द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना – New Episode
Thanks For Reading.. wrote: Thanks For Reading..06 Mar 2019 14:40भाग - 7
तभी सुभह हौ गई, राजउठा तौ उसे वोँ सपनाबार बारतंग कररहा थां। उसने सोचा क्यूं नां नानीमा कों बताया जाए। मगर फिन सोचाअगर नानीमा नें सोच लिया कि मे कथा सें डर गय़ा तौ फिन कहाँनी कभी नहि सुनाएंगी। वहीं नानीमा सुभह उठते हि घऱ केँ काम करने मे जुट गई औऱ राज कों खेलने छोटू केँ संग बाहर् भेज दिया। ताकिराज कां दिललगा रहे।
वही दूसरी औऱ राज केँ पाप भि रात कों घऱ पहुंच गए थें।
अबआगे.
राज केँ बापूघऱ पहुंचे तोँ घऱ पऱ थोडा सां सुना-सुना महसूस हौ रहा थां। फिरभी राजघऱ पऱ होता हैं तब भि कुछखास हंसी वाला माहौल नहीं होता। मगर गिरधारी कों शायदराज कों छोड़कर आनां अच्छा नहींलग रहा थां।
घऱ पहुँचते हि गिरधारी अपनी कमरे मे चला गय़ा। जहां पर्र गिरधारी कि पत्नि सरिता सोरही थि। घऱ कां दरवाजा रानी नें खोला थां। वोँ अभि भि पढ़रही थि। जब गिरधारी नें डोरबेल बजायी तौ दरवाजा खोलने आँ गयीँ,।
गिरधारी अपने कमरे मे आकर अपने कपड़े बदलने लगा। रह रहकर गिरधारी कों रास्ते मे हुए मौसम केँ अजीब-ओ-गरीब बदलाव परेशान कररहे थें। सारीरात गिरधारी करवट बदल-बदल करकाट दिया।
जब सुभह हुइ तौ गिरधारी कि पत्नि सरिता कों उठते हि गिरधारी नज़रआता हैं। वोँ उसेगुड मोर्निंग विश करके फ्रेश होनेचली जाती हैं। औऱ मन हि मन सोचती हैं कितनी बेवकूफ हूं पता नहींयह रात कों कबआये होंगे औऱ मे घोड़े बेचकर सोरही थि।
वहीं दूसरी औऱ रानी उठती हैं। फ्रेश होकर एक् जीन्स औऱ ब्लैक कलर कि बनियान पहनती हैं औऱ सोनिया कों उठाने उसके कमरे मे चली जाती हैं। सोनिया केँ कमरे मे हल्की लाइट थि औऱ सोनिया बेसुध सोरही थि। रानी मुस्कुराती हुई सोनिया केँ कमरे कि विंडो ओपन करती हैं जिस सें सारे कमरे मे लाइट होँ जाती हैं। वोँ मुस्कुराते हुए पीछे मुड़ती हैं सोनिया कों उठाने। औऱ सोनिया केँ बेड कि तरफचली जाती हैं।
जैसे हि रानी सोनिया केँ सामने जाती हैं सोनिया बेढंगे तरीके सें सोरही थि। सोनिया एक् टी-शर्ट औऱ शार्ट पहनकर सोरही थि। सॉर्ट नीचे सें ढीला थां जिसमे सें सोनिया कि मखमली वर्जिन बुर नज़र आँ रही थि। औऱ ऊपर सें उसके कच्चे टिकोरे।
रानी अपनेसर केँ हाथलगा बोलती पागल लड़की सोया तौ ठीक सें कर। वोँ तोँ अच्छा हुआ नं तौ राजघऱ मे हैं औऱ नाँ हि पाप कमरे मे आये। इतना बड़बड़ा कर रानी सोनिया कों उठाती हैं औऱ कॉलेज केँ लिए तैयार होने कों बोल देती हूं।
सोनिया थोड़े नखरे करके उठती हैं औऱ अंगड़ाई लेकर वाशरूम चली जाती हैं।
वही गिरधारी सुभह तैयार होकर ब्रेकफास्ट करता हैं औऱ आफिसचला जाता हैं।
रानी औऱ सोनिया दोनों रेडी होकर नीचेआती हैं। सरिता दोनों कों ब्रेकफास्ट करवाकर स्वयं भि कर लेती हैं। रानी औऱ सोनिया कॉलेज केँ लिए निकल जाती हैं औऱ हमेशा कि तरह सरिता अपने क्लिनिक मे।
यहीकोई एक् हफ्ता बीता होगा गिरधारी, सरिता, रानी औऱ सोनिया चारों कों राज केँ बिना रहने कि आदत आरामसे पड़ने लगी थि। अब उनकी रोजमर्रा कि ज़िंदगी फिन सें पटरी पऱ थि। फिरभी राज कों सबयाद करते रहते थें। मगरअब राज केँ लिए कि भि इतना परेशान नहीं थां।
वहीं दूसरी औऱ राज कि आंखें सुभह 8 बजे खुलती हैं।
राज उठते हि अपनी नानीमा कों देखने कि कोशिश करता हैं मगर नानीमा तौ वहा आस-पास भि नहि थि। नानीमा सुभह जल्दउठ कर अपनाघऱ कां काम करनेलगी थि।
राजहाथ मुह धोकर फ्रेश होँ आता हैं औऱ सीधा नानीमा केँ पास बाहर् चला जाता हैं। नानीमा राज कों देखकर मुस्कुरा देती हैं। नानीमा लस्सी बनारही थि। नानीमा पास मे रखे लस्सी कां गिलास उठाकर राज कि तरफकर देती हैं। राज सबसे पहले नानीमा केँ पेरछू ता हैं औऱ फिन लस्सी कां गिलास पकड़कर पीने लगता हैं।
अभि थोड़ी हि देर हुईँ थि कि राज नानीमा कों बार - बारकल वाले सवालों केँ बारे मे पूछता औऱ नानीमा उसे नहि मालूम बोलकर टाल देती हैं।
राजफिन भि नानीमा कों बारबार कहानियों कों लेकर परेशान करता रहता हैं। बहोत परेशान होकर नानीमा राज कों थोडा रुककर कथा सुनाने कों बोलती हैं। राज बेसबरा होकर नानीमा सें किस्सा सुनाने कां प्रतीक्षा कररहा थां। तभी नानीमा केँ घऱ मे छोटू आँ जाता हैं। छोटू जोँ कल हि राज सें मिला थां औऱ आजराज कां अच्छा यार हौ गय़ा थां।
नानीमा छोटू कों देखकर बोलती हैं.
नानीमा: अरे छोटू अच्छा हुआ जौ तुँ आँ गय़ा। अब एक् कामकर राज कों बाहर् घुमाला ताकियह मुझेकुछ कामकर लेनेदे औऱ मेरीजान छुटे। औऱ हांउन आवारा लड़को केँ पासमत लेँ जानां।
छोटू:जी नानीमा (छोटू बहोत खुश थां कि अपनेनए साथी केँ संग देहात घूमने कों लेकरतभी राजबीच मे बोल पड़ता हैं)
राज:मगर नानीमा मे तोँ अभि नहाया भि नहि हूं।
छोटू:कोई बात नहीं भइया हम् लोगनदी मे नहा लेंगें।
नानीमा: हाँयह भि ठीक रहेगा अगरइसे तैरना आता होँ तोँ।
राजअब क्याँ बोलता। तभी नानीमा फिन सें बोल पड़ती हैं।
नानीमा: राज तुम्हें तैरना तौ आता हैं नां?
राज : हाँ नानीमा, मे विद्यालय मे स्विमिंग कॉम्पिटिशन मे हमेशा गोल्ड जीतता हूं।
नानीमा: अरे तैरने कां पढ़ने सें क्याँ काम,
राज नानीमा केँ इस प्रश्न सें अपनेसर पर्र हाथलगा कर बोलता हैं।
राज:अरे नानीमा मे तैरने केँ कॉम्पिटिशन मे हि गोल्ड लाता हूं।
नानीमा: वो ऐसा क्याँ तब तौ बहोत अच्छा हैं (इतनाबोल कर नानीमा हसने लगती हैं। )
नानीमा राज कों छोटू केँ संगनदी मे नहाने केँ लिए औऱ देहात घूमने केँ लिएभेज देती हैं। रास्ते मे छोटूउसे खेतों सें होतेहुए शॉर्टकट रास्ते सें लें जारहा थां।
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पूरा देहात हराभरा थां। चारों औऱ हरियाली कां अदभुत नज़ारा थां।
तभी छोटू कों कुछ लड़के आवाज़ देते हैं। यहसब छोटू केँ यार थें। यार क्याँ थां छोटू नें इनसभी सें दोस्ती कि नहीं बल्कि ज़बरदस्ती इनसभी सें दोस्ती करनीपड़ गयीँ,।
बातयह हैं कि छोटू इतना ताकतवर नहीं थां कि दूसरे लड़के जबउसे परेशान कर तौ उनसेलड़ सकेइस लिएयह लड़के छोटू कि सहायता करते हैं बदले मे छोटूकभी खाने केँ लिए तौ कभीकुछ पैसे अपने हि घऱ सें चुरा चुराकर इन लड़कों कों दे देता हें।
छोटू:- कालू, श्याम, मंगलअरे तुम् लोग यहां केसे?
कालू:अरे इसका बाप हैं नाँ साले नें हमकोदम मारते देख लिया तोँ सालालठ लेकर दौड़ा दिया। हम् कोनसा साले कि पत्नि बेटी कि चुदाई कररहे थें।
मंगल: किसीदिन साले कि पत्नि भि चोद देंगे।
फिन कालू औऱ मंगल दोनों एक् दूसरे कों ताली देतेहुए हसने लगते हैं।
तभी वहां सें ट्यूबवैल सें पानी भरकरचरी कों अपनीकमर पऱ लगाये मंगल कि बेहन जाती हुइ नजरआती हैं। वोँ कालू कि तरफदेख कर हल्की सि मुस्कुराती हैं। औऱ वही श्याम भि उसेदेख कर मुस्कुरा देता हैं। मंगल दोनों कों मुस्कुराता देखकर पीछे मुड़कर देखता हैं तौ उसे अपनी बड़ी बेहन नज़रआती हैं। मंगल भि अपनी बेहन कि आंखों मे देखकर अपना लुंड सहलाने लगता हैं। जब मंगल कि बेहन कि नज़र मंगल पर्र पड़ती हैं तोँ मंगल अपनी बेहन कि आंखों मे देखते हुए अपने होंटों पर्र जीभ फिराता हैं। जिसेदेख कर मंगल कि बेहन शर्मा जाती हैं औऱ जल्द जल्द चलतेहुए जाने लगती हैं।
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना – New Episode
Thanks For Reading.. wrote: Thanks For Reading..06 Mar 2019 14:40एपसोड - 8
तभी वहां सें ट्यूबवैल सें पानी भरकरचरी कों अपनीकमर पऱ लगाये मंगल कि बेहन जाती हुइ नजरआती हैं। वोँ कालू कि तरफदेख कर हल्की सि मुस्कुराती हैं। औऱ वही श्याम भि उसेदेख कर मुस्कुरा देता हैं। मंगल दोनों कों मुस्कुराता देखकर पीछे मुड़कर देखता हैं तोँ उसे अपनी बड़ी बेहन नज़रआती हैं। मंगल भि अपनी बेहन कि आंखों मे देखकर अपना लुंड सहलाने लगता हैं। जब मंगल कि बेहन कि नज़र मंगल पऱ पड़ती हैं तोँ मंगल अपनी बेहन कि आंखों मे देखते हुए अपने होंटों पर्र जीभ फिराता हैं। जिसेदेख कर मंगल कि बेहन शर्मा जाती हैं औऱ जल्द जल्द चलतेहुए जाने लगती हैं।
अबआगे.
वही दूसरी तरफराज एक् छोटी सि गुत्थी सुलझाने कि कोशिश कररहा थां।
राज कों ऐसा नहीं थां कि गालियां मालूम नहीं थि बस वोँ ऐसे लड़को सें अभि तक दूर रहता थां जौ जबरदस्ती कां रॉब झाड़े।
राज: उसकी पत्नि मतलब इसकेपाप कि पत्नि, तोँ वोँ तौ इसकी मां हुइ नाँ। 【श्याम कि तरफ इशारा करतेहुए)
कालू औऱ मंगल दोनों राज कि यहबात सुनकर एक् दूसरे कि तरफ देखने लगते हैं फिनजोर सें ताली देकर हसने लगते हैं।
कालू:अरे छोटू कहां सें पकड़ लायेइस नमूने कों, इतनी सि बात केँ लिए इतना दिमाग़ लगारहा हैं।
राज अपनेलिए नमूना सुनकर सकपका जाता हैं। कालू मंगल औऱ श्याम तीनो हट्टे कट्टे थें तोँ राज उनसे डायरेक्ट तोँ कुछबोल नहीं सकता थां इसलिए नीचे गर्दन करके छोटू कां हाथ पकड़ लिया।
छोटू: दोस्त कालू भइयायह राज भइया हैं इस सें तमीज सें बात कीजिये।
कालू: क्यूं बेयह क्याँ कोईएस। पी हैं।
छोटू:एस। पी तौ नहि हैं मगरयह वोँ जादूगर बाबा थें नाँ उनका दोहिता हैं।
(पीछे कि औऱ इशारा करतेहुए जैसेकुछ याद दिलारहा हौ)
कालू, मंगल औऱ श्याम छोटू कि बात सुनकर एक् दूसरे कि तरफ देखने लगते हैं। फिन थोडा सां सीरियस होकर कालू बोलता हैं।
कालू: वोँ हमेंमाफ करदो भइया। हम् सें गलती होँ गयीँ,।
राज: एक् मिनट एक् मिनट भइयायह अचानक सें इतना बदलाव क्यूं???
मंगल: क्यूं कि हम् तुम्हारे नानाजी जी कि बहोत इज्जत करते हें। हम् क्याँ यह पूरा देहात उनकी बहोत इज्जत करता हैं। इसीलिए तोँ जहां सें तुम्हारी तरफयह छोटू लाया हैं वहां पर्र जोँ काकी रहती हैं। हम् उनकी भि बहोत इज्जत करते हैं।
राज:ठीक हैं मगर
कालू : अब क्याँ हुआ?यह मगर क्यूं?
राज: तुम् लोग.
राज नें अभि इतना हि कहा थां कि पीछे सें एक् व्यक्ति लठ लेकर दौड़ा चला आँ रहा थां औऱ कालू, मंगल औऱ श्याम कों गालियां देतेहुए अपनेपास बुलारहा थां, जिसतरह सें वोँ बुलारहा थां पक्का तीनों कि गांड ठोकने केँ इरादे होंगे यह तौ उस व्यक्ति केँ रवैये कों देखकर कोई भि बता सकता थां।
मंगल : अरेभाग कालू, श्याम नहीं तौ आज अपने लोडेलग जाएंगे। तीनों वहां सें भागने लगते हैं।
जाते- जाते कालूराज कि तरफ देखते हुए,
कालू:(दूर जातेहुए चिल्लाते हुए बोलता हैं) छोटू तूँ इसे भि नदी किनारे लेँ आँ हम् बाकी कि बातें वहीं करेंगे।
छोटू कों एक् बार नानीमा कि बातें यादआती हैं कि उन्होंने कालू औऱ श्याम केँ आसपास भि राज कों लेँ जाने सें मना किया हैं औऱ कालू हैं कि अगर नहीं लें गय़ा तोँ मेरीबजा देगा।
राज: क्याँ सोचरहे होँ छोटूचले अपन?
छोटू:अरे दोस्त कहां चले ?
राज:नदी पर्र
छोटू : भूल गय़ा नानीमा नें क्याँ कहा थां कि राज कों उन लोगो केँ पासमत लें जानां यहउनलोग वही थें तीनों.
राज थोडा हस्ते हुए अचानक सें मुस्कुराते हुए।
राज: तोँ तुम् मुझे उनकेपास थोड़े हि लें जाओगे। तुम् तौ मुझेनदी मे नहाने लेँ जाओगे अब वोँ हमसे पहलेवही थें यहहमे केसेपता होगा।
छोटू कों राज कि बात थोड़ी देर तोँ समझ नहींआती मगरफिन समझते हुएअरे हाँयह तौ मैंने सोचा हि नहीं थां।
छोटू औऱ राज तीनोनदी कि तरफ जाने लगते हैं।
छोटू औऱ राजजब नदी केँ पास पहुंचते हैं तौ देखते हैं कालू श्याम औऱ मंगल तीनो मिलकर चिलम फूँकरहे हैं।
औऱ फिनजब नदी कि तरफराज देखता हैं तौ वहां कि चारों औऱ हरियाली कि पड़ी चादरदेख करराज अंदर हि अंदर बहोत खुश हौ रहा थां। उसेयह हरियाली बड़ी मनभावन लगरही थि। उसे क्याँ जोँ कोई भि देखता वोँ इसकी औऱ अवश्य आकर्षित हौ उठता।
राज कालू केँ पास जैसे हि पहुंचता हैं।
कालू:मगर क्याँ ? तूँ कुछ पूछना छहरहा थां क्याँ?
राज:हाँ वोँ मे (थोडा याद करतेहुए) हाँयाद आया तुम् लोग मेरे नाना कि इतनी इज्जत क्यूं करते होँ?
कालू अपने कपड़े उतारते हुएचलो रेनदी मे नहाते हुएबात करेंगे।
कालू केँ इतना बोलते हि सब नें अपने कपड़े उतारदिए औऱ नदी मे घुसगए नहाने।
अंदर सें छोटूराज कों आवाज़ देता हैं।
छोटू: आजाओ भइया जल्द आजाओफिन बात भि करलेना टैब तक देहात कि इसनदी कां मजालो।
छोटू इतनाबोल कर नहाने लगा औऱ बारबार डुबकियां लगाने लगा।
छोटूअब सोच मे पड़ गय़ा थां कि वोँ नदी मे केसेजाए। छोटू केँ संग जल्द जल्द केँ चक्कर मे अपना अंडर वेयर बनियान तोँ लाना हि भूल गय़ा थां। अब केसेनदी मे जाता।
तभी मंगल कों समझ आँ जाता हैं कि राज अपने कपड़े नहीं लायाइस लिए इतना परेशान हौ रहा हैं।
मंगल धीरे-धीरे धीरे-धीरे तैरता हुआराज केँ पास जाता हैं औऱ उसे होले सें कान मे कुछ बोलता हैं। राज मंगल कि बात सुनकर मुस्कुरा देता हैं।
दरअसल मंगलराज कों बोलता हैं कि इसनदी मे अभि सिर्फ हम् मित्र हि हैं तौ तुम् चुपचाप वहा पीछेउस चट्टान केँ पीछेजाओ औऱ कपड़े उतारकर वही सें पानी मे घुस जानां किसी कों भि पता नहीं चलेगा।
जातेहुए मंगलराज कों आंखमार देता हैं औऱ वहां सें अंडरवाटर स्वीमिंग करतेहुए कालू श्याम औऱ छोटू केँ पासचला जाता हैं एक् दम पानी केँ नीचे नीचे।
कालू: क्याँ हुआरे। क्याँ बोलने गय़ा थां तूँ भइया कों कहींडरा तौ नहींरहा थां नाँ उसे।
मंगल: नहीं नहीं भइया वोँ। (मंगल सारीबात कालू कों बता देता हैं)
कालू मंगल औऱ श्याम कि तरफदेख कर मुस्कुरा देता हैं।
राज चट्टान केँ पीछे जाकर चारों तरफ देखता हैं तोँ वहांउसे प्रकृति कि हुस्न केँ अलावा कुछ औऱ नज़र नहींआता। पूरीतरह सें सन्तुष्ट होने केँ बादराज कपड़े उतारने कां निश्चय करता हैं।
लगभग 5 मिनटबाद राज चट्टान केँ पीछेजा कर अपने कपड़े उतार देता हैं
औऱ जल्द सें जल्दनदी मे उतार जाता हैं। राज जैसे हि नदी मे उतरता हैं नदी केँ थडण्डे पानी सें एक् बार तोँ राज केँ पूरेबदन मे सिरहन दौड़ जाती हैं। राज केँ रोयें खड़े हौ जाते हैं। राज धीरे-धीरे धीरे-धीरे तैरकर बाकी लोगों केँ पास पहुंचता हैं।
कालू:अरे वाउ तुम्हारी तरफ तौ तैरना भि आता हैं।
राजहोल सें मुस्कुरा देता हैं।
तभी श्याम राज कों छेड़ने केँ लिएनदी मे एक् डुबकी लगता हैं औऱ राज कों अपने कंधों मे उठाकर हवा मे उठा लेता हैं।
राज बुरीतरह सें डर जाता हैं। मगरअब क्याँ कर सकता थां। उसने श्याम कों पानी मे जातेहुए भि तोँ नहीं देखा थां।
जैसे हि राजहवा मे होता हैं राज कि टांगों केँ बीच मे एक् मूंगफली जैसे चमड़ी लटकेहुए कालू कि नज़र केँ सामने आँ जाती हैं। अबऐसी हंसी मजाक तोँ गांवों मे सभी करते हैं। राज तोँ फिन भि नदी मे थां बच्चे तोँ विद्यालय मे एक् दूसरे कि निक्कर उतार देते हैं।
कालू जैसे हि राज कि नुनी देखता हैं तोँ उसकी भौहें तन जाती हैं।
तभीराज जोर सें नदी मे गिरता हैं। राज केँ नीचेनदी मे गिरते हि पानीजोर सें उछलता हैं औऱ सब दोस्तों पर्र पानी गिरता हैं।
श्याम कि इस हरकत सें तोँ छोटू कि भि हंसीछूट जाती हैं। राज केसे जैसे स्वयं कों संभालता हैं औऱ श्याम कि तरफ गुस्से सें देखने लगता हैं। श्याम हंसते हुएराज सें माफी मांगता हैं।
श्याम: मुझे क्षमा करदो दोस्त। अब हम् सभीलोग साथी हैं तौ थोड़ी बहोत मजाक तोँ चलती हि हैं।
तभी कालूबीच मे बोल पड़ता हैं।
कालू: तुम् सभी अभि इसी वक़्त अपनी-अपनी चड्डी उत्तरों.
कालू केँ यहबात सुनते हि तीनों चारों कालु कि तरफ देखने लगते हैं।
इसबार कालूजोर सें चिल्लाते हुए बोलता हैं।
कालू: सुना नहीं मैंने क्याँ कहा? याँ फिन तुम्हारे हथियारों कों यही मछलियों कों खिलादूँ।
कालू कां क्रोध बहोत तेज थां। यह तोँ देहात वाले भि जानते थें कि कालू वैसे तौ बहोत बदमाश हैं मगर देहात केँ लोगो केँ लिएकोई भि कामकर सकता हैं। बहोत दिलेर हैं औऱ जोँ बोल् देता हैं बिना सोचे समझेकर भि देता हैं।
श्याम, मंगल औऱ छोटू तीनो अपनी अपनी चड्डी उतारकर किनारे कि तरफ फेंक देते हैं।
तभी कालु भि अपनी चड्डी उतार देता हैं।
राज कालू कि तरफदेख रहा थां।
राज अंदर सें बहोत सहानुभूति जैसा महसूस कररहा थां। राजसोच रहा थां कि श्याम केँ ऐसे घटिया मजाक केँ लिए कालूयह सभीकर रहा हैं। मगर कालू अपनी चड्डी उतारकर किनारे कि तरफ फेंक देता हैं औऱ सब सें बोलता हैं कि उस चट्टान केँ पासचलो। उस चट्टान कि इशारा करतेहुए जहां सें राज नंगा होकरनदी मे कूदता हैं।
राज औऱ बाकीसभी बिना प्रश्न जवाब कियेउस चट्टान कि औऱ तैरते हुएचक देते हैं।
कालू मंगल कि औऱ देखकर बाहर् निकलने कां इशारा करता हैं।
अब मंगल कों भि कुछकुछ समझआने लगा थां।
मंगल बिनाडरे नदी सें बाहर् निकलकर चट्टान पऱ बैठ जाता हैं। तभी श्याम औऱ छोटू कि तरफदेख कर कालू बोलता हैं।
कालू:अब तुम् लोगो कों क्याँ अलग सें बोलू।
श्याम औऱ छोटू भि बाहर् निकल जाते हैं। बाहर् निकलते हि दोनों अपनी नुनियाँ अपने हाथों सें छिपा लेते हैं।
कालू भि नदी सें बाहर् निकलता हैं औऱ राज कों बाहर् आने केँ लिए बोलता हैं।
राज लज्जा सें पानी पानी हौ जाता हैं मगर बाहर् नहीं निकलता।
कालू: गुस्से सें देखराज तेरे नानाजी जी कि मे इज्जत करता हूं औऱ मे तेरे सें बड़ा भि हूं तौ मेरी इज्जत तुम को करनी चाहिए। बिना बिना आनाकानी केँ बाहर् निकलआए वरना हम् मे सें कोई भि तुझसे कभी भि बात नहि करेगा। औऱ तूँ ज़िन्दगी भर केँ लिए नाँ मर्द बनकर घूमेगा।
राज कों कालू कि बाकी किसीबात पर्र क्रोध नहींआता मगर नाँ मर्द वालीबात पऱ राज कों क्रोध आँ जाता हैं।
अबराज गुस्से मे होने केँ कारण बेशर्मों कि तरह पानी सें चलताहुआ बाहर् निकलकर आँ जाता हैं। श्याम छोटू औऱ मंगल कि कालू केँ संग नज़रराज कि छोटी सि नुनी पर्र पड़ती हैं।
कालू:चलो एक् अंतिम छलांग लगातई हैं अपनी दोस्ती केँ नाम.
सब साथी खड़े होकरनदी मे छलांग लगा देते हैं।
जबसबनदी सें बाहर् निकलते हैं तौ कालूराज सें कहता हैं.
कालू: हम् सभी कि नुनियाँ देखराज। जब मैंने तुम्हें हवा मे देखा तौ तेरी नुनी कों देखकर मेरे दिमाग़ खराब होँ गय़ा। हम् दोस्तों मे तेरी नुनी इतनी छोटी क्यूं।
राज: बेवकूफ मे तुम् सभी सें छोटा भि तोँ हूं।
तभी छोटूबीच मे बोल पड़ता हैं
छोटू:राज भइया तुमसे छोटा तोँ मे हूं वोँ भि पूरा 1 याँ 1.6 साल।
ऐसा बोलकर छोटू अपनई नुनी दिखाता हैं। राज देखकर चौंक जाता हैं।
छोटू कि नुनी 4.5 इंच बड़ी औऱ 2.5 सें 7 इंच केँ लगभग मोती थि। सीधे शब्दों मे कहूँ तोँ कुछ लोगों केँ ळंड केँ साइज़ कि थि।
राज नीचेझुक कर अपनी नुनी कों देखता हैं तोँ सच मे शर्मिंदा होकर रोने वालामुह बना लेता हैं।
कालू:राज केँ कंधों पर्र हाथ रखतेहुए। तूँ हमारा यार हैं भइया तुँ टेंशन मत लेँ। कपड़े पहन औऱ चल मेरेसंग।
राज औऱ बाकीसभी कि कालू केँ संगसंग कपड़े पहन लेते हैं। औऱ कालू केँ पीछे पीछेचल देते हैं।
कालू बाकीसभी कों एक् झोपड़े केँ पीछे कि तरफ लेँ जाता हैं। छोटूदेख करसमझ जाता हैं कि वोँ कहां छोटू हि क्यूं श्याम औऱ मंगल भि जान जाते हैं कि कालू उन्हें कहा लेकरआया हैं मगरराज ज़रादेर सें समझता हैं।
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Thanks For Reading.. wrote: Thanks For Reading..06 Mar 2019 14:40भाग - 9
राज नीचेझुक कर अपनी नूनजी कों देखता हैं तौ सच मे शर्मिंदा होकर रोने वालामुह बना लेता हैं।
कालू:राज केँ कंधों पर्र हाथ रखतेहुए। तुँ हमारा साथी हैं भइया तुँ टेंशन मत लेँ। कपड़े पहन औऱ चल मेरेसंग।
राज औऱ बाकीसभी कि कालू केँ संगसंग कपड़े पहन लेते हैं। औऱ कालू केँ पीछे पीछेचल देते हैं।
कालू बाकीसभी कों एक् झोपड़े केँ पीछे कि तरफ लें जाता हैं। छोटूदेख करसमझ जाता हैं कि वोँ कहां छोटू हि क्यूं श्याम औऱ मंगल भि जान जाते हैं कि कालू उन्हें कहा लेकरआया हैं मगरराज ज़रादेर सें समझता हैं।
अबआगे.
राज:यह क्याँ यह तौ नानाजी जी कां.
कालू: इशशशशश धीरे-धीरे बोलचुप चापचल
कालू पीछे सें एक् खिड़की सें राज औऱ बाकीसभी कों उसके नानाजी जी कि कुटिया मे अंदर लेँ जाता हैं।
कालू: यहां पऱ एक् दवा हैं जौ तेरी नुनी कों एक् असली लण्डबना सकती हैं। तुम्हारे नानाजी नें वोँ दवाकई लोगो कों दि थि। हमने भि वोँ यहां सें चुराकर लें ली थि जिसके बाद तुम्हारे नानाजी इस स्थान कों तालालगा कर रखनेलगे थें।
राज वो चारों तरफ मज़ार घूमता हैं तौ उसे वो इस कमरे मे चारों तरंग अजीब सि बोतलों मे बंद दवाईयां नज़रआती हैं।
कालू थोड़ी बहोत देर कि हेरा फेरी केँ बाद एक् बोतल निकाल कर लेता हैं।
कालू:राज इस मे सें 2 गोली लें लो।
अगलेसात दिन तक असर मालूम पड़ जायेगा।
राज:कीच देर सोचता हज औऱ फिन 2 गोली निकलकर लेँ लेता हैं।
कालू वापस वोँ बोतल छिपाकर रख देता हैं।
इसकेबाद सबचुप चाप बाहर् निकल जाते हैं।
कालूयह लोयह चाबीइस खिड़की कि हैं। आज सें तुम् अपने दादा कि इस झोपडी केँ मालिक। इतनाकह कर कालू, श्याम औऱ मंगल केँ संग वो सें चल जाता हैं।
छोटू:अरे बाप रे मे तोँ भूल हि गय़ा थां अम्मा बुलारही होंगी। तुमसे साम कों मिलता हुनराज भइया।
राज: छोटू कों टाटाबाय बाय कहकरवही खड़ारह जाता हैं।
राज केँ मुह मे अभि तक वोँ गोलिया थि। राज कों। वोँ खट्टी औऱ मीठीलग रही थि तौ राज उन्हें चूसता रहता हैं। राज कों बहोत स्वाद आँ रहा थां।
तभीराज वहां सें एक् झाड़ू उठाकर अपने नानाजी कि कुटिया कि सफाई करने लगता हैं। मगरराज वोँ गोलिया चूसकर इतनाखो जाता हैं कि उसे औऱ खाने कां मन करने लगता हैं।
राज थोड़ी मसक्कत केँ बाद वोँ दवा कि बोतल ढूंढ लेता हैं। राज उसमें सें कुछ 2-3 गोलियां निकाल कर अपनी हथेली पर्र रख लेता हैं। उन गोलियों कों हाथ मे रखकरराज सोचता हैं कि हैं तौ यहदवा मगर इनकाकोई साइड इफ़ेक्ट तोँ नहीं होगा नां। मां बोलती हैं ज़्यादा दवा लेने सें हमारी बॉडी कि इम्युनिटी ख़त्म होँ जाती हैं औऱ हम् दवाओं पऱ डिपेंड होँ जातें हैं।
इतना सोचने केँ बादराज एक् नज़रउन गोलियों पर्र डालता हैं फिन सोचने लगता हैं मगर इनका टेस्ट बहोत अच्छा हैं। औऱ वैसे भि यह तौ आयुर्वेदिक हैं नां तोँ इनका साइड इफ़ेक्ट नहीं होगा। औऱ अगर हौ भि गय़ा तोँ कितना एफ्फेक्ट होगा।
राज अपनी पूरी बच्चा बुद्धि लगाने केँ बाद वोँ तीनों गोलिया अपनेमुह मे डाल लेता हैं। लगभग 5 मिनटबाद गोलिया पानी बनकरराज केँ जिस्म मे घुस जाती हैं।
अबराज कों प्यास लगती लगने लगती हैं कि वही दवाओं कि बोतल केँ पास एक् औऱ छोटी बोतल मे नीलेरंग कां पानीरखा नज़रआता हि जिस पर्र लिखा थां ड्रिंक मी.
राज बिना सोचे समझेउसे एक् झटके मे पी जाता हैं। आखिरउसे प्यास भि तौ बहोत तेजलगी थि। उस पानी कों पीते हि राज कों अजीब सां लगता हैं उसका स्वाद भि किसी सोडा वाटर कि तरह थां।
राज अपने नानाजी जी केँ कमरे कि सफाई करने कि सोच नहींरह थां मगर वो एक् मोटीपरत धूल कि थि जिस कारण सें राज नें सोचा क्यूं नां इसधूल कों हटा दियाजाए। तोँ राज अपने नानाजी जी केँ कमरे कि सफाई करनेलगा।
पूरे कमरे कि सफाई केँ बाद जैसे हि राजउस खिड़की केँ पास झाड़ू लगाने लगा तोँ वो धूल कि परत औऱ स्थान सें कुछ ज़्यादा थि। राज नें बहोत झाड़ू लगायी मगर वोँ धूल बहोत गहरी थि। तोँ राज नें उसधूल कि परत कों खोदने कां निश्चय किया।
आसपास नज़र दौड़ाई तौ उसे वहां एक् फावड़े जैसाकुछ नज़रआया जोँ उसी कमरे केँ एक् कोने मे कुछ कपड़ों केँ पीछे छिपा पड़ा थां। राज नें उस फावड़े सें वो कि धूल खोदी तोँ वहां आंगन नहीं बल्कि मिट्टी थि। राज नें जैसे हि उस मिट्टी मे हाथ चलाये तौ उसकेहाथ एक् बक्से सें टकराये। वो पर्र एक् लकड़ी कां बक्शा गड़ाहुआ थां।
राज खुदाई करकेउस बक़्शे कों निकाल लेता हैं औऱ थोड़ी जोर जबरदस्ती सें उस बक्शे कों तोड़ देता हैं। बक्शे केँ टूटते हि उसमें सें एक् औऱ छोटा सां बक्शा निकलता हैं।
राज थोड़ी जोर मसक्कत करकेउस लकड़ी केँ बॉक्स कों निकाल लेता हैं। राजउस बॉक्स कों निकाल कर केँ कमरे मे पड़ी एक् आधी खाली टेबल पर्र रखतेहुए उसकी मिट्टी साफकर रहा थां। जैसे जैसेउस बक़्शे सें मिट्टी साफ होती हैं वैसे वैसेराज कि उस बक़्शे केँ अंदर क्याँ होगायह जानने कि ख़्वाहिश औऱ भि प्रबल हौ जाती हैं।
जबराज अच्छे सें बक़्शे कि मिट्टी साफकर लेता हैं तौ उसे चाबी केँ खांचे बनेहुए नहि दिखते। राजउस बक़्शे कों लेकर खिड़की केँ पास लेँ जाता हैं। जहां पऱ सूरजढल रहा थां औऱ हल्की लालरंग कि रोशनी जैसेकिस जलतीआग केँ पास सें आती हैं ठीक वैसी हि रोशनी उस खिड़की सें आँ रही थि। राजउस बक़्शे कों चारों औऱ सें घुमाकर देखता हैं कि शायद कहीं सें इसे खोलने कां कोई तरीका मिल जाये। कोई चाबी कां खाँचा याँ पिताजी केँ सूटकेस जैसा पासवर्ड लगाने वाला होँ।
राज थां तोँ बच्चा हि वोँ कहां सें दिमाग़ लगाए कि इस बक़्शे मे अगर चाबी कां खाँचा मिल भि गय़ा तौ उसकेपास कोनसी चाबी पड़ी हैं जिस सें वोँ इसेखोल लेगा। एयर अगर पासवर्ड वाला भि मिल जाये तौ उसे कोनसे पासवर्ड मिल जाएंगे सारे पासवर्ड लगाकर देखने मे तौ उसकी ज़िन्दगी गुज़र जाएगी।
मगरफिन भि राज बहुत कोशिश कररहा थां। अचानक राज कों बक़्शे केँ ऊपरबने चित्र चमकते हुए नज़रआते हैं। राज उन्हें देखने केँ लिए जैसे हि खिड़की कों पीठ देकर बक़्शे कों देखता हैं उसेकुछ नज़र नहींआता।
राज सोचता हैं शायदयह उसकी आँखों कां भृम होगा। वैसे भि वोँ केवल चमत्कार कि कहानियां पसन्द करता हैं तोँ शायदउस वजह सें उसे चारों औऱ चमत्कार हि नज़र आँ रहा हैं। याँ फिन शायदऐसा होने कि वोँ ख़्वाहिश रखता हैं। राज मुस्कुराते हुएफिन सें खिड़की कि औऱ मुड़ता हैं जैसे हि राज खिड़की कि औऱ घूमता हैं। सूरज कि लाल रोशनी उस बक़्शे पर्र बने अजीब सें चित्र केँ केंद्र पऱ पड़ती हैं।
सूरज कि किरण केँ उस चित्र केँ केंद्र पर्र पड़ते हि वोँ चित्र चमकने लगते हैं। कोईतीस चालीस सेकंड हि गुजरे थें कों वोँ चित्र इधरउधर हिलने लगते हैं औऱ बक़्शे केँ बीच मे स्थान छोड़ते हुए एक् नाली जैसे कलाकृति बना लेते हैं। एयर वोँ कलाकृति जहां पर्र ख़त्म होती हैं वहां पऱ एक् चाबी जैसा खाँचा बनाहुआ थां।
राज जैसे हि बक़्शे कों हवा मे उठाकर उस चाबी केँ खांचे कों देखने कि कोशिश करता हैं राजजोर सें चीख पड़ता हैं।
दरअसल राज कि उंगलियां जहां बक़्शे केँ साइड मे उन चित्रों पर्र थि उन चित्रों मे एक् तलवार कां स निशान बनाहुआ थां जिसेराज देख नहि पाया। वोँ उन चित्रों। नें मिलकर ऐसी तलवार बनाई थि। जिस सें राज कि बाएंहाथ कि चारों उंगलियों पऱ हल्का सां कटलग जाता हैं।
कट लगने केँ बादराज कि उंगली सें निकले खून कि दो-तीन बून्द उन चित्रों सें होतेहुए वोँ नालीनुमा बानी हुइ आकृति मे चली जाती हैं जहाँ सें वोँ चाबी केँ खांचे कि औऱ जाने लगती हैं।
राज नें सोचा अंदरकुछ सामान होगा वोँ खून लगने सें हौ सकता हैं खराब हौ जाये। उसने बक़्शे कों जल्दी सीधा करकेरख दिया।
अब तौ राज कि हालत बिल्कुल पतली हौ गई, थि। क्यूं कि एक् तोँ बक़्शे पऱ बने वोँ चित्र बिना सूरज कि रोशनी केँ भि चमकरहे थें दूसरा उसकीखून कि बूंदे वोँ नीचे गिरने कि बजाय सीधे खड़े बक़्शे मे ऊपर कि औऱ बढ़रही थि औऱ सीधी चाबी जैसेबने खांचे कि औऱ जारही थि।
राज अंदर सें बहोत डररहा थां। सोचरहा थां कहींकुछ गलत तोँ नहींकर दिया। यह अवश्य दादा कां हि कुछ सामान होगा। सभी लोग बोलते हैं कि दादा बहोत बड़े जादूगर थें।
राज अभि यहसोच हि रह थां कि खून कि बूंद चाबी केँ खांचे मे समा जाती हैं। खांचे मे जैसे हि खून कि बूंद जाती हैबक्शे स्वयं बा स्वयं खुलने लगता हैं। वोँ नाली जैसी बानी आकृति दोनों एक् दूसरे सें विपरीत दिशा मे अलग होँ रही थि।
जैसे हि बक़्शे खुलता हैं राज कों वहां पर्र सिवा एक् कागज केँ टुकड़े केँ कुछ भि नहि दिखता। राज जैसे हि उस काग़ज़ केँ टुकड़े कों अपने दाहिने हाथ सें उठाकर खोलता हैं तौ चोंक जाता हैं। यह कागज़ कां टुकड़ा पुराने ज़माने केँ नक्शे कि तरहदिख रहा थां मगरयह तौ बिल्कुल खाली हैं। औऱ उस नक्शे केँ पास मे एक् दिशा सूचक यंत्र मेरा मतलब एक् कंपास भि रखाहुआ थां।
राजउसे चारों औऱ घूमाकर देखता हैं मगरकुछ नहि दिखता। तभी हल्की सि हवा चलने लगती हैं। जिस सें वोँ नक्शा मुदकर राज केँ हाथ पऱ चिपक जाता हैं राजउसे धेनेहाथ सें पकड़े पकड़े हि हटाने कि कोशिश कररहा थां मगरसफल नहीं हौ पाया। आखिर मे हार मानकर बाएंहाथ सें उस नक्शे कों पकड़ा। जैसे हि राज नें बाएंहाथ सें नक्शे कों पकड़ा वोँ नक्शा राज कि बाएंहाथ कि उंगलियों सें खून चूसने लगा। जिसेदेख करराज एक् बार तोँ डर गय़ा मगर अगले हि समय उसकी आंखें आश्चर्य सें खुली कि खुलीरह गयीँ,।
जैसे जैसेराज कां खून वोँ नक्शा सोखरहा थां वैसे वैसेउस खाली नक्शे पर्र चित्र उभररहे थें। राज नें दरकर अपनाहाथ वहां सें हटा लिया। राज केँ हाथ हटाते हि कुछ हि समय मे राज केँ देखते हि देखते वोँ उभरेहुए सारे चित्र एक् बारफिन सें गायब हौ गए।
तभी साम होने तक राज केँ घऱ नहीं लौटने पारर नानीमा परेशान हौ रही थि। नानीमा नें घऱ पऱ छोटू कों बुलारखा थां। छोटूरौ रहा थां औऱ नानीमा छोटू पर्र चिल्ला रहा थां। राज नानीमा कि आवाज़ सुनकर अपने नानाजी जी केँ कमरे मे उस बक्शे कों छिपाकर खिड़की बैंडकर देता हैं औऱ बाहर् उस खिड़की कों तालालगा कर भागता हुआ नानीमा केँ पासचला जाता हैं।
नानीमा: राज बेटा। तूँ ठीक तोँ हैं नाँ? कहा थां इतनीदेर सें? क्याँ कोई तुम्हें परेशान कररहा थां? बता बेटा वोँ कोई भि हौ आज उसकीखेर नहि। उसकी सारी पुश्तों कों मिटा दूंगी मे बात क्याँ हुआ थां?
राज: नानीमा नानीमा क्याँ हुआ? आप् इतना परेशान क्यूं हौ रही हौ। वोँ क्याँ हैं नाँ नहाने केँ बाद मे देहात कि हरियाली देखकर उसी मे खो गय़ा थां तौ यही अपनेघऱ केँ पीछे घूमने लग गय़ा थां। वोँ तौ आपकी आवाज़ सुना तोँ दौड़ा दौड़ा चलाआया। औऱ फिन आपनेयह भि नहीं बताया कि नानाजी जी केँ झोपड़े केँ पास मे सें नदी होकर गुजरती हैं। वरना इतनीदूर नहाने हि नहीं जाता। औऱ आप् यहां छोटू कों रुलारही हैं। लेँ दे केँ यही तोँ एक् मित्र बना हैं मेराउसे भि आप्.
तभी नानीमा राज कि बात कों काटकर.
नानीमा: बसबस इतनी गलतियां निकालने कि ज़रूरत नहीं हैं। औऱ तुँ नें क्याँ कहा, घऱ केँ पीछे? कहीं तूँ नानाजी जी केँ झोपड़े मे तौ नहीं गय़ा थां?
राज: कैसीबात करती होँ नानीमा वोँ झोपड़ा तोँ लॉक हैं।
नानीमा : मतलब तूँ जाने कि कोशिश तौ कर हि रहा थां। हैं नां?
राज: नहीं वोँ तोँ मे। हाँ तोँ मे यहदेख रहा थां कि उसका ताला मजबूत तौ हैं नां।
नानीमा राज केँ कान पकड़ते हुए
नानीमा: बदमाश चल अंदर तेरीआज खेर नहीं।
छोटू अपनेघऱ चला गय़ा, राज नानीमा केँ संगघऱ मे,
अब तोँ रोज नानीमा राज कों दिनरात नईनई कहानीयां सुना देती थि।
मगर एक् बातआज तक नानीमा कों परेशान कियेहुए थि कि मैंने राज कों जबराज पहलीबार कथा केँ लिए बोला थां तोँ उसेवही उस तिलिशमी आईने कि स्टोरी क्यूं सुनाई?
यूँही कहानियां सुनते सुनाते औऱ राज कि बदमाशियां झेलते हुएराज औऱ नानीमा कों पता हि नहींचला कि गर्मी कि छुट्टियां कब समाप्त हौ गयीँ,।
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना - Continue reading for full story
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