बेदर्दी माँ-चूडक्कड बेटा - maa beta ki chudai - Complete Kahani All Parts
UPDATE 1:
एक् जंगल मे एक् लकडी कां दो मंजिली घऱबना हुआ थां। उसके एक् बडे सें कमरे मे अभि 3 लोग मौजुद थें। एक् 55 साल कि गदराई महिला जिसके चेहरे पर्र उम्र कां तकाजा होणे पऱ भि एक् अनोखा तेज थां। जोँ उसके खुबसूरती कों चार चांद लागा राहा थां। पऱ आज वोँ अपने आखिरी वक़्त कों अपने लगभगदेख राही थि। उसे यमराज अपने प्रांनो कि इंतज़ार करतेहुए दिखाई देरहे थें.
उसे उस्का भविष्य पहले हि पाठव थां। जौ उसेआज सें 18 साल पहले एक् अजनबी नें बताया थां आज वोँ घडी आँ चुकी थि.
एक् लडका औऱ एक् लडकी जौ उसके सबसे छोटे बच्चे थें। वोँ उसके दोनों हाथोँ कों थांमे रोयेजा रहे थें.
स्त्री : संदीप, संध्या मुझे नहीं लगता मेरी आखिरी ख़्वाहिश पुरी होगी औऱ मै नें जौ पाप किया हें उसकी बदोलत मेरी आत्मा हमेशा भटक्ती रहेगी। उसेकभी मुक्ती नहीं मिलेगी.
संदीप : मम्मी तुम् चिंता मतकरो सुमन दिदी गयीँ, हें नील कों समझाने वोँ उसे समझायेगी औऱ आपकी कि आखिरी ख़्वाहिश जरूर पुरी होगी.
संध्या : हां मां संदीप ठीककेह राहा हें। नील आपसे बहोत प्रेम करता हें इसीलिये उसे आपको दर्द होतेहुए नहींदेख सकता.
महिला : तुम् दोनों मुझसे एक् वादाकरो कि तुम् कभी भि उसकीबात नहीं टालोगे। वोँ तुम् सभी सें मुझसे भि अधिक प्रेम करता हें। वोँ हमेशा तुम् लोगों कि हमेशा रक्षा करेगा। तुम् कभी उससे इर्षा मत करणा कि मे उससे ज़्यादा प्रेम करती थि। अब तुम् सभी सच्चाई जाणते होँ। उसेकभी मेरी ममता कि मेरे प्रेम कि कमीमत होणे देना.
संध्या : हम् कभी उससे इर्षा नहीं राखते थें। वोँ हम् बसउसे अपना प्रेम कभी नहीं जाताते थें.
संदीप : हम् उसेबस परेशान करणे केँ लिये उससे झगडाकर लेते थें.
संदीप & संध्या : हम् आपसे वादा करते हें कि हम् अपने मारते दम तक उस्का संग निभायेंगे.
महिला : मुझे तुम् दोनों सें याही उम्मीद थि मेरे बच्चे.
औऱ वोँ महिला दोनों कों अपने सिने सें लागा लेती हें। थोडीदेर अपने सिने सें लागाकर वोँ महिला अपने मातृत्व कि ममता उनपर लुटा राही थि। थोडे टाइमबाद दोनों उससेअलग होते हें.
संध्या : चलो मम्मी अब हम् दोनों मिलकर खाने पिने कि करते हें.
संदीप औऱ संध्या दोनों काम मे लग जाते हें.
इधर सुमन भि अपने भइयानील कों समझाने औऱ उसे मनाने केँ लिये बाहर् निकल जाती हें। उसेपता थां कि नीलइस टाइम काहा पर्र होगा। सुमन औऱ नील केँ बीच एक् भइया बेहन सें बढकर दोस्ती कां एक् गेहरा नाता थां। वोँ उसकीहर बात, जजबात औऱ तकलीफ़ कों बडे सहजता सें समझती भि थि औऱ सुलझाती भि थि। जैसा उस्का नाम वैसा हि उसकेमन मै किसी केँ लियेकोई मैल नहीं थां। वोँ हमेशा सभी कों संग जोडके रखने वाली लडकी थि। अपने परिवार सें हद सें अधिक प्रेम करती थि.
नील जंगल केँ बिचोबीच एक् गुफा नुमा स्थान पर्र बैठे सामने गुफा केँ उपर सें गिरणे वाले पाणी कों शून्य मे नजर गढाये निहार राहा थां.
कल सुभह 5 बजे हि उसकी माँ कों माईल्ड हार्ट अटॅकआया थां। डॉक्टर नें उन्हे शहर सें दूर निसर्ग केँ सानिध्य मे कुछदिन रेहने कि सलाह देतेहुए डिस्चार्ज दिया थां। आज मॉर्निंग मे हि वोँ लोग अपने फार्महाउस पर्र रेहने आये थें.
तभीमाई नें आजनील कि जीवन कि सच्चई बताते हुएऊन सभी केँ उपर जैसेकोई ऍटम बॉम्ब फोडा थां। माँ कों लगा थां कि नील अपने अतीत कि सच्चई जाणणे केँ बाद बिखर सां जायेगा पऱ नील शांत औऱ गंभीर राहा। उसका कारण भि यही थां कि माँ औऱ उसके भइया-बहनो केँ प्रेम नें उसे औऱ उसकेदिल कों अंदर सें मजबूत बना दिया थां। जोँ अपने परिवार केँ प्रेम केँ बलबुते पऱ हार्दिक मुशकील सें मुशकील दौर भि हस्ते हस्ते पारकर जाये.
मगर वोँ अपणीजान सें प्यारी माई कि आखिरी ख़्वाहिश कों सून वोँ थोडा सांगडर गय़ा थां। जिसमाई कों अगर कांटा भि चुभा जाये तौ दर्दनील कों होता थां। वोँ सोच राहा थां कि केसे अपनीमाई कि आखिरी ख़्वाहिश पुरीकरे। वोँ भविष्य कों लें कर भि चिंतीत थां, वोँ केसे जीयेगा अपणी मां केँ बगैर? केसे संभालेगा अपने परिवार कों बिखरणे सें? केसे अपनी परिवार केँ प्रति जिम्मेदारी कों पुरा करेगा?
माना कि उसके परिवार कि दिवारे मजबूत थि उन्हे कोईतोड याँ भेद नहीं सकता पऱ हर तुफान कों झेलने वाला उनकी रक्षा करणे वाला माँ रुपीछत कल उनकेसर सें हमेशा उठ जायेगा। नील कि आँखो सें आंसू लागत्तर बेहरहे थें उसकी t-shirt पुरीतरह सें भिग चुकी थि.उसकी माँ कि आखिरी बातें उसकी कांनो मे गुंजरही थि.
( क्याँ थि वोँ बातें औऱ क्याँ थि उसकीमाई कि आखिरी ख़्वाहिश जानेंगे अगलेभाग मे )
किस्सा कि शुरुआत तौ बढ़िया ढंग सें हुईँ हैं । आगेआने वाले एपसोड मे पता चलेगा कि कथा मे क्याँ क्याँ मोड़ आएगे
बेदर्दी माँ-चूडक्कड बेटा - maa beta ki chudai – New Episode
Update 2 :
कल सुभहजब सभी माँ कों लेकरघऱ सें अपने जंगल मे बने फार्महाउस पऱ वाहन सें निकले तभी सें अजीब अजीब घटनाये घटरही थि। रॉकी जौ उनका पालतू कुत्ता थां वोँ जब सें माई कों हार्ट अटॅकआया ताबा सें अजिबो गरीब आवाज़ निकाल राहा थां जैसेसभी तरफ एक् मातम छाया हौ.
जब वोँ लोग उसके खाने पिने बंदोबस्त करकेघऱ सें बाहर् निकले हि थें कि एक् कव्वा उनके सामने पैंरो मे गिरा औऱ तडपतडप केँ उसकीजान चाली गयीँ,। इसबात सें सबकोमन मे अजीब सि घबराहट होणेलगी। नील जोँ मजबूत कलेजे वाला लडका थां उसकीरुह भि अंदर केँ भय सें कांपउठी.
फिन वोँ जैसे तैसे अपनेमन कों मजबूत कर अपनेसफर पर्र निकलपडे तौ एक् हि काली बिल्ली नें उनका मार्ग 5-6 बार काटा.जब सभी अपने फार्महाउस पऱ पोहचे तोँ वहा केँ केअरटेकर नें सभीघऱ साफ सुथरा कर दिया थां औऱ 2 हफ्ता कां पुरा राशन-पानी भर दिया थां.
उनकोवहा पर्र पोहचते हुएरात हौ चुकी थि तौ वोँ सभी अपनेसंग लायहुआ खानां खाकर अपने कमरो मे सोनेचले गये। सुमन अपणी मम्मी केँ साथसोई हुए थि। संध्या औऱ संदीप अपने एक् रूम सोने चालेगये। नील कों अपनेरूम मे नींद नहीं आँ रही थि। सुभह सें लेकरसाम तक घटी हुई हर घटना नें उसकेदिल मे अजीब सां डर पैदाकर दिया थां.
अपणी बैचेनी दूर करणे केँ लिए वोँ घऱ केँ छत पऱ चला गय़ा औऱ मन हलका करणे केँ लिये टहलने लगा। थोडीदेर मे किसिके पैंरो कि उपरआणे कि आवाज़ सुनाई देनेलगी। जब उसने सीढीयों कि तरफ देखा तोँ सुमनखडी दिखाई दि.
सुमन : नील क्याँ बात हैं? सोये नहींअब तक?
नील : नहीं दि कुछ बैचेनी सि होँ राही थि तौ खुले मे घूम राहा हूं। माईसो गई, ?
सुमन : हा मैंने उन्हे दूध केँ संग गोलीया खीलाकर सुला दिया हैं। वोँ भि सुभह सें बेचैन सि लागेल रही थि। पऱ तुम् तौ मां कों जानते हौ वोँ कभी अपनेमन कि बात अपने चेहरे पऱ नहींआने देती.
नील : ह्म्म्म… दि क्याँ आपको भि कुछ अजीब सि बैचेनी मेहसूस हौ रही हैं? मुझेकुछ अच्छा नहींलग रहा जैसेकुछ अनहोनी होने वाली होँ.
सुमन : मुझे भि कुछऎसा हि मेहसूस हौ रहा हैं। मम्मी भि डरी सेहमी सें हैं पर्र वोँ कुछ बोलेगी नहीं.
नील : हमेमाई कों हौसला देना होगा। संदीप औऱ संध्या भि मां कि तबियत सें परेशान हैं। उनको भि हौसला देना होगा.
सुमन : सहीकहा तुमने.
रात कि सर्द हवाये उनकेबदन मे थंडबढा रही थि.
सुमन : चलोनील अधिकमत सोचो अधिक विचार सें मन मे औऱ बुरे खयाल आयेंगे.
नील : मुझे नींद नहींआहे रही हैं.
सुमन : मे कुछ नहीं सुनना चाहती। तुम्हे अकेला छोड दिया तौ फिन सें उन्ही बातों केँ बरे मे सोचता रहेगा। चल तूँ आज मेरेसंग सोयेगा.
नील : आप् दोनों कि नींद मेरीवजह सें खराब हौ जायेगी.
सुमन : मे कुछ सुनना नहीं चाहती। तूँ चलेगा कि नहीं?
सुमन नें यहबात सखत लेहजे मे काही थि। नीलसमझ जाता हैं कि अब उसकीकुछ नहीं चलने वाली तोँ वोँ उसकेसंग अपणी माँ कि रूम मे आहे जाता हैं.
नील देखता हैं कि उसकी हसीन माँ केसेचैन कि नींद लेँ रही हैं। वोँ आगे बढता हैं औऱ उसके माथे कों चुम लेता हैं। माई हलकी नींद मे हि उसके बालों मे हाथ फेरती हैं। वोँ सुभह सें समझरही थि नील कि बेचैनी कों.
माई : सोया नहीं मेरेलाल अभि तक। आजा मेरेपास मे आज तेरी बाहों मे सोना चाहती हूं.
नील अपनी माँ बराबर लेट जाता हैं औऱ उसकासिर अपने सिने सें लगाकर उसको बालों मे हाथ फेरणे लगता हैं। माई भि अपनीनील कों बांहो मे भरकर उसकी ममता कों समेटरहा थां.
सुमन भि दुसरी तरफ सें आकरनील केँ होठों पऱ एक् प्रेम भरा छोटाकिस कर उसके सिने मे सिररख कर दुसरी साईड सें बांहो मे भरकर सोने लगती हैं.
नील भि दोनों केँ बालों मे हाथ फेऱते हुए वैसे हि नींद कि आगोष मे चला जाता हैं.
सुभह माँ सबसे पेहले उठ जाती हैं औऱ वोँ देखती हैं केसेनील उसे औऱ सुमन कों सिने सें लगाये सोरहा हैं। नील कि मासुमियत पर्र बहुत प्रेम आता हैं वोँ उसके गालो पर्र प्रेम भराकिस देती हैं औऱ सुमन कों आहिस्ता सें उठती हैं औऱ नील केँ उपर कंबलओढ देती हैं। दोनों अपने नित्यक्रम मे लग जाते हैं.
सभी अपने अपने वक़्त पर्र उठकर अपने नित्यक्रम करसब नाश्ते केँ टेबल पर्र एकठ्ठा हौ जाते हैं। हस्ते खेलते सभीलोग अपना ब्रेकफास्ट खतमकर लेते हैं औऱ अपनी अपनी प्लेट्स औऱ बर्तन उठाकर रख देते हैं। जबसभी हाल मे जमा होते हैं तो माई अपनीबात केहती हैं.
माँ : मुझे तुम् सभी लोगो कों कुछ बताना हैं फिन शायद मौका मिले न् मिले.
नील : ऐसीकोण सि बात हैं माँ? औऱ आप् ऐसीबात क्यूकर रहे होँ?
माँ : मेरीबात महत्वपूर्ण हैं औऱ अब टाइमआहे गय़ा हैं तुम् सभी कों इसबात कां पता होना चाहिये.
सुमन : कोन सि बात बताना चाहती हौ मम्मी?
माँ : मेरे औऱ तुम् लोगों कि जिंदगी कि सच्चई.
सभी एक् संग कैसी सच्चाई?
( क्याँ हैं वोँ सच्चाई? कोनसे राजअब सामने आयेंगे? )
(नोट : पेहले 2-4 अपडेट्स आपको शायदबोर लगे पऱ आगे चुदाई औऱ इमोशन्स सें भरपूर होगीयह कथा। अगलेआने वालेकुछ अपडेट्स मे किरदारो कि जाणकारी भि मिल जायेगी औऱ किस्सा कां प्लॉट इंसेस्ट + अडल्टरी रिलेशन कि औऱ चला जायेगा। मे कोशिश कररहा हूं थोडी हिंदी औऱ बेहतर कि जाये। हिंग्लिश मे पढणे कां उतना मज़ा नहीं आयेगा.)
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Update 3 :
( आगे कि आप् बितीमाई कि जुबानी )
मेरानाम रचना हैं। आज सें 30 साल पेहले यह कहाणी कि शुरुवात हुइ थि। मेरेघऱ मे पुरे 5 लोग रहते थें। मेरे पापा एक् स्कुल केँ प्रिंसिपल थें औऱ मेरी मम्मी एक् अन्नपूर्णा गृहिणी थि। मे घऱ मे सभी सें बडी थि। मेरा एक् छोटा भइया औऱ एक् छोटी बेहन थि। एक् हस्ता खेलता परिवार थां हमारा। मे उस टाइम अपनी मेडिकल कि पढाईकर रही थि.
जब मे अपनी पढाई पुरीकर केँ वापसआई तोँ घरवालो नें मेरे लिये अच्छा नाता ढुंढना नं चालूकर दिया थां। मैंने भि अपने जिला अस्पताल मे अपनी प्रॅक्टिस शुरुकर दि थि। सभीकुछ अच्छा चालरहा थां एक् दिन मेरी मुलकात एक् पेशंट सें हुई जौ कि एक् छोटीचोट केँ लिये पट्टी बांधवाने केँ लिये अस्पताल आयाहुआ थां। बाकी डॉक्टर लोग एक् ऑपेरेशन मे व्यस्त थें तौ मैंने उसकी ड्रेसिंग कि। ड्रेसिंग केँ दौरान हमारी बातें हुईँ। उसकानाम वीरेंद्र थां औऱ वोँ एक् बडे गराज कां मलिक थां औऱ वोँ भि एक् स्कुल मे पढाता थां। ड्रेसिंग केँ बाद वोँ चला गय़ा। उसकी शकसियत औऱ बातों सें मे प्रभावित हुई थि। पऱ वोँ एक् पेशंट थां इसलिये मैंने उसबात पर्र ज़्यादा ध्यान नहीं दिया.
एक् दिन मां औऱ पापा नें मुझसे पूछा कि तुम्हे कैसा लडका मनपसंद हैं डॉक्टर चाहिये याँ फिनकोई औऱ पेशे सें भि चलेगा?
मैंने उन्हे बताया कि लडका चाहे मेरे जैसा डॉक्टर नं होँ तौ भि चलेगा, गरीबघऱ सें हौ तोँ भि चलेगा मगर वोँ दिल कां साफ होँ औऱ उसका हस्ता खेलता बडा सां परिवार होना चाहिये। फिन क्याँ थां मां औऱ पापा नें जीजान लगा दि ऎसा लडका औऱ परिवार ढुंढणे मे। जब उनकी तलाशखतम हुइ उन्होने मेरे सामने 4 लडको कों मिलने कां प्रस्ताव रख दीया.
पेहला लडका डॉक्टर थां उसकानाम राजीव थां। जब उससे मिली तोँ वोँ मेरी सुंदरता पे लट्टू होँ गय़ा। उसनेयह बात मुझे बताई औऱ वोँ मुझसे जल्द सें जल्द विवाह करके, वोँ जल्द हि US मे सेटल होने कि सोचरहा थां। यहबात उसने मुझसे कही। मैने उससे अपनी शर्त बताई कि मे एक् बडे परिवार कां हिस्सा बनाना चाहती हूं। अगर आप् US जाकर वापसआने कि सोच लोगे तौ मे आपसे विवाह करणे केँ लिये तयार हूं। तब वोँ थोडा परेशान हौ गय़ा औऱ उसनेकहा कि मेरा हमेशा सें यह सपना हैं केँ मे US मे सेटल होँ जाऊ.अगर मे आपकीबात मानकर अपने ख्वाब कों छोडदूं तौ मेरामन हमेशा आपकोदोष देता रहेगा कि आपकीवजह सें मेरा बचपण कां सपना पुरा न् हौ सका। मे आप् जैसे सुंदरता कि देवी पर्र कोईदोष नहीं डालना चाहता। इसीलिये मुझेमाफ किजीये यह नाता तोँ नहीं होँ सकत। पऱ आप् जैसी हसीनऔरत कों मे अपनी जिंदगी संगिनी तोँ नहींबना पाऊंगा पऱ क्याँ आप् मेरी जिंदगी भर केँ लिये मित्र बनी रहेंगी। मैंने स्वीकृती देदी औऱ हम् यारबंद गये औऱ हम् खत द्वारा एक् दुसरे सें बातें करणेलगे.
फिन मे दुसरे लडके सें मिली उसने मुझे बताया कि वोँ किसी औऱ सें प्रेम करता हैं औऱ अपने परिवार केँ दबाव मे आकर वोँ मुझसे मिलने आया थां। यह नाता भि गय़ा थां.
फिन तिसरे लडके रंजीत सें मुलकात हुई वोँ एक् बडे देहात केँ ठाकूर कां बेटा थां। उसके पापा केँ कईबडे करोबार थें। उसमे अपनी दौलत कां घमंड थां औऱ वोँ बस बापजादओ सें कमाई दौलत पर्र अपना अधिकार समझता थां। वोँ भि मेरी सुंदरता कां दिवाना हौ गय़ा थां। उसने मुझेकहा कि तुम् मुझे मनपसंद होँ औऱ मे अब केवल तुमसे हि विवाह करुंगा औऱ किसीसे नहीं। उसकी आवाज़ मे मुझे एक् पैंसो औऱ ताकत कां गुरुर ज्यादा दिखा। मैंने अभि केँ लिये शांत रेहने कां फैसला करतेहुए वहा सें चलीआई औऱ पापा कों उनसे नां केहने कों कहा। मम्मी औऱ पापा नें जब कारण पूछा तोँ मैंने उन्हे बताया कि वोँ दौलत औऱ ताकत केँ घमंड मे चूर हैं औऱ वोँ अपनीघऱ कि सब औरतो कि तरह अपने पैंरो कि जुती समझेगा। इसीलिये पापा नें रिश्ते केँ लिये नाँ केह दिया.
दुसरे दिन ठाकूर स्वयं अपने एकलोते बेटे केँ लियेआये पर्र पापा जब उन्हे कारण समझया तौ वोँ भि उदास होकरचले गये। वोँ भि अपनी औलाद केँ कामचोरी औऱ पुरखो कि संपत्ती केँ प्रति उसके घमंड सें परिचित थें.
जब मे चौथे लडके सें मिली तौ मैंने जल्दी हि हा करदी क्योंकी वोँ लडकाकोई औऱ नहीं बल्की वीरेंद्र थां। वीरेंद्र कों तौ मे पेहले सें मनपसंद थि तोँ मिलना केवल औपचारिकता थि। हमारा नातातय होँ गय़ा औऱ वीरेंद्र कि मां नें हमसे मेरी कुंडली मांगली। तब तक वीरेंद्र औऱ मे प्रेम केँ सागर मे डुबकीया लगारहे थें.
जब वीरेंद्र कि मम्मी नें मेरी औऱ वीरेंद्र कि कुंडली अपने गुरुजी कों दिखाई तोँ गुरुजी नें बताया कि अगरयह लडकी आपकेघऱ कि बहूबनी तोँ घऱ मे संकट आयेगा। संकट केँ भय सें वीरेंद्र कि मां नें हमारा नातातोड दिया। पर्र हमने जौ प्रेम केँ सागर मे तन-मन सें डुबकीया लगायी थि उसका परिणाम यहहुआ केँ मे पेट सें होँ चुकी थि। जब मैंने यहबात वीरेंद्र कों बताई तोँ उसने मुझे बताया कि मां हमारा नाताकभी नहीं मानेगी इसीलिये हम् भाग चलते हैं। पऱ वीरेंद्र उनके घरका एकलोता चिराग थां तोँ अगर हम् भाग जाते तौ उसकेबाद उसके मम्मी बाप औऱ 2 छोटी बहनो कां क्याँ होता.तब वीरेंद्र नें मुझेकहा कि तुम् मेरी मां कों पोलीस कि धमकीदो। तोँ वोँ जरूर मानेगी। मेरेलाख मना करणे पर्र भि उसने मुझेयह बात करणे केँ लिये मजबूर कर दिया.यही बात ध्यान मे रखतेहुए मे वीरेंद्र कि मम्मी सें मिली औऱ पहले उन्हे मेरेपेट मे समयरहे उनके खानदान केँ चिराग कां वास्ता देकर मनाया। जब वोँ फिन भि नहीं मानी तोँ मैंने जैसा सोचा थां वैसे पोलीस कि धमकी दि। जब वीरेंद्र सें पूछा गय़ा तोँ ऊस नें भि कबूल कीया कि वोँ उनके खानदान कां हि वारीस हैं.
तोँ इसतरह मजबुरी मे हि सही हमारा नाता पक्का होँ गय़ा औऱ खुशियोने नें हमारे घऱ दस्तक दि थि। पऱ आनेवाला टाइम अपनेसंग क्याँ लेकर आयेगा यह हम् मे सें किसी कों नहींपता थां। सगाई परिवार केँ लोगो केँ बीच हि हुईँ। औऱ विवाह भि अधिकबडी नां करके विवाह केँ खर्चे सें गरीब बचचो कि पढाई मे योगदान देने कां तय कीया गय़ा। विवाह केँ तयारी मे दिन केसे बिते किसी कों पता हि नहींचला औऱ देखते देखते विवाह कां दिन भि आगया। इतने दिनो मे मैंने वीरेंद्र कि मम्मी कां भि दिलजीत लिया थां औऱ वोँ भि अब खुशी सें विवाह कि तयारीयो मे लागेल गयीँ, थि। सभीतरफ खुशिया हि खुशिया थि। मेरी तौ खुशिया फुले नहींसम रहीहर समय लज्जा केँ मरे मेरेगाल लाल रहते थें। मेरे छोटे भइया औऱ बहन हमेशा मेरी टांग खिचणे मे लगे रहते। पऱ यह खुशिया समयभर कि मेहमान थि यह मुझेकहा पता थां।
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