Adultery Chudasi (चुदासी ) desi chudai mom son Nishu ki chudasi bhari kahani, jismein vah apne pati Neerav ke saath saath kai anya purushon ke saath apni chudasi bhari ichhaon ko poora karti hai, jaise ki Karan, Ramu, Shankar, aur Anil. Yeh kahani hain ek aisi aurat ki, jiske andar ki chudasi kabhi bhi shant nahi ho sakti.
Adultery Chudasi (चुदासी ) - desi chudai mom son - Complete Kahani Part 1
Chudasi (चुदासी
* * * * * * * * * *पात्र (किरदार) परिचय
01। नीरव- निशा कां पति,
02। निशा-घऱ कां नाम निशु, नीरव कि पत्नि, असाधारण रूप कि मालकिन, स्टोरी कि नायिका।
03। करण-बस मे निशा कां हमसफर,
05। रामू- उम्र 35 साल, बिल्डिंग कां रात कां चौकीदार, 4-5 घऱ मे झाडू बरतन भि करता हैं।
06। शंकर- उम्र 25 साल, टिफिन वाला भाई
07। अब्दुल- निशा केँ माँ-बाप कां पड़ोसी,
08। अनिल- निशा केँ जीजू, मीना कां पति।
09। मीना निशा कि बड़ी बेहन, अनिल कि पत्नि।
10। रीता निशा कि साथी क्लासमेट,
11। माधो- बिल्डिंग नया चौकीदार
12। चन्दा- माधो कि पत्नि
13। महेश- बिल्डिंग कां सेक्रेटरी, मशहूर व्यक्ति
14। जावेद (विकास)- निशा कों कालेज मे फंसाने कि कोशिश करने वाला लड़का।
टिप्पड़ी- लेखक नें बीच-बीच कहान कों मिटा दिया हैं, इसलिये कुछ अटपटा लगेगा। यदिऐसी किस्सा पसन्द नहि होँ तौ नां पढ़े।
Adultery Chudasi (चुदासी ) - desi chudai mom son – New Episode
स्टोरी कि नायिका निशा कि जबानी
थोडा धीरे-धीरे उम्म। उंगली सीधीरख केँ करो उम्म। चूसो नां आहह-आहह.” नीरव (मेरे पति) अपनी उंगली मेरी योनि मे अंदर-बाहर् कररहे थें, मे चरम सीमा पर्र थि। मे असीमसुख मे खोई हुईँ नीरव कां हाथ पकड़कर उसे उंगली हिलाने मे सहायता करते हुये लंबी-लंबी सांसें लेते हुये पानी छोड़रही हें। नीरवसमझ जाता हैं कि मे झड़ चुकी हूं।
तौ वोँ मेरे होंठों पे किस करके साइड हौ जाता हैं।
मेरे नार्मल होते हि नीरव पूछता हैं- “आनंदआया?”
मे 'हाँ' कहती हूं।
नीरव- “हमारी विवाह केँ 6 सालबाद भि तुम् नई नवेली दुल्हन कि तरह आहिस्ता करने कों क्यूं कहती हौ? औऱ यह उंगली थि इससे इतनाडर?” नीरव हँसते हुये कहता हैं।
मे नीरव कि बात कां जवाब टालकर केवल मुश्कुराते हुये कहती हें- “तुमको करना हैं?”
नीरव-“हाँ, दोस्त तुम् तोँ जानती हौ कि वोँ मेरेलिए नींद कि गोली हैं.” कहते हुये नीरव अपना पायजामा घुटनों तक नीचेकर देता हैं।
मे नीरव कि तरफ होकर उसकी टी-शर्ट गले तक कर देती हूं। मे नीरव कां लिंग पकड़कर सहलाने लगती हूं।
नीरव-“किस करो.” नीरव कहता हैं।
मे नीरव कां लिंग हिलाते हुये उसके होंठों पऱ मेरे होंठरख देती हूं।
नीरव अपने एक् हाथ कि बाहों मे मुझे जकड़ लेता हैं औऱ फुसफुसाता हैं- “जोर सें हिलाओ निशु.”
मे जोरों सें हिलाने लगती हूं।
नीरव मेरे होंठों कों जोरों सें चूसने लगता हैं। वोँ जीभ निकालकर मेरे होंठों केँ बीच दबाता हैं। मे मेरा मुँह भींच लेती हूं। नीरव मुझे बाहों केँ घेरे सें मुक्त करके कहता हैं- “निशु मेरी गर्दन कों चूमो.”
मे नीरव कि गर्दन सें टी-शर्ट नीचे करके उसकेगले कों चूमती हुईँ जोरों सें लिंग हिलाने लगती हूं।
नीरव जोरों सें सांसें लेने लगता हैं। मे मेरी हिलाने कि गति औऱ बढ़ाती हूं औऱ नीरवझड़ जाता हैं। उसके लिंग मे सें निकली हुईँ वीर्य कि कुछ बूंदें मेरे हाथों पर्र पड़ती हें, औऱ कुछ नीरव केँ पेट पऱ पड़ती हें। नीरव कों किस करके मे बेडरूम सें बाहर् आती हूं, वाश-बेसिन मे हाथ धोती हूं औऱ गार्गल करके बाथरूम मे जाकर मे वापस बेडरूम मे आती हूं। तब तक तौ नीरव केँ खर्राटों कि आवाजें चालू हौ गई होती हें। मे मन हि मन मुश्कुराती हूं।
कि नींद कि गोली लेते हि नींद आँ गई औऱ फिन मे भि नींद कि आगोश मे समा जाती हूं।
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मे निशा, एक् साधारण घऱ कि असाधारण रूप कि मालकिन। विवाह सें पहले मेरेरूप केँ चर्चे हमारी समझ मे इतने थें कि हर कुँवारा लड़का केवल मुझसे हि विवाह करना चाहता थां।
नीरव हमारे शहर कां सबसे अधिक समृद्ध औऱ नामचीन फेमिली कां थां औऱ संग मे सबसे हसीन लड़का, हर कुंवारी लड़की कि ख्वाहश थां नीरव। जब हम् दोनों कि विवाह हुई तब न् जाने कितने लड़के औऱ लड़कियों कां दिल टूटा।
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इतनी हशीन जोड़ी होने केँ बावजूद हमारी विवाह केँ बाद मेरे सासू-ससुरजी कों मुझ पऱ हमेशा अविस्वास हि रहा। उनको हमेशा लगता थां कि मे उनके पैसे मेरे मम्मी-पिताजी कों भेजती हें। उन्होंने हम् दोनों कों दूसरा फ्लैट दिला। दिया, जहां मे औऱ नीरवअलग रहते हें।
अधिकतर घऱ कि चीजें वोँ हि भेजते हें, बाकी केँ खर्चे केँ लिएहर महीने फिक्स अमाउंट दे देते हें। बिजनेस तोँ हमारा जाइंट हि हैं। मेरे ससुरजी, जेठ औऱ नीरव तीनों संग हि काम करते हें। मेरे सासू माँ-ससुरजी केँ ऐसे रवैए केँ। बावजूद मे बहोत खुश हूं। मेरी लाइफ सें, पूरी संतुष्ट हूं, क्योंकी नीरव मुझे बहोत प्रेम करता हैं, हमेशा मेरा पूरा ख्याल रखता हैं।
सुभह 5:45 बजेबेल बजी। डींग-डोंग, डींग-डोंग.
मैंने उठाकर जल्द-जल्द नाइटी पे गाउनपहन लिया। मे हमेशा रात कों नाइटी पहनती हें, जोँ स्लीवलेश औऱ घुटनों तक कि हि हैं। गाउन पहनकर बर्तन लेकर मैंने दरवाजा खोला। दूध वाले गोपाल चाचा थें, करीब-करीब 55 साल केँ होंगे। जोँ बरसों सें मेरे ससुराल मे दूध देनेआते हें।
मे- “नहि, इसलिये तौ पूरा लेँ रही हूं.” मैंने जवाब दिया।
चाचा नें दूध दिया तौ मे दरवाजा बंद करकेफिन सें थोड़ी देर केँ लिएसो गई। 11:30 बजे मे खानां बनारही। थि, टिफिन वालाकभी भि आँ सकता थां। बहोत हि जल्द थि। तभीफोन बजउठा, देखा तोँ मेरी मां कां मोबाइल थां, मे बात करते-करते टिफिन भरनेलगी।
माँ- “कैसी हौ बेटा?”
मे- “ठीक हूं, तुम् औऱ बापू केसे होँ?"
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