सबका लाड़ला | incest indian sex story – New Episode
#भाग - 2
सुभह कां वक़्त
देव कां रूम-
सुमन (मां )- देव बेटा उठजा, देख कितनी देर हौ गई हैं। आजहमे मामाजी केँ घऱ भि जानां हैं नाँ तेरे नानाजी जी कि तबीयत पुछने
देव - मा मुझे नींद आँ रही हैं बहोत, आज आप् औऱ पिताजी हि चलेजाओ नां, मे बाद मे अकेला जाकरमिल लूगा।
मा - ठीक हैं बेटा मगर न् तु जल्दउठ जानां
देव - थोड़ी देर मे उठ जाऊंगा
सुमन बाहर् आँ जाती हैं
वैसे तोँ देव कों सुभह जल्द उठने कि आदत हैं। जल्द उठकर वोँ दौड़ लगाता हैं औऱ कसरत करता हैं मगर देहात मे विवाह थि तोँ देव कों बहोत सां काम सौंपरखा थां इसलिये पिछली दोरात सें वोँ ठीक सें सो नहि पाया थां.
सुमन(मन मे)- यहदेव स्वयं सें तोँ उठेगा नहि। संगीता कों बोल देतीहू वोँ उठा देगी
सुमन-अरे ओ संगीता कहां पऱ हौ
संगीता - हा चाची यही पर्र हू, क्याँ हुआ.
सुमन - मैदेव केँ नानाजी कों देखने जारही हू.देव सोरहा हैं तौ तुउसे कुछ वक़्त मे उठा देना
संगीता -ठीक हैं चाची उठा दुंगी
सुभह कां टाइम हैं सबलोग इस टाइमखेत पऱ कामकर रहे होते हैं.
संगीता भि चारा लानेवही जाने वाली होती हैं
कुछ वक़्त पश्चात
संगीता(मन मे) - आज तौ लेट होँ गई हैं खेत जाने मे। देव कों उठाकर सीधे हि चली जातीहू
तभी एक् आवाज़ आती हैं - मुन्नी देवी कि
मुन्नी देवी कि उम्र 80 सें अधिक होने पर्र भि वोँ तंदुरस्त थि। जिसकी हैं कि जवानी मे बहोत देशीघी खाया हैं उन्होनें
मुन्नी देवी - संगीता बहु क्याँ कर होँ
संगीता (मन मे)- आँ गई बुढ़िया
संगीता - कुछ नहि दादीमा देव कों उठाने जारही हूफिन खेत मे जाउगी। आज बहोत लेट हौ गई
मुन्नी देवी-देव कों मैउठा दूगी, तु जा
संगीता - ठीक हैं दादीमा
देव केँ कमरे मे
देव चढ़ी (फ्रेंची) बनियान मे सोरहा थां। उसका लन्ड एकदम टाईम फुलाहुआ थां। जिससे उसका सुपाडा़ बाहर् निकला हुआ थां
मुन्नी देवी कि नजरउस पर्र पड़ती हैं
मुन्नी देवी -क्या बात है रामयह क्याँ हैं इतना बड़ा लन्ड, इतनी उम्र मे हि इसका लन्ड इतना बड़ा हौ गय़ा। इसका तौ इसके दादाजी सें भि बड़ा हैं, जिसको भि यह मिलेगा उसके तौ मजे हैं
मुन्नी देवी(मन मे)- क्यो नाँ इसेमै लें लु
अन्तरात्मा - नहींयह गलत हैं, यह तेरा पोता हैं तुऐसा नहि कर सकती.
मुन्नी देवी- पोता हुआ तोँ क्याँ हुआ, बुर औऱ लन्ड मे बस प्रेम कां नाता होता हैं। देव पर्र तौ मेरा पहलाहक हैं.
मुन्नी देवीदेव केँ लन्ड कों हाथ लगाती हैं, तोँ उसे झटका लगता हैं
मुन्नी देवी - क्या बात है दैया कितना गर्म हैं इसका लन्ड जैसे भट्टी सें निकाला होँ अभि.
मुन्नी केँ हाथ लगाने सें राज कि नींदखुल जाती हैं मगर वोँ सोने कां नाटक करता हैं। वोँ देख्ना चाहता हैं कि उसकी दादीमा कितनी आगेजा सकती हैं.
मुन्नी देवी धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड कों ऊपर नीचे करने लगती हैं
थोड़ी देर तोँ देव कंट्रोल करता हैं फिन केँ लिए मुश्किल होँ जाता हैं औऱ वोँ उठ जाता हैं.
जिससे मुन्नी देवी घबरा जाती हैं.
देव (भोलेपन कां नाटक करतेहुए )-दादीमा आप् यह मेरी नुन्नी केँ संग क्याँ कररही हैं.
देव कि बात सुनकर मुन्नी देवी शांत होँ जाती हैं, वोँ सोचती हैं कि देव कों कुछपता हि नहि हैं.
क्यो नाँ मैदेव कां फायदा उठाउ जिससे उसका लन्ड मुझेमिल जायेगा.
मुन्नी (नाटक करतेहुए )- बेटा मै तेरी नुन्नी कों देखरही थि, देखयह केसे फुलकर मोटी हौ गई हैं। कही इसमेजहर तोँ नहि फैल गय़ा.
देव (नाटक करतेहुए )- जहर!अब क्याँ होगा दादीमा.
मुन्नी - तु घबरामत बेटा मैहू नाँ, मै निकाल दुंगी.
तु एक् कामकर अपनीचढी निकाल करबेड पर्र लेटजा.
देवलेट जाता हैं
मुन्नी देव केँ लन्ड कों अपने दोनो हाथों मे पकड़कर अपने मुँह केँ पास लाती हैं.
मुन्नी लन्ड कों आधा मुँह मे लेती हैं, जिससे राज कों बहोत आनंदआता हैं, वोँ जोर सें आहहह। करता हैं.
देव - दादीमा आप् यह क्याँ कररही हैं
मुन्नी - बेटा जहर निकाल रहीहू, तु लेटारह.
देव - ठिक हें दादीमा
मुन्नी धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढाने कहती हैं जिससे देव कि हालत खराब होने लगती हैं.
मुन्नी एक् हाथ सें अपने ब्लाउज केँ दोबटन खोल लेती हैं जिससे उसके बडे़ -बड़े बोबे करीब-करीब बाहर् आँ जाते हैं। मुन्नी एक् हाथ सें उनकोजोर जोर सें दबाने भींचने लगती हैं। लन्ड चुसना औऱ बोबो कों दबाने सें उसे दुगुना आनंदआता हैं
देव भि नीचे सें धक्के लगाने लगता हैं.
देव झड़ने केँ लगभग होता हैं, वोँ मुन्नी केँ सिर कों पकड़कर जोरजोर सें धक्के मारने लगता हैं, जिससे मुन्नी कि हालत खराब होने लगती हैं। उसे दर्द होने लगता हैं.
देव मुन्नी केँ सिर कों अपने लन्ड पर्र दबा देता हैं औऱ जोरजोर सें 4-5 गर्म पिचकारी मारता हैं.
वीर्य मुन्नी केँ पेट मे चला जाता हैं, कुछ उसके मुँह सेबाहर आँ जाता हैं.
देवबेड पऱ लेट जाता हैं। मुन्नी कां बढाबदन भि थक जाता हैं औऱ मुन्नी भि निढाल होकरबेड पर्र गिर जाती हैं.
मुन्नी - यह क्याँ किया बेटा, कोई करता हैं क्याँ ऐसे। कितना दर्द होँ रहा हैं मुझे
देव (भोला बनतेहुए )-दादीमा मुझेपता हि नहि चलायह सभी केसे हौ गय़ा। मुझेमाफ करदो
मुन्नी भि देव सें घुसा नहि थि उसे भि मज़ाआया थां गर्म वीर्य पीकर.
मुन्नी - कोईबात नहि बेटा ऐसा हौ जाता हैं.
मगरतु यहबात किसी कों बताना मत
देव - क्यो दादीमा
मुन्नी - मैबोल रहीहू नाँ बेटा, किसी कों इसबात कां पता नहि चलना चाहिए, खा मेरीशपथ
देव-ठिक हैं दादीमा
तभीदेव कि नजर अपनी दादीमा कि मोटी मोटी चुचियो पऱ पडती हैं.
मुन्नी अपने पोते कों अपनी चूचियां घुरते हुए देखती हैं, उसे अच्छा लगता हैं।
मुन्नी - क्याँ देखरहे ह बेटे।
देव भि खुलकर बोलता हैं
देव - दादीमा आपकी चुचियो कों। आपकी चुंची कितनी बडी औऱ अच्छी हैं।
मुन्नी - बेटा तुम्हारी तरफ अच्छी लगी।
देव - हा!, दादीमा क्याँ मै इनकोछु सकताहू
मुन्नी - हा बेटा छु सकता हैं। अबयह तेरी हि हैं। तु जौ चाहे वोँ कर सकता हैं इनकेसंग।
देव - जौ चाहे वोँ कर सकताहू।
मुन्नी हँसते हुए-हा बेटा
देव - दादीमा मै इनको मुंह मे लेकरपी सकताहू।
मुन्नी -बेटा इनमें दूध नहींआता हैं अब।
देव - दादीमा मुझेफिन भि पिनी हैं।
मुन्नी अपना ब्लाउज निकालकर बेड पऱ लेट जाती हैं।
मुन्नी- लेँ बेटा जितना चाहे उतनापी लेँ, धीरे-धीरे पी.तु हि हैं इनका मालिक अब।
देव अपनी दादीमा केँ ऊपर आँ जाता हैं औऱ उसके घुटने केँ आगे पैरो पर्र बैठ जाता हैं। देव नीचे झुककर अपनी दादीमा केँ दोनो बोबो कों धीरधरे मासलने लगता हैं।
जिससे मुन्नी कां बुढ़ा भोसड़ा भि पानी छोडने लगता हैं।
नीचे झुकने केँ कारणदेव कां लन्ड मुन्नी कि चुत पर्र ठोकर मारने लगता हैं, जिससे मुन्नी उतेजित हौ जाती हैं, औऱ देव केँ मुह कों अपनी चुची पऱ रख देती हैं।
मुन्नी - अहह। बेटा लें पिले अपनी दादीमा कि चुचियो कों, निचोड़ डाल इनकोचुस चुसकर।
देव एक् चुची कों मुह मे लेता हैं औऱ एक् कों अपने पंजे मे बेच लेता हैं।
मुन्नी(चिलाते हुए )- अहह बेटा थोडा धीरे-धीरे कर
देवकुछ नहि सुनता, वोँ एक् चुची कों जोरजोर सें भींचने लगता हैं औऱ एक् चुची केँ निप्पल कों दाँतों सें काटने लगता हैं।
मुन्नी कों दर्द सें अधिक आनंद आँ रहा थां।
मुन्नी एक् हाथ अपनीचुत पऱ लेँ जाती हैं औऱ जोरजोर सें अपनीचुत कों रगड़ने लगती हैं।
मुन्नी - अहह.अहह। हा बेटा ऐसे हि चुसआआता। आँ.आँ.रह अपनी दादीमा केँ चुचो कों,
ओह बेटा। अहह। थोडा धीरे-धीरे चुस नाँ इतनीजोर सें मतकाट।
देवकुछ नहीं बोलता औऱ जोरजोर सें काटने चुनने लगता हैं, जिससे मुन्नी कि हालत खराब हौ जाती हैं।
मुन्नी देव केँ लन्ड कों अपने कपड़ों केँ ऊपर सें हि अपनीचुत पऱ घिसने लगती हैं।
मुन्नी - अहह। बेटा ऐसे हि। हा औऱ जोर सें अहह.अहह.अहह।
मुन्नी इस दोहरे मजे सें चलाते हुए झरने लगती हैं।
अपने दोनो हाथों सें देव कों भींच लेती हैं औऱ उसे अपने सीने सें चिपका लेती हैं
देव उत्तेजित होँ जाता हैं उससेरहा नहि जाता हैं अब
वोँ दादीमा केँ चेहरे कों पकड़कर उसके होठों कों चुसने लगता हैं।
जिससे मुन्नी बुरीतरह सें चौंक जाती हैं, वोँ छुटने कि कोशिश करती हैं परंतु उसके बुढे़ बदन मे इतनी ताकत नहीं हैं कि वोँ देव जैसे तगडे़ लडके कों हटासके।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ भि संग देने लगती हैं।
देव एक् हाथ सें अपनी मुन्नी कि चुत मसलने लगता हैं, जिससे मुन्नी उत्तेजित होँ जाती हैं। वोँ देव केँ होठों कों जोर सें चुसने लगती हैं।
जब दोनो कि सासेभर जाती हैं तब दोनोअलग होते हें।
मुन्नी - बेटा यह क्याँ कररहा थां तु.यहसभी गलत हैं, मै तेरी दादीमा हू
देव - अच्छा दादीमा, यहसभी बातें जब तुम् मेरा लन्ड चुसरही थि तबयाद नहि आयी।
मुन्नी देव केँ मुँह सें लन्ड सुनकर चौंक जाती हैं।
मुन्नी - यह क्याँ शब्दबोल रहाहतु छीछी
देव - अधिक नाटकमत कर दादीमा मैसभी जानता हू, तु मेरा फायदा उठाना चाहती थि।
मुन्नी - मतलबतु इतनीदेर तक भोले बनने कां नाटककर रहा थां।
देव-हा
मुन्नी(नाटक करतेहुए ) - नहि बेटा यहसभी गलत हैं
औऱ वोँ उठने लगती हैं
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भाग -3
मुन्नी भि अपने पोते केँ लन्ड सें चुदना चाहती थि, मगर वोँ थोड़ी झिझकरही थीं।
देव जानता थां कि दादीमा नाटककर रही हैं, इसलिये वोँ आगे बढ़ने कां फैसला करता हैं।
देव दादीमा कों पकड़कर नीचे लेटा देता हैं।
देव - दादीमा अब ज़्यादा नाटकमत करो, मुझेपता हैं आप् भि मेरे लन्ड सें चुदना चाहती हौ।
यह बोलकर देव दादीमा केँ होंठ चुसने लगता हैं।
देव एक् हाथ सें अपनी दादीमा कि खरबुजे जैसी मोटी चुची कों भींचने लगता हैं औऱ दुसरे हाथ सें अपनी दादीमा केँ घाघरे कां नाडा़ खोल देता हैं। वोँ एक् हाथ सें घाघरे कों नीचे खिसकाने लगता हैं।
जिससे मुन्नी खुश हौ जाती हैं, वोँ भि घाघरा उतारने मे देव कि सहायता करती हैं।
देवसमझ जाता हैं कि दादीमा चुदने केँ लिए रेडी हैं।
देव अपनीदो अंगुलियाँ मुन्नी कि चुत पर्र रगड़ने लगता हैं। जिससे मुन्नी मजे मे पागल होने लगती हैं।
देवदो अंगुली दादीमा कि चुत मे ढाल देता हैं।
मुन्नी कि चुत वैसे तौ ढीली थि मगर उसनेकई सालों सें लन्ड नहीं लिया थां जिस कारणउसे हल्का दर्द होता हैं। उसकेमजे केँ आगेयह दर्दकुछ भि नहि थां।
कई सालोबाद मर्द कां स्पर्श पाकर मुन्नी कि चुत भि पानी छोड़ने लगती हैं।
मुन्नी - अहह। बेटा यह क्याँ कर दियाआआ। तुने, मेरररी। जान हि निकाल अहह। दि तुने। अहह.हा ऐसे हि करतारह आआआह।
देव अपना लन्ड दादीमा कि चुत पर्र घिसने लगता हैं, अपने पोते केँ लन्ड कां स्पर्श पाकर मुन्नी मजे सें चिलाने लगती हैं।
मुन्नी - आआआआह। बेटा चोददे अपनी दादीमा कों। तेरेइस घोड़े जैसे लन्ड सें मेरीचुत कि सारी खुजली मिटादे।
देव - हा मेरी प्यारी रंडी दादीमा देख तेरीचुत कों केसे रगड़ रगड़कर चोदता हू।
अपने पोते केँ मुँह सें अपनेलिए रंडी शब्द सुनकर मुन्नी कों अलग सां आनंदआता हैं।
देव लन्ड कों दादीमा कि चुत पऱ रखकर धक्का मारने हि वाला होता हैं कि तभी।
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भाग -4
**** आगे कि किस्सा हीरोदेव कि जुबानी ***
(* मुन्नी कां नामआगे सें दादीमा भि आयेगा )
तभी बाहर् सें आवाज़ आती हैं। यह आवाज़ नंदलाल केँ बेटे निशांत कि हैं, जिसे उसकी माँ नें भेजा हैं देव कों नाश्ते केँ लिए बुलाने केँ लिए, क्योंकि देव केँ माँ पिताजी बाहर् गयेहुए हैं।
निशांत - चाचा कहां पर्र हौ आप्
मे - आवाज़ सुनकर मै औऱ दादीमा हडबडा जाते हैं।
मै साईड मे हौ जाताहू औऱ बाथरूम मे चला जाताहू
दादीमा अपने कपड़े पहनकर गेट खोलती हैं।
मुन्नी (मन मे)- इसको भि अभि आनां थां।
मुन्नी - क्याँ हुआ बेटा
निशांत - बूढी दादीमा मै चाचा कों नाश्ते केँ लिए बुलाने आयाहू।
मुन्नी कों क्रोध तौ बहोत आता हें मगर वोँ कुछ नहि बोलती
मुन्नी - देव तोँ अंदर हि हैं बुलाले। इतना बोलकर मुन्नी चली जाती हैं।
निशांत - चाचा चलो ब्रेकफास्ट करलो।
मे- बेटा तुचलमै आताहू नहाकर।
* ताऊ चरण सिंह कां घऱ
इसकेघऱ मे 4 कमरेव 1 किचन हैं।
चरण सिंह अपना रुपया दारू मे उडाता हैं जिस कारण पैसे कि थोड़ी कमी रहती हैं। घऱ पर्र झगड़ा करनामार पीट करनाआदत हैं इसकी।
घऱ मे इस वक्त मीनाक्षी भाभी अकेली हैं। आज दुःखी हैं क्योंकि नंदलाल नें आज इसकोभला बुराकहा हैं।
(* सब बहुए आमतौर पऱ सलवार सुट औऱ लहंगा चोली/ब्लाउज पहनती हैं। कभीकभी साडी भि पहन लेती हैं)
मैनहा करचरण सिंह केँ घऱ पऱ जाताहू।
मीनाक्षी किचन मे थि।
गर्मियों केँ दिन हैं जिस कारण मीनाक्षी पसीने सें भरी हुइ हैं।
जिस कारण उसकी ब्रादिख रही हैं, औऱ उसमेकसे हुए उसके मोटे मोटे बोबे।
मै जैसे हि किचन मे जाताहू मेरीनजर उसकीबडी गांड पर्र पडती हैं, जिसे देखते हि मेरा लन्ड झटके मारने लग जाता हैं।
मुझे शरारत सुझती हैं। मै धीरे-धीरे सें भाभी केँ पीछे जाकरउसे पकड़ लेताहू। जिससे भाभीडर जाती हैं।
मीनाक्षी (डरतेहुए )- कौन हैं
मै - मैहू भाभी आपका देवर जी।
मीनाक्षी - देव आपने तौ मुझेडरा हि दिया
मै भाभी केँ चिपक जाताहू। जिससे मेरा लन्ड उनकी गांड कि दरार मे स्लिम हौ जाता हैं। औऱ अपनेहाथ उनके मखमली पेट पऱ रख देता हूं।
जिससे भाभी एक् आह लेती हैं
भाभी(मन मे)- यह क्याँ चुभरहा हैं मेरे पीछे, कही देव कां लन्ड तोँ नहि। हायरे रामयह क्याँ कररहे हैं।
भाभी - देवरु जी क्याँ कररहे होँ आप्
मै - कुछ नहि, मै तोँ मेरी प्यारी औऱ खुबसूरत भाभी कों प्रेम कररहा हू।
भाभी(मन मे )- हायराम दैयायह देव कां लन्ड कितना बड़ा हैं। इसने तौ हालत खराबकर दि
मेरे लन्ड घिसने सें भाभी कों आनंदआता हैं, उनकीचुत गिली होने लगती हैं
भाभी(मीनाक्षी )- खुबसूरत ओरमै। आपकोकहा सें खुबसूरत लगी।
मै - आप् तोँ पूरी कि पूरी हि सुंदर होँ।
भाभी(धीरे-धीरे सें )- जिसको लगनी चाहिए उसको तौ नहि लगती।
मै - क्याँ भाभी
भाभी- नहि कुछ नहि। मैकहा सें हसीनलगी आपको
मै - सचीबता दू, आप् बुरा तौ नहि मानेगी नाँ।
भाभी - इसमे बुरा मानने वाली क्याँ बात हैं, आप् बताओ नहीं मानुंगी बुरा।
मै - भाभी आपकेयह होंठ, यह गोरेगाल औऱ आपकीयह बडीबडी चुचीया।
औऱ इन सबसे ज़्यादा आपकीयह बड़ी बड़ी मखमली गांड। इतनी बोलकर मै भाभी कि गांड कों अपने हाथों सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे मसलने लगताहू।
भाभी - छी.छी। आप् यह क्याँ बोलरहे हैं। कितने गंदे शब्दबोल रहे हैं।
मै- आपनेकहा थां कि आप् बुरा नहि मानेगी, औऱ मै क्याँ गलतबोल रहाहू मै तोँ आपकी तारीफ हि कररहा हू
आपको बुरालगा तोँ ठीक हैं नहि बोलता।
भाभी(मन मे) - लगता हैं देव कों चूत लग गय़ा। वैसेयह गलत तोँ नहि कहरहा हैं, मेरे चुचे औऱ गांड हैं हि बडेबडे।
उनको तोँ कुछ अच्छा लगता नहि हैं देव कों तोँ अच्छे लगते हैं।
भाभी - नहीं मुझे बुरा नहि लगा.मै तोँ ऐसे हि बोलरही थीं
सच मे आपकोमै इतनी हसीन लगतीहू।
मै(मन मे) - लगता हैं भाभी लाईन पऱ आँ रही हैं।
मै-हाँ भाभी सच्ची, आप् हसीन होँ
इतना बोलकर मै भाभी कों कस लेताहू जिससे मेरा लन्ड उनकी गांड केँ छेद पर्र टच करता हैं।
भाभी - आहहह।
मै - क्याँ हुआ भाभी
भाभी - कुछ नहि
मै - भाभी मुझे आपकेयह मोटे मोटे चुचे बहोत अच्छे लगते हैं
मै धीरे-धीरे धीरे-धीरे धक्के लगाता हू, जिससे भाभी उतेजित होँ जाती हैं
भाभी- अच्छा! ऐसा क्याँ हैं इनमें
मै - पता नहि भाभी, मेरामन इनको छूने कां करता हैं। भाभी क्याँ मै इनकोछु लु।
भाभी(मन मे)- यहदेव क्याँ बोलरहा हैं।
भाभी - नहीं देवरु जीगलत हैं यह, औऱ कोईदेख लेगा तौ क्याँ सोचेगा।
मै(मन मे)- लगता हैं भाभी कां भि मन हैं
मै - भाभीकोई नहि हैं इस टाइमघऱ पर्र
भाभी(मन मे)- छु हि तौ रहा हैं, छु लेने देती हूं।
भाभी - ठीक हैं छुलो।
मै - thanku भाभी
सबका लाड़ला | incest indian sex story - Next part miss mat karna
ए कहाणी पहिले भि लिखी थि पर्र तबए अधुरी थि. क्याँ इसबार ए कहाणी पुरी होँ जाएगी कि नहि
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