ये क्या कर रही हो माँ! - Maa Beta Ka Rishta – New Episode
दोस्तों, शायदयह कथा आप् सभी कों पसन्द नहीं आँ रही हैं इसलिये कमेंट्स बहोत कम हैं अगरऐसा हि रहा तौ यह मेरा अंतिम भाग हैं मुझे किस्सा बंद करनी पडेगी बहोत मेहनत लगती हैं शब्दों कों चुनकर एक् कामुक स्टोरी लिखने मे मगर उसकेबाद भि अगरमै आप् लोगो कां ध्यान आकर्षित नहींकर पारहा हू तोँ मेरी लेखनकला मे हि कमी होँ शायद !
ये क्या कर रही हो माँ! - Maa Beta Ka Rishta – New Episode
मेरी सेक्स स्टोरी केँ पिछले भाग मे आपने पढ़ा कि केसेजय नें सफलतापूर्वक अपनी देसी पत्नि कों पेरिस केँ एक् बीच पऱ पूरी नंगीकर लिया औऱ समुद्र केँ पानी मे छिप पऱ खुलेआम चुदाई भि कर डाली.
अब आगे:
उसे समझ आँ गय़ा कि अगर वोँ इसबीच पऱ नंगी भि घूमे तौ किसी कों कोई फर्क नहि पड़ता।
दोनों नें तौलिये सें अपने अपने शरीर कों सुखाया औऱ वहीं थोडा घूमने कां सोचा।
जय- अबयहऊपर कि ब्रा भि निकाल हि दो। बड़ा अजीबलग रहा हैं, बुर दिखारही होँ औऱ बोबे छुपारही हौ।
शीतल-हे हे…बात तौ आपकीसही हैं, औऱ वैसे भि यहा किसी कों फर्क नहि पदरहा कि मे यहा नंगी खड़ी हूं।
इतना कहकर शीतल नें बिकिनी टॉप भि निकाल दिया औऱ खुले आसमान केँ नीचे पूरी नंगी हौ गई। बहुतदेर तक दोनों वहींबीच पर्र घूमते रहे। शीतल कों आज़ादी कां एक् नया हि अहसास हौ रहा थां। वोँ नंगी हि बीच पर्र दौड़लगा रही थि समंदर कि आती जाती लहरों मे छई-छप्पा-छई कररही थि। जय बहोत खुश थां शीतल कां यहरूप देखकर।
अब तोँ शीतल रिसोर्ट मे भि नंगी घूमने सें नहि शर्मा रही थि। उसरात ठण्ड अवश्य थि मगरफिन भि चाँद कि हल्की रोशनी मे दोनों फिन नंगे अकेले बीच पर्र गए। वहां एक् स्थान बहुत सारे जुगनू दिखाई दिए। उन जुगनुओं कि झिलमिल रोशनी मे शीतल कां नंगा शरीरजब अंगड़ाई लेतेहुए जय नें देखा तौ उसका लन्ड जल्दी पत्थर कां हौ गय़ा। फिनउन जुगनुओं केँ बीच खुले आसमान केँ नीचे जौ चुदाई हुईँ वोँ शायद जिंदगी मे एक् हि बार होती हैं।
मानो चुदाई कां दंगल होँ जहाँ नाँ किसी कों चित करना हैं नाँ स्वयं कों बचाने कोशिश मगरफिन भि कुश्ती जारी हैं। यह तौ बस अन्दर कि उत्तेजना हैं जोँ इसरूप मे बाहर् आँ रही हैं। इसमें प्रेम भि हैं; रोमांच भि औऱ वासना भि हैं। चुदाई कम होँ रही थि औऱ गुत्थम-गुत्थी अधिक। जब थोड़े थक जाते तोँ चुदाई कर लेते औऱ फिनजोश आँ जाता तोँ एक् बारफिन दंगल शुरुआत हौ जाता। आखिर दोनों झड़े तोँ दोनों नें यह माना कि इतनी अच्छी चुदाई उन्होंने कभी नहि कि थि। मजा आँ गय़ा!
फिन दोनों नें वहीं समंदर मे अपनीरेत साफ़ कि औऱ रिसोर्ट मे वापस आँ करसोगए।
अगली सुभह शीतल नें नहि पूछा कि क्याँ पहनना हैं। आज वोँ फ्रेश होने केँ बाद नंगी हि बाथरूम सें बाहर् आई।
शीतल-चलो मे तोँ रेडी हूं।
जय- मे भि सजधजकर हूं। देखा नंगे रहने केँ कितने फायदे हें।
उस पूरेदिन उन्होंने बीच पऱ मस्ती कि। शीतल भि अब पूरी बेशरम होँ गई थि। बीच केँ एक् किनारे पऱ बड़ी सि चट्टान कि ओट मे चुदाई भि करली। बहरहाल अगलेदिन यहा सें विदा लेना थां औऱ फिन सें कपड़े वालों कि दुनिया मे जानां थां। शीतल नें वेल-बॉटम वाला पेंट औऱ डिज़ाइनर शर्ट पहना थां। साम तक दोनों एम्स्टर्डम पहुँच गए थें। सफ़र अधिक लम्बा नहि थां तोँ थकान उतनी नहि थि। जय नें उसेकुछ ख़ास दिखने केँ लिएसंग चलने कों कहा। शीतल नें एक् मैक्सी पहनली जिसके अन्दर वोँ अभि भि नंगी थि। उसेअब नंगेपन कां अहसास भानेलगा थां।
जयउसे एम्स्टर्डम केँ रेड-लाइट डिस्ट्रिक्ट लेँ गय़ा जहाँ जौ उनकी होटल सें पैदल जाने लायक दूरी पर्र हि थां। पूरी मार्ग पऱ जितने भि घऱ थें सबके सामने लड़कियां बहोत हि छोटे कपड़े पहनकर खड़ी हुई थीं। जय नें शीतल कों बताया केँ यहसभी पैसे लें कर सेक्स करने केँ लिए खड़ी हुईँ हें।
शीतल- आप् भि नाँ! अब मे बिंदास होँ गई हूं तौ इसका मतलबयह नहि कि आप् मुझेऐसी स्थान लें आओ। मुझसे आपकामन नहि भररहा क्याँ?
जय-अरे नहि दोस्त! यहाइस सभी कों गलत नहि मानते यहसभी इसको एक् बिज़नस कि तरह करती हें औऱ सरकार कों टैक्स भि देती हें।
शीतल-चलो ठीक हैं मगरफिन भि आपको क्याँ ज़रूरत पड़ गई यहाआने कि? मुझे बिल्कुल मनपसंद नहि कि आप् मेरे अलावा किसी औऱ कि तरफ नज़रउठा कर भि देखो।
जय- अरे नहि दोस्त, तूँ फिकर नां कर। मे तोँ तेरी दिखाने केँ लिए लाया थां क्योंकि अपनेउधर तोँ तेरी लें कर गय़ा तोँ लोग तेरे पीछे हि पड़ जाएंगे इसलिये सोचायह स्थान सही हैं जहाँ तुँ बिना किसी फिकर केँ देख सकती हैं कि यहसभी देह व्यापार कैसा होता हैं।
शीतल-चलो ठीक हैं देख लियाअब वापसचलो।
जय-हाँ अभि तोँ चलोमगर कल वापस आएँगे। यहा एक् क्लब हैं वहांकल केँ शो कि बुकिंग करवाई हैं।
उसरात जय नें शीतल कों नहि चोदा। थकान कां एक्सक्यूज़ करकेसो गय़ा मगरसच तौ यह थां कि उसेपता थां कि शीतल कों अब रोज़ चुदाई कि आदत होँ गई हैं औऱ आज चुदाई नहि मिली तौ कल वोँ बहोत चुदासी रहेगी। अगलीरात केँ ड्रीम्स देखते देखते वोँ सो गय़ा।
अगलेदिन दोनों दिनभर ट्यूलिप गार्डन औऱ एम्स्टर्डम कि नहरों मे घूमते रहे, औऱ भि कई स्थान गएमगर साम सें पहले होटल वापस आँ गए। साम कों फ्रेश होकर सजधजकर होने केँ लिएजय नें शीतल कों एक् मिनी स्कर्ट औऱ नूडल स्ट्रिंग वालाटॉप पहनने कों कहा। अब तक शीतल कि लज्जा तौ खत्म हौ हि चुकी थि इसलिये उसनेकोई नखरा तोँ किया हि नहि बल्कि बिनाकहे अन्दर भि कुछ नहि पहना।
रेडी होकर डिनर केँ वक़्त सें पहले हि दोनों एक् क्लब केँ सामने जा पहुंचे जिसके ऊपर लिखा थां ‘बार नाईटक्लब – कासा रोज़ा’
अन्दर पहले सें रिज़र्व स्थान तक पहुँचाने केँ लिए एक् लड़कीसंग आई जिसने एक् बड़ी चमकीली बिकिनी पहनी हुईँ थि। उसने उन्हें एक् कमरे मे लेँ जाकर एक् सोफे पऱ बैठने कों कहा औऱ चली गई। यह बहोत हि आरामदायक सोफे थां जिस पर्र दोलोग आहिस्ता बैठ सकते थें। सोफे केँ सामने एक् टेबल थां जिस पऱ कुछ ग्लास औऱ सजावटी सामान थां।
कमरे केँ दूसरे कोने मे ठीक वैसा हि सोफे औऱ टेबललगा हुआ थां औऱ इस कमरे कि सामने कि दीवार नहि थि बल्कि कुछ हि दूरी पर्र एक् स्टेज थां जोँ दरअसल एक् बड़ेहॉल मे थें औऱ यहरूम मात्र इसलिये बनाया गय़ा थां कि हॉल केँ लोगइस कमरे केँ अन्दर नाँ देख सकें औऱ यहा बैठेलोग स्टेज कां शो प्राइवेट मे देख सकें।
थोड़ी हि देर मे एक् औऱ जोड़ा इस कमरे मे आया औऱ दूसरे सोफे पऱ बैठ गय़ा।
इस दूसरे जोड़े मे जौ लड़की थि उसने बहोत हि छोटी मिनी स्कर्ट पहनी थि औऱ अन्दर आँ कर उसने अपना जैकेट उतार दिया जिसके अन्दर उसने एक् करीब ब्रा जैसी हि डिज़ाइनर टॉप पहनी थि। दोनों आते हि चिपककर बैठगए औऱ चोंच सें चोंच लड़ाने लगे।
जय नें अपना खाने-पीने कां आर्डर पहले हि कर दिया थां तोँ कुछ हि देर मे वही वेट्रेस एक् शैम्पेन कि बोतल लेकरआई औऱ दोनों केँ ग्लास भर केँ बोतल बर्फ कि बाल्टी मे रखकर दूसरे जोड़े सें आर्डर लेनेचली गई।
शीतल-यहा क्याँ खाने केँ संग डांस कां शो होता हैं याँ कोई नाटक होता हैं?
जय- देखते जाओ। यहा वोँ होगा जौ तुमने कभी नहि देखा होगा। अभि तौ तुम् अपना ड्रिंक लो। चियर्स!!!
दोनों पीनेलगे… कुछ हि देर मे म्यूजिक भि बजनेलगा। तभी वेट्रेस उस दूसरे वाले जोड़े कां आर्डर लेँ करआई। उन्होंने टकीला शॉट्स आर्डर किये थें। एक् ट्रे मे बहुत सारे छोटे छोटे ग्लास रखेहुए थें औऱ संग मे कुछ नींबू औऱ कुछ औऱ भि चीज़ें थीं। उस व्यक्ति नें कुछकहा तोँ वेट्रेस नें अपनी बिकिनी ब्राखोल दि फिन एक् टॉवल सें अपने स्तनों कों साफ़ कियाफिन एक् चुचुक पर्र नींबू कां रस औऱ दूसरे पर्र नमक लगाया फिन एक् टकीला ग्लास अपने दोनों स्तनों केँ बीचदबा करउस व्यक्ति केँ पास गई, उसने ग्लास सें टकीला पी औऱ फिन उसके दोनों चुचुकों कों चूसकर नमक औऱ नींबू चाटा।
शीतल नें जबयह देखा तोँ दंगरह गई। वोँ कुछ कहती कि तभी स्टेज पऱ शो शुरुआत होँ गय़ा।
एक् लड़का औऱ एक् लड़की म्यूजिक पर्र डांसकर रहे थें। धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ अपने कपड़े निकालने लगे औऱ बड़ा हि मादक नृत्य करनेलगे। इधरजय नें शीतल केँ पीछे सें अपना एक् हाथ उसकेटॉप मे डाल दिया औऱ उसके एक् बूब्ज़ कों सहलाने लगा। शीतल कों अब थोड़ी लज्जा आनेलगी।
शीतल- क्याँ कररहे हौ दोस्त?
जय-उधर देखो!
शीतल नें जब देखा तौ दूसरे कोने मे जौ व्यक्ति थां वोँ अपनी मित्र कि टॉपऊपर सरका चुका थां औऱ उसके चूचुकों कों बारी बारीचूस रहा थां। कभी दोनों चुम्बन करने लगते तौ वोँ उसके स्तनों कों मसलने लगता। शीतल पऱ शैम्पेन कां नशाअसर करनेलगा थां। सामने वोँ नाचते युगल पूर्ण नग्नावस्था मे बहोत मादकरूप मे आलिंगन औऱ चुम्बन करतेहुए थिरकरहे थें। शीतल भि कल सें चुदासी बैठी थि। उसने भि जोश मे आँ कर अपनाटॉप निकाल दिया औऱ जय केँ सर कों अपने स्तनों केँ बीचदबा कर मसलने लगी।
स्टेज पऱ चुदाई शुरुआत होँ गई थि औऱ कमरे केँ दूसरे कोने मे बैठा युगल भि पीछे नहि थां। वोँ अपनीऔरत दोस्त कों टेबल पर्र झुकाकर पीछे सें चोदरहा थां। म्यूजिक कि धुन भि ऐसी थि कि लगरहा थां चुदाई केँ लिए हि बनी थि। कुछ हि देर मे शीतल औऱ जय पूरे नंगे थें औऱ चुदाई कररहे थें। शीतल पलटी औऱ सोफे केँ बाजू पऱ अपनी कोहनियाँ टेककर घोड़ी बन गई ताकिजय उसे पीछे सें चोदसके मगर देखा कि सामने वाला जोड़ा भि ठीकउसी आसन मे चुदाई कररहा थां।
सामने वाला युगल शीतल औऱ जय कों देखकर मुस्कुराया औऱ दोनों तरफ सें इशारे मे हि हेल्लो-हाय हुइ।
अनजान युवक-वुड यू लाइकटु स्वैप? (क्याँ आप् अदला बदली करना मनपसंद करोगे)
जय-शी वोंट एप्रूव (वोँ मंज़ूरी नहि देगी)
अनजान युवक-नो प्रॉब्लम (कोईबात नहि)
शीतल औऱ जय दोनों केँ लिए हि ये पहलीबार थां कि वोँ किसी केँ सामने ऐसे चुदाई कररहे थें। उस पर्र बातें भि होने लगीं तौ उत्तेजना कुछ औऱ हि बढ़ गई औऱ उधर स्टेज पऱ लड़के नें लड़की केँ मुख मे अपना वीर्य छोड़ दियायह देखकर शीतल झड़ने लगी औऱ उसने भि नशे मे यही करने कि ठानली औऱ उठकरबैठ गई अपनामुख खोलकर। इतनादेख कर हि जय कि उत्तेजना चरम पऱ पहुँच गई औऱ उसने शीतल केँ मुँह मे अपना वीर्य छोड़ दिया।
इतना ड्रिंक करने केँ बाद वैसे हि शीतल कां मनकुछ नमकीन खाने कां होँ रहा थां। उसे वीर्य कां स्वाद मनपसंद आँ गय़ा औऱ वोँ पूरा निगल गई बाक़ी जौ इधरउधर लग गय़ा थां उसे भि उंगली सें निकाल करचाट गई औऱ बाकी लन्ड कों कोल्ड्रिंक कि स्ट्रॉ जैसेचूस केँ उसके अन्दर सें जौ मिला वोँ भि खा गई। आखिर दोनों नें कपड़े पहने औऱ नशे मे लड़खड़ाते हुए गाने एक् दूसरे कों अनाप-शनाप बकतेहुए होटल वापस आँ गए।
यूरोप केँ पांचदिन पूरे होँ चुके थें, अगलेदिन शीतल नें जय सें नहि पूछा कि उसे क्याँ पहनना हैं। वोँ अपना सलवार-सूट पहनकर अपनेदेश वापसआने केँ लिए रेडी थि
यूरोप सें वापसआने केँ बाद एक् अलग हि जोश आँ गय़ा थां जय औऱ शीतल केँ जिंदगी मे। अब शीतल पहले जैसी नहि रह गई थि; उसेअब चोदा-चादी केँ इसखेल मे मजाआने लगा थां। दरअसल मजाकभी चुदाई मे नहि होता। मजा तोँ उन खेलों मे होता हैं जोँ चुदाई केँ संगसंग खेले जाते हें। मजा समाज केँ उन नियमों कों चकमा देने मे होता हैं जिनको आप् बचपन सें बिना सोचे समझे निभाए जारहे होँ।
देररात सुनसान मार्ग पऱ चुदाई करने मे ज़्यादा मजा इसलिये नहि आता कि मार्ग कोई बहोत आरामदायक स्थान होती हैं। चलती ट्रेन मे सबके सोने केँ बाद चुदाई मे ज़्यादा मजा इसलिये नहि आता कि वोँ कोई आसानकाम हैं। दिन दिहाड़े किसी औऱ केँ खेत मे घुस केँ चोदने मे ज़्यादा मजाआता हैं पर्र इसलिये नहि कि खेतों मे कोई सौंधी खुशबू होती हैं।
इनसभी जोखिम भरे तरीकों सें चोदने-चुदाने मे अधिकमजा इसलिये आता हैं क्योंकि एक् तोँ जोखिम भरेकाम उत्तेजना बढ़ाते हें औऱ ऊपर सें हमारे अन्दर कां जौ जानवर हैं जिसको प्रकृति नें नंगा पैदा किया थां वोँ वापस आज़ादी कां अनुभव करता हैं। आज़ादी उन नियमों सें जोँ समाज नें हम् पर्र थोपे हें जिनका शायदकोई फायदा भि होगामगर फिन भि वोँ हमें अपनेसर पऱ रखा वज़न हि लगते हें।
शीतलइस वज़न सें मुक्त हौ गई थि इसलिये अब वोँ जय केँ संगयह सारेकाम करने मे पूरीतरह सें उसकासंग देनेलगी थि। घऱ पर्र अब वोँ अक्सर नंगी हि रहती थि; जब भि गाँव जाते तौ कभी किसी केँ खेत मे तौ कभीनदी केँ किनारे किसी टेकरी केँ पीछे चुदाई कर लेते। बस मे, ट्रेन मे, कभी मोहल्ले कि पीछे वालीगली मे तौ कभी अपने हि घऱ कि छत पर्र। शायद हि कोई स्थान बची हौ जहाँजय नें शीतल कों चोदा नां हौ।
इससभी मे कई महीने निकलगए। अब तौ बस एक् हि ख्वाहिश बाकी थि कि वोँ अपने मित्र विराज केँ संगमिल कर शीतल औऱ शालू कि सामूहिक चुदाई करपाए। वक़्त निकलते देर नहि लगती, जल्द हि राजन एक् साल कां होँ गय़ा औऱ विराज नें उसके बर्थडे पऱ जय औऱ शीतल कों बुलाया।
बर्थडे मनाने केँ बाद विराज औऱ राजन अकेले मे बैठकर बातें कररहे थें।
जय- औऱ सुना! शालू भाभी कि टाइट हुइ कि नहि?
विराज- अरे तूँ भि क्याँ शर्मा रहा हैं सीधे सीधेबोल नां कि भाभी कि बुर टाइट हुईँ याँ नहि?
जय-हाँ दोस्त वही, तूनेकहा थां नां कि भाभी कि बुर वापस टाइट हौ जाएफिन प्रोग्राम करेंगे।
विराज- इसीलिए तोँ तुम् लोगों कों बुलाया हैं। तेरी शीतल रेडी होँ तोँ अभि कर लेते हें।
जय-अरे रेडी तौ होँ हि जाएगी। यूरोप मे जौ जोँ करके हम् आये हें उसकेबाद मुझे नहि लगता कि मना करेगी, मगरफिन भि मुझे एक् बारबात कर लेनेदे। अगरसभी सहीरहा तौ न्यूइयर कि बर्थडे पार्टी मनाने तुम् हमारे यहा आँ जानां फिन वहीं करेंगे जौ करना हैं।
विराज- ठीक हैं फिन। जहाँ इतना इंतजार किया वहां थोडा औऱ सही। मगर अपनी यूरोप कि स्टोरी ज़रा विस्तार मे तौ सुना।
फिन देररात तक जय नें विराज कों यूरोप कि पूरी किस्सा एक् एक् बारीकी केँ संग सुना दि।
अगलेदिन शीतल औऱ जयशहर वापस आँ गए। उसरात जय नें वोँ विडियो कैसेट निकाले जोँ वोँ एम्स्टर्डम सें लेँ करआया थां। इनमें उस वक्त कि 8-10 मानी हुइ पोर्न फ़िल्में थीं। उसने उनमें सें वोँ फिल्म निकाली जिसमें दो जोड़े आपस मे एक् दूसरे केँ पति-पत्नि केँ संगमिल कर सामूहिक सेक्स करते हें।
फिल्म कों देखते देखते शीतल उत्तेजित होँ करजय कां लन्ड औऱ अपनी बुर सहलाने लगी।
जय- याद हैं, हमने भि एम्स्टर्डम मे ऐसे हि किसी अनजान कपल केँ संग सेक्स किया थां।
शीतल-हाँ! बड़ामजा आया थां। मगरयह लोग तौ अदला बदलीकर रहे हें मैंने तोँ आपके हि संग किया थां बस।
जय- तोँ अदला बदली भि कर लेती, मैंने कबमना किया थां।
शीतल-अरे नहि, यहकभी नहि होँ सकता। आपके अलावा कोई मुझेछू नहि सकता।
जय- मगर मेरी इजाज़त तौ तब तौ कर सकती हौ नाँ?
शीतल-अरे ऐसे केसे … मेरा जिस्म हैं तौ आपकी इजाज़त सें क्याँ होगा। अग्नि केँ सात फेरे लें करयहबदन आपको सौंपा हैं तौ आपके अलावा किसी औऱ कों छूने भि नहि दूँगी मे।
जय-ठीक हैं ठीक हैं बाबा … मगर जोँ एम्स्टर्डम केँ उस क्लब मे किया थां वैसाकुछ तोँ कर सकती होँ नां?
शीतल मुस्कुराती हुईँ- क्यूं? फिन सें एम्स्टर्डम चलने कां मन हैं क्याँ?
जय- नहि मगर वोँ काम तौ यहा भि होँ सकता हैं नां!
शीतल-यहा भि वैसे क्लब हें क्याँ?
जय- क्लब तौ नहि हें मगर तुम् हाँ तोँ करो हम् घऱ मे हि क्लबबना लेंगे।
शीतल- देख्ना कहींकोई गड़बड़ नां हौ जाए। किसे बुलाओगे; रंडियों कों?
जय- नहि दोस्त, वोँ विराज कों मैंने बताया थां कि हमने क्याँ क्याँ किया वहां तौ उसका भि मन थां। अब परदेस जानां वोँ चाहता नहि हैं तौ मैंने सोचाआगर तुम् हाँकरो तोँ उसको औऱ शालू भाभी कों यहीं पऱ वोँ सभी मज़े करवादें।
शीतलकुछ सोचते हुए- हम्म … शालू भाभी तोँ शायदमान भि जाएंगी। मगर मुझे आपके अलावा कोई छुएगा नहि; यह वादाकरो तोँ मुझे मंज़ूर हैं।
जय- एम्स्टर्डम मे भि तौ किसी नें कुछ नहि किया थां नाँ तुमको। बस वैसे हि करेंगे। चिंता नां करो विराज नहि चोदेगा तुमको। मे हि चोदूँगा बस … ऐसे …
फिनजय नें इसी ख़ुशी मे शीतल कों जम केँ चोदा। शीतल भि उन यादों सें बहुत उत्तेजित हौ गई थि। संगसंग वोँ अदला-बदली करके चुदाई करने वाली फिल्म कां वीडियो भि देखती जारही थि। उसे भि चुदाई मे बड़ामजा आया। अगले हि दिनजय नें विराज कों सन्देश भिजवा दिया कि न्यूइयर मनाने शहर आँ जाए। ये तौ बस एक् कोडवर्ड थां जिससे विराज समझजाए कि शीतल रेडी हैं।
31 दिसंबर 1987 कि साम केँ पहले हि विराज औऱ शालू, राजन कों अपनी दादीमा केँ भरोसे छोड़कर एक् रात केँ लिएजय केँ घऱ आँ गए। यहा कोई बड़ा बूढ़ा तौ थां नहि, सभी हमउम्र थें औऱ नाँ मात्र विराज-जय बल्कि शालू-शीतल केँ भि बहुतहद तक अन्तरंग समबन्ध रह चुके थें। येअलग बात हैं कि शीतल कों किसी औऱ केँ संगऐसे समबन्ध रखनासही नहि लगता थां इसलिये उसने शालू सें दूरी बनाई हुई थि मगरआज तोँ उनके संबंधों मे एक् नया मोड़आने वाला थां।
शालू अन्दर किचन मे शीतल कां हाथ बंटाने चली गई।
शालू- क्याँ बनारही हैं?
शीतल- मसाला पापड़ केँ लिए मसाला बनारही हूं। खानां तौ यह बोले खाने कि शायद ज़रूरत नां पड़े नाश्ते सें हि पेट भरने कां प्रोग्राम हैं।
शालू-हाँ, वैसे भि ऐसे मे थोडा पेट हल्का हि रहे तौ सही हैं।
शीतल- तुमको पता हैं नाँ यह दोनों क्याँ क्याँ सोचकर बैठेहुए हें?
शालू- मुझे इनके प्लान कां तुझसे तौ अधिक हि पता रहता हैं।
शीतल-हाँ, जब इन्होंने कहा तौ मुझेयही लगा थां कि तुम् तोँ सजधजकर हौ हि जाओगी।
शालू-देख शीतल! मेरा तोँ सीधा हिसाब हैं पति बोले तौ मे तोँ किसी औऱ सें भि चुदवा लूँ।
शीतल-हाय राम दैया! दिदी, आप् भि नाँ … कैसी बातें करती होँ।
इधर शालू औऱ शीतल कि बातें शुरुआत होँ रहींथीं जिसमें यूरोप कि यात्रा कि यादें थीं तोँ शालू कि टिप्पणियां भि थीं कि अगर वोँ होती तौ क्याँ क्याँ हौ सकता थां। शालू शीतल कों औऱ भि बिंदास बनाने कि कोशिश कररही थि। उधर विराज औऱ जय योजना बनारहे थें कि केसेइन महिलाओं कि स्वाभाविक लज्जा केँ पर्दे कों गिराया जाए औऱ अपने लक्ष्य तक आयाजाए।
जय- बाकीसभी तौ ठीक हैं दोस्त मगर शीतल नें साफ़कह दिया हैं कि वोँ मेरे अलावा किसी औऱ सें नहि चुदवाएगी। मैंने सोचा एक् बारसंग मिल केँ चुदाई तौ कर लें फिन होँ सकता हैं उसकी हिम्मत बढ़जाए औऱ हम् अदला-बदली भि कर पाएं।
विराज- तुँ फिकरमत कर, मे शालू कों हि चोदूँगा। मगर शालू नें ऐसीकोई शर्त नहि रखी हैं, तोँ अगर तुम् दोनों कां जुगाड़ जमजाए तोँ मुझे आपत्ति नहि हैं, तूँ शालू कों चोद सकता हैं।
रात 9 बजे तक तौ ऐसे हि बातें चलती रहीं औऱ उधर किचन कां काम खत्म करके शीतल औऱ शालू भि सजधजकर हौ गईंथीं। फिन दारु पीतेहुए गप्पें लड़ाने कां दौर शुरुआत हुआ। विराज औऱ जय स्कॉच पीरहे थें औऱ महिलाओं केँ लिए व्हाइट वाइनलाई गई थि।
कुछदेर तक इधरउधर कि बातों केँ बाद यूरोप कि बातें शुरुआत हुईं। शीतल लज्जा सें पानी पानीहुए जारही थि मगर शालूआगे होकर शीतल कि बताई हुई बातें चटखारे लेकर सुनारही थि।
विराज- फिन वोँ नंगेबीच पर्र बस नंगे होकर घूमे हि … याँ कुछ किया भि?
जय-दिन मे तौ नहि, मगररात कों किया थां … जुगनुओं केँ संग।
शालू- क्याँ बातकर रहे हौ जय भाईसाहब। बस जुगनुओं केँ संग? शीतल तोँ बतारही थि किसी क्लब मे किसी औऱ जोड़े केँ संग भि किया।
ये क्या कर रही हो माँ! - Maa Beta Ka Rishta – New Episode
फिल्म खत्म हुई तब तक 12 बजने मे 10 मिनटकम थें।
विराज- दोस्त, काश हम् भि तुम्हारे नग्न समुद्रतट यानि न्यूड बीच वाला अनुभव लें पाते।
शालू- मुझे तोँ उस क्लब मे जाकर चुदवाने कां मनकररहा हैं।
जय- क्यूं नां हम् यहीं वोँ क्लबबना लें। मानलो यही वोँ क्लब हैं औऱ हम् न्यूइयर मनाने यहाआये हें।
शालू- एक् काम करते हें जैसे हि 12 बजेंगे, हम् सभी एक् संग नंगे होँ जाएँगे तोँ फिन किसी कों पहले याँ बाद मे नहि होना पड़ेगा औऱ लज्जा भि नहि आएगी।
विराज- ठीक हैं फिनऐसे कपड़े पहन लेते हें जौ एक् झटके मे निकल जाएं।
शीतल- आप् लोग अन्दर जाकर लुंगी पहनलो।
शालू-हाँ, हमारे कपड़े तोँ वैसे भि सिर्फ यह डोरियों सें अटके हें बस अन्दर केँ कपड़े निकालने पड़ेंगे तोँ वोँ हम् पहले हि निकाल लेते हें।
शालू औऱ शीतल नें जोँ मैक्सी पहनीथीं उनमें कंधे पऱ बसदो डोरीथीं जिनके सहारे पूरी ड्रेस लटकरही थि। जब दोनों मर्द बेडरूम मे लुंगी लेनेगए तोँ शालू नें अपनी निगरानी मे शीतल केँ ब्रा औऱ पेंटी निकलवा दिए औऱ स्वयं केँ भि निकाल दिए। 12 बजने मे 1 हि मिनटबचा थां।
जय (ऊंची आवाज़ मे)- एक् कामकरो आप् लोग भि यहा बेडरूम मे हि आँ जाओ।
शीतल-ठीक हैं जी।
शीतल नें नशे मे लहराती हुइ आवाज़ मे जवाब दिया.
दोनों बेडरूम मे पहुंचे तोँ जय औऱ विराज लुंगी लपेटकर आधे नंगे खड़े थें औऱ अंतिम मिनट केँ सेकंड्स गिनरहे थें।
49 … 50 … 51 … 52 … 53 … 54 … 55 … 56 … 57 … 58 … 59 … हैप्पी न्यूइयर !!!
एक् झटके मे दोनों लुंगियां ज़मीन पर्र थीं। अगले हि क्षण शालू कि मैक्सी भि फर्श पर्र गिर गई मगर शीतल नें अपनी मैक्सी निकलने केँ बजाए दोनों हाथों सें अपनी आँखें बंदकर लींथीं। आखिर शालू नें हि उसे अपनेगले लगाते हुए उसकी मैक्सी नीचे खसका दि। वैसे शायद वोँ ऐसी हालत मे शालू कों अपने सें चिपकने नाँ देतीमगर अभि लज्जा केँ मारे वोँ उससे चिपक गई औऱ अपनासर उसके कंधे पऱ झुकाकर आँखें मूँदलीं।
विराज जाकर शालू केँ पीछे चिपक गय़ा औऱ जय शीतल कां पीछे। शालू नें जय कों आँख मारते हुए चुम्बन कां इशारा किया औऱ अपने होंठआगे करदिए। जय भि हल्का नशे मे थां औऱ न्यूइयर जश्न कि मस्ती थि सोअलग। उसने भि आवाज़ किये बिना अपने होंठ शालू केँ होंठों सें टकराकर हल्का सां चुम्बन लें लिया। तभी शालू नें शीतल धक्का देकर अपने सें अलग किया।
शालू-अब तुँ अपना पति सम्हाल; मे अपना सम्हालती हूं।
इतनाकह कर शालू पलटी औऱ घुटनों केँ बलबैठ कर विराज कां लन्ड चूसने लगी। जय नें शीतल कों पीछे सें पकड़ लिया औऱ एक् हाथ सें उसके बूब्ज़ मसलने लगा औऱ दूसरे सें उसकी बुर कां दाना।
एम्स्टर्डम मे तौ कोई अनजान थां जिसके सामने शीतल नें चुदवाया थां औऱ वहां एक् जोड़ा स्टेज पऱ खुलेआम चुदाई कररहा थां जिसेदेख करउसे जोश आँ गय़ा थां; मगरयहा तोँ उसके पति कां लंगोटिया दोस्त थां जिसके सामने वोँ नंगी खड़ी थि औऱ वोँ अपनी पत्नि सें लन्ड चुसवाते हुए उसके नंगे शरीर कों निहार रहा थां।
पहलीबार अपने बचपन केँ यार कि नंगी पत्नि कों देखते हुए विराज केँ लन्ड कों लोहे कि रॉड बनने मे देर नहि लगी। उसने शालू कों वहीँ पलंग पऱ पटका औऱ उसकीकमर केँ नीचे तकिया लगाकर उसे चोदने लगा। शालू केँ दोनों पैरों कों उसने अपने हाथों सें पकड़रखा थां औऱ स्वयं घुटने मोड़कर खाट पऱ बैठे बैठेउसे चोदरहा थां।
जय औऱ शीतलकुछ देर तक तोँ उनकी चुदाई देखते रहेफिन जय शालू केँ बाजू मे पीछे दीवार पऱ तकिया लगाकर अधलेटा सां बैठ गय़ा औऱ शीतल कों अपना लन्ड चूसने केँ लिएकहा। पहले तौ कुछदेर उसनेबैड केँ किनारे बैठकर जय कां लन्ड चूसामगर फिन सुविधा केँ हिसाब सें बैड पऱ पेर मोड़कर बैठी औऱ झुककर चूसने लगी। ऐसे मे उसकी गांड विराज कि आँखों केँ ठीक सामने थि औऱ दोनों जंघाओं केँ बीच उसकी चिकनी मुनिया भि झाँकरही थि।
विराज कभी शीतल कि गांड औऱ बुर कों देखता तोँ कभी उसके झूलते बूब्ज़ कों। शालू कां ध्यान बहुतदेर सें विराज कि नज़रों पऱ थां। उसने भि सोचा क्यूं नां वोँ कोई शरारत करे। उसने अपनासर जय कि ओर घुमाया औऱ जैसे हि जय नें उसकीओर देखा, शालू नें अपने हाथों सें अपने स्तनों कों सहलाते हुए आँखों सें उनकीओर इशारा किया औऱ फिन अपने होंठों सें एक् हवाई चुम्बन जय कि ओर फेंका।
जयइस मादक आमंत्रण केँ सम्मोहन मे बंधकर जैसे स्वयं-ब-स्वयं शालू कि ओर झुका औऱ उसके मुलायम आमों कां रस चूसने लगा। शीतल तौ जय केँ लन्ड पऱ झुकी थि इसलिये देख नहि पाई कि अभि अभि क्याँ हुआमगर इस हरकत नें विराज कां ध्यान अपनीओर खींच लिया। उसकी आँखों केँ सामने उसका साथी उसकी पत्नि केँ स्तनों कों मसलते हुएचूस रहा थां। विराज कि उत्तेजना औऱ बढ़ गई औऱ उस सें रहा नहि गय़ा। उसने भि शीतल कि गांड पऱ हाथ फेरते हुए एक् उंगली उसकी भीगी-भीगी चुनिया-मुनिया केँ अन्दर सरका दि।
शीतल कों तोँ जैसे करंटलग गय़ा। पहले तोँ वोँ कुछ क्षणों केँ लिए जैसे मदहोशी केँ आगोश मे समां गई मगर जैसे हि वोँ मदहोशी टूटीउसे यादआया कि उसके पति नें वादा किया थां कि उसके अलावा शीतल कों कोई नहि चोदेगा औऱ वोँ अचानक उठकरबैठ गई औऱ गुस्से सें विराज कि ओर मुड़ी…
शीतल- आपकी हिम्म… त…
मगरतभी उसे एहसास हुआ कि उसने अभि अभि क्याँ देखा थां। उसने अपनासर वापसजय कि ओर घुमाया औऱ देखा कि वोँ अभि भि शालू कां स्तनपान करने मे व्यस्त थां।
शीतल-अब समझआया। यही चाहिए थां नां आपको? तोँ फिन मेरी क्याँ ज़रूरत थि। मुझे अपने चरित्र पर्र कोईदाग नहि लगवाना; आपको जोँ करना हैं कीजिये; मे मना नहि करतीमगर मुझेइस सभी मे शामिल नहि होना हैं। मे जारही हूं। आप् लोग मज़ेकरो।
इस सें पहले कि जय सम्हाल पाता याँ समझ पाता कि क्याँ हुआ हैं, शीतल बाहर् निकल गई।
जय- क्याँ हुआ दोस्त, अचानक सें इतना क्यूं भड़क गई। अच्छा नहि लगा तोँ मनाकर देती।
विराज- नहि दोस्त! भाभी भड़कीं तौ मेरी हरकत सें थि फिन तेरी हरकतदेख केँ उनका क्रोध बेकाबू होँ गय़ा।
जय- तेरी तौ मैंने बताया थां नां कि वोँ मेरे अलावा किसी सें नहि चुदवाएगी फिन तूने हरकत कि क्यूं?
विराज- नहि दोस्त, मेरा चोदने कां कोई इरादा नहि थां। वोँ तोँ तुम को शालू केँ बोबे चूसते देखा तौ सोचा छूने मे क्याँ हर्ज़ हैं तोँ मैंने एक् उंगली भाभी कि बुर मे डाल दि पीछे सें, यहसोच केँ कि उनको भि थोडा मजा आँ जाएगा।
जय-अरे दोस्त! गलती मेरी हि हैं। उसनेकहा थां कि उसे मेरे अलावा कोईहाथ नहि लगाएगा औऱ मैंने तुम्हारी तरफबोल दिया कि मेरे अलावा कोई नहि चोदेगा। अब तोँ यह ग़लतफ़हमी महंगी पड़ गई। खैर तुम् अपनी चुदाई समाप्त करो मे जा केँ देखता हूं मना सकता हूं याँ नहि अब उसको। आधे घंटे मे वापस नां आऊं तोँ फिन इंतजार मत करना।
विराज औऱ शालू कां तौ मन फीकापड़ गय़ा थां, तोँ उन्होंने फिनआगे चुदाई नहि कि। जय नें भि शीतल कों मानाने कि कोशिश कि मगर उसनेबात करने सें साफ़ इन्कार कर दिया। जय नें फिन वापस जानां सही नहि समझा, वोँ वहीं शीतल केँ संग चिपककर सो गय़ा।
उधर विराज-शालू नें भि कुछ वक़्त तक इंतजार कियाफिन वोँ भि सोगए। अगली सुभह दोनों जल्द निकलगए क्योकि राजन कों उसकी दादीमा केँ भरोसे छोड़कर आए थें तौ अधिकदेर रुक नहि सकते थें।
इस सामूहिक चुदाई कां तोँ कुछ नहि होँ पाया क्योंकि शीतल केँ संस्कार उसे पराए मर्द सें चुदवाने कि इजज़र नहि देरहे थें मगर शालू क्याँ उसके औऱ जय केँ बीचकोई औऱ नया समीकरण बन पाएगा?
देखते हें अगलेभाग मे!
ये क्या कर रही हो माँ! - Maa Beta Ka Rishta - Continue reading next part
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