रिश्तों की परिभाषा - Parivar Ki Kahani - Real Story Continue Part 1
केसे होँ मेरे प्यारे पाठको?
उम्मीद हैं सभीकुछ अच्छा हि होगा। खैर मे कोई लेखक नहि पऱ मुझेपढ़ पढ़ केँ इतना तजुर्बा हौ गय़ा हैं कि सोचता हूं अपना लिखूं कुछ, ऐसा जोँ लिखा नां गय़ा याँ लिखा गय़ा तौ ठीक सें उसको लिखा नाँ जासका।
यह एक् ऐसी किस्सा हैं जोँ रोमांच सें भरपूर होगी, स्थान स्थान नए किरदार जुड़ेंगे औऱ कथा केँ कार केँ पहिएबन कर स्टोरी कों आगे बढ़ाएंगे मेराकाम बस इतना हैं कि मे कार कों नियंत्रण मे रखूं औऱ आप् सबइसकार केँ ईंधन हें जिनके बिना संभव हि नहि कि व्हीकल एक् इंच भि बढ़पाए।
मे इस स्थान नया हूं, मुझे फीचर्स समझने मे वक़्त लगेगा तोँ आपसे विनम्र निवेदन हें कि जोँ भि चीज मुझे समझने मे कष्ट हौ याँ लगे कि केसे कियाजाए कौन सां फॉन्ट, पेज, पेज कों केसे एक् दूसरे सें कनेक्ट करना। मुझेजब भि आप् लोगों कि जरूरत होगी मे आवाज़ दूंगा औऱ अच्छे पाठक कां फर्ज हैं सहायता करना।
खैर बातें बहोत हुइ अब थोडा बता देता हूं किस्सा कां ऊपरऊपर कां हिस्सा स्टोरी आज सें ठीक 1 हफ्ते बाद आएगी। अब आप् बोलेंगे इतना वक़्त क्यूं तौ वोँ इसीलिए कि मे स्टोरी कां 10 भागजब लिख लूंगा तोँ स्टोरी दूंगा मे ज़्यादा प्रतीक्षा करवाने मे नहि मानता क्योंकि मैंने भि कई किस्सा पढ़े जोँ पाठक कों बीच मझधार मे छोड़ देते हें, फिन उसकेआगे क्याँ हुआ केसेहुआ कुछपता नहि। तोँ आइएअब इसनए दुनिया कि शुरुआत कि जाए।
स्टोरी मूलरूप सें एक् परिवार केँ इर्द गिर्द घूमती हैं उस परिवार मे कहने कों तौ सभी हैं मगर मुख्य किरदार हें चार एक् पति, एक् पत्नि
एक् नन्द, औऱ एक् आदमी जिसकी परिचय आपकोबाद मे मिलेगा। यह किस्सा हैं रिश्तों कि, मर्यादा कि, मर्यादा कों लांघने कि, हिम्मत कि, केसे एक् शख्स अपने परिवार केँ लिएकुछ भि कर सकता हैं औऱ एक् बात मे विशेष रूप सें बतादूं कि यहकथा थोड़ी धीमीगति सें आगे बढ़ेगी। यकीन मानिए इसमें भि वोँ सभी हैं जोँ बाकी कहानियों मे होती हैं पर्र मे अपने किरदारों केँ संग खेलना चाहता हूं उनकोइस स्टोरी केँ रस मे ऐसे घोलना चाहता हूं कि लगे कि वोँ निर्जीव नहि सजीव हें लगे कि ऐसाअसल मे भि हौ सकता हैं। इतनी मिठास, इतना अपनापन, उम्मीद, आशाहर वोँ चीज जौ इंसान कों इंसान बनाती हैं वोँ इन किरदारों मे होगी, जैसे भारत मे एक् मध्यम वर्ग कां परिवार अपनी जीवनबसर करता हैं, वैसे हि।
तोँ अबआज सें ठीक एक् हफ्ते बाद आएगी मेरी माने तौ आप् लोगइसे बुकमार्क कर केँ रख लें अबकुछ वक्त तक यह आपके जिंदगी कां एक् हिस्सा बननेजा रही हैं औऱ मुझे भि इसनएसफर केँ लिए प्रोत्साहन करें अधिक सें अधिक मात्रा मे लाइक्स औऱ कमेंट कर केँ अब इससेकोई मुझे पैसे मिलने नहि वाले तोँ आपका प्रेम आप् कमेंट मे हि जताए, मुझे अच्छा लगेगा।
शुभकामनायें दोस्त आपकी पहली स्टोरी केँ लिये विशेष रूप सें हिन्दी /देवनागरी लिपि मे लिखने केँ लिये आभार
रिश्तों की परिभाषा - Parivar Ki Kahani – New Episode
Update 1
सुभह केँ चारबज रहे थें। धीरे-धीरे धीरे-धीरे रातइस तरफ सें हटकर संसार केँ दूसरे तरफपेर पसाररही थि, मुर्गे बांगदे रहे थें, ठंडीहवा पतों कों हिलारही थि जिससे ऐसी आवाजें आँ रही थि कि वोँ un पत्तों केँ संगखेल रही। इन्हीं सभी केँ बीचराज अकेला बालकनी मे खड़ा, हांथ मे सिगरेट लिएकुछ सोचरहा थां, उसके हांथ मे एक् लिफाफा थां जौ उसेकल साम कों हि मिल गय़ा थां पऱ उस लिफाफे कों खोल केँ देखने कि उसकी हिम्मत नहि हौ रही थि। उसका औऱ सारे परिवार कां भविष्य उस लिफाफे मे थां उसेडर थां कि जौ बातउसे खारही हैं कहीं वोँ सच नाँ होँ। इसीसभी केँ कारणरात भरउसे नींद नहि आई। कभी इधरकभी उधर तौ कभी अपनी पत्नि कों प्रेम सें सोतेहुए देखता औऱ स्वयं कों भगशाली मानता कि ऐसी पत्नि मिली पऱ दोष भि देता कि वोँ उसके लायक नहि। उसने बालकनी मे सिगरेट खतम कि ओर जैसे हि मुरने कों हुआउसे उसके कंधे पे हांथ महसूस हुआ।
अंजली: क्याँ हुआराज? यहां क्याँ कररहे हौ
राज:अरे अंजली तुम् उठ गई आज जल्द(बात घुमाते हुए)
अंजली: मै तौ उठ गई पर्र तुम्हें क्याँ हुआ हैं जोँ यहांइस समय
राज: अरेकुछ नहि रात कों ज़्यादा खा लिया थां तोँ थोड़ी एसिडिटी हौ गई थि तुम् तोँ जानती होँ मुझे, थोडा भि अधिकखा लेता हूं तोँ हालत खराब होँ जाती हैं
अंजली: ओफोजब पता हैं फिन क्यूं करते होँ रुको मे दावा लेँ केँ आती हूं
राज: मैने दावा लें ली हैं अब तुम् आरामकरो मे भि आता हूं
अंजली: अब क्याँ अब तोँ सुभह होने होँ वाली हैं मे वैसे भि आधे घंटे मे उठ केँ जॉगिंग जाती, आज थोडा जल्दसही। चलो मे फ्रेश होँ जाती हूं तुम् आरामकरो
राज नें इस पर्र कुछ जवाब नहि दियाबस मुस्करा दिया औऱ अंजली कों देख केँ मन मे कहा केसे बताऊं तुम्हें अंजली मेरेमन मे क्याँ हैं। मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा। ऐसा लगरहा जैसे मे टाइम मे वापस जाऊं औऱ तुमको स्वयं सें विवाह करने सें रोकदूं। सोचते सोचते राजलेट जाता हैं रूम मे आँ कर
अंजली: बाथरूम सें निकलकर, अच्छा राज मे आती हूं तुम् आरामकरो
राज:ठीक हैं बेबी, मे ब्रेकफास्ट बनाकर रखूंगा
अंजली: जी नहि, आप् ऐसाकुछ नहीं करेंगे, आप् चुपचाप बैड पर्र रहिए
यह कहके अंजली राज कों किसकर लेती हैं औऱ बाई बोले निकल जाती हैं,
अंजली बाहर् दौड़ने निकल गई इतनी सुभह थि कोई नहीं थां वोँ अकेले बगल केँ पार्क मे दौररही थि उसे पंछी केँ कभी पतों केँ आवाजें बहुतभा रही थि। उनका खुशी लेने केँ लिए वोँ वहींबैठ गई औऱ एक् तरह सें खो गई जब उसका ध्यान टूटा तोँ उसने देखा कि कोई उसकोदेख रक्षा हैं एक् तोँ इतना अंधेरा ऊपर सें लाइट भि जा चुकी थि, जैसे कि हर लड़की कों लगताउसे डर लगनेलगा उसने जल्द अपना बॉटल उठाया औऱ वहां सें निकल गई। उसेयह भि जानना नहि थां कि वोँ कौन हैं उसेबस वहां सें जानां थां यहबात हमें उसके चरित्रवान होने कां एक् प्रमाण देती हैं।
जैसे हि वोँ घऱआई उसने सुकून कि सांसली तभी रसोई सें आवाज़ आती हैं बर्तन कि
अंजली: कौन हैं? राज?
राज: नहि भूत
अंजली: अरे मैंने मना किया थां नाँ तुम्हें, तुम् मेरीकोई बात मानते क्यूं नहि
राज:अरे बाबा क्रोध मतकरो वैसे भि मुझे नींद नहि आँ रही थि तौ सोचा तुम्हारे लिएकप कॉफ़ी बनाकर रखूं, चलो जाओ चेंजकर लोफिन संग मे पीते हें
अंजली: (खुश होतेहुए) बस अभि आई पति देव
अब आप् लोग कां परिचय इनदो किरदारों सें होँ गय़ा हैं मगर मे फिन भि अपनीओर सें दोनो किरदारों कां स्पष्ट रूप सें विवरण करदूं, ताकि आपके आंखों मे जौ जैसा हैं उसकाठीक वैसा चित्र बनकरआए
राज एक् 32 साल कां व्यक्ति हैं। मेहनती, पढ़ा लिखा, समझदार, भावनात्मक, एक् पुरुष मे जौ भि गुण होते हें वोँ इसमें हें। यह एक् सरकारी मुलाजिम हैं। यह देखने मे ठीकठाक हैं पऱ वोँ कहते हें नां पुरुष कि सुंदरता नहि देखी जाती बल्कि यह देखी जाती हैं कि वोँ हरतरह सें पुरुष कहलाने लायक हैं याँ नहि।
अंजली: यह 28 साल कि हैं। बहोत हि हसीन, शुशील, संस्कारी। हर टाइम सारी पहेने वाली। बाहर् अगर दौड़ने जाती थि तोँ भि ऐसे ट्रैक सूट पहनती थि जिससे साराबदन ढकारहे। इसे किसीबाद कां घमंड नहि, जौ इससे प्यार सें बात करता उसकायह बहोत इज्जत करती। इसका हाइट काठी एक् सामान्य महिला केँ जैसा हि हैं। बस उभार इतने आकर्षित हें कि सांसारिक जिंदगी वाले पुरुष कों तोँ हटा दीजिए जौ बाल ब्रह्मचारी हें उनका भि मनडोल जाए।
अब चलिए देखते हें दोनो मे क्याँ बात हौ रही
राज: गरमचाय पीतेहुए: आज कां क्याँ प्लान हैं तुम्हारा
अंजली: अरे तुम् भि कमालबात करते हौ मे कौन सां काम करती हूं। दिनभर तौ पड़ी रहती हूं घऱ मे। तुम् कहीं घुमाने भि नहि लें जाते।
राज: अच्छा तोँ ठीक हैं सामान बांधलो हम् आजसाम हि नैनीताल घूम केँ आते हें
अंजली: क्याँ सच मे?
राज:हां बाबाचलो जल्दजाओ इससे पहले मेरामूड बदलजाए।
अंजली: ufff i love you तुमने तोँ मुझेखुश कर दिया
राज मन मे सोचता हैं कि काश तुम्हे मै हमेशा खुशीदे पाता। अब तुम्हें केसे बताऊं मे नैनीताल क्यूं जारहा। इस लिफाफे मे क्याँ हैं क्यूं हैं केसे बताऊं तुम्हें। खैर बताना तौ होगा हि मगर अभि नहि अच्छा वक्तदेख केँ बताऊंगा। औऱ बस हिम्मत जुटालूं इस पहाड़ कों अपनेऊपर लेने कि।
रिश्तों की परिभाषा - Parivar Ki Kahani – New Episode
UPDATE -2
राज अपनेमन सें लड़ने मे व्यस्त थां कि तभी दरवाजे कि घंटीबजी जिससे राज अपनी दुनिया मे वापसआया।
राज:अरे अभि कौन आँ गय़ा।
राज जैसे हि दरवाजा खोलता हैं सामने देख चौंक जाता हैं। सामने उसकी बेहन सविता खड़ी थि
सविता, अंजली केँ बिलकुल विपरीत हैं, दोनों एक् दूसरे सें इतनेअलग हें जैसे कि दो विलोम शब्द, सूर्य चांद कां अंतर, अंजली जितनी संस्कारी थि, उतनी हि तेज औऱ मॉडर्न थि सविता। इसकानाम इसके किरदार कों, इसके चरित्र कों बखूबी दर्शाता हैं। इसे लड़कों सें बात करना, उनकेसंग घूमना बहोत पसन्द हैं। फिरभी इसकी विवाह हौ गई हैं पर्र इसका पति कहीं बाहर् जॉब करता हैं जिसके कारण इसकीमन कि इच्छाएं इतनी प्रबल हौ जाती हें कि बर्दाश्त करना मुश्किल होँ जाता हैं। विवाह सें पहले इसकेकई बॉयफ्रेड थें जोँ बातराज कों पता थि। इसबात सें राज नें इससेबात करनाबंद कर दिया थां मगरफिन जैसे विवाह हुइ तोँ राज कों लगा कि अबसभी ठीक हौ जायेगा पर्र वोँ उतना हि गलत थां जितना एक् मांझी शांत समंदर कों देखकर होता हैं कि आगेसभी ठीक हैं। यकीन मानिए सविता केँ बिनायह कथाआगे बढ़ हि नहि सकती। साराखेल इसके इशारों पर्र होने वाला हैं आगे।
सविता
सविता: अरे भैया कहां हौ गए मे हूं, सविता
राज:हां हांआओ आओ अंदरआओ। अरे अंजली देखो तौ कौनआया हैं
सविता: भाभी भाभी कहां हौ जल्दआओ। आपकी प्यारी ननदीआई हैं।
अंजली( सविता कों देख केँ खुश भि थि औऱ मायूस भि) : अरे सविता आओ। तुम् अचानक?
सविता: क्यूं? नहि आँ सकती क्याँ?
अंजली: अरे कैसीबात करती हौ, यह भि तुम्हारा हि घऱ हैं।
सविता: अच्छा मेराघऱ हैं? तोँ करवादो रजिस्ट्री? हाहाहाहाहा
अंजली( राज कों घूरते हुए): अच्छा बातें बाद मे अभि एक् कामकरो तुम् नहाधो लोफिन संग ब्रेकफास्ट करते हें।
सविता: जल्दी गई, जल्दी आई।
सविता केँ जाते हि अंजली गुस्से सें राज कों देखते हुए कहती हैं
सविता: तुमने इसे क्यूं बुलाया अभि। स्वयं हि प्लान बनाते होँ औऱ स्वयं हि बिगड़ते हौ
राज:अरे मैंने नहि बुलाया। पता नहि यह क्यूं आई हैं अभि
अंजली: अब तौ तुम्हारी बेहन हि बताए कि क्यूं बुलाया हैं
इतनेदेर मे सविता बाहर् आती हैं औऱ राज उसकोदेख केँ चौंक जाता हैं। उसके हांथ मे वही लिफाफा थां। राज कों यादआता हैं कि उसने लिफाफा बाथरूम मे छुपाया थां
सविता: भैया यह आपका हैं क्याँ?
अंजली: क्याँ हैं यह?
सविता: पता नहि बाथरूम मे थां।
राज कों कुछसमझ नहि आता क्याँ कहे। उसकेलिए तौ ऐसा होँ गय़ा कि काटो तौ खून नहि।
राज: वोँ वोँ वोँ व। तुँ.तुम् यहइधर दोयह मेरे दफ़्तर कि हैं। हमारे नए प्रोजेक्ट केँ बारे केँ कुछ जानकारी हैं।
इतना कहतेहुए वोँ लिफाफा सविता सें चीन लेता हैं।
सविता: अरे धीरे-धीरे आप् तोँ ऐसेछीन रहे जैसे इसमें पता नहि क्याँ हैं। हाहाहाहा
अंजली: अच्छा चलोअब सविता जरा रसोई मे हेल्प करो खानां बन गय़ा हैं बस निकलना हैं।
सविता: हांहां भाभी औऱ भैया इतना जरूरी लिफाफा कों ऐसे हि कहीं भि नहि रख देते।
यह कहतेहुए वोँ अंजली केँ पीछे पीछे रसोई मे चली जाती हैं
सविता: क्याँ दोस्त भाभी सुभह सुभह तोँ रोमांस कां वक्त होता हैं
अंजली: चुपकर भैया सुन लेंगे तेरे।
सविता: अरे इसमें क्याँ हैं। मैनेकुछ गलत थोड़ी कहा। कभी आप् मेरेघऱ आनांजब यहआएहुए होंफिन देख्ना माहोल
अंजली: मुझेयह सभी बातें मनपसंद नहि। छोर एक् कामकर तूँ मेरेरूम मे जा औऱ वहा पानी कि बॉटल हैं वोँ भरकर टेबल पऱ रखदे
सविता: ठीकठीक हैं करवालो काम
सविता रूम मे जाती हैं तोँ वहां सारारूम फैला थां क्योंकि थोड़ी देर पहले अंजली पैकिंग कररही थि। उसे समझते देर नाँ लगी औऱ वोँ भागकर हाल मे आई
सविता: अरे भैया आप् लोग कहींजा रहे हें क्याँ
सविता केँ इतना बोलते हि अंजली भि रसोई सें आई औऱ राज औऱ अंजली एक् दूसरे कों देखने लगे
राज: हां वोँ बस थोडा ऐसे हि
सविता: ऐसे हि मतलब कहां जारहे औऱ कबजारहे
राज:जा तौ हम् नैनीताल रहे थें औऱ आज हि पर्र अब लगता हैं कि.
अंजली इतना सुनके मायूस होँ जाती हैं
सविता: अरे क्यूं क्याँ हुआ? मे आँ गई इसीलिए क्याँ
अंजली: अरे नहि नहि कैसी बातें करती हौ
सविता: ठीक हि तोँ कहरही हूं नाँ। नहि तौ आप् लोग प्लान कैंसल करने केँ स्थान मुझे भि कहते कि तुम् भि संगचलो।
अंजली राज कों देखते हुए: क्याँ राज मैनेकहा थां नाँ कि इसे भि लेँ लेते हें। अरे सविता तेरे भैया कों लगा कि तुम् व्यस्त होगी अभि।
सविता: व्यस्त कहा रहूंगी।
राज: तौ ठीक हैं फिनचलो चलते हें सभीसंग।
सविता: यह हुइ नां बात। चलो भाभी हम् दोनोमिल केँ पैकिंग करते हें
राज अपनेमन मे सोचता हैं कि कितनी चालाकी सें अंजली नें सविता कों नाराज होने सें मना लिया। जबकि हमारे बीचऐसी कुछबात हि नहि हुई थि। कितनी समझदार हैं मेरी अंजली।
इसीसभी केँ बीचसाम केँ 5 बज केँ। बाहर् कैब खड़ीबार बार हॉर्न बजारही थि। राज दोनो नन्द भाभी कों जल्द रेडी होने कों कहकर बाहर् कैब वाले सें पैसे कि कुछबात करने निकल गय़ा। सभीकह केँ जब वोँ वापस गय़ा तोँ देखा दोनों रेडी हौ कर बाहर् आँ रहे थें।
राज: अंजली, कितनी खूबसूरत लगरही हौ तुम्!
जीकररहा बस देखता रहूं
सच मे अंजली लग भि रही थि बला कि हसीन। हरे रंग कि सारी, हरे रंग कि चूरी, ऊपर सें लें केँ नीचे तक कयामत ढारही थि
सविता: क्याँ भैया, केवल भाभी हि अच्छी लगरही क्याँ? औऱ मे?
राज:हां, हां दोनों अच्छे लगरहे।
राज नें जब सविता कों देखा तोँ थोडा झेंप गय़ा। वोँ लग हि ऐसीरही थि। उसनेकसे हुएटॉप औऱ लेगिस पहनेहुए थें। जिसने उसकाअंग अंगऐसे निखररहा थां जैसेठंड केँ सुभह पतों केँ ऊपरओस निखरते हें।
राज:अब जल्दचलो। नहि तोँ कल सुभह पहुंचे।
सविता: भैया वोँ आपने अपना लिफाफा लें लिया नाँ हाहाहा हौ सकता हैं वहाकाम आए
राज: बिनाकुछ समझे:हां लें लियाअब चलो।
क्यूं कि उसेडर थां कि कहीं ज़्यादा रात नां होँ जाए। पहलीबार अनजान शहरसंग मे दो स्त्री होँ तोँ जिमेदारी कां अहसास स्वयं ब स्वयं डर पैदाकर होँ देती हैं। खैर सभी वाहन मे बैठकर नैनीताल केँ लिए निकल जाते हें।
रिश्तों की परिभाषा - Parivar Ki Kahani - Next part miss mat karna
भइया मेरे. अभि 10 पाठकों केँ भि पता नहि चला कि कोई स्टोरी शुरुआत कि हैं आपने. थोडा किस्सा आगे बढ़ने दो. थोडा धैर्य रखें. भीड़ भि होगी औऱ कमेन्ट भि
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