मेरे पति और मेरी ननद completee - Shadi Shuda Aurat - Complete Kahani All Parts
मेरे पति औऱ मेरी ननदी
हैलो। मेरानाम अनीता हैं। मे २६साल कि एक् शादीशुदा स्त्री। गोरारंग औऱ हसीननाक नक्श। कोई भि एक् बार मुझेदेख लेता तौ बस मुझे पाने केँ लिये प्यास उठता थां। मेरा फिगर, ३६-२८-३८, बहोत सैक्सी हैं। मेरी विवाह कों कोई 8-9 महीने हुए हें। जब भि मे कहीं बाहर् जाती हूं तौ सब मर्द मुझे कामुक नज़रों सें देखते हें। मुझे भि यह बहोत मनपसंद हैं कि सब मर्द मुझे देखें मेरे पति कां नाम चेतन हैं। वोँ मेरे दफ़्तर मे मेरेसंग हि काम करते थें। मगर विवाह केँ बाद मैंने नौकरी छोड़ दि औऱ घऱ पर्र हि रहनेलगी हूं।
चेतनकोई बहोत ज़्यादा अमीर व्यक्ति नहि हें। उसकी फैमिली शहर केँ पास हि एक् गाँव मे रहती हैं। उधर थोड़ी सि ज़मीन हैं। जिस पर्र उसकेघऱ वाले अपना गुज़र-बसर करते हें। गाँव मे उसके बाप। मम्मी। बेहन औऱ एक् छोटा भइया रहते हें। उसका छोटा भइया अपनी बाप केँ संग जमीनों पर्र हि होता हैं। गाँव केँ विद्यालय मे हि बेहनपढ़ रही थि। वोँ बहोत हि प्यारी लड़की हैं। डॉली। यानि वोँ मेरी ननदी हुइ।
मे अपने पति चेतन केँ संगशहर मे हि रहती हूं। हमने एक् छोटा सां घर-मकान किराए पऱ लियाहुआ हैं। इसमें एक् बेडरूम मय अटैच बाथरूम। छोटा सां टेलीविज़न लाउंज औऱ एक् किचन हैं।
घऱ केँ अगले हिस्से मे एक् छोटी सि बैठक हैं। जिसका एक् द्वार (दरवाज़ा) घऱ सें बाहर् खुलता हैं। औऱ दूसरा टेलीविज़न लाउंज हैं। घऱ केँ पिछले हिस्से मे एक् छोटा सां बरामदा हैं। बस। तक़रीबन 3 कमरे कां घऱ हैं। ऊपर कि छत बिल्कुल खाली हैं।
मेनगेट केँ अन्दर थोड़ी सि स्थान गैराज केँ तौर पर्र जहाँ पऱ चेतन अपनी बाइक खड़ी करता हैं।
मे औऱ चेतन अपनी विवाह सें बहोत खुश हें औऱ बड़ी हि अच्छी जीवन गुज़र रही थि। अगरचे। चेतन कां बैक ग्राउंड गाँव कां थां। मगरफिन भि शुरुआत सें शहर मे रहने कि वजह सें वोँ काफ़ी हद तक शहरी हि हौ गय़ा थां। रहन-सहन। ड्रेसिंग वगैरह सभी शहरियों कि तरह हि थि। औऱ वोँ काफ़ी ओपन माइंडेड भि थां।
घऱ पऱ हमेशा वोँ मुझसे फरमाइश करता केँ मे मॉडर्न किस्म केँ कपड़े हि पहनूं। इसलिये घऱ पर्र मे अक्सर टाइट लैंगिंग्स औऱ टॉप्स। स्लीव लैस शर्ट्स औऱ हर किस्म कि वेस्टर्न ड्रेसस पहन लेती थि।
मे अक्सर जब भि बाहर् जाती.तब भि मेरी ड्रेसिंग काफ़ी मॉड हि होती थि।
मे अक्सर जीन्स औऱ टी-शर्ट पहनती थि याँ सलवार कमीज़ पहनती तोँ। वोँ भि फैशन केँ मुताबिक़ हि एकदम चुस्त औऱ मॉडर्न हि होती थि।
घऱ सें बाहर् भि वोँ मुझे अक्सर लेगिंग पहनाकर लें जाता थां। घऱ आँ जाता तोँ मुझसे सिर्फ़ ब्रेजियर औऱ लेगिंग मे हि रहने कि फरमाइश करता थां.
चेतन मेरे खूबसूरती औऱ मेरेबदन कां दीवाना थां। हमेशा मेरी गोरेरंग औऱ हसीन शरीर कि तारीफ करता थां।
जब भि मौका मिलता। वोँ मेरी चूचियों कों मसल देता थां। औऱ मेरे खुलेगले मे हाथडाल कर मेरी चूचियों कों सहलाता रहता थां।
अपने पति कों खुश करने औऱ उसे लुभाने केँ लिए मे भि हमेशा डीप औऱ लोनेक कि कमीजें सिलवाती थि। जिसमें सें मेरी चूचियों भि नजरआती थीं औऱ स्तन कां क्लीवेज तोँ हर वक्त हि ओपन होता थां।
दिन मे जब भि मौका मिलता। हम् लोग सेक्स करते थें। बल्कि सचबात तौ ये हैं कि मे विवाह सें पहले हि अपना कुँवारापन चेतन पऱ लुटा चुकी थि।
जीहाँ। चेतन हि मेरी पहली औऱ अंतिम इश्क थां औऱ ये चेतन कि इश्क हि थि। जौ केँ मुझे विवाह सें पहले हि उसकेखाट तक उसकी बाँहों मे लें आई थि।
विवाह केँ 8-9 महीने बाद भि जब हमारी सेक्स जीवन औऱ हवस सें भरी हुई ज़िंदगी पूरे सिरे पर्र थि। तोँ एकदम इसमें एक् ब्रेक सि लग गई औऱ एक् टकराव सां आँ गय़ा।
इसकीवजह ये थि कि मेरी ननदी डॉली… नें विद्यालय कां अंतिम इम्तिहान पासकर लिया थां औऱ उसने कॉलेज मे एडमिशन लेने कां शौक़ ज़ाहिर किया। तौ मेरे ससुरजी जी नें पहले तौ इन्कार कर दिया.मगर जब उसके चहेते बड़े भइया चेतन नें भि अपने बाप सें बात कि। तोँ मेरे ससुरजी जी नें हामीभर ली कि अगर चेतन उसकी जिम्मेदारी उठा सकता हैं। तौ ठीक हैं।
अब दिक्कत ये थि कि गाँव मे कोई कॉलेज नहि थां औऱ उसेशहर मे आनां थां। जब डॉली नें कॉलेज मे एडमिशन लिया। तोँ वोँ गाँव सें शहर मे आँ गई। अब ज़ाहिर हैं कि उसे हमारे संग हि रहना थां तोँ डॉलीशहर मे हमारे संगउस छोटे सें घर-मकान मे हि शिफ्ट होँ गई।
डॉली कि आने सें औऱ हमारे संग रहने सें मुझे औऱ तोँ कोई दिक्कत नहि थि। मगर सिर्फ़ एक् मसला थां कि हमारी सेक्स जीवन थोड़ी बंदिशों वाली हौ जाने थि।
अब हमें जौ भि करना हौ। तौ अपने कमरे मे हि करना थां। वैसे डॉली बहोत हि अच्छे नेचर कि लड़की थि। अभि क़रीब 19 साल कि हि थि। बहोत हि खूबसूरत औऱ सुंदर लड़की थि। बिल्कुल दूध कि तरह सफ़ेद रंग। औऱ मक्खन कि तरह सें नरम-नरम शरीर थां उसका.
मेरे पति और मेरी ननद completee - Shadi Shuda Aurat – New Episode
उसके सीने कि उठान। यानि चूचियों उभर चुकीथीं। मगर अभि बहोत बड़ी नहि थीं। जाहिर सि बात हैं कि मुझसे तोँ छोटी हि थि। बहोत हि सादा औऱ मासूम सि लड़की थि।
मुझसे बहोत हि प्रेम करती थि औऱ बहोत हि इज्जत देती थि।
जब सें घऱ मे आई। तौ किचन मे भि मेराहाथ बंटाती थि। औऱ मेरेसंग घऱ कां काफ़ी काम करती थि। मे भि डॉली कि शक्ल मे एक् अच्छी सि सहेली कों पाकरखुश थि।
उसके सोने कां इंतज़ाम उस छोटी सि बैठक मे हि एक् सिंगल बैड लगवाकर। कर दिया गय़ा थां। वोँ वहीं पर्र हि पढ़ती थि औऱ वहीं पऱ हि सोती थि। बाथरूम उसे हमारा वाला हि इस्तेमाल करना पड़ता थां। जिसका एक् द्वार (दरवाज़ा) छोटे सें टेलीविज़न लाउंज मे खुलता थां औऱ दूसरा हमारे बेडरूम मे खुलता थां।
बसरात कों सोतेसमय हम् लोग अपने बेडरूम वाला बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) अन्दर सें बंदकर लेते थें। ताकि डॉली बाहर् सें हि उसे इस्तेमाल करसके।
डॉली वैसे तोँ बहोत हि हसीन लड़की थि। मगर सारी ज़िंदगी गाँव मे रहने कि वजह सें बिल्कुल हि ‘डल’ लगती थि। उसकी ड्रेसिंग भि बहोत ज़्यादा ट्रेडीशनल किस्म कि होती थि। सादा सि सलवार-कमीज़ पहनती थि। कभी भि मॉड किस्म केँ कपड़े नहि पहनती थि।
मुझेघऱ मे लेगिंग पहने देख्ना शुरुआत किया। तौ वोँ बहोत हि हैरान हुई। तौ मैंने हंसकर कहा-अरे दोस्त क्यूं हैरान होती हौ। येसभी आज केँ वक्त कि ज़रूरत औऱ फैशन हैं। इसके बिना ज़िंदगी कां क्याँ मजा हैं। वैसे भि तोँ घऱ पर्र सिर्फ़ तुम्हारे भैया हि होते हें नाँ। औऱ जब भि बाहर् जाती हूं। तोँ उनकेसंग हि जाती हूं। तोँ फिन मुझेकिस चीज़ कि फिकर हैं।
डॉली-मगर भाभी बाहर् तौ बहोत सें लोग होते हें। वोँ आपको अजीब नजरों सें नहि देखते क्याँ?
मे- अरे दोस्त देखते हें। तौ देखते रहें। मेरा क्याँ जाता हैं। वैसेइन लोगों कि कमीनी नज़रों कां भि अपना हि मजा होता हैं।
मैंने एक् आँखमार कर डॉली सें कहा। तौ वोँ झेंप गई।
मे उसे हमेशा हि मॉड औऱ न्यू फैशन केँ कपड़े पहनने कों कहती.मगर वोँ इन्कार कर देती।
‘मुझेशरम आती हैं। ऐसी कपड़े पहनते हुए। औऱ फिन मुझेइन कपड़ों मे देखकर भैया बुरामान जाएंगे.’
शहर मे आने केँ बाद चेतन नें उसेखूब शहर कि सैर करवाई। हम् लोग चेतन कि बाइक पर्र बैठकर घूमने जाते। मे चेतन केँ पीछेबैठ जाती औऱ मेरे पीछे डॉली बैठती थि।
हम् लोगखूब शहर कि सैर करते। औऱ डॉली भि खूब एंजाय करती थि।
बाइक पर्र बैठे-बैठे मे अपनी चूचियों कों चेतन कि बैक पर्र दबा देती औऱ उसकेकान मे ख़ुसर-फुसर करती जाती- क्यूं फिनफील होँ रही हें नाँ मेरी चूचियां तुमको?
मेरीकमर पर्र चेतन भि जानबूझ कर अपनीकमर सें थोडा-थोडा हरकत देता औऱ मेरी चूचियों कों रगड़ देता। कभी मे उसकी जाँघों पर्र हाथरख कर मौका मिलते हि उसकी पैन्ट केँ ऊपर सें हि उसके लण्ड कों सहला देती थि। जिससे चेतन कों बहोत मजाआता थां।
हमारी इन शरारतों सें बाइक पऱ पीछे बैठे हुइ डॉली बिल्कुल बेख़बर रहती थि।
चेतन अपनी बेहन सें बहोत हि प्रेम करता थां। आख़िर वोँ उसकी सबसे छोटी बेहन थि नाँ। कम सें कम भि उससे 18 साल छोटी थि। औऱ वोँ मुझसे 10 साल छोटी थि।
रोज़ाना चेतन स्वयं दफ़्तर जातेहुए डॉली कों कॉलेज छोड़कर जाता औऱ वापसी पर्र संग हि लेताआता थां। मुझे भि कभी भि इस सबसेकोई दिक्कत नहि हुई थि। जैसा कि ननदी-भाभी मे घरों मे झगड़ा होता हैं। मेरे औऱ डॉली कि बीच मे ऐसाकभी भि नहि हुआ थां। बल्कि मुझे तोँ वोँ अपनी हि छोटी बेहन लगती थि।
फिन एक् दिन वोँ वाकिया हुआ जोँ इस स्टोरी केँ आगे बढ़ने कि वजहबना, उससे पहले नाँ कुछ ऐसा-वैसा हुआ हमारे घऱ मे, औऱ नाँ हि किसी केँ दिमाग़ मे थां। मगरउस वाकिये केँ बाद मेरामन एक् अजीब हि रास्ते पर्र चल पड़ा औऱ मैंने वोँ सभी करवा दिया जोँ कि कभी नहि होना चाहिए थां।
वोँ इतवार कां दिन थां औऱ हम् सभीलोग घऱ पऱ हि थें। दोपहर केँ समय हम् सभीलोग टेलीविज़न लाउंज मे हि बैठेहुए टेलीविज़न देखरहे थें कि चेतन नें गरमचाय कि फरमाइश कि। इससे पहले कि मे उठती.आदत केँ अनुसार। डॉली फ़ौरन हि उठी औऱ बोलि- भाभी आप् बैठो। मे बनाकर लाती हूं।
मैंने उसे ‘थैंक्स’ बोला औऱ दोबारा टेलीविज़न देखने लगी, चेतन भि मेरापास हि बैठाहुआ थां।
अचानक हि किचन सें डॉली कि एक् चीख कि आवाज़ सुनाई दि औऱ संग हि उसके गिरने कि आवाज़ आई। मे औऱ चेतन दोनों हि फ़ौरन हि उठकर किचन कि तरफ चिल्लाते हुए भागे।
‘क्याँ हुआ हैं डॉली?’
जैसे हि हम् लोग अन्दर गए तोँ देखा कि डॉली नीचे किचन कि फर्श पर्र गिरी हुई हैं औऱ अपने पांव कों पकड़कर दबारही हैं औऱ वोँ दर्द केँ मारे कराहरही थि।
हम् फ़ौरन हि उसकेपास बैठगए औऱ मे बोलि- क्याँ हुआ डॉली। केसेगिर गई?
डॉली-बस भाभी.पता हि नहि चला कि केसे मेरापेर मेरी पायेंचे मे फँस गय़ा औऱ मे नीचेगिर पड़ी।
चेतन-अरे ये तौ शुक्र हैं कि अभि इसनेगरम चाय नहि उठाई हुइ थि। नहि तौ गरम-गरम गरमचाय ऊपरगिर कर औऱ भि नुक़सान कर सकती थि।
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मैंने आहिस्ता-आहिस्ता डॉली कों पकड़कर उठाना चाहा। उसका दूसरा बाज़ू चेतन नें पकड़ा औऱ हमने डॉली कों खड़ा किया। तौ वोँ अपना बायाँ पांव नीचे ज़मीन पऱ नहि रखपारही थि। बड़ी हि मुश्किल सें वोँ अपना एक् पेरऊपर उठाकर मेरी औऱ अपने भैया कि सहारे पर्र लंगड़ाती हुइ टेलीविज़न लाउंज मे पहुँची।
इतने सें रास्ते मे भि वोँ कराहती रही- भाभी नहि चलाजा रहा हैं। बहोत दर्द होँ रहा हैं।
टेलीविज़न लाउंज मे लाकर हम् दोनों नें उसे सोफे पर्र हि लिटा दिया औऱ मे उसकेपास बैठ गई।
चेतन- लगता हैं कि इसके पांव मे मोच आँ गई हैं।
मैंने डॉली कों सीधा करके सोफे पऱ लिटाया औऱ उसके पांव कि तरफआकर उसकेपेर कों सहलाती हुए बोलीं- हाँ। लगता तोँ ऐसा हि हैं.
मैंने चेतन सें कहा- आप् डॉली केँ बेडरूम मे जाकरमूव तोँ उठा लायें। ताकि मे इसके पांव कि थोड़ी सि मालिश कर सकूँ।
मेरीबात सुनकर चेतन फ़ौरन हि कमरे मे चला गय़ा औऱ मे आहिस्ता-आहिस्ता उसकेपेर कों सहलाती रही। अभि भि डॉली दर्द केँ मारे कराहरही थि।
चंद लम्हों केँ बाद हि चेतन वापिस आया औऱ उसनेमूव मुझे दि। मैंने थोड़ी सि ट्यूब सें मलहम निकाली औऱ उसे डॉली केँ पांव केँ ऊपर मलनेलगी।
फिन मैंने चेतन सें कहा-जरा किचन मे जाकररबर कि बोतल मे पानी गर्म करके लेँ आओ। ताकि थोड़ी सि सिकाई भि कि जासके।
चेतन भि अपनी बेहन केँ पांव मे मोचआने कि वजह सें बहोत हि परेशान थां। इसलिये फ़ौरन हि किचन मे चला गय़ा।
डॉली केँ पांव केँ ऊपरमूव लगाने केँ बाद मैंने उसकी सलवार कों थोडा ऊपर घुटनों कि तरफ सें उठाया। ताकि उसकी टांग केँ निचले हिस्से पऱ भि मूवलगा दूँ।
डॉली नें उससमय एक् बहोत हि लूज औऱ खुली पाएचों वाली सलवार पहनी हुइ थि औऱ शायदयही वजह थि कि वोँ किचन मे इसके पाएंचे सें उलझकर गिर गई थि।
जैसे हि मैंने डॉली कि सलवार कों उसकी घुटनों तक ऊपर उठाया तौ डॉली कि गोरी-गोरी टाँगें मेरी आंखों केँ सामने नंगी हौ गईं।
उफफ्फ़। डॉली कि टाँगें कितनी गोरी औऱ रसीले थीं। जैसे हि मैंने उसकी नंगी टाँग कों छुआ। तौ मुझेऐसा लगा कि जैसे मैंने मक्खन मे हाथडाल दिया हौ। मे उसकी टांग कि मालिश कां भूलकर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी टाँग कों सहलाने लगी।
आहिस्ता अपनाहाथ उसकी नंगी टाँग पऱ फेरने लगी। कभी पहलेऐसा नहि हुआ थां। मगरआज मुझे एक् अलग हि मजा आँ रहा थां। मुझे उसकी मखमली टाँग कों सहलाने कां मौका जौ मिल गय़ा थां।
फिन मैंने अपने ख्यालों कों झटका औऱ उसकी टाँग पर्र मूव लगाने लगी।
थोड़ी हि देर मे चेतन गर्म पानी कि रबर कि बोतल लेँ आया औऱ मेज पर्र रख दि।
अब वोँ दूसरी सोफे पऱ बैठकर दोबारा सें टेलीविज़न देखने लगा। डॉली कि टाँग पऱ मूव लगाते हुए अचानक हि मेरी नज़र चेतन कि तरफ गई। तोँ हैरानी सें जैसे मेरी आँखें फट सि गईं। मैंने देखा कि चेतन कि नजरें टेलीविज़न कि बजाय अपनी सग़ी बेहन कि नंगी टाँगों कों देखरही हें।
मुझेइस बात पऱ बहोत हि हैरत हुई कि चेतन केसे अपनी छोटी बेहन कि नंगी टाँग कों ऐसेदेख सकता हैं।
उसकी आँखों मे जोँ हवस थि। वोँ मे अच्छी तरह सें पहचान सकती थि। आख़िर मे उसकी पत्नि थि।
येदेख कर एक् लम्हे केँ लिए तोँ मेरेहाथ डॉली कि टाँग पऱ रुक सें गए.मगर मुझमें हिम्मत नाँ हुइ कि मे अपने पति सें नजरें मिलाऊँ याँ उसको रोकूँ याँ टोकूँ। मैंने अपनी नजरें वापिस डॉली कि टाँग पर्र जमादीं औऱ आहिस्ता-आहिस्ता मूव मलनेलगी।
डॉली कों किसीबात कां होश नहि थां। वोँ तौ बस अपनी आँखें बंदकिए हुए पड़ी हुइ थि। डॉली कि नंगी गोरी टाँग कों सहलाते सहलाते मेरेमन मे एक् शैतानी ख्याल आया। कि क्यूं नाँ मे इसकी टाँग कों थोडा औऱ एक्सपोज़ करूँ औऱ देखूँ कि तब भि चेतन अपनी बेहन कि गोरी टाँगों कों नंगा देखता रहता हैं याँ नहि.
यहीसोच कर मैंने आहिस्ता सें डॉली कि सलवार उसके घुटनों केँ ऊपर सरका दि। औऱ अब उसकी खुली पायेंचे वाली सलवार उसके घुटनों सें ऊपर आँ गई थि। जिसकी वजह सें डॉली कां घुटना औऱ उसकी जाँघ कां थोडा सां निचला हिस्सा भि नंगा हौ गय़ा थां।
मैंने उसके घुटनों पऱ भि आहिस्ता-आहिस्ता मूव लगानी शुरुआत कर दि औऱ मसाज करती हुइ। मैंने तिरछी नज़र सें अपने पति कि तरफ देखा। तौ पताचला कि अब भि वोँ चोर नज़रों सें अपनी बेहन कि नंगी टाँग कि ओरदेख रहे थें।
मे दिल हि दिल मे मुस्करा दि।
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