स्वेता तिवारी और भिखारी अब्दुल - चुदाई - Complete Kahani Part 1
यह स्टोरी हैं एक् अनाथ कूड़ा-कचरा बीनने वाले अनाथ लड़के अब्दुल कि जोँ एक् स्लम एरिया मे रहता हैं। 15 साल कि उम्र मे इसके अम्मी अब्बू सड़क दुर्घटना मे मारेगए। तब सें ये एक् बस्ती मे रहता हैं जहां 10-12 घऱ थें जोँ कचरा बीनने वालों ओर भिखारियों केँ थें।
यहदिन भर कचराजमा करता औऱ उसेबेच देता। कभी कभारयह भीख भि मांग लेता थां, इसी सें इसका गुजारा हौ जाता थां।
27 साल कां अब्दुल 5'8 इंच कां जिस्म लिएहुए थां जोँ बेहद काला थां। चेहरे पर्र कालीपरत छाई हुईँ थि, जैसे कितने महीनों सें नहाया नहीं हैं, दांत गुटका खाने कि वजह सें सड़रहे थें, होंठो पर्र पपड़ीजमी हुई हैं यहजब भि यहबात करता हैं इसके मुँह सें थूक बाहर् निकलता हैं। बालों मे बेशुमार धूल मिट्टी औऱ तेलजमा हुआ। कपड़े गन्दे सें जिनपर धूल मिट्टी पता नहीं क्याँ क्याँ लगा रहता थां। यही उसकी जीवन थि रोज कचरा बीनना ओरओरभीख मांगना
रोज कि तरहयह कचराबीन रहा थां कि इसके दिमाग़ मे आया कि आजइस कोठी मे देखता हूं कुछमिल जाता हैं तोँ
वो उस कोठी कि तरफचल दिया अपना थैलाउठा कर
सीढ़ियों पऱ जाकर वोँ बेल बजाता हैं औऱ प्रतीक्षा करता हैं कि कोई आएगा
तभी एक् हसीन अप्सरा निकलकर आती हैं जिसपर अब्दुल कि निगाहें पड़ती हैं अब्दुल देखता हैं कि एक् लड़की गेट पऱ खड़ी थि।
जीहां वोँ कोई औऱ नहीं स्वेता थि जौ बेल कि आवाज़ सुनकर बाहर् आई। अब्दुल उसको नीचे सें ऊपर तक देखता हैं औऱ उसकी आंखें इस अद्भुत लड़की केँ रूप पऱ टिक जाती हैं।
अब्दुल कों विश्वास नहीं होँ रहा थां कि कोई इतना हसीन भि हौ सकता हैं
स्वेता:- उम्र 42 साल, 5'6 इंच लम्बाई, 55 किलोवजन, 34-28-34 कां जबरदस्त फिगर।
42 साल कि उम्र होने केँ बाद भि 25-26 साल कि दिखने वाली स्वेता कुदरत केँ नायब चीजों मे सें एक् थि। दो बच्चों कि मम्मी होने केँ बावजूद अपने आप् कों इसतरह मेन्टेन कर पाना नामुमकिन सां थां पऱ स्वेता नें अपनेरहन सहनओर खानपान सें अपने आपको एक् जवान लड़की कि तरह बनाया हुआ थां।
क्याँ ठोस मम्मे थें, क्याँ कमर थि। रंग एकदमदूध जैसा। तीखेनेन नख़्स जोँ बुड्ढे कों भि पागलकर दे। बेशुमार दौलत सें महंगे महंगे कपड़े पहनती जब बाहर् निकलती तौ ज्वेलरी सें ढकी रहती जौ उसेओर भि कयामत बनाती, कहीं सें भि जर्रा बराबर कमी नहींऐसी थि स्वेता।
जीरो फिगर साइज। नां ज़्यादा बड़े मम्मे नाँ बड़ी गांण्ड, एक् दम परफेक्ट शरीर, कहीं सें भि रत्ती भर बेडौल नहीं।
नाक नक्शा, होंठ बिल्कुल परफेक्ट। दूध जैसा शरीरओर मख्खन जैसी त्वचा।
इसकीदो संतान हैं एक् लड़की जिसका नामपलक तिवारी हैं
ओर बेटा रियांश हैं। पति कां नाम अभिनव हैं। सासू माँ कां नाम नगमा हैं।
अभिनय कि अपनी प्रोडक्शन कंपनी हैं जिसके वोँ ceo हैं।
अभिनव नें मुम्बाई मे एक् आलीशान कोठी खरीदी हैं जिसमे फिलहाल वोँ रहरहे हें जिसमे चार कमरें हें।
एक् बैडरूम अभिनव स्वेता कां, एक् मे पलक रहती हें एक् कमरे मे नगमा रहती हैं।
एक् खाली हैं जोँ गेस्ट केँ लिए थां।
फिलहाल स्वेता नें सीरियल सें आराम लें रखा थां औऱ घऱ पऱ हि बच्चों केँ संग वक्त बितारही थि जबकि अभिनव कंपनी कों वक़्त देरहा थां)
अब्दुल स्वेता केँ बदन पऱ टकटकी लगाकर देखरहा थां।
तभी स्वेता "बताओ क्याँ काम हैं"
अब्दुल होश मे आताहुआ "मैडमकुछ कचरापड़ा होँ तोँ देदो।
स्वेता:- जोँ उसकेरंग रूप औऱ पहनावे सें घिन महसूस करनेलगी "आहह-आहह कितना गन्दा हैं यह इंसान छीईईई"
कुछ नहीं हैं जाओ यहां सें तुम् आगे देखो कहीं।
अब्दुल:- मैडमकुछ तौ पड़ा हौ होगा, मैडम सुभह सें कुछ खाया नहीं हैं अगर आप् कुछ लोहा प्लास्टिक देदो तोँ उसे बेचकर कुछखा लूंगा।
स्वेता कि निगाहें बारबार उसके चेहरे पऱ जारही थि जोँ बेहद कालाओर घिनोना थां। वोँ उसे टालने केँ लिए "नहीं हैं कुछ भि बोला नां तुम्हें"
अब्दुल:- जौ उसकी हुस्न मे खोयाहुआ थां "प्लीज मैडमइस गरीब पर्र रहमखाओ कुछ तोँ देदो, आखिरपेट कां प्रश्न हैं मैडम अब्दुल अब गिड़गिड़ाते हुए बोला
स्वेता कों उससे बहोत ज़्यादा घिन महसूस होनेलगी उसने सोचाइसे कुछ कबाड़दे देती हूं ताकि इससे पीछा छुटे वरना मुझे उल्टी हौ जानी हैं इस मेले कुचेली इंसान सें
"ठीक हैं मे देखती हूं कुछपड़ा होँ तौ, तुम् यहीं रुको मे आती हूं।
स्वेता वापिस घऱ केँ अंदर आँ गई,
वहीं अब्दुल सीढ़ियों पर्र बैठ गय़ा औऱ स्वेता केँ बदन केँ बारे मे सोचने लगा"ऐ खुदा क्याँ खूबसूरती दिया हैं इस लड़की कों, कितनी जबरदस्त चीज हैं यह तौ, मे तोँ अपनी बस्ती कि मेली कुचेली लड़कियों कों लाइन देता हूं साली वोँ भि नखरा करती हैं
ओर एक् यह हैं कितनी खूबसूरत हैं। अब्दुल गन्दे सें लोअर मे हाथ डालकर अपने लंड कों मसल दिया। अब्दुल कों यकीन नहीं हौ रहा कि उसने इतनी हसीन अप्सरा सें बात कि उसे अपनी जीवनसफल होती दिखीओर ख्यालों मे बैठा स्वेता कां प्रतीक्षा करनेलगा
थोड़ीदेर बात स्वेता बाहर् आती हैं औऱ दरवाजा खोलकर देखती तौ अब्दुल सीढ़ियों पऱ बैठाहुआ थां।
आँ जाओ अंदरकुछ कूड़ापड़ा हैं देखलो क्याँ क्याँ काम आँ सकता हैं तुम्हारे।
अब्दुल एकदमजोश मे आता हैं औऱ उठकर स्वेता केँ संग अंदरचल देता हैं। स्वेता अंदरआगे आगे जाती हैं औऱ अब्दुल झोला उठाये पीछे पीछे। तभी अब्दुल कि निगाहें स्वेता कि लेगिंग पर्र जाती हैं ओर उसकीउठी हुइ गांण्ड कों देखता हैं।
अब्दुल केँ निगाहे मानोठहर सि गयीँ, क्योंकि लेगिग मे स्वेता कि गांण्ड कि शेपसाफ नजर आँ रही थि। उसके चूतड़ केँ दोनों हिस्से कि बनावट लेगिंग मे जाहिर हौ रही थि।
अब्दुल तौ आसमान मे उड़नेलगा वोँ सोचने लगा कि मे इसीतरह इसके पीछे चलता जाऊंओर जीवन इसकी गांण्ड देखता रहू। वोँ गांण्ड देखता हुआ अपने लंड कों मसल देता हैं औऱ आगे बढ़ता रहता हैं।
कमरे केँ बाहर् स्वेता नें कूड़ा इकट्ठा कररखा थां जिसमे बोटलओर कैन वगेरह थि।
देखलो इसमे सें क्याँ चाहिए जिसे तुम् बेचसको।
अब्दुल कूड़े कों देखता हैं बोटलकैन वगेरह अपने झोले मे डालता हैं। सारी बोतले इकट्टा कर वोँ नीचेबैठ जाता हैं औऱ बाकी कूड़े कों हाथ सें इधरउधर फैलाता हैं मगर उसकोकुछ औऱ खास नहीं मिलता।
स्वेता थोड़ादूर खड़े उसको कूड़े मे हाथ घुमाता देखरही थि औऱ ऊसनेनाक चढ़ाई हुई थि।
देखो तोँ कितना गंदा इंसान हैं आहह-आहह बदबू यहां तक आँ रही हैं।
"मिल गय़ा होँ तोँ जाओअब,
अब्दुल उठता हैं औऱ उसे पेशाब कि हालत होती हैं। वोँ सोचता हैं अब बाहर् कहां स्थान मिलेगी पता नहीं मैडम सें पूछ लेता हूं अगर बाथरूम जानेदे तोँ।
अब्दुल:- मेडम मुझे पेशाब लगा हैं अगर आप् ऐतराज नाँ करे तौ मे आपके बाथरूम मे कर सकता हूं।
स्वेता अब्दुल कि इसबात सें हेरत मे पड़ गई,, यह इतना गन्दा इंसान मेरा बाथरूम मे पेशाब करने कों कहरहा हैं।
इसकी हिम्मत तोँ देखो गलीज इंसान बाहर् कर सकता हैं पऱ इसको यहां करना हैं स्वेता अपने आप् सें हि बात करती हुईँ बोलीं।
ओरफिन "तुम् निकलजाओ यहां सें बाहर् कर लेना, मुझे बदबू आँ रही हैं तुमसे जाओअब।
अब्दुल इतना सुनकर क्रोध हौ गय़ा पऱ उसने हिम्मत सें काम लिया क्योंकि उसको पेशाब करना थां।
मेडम प्लीज बहोत तेज आँ रहा हैं रहमकरो मेरेहाल पर्र वरना पेंट मे निकल जाएगा प्लीज
स्वेता मुँह बनाकर सोचती हैं कि घऱ पे कोई नहीं हैं सासू भि कमरे मे लेटी हैं। इसको जल्द सें जल्द बाथरूम भेजकर अपना पीछा छुड़ाती हूं।
ठीक हैं उधरजाओ माधुरी उसे अपने पीछेबने आंगन केँ बाथरूम मे भेजने कां इशारा करती हैं।
अब्दुल बाथरूम कि तरफ देखकर आगे बढ़ता हैं औऱ स्वेता केँ बगल सें निकलकर आगेबढ़ जाता हैं।
स्वेता केँ नथुनों मे एक् तेज बदबूदार महक प्रवेश करती हैं जौ उसके नथुनों सें होकररोम रोम मे उतर जाती हें।
स्वेता जब तक समझ पाती अब्दुल केँ काले शरीरओर बदबूदार कपड़ों कि गंध मजबूरन स्वेता केँ जिस्म मे घुल चुकी थि।
स्वेता कों उबकीआई औऱ वोँ भागकर अपने आलीशान बैडरूम मे घुसकर अटैच बाथरूम मे घुस गई औऱ वाशबेसिन पऱ जाकर थूकने लगी।
उसनेकभी भि इंसान सें उठती हुईँ इतनी गलीज बदबू नहीं सूंघी जिसतरह उसनेआज सूंघी थि। वोँ बारबार थूकती रही ताकिउस बदबू केँ अहसास कों कम कियाजा सके। पऱ पता नहीं अब्दुल कि बदबूकिस तरह स्वेता केँ शरीर मे उतर चुकी थि केँ वोँ बारबार पानी मुँह मे डालकर कुल्ली करतीकभी नाक झाड़ती।
थोड़ीदेर अपने आपको सम्भाल कर स्वेता फारिग हुई औऱ बाहर् आँ गयीँ,।
वोँ बाहर् सोफे पर्र बेठकर अब्दुल कां प्रतीक्षा करनेलगी ताकि उसको बाहर् निकाल करगेट लॉककर सके।
अब्दुल बाथरूम पहुंचता हैं औऱ दरवाजा खोलकर अंदरघुस जाता हैं। अंदर सें बाथरूम देखकर वोँ सोचता हैं कि यह बाथरूम तौ उसकी झुक्की केँ आगेमहल जैसा हैं।
वोँ इधरउधर निगाहे डालकर बाथरूम देखता हैं उसे टॉयलेट शीट दिखती हें जोँ विदेशी थि एक् दमसाफ सुथरी
उसे विदेशी शीट कों देखकर ख्याल आता हैं कि उसने जीवनभर बस अड्डो याँ पब्लिक सोचालय कि देसीशीट हि इस्तेमाल कि हैं।
याँ झाड़ियों मे छिपकर हि शौच किया हैं क्यूं नां आज विदेशी शीट इस्तेमाल कि जाए औऱ वोँ विदेशी शीट पऱ खड़े होकर लोअर नीचे करता हैं औऱ मूतने लगता हैं।
उसका पीला पीला पेशाब स्वेता केँ आलीशान कोठी केँ बाथरूम मे गिरने लगा।
वोँ आंखेबंद करके पेशाब कि पीलीधार मारने लगा औऱ स्वेता कि गांण्ड कों याद करनेलगा। वोँ स्वेता कि गांण्ड कों सोचते सोचते अपने लंड कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे मसलने भि लगा।
"आहह-आहह क्याँ गांण्ड हैं मेडम कि दोस्त, कितना आनंदआता होगा इसके पति कों। वोँ तोँ साला पक्का गांण्ड अधिक मारता होगा।
यह अमीर घरों कि गांण्ड कि बात हि कुछ औऱ हैं जौ अपने तोँ ख्यालों मे भि नहीं हैं भाग्य मे तोँ जहाँ।
वोँ आंखे खोलता हैं तोँ उसका पेशाब समाप्त होँ गय़ा औऱ वोँ खड़े लंड कों मसलरहा थां तोँ उसे स्वेता कि गांण्ड सोचकर शुरुर चढ़नेलगा।
उसेमुठ मारे हफ्ता भर होँ गय़ा थां। उसने एक् बदसूरत मुस्कुराहट केँ संगकुछ सोचाओर लंड कों तेजतेज हिलाने लगा।
वोँ फिन सें आंखेबंद कर करके लंड हिलाते हुए स्वेता कि गांण्ड कां मेज़रमेंट लेनेलगा औऱ अहह भरतेहुए "आहह-आहह मैडमबड़ी मस्त गांण्ड हें तुम्हारी, कितनी कसी हुइ हैं जैसे तुम्हारी लेगिंग फाड़कर बाहर् आँ जायेगी। औऱ धीमी आवाज़ मे सिसकरहा थां। उसे स्वेता कि गांण्ड सोचकर बड़ा आनंद आँ रहा थां।
बहुतदेर हिलाने केँ बाद एकाएक उसके लंड नें पिचकारी मारी जोँ सीधेशीट केँ ढक्कन पऱ जाकरलगी औऱ बाकीधार उसकी पेशाब सें भरी टॉयलेट शीट मे गिरने लगी जोँ पेशाब केँ ऊपरतैर रही थि। कोई एक् मिनट तक अब्दुल कां लंड वीर्या निकालता रहा औऱ अब्दुल आहह-आहह भरतेहुए माल छोड़ता रहा।
उसका लंड बिल्कुल खाली होँ जैसे निचड़ गय़ा होँ। उसके लंड कि सारी गन्दी मलाई टॉयलेट शीट केँ अंदरतैर रही थि।
तभीउसे हेंगर सें 2 टॉवल लटके दिखे वोँ चलकर उनकेपास गय़ा औऱ सफेद टॉवल कों निकालकर देखता हैं
एक् मोटा रसीले टॉवल जोँ अब्दुल कि जीवन मे कभी देखने कों नहीं मिला उससे अपने माथे पऱ आए पसीने कों पोछता हैं।
पसीने कि कालीमेल अब स्वेता केँ बाथरूम कि टॉवल पर्र लग चुका थां वोँ दोतीन बार अपना मुँह पोछता हैं औऱ फिन अपने लंड पऱ लगी एक् दो गन्दे वीर्ये कि बूंदे भि टॉवल सें पूछ लेता हैं।
टॉवल कां कलरअब कालापड़ चुका थां जहां जहां सें वोँ टॉवल इस्तेमाल हुआ। उसपर अब्दुल कि काली गन्दी त्वचा कां पसीना ओर उसका गन्दा वीर्या लगा थां।
वोँ उस टॉवल कों टेड़ा मेडावही लटका देता हैं औऱ लोअरऊपर करके वापिस बाहर् आँ जाता हैं।
बाहर् आकर वोँ अपना झोला उठाता हैं औऱ स्वेता सें "धन्यवाद मैडमअब मे चलता हूं"
स्वेता उसको देखकर बुरा सां मुँह बनाती हैं औऱ उसकी निगाहें लोअर केँ गीलेदाग पर्र जाती हें जहां अब्दुल कां मुतलग गय़ा थां।
स्वेता नें सोचा "कितना बेहूदा गन्दा इंसान हैं ढंग सें पेशाब भि नहींकर सकता। छीईईई कितने गन्दे लोग हैं इस दुनियां मे।
अब्दुल अबआगे बढ़ चुका थां जहां सें उसकीपीठ दिखरही थि।
उसके लोअर मे एक् बड़ाहोल थां गांण्ड पऱ जौ बैठने सें घिसकर फट चुका थां। स्वेता कि निगाहें अचानक हि उसकी काली गांण्ड पऱ पड़ी औऱ उसकी उल्टी आतेआते बची। उसने निगाहे जल्द सें हटाई वरनाउसे पक्का उल्टी हौ जानी थि।
स्वेता उठकरगेट बंद करनेगईई औऱ गेट कों लॉक करके वापिस आनेलगी तौ उसकेजहन मे ख्याल आया कि "बाथरूम जानां चाहिए देखु तौ इसने पेशाब फ्लश किया हैं याँ नहीं।
वोँ बाथरूम कि तरफ चलती हैं औऱ जैसे हि वोँ इंटर करती हें एक् बहोत तेजमहक फिरसे उसके नथुनों मे घुस जाती हैं वोँ जल्द सें अपनीनाक पऱ हाथ रखती हैं औऱ सांस रोककर आगे बढ़ती हैं तौ वोँ टॉयलेट शीट पर्र पहुंच जाती हैं वहां देखकर उसकी आंखें फट जाती हैं औऱ आंखेबड़ी होँ जाती हैं।
उसे यकीन नहीं हौ रहा थां कि जौ मे देखरही हूं वोँ सच हैं.
टॉयलेट शीट केँ अंदरपड़ा उसका बहोत सारा वीर्या पानी केँ ऊपरतैर रहा थां। इतना सारामाल वोँ भि उस गलीज बदबूदार कूड़े वाले कां यहीबात उसे हेरत मे डालरही थि।
उसकेमन मे ख्याल आनेलगे कि "कितना नीच इंसान हैं मेरा पूरा बाथरूम गन्दा कर दिया कमीने नें फ्लश तक नहीं किया।
तभी उसकी निगाहें ढक्कन पऱ जाती हैं जहां उसकी पहली पिचकारी कि मोटी गाढ़ीधार पड़ी थि। वहां उसका वीर्या रिसता हुआ नीचे आँ रहा थां। स्वेता कि आंखे गुस्से मे लाल होनेलगी औऱ वोँ मन मे अब्दुल कों गालियाँ देनेलगी।
वोँ टॉयलेट मे पड़ा एक् भिखारी कां वीर्या जोँ पानी मे तैररहा थां उसे हेरत हुईँ कि इतना सारामाल आहह-आहह इतना भि निकलता हैं क्याँ किसी कां।
अभिनव सें तौ 3 गुना ज़्यादा होगा। इंसान हैं याँ जानवर।
बाथरूम मे फैली एक् मेले कुचेली बदबूदार लड़के केँ माल कि बदबू बाथरूम मे एक् अलग हि माहौल पैदाकर रही थि।
जिसे मजबूरन स्वेता कों सूंघना पड़रहा थां। एक् अप्सरा जोँ इतनी अमीर औऱ हसीन उसकोआज अपने खुशबूदार नाक सें एक् बदबूदार इंसान कि बदबू सुंघनी पड़रही थि।
स्वेता नें जल्द सें टॉयलेट कां फ्लश चालू किया औऱ अब्दुल कां गाढ़ा वीर्या नीचेचला गय़ा।
अब ढक्कन पऱ लगे वीर्ये कों साफ करना स्वेता केँ लिए मुश्किल कामबन गय़ा हैं।
उसने तकलीफ़ मे कुछ सोचाओर वाशबेसिन सें दोनों हाथों मे पानी लिया औऱ उस वीर्ये पऱ गिरा दिया।
पानी सें उसका गाढ़ा वीर्या आधाशीट मे बहकर आँ गय़ा
दोबारा सें पानी लिया औऱ फिनइसी तरहडाल दिया औऱ अब्दुल कां वीर्या कों साफ किया।
माधुरी नें कुछ राहत कि सांसली औऱ शीट कों फ्लशचला करबंद कर दिया।
ये बेदाग अप्सरा किसी बदबूदार इंसान कां वीर्या इसतरह साफ करेगी यह तोँ स्वेता नें भि नहीं सोचा।
वोँ हाथ पोछने केँ लिए टॉवल कि तरफ जाती हैं तौ उसे एक् ओर झटका लगता हैं कि उसका टॉवल टेढ़ा मेडा लटकाहुआ थां इसका मतलबउस मेले कुचेली बदबूदार अब्दुल नें इससेहाथ पोछा हैं। आह्दह गॉडयह क्याँ क्याँ देखने कों मिलरहा हैं।
स्वेता नें वोँ टॉवल हेंगर सें उतारा औऱ उसकोपलट पलटकर देखने लगी जहांउसे एक् बड़ा सां गीलादाग दिखा जौ पसीने ओरमेल सें काला हौ गय़ा थां।
जैसे हि स्वेता टॉवल कों अच्छे सें पकड़ती हैं उसकी नाजुक सफेद उंगली अब्दुल केँ गन्दे वीर्ये पर्र लग जाती हैं जिसपर स्वेता कों कोई ध्यान नहीं जाता। वोँ उस कालेबड़े दाग कों देखने लगी जिसपर उस बदबूदार अब्दुल कां पसीना ओरमेल थां।
उस टॉवल सें पसीने ओर वीर्ये कि बदबूउठ रही थि स्वेता कों समझ नहींआया कि यह सफेद तौलिया किसचीज सें इतना काला हौ गय़ा। उसने हल्का सां टॉवल कों अपनीनाक केँ पासलाई ओर स्मेल करके देखा थां उसे पसीने कि महक महसूस हुई औऱ स्वेता कों बहोत घिनआने लगी उसने टॉवल कों एक् हाथ मे लटकाकर देखने लगी औऱ दूसरे हाथ कों अपनीनाक पऱ रख दिया, जिस उंगली सें उसनेनाक दबारखी थि यहवही उंगली थि जिसपर अब्दुल कां गाढ़ा वीर्या लग चुका थां।
स्वेता कों नाक पर्र अब्दुल केँ वीर्ये कि बूंदलग चुकी थि औऱ उसकीमहक उसके प्यारे सें नथुनों मे घुस गई।
माधुरी कों एक् तेजमहक महसूस हुईँ तौ उसनेनाक पर्र उंगली लगाई औऱ उस वीर्ये कों उंगली पर्र लिया औऱ उसे देखने लगी।
उसकीमहक ओर वीर्ये कां रंगरूप देखकर स्वेता समझ गई, कि उस बदसूरत मेले सख्स नें टॉवल सें अपना काला पसीना ओर लंड पोछा हैं।
स्वेता उस बाथरूम मे चारोतरफ सें उस अब्दुल कि बदबू सें घिर चुकी थि। उसेसमझ नहीं आँ रहा कि क्याँ कियाजाए।
वोँ जल्द सें संभली ओर टॉवल कों हेंगर सें टांगकर बाहर् निकलकर लम्बी लम्बी सांसे लेनेलगी।
जब उसकी थोड़ी बहोत हालात मे सुधार हुआ तोँ वोँ अपने कमरे कि तरफबढ़ गयीँ,।
साम कों उसने वोँ टॉवल वाशिंग मशीन मे डालकर धोयाओर सूखाकर वापिस उसी बाथरूम मे लटका दिया
स्वेता नें सासू माँ नगमा, बेटे रियांश ओर अपनेलिए लञ्च बनाया औऱ सभी खाकरकर लेटगए।
स्वेता नें दिन कि घटना कों एक् दोबार याद भि किया औऱ एक् बुरा सपनासमझ कर भुला दिया.उसे लगा कि यह पहली औऱ आखरीबार हैं पर्र आगे क्याँ लिखा थां वोँ सभी क़िस्मत कां खेल थां।
पलक अपनी सहेलीयों केँ संग हिमाचल मे थि जौ 15 दिन कां टूर थां। घऱ पऱ केवल सासु मम्मी नगमा स्वेता ओर उसका बेटा हि थां।
अगलेदिन लगभग 11 बजे अब्दुल धूल मिट्टी सें सना कचराबीन रहा थां। इस दौरान उसे प्यास लगी तौ उसने सोचा यहांकोई मुझे जानता नहीं हैं क्यूं नाँ उस मैडम केँ घऱ जाकर पानी मांगलू।
होँ सकता हैं वोँ पानीदे दे ताकि मे घऱजासकू।
कड़कधूप पड़रही थि सड़को पर्र भीड़ भि नाम सिर्फ थि।
अब्दुल पसीने सें तरबतर हुआपड़ा थां उसे बहोत अधिक प्यास लगरही थि। वोँ चल देता हैं स्वेता केँ घऱ औऱ बाहर् सें बेल बजाता हैं।
स्वेता कों बेल सुनाई पड़ती हैं वोँ सोचती इस वक़्त कोंन होँ सकता हैं वोँ गेट कि तरफबढ़ जाती हैं।
आज उसनेइस तरह केँ कपड़ेपहन रखे थें जिसमें वोँ कयामत लगरही थि
कोई 2 मिनट केँ बाद स्वेता गेट पर्र होती हैं जोँ आजऐसी लगरही थि। जब वोँ अब्दुल कों पसीने सें लथपथखड़ा देखती हैं तौ चोंक जाती हैं "आजफिन आँ गय़ा यह गलीज इंसान" उसे बेहद क्रोध आँ रहा थां कि इसनेकल मेरे महंगे तोलिये कों अपनी गन्द सें मेला किया थां। फिन भि उसने पूछा"अब किसलिए आये हौ"
अब्दुल कों कुछ सुनाई नहीं दिया वोँ तौ बस जितना हौ सके अपनी आंखें सेकरहा थां। उसकी जीवन केँ बेहतरीन लम्हे उसके सामने आँ जारहे थें। वोँ स्वेता केँ खूबसूरती मे इसकदर खो गय़ा कि उसे उसकी आवाज़ भि नहीं सुनाई दि।
स्वेता नें जवाब नाँ मिलकर दोबारा पूछा"अब क्याँ लेनेआये हौ तुम्"
अब्दुल होश मे आठ हैं "म.मे.मेडम बहोत प्यास लगी हैं पानीमिल सकता हैं क्याँ, गर्मी मे हलकसुख गय़ा हैं"
स्वेता:- तुम्हें यह हि घऱ मिला थां कहीं औऱ स्थान जाकर मांग लेते"
अब्दुल:- मेडम मुझे यहांसभी दुत्कारते हैं मेने सोचा आप् रहमदिल कि होँ आप् हि पानी पिला सकती होँ"
स्वेता कों उसकोधूप मे खड़ा होना औऱ प्यासा होना देखा नहीं गय़ा औऱ वोँ अपना क्रोध ठंडाकर लेती हैं। उसने सोचाचलो कोई नहींयह भि इंसान हैं पानी पिलाने सें पुण्य हि मिलेगा
"धूप मे मतखड़े रहो अंदरआओ"
स्वेता नें उसे अंदर बुलाकर छाव मे खड़े रहने होँ कहा
"यहां रुको मे पानी लाती हूं"
अब्दुल:- ठीक हैं मेडम
अब्दुल वहां पऱ झोला रखता हैं औऱ नीचेबैठ जाता हैं
नीचे बैठकर वोँ स्वेता कों जाताहुआ देखता हैं जौ अपनी मदमस्त गांण्ड हिलाती हुइ जारही थि।
अब्दुल कि वासना फिन सें जागने लगी औऱ वोँ स्वेता केँ चूतड़ों कि थिरकन पर्र गौर देनेलगा।
"आहह-आहह मेडम मस्तचीज हौ आप्, क्याँ माल बनाया हैं ऊपर वाले नें, जी करता हैं आपको देखता रहूं। अब्दुल कां लंड फंफ़नाने लगता हैं औऱ वोँ लंड मसलकर अहह भरता हैं।
थोड़ीदेर बात स्वेता एक् ग्लास मे पानी भरकर लाती हैं ओर अब्दुल उसे देखकर खड़ा होँ जाता हैं।
स्वेता अपनेहाथ कां ग्लास आगे बढ़ाती हैं औऱ अब्दुल जैसे हि ग्लास पकड़ता हैं उसकाहाथ स्वेता कि नाजुक गोरी उंगलियों सें टकरा जाती हैं औऱ पसीने केँ दोतीन बून्द भि उसकी उंगलियों पऱ गिर जाती हैं। दोनों केँ जिस्म मे कम्पन पैदा होती हैं अब्दुल कों ऐसालगा जैसे उसने किसीगरम नाजुक तारपकड़ लिया होँ
वही स्वेता अब्दुल केँ टच सें हि सिहरगईई ओररही सहीकसर उसके काले बदबूदार पसीने नें पूरीकर दि।
अब्दुल कां पसीना स्वेता कि उंगलियों पर्र पड़ाऐसे लगरहा थां जैसेदूध पऱ मख्खी।
स्वेता कों बहोत घिन आँ रही थि पर्र उसने सब्र किया औऱ अब्दुल कों देखने लगी जोँ पानीपी रहा थां।
उसकी काली मेली गर्दन सें पसीना होतेहुए शर्ट मे घुसरहा थां
उसकी सफेद शर्ट मेली होकर कालीपड़ गयीँ, थि
अचानक कि स्वेता कि निगाहें उसके लोअर पऱ गयीँ, औऱ उसने लज्जा सें मुँह साइडकर लिया।
क्योंकि पसीने सें उसकी लोअर गीली होँ गयीँ, थि औऱ अब्दुल केँ लंड कां आकर उसमे सें दिखरहा थां।
स्वेता केँ बदन मे एक् मीठी चुभन सि हुई औऱ उसकादिल किया कि दोबारा देखे
उसने अब्दुल सें निगाहे बचाकर देखा तौ उसके लोअर मे एक् लम्बी चीजनजर आई जोँ अब्दुल कां लंड थां।
स्वेता कां मन टॉयलेट मे पड़े अब्दुल केँ घने सारे वीर्ये पऱ गय़ा औऱ मन मे एक् ख्याल आया कि सायदइस घिनोने इंसान कां हथियार बड़ा होगा जौ इतनामाल फेंकता हैं।
अब्दुल नें पानी पियाओर ग्लास स्वेता कों पकड़ा दिया
स्वेता नें ग्लास पकड़कर देखा तोँ उसमें अब्दुल केँ दांतों मे फंसे गुटके केँ 4-5 दाना बाकीबचे पानी मे तैररहे थें औऱ जहां अब्दुल केँ होंठ ग्लास पऱ लगे वहां सें भि कालादाग पड़ गय़ा थां।
स्वेता केँ मन कां पाराचढ़ गय़ा "कितना गन्दा हैं यह व्यक्ति मेरे ग्लास मे गनदगी डाल दि, मुँहकभी साफ भि किया हैं याँ नहीं, आहह-आहह ग्लास कां रंग भि कालाकर दिया इसने तोँ कितना निर्लज्ज व्यक्ति हैं।
अब्दुल पानी पीकर वहींखड़ा रहा औऱ स्वेता कि हुस्न कों देखने लगा
स्वेता:- अबजाओ यहां सें
अब्दुल:- मेडम पसीने सें शरीरभीग गय़ा हैं क्याँ मे बाथरूम मे जाकर मुँहधो सकता हूं बहोत बदबू आँ रही हैं पसीने कि
स्वेता कि हंसीछूट गयीँ, क्योंकि उसने सोचा कि तुम् पसीने कि बातकर रहे हौ तुम् तौ पूरा हि बदबूदार हौ।
स्वेता कि हंसी सें अब्दुल कों आश्चर्य हुआ कि यह क्यूं हंसपड़ी
अब्दुल:- क्याँ हुआ मेडम
स्वेता:- कुछ नहींजाओ धोलो।
स्वेता अभि भि अब्दुल कि बात पऱ मुस्कुरा रही थि औऱ अब्दुल कों बाथरूम कि तरफ जाता देखा।
तभी अब्दुल बाथरूम मे घुसता हैं औऱ सबसे पहले अपना मुँह धोता हैं।
बाहर् खड़ी स्वेता केँ दिमाग़ मे कल वालीबात आँ जाती हैं औऱ वोँ बाथरूम केँ अंदर देखने कां जरिया ढूंढती हैं कि अब्दुल क्याँ करेगा आजउसे शक थां कि कहींआज भि कोईनीच हरकत करेगा।
वोँ अपनेघऱ केँ अंदर देखती हैं तोँ कोई नहीं दिखता ओर वोँ एक् कुर्सी लेकर बाथरूम केँ पीछे कि साइडचली जाती हैं जहां एक् रोशनदान थां। स्वेता कों वहां सें कोईघऱ कां सदस्य नहींदेख सकता थां।
स्वेता नें धड़कते दिल केँ संग कुर्सी कों रखा औऱ उसपरचढ़ गई।
उसकादिल बहोत तेजधड़क रहा थां आज पहला मौका थां जब वोँ छिपके किसी कों देखने वाली थि।
Continue।
स्वेता तिवारी और भिखारी अब्दुल - चुदाई – New Episode
2_________
वोँ कुर्सी पऱ चढ़ जाती हैं औऱ अंदर देखती हैं तौ अब्दुल अपना मुँहधो रहा थां। वोँ हाथों मे पानी लेकर मुँह पर्र माररहा थां।
पानी सें उसके मुँह पर्र जमा पसीना उतरने लगाफिन अब्दुल मे मुँह मे पानी लिया औऱ मुँह मे डालकर इधरउधर घुमाया ओर कुल्ली कि।
कुल्ली करने सें उसमे मुँह मे मौजूद गुटके केँ दाने वाशबेसिन पर्र गिरकर बहगए। तभी अब्दुल कि निगाहें उसी सफेद तोलिये पऱ पड़ी जोँ उसेसाफ सुथरा दिखा। वोँ तोलिये कों उतारकर देखने लगा औऱ सोचा"अरे यह तौ धुलाहुआ हैं इसका मतलब मेडम नें इसकोधूल दिया हैं मगर मेडम कों पता नहींचला कि मैने इसको इस्तेमाल किया औऱ अपना पसीना ओर वीर्या भि पोछा
फिन मेडम नें मुझसे कुछकहा नहीं, पता नहीं जोँ भि हौ मुझे क्याँ
वोँ तोलिये सें अपना मुँह पोछता हैं औऱ गर्दन पर्र जमे पसीने ओरमेल कों भि उसी तोलिये सें पोंछ लेता हैं। रोशनदान सें झांकती स्वेता कों फिन झटकालगा "यह कमीना मेरे तोलिये सें हि अपना बदबूदार मुँह पोछता हैं इसे मुझे हि धोना पड़ता हैं।
अब्दुल अपना मुँह पोंछकर तोलिये कों कंधे पर्र डाल देता हैं
ओर अपने लोअर कां नाड़ा खोलने लगता हैं।
स्वेता कों जबयहसीन दिखा तौ उसकी धड़कने तेज चलनेलगी
उसेपता चल गय़ा कि अबयह मूतने वाला हैं उसे अब्दुल कों नंगा देखने मे लज्जा सि महसूस हुई तोँ उसने कुर्सी सें उतरने कां सोचा।
उसका दिमाग़ कंफ्यूज हौ गय़ा कि क्याँ कियाजाए।
स्वेता कों पसीने सां आनेलगा सोच सोचकर, उसकेबदन सें एक् ठीस सि उठी कि स्वेता देख लेँ देखने मे क्याँ जाता हैं वैसे भि उसे क्याँ पता तूँ यहां हैं। पता तौ चलेयह करता क्याँ हैं।
बहुत सोचने केँ बाद स्वेता अंदर झांकने कां निर्णय लेती हैं औऱ रोशनदान मे निगाहे डालती हैं तौ उसे अब्दुल खड़ा दिखा, थोड़ी नीचे निगाहें डाली तौ उसकी सांसरुक गयीँ, औऱ मुँह खुला कां खुलारह गय़ा। आंखेफेल गयीँ, क्योंकि जौ नजारा स्वेता कि आंखे केँ सामने थां वोँ यकीन केँ लायक नहीं थां
अब्दुल कां काला लम्बा लौड़ाहवा मे झूलरहा थां जौ 9 इंच लम्बा ओर 4'5 इंच मोटा थां। स्वेता कि निगाहें उस लंड पर्र जम सि गईई वोँ बदहवास सि उस लंड कों देखरही थि।
किसी कां इतनाबड़ा लंड ओर इतना काला भि होँ सकता हैं स्वेता नें सोचा भि नहीं थां। अभिनव कां लंड तौ इसके सामने एक् लुल्ली भर हि थां।
एक् खासबात जोँ स्वेता कों हैरान कररही थि कि उसके लंड केँ टोपे पर्र खाल नहींचढ़ी थि। एकदम पैनाओर आलू भुकारे जैसे टोपाउसे ओर भि खतरनाक बनारहा थां।
स्वेता केँ माथे पर्र पसीना आँ गय़ा वही अब्दुल अपने लंड कों पकड़कर आगे पीछे करनेलगा। उसके लंड पर्र पसीने कां पानीलगा हुआ थां जिससे वोँ ओर बदसूरत ओर कालालग रहा थां।
अब्दुल अब आंखेबंद करके टॉयलेट शीट केँ तरफ मुँहखड़ा थां
स्वेता उसको आंखेफाड़ फाड़कर देखने लगी कि यह काला बदबूदार कचरे वालाआगे क्याँ करता हैं।
अब्दुल भिखारी लंड कों तेजतेज मुठियाते हुए हल्का हल्का सिसकने लगा उसका लंड अब सख्त होँ गय़ा थां
जौ अब पूरे उफान पऱ थां।
तभी अब्दुल नें अपना एक् हाथ मुँह केँ नीचे किया औऱ उसपर अपनाथूक उड़ेल दिया। उसका गलीज बदबूदार थूक उसके कालेहाथ मे बड़ा गलीजलग रहा थां जौ स्वेता कों भि दिखरहा थां। स्वेता उसकी गलीज हरकतों कों नाक चढ़ाएदेख रही थि।
वैसे तौ उस बाथरूम केँ महंगी सें महंगी शैम्पू कंडीशनर थें पऱ उस बदबूदार गलीज अब्दुल केँ दिमाग़ मे यहसभी कहा सें आताउसे तौ बस अपनाथूक हि उचितलगा औऱ उसने अपने कालेहाथ पर्र पड़ेथूक कों टोपे पऱ लगाया औऱ नीचेजड़ कि तरफ़हाथ सें थूकलगा दिया।
अब उसका लोडाओर ज़्यादा भयानक ओर कालालग रहा थां,
उधर रोशनदान मे झांकती स्वेता कि चुत मे अजीब सि बेचैनी होनेलगी यह पहली मर्तबा थां जब स्वेता कां शरीरइस तरह रियेक्ट कररहा थां। जैसा स्वेता इस वक़्त महसूस कररही थि ऐसाकभी उसने अपने पति अभिनव केँ संग भि फील नहीं किया। उसकीदबी हुई उत्तेजनाएं अबउभर कर सामने आँ रही थि। वही अब्दुल नें अपनी रफ्तार पकड़ली औऱ पसीने ओरथूक सें गीले अपने काले गन्दे लंड कों मुठियाने लगा
"आहह-आहह मेडम बहोत आनंद आँ रहा हैं आपके आलीशान बाथरूम मे मुठ मारने मे, चुत तौ कभी मिली नहींअब हाथ कां हि सहारा हैं
वोँ कजरी भि हरामजादी पैसे मांगती हैं ठुकाई करवाने कां आहह-आहह
स्वेता अब्दुल केँ मुँह सें कजरीनाम सुनकर चोंक जाती हैं आखिरयह कजरी कोंन हैं।
(कजरी अब्दुल कि बस्ती मे रहने वाली एक् लड़की हैं 500 रुपये लेकरचुत देती हैं अब्दुल केँ पास इतने पैसे नाँ होने कि वजह सें आजतक उसकीचुत नहींमार पाया)
आहह-आहह कजरीकभी नाँ कभी तोँ मे 500 रुपये जोड़ हि लूंगा उसदिन तुझेही चोदुगाँ तुम्हारी तरफ अपने लंड सें कजरीहहहह
स्वेता इसबात कों सुनकर समझ गई, कि कोई लड़की हैं जौ पैसे लेकर गन्दा काम करती होगी।
"ओह्ह देखो तौ इस बदबूदार भिखारी कों कोंनभाव देगीइस बदसूरत कों, कितना काला गंदा हैं कितनी बदबु मारती हैं इससेफिन भि ठरककम नहीं हैं। कौन गिरी हुई लड़की होगी जौ तुझसे फसेंगी कलुवे स्वेता मन मे बड़बड़ाती हुईँ बोलीं
अब्दुल नें लंड पऱ हाथ सें हिला हिलाकर उसकीनशे बाहर् निकाल दि औऱ आहें भरताहुआ "मे.मे.डम___आपकी____गांण्ड नें मुझे पागलकर दिया हैं क्याँ कसी हुईँ गांण्ड हैं आपकी, अहहहह जी करता हैं तुम्हारी गांण्ड कों देखता रहू। उसको चुमुओर छेद पर्र जीभ सें जाट जाऊं मेडम
स्वेता उसकी गन्दी बातों सें हैरान थि पर्र उससे कहीं ज़्यादा उसकीचुत मे कुछ हलचल सि होती महसूस हुई जैसे बरसों कि दबी चाहत, उत्तेजनाएं बाहर् निकलना चाहती होँ
ओर अब्दुल केँ मुँह सें अपनी गांण्ड चाटने सें इतनी कामुक होँ गयीँ, कि उसकीतंग चुत सें नमकीन खट्टे पानी कां क़तरा बाहर् निकलआया जोँ स्वेता कों भि महसूस हुआ।
स्वेता कि आंखे भि मदहोश होनेलगी उसका जिस्म जबर्दस्ती उसको कामुक बनारहा थां।
अब्दुल केँ द्वारा गांण्ड चाटने कि बात सुनकर उसकी गांण्ड गुलाबी छेद पर्र हरारत सि हुईँ जैसेसच मे हि अब्दुल भिखारी उसकी गांण्ड चाटरहा हौ।
वहीं अब्दुल भि चरम सीमा पर्र हि थां तोँ उसने कंधे पऱ रखे तोलिये सें अपना मुँह पोंछा ओरफिन उसको लंड केँ चारोतरफ गोलगोल लपेटकर दोनों हाथों सें मूठ मारने लगा।
स्वेता तोलिये कों लंड पऱ लपेटा देख बेचैन ओर कामुक कां मिक्स भाव लाकरउसे देखती रही
उसका क्रोध अबकम होँ गय़ा थां उसी फिक्र नहीं थि एक् बेहद काला गन्दा सां गलीज बदबूदार भिखारी उसका तोलिये अपने गलीज लंड पऱ इस्तेमाल कररहा हैं
वोँ अबइस कामुक माहौल मे ढलतीजा रही थि औऱ फिन अचानक सें उसकाहाथ अपनीचुत केँ ऊपरचला गय़ा,
स्वेता बदहवाश सि सिचुएशन मे यह ध्यान हि नहींदे पाई कि उसकाहाथ उसकीचुत केँ ऊपरचला गय़ा। वोँ तोँ अब्दुल केँ काले गलीज लंड मे इस कद्रखो गयीँ, कि नाँ चाहते हुए भि उसने अपनीचुत पऱ हाथरख दिया औऱ प्लाजो केँ ऊपर सें अपनीचुत मे उठने वाली चिंगारी कों शांत करने केँ लिए हल्के सें हाथफेर दिया।
इस तरहचुत पऱ हाथ फेरे जाने सें उसकी घुटी हुई सिसकी निकल गयीँ, औऱ उसका ध्यान जब अपनेहाथ पऱ गय़ा थां तोँ चोंककर अपनाहाथ वहां सें हटा लिया।
अब्दुल नें अपनी स्पीड कायम करतेहुए उस मखमली तोलिये कों चोदने लगा जैसेयह तौलिया नाँ होकर स्वेता कि चुत होँ।
उसेऐसा फील होँ रहा थां जैसे वोँ स्वेता कि मखमली चुत मे धक्के लगारहा हैं।
आहह-आहह मे.मेडम तुम् कितनी हसीन हौ देखो क्याँ हालबना दिया हैं मेरा, मैडम पीछे तुम्हारी गांण्ड देखकर हि मेरायह हाल हैं
तुम्हारी कच्छी मे फंसी गांण्ड कां मे दीवाना हौ गय़ा हूं मेडम अहहहहहह.सिहहहहहह.मे.मे.डम कितनी सुंदर होँ।
स्वेता अपने बारे मे एक् गलीज बदबूदार नाली कि बदबु सें बदतर इंसान केँ मुँह सें अपनी गांण्ड कि तारीफ सुनकर गुस्से कि बजाय अपनाहाथ दोबारा सें अपनी प्लाजो केँ अंदर ब्रांडेड पैंटी मे फंसी अपनीचुत पऱ लें गई, औऱ चुत सें टपकने वाले नमकीन रस कों वहींढेर कर दिया। स्वेता कां बदन एक् अनचाही प्यास सें तड़परहा थां उसकीदबी वासनाये अब्दुल केँ मेले कुचेली काले लंड सें उभररही थि। वोँ कंट्रोल खोतीजा रही थि औऱ हल्के हल्के सें अपनीचुत कों हाथ सें रगड़रही थि।
अब्दुल कां लावाअब फटने वाला थां वोँ कभी भि अपने गन्दा वीर्या फेंकने वाला थां उसने लंड पर्र लपेटे तोलिये कों अलग किया औऱ हाथ सें पकड़कर लंड केँ सामने करदिए।
वोँ अब तोलिये मे अपना गाढ़ा कालामाल पैक करने वाला थां।
उसके पसीने कि टपकती बूंदे बतारही थि केँ उसे कितना आनंद आँ रहा थां
आहह-आहह मेडमयह लो मेरा माल, तुम् तोँ पी नहीं सकती इसकी तुम्हारे तोलिये कों पिलारहा हूं। मेरिई मेडमलो मेरामाल अहहहह
ओरफिन एक् गोली कि रफ्तार सें पिचकारी लंड सें होती हुई तोलिये पऱ टकराई ओर बदहवास स्वेता कां मुँह पिचकारी देखकर अपने आप् खुल गय़ा। जैसे उसने अब्दुल कि बात कों सीरियसली लिया होँ कि मैडमपी जाओ मेरेमाल कों।
लंड कि पिचकारी कह याँ अब्दुल केँ द्वारा माल पिलाना पर्र सच तोँ यह थां कि बाथरूम मे झांकती स्वेता कां मुँह खुलाहुआ थां।
अब्दुल कां सारा गंदा पानी उसके मखमली तोलिये कि इज्जत उताररहा थां। अब्दुल तबियत सें झड़ने केँ बादऊपर मुँह करके सांसे संभालने लगा औऱ स्वेता उसके गन्दे वीर्या कां एग्जामिनेशन करनेलगी। उसने सोचा भि नहीं थां कि एक् दिनऐसा भि आएगा कि एक् बेहद गलीज भिखारी उसके बाथरूम मे उसी केँ तोलिये पऱ अपनामाल गिरायेगा ओर वोँ खुली आँखों यहसभी देखेगी बल्कि अपना मुँह भि फाड़ देगी जैसे चाहती हौ कि आओ अब्दुल भरदो अपने गन्दे सडेले पानी कों मेरे खुशबूदार मुँह मे।
स्वेता सम्भली ओर अब्दुल कि तरफ देखा जोँ वीर्या लगे तोलिये कों सावधानी पूर्वक लटकारहा थां, तोलिये पर्र बहोत सारा पानी निकालकर अब्दुल वाशबेसिन पऱ जाकर अपनी टांगो पर्र लगे वीर्ये कों पानी सें साफ करनेलगा जौ उसकेबड़े लंड सें टपककर लग गय़ा थां।
स्वेता अबहवस कि दुनियां सें वापिस आँ गई, थि औऱ उसे अब्दुल फारिग होता दिखा तोँ चुपके सें सीढ़ियों सें उतर गई।
ओरजब चलनेलगी तोँ उसको अपनी टांगों मे छिपी बेइंतहा रसीली चुत मे चिपचिपा सां फीलहुआ, उसेसमझ नहीं आँ रहा कि वोँ इतनीगरम केसे होँ गई,। वोँ भि एक् भिखारी केँ गलीज गन्दे लंड कों देखकर। मे इतनी अमीर औऱ सुंदर होकर भि एक् नीची काले भिखारी सें गीली होँ गयीँ,। वोँ बाहर् खड़ी होकर अब्दुल कि राह देखने लगी
थोड़ीदेर बाद अब्दुल आता हैं औऱ स्वेता कि चुचियों कि तरफ एक् निगाहे डालता हैं जौ सांसे फूलने सें ऊपर नीचे हौ रही थि।
"धन्यवाद मेडमअब मे चलता हूं औऱ स्वेता अब्दुल कों जाताहुआ देखती हैं।
ओरगेट पऱ आकर जल्द सें लॉक करती हैं औऱ गेट सें पीठ लगाकर सीने पऱ हाथ रखकर अपनी सांसे सम्भलने लगती हैं।
स्वेता तिवारी और भिखारी अब्दुल - चुदाई - Next part mein bada twist
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