बिन सुरक्षा "बुआ" के गर्भग्रह मै प्रवेश -❤️ 1 - Garma Garm Sex – New Episode
पिछला भाग --- अचानक वोँ उठा औऱ कमरे सें बाहर् जानेलगा। मे उसे रोकने केँ लिए पकड़ा पर्र उसने मुझे धक्का देखरखाट मै वापस फेंक दिया अपना गाउन पहना औऱ जल्दी उसके पीछे गई पर्र वोँ खिड़की सें जा चुका थां। फिन भि तसल्ली केँ लिएउसे सारेघऱ मै ढूंडा पर्र वो नहि मिला! मे खुश थि पर्र जानना भि चाहती थि कि वोँ कौन थां। अबआगे.
बिन सुरक्षा "फूफी " केँ गर्भग्रह मै प्रवेश - 3
अब अगलाभाग -.=
फिनकुछ वक़्त तक सभीकुछ नॉर्मल चलरहा थां नं कोईइस तरह कि घटना हुईँ, टाइम बीतता गय़ा औऱ देखते हि देखते 2महीने निकलगए। मे फूफी कुशुमलता कि औऱ अधिक आकर्षित होनेलगा थां पऱ अब मे उनकेसंग रात केँ अंधेरे मे चुपके सें नहीं बल्कि खुलम खुल्ला सेक्स करना चाहता थां, पऱ ये होगा केसेबस यही सोचता रहता थां,
एक् दिन मे सुभह सुभह नहाकर कमरे मे बाहर् एक् दम नंगा खड़ा थां, औऱ भीगे होने औऱ हल्की हवा कि वजह सें लन्ड भि खड़ा थां। मे अपने कपड़े पहनरहा थां कि तभी चाची कमरे मे आई औऱ चाची कि नज़र एक् लम्हा कों मुझसे मिली औऱ फिन लन्ड पऱ फंस गई। वोँ आंखे फाड़कर मेरे लन्ड कों देखरही थि। यहसभी कुछ हि सेकंड केँ लिए थां।
मुझेकुछ समझ नहि आया लज्जा सें लाल होँ गय़ा औऱ मे वापस बाथरूम मे घुस गय़ा। अब मे अंदर नंगा भीगा खड़ा थां। मुझेठंड भि लगनेलगी थि, क्योंकि कपड़े बाहर् हि थें औऱ मन मे यह भि सोचरहा थां पता नहि फूफी मेरे बारे मे क्याँ सोचरही होंगी।
कि तभी कुशुमलाता फूफी नें बाथरूम कां दरवाजा धीरे-धीरे सें खटखटाया औऱ बोलीं-
फूफी: तुम् यहां क्याँ कररहे थें? तुम् तौ चलेगए थें नाँ नहाने?
मे: हां चाची, मे चला गय़ा थां। पर्र मेरे कपड़े बाहर् हि रहगए थें बस उन्हें हि लेनेआया थां कि तभी आप् आँ गई।
फूफी: अच्छा, चलो वोँ सभी तौ ठीक हैं, अभि आओ बाहर्।
मे: नहि आँ सकता।
फूफी (हैरानी सें): क्यूं?
मे (शरमाते हुए): मैंने कपड़े नहि पहनेहुए हैं, टॉवल औऱ कपड़े मेरेरूम पर्र हैं। आप् थोड़ी देर केँ लिए बाहर् जाइए: मे दौड़कर अपनेरूम मे चला जाऊंगा।
फूफी: अरे नहि। मे बाहर् तक नहि जा सकती। तुम् दरवाजा थोडा सां खोलो मे तुन्हें तोलिया पकड़ा देती हूं।
मे: नहीं फूफी आप् प्लीज़ बाहर् जाइएबस थोडा मे स्वयं लेँ लूंगा।
फूफी: नं बाबा न्,, मुझे बहोत ज़ोर सें टॉयलेट लगी हैं मे नहीं तोँ कपड़ो मे हि कर दूंगी। तुम् दरवाजा खोलो।
मे: अरे फूफी पऱ मैंने कपड़े नहि पहने हैं। केसेखोल दूं दरवाजा?
फूफी: एक् काम करती हूं। मे दीवार कि तरफ मुंह करके खड़ी होती हूं। तुम् दरवाजा खोलकर बाहर् निकलो औऱ जल्द सें अपने कमरे मे चलेजाओ औऱ मे बाथरूम मे चली जाऊंगी।
मे: क्याँ फूफी आप् भि न् चलोठीक हैं।
फिन फूफी अपनेकह अनुसार दरवाजे केँ दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हुईँ, मैंने दरवाजा खोला औऱ बाहर् आया। फूफी बाथरूम मे गई औऱ मैंने सोचाभाग करचला जाऊं अपने कमरे मे। जैसे हि मैंने दौड़ा तौ भीगे होने कि वजह सें पांव फिसला औऱ मे गिर गय़ा मेरीकमर औऱ पेर पर्र लग गई।
दर्द तौ बहोत तेजहुआ पऱ मैंने जोर सें आवाज़ नहि कि। क्योंकि रात कां टाइम थां, औऱ करीब-करीब 11 बजरहे थें। सभीसो रहे थें, तोँ चिल्लाने सें सभी घबरा जाते। पर्र गिरने कि आवाज़ इतनी थि, कि बाथरूम मे फूफी कों सुनाई पड़ गई।
एक् दो मिनट मे जमीन पर्र नंगा पड़ा रहा, औऱ जैसेहोश आया तौ उठने कि कोशिश कररहा थां। क्योंकि पेर मुड़ गय़ा थां तोँ दर्द हौ रहा थां औऱ कमर कां पता नहि,, आहिस्ता जैसे तैसे कमरे तक आया, किसीतरह सें बस तोलिया लपेटकर खाट मे लेट गय़ा कुछदेर बाद फूफी बाथरूम सें आकर सीधे मेरे कमरे मे आँ गई। मुझे लेटाहुआ औऱ दर्द सें करहाते हुएदेख कर मुझे देखते हुए बोलि-
फूफी: मुझेकुछ गिरने कि आवाज़ आई थि। मे नहारही थि इसलिये बाहर् नहि आँ पाई।
मे: हां वोँ थोडा पांव फिसल गय़ा थां तौ गिर गय़ा।
फूफी मेरे सामने खड़ी थि। वोँ उस टाइमनहा करआई थि औऱ केवल मैक्सी पहनेहुए थीं लगता हि हैं फूफी मेरे घिरने कि आवाज़ मे जल्द बाजी मे केवल मेक्सी पहनकर बाहर् आँ गई। खेर जोँ भि होँ पर्र उनकेइस अंदाज सें मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। मेक्सी उनके हल्के गीले जिस्म सें चिपकरही थि खासकर उनके बूब्स औऱ गांड पऱ। इससे उनके उभारदेख करसाफ पताचल रहा थां कि उन्होंने अंदर ब्रा पेंटी नहि पहनाहुआ थां।
अब तक मेरा दर्द करीब ख़त्म हौ चुका थां। पर्र फूफी कों ऐसेदेख कर मुझे थोड़ी कसमस होनेलगी औऱ नां जाने क्यूं मैंने दर्द होने कां नाटक जारीरखा।
फूफी मेरेबैड मे बैठ गई। मैंने चादरउठा कर अपने पैरों सें लेकरकमर तक डालली। फूफी केँ छूने सें जिस्म मे अजीब सें तरंग दौड़रही थि, जिसका सीधाअसर लन्ड पर्र पड़रहा थां। चादर मे मेरी लुल्ली नें तम्बू बनाना शुरुआत कर दिया थां औऱ फूफी कि नज़र लन्ड पर्र जारही थि जौ मुझेसाफ साफ दिखाई पड़रहा थां। फिन मैंने फूफी सें कहा-
मे: फूफी रात बहुत हौ गई आप् थक भि गई हौ। आप् जाइए जाकरसो जाइए। सुभहफिन आपकोकाम करना हि हैं।
फूफी: नहि, तुम्हारे पेर मे चोटआई हैं, इसे छोड़कर नहि जाऊंगी थोडा इसकी सिकाई कर देती हूं।
मे: अरे फूफी, मेरेपास क्रीम रखी हैं दर्द केँ लिए, मे लगाकर सो जाऊंगा यह सिकाई विकाई रहनेदो।
फूफी: तौ बताओकहा रखी हैं, मे लगा देती हूं।
मे: आप् मत परेशान होँ मे लगा लूंगा।
फूफी (डांटते हुए):समझ मे नहि आता, कि क्याँ बोलरही हूं। मे लगा देती हूं तोँ चुपचाप लगाने दे औऱ बेटा मे तेरी फूफी हूं कोई पराई नहि जौ तूँ मनाकर रहा हैं।
फिन मे कुछ नहि बोला औऱ उन्हें कहा फूफी मेने अलमारी कि दराज मे मूवरखी हैं फूफी उठी औऱ मूव लेँ आई।
उन्होंने मुझेबेड पर्र सीधेलेट जाने कों कहा, तौ मे वैसे हि चादर अपने जांघ सें लेकर सीने तक डालकर लेट गय़ा।
फूफी नें पूछा-
फूफी: कहां दर्द हौ रहा हैं?
मे: एड़ी सें घुटने तक।
फिन फूफी नें मूवली उसमे सें क्रीम उंगलियों पऱ लेकर पांव मे मालिश करनेलगी।
उनकाहाथ लगते हि सनसनी सि फैल गई पूरे जिस्म मे। लन्ड तौ पहले हि खड़ा होना शुरुआत होँ चुका थां अब तोँ चादर मे पूरा टेंटबना चुका थां मेने अपने दोनो हाथों कों ऊपर सें रख दिया। फूफी केँ हाथों केँ स्पर्श सें मुझे बहोत चैनमिल रह थां। मे आंखबंद करके लेटाहुआ थां।
अब फूफी नें पांव केँ पंजे कों हाथ मे उठाकर मालिश करना शुरुआत किया। हम् कुछइस तरह सें थें कि मे बेड पऱ सीधा लेटाहुआ थां, औऱ फूफी मेरेपेर केँ पास सामने बैठी हुई थि, औऱ मेरेपेर कों अपनीगोद मे रखकर बैठी थि औऱ मूव सें मालिश कररही थि।
वोँ पांव कि उंगलियों मे अपनी उंगलियों कों फसाकर खींचती, कभी पंजे कों दबाती। फिनऐडी पऱ पकड़कर मालिश करती। उनके रसीले हाथ बहोत हि सुखद अहसास देरहे थें। एक् तौ वैसे हि ठंड कां मौसम थां। बाहर् ठंड बढ़ती जारही थि औऱ फूफी केँ स्पर्श पाकर मेरे अंदर गर्मी बढ़ती जारही थि।
फूफी धीरे धीरे मालिश करते घुटनों तक आँ गई। वोँ मुझसे बातें कर रहती थि, पर्र उनका ध्यान मेरे तंबू पर्र जारहा थां।
फूफी: बताते जानां कहां पऱ ज़्यादा आराममिल रहा मालिश सें।
मे: फूफी घुटनों कों रहनेदो आप् बस नीचेऐडी पऱ हि करो।
फूफी: अरे क्यूं,,, पूरी मालिश करनी चाहिए पताहे तुम को इससे नसों मे खिंचाव दूर हौ जाता हैं।
मे: पर्र फूफी दर्द तोँ बसऐडी पऱ हौ रहा हैं।
फूफी: वोँ तेरीबात ठीक हि हैं पर्र अगर घुटनों तक कि जाए तौ सही होता हैं।
मे: जैसे आपकी मर्ज़ी फूफी,,,,
फूफी: हम्म्म,,, सबाश बेटा केसालग रहा हैं तुम्हारी तरफ?
मे: चाची बहोत अच्छा लगरहा हैं। आज बहोत थक भि गय़ा हूं बार-बार सामान ऊपर नीचे करने सें।
फूफी (डबल मीनिंग बात करतेहुए): हां समान अधिकऊपर नीचे करने सें थकान तोँ आँ हि जाती हैं।
मे: (उनकीइस बात पर्र ज़्यादा ध्यान नाँ देतेहुए): हमम।
बस इतना हि जवाब दिया।
इसी तरह सें हमारी बातें चलरही थि। फिन वोँ कॉलेज केँ बारे मे पूछने लगी औऱ यहा-वहां कि बातचल रही थि। वोँ अच्छे सें मालिश कररही थि। मुझे अच्छा फील होँ रहा थां तौ मे आंखबंद कर केँ शांतलेट गय़ा।
थोड़ी देर मे जब फूफी नें देखा कि मे तौ आंखबंद किए हूं तौ उन्होंने मुझे आवाज़ दि। पऱ मैंने कोई जवाब नहि दिया। फिन उन्होंने मेरेपेर कों हिलाया जिससे मेरीकमर भि हिल गई औऱ लन्ड भि लहरा गय़ा चादर केँ अंदर।
फूफी वैसे हि रुक गई। उनकाहाथ मेरी जांघ पऱ थां चादर केँ ऊपर सें। कमरे मे बिल्कुल सन्नाटा छा गय़ा कुछदेर केँ लिए। मुझे फूफी कि सांसों कि आवाज़ सुनाई देनेलगी वोँ भि जोरजोर सें, तब मैंने धीरे-धीरे सें अपनी थोड़ी सि आंखेखोल कर देखा तोँ फूफी एक् टक मेरे लन्ड कों देखरही थि औऱ उनकी सांसे बहोत तेजचल रही थि। तभी मेरे दिमाग़ मे मस्ती सूझी। मैंने नाटक करतेहुए फिन सें अपनीकमर हिला दि जिससे मेरा लन्ड फिन सें लहरा गय़ा। फूफी अभि भि उसे घूरेजा रही थि।
फूफी कों इसतरह अपने लन्ड कों देखते हुए मुझसे कंट्रोल नहि हौ रहा थां औऱ लन्ड मे तनाव बढ़ने लगा। लन्ड झटके देनेलगा औऱ थोडा वीर्य सें चादर पऱ गीले आकार कि गोलाकृति बननेलगा।
मे फूफी केँ चहरे कि तरफदेख रह थां। वोँ कामुक होँ रही थि, औऱ उनकी आंखों मे वासना साफझलक रही थि। फूफी धीरे-धीरे सें अपना चेहरा चादर केँ ऊपर सें लन्ड केँ पासलाई औऱ वीर्य सें गीले होँ रहे हिस्से कों सूंघने लगी। उनकीनाक बिल्कुल मेरे लन्ड कों छूने केँ लगभग थि। तभी मैंने जानबूझ कर हल्का सां झटका दिया तोँ लन्ड उनकीनाक औऱ लिप्स बीचटच हौ गय़ा औऱ एक्-दम फूफी केँ मुंह सें अहह निकल गई, औऱ उनका जोँ हाथ मेरी जांघ पर्र रखाहुआ थां, उससे मेरी जांघ कों भींच लिया। पर्र मे वैसे हि लेटारहा। फूफी कि धड़कने इतनी तेज़चल रही थि, कि मे उनकी आवाज़ साफसुन पारहा थां। फूफी ज़ोर-ज़ोर सें सांस लेँ रही थि।
फूफी नें जैसे हि मुझे देखने केँ लिएसिर ऊपर किया मैंने जल्दी आंखेबंद करली औऱ इसे नाटक करनेलगा जैसे बहोत गहरी नींद मे हूं। फूफी नें हांथ बढ़ाकर लन्ड केँ पास लेकरआई। मैंने मन मे सोचा कि आज तोँ दिवाली मन गई लगता हैं, पऱ अचानक सें फूफी रुक गई। शायद उनकेमन मे खयालआया होँ कि यह वोँ क्याँ कररही थि। फिन वोँ उठकर जानेलगी।
मुझेलगा कि सभी उम्मीद पर्र पानीफेर कर फूफी जारही थि। मे दुःखी होँ गय़ा। पऱ तभी फूफी फिनरुक गई औऱ वापसआकर मेरीकमर केँ पासबैठ गई। उन्होंने मुझेफिन सें आवाज़ लगाई पऱ मे कुछ नहि बोला। मे देख्ना चाहता थां कि फूफी आखिर चाहती क्याँ थि।
तभी मेरे पूरे जिस्म मे सिहरन सि दौड़ गई। क्याँ बताऊं वोँ एहसास कैसा थां। चादर केँ अंदर मेरा लन्ड अपने पूरे शबाब पर्र थां। मुझे चादर केँ ऊपर सें अपने लंड पऱ कुछ गीला रसीले सां फीलहुआ।
मैंने थोड़ी आंखेखोल कर देखा तोँ फूफी नें अपनीजीभ मेरे लन्ड पऱ लगाई हुईँ थि औऱ चादर केँ ऊपर सें उसे हल्के सें चाटरही थीं।
फूफी नें अपना मुंहखोल कर लन्ड कों ऐसे मुंह मे लें लिया थां जिससे लन्ड तौ उनके मुंह मे थां पर्र मे उनसेटच नहि हौ रहा थां।
अब मुझसे कंट्रोल नहि हौ रहा थां, तोँ मैंने एक्-दम सें आँखें खोली, औऱ फूफी सें कहा-
मे: यह आप् क्याँ कररही हें आप् फूफी?
वोँ हड़बड़ा करउठ गई औऱ वापस जानेलगी। तौ मैंने एक्-दम सें उनकाहाथ पकड़ लिया, औऱ फूफी कों अपनेपास खींच लिया।
फूफी मेरेऊपर आँ गई।
मैंने कहा:यह आप् क्याँ कररही थि?
फूफी: मे, कुछ भि तौ नहि कररही थि। तुम्हारे पांव मे मोच हैं तौ उसे मालिश कररही थि।
मे: मोचपेर मे हैं औऱ आप् कहीं औऱ मालिश कररही थि।
फूफी: नहि तौ ऐसाकुछ भि नहि हैं।
मे: तोँ फिन आप् भाग क्योरही थि?
अब फूफी एक् दम शांत होँ गई थि। पर्र उनकी सांसे बहोत तेजचल रही थि।
मे एक् हाथ सें उनके हांथ पऱ रखा औऱ कहा-
मे: फूफी, मे बहोत देर सें आपकोदेख रहा हूं, कि आप् क्याँ कररही हैं।
फूफी: सॉरी, मुझसे कंट्रोल नहि होँ पाया।
मे (शरारती स्माइल देतेहुए): सॉरीकिस बात केँ लिए?जब कुछ किया हि नहि।
फूफी (अचंभे सें मेरीतरफ देखते हुए): क्याँ मतलब?
मे: मतलबयह कि आप् जौ करना चाहते थें, वोँ तौ कर हि नहि पाई।
फूफी शरमा गई।
मे: मामाजी कि याद आँ रही हैं क्याँ फूफी?
फूफी ( नाटकीय क्रोध करतेहुए): हट बदमाश!
मे: अरे फूफी। अब शर्माइये मत। इतनी भोली आप् भि नहि जितनी बनरही हें औऱ उतना छोटा मे नहि, जितना आप् समझरही हैं।
एक् बार खिदमत कां मौका दीजिए।
बहोत हि खूबसूरत लाजवाब औऱ मदमस्त भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा अगले रोमांचकारी धमाकेदार औऱ चुदाईदार एपसोड कि प्रतिक्षा रहेगी जल्द सें दिजिएगा
बिन सुरक्षा "बुआ" के गर्भग्रह मै प्रवेश -❤️ 1 - Garma Garm Sex – New Episode
मे: अरे फूफी। अब शर्माइये मत। इतनी भोली आप् भि नहि जितनी बनरही हें औऱ उतना छोटा मे नहि, जितना आप् समझरही हैं।
एक् बार खिदमत कां मौका दीजिए।
बिन सुरक्षा "फूफी" केँ गर्भग्रह मै प्रवेश -4
अबआगे.
ऐसेबोल कर मैंने फूफी कां हाथ पकड़कर अपने लन्ड पर्र रख दिया, औऱ चादर केँ ऊपर सें हि लन्ड कों उनके हांथ मे पकड़ा दिया।
फूफी नें अपनाहाथ एकदम सें हटा दिया औऱ मेरे मुंह पर्र थपड़जड़ दिया, बेशर्म अपनी फूफी केँ संगगलत काम करता हैं( नाटक करतेहुए)
मे फूफी आप् नाराज मत होना पर्र सच मे आपको मनपसंद करता हूं, एक् बारमान लीजिए आपकोखुश कर दूंगा। बहुतदेर तक आपस मे संवाद हुआ औऱ अंत मे फूफी मान गई।
अब फूफी लन्ड कों पकड़कर उसे हल्के-हल्के सहलाने लगी। औऱ मे वैसे हि लेटारहा। फिन उसने मेरी जांघ पर्र अपनाहाथ रखा।
कुशुमलता फूफी नें चादर केँ ऊपर सें हि लन्ड रगड़ने कि स्पीड बढ़ा दि। फूफी बोलकुछ नहि रही थि, बस लन्ड हिलाए जारही थि। अब मुझसे कंट्रोल नहि होँ रहा थां। मैंने फूफी कां हाथ एक्-दम सें लन्ड पऱ सें हटाया, औऱ जल्दी चादरहटा दि, औऱ एक् हि झटके मे फूफी कों खींचकर उनके मुंह कों अपने लन्ड पर्र रखा, औऱ हल्का सां दबाव डाला। इससे लन्ड फूफी केँ मुंह मे चला गय़ा।
अचानक हुईँ इस हरकत सें फूफी घबरा गई। उन्हें समझ हि नहि आयायह क्याँ हुआ थां। वोँ छटपटाने लगी औऱ लन्ड मुंह सें निकालने कि कोशिश करनेलगी। मैंने फूफी कां सर पकड़कर लन्ड पर्र दबाएरखा औऱ फूफी सें कहा।
मे: फूफी घबरा क्यूं रही हौ? लन्ड कों प्रेम सें चूसिए।
फूफी ( मुंह सें आवाज़ नहि निकलरही थि): मेरेतरफ देखते हुएसिर हिलाकर मनाकर रही थि।
मे: अरे फूफी। कौन सां आप् पहलीबार मुंह मे लें रही हौ लन्ड।
अधिकमत बनो फूफी। मुझेसभी पता हैं आप् केसेमजे सें लन्ड चूसती होँ मामाजी कां। आप् तोँ अनुभवी खिलाड़ी हौ।
वैसे फूफी मामाजी कां लन्ड मेरे सें बड़ा हैं याँ छोटा?
फूफी: लंबाई मे तौ करीब बराबर हैं पऱ तेरा मोटा ज़्यादा हे औऱ खासकर केँ टोपला।
मे: बड़ा आश्चर्य औऱ प्रसन्नता सें भर गय़ा औऱ फूफी कों देखने लगा। फूफी आप् निश्चित होकर मेरासंग दो मे आपको असिमसुख कि प्राप्ति करवाऊंगा पक्का।
मेरीयह बातसुन करअब फूफी शांत होँ गई। वोँ मुझे आश्चर्य सें देखरही थि, पऱ अब भि चूस नहि रही थि। तोँ मे फिन सें उनकासर पकड़कर उसे अपने लन्ड पर्र ऊपर-नीचे करनेलगा, औऱ फिन फूफी नें उसे अपने मुंह मे लेना शुरुआत कर दिया। अब फूफी भि मूड मे आँ रही थि।
एक् हाथ सें उन्होंने लन्ड कों पकड़कर ऊपर-नीचे करना शुरुआत किया, औऱ लन्ड केँ टोपे कों होठों मे फसाकर चूसने लगी, औऱ अंदर तक लेँ रहीं थि।
साथियों,, मे वोँ फीलिंग केसे भि व्यक्त नहि कर सकता, जोँ उस वक़्त मे फीलकर रहा थां। मे जैसे जमीन पऱ हि नहि थां उस वक़्त। मेरी आंखे एक्-दम बंद थि। फूफी लन्ड कि खाल कों नीचे खींचकर सुपारे कों होठ केँ बीच टाइट करके अंदर लेती औऱ एक्-दम सें सांस अंदर खींच लेती। जिससे लन्ड औऱ मुंह केँ बीच वैक्यूम जैसाबन जाता औऱ लन्ड कां सुपारा एक् दम ठंडा सां पड जाता।
उस समय तोँ जैसे मेरी सांस हि रुक जाती थि कुछ लम्हा केँ लिए। औऱ जैसे फूफी सांस वापस छोड़ती, मेरे मुंह सें अहह… निकल जाती।
तौ फूफी मेरा लन्ड गजब तरीके सें चूसेजा रही थि। मेरी बर्दाश्त करने कि क्षमता समाप्त होते महसूस हौ रही थि। मुझेलगा कि अगर एक् बार औऱ फूफी नें यही हरकत कि लन्ड केँ संग, तोँ पानीछूट जायेगा।
मैंने जल्दी हि फूफी केँ मुंह सें लन्ड हटाकर उन्हें अपनेऊपर खींच लिया, औऱ उसके होंठो कों अपने मुंह मे लेकर चूसने लगा। फूफी पूरी मेरेऊपर लेटी हुइ थि। मे तौ पूरा नंगा हि थां, औऱ फूफी केँ नंगे जिस्म पऱ बस एक् पतली सें मैक्सी थि सफेदरंग कि। मैंने फूफी कि गांड पऱ अपने दोनों हाथरखे औऱ किस करतेहुए गांडजोर सें मसलने लगा।
उनकी गांड इतनी रसीले थि, कि बसउसे छोड़ने कां मन हि नहि कररहा थां। अपने दोनों हाथों केँ अंगूठों कों गांड कि दरार मे रखकर औऱ बाकी उंगलियों कों गांड पर्र फैलाकर गांड कों खींचरहा थां जैसे फाड़दूं गांड कों। फूफी कों दर्दहुआ तोँ एक्-दम चिहुंक उठी, औऱ गांड हिलाने लगी।
मैंने गांड कों खींचना बंदकर दिया औऱ उंगली सें मैक्सी गांड कि दरार मे घुसा दि। फूफी कि बुर मैक्सी केँ ऊपर सें लन्ड सें रगड़खा रही थि। मैंने हाथनीच लेँ जाकर मैक्सी कों ऊपर उठाना शुरुआत किया, औऱ कमर तक लेँ आया। मे
फूफी केँ होंठो कों मुंह सें निकाल कर फूफी कों प्रेम सें देखने लगा।
फूफी भि वासना भरी नजरों सें मुझेदेख रही थि। फिन फूफी उठकर बैठी औऱ स्वयं हि अपनी मैक्सी निकाल कर फेंक दि।
अब फूफी एक् दम नंगी थि। उनकी बुर उठी हुईँ थि, औऱ बुर केँ ऊपर हल्के सें बाल थें। उनके 36″ केँ बूब्स औऱ 36″ कि गांड बिल्कुल शेप मे थि, जिसेदेख कर लौंडा फनफनाने लगा।
मैंने जल्दी फूफी कों नीचे लिटाया, औऱ उनकेऊपर उल्टा लेट गय़ा। मेरा मुंह उनकी बुर पर्र औऱ उनके मुंह मे मेरा लन्ड थां। ज़ोर-ज़ोर सें दबाकर हम् एक्-दूसरे कों चूसरहे थें। मे फूफी कां मुंह ज़ोर-ज़ोर सें चोदने लगा जिससे बिस्तर हिलने लगा औऱ चर्र चरर्र आवाज़ होनेलगी। फिन मे रुक गय़ा औऱ फूफी केँ मुंह सें लन्ड निकाल लिया।
फूफी: क्याँ हुआ?रुक क्यूं गए? कितना मज़ा आँ रहा थां कपिल।
मे: फूफी, बिस्तर तोँ अभि सें हंगामा करनेलगा। ऐसे हि हुआ तौ सबकोपता चल जायेगा कि फूफी-भतीजे कि घमासान चुदाई चलरही हैं।
फूफी (शरमाते हुए): बेशर्म, अच्छा तोँ फिन किया क्याँ जाए? तुम्हीं सोचोकुछ।
तब मैंने उन्हे बैड सें नीचे खड़ा किया औऱ गद्दे कों नीचे जमीन पऱ डाल दिया।
फूफी: वाउ!यह बड़ातेज मन लगाया। अब चाहे जितना उछलकूद होँ, यह आवाज़ नहि करने वाला, औऱ नां हि टूटेगा, पऱ दो गद्दे डाल नीचे।
मे: फूफी आप् बेड पऱ लेटिए, मगर अपनासिर बाहर् कि तरफ औऱ पेर अंदरबेड पऱ रखिए।
फूफी (सोचते हुए): क्याँ? मुझेकुछ भि समझ नहि आया, क्याँ करनेबोल रहा तूँ।
मैंने फूफी कों पकड़कर बेड पर्र ऐसे लिटाया कि उनकासर बेड केँ किनारे पऱ थां औऱ बाकीबदन पीछेबेड पऱ।
फूफी: कपिलयह क्याँ कररहे हौ? खाट नीचे लगाया हैं। मुझेबेड पऱ ऐसे लिटारहे होँ। दिमाग़ काम नहि कररहा क्याँ तुम्हारा?
मे: अरे फूफी जी, आप् देखते तोँ जाइए। आज ऐसे प्रेम करूंगा, जैसेआज तक किसी नें नहि किया होगा आपकेसंग।
फूफी: ओहसुन। तुम्हारे मामाजी केँ अलावा आज तक किसी केँ संग मैंने कुछ नहि किया समझे।
मे: हां तोँ आज तोँ कररही हौ नाँ।
फूफी: हां, चलो अबदेर मतकरो, औऱ जल्द मेरेऊपर चढ़जा। अबरहा नहि जारहा मुझसे।
मे: अरे मेरी फूफी जी, अभि तोँ शुरुआत भि नहि हुआकुछ, औऱ आपसे अभि हि बर्दाश्त नहि हौ रहा।
मे फूफी केँ मुंह मे अपना लन्ड डालकर ऊपर उल्टा लेट गय़ा, औऱ उनकी बुर कों अपने मुंह मे लेँ लिया।
मे: फूफी, अपने पैरों कों मेरेगले मे डालकर टाइट पकड़ लीजिए औऱ आपने हाथों सें मेरीकमर कों टाइट पकड़ लीजिए।
फूफी (डरतेहुए): तुम् आखिर करना क्याँ चाहररहे होँ? मुझेसमझ नहि आँ रहा।
मे: डरोमत, मे जैसा कहता हूं वैसा करिए।
फिन फूफी नें मुझे वैसे हि पकड़ा जैसे मैंने समझाया थां। उनके पकड़ते हि मैंने बेड सें थोडा पीछे होकर चाची केँ नीचेहाथ डालकर उनको पकड़ लिया, औऱ खड़ा होँ गय़ा। फूफी घबरा गई औऱ मुंह सें लन्ड निकाला औऱ बोलि-
फूफी: पागल हौ गए होँ क्याँ? यह क्याँ कररहे होँ? नीचे उतारो, मे गिर जाऊंगी।
मे: कुछ नहि होगा। आप् पांवफसा लो औऱ मेरीकमर पकड़े रहिए। औऱ लन्ड मुंह मे लो।
फूफी नें जैसे हि लन्ड मुंह मे लिया मैंने उनकी बुर पऱ मुंह लगाया औऱ जोर सें धक्के देकर फूफी कां मुंह चोदने लगा।
मे अपने दोनों हाथ कों फूफी कि कमर मे फसाकर उनकी गांड कों दबाएहुए थां, औऱ बुर मे जीभडाल कर बुर कों जीभ सें चोदरहा थां।
तभी फूफी कां जिस्म अकड़ने लगा औऱ फूफी झड़ गई। उनका कामरस ज्वालामुख़ी केँ लावे केँ जैसेफूट पड़ा। कामरस इतना अधिक थां कि मेरे मुंह सें होतेहुए फूफी कि कमर सें नीचेआता हुआपेट औऱ बूब्स तक पहुंचे लगा। फूफी अब औऱ देर तक इस पोजीशन मे नहि रह सकती थि।
3 मिनट तक इन पोजिशन मे एक्-दूसरे केँ लन्ड बुर कों चूसने केँ बाद मैंने फूफी कों नीचे पलंग पऱ लिटा दिया। फूफी कि सांसे तेजतेज चलरही थि।
फूफी: कपिल, शपथ खाकरकह रही हूं,
इतने सालों मे आज पहलीबार मेरा इतना पानी निकला हैं वोँ भि बिना लन्ड लिए। तुम्हारे मामाजी चोदते तौ बहोत अच्छा हैं। उनका लन्ड भि अच्छा हैं। वोँ देर तक भि चोदते हैं।
मगर वोँ फिन भि मेरा पानीकम हि बार निकल पाते हैं। यूंकह लो 8 बार मे 2 बार। वोँ अपना पानी निकलने कां बाद निढाल हौ करसो जाते हें। उन्होंने कभीइस बात पर्र ध्यान हि नहि दिया कि मे संतुष्ट हुइ याँ नहि।
मे: कोईबात नहि फूफी, अब आप् बिल्कुल चिंता मत करिए। आप् आपकोरोज हि यह संतुष्ट मिलती रहेगी अपने भतीजे सें।
फूफी: ठीक हैं कपिल, अब देरमत करो। अपना मूसल डालोअब मेरीओखल मे औऱ कुटाई शुरुआत करो बेटा।
मे: फूफी, हम् अब हम् दोनों कां एक् नया नाताबन रहा हैं, चुदाई कां। मगर मे आपसेकुछ कहना चाहता हूं। अगर आप् बुरा नां माने औऱ मुझेगलत नाँ समझे तोँ।
फूफी: अरे कपिल बेटा, कोईऐसी बात नहि अब जिसका मुझे बुरालगे। तुम् मुझसे इतनी बड़ी खुशीदे रहे होँ। बेझिझक कहो।
इसकेआगे कि कथा अगले पार्ट मे। तब तक अपना प्रेम देते रहें।
Badhiya h. Lagta h ab bua ko raaj btane walla h. nahee kbhi chachi likhte hu. Kabhi bua or bua kaa shauhar toh phufha huwa yaha mama kahan say aagaya.
achaa toh phir mummy k bhay ko Kya kehte h? tumhare yahan. Wese aap kahan say hu joo bua k shauhar ko Mama kaha jata h.
बहोत हि बढिया औऱ गरमागरम भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा अगले रोमांचकारी धमाकेदार औऱ चुदाईदार भाग कि प्रतिक्षा रहेगी जल्द सें दिजिएगा
Kbhi woh chachi ban jati kbhi bua aur woh last lines mei mama ko kyo yaad kr rhi h ?? friend shbado pr dyan do chachi kbhi bua nahii hongi aur bua ese waqt yaad kregi toh woh mama nahii fufa hoga
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
बिन सुरक्षा "बुआ" के गर्भग्रह मै प्रवेश -❤️ 1 - Garma Garm Sex – New Episode
बिन सुरक्षा "फूफी" केँ गर्भग्रह मै प्रवेश -5
अबआगे.
मे: फूफी आप् बुरामत मानना प्लीज़
फूफी: बोल तौ सही क्याँ बात हैं औऱ तेरीबात कां मुझेकोई बुरा नहि लगेगा।
मे: फूफी आप् अभि जवान होँ। तोँ मे आपको अपनी पत्नि कि तरह मानूआज?
फूफी: हांहां। तुम् यहसभी मुझे क्यूं कहरहे हौ।
मे: फूफी, मे चाहता हूं कि आज हमारा नया नाता पति पत्नि केँ नाम सें हि बने।
फूफी: मतलब? मे समझी नहि।
मे: मतलबयह, कि अभि औऱ जब भि हम् चुदाई करेंगे, मे आपको कुशुम कहकर बुलाऊंगा, औऱ आप् मुझे कपिल। नाँ मे आपको फूफी बोलूंगा। मगर इसका मतलबयह नहि हैं कि मे सच मे अपनी पत्नि केँ संगयह करना चाहता हूं।
फूफी: अच्छा ठीक हैं मेरे पति जी। तुम् मुझे इतनी खुशी इतनासुख देरहे हौ, तौ तुम्हारे लिए मेरीजान अब हाजिर हैं।
अबदेर मतकरो अबचोद दो पति जी मतलब कपिलजी। मे तुम्हारा लन्ड पकड़ती हूं।
मैंने फूफी केँ होठ कों जोर सें चूमा औऱ फूफी नें लन्ड पकड़कर अपनी बुर मे रगड़ना शुरुआत कर दिया।
मे: फूफी रुकिए।
फूफी: अब क्याँ हुआ?अब क्यूं रोकरहे होँ?
मे: फूफी कंडोम?
फूफी: क्याँ करना हैं कंडोम कां? मे तुम्हारे औजार कों अपने दरवाजों पऱ अंदर रगड़ते हुए महसूस करना चाहती हूं औऱ वैसे भि तुम् मेरे पति होँ अभि केँ लिए फिलहाल हिईईई।
मे: अरे फूफी वोँ तोँ ठीक हैं, पर्र अगर अंदर हि फुवारा फूट गय़ा तोँ बहोत बड़ी गड़बड़ होँ जायेगी।
फूफी:अरे कुछ नहि होगा। मे गर्भनिरोधक दवाईखा लूंगी अगरकोई दिक्कत हुई तौ,
मे: पर्र फिन भि फूफी सेफ्टी तौ सही हैं नां।
फूफी: तूँ छोड़ न् यहसभी मे सभी संभाल लूंगी,
मे: देखलो आप् कल कों कोई दिक्कत न् होँ जाए।
फूफी: कुछ गड़बड़ नहि होगी। तुम्हारे मामाजी औऱ मे अब बच्चा प्लान करने कि सोचरहे हैं। थोड़े बहोत तुम्हारा भि हिस्सा होना चाहिए न् इसमें। इसलिये बेफिक्र होँ कर प्रेम करो मुझे।
बस फिन क्याँ थां अब असलीकाम शुरुआत।
( अब मे फूफी कों कुसुम लिखूंगा)
कुसुम अपने पैरो कों फैलाकर लन्ड कों बुर मे घुसाने लगी पऱ उनकी बुर टाइट थि। अंदर नहि घुसरहा थां लन्ड। मैंने एक् धक्का मारा तौ आधा लन्ड कुसुमलता कि बुर मे घुसा औऱ वोँ जोर सें चीखी। मगर उनकी आवाज़ बाहर् नाँ जासकी क्योंकि मे उनके होंठचूस रहा थां।
कुसुम कसमसाने लगी। उनकी आंखों सें आंसूआने लगे। मे 1 मिनट केँ लिए रुका औऱ किस करनारोक दिया।
कुसुम: कपिल, रुक क्यूं गए?
मे: कुशुम, मेरेमन मे अचानक सें एक् बातआई हैं।
कुशुम: क्याँ कपिल, कोई नया तरीका आया हैं क्याँ मन मे?
मे: हां कुशुम, कुछअलग ट्राई करते हें।
कुशुम: कपिल, वैसे देखाजाए तोँ एक् हि तरह सें करते करतेमन ऊब चुका हैं। अलग होना चाहिए कुछ।
मे: वही तोँ, चलो जैसा मे कहूं कुशुम तुम् वैसा हि करना,
कुशुम: ठीक हैं,
मे: दीवार केँ सहारे खड़ी होँ जाओ औऱ एक् पेर जमीन पऱ रखलो औऱ दूसरा मेरे कंधे पऱ रखलो,
कुशुम: हें यह क्याँ बला हैं कपिल। न् बाबा नाँ मे नहीं.
मे: रखो तोँ सही कुशुम?
कुशुम:ठीक हैं, औऱ फिन जैसे मेनेकहा वैसे हि कुशुम करनेलगी।
मे: बस होँ गय़ा मेरीजान,, अब कुशुम कि पूरी बुर खुलकर सामने आँ गई थि, मेने अपने हाथो सें उसकीकमर पकड़ली औऱ फिन लन्ड सें धक्के लगाने शुरुआत करदिए। फकफकफच फ्च कि आवाज़ सें सारारूम गूंजने लगा मानो जैसेकोई सहनाई बजरही होँ।
कुशुम कि बुर सें पानी निकलने लगा औऱ मेरे धक्कों कि रफ्तार भि। चार मिनटबाद कुशुम नें अपना जिस्म ढीला छोड़ दिया मे समझ गय़ा कि कुशुम कों परमानंद मिल चुका हैं।
कुशुम:कपिल मेरी टांगे दुःख गई हैं अब मुझे लेटाकर। ब,,,,, जा,,,,
कुशुम कि यहबात सुनकर मैंने नीचे लेटा दिया औऱ फिन नि:संकोच हौ कर एक् औऱ जोरदार धक्का मारा औऱ पूरा लन्ड कुशुम कि बुर मे डाल दिया।
कुशुम कि सांसफंस गई कुछ सेकेंड केँ लिए। फिन वोँ स्वयं कों संभाली औऱ मैंने धक्के देना शुरुआत कर दिया।
कुशुम: अहह… गय़ा। ओह कपिलओह… करो जैसे चाहोकरो।
चोदो अपनी पत्नि कों, औऱ तेज धक्के लगाओ फाड़दो।
मे धक्का-पेल कुशुम कों चोदेजा रहा थां। मे बैड पऱ हाथरख कर थोडा ऊपर कि तरफ होकर कुशुम कि बुर कों देखरहा थां। जब लन्ड बुर मे जारहा थां तोँ बुर कां मुंह बार-बार खुल औऱ बंद हौ रहा थां। बुर इतनी टाइट थि कि लन्ड केँ ऊपरआने केँ संग बुर भि उठ जातीऊपर।
मे लम्बे-लम्बे धक्के देरहा थां। हर धक्के केँ संग लन्ड कुशुम कि बच्चेदानी सें टकरारहा थां। कुशुम नें मेरीपीठ पर्र हाथरख कर मुझे अपनेऊपर खींच लिया औऱ मेरा मुंह अपने बूब्स पऱ रख दिया।
मैंने एक् बूब कों मुंह मे लेकरखा रहा थां औऱ दूसरे कों मसलरहा थां। कुशुम सिसकारियां लें रही थि।
कुशुम: अहह कपिल, खा जा इन्हे, मसलदे। निचोड़ दे सारादूध इनका। औऱ अपने लन्ड सें बुर कों मथकर इसका मक्खन निकलदे। खूबचोद कपिलअहह। अहह.मार डालअहह….।
मैंने कुशुम केँ बगल सें अपने दोनों हाथ पीछे लें जाकर कुशुम कों पकड़ा औऱ उन्हें वैसे हि पलटकर अपनेऊपर कर लिया। कुशुम नें लन्ड कों बुर मे लेना शुरुआत किया औऱ उछल-उछल कर चुदवा रही थि।
उन्होंने अपने दोनों हाथों सें अपनेबाल पकड़कर बांधलिए। पूरावजन लन्ड पऱ रखकर दोनों घुटने फोल्ड करकेबैड पऱ रखलिए थें, औऱ बिना किसी सहारे केँ अपनीकमर हिला-हिला कर मेरा लन्ड चोदरही थि अर्थात चुदरही थि।
फूफी कों इस पॉजिशन मे देखकर मुझे असीम आनन्द आँ रहा थां। क्याँ बताऊं। क्याँ गजब कां लम्हा थां वोँ। कुशुम इतनी सेक्सी लगरही थि कि लगरहा थां बस जीवनभर उन्हें ऐसे हि रखूं औऱ ऐसे हि देखता रहूं।
कुशुम केँ हिलने केँ संग उनके बूब्स हि ऊपर नीचे होकर आमंत्रण देरहे रहे थें कि आओ-आओ मेरा मर्दन करो। मसल डालो मुझे। उनकेइस आमंत्रण कों भलाकोई मर्द केसे नकार सकता थां। मैंने अपने दोनों हाथों सें उनके दोनों बूब्स कों जकड़ लिया, औऱ ज़ोर-ज़ोर सें दबाना शुरुआत किया।
कुशुम: सि… अहह कपिल आहिस्ता करअहह… थोडा रहमकर अपनी कुशुम पर्र।
मैंने निपल्स कों अपनी उंगलियों सें मसलना शुरु किया औऱ कुशुम कों तेज-तेज चोदने केँ लिएकहा। कुशुम नें अपनी स्पीड बढ़ाई औऱ 5 मिनट मे उनका जिस्म फिन सें अकड़ने लगा औऱ कुशुम एक्-दम निढाल होँ कर मेरे सीने पर्र सररखकर लेट गई।
उनका कामरस निकल चुका थां, मगर मेरा अभि दूर-दूर तक कोई संकेत नहि थां छूटने कां। मैंने कुशुम कों नीचे किया औऱ स्वयं उनकेऊपर आकररुक कर उन्हें किस करनेलगा। कुशुम बोलीं-
कुशुम: रुक क्यूं गएजी?
मे: आपका पानी निकल गय़ा नां।
कुशुम: हां तौ?
मे: तोँ आपकोअब तकलीफ होगी नाँ मेरे करने सें।
कुशुम मुझे एक् गहराकिस करके बोलीं: अरे मेरे प्यारे पति जी। कितना ध्यान देरहे हौ अपनी पत्नि कां। कपिलयह प्रेम ऐसा हैं इसमें जितना दर्द मिलता हैं उतनामजा बढ़ता हैं। तुम् लन्ड डालो मेरी बुर मे औऱ अपनी पत्नि कों खूब पेलो। तब तक पेलोजब तक तुम्हारा मन नाँ भरे। भले हि चोद-चोद कर मेरी बुर फाड़दो। मगरअब रुकोमत, अपनाकाम शुरुआत करो।
मैंने जल्दी अपना लन्ड कुशुम कि बुर पऱ लगाया औऱ दोशॉट मे हि पूरा लन्ड अंदरकर दिया। कुशुम कि बुर मे पानी थां, जिसवजह सें कुशुम कों उतना दर्द नहि हुआ। पऱ फिन भि वोँ उछल गई खाट सें। अब तोँ मैंने धक्का-पेल चुदाई चालूकर दि। कुशुम केँ मुंह सें लगातार आवाज़ निकलरही थि, जोँ मेराजोश बढ़ारही थि।
कुशुम: अहहअहह अहहअहह… हौ… ओह… उफ्फ.याह… मर गई ईई… मेरी बुर अरेअरे आँ आँ आँ अहहअहह औऱ तेज कपिल, पेलो, आओ पति देव औऱ पेलो अपनी पत्नि कों ओह…
मैंने 20 मिनट तक कुशुम कों औऱ चोदा अलग-अलग पोजिशन मे। अब मेरामाल निकलने वाला थां।
मे: अहह… कुशुम… कुशुम मे झड़ने वाला हूं। मेरी कुशुम मे आया।
कुशुम: हां कपिल, मे भि झड़ने वाली हूं। गिरादे अपनी धधकती ज्वाला मेरे अदंर। भर दे मेरीकोख अपनेरस सें। मुझे बियाह दो। मे तुम्हारे बच्चे कि मम्मी बनूंगी।
कुछ हि लम्हा मे हम् पति पत्नि एक्-दूसरे मे समागए। मेरा लन्ड पूरा कुशुम (फूफी) कि बुर मे हि घुसारहा, औऱ हम् वैसे हि लेटेरहे। कुशुम अपने दोनो पैरों सें मेरीकमर कों जकड़े रही। उस वक़्त सुभह केँ 5:20 बजरहे थें। मैंने फूफी कि बुर सें लन्ड निकाला औऱ फूफी सें कहा कि-
मे: आप् अब कपड़े पहन लीजिए औऱ अपनेरूम पर्र चले जाइए। किसी नें हम् दोनों कों ऐसेदेख लिया तोँ मुसीबत होँ जायेगी।
फूफी जैसे हि खड़ी हुईँ उनकी बुर सें उनकी बुर कां रस औऱ मेरामाल एक् संगबह कर जांघो पऱ आँ गय़ा थां। फूफी नें पेंटी सें उसेसाफ किया,
फूफी मुस्कुराते हुए अपने कपड़े लेकर नंगी हि अपनी गांड़ मटकाती रूम सें निकलकर अपने कमरे सें चली गई। क्योंकि उससमय बाहर् भि अंधेरा थां तौ कोई दिक्कत नहीं।
फूफी केँ जाने केँ बाद मे वैसे नंगा हि चीतसो गय़ा। मे जब दोपहर कों उठा औऱ फूफी सें मिला, तौ फूफी बहोत हि खुश थि।
मे: क्याँ बात हैं फूफी जी, इतनीखुश क्यूं हैं? कोई खजाना मिल गय़ा क्याँ?
फूफी (मुस्कुराते हुए): मिला हैं खज़ाना
तुम्हारे मामाजी आज भि घऱ नहि आयेंगे।
ऐसाबोल कर फूफी स्माइल पास करतेहुए अपनेकाम पऱ लग गई। मे भि अपनेकाम करनेलगा।
रात मे फूफी औऱ मेरी प्रेमलीला चली औऱ तीनबार फूफी कि बुर मे वीर्य कों विसर्जन किया औऱ ये सिलसिला जारीरहा। कुछ वक्त पश्चात फूफी एवं मुझे पुत्र रत्न कां सुख प्राप्त हुआ।
आप् सब कों कैसीलगी मुझे कॉमेंट मेंबताए जोँ भि आपके विचार होँ सर आंखों पऱ। मे कोई प्रोफेशनल लेखक नहि हूं। इसलिये गलतियों पऱ माफ़ करें।
आगे कि किस्सा फिनकभी पर्र अपलोग कैमेंट मेल देंगे तोँ जल्द लें कर आऊंगा।
बिन सुरक्षा "बुआ" के गर्भग्रह मै प्रवेश -❤️ 1 - Garma Garm Sex - Next part miss mat karna
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक एपसोड हैं भइया आनंद आँ गय़ा Pics dalte too aur eroyic hotha
कुछसमय यादगार. फूफी अपनी चूत उठाउठा कर लंड लेनेलगी थि औऱ बोलरही थि- आहह-आहह-आहह-आहह आहहह कपिल … औऱ तेज़ तेज़चोद मुझे!जड़ तक घुसा बेटा,,,, हाह्ह,,,
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