जवान औऱ गठीला लगरहा थां, अपनी दास्तान सुनाने लगी। ज़ूबी कि बात सुनकर उस लड़के कां लन्ड तनकर खड़ा हौ गय़ा। वोँ ज़ूबी कि बात सुनकर गरमा गय़ा थां।
“देखो मेरी डयूटी सुभहदस बजे ख़त्म होती हैं, उसकेबाद तुम् बोलो तोँ मे तुम्हें कहीं लें जाऊँगा। ” उस लड़के नें ज़ूबी कों घूरते हुएकहा।
ज़ूबी उसकीबात सुनकर थोडा उदास होँ गयीँ,, “मे इतनीदेर तक नहि रुक सकती, क्याँ कोई तरीका नहि हैं कि हम् यहा सें जल्द निकल सकें” करीब-करीब रोतेहुए वोँ बोलि।
“मेरीजॉब जा सकती हैं” उसने जवाब दिया, “औऱ मे अपनीजॉब खोना नहि चाहता। ”
ज़ूबी कि आँखों मे आँसू आँ गये, “प्लीज़ मेरी मजबूरी कों समझो, तुम् जौ कहोगे मे करने कों रेडी हूं। ” उसेपता थां कि जोँ वोँ कहरही हैं उसका मतलबकुछ भि हौ सकता थां, पर्र उसकेपास औऱ कोई चारा भि नहि थां।
“कुछ भि करोगी?” उसने पूछा।
“हाँकुछ भि.” ज़ूबी नें कहा।
वोँ लड़का ज़ूबी केँ पासआया औऱ ज़ूबी केँ शरीर सें लिपटे टॉवल कि गाँठखोल करउसे ज़मीन पऱ गिरा दिया। ज़ूबी सीधी खड़ी थि औऱ संग हि उसकी चूचियाँ भि तनकर खड़ी थि। उसके भरे-भरे मम्मे उसकी साँसों केँ संगउठ बैठरहे थें।
ज़ूबी नें देखा कि उस लड़के केँ हाथअब उसकी टाँगों केँ बीच आँ गये औऱ उसकी अंगुलियाँ उसकी बुर केँ छेद कों तलाशकर रही थि। छेद मिलते हि उसने अपनी अंगुलियाँ अंदर घुसा दि। ज़ूबी नें अपनी टाँगें थोड़ी फैला दि जिससे उसकी अँगुली आसानी सें अंदरघुस सके।
ज़ूबी नें सहारे केँ लियेउस लड़के केँ कंधे कों पकड़ लिया औऱ वोँ उसकी बुर कों अपनी अँगुली सें चोदने लगा। थोड़ी हि देर मे उसकी बुर पानी छोड़ने लगी। उसकी आँखें पूरी कामुक्ता मे बंद थि औऱ वोँ इसहर लम्हे कां मजा लेँ रही थि।
उस लड़के कों अपने नसीब पऱ विश्वास नहि हौ रहा थां। आज तक उसने सिर्फ़ मोहल्ले कि कुछ लड़कियों कों हि चोदा थां। उसने अपने एक् हाथ सें उसके मम्मे पकड़ लिये औऱ उन्हें जोरों सें मसलने लगा।
आज वोँ जिस महिला कों चोदने जारहा थां वोँ सही मे भरी पूरी महिला थि, खूबसूरत, गठीला बदन औऱ गर्म। “मेरा लन्ड बाहर् निकालो” उसने ज़ूबी सें कहा।
दास्तान - वक्त के फ़ैसले Complete Story - Vakt Ke Faisle - Kahani ab aur interesting hogi
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