Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 9 A.
मे जितनी तेजी सें संजयजी कों लेकर फ्लोर पर्र गिरा थां उतनी हि तेजी सें खड़ाहुआ औऱ जिधर सें गोली चलने कि आवाज़ आई थि उधर झपटते हुए दौड़ा। मैंने एक् व्यक्ति कों हाल केँ प्रवेश दरवाज़ा सें बाहर् कि ओर भागते हुए जाते देखा। मे उसके पीछे दौड़ा। वोँ व्यक्ति प्रवेश दरवाज़ा सें बाहर् निकल गय़ा थां। मे अभि उसकेपास पहुंचता कि वोँ मेनगेट केँ सामने रखे एक् बाइक पऱ सवार होकरयह जा। वोँ जा। मे उसका पिछा नहि कर सकता थां क्योंकि हमारी वाहन होटल केँ पिछेबनी पार्किंग मे खड़ी थि। औऱ वहां दुसरी कोई भि कार नहि थि। मैंने उस आदमी कों जितना देखा उससेयही पतालगा कि वोँ एक् हल्के लालरंग कां शर्ट पहना थां। उसकेबाल बहुत बड़े थें औऱ वोँ एक् दाढ़ी मूंछ वाला इंसान थां। मे वापसहाल कि तरफचल दिया कि तभी संजयजी, उनके पिता जी औऱ कुछ गेस्ट वहां आँ गए।
संजयजी नें मेरीतरफ सवालभरी नजरों सें देखा तौ मैंने इनकार मे सर हिलाते हुएकहा -" भाग गय़ा। "
हम् हाल मे वापसआये। वहां अफरातफरी कां माहौल थां। संजयजी औऱ उनके पिता जी मेहमानों कों शान्त कराने कि कोशिश करनेलगे। मे संजयजी केँ पासआया औऱ उनसे पुलिस कों मोबाइल करने कों कहा। उन्होंने हां मे सिर हिलाया औऱ पुलिस कों मोबाइल किया।
दस मिनट मे हि पुलिस आँ गयीँ,। फिन संजयजी, उनके फादर औऱ मे हाल मे हि कोने मे बने मैनेजर केँ केबिन मे चलेगए। हमने पुलिस कों वहां घटितहुए वारदात केँ बारे मे बताया। पुलिस केँ यह पुछने पर्र कि आप् कों किसी पऱ शक हैं तोँ संजयजी नें कहा उन्हें किसी पर्र शक नहि हैं।
संजयजी एक् उच्च दर्जे केँ बिजनेस मैन थें इसलिये पुलिस उनसे बड़े लिहाज सें पेशआई। आधे घंटे केँ पुछताछ केँ बाद पुलिस जिस दिवार मे गोली घुसी थि वहां गई,। उन्होंने गोली निकाल कर अपने कब्जे मे किया औऱ यह बोलकर बिदा हुईँ कि कुछपता चलने पर्र आपकोखबर करेंगे।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे माहौल थोडा शांतहुआ। मेहमान खापीकर अपने अपनेरूम मे जानेलगे थें। वहां केँ लोकल मेहमान अपने अपने घरों कों निकलगये।
मे एक् काउंटर पऱ गय़ा औऱ लेमनजूस लेकर पीनेलगा औऱ आज केँ कार्यक्रम मे जोँ विध्न हुआ थां उसके बारे मे सोचने लगा। तभी मैंने संजयजी, उनकेडैड औऱ माँ, उर्वशी, उर्वशी केँ माॅमडैड, मधुमिता औऱ श्वेता दि कों मेरीतरफ आते देखा। वेसब मेरेपास आयेतभी संजयजी नें मुझेगले सें लगाते हुएकहा -
"Thank you soo much सागर। मे तुम्हारा किसतरह सें आभार प्रकट करूं। आज मे जिन्दा हूं तौ केवल तुम्हारी वजह सें। "
" हां बेटा। आज तुमने संजय कों एक् नई जिंदगी दि हैं। हम् तुम्हारा अहसान कभी नहि भुलेंगे। " संजयजी केँ फादर नें प्रेम सें कहा।
मे शर्मिंदा होताहुआ बोला -" ऐसीबात नहि हैं अंकल। मैंने ऐसाकोई जादू नहि किया हैं। मुझे संजयजी केँ चस्मा मे सें रिवाल्वर कि झलक मिली औऱ मैंने इन्हें जल्दी धक्का दे दिया। एक् ग्रह थां जोँ कट गय़ा। "
" अगर एक् सेकेंड कि भि देरी होती तोँ जीजू याँ तुम्हारा किसी नाँ किसी कों गोलीलग हि जाती " - श्वेता दि भयभीत होतेहुए बोलीं।
तभी उर्वशी मेरेहाथ कों पकड़कर रोते होतेहुए बोलीं -" सागर तुम् नें मेरी मांग सुनी होने सें बचा लिया। मे जिन्दगी भर तुम्हारा अहसानमंद रहुंगी। मे."
मैंने उसेबीच मे टोकते हुएउसे अपनेगले लगा लिया औऱ बोला -" क्याँ बात करती हौ उर्वशी दि भइया भि कभी अहसान करता हैं। भइया कां कर्तव्य होता हैं कि वो अपनी बेहन केँ हरसुख दुःख कां ख्याल रखें। औऱ तुम् इसे एक् दुर्घटना समझकर भुलजाओ नहि तौ आज केँ बर्थडे पार्टी कां केसे मज़ा उठाओगी। "
वोँ मुझ सें लिपट गई। मैंने उसकेसिर केँ बालों कों सहलाते हुएकहा - " अधिक रोना धोना करोगी तोँ सारी मेकअप उत्तर जाएगी औऱ संजयजी डर सें कहीं दिल्ली नं भाग जाएं। "
सबके चेहरों पऱ मुस्कान आँ गई। उर्वशी नें मुस्कुराते हुए मेरी छाती पर्र हल्के सें मुक्का जड़ दिया। मैंने देखासब मुझे बलिहारी नजरों सें देखरहे थें।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे परिवार केँ मेम्बर खाने केँ लिए निकलगये। रात केँ दसबजगए थें। बुजुर्ग लोगखा कर अपने अपने कमरे मे चलेगए। वहां मेरे अलावा संजयजी, उर्वशी, औऱ श्वेता दि हि खड़े थें।
तभी संजयजी नें मुझसे कहा -" सागरजब भि कभी तुम्हे मेरी जरूरत होगी चाहे वोँ किसी भि मामलात मे हौ, बेहिचक मेरेपास आँ जानां। किसी भि तरह कि संकोच मत करना। ओके। "
मैंने मुस्करा करकहा -" ओके। "
" चलोअब जरागला तरकर लें। "
" जी चलिएमगर मे दोपैग सें ज़्यादा नहि लुंगा। " मैंने कहा।
" ठीक हैं। चलो। " उन्होंने कहा।
हम् चारों जहांबार कां काउंटर बना थां वहांगये। संजयजी नें जानी वाकर ब्लैक लेबल केँ बोतल सें पैगबना कर एक् मुझे दिया औऱ एक् स्वयं पकड़ लिया। संजयजी केँ बहोत जोर देने पर्र उर्वशी औऱ श्वेता दि नें एक् बोतल बीयर मे सें हाफहाफ पिया। नां नाँ करते भि मे तीनपैग पी गय़ा औऱ संजयजी नें तौ पांचपैग मार लिया।
मुझे हल्का हल्का शरूर थां मगर संजयजी कों देखकर लगता नहि थां कि उन्होंने शराबपी रखी होँ। उर्वशी औऱ श्वेता दि केँ चेहरे सें लगता थां जैसे उन्हें भि कुछनशा हुआ हैं। फिन हमने खानां खाया औऱ अपनेरूम मे जाने केँ लिए लिफ्ट कि तरफ बढ़े।
" सागरताश खेलते होँ याँ नहि। " चलते-चलते हि संजयजी नें मुझसे पूछा।
" जी थोड़ी बहोत खेल लेता हूं। "
" तोँ आँ जाओरुम नम्बर ३२२ मे। हमारे कुछ साथी भि हें। थोडा लक आजमाते हें। "
" आप् लोगजूआ खेलोगे। "
" क्यूं तुम्हें पसन्द नहि। "
" मनपसंद नापसंद वालीबात नहि हैं। कहा आप् लोगों कि बड़ी बड़ीचाल वालीजुआ औऱ कहां मै। " मैंने मना किया।
" मेरीतरफ सें खेल लेना। "
" नहि। आज नहि फिनकभी जरूर खेलेंगे। "
बातों हि बातों केँ दौरान हम् थर्ड फ्लोर पऱ पहुंच गए। हमारा रूम पहलेआता थां इसलिये हम् अपने कमरे केँ सामने खड़े हौ गए औऱ उर्वशी औऱ संजयजी कों गुड नाईटबोल कर अपने कमरे मे प्रवेश करगये।
कमरे मे प्रवेश करते हि श्वेता बोलि -" संजय जीजू सें एक् ताश मांग केँ लेँ आओ। "
मे चौंकते हुए बोला -" ताश ! ताश क्याँ करोगी ?"
" खेलेंगे। "
" इससमय। रात केँ बारह बजने वाले हें। " मुझे आश्चर्य हुआ।
" हां। इससमय। क्यूं तुम्हें नींद आँ रही हैं ?"
" नहि। " - मैंने उसे थोड़ी देरघुर केँ देखा -" ओके। लाता हूं। "
बोलकर मे कमरे सें निकल गय़ा औऱ संजयजी सें ताश लेकर वापस कमरे मे आँ गय़ा।
मैंने देखा श्वेता दि नें कपड़े चेंज नहि किए थें। वोँ बिस्तर केँ सिरहाने पीठ पीछे तकिया लगाए बैठी थि। मैंने कमरे कां दरवाजा बंद किया औऱ उसके विपरीत बिस्तर पर्र बैठ गय़ा।
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Update 9 B.
" कपड़े तोँ चेंजकर लो। " मैंने कहा।
" नहि। पहले बताओ राजीव सें क्याँ बात हुईँ थि। " श्वेता दि धीरे-धीरे पलंग पऱ अपने कों एडजस्ट करतेहुए बोलि।
मैंने इमानदारी सें पुरीबात बताई। वोँ राजीव केँ अनुष्का केँ संग नाजायज संबंधों कों सुनकर भड़क गई। मैंने बड़ी मुश्किल सें उसे शान्त किया। मैंने उसे समझाया कि अनुष्का राजीव कां पहला प्रेम थां औऱ यदि वोँ राजी होती तौ वोँ आज केँ तारीख मे राजीव कि पत्नि होती। औऱ वैसे भि अनुष्का विवाह शुदा हैं औऱ वोँ अपने फिजूलखर्ची औऱ लालची स्वभाव केँ कारण अपने पति कों छोड़ने वाली नहि हैं।
वोँ आश्वस्त हुई। फिन बोलीं " एक् औऱ बात हैं। "
" क्याँ?"
उसने चिंतित स्वर मे कहा -" मुझेउस घऱ मे सोने सें डर लगता हैं। बाथरूम मे जाती हूं तौ ऐसा लगता हैं जैसेअमर अभि उठकर खड़ा हौ जाएगा औऱ मुझे."
मुझे उसकीबात जायज़ लगी। अमर कि मौतकोई स्वाभाविक मौत तौ थि नहि। उसका कत्लहुआ थां। तौ डरना वाजिब हि थां। सोचते हुए मुझे एक् आइडिया आया।
मैंने कहा -" तुम् लोग क्यूं नहि वोँ फ्लेट बेच देते होँ ? औऱ गाजियाबाद छोड़कर दिल्ली मे हि शिफ्ट होँ जाओ। "
" तुम्हें इतना आसान लगता हैं ? फ्लेट लेना अमूमन आसान होता हैं। मगर बेचना बहोत मुश्किल होता हैं। औऱ गरजु हौ कर बेचने मे फ्लेट कि कीमत भि सही नहि मिलती हैं। "
" इसका एक् मार्ग हौ सकता हैं। "
" क्याँ ?"
" तुम् लोगअमर केँ घऱ शिफ्ट हौ जाओ। अमर केँ घऱ मे उसके माँ केँ अलावा औऱ कोई भि नहि हैं। वोँ बेचारी अकेली घऱ मे अमर केँ यादों मे डुबी रहती हैं। तुम् लोगों केँ आने सें उनका अकेलापन दूर हौ जाएगा औऱ उनकामन भि दुसरी चीजों कि तरफ केन्द्रित होगा। औऱ फ्लेट कि जबसही कीमत मिलेतब बेच देना। "
" बोल तौ तुम् सहीरहे होँ मगर क्याँ वोँ हमे अपनेघऱ मे रहने देगी। "
" उसकी चिंता मतकरो। तुम् राजीव जीजू सें बातकरो फिन अपनीराय मुझेबता देना। औऱ उनकेलिए भि तौ यह डिसीजन अच्छा हि होगा, वहां सें उनकी आफिस बहुत नजदीक होँ जाएगी।
श्वेता दि कों यह मशवरा बहुत अच्छा लगा। वोँ खुश हौ कर बोलीं - ओके। चलोअब ताश खेलते हें। "
मैंने ताश अपने पैंट सें निकाल करउस केँ सामने रखा।
" याद रखना मेरेपास हजार बारहसौ सें ज़्यादा रूपए नहि हैं। वैसे खेलना क्याँ हैं ?"
" स्ट्रीप पोकर। " श्वेता दि नें कहा।
मे चौंक गय़ा। स्ट्रीप पोकर एक् इरोटिक गेम हैं जिसे अमेरिका औऱ यूरोप मे ज्यादातर खेला जाता हैं। इसगेम मे पैसों कि बाजी नहि लगती हैं। इसमें प्रत्येक बाजी मे हारने वाला अपनेबदन सें एक् कपड़े उतारता हैं। औऱ अन्त मे हारने वाले केँ जिस्म सें जबसब कपड़े उतर जाते हें मतलब हारने वालाजब पुरीतरह सें नंगा होँ जाता हैं तब जाकरयह गेमखतम होता हैं। इसे कार्ड याँ स्पाइन दि बोटल केँ द्वारा खेला जाता हैं ।
"तुम्हें स्ट्रीप पोकर केँ बारे मे पता हैं नं। " मे आश्चर्यचकित होँ बोला।
" हांपता हैं। "
" केसे भइया "
" क्याँ सारी दुनिया कां ज्ञान तुम्हारे हि पास हैं ? क्याँ इन्टरनेट तुम्हीं सर्च करते होँ। "
" तुम् क्याँ जानती हौ। यह तोँ बताओ ? " मे अभि भि आश्वस्त नहि थां।
" यहीं कि अगर मे जीतीतब तुम्हें अपने जिस्म सें एक् वस्त्र निकालना पड़ेगा औऱ यदि तुम् जीते तौ मे अपनेबदन सें एक् वस्त्र निकालूंगी। "
" औऱ गेमशेष कब होगा ?"
" जब तक हारने वाले केँ जिस्म सें पुरीतरह कपड़े उतर नहि जायेंगे। "
" मतलबजब तक कोई एक् पुरीतरह नंगा नहि हौ जाएगा। " मैंने कहा।
" हां। "
मैंने उसेसर सें पैर तक निहारा। वोँ अभि भि वहीं ब्लूकलर कि साड़ी औऱ ब्लाऊज़ पहनेहुए थि। ब्लाउज मे कैद उसके बड़े-बड़े वक्ष गर्व सें सीनातान कर खड़ी थि। जिस्म कां कोई भि भाग खुला तोँ नहि थां मगर उसके गदराए हुए कां प्रत्यक्ष प्रमाण पेशकर रही थि। मेरादिल तौ बल्लियों उछलने लगा। उसके नंगे होने कि कल्पना सें हि मेरा लिंग उत्तेजित हौ गय़ा। मुझे सालों कि मेहनत साकार होतेहुए नजरआने लगी।
" ड्रीम्स देख्ना बंदकरो। औऱ मेरे सामने नंगे होने केँ लिए सजधजकर हौ जाओ। " उसने मेरे चेहरे केँ हाव-भाव कों पढ़ते हुएकहा।
मे मुस्कराते हुए बोला -" जब मे टेंथ स्टैंडर्ड मे औऱ तुम् हायर सेकंडरी मे थि तभी सें तुम् कों नंगा देखने कि लालसा जगी हुईँ थि। लगता हैं आजउपर वाले कों दया आँ हि गई। "
" बड़ीशौक हैं नां अपनी बेहन कों नंगी देखने कि। मगर अफसोस तुम्हारी ख़्वाहिश अधूरी हि रह जाएगी। वैसे भि आज तक ताश मे मुझसे हारते हि आए हौ। "
" देखते हैं आज तुम्हें हारने सें तुम्हारी क़िस्मत कितना बचाती हैं। "- मैंने मुस्कराते हुएताश कों फेंटते हुएकहा -" अबजरा कपड़ों केँ बारे मे बातकर लें। हम् दोनों केँ वस्त्र भि तौ बराबर बराबर होनी चाहिए न्। मेरे जिस्म पऱ इस टाइमचार कपड़े हैं पैंट, शर्ट, गंजी औऱ जांघिया। अब तुम् अपने बताओ। "
" मेरे पांच हें। "
" कौनकौन सां ?"
" साड़ी, ब्लाउज, पेटिकोट, ब्रा औऱ पैंटी। "
" यह तौ गलत हैं। मेरीतरह तुम् भि चार कपड़ों मे होँ जाओ। "
" नहि। तुम्हारे कलाई कि घड़ी कों पांचवां वस्त्र मान लेंगे। "
" ओके। " - मे राजी होँ गय़ा।
मैंने ताश फेटी औऱ उसनेताश कों बीच सें काटा। असल मे कार्ड फ्लश कि तरह हि बांटे जाते हें। तीनतीन करके। फ्लश कि तरह जिसका कार्ड बड़ा होगा वोँ हि जीतेगा। वोँ अपने कार्ड उठाई।
मैंने अपना कार्ड देखा। मेरेपास हार्ट कां 7 औऱ स्प्रेड कां 10 औऱ किंगआया थां। मैंने उसे अपने कार्ड देखाने कों बोला।
उसकेपास डायमंड कां क्विन, स्प्रेड कां गुलाम औऱ क्लब्स कां 9 आया थां। उसके कार्ड मेरे सें बड़े थें। मे पहलागेम हार गय़ा थां। मैंने अपनी घड़ी निकाल कर बिस्तर केँ बगल मे रखेमेज पऱ रख दिया।
वोँ जीती थि इसबार कार्ड उसने बांटे। मैंने अपनी कार्ड देखी। इसबार डायमंड कां तीन, क्लब्स कां छः औऱ स्प्रेड कां नौआया थां। मे उदास होँ गय़ा। जब उसने अपने कार्ड दिखाया तौ उसकेपास हार्ट केँ आठ औऱ क्लब्स केँ दो औऱ स्प्रेड केँ आठ निकले। उसकेपास आठ कां पेयर थां। मे फिनहार गय़ा।
मैंने अपना शर्ट निकाल करमेज पऱ रख दिया। उसने मेरे शरीर पर्र एक् सरसरी निगाह डाली।
वोँ मुस्कुराती हुइ कार्ड बांटी। वोँ फिनजीत गई,। उसनेकलर सें मुझेबीट कर दिया जबकि इसबार मेरेपास भि अच्छे पतेआये थें। मेरेपास किंग कां पेयर थां।
मैंने अपनी गंजी उतार दि औऱ उसे भि बगल मे रख दिया। अब मे उपर सें नंगा हौ गय़ा थां। मेरेबदन पऱ मात्र पैंट औऱ जांघिया हि बचा थां।
नेक्स्ट राउंड मे मेरी तकदीर खुली। उसकेपास दो कां पेयरआया थां जबकि मेरेपास छः कां पेयरआया थां।
श्वेता दि नें बिस्तर पर्र खड़े होकर अपनी सारी उतारी औऱ उसेउसी मेज पऱ रख दियाजिस पऱ मेरा वस्त्र थां। साड़ी उतरने केँ बाद उसकीकमर नंगी होँ गई थि। ब्लाउज मे कैद उसके बड़े-बड़े वक्ष प्रत्यक्ष रूप सें सामने आँ गये।
अगला राउंड भि मे हि जीता। उसकेपास सबसे बड़ा कार्ड गुलाम थां जबकि मेरेपास दोतीन, चार कां सिक्वेंस आया थां।
उसनेे बैठे बैठे हि अपने ब्लाउज कों निकाला औऱ बगलमेज पर्र रख दिया।
उसकी ब्रा उसके बड़े-बड़े गोलाईयों कों ढकने मे पुरीतरह सें नाकाम थि। वोँ उसके पुरे वक्ष कां चालीस प्रतिशत हि ढकपाई थि। साठ प्रतिशत वक्ष नंगे होँ गए थें। गोरी त्वचा अधनंगी गोलाईया नंगाकमर औऱ गहरी नाभि देखकर मे होशो-हवास खो बैठा। मेरी उत्तेजना बढ़ती हि जारही थि।
" कार्ड बांटो " - उसकी आवाज़ सें मेरी तनदरा भंग हुई।
अभि भि वोँ तीन वस्त्र पहनेहुए थि जब कि मे दो। मैंने कार्ड बांटी। इसबार उसने मुझेहरा दिया। उसकेपास तीन दहलाआया थां औऱ मेरेपास तोँ सबसे बड़ा कार्ड हि नौ थां।
मैंने अपना पैंट निकाल कररख दिया। अब मे मात्र जांघिया पहनेहुए थां। मैंने महसूस किया कि वोँ मेरे शरीर कों चोरी छिपे निहार रही हैं। कभी उनकीनजर मेरे चौड़ी सीने पर्र जाती तोँ कभी मेरे माशल जांघों पर्र औऱ कभी मेरे जांघिया मे कैदउठे हुए उभारों पऱ। मैंने अपने जिस्म पर्र बहुत मेहनत कि थि। मैंने जिन लड़कियों सें संभोग क्रिया थां वोँ सब मेरे गठिले जिस्म कि कदरदान थि ।
" अब अपने अंतिम वस्त्र कों निकालने औऱ हारने केँ लिए रेडी होँ जाओ। " श्वेता दि नें मुस्कुराते हुएकहा।
" देखते हैं। जब तक सांसतब तक आस। "
उसने कार्ड बांटे। इसबार मे जीता। मेरे कार्ड तोँ बहोत छोटे थें मगर उसके कार्ड मुझसे भि छोटे थें। मेरेपास छः, नौ औऱ ग़ुलाम थां जबकि उसकेपास छः, आठ औऱ दस थां। अबकी बारी श्वेता दि कों कपड़े उतारने कि थि।
" क्याँ उतारोगी ?" मे तौ चाहता थां कि वोँ अपने ब्रा निकाल दे ताकि मे उसके नंगे चुचियों कां दिदार कर सकूं।
मगर उसने अपना पेटीकोट उतारा। उसकी मोटी मोटी जांघें जोँ दुध केँ समान गोरी थि मेरे आंखों केँ सामने साक्षात थि। वोँ अब पैन्टी मे थि। पैन्टी उसकीचुत सें चिपका हुआ थां औऱ वोँ उसकेचुत केँ रस सें भीगी हुइ थि।
मे 'अहह ' भरकररह गय़ा।
" पत्ते बांटो। इसबार तोँ बचगए। मगरइस बार नहि छोडूंगी। "
मे इतना भि अहमक नहि थां। कुछकुछ समझ मे आँ रहा थां मगरसगे संबंधियों केँ सामने मतीकाम करनाभुल जाती हैं। मैंने पत्ते बांटे। धड़कते दिल सें पत्ते उठाया औऱ जैसे हि मैंने पत्तों पऱ नजर डाली मे खुश हौ गय़ा। मेरेपास ग़ुलाम, बेगम, बादशाह कां स्टेट सिक्वेंस थां।
श्वेता दि केँ पास स्प्रेड कां कलर थां। वोँ यहगेम हार गयीँ, थि। मे सोचरहा थां अब वोँ क्याँ करेंगी। अपनी ब्रा उतारेगी याँ अपनी पैंटी। जोँ भि उतारें मुझे तौ मज़ा हि आयेगा।
श्वेता दि नें मुझे अपने नशीली आंखों सें देखा औऱ अपनेजीभ कों अपने होंठों पर्र फिराया। मे उसके गुलाबी होंठ औऱ रसीली जीभ कों देखकर आहें भरतारह गय़ा। कितना मजा आएगाइन कों चुसने मे। एक् बार चुसने कों मिलजाए तोँ फिन कयामत तक चुसता रहुं।
वोँ मेरी आंखों मे देखते हुए अपनीहाथ पिछे कि तरफ लें गई औऱ ब्रा कों खोलकर नजाकत सें मेरीगोद मे फेंक दिया। औऱ अपने सीने कों अपने हाथों सें ढक लिया।
" यह ग़लत हैं। वहां सें अपनेहाथ हटाओ। " मैंने कहा।
" कपड़े उतारने कि शर्त थि वोँ तौ कि नाँ मैंने। "
" नहि। अपने जिस्म कों ढकनागेम केँ रूल मे नहि हैं। "
" नहि। मे नहि हटाउगी। "
" ठीक हैं तबगेम बंद करते हें। "
" तुम् एक् नम्बर केँ बदमाश होँ। नखरे करतेहुए उसने अपनेहाथ अपने वक्ष पर्र सें हटा लिये।
उसकी दुधिया कलर कि बड़ी बड़ी चुचिया नग्न हौ गई। उसकी चुची केँ निप्पल मध्यम आकार केँ थें। निप्पल कां areola सांवला रंग कां थां। उसकी चुची गोलाकार औऱ ठोस थि। शायद 38 D होगी।
मेरीनजर चुचियों पऱ सें हटती हि नहि थि। थोड़ी देरबाद मेरी नज़र चुचियों सें निचे कि तरफ गई तौ उसके नंगेकमर औऱ गहरी नाभि पर्र फ्रिज होँ गई। अगर वोँ नहि टोकती तौ मे घंटों उसके हसीन औऱ सेक्सी शरीर कों देखते हि रहता।
" कार्ड बांटो। " इसबार उसके आवाज़ मे कामुकता औऱ थोड़ी शरमाहटपन थि।
मैंने मन हि मनउपर वाले कों शुक्रिया दिया औऱ कार्ड बांटी।
अब हम् दोनों केँ जिस्म पऱ सिर्फ़ एक् एक् हि वस्त्र थां। वोँ केवल पैंटी मे थि औऱ मे मात्र जांघिया मे। हम् दोनों बैड पऱ थोड़ी सि हि फासले पर्र बैठे थें।
मैंने सहुलियत केँ लिए अपनेपैर थोडा फैला लिया थां। मे अपने पत्ते उठाते हुए उसकीतरफ देखा तोँ उसे मैंने अपने दोनों जांघों केँ बीच देखते हुए पाया। मैंने देखा मेरा लंड जांघिया कों फाड़कर बाहर् निकलने केँ लिए फड़फड़ा रहा थां।
उसने अपनी पलकें उपर कि ओर कि। हमारी नजरें मिली। दोनों कि आंखों मे वासना चरम पऱ थि। उसने मेरी आंखों मे देखते हुए बड़े हि इरोटिक ढंग सें कार्ड कों अपने पैन्टी केँ अन्दर किया औऱ उसे अपनेचुत सें रगड़कर बाहर् निकाला फिन सेक्सी आवाज़ मे बोलीं -
" इसबार मे हि जीतूंगी। अपने पत्ते दिखाओ। "
मेरा कलेजा मुंह पर्र आँ गय़ा। मुझे तोँ लगता थां कि बिनाकुछ किए मेरा लंड पानी फेंक देगा। मैंने भि अपने लंड कों जांघिया केँ उपर सें मसलते हुएकहा - " दिखारहा हूं जानेमन। पहले अपनी तोँ दिखाओ। "
उसने अपने पत्ते दिखाए। मेरी आंखें उन पत्तों कों देखकर फटी कि फटीरह गई। उसके पत्ते उसकेचुत केँ रस सें भीगी हुईँ थि। मे तोँ पागल सां होँ गय़ा।
मैंने उसके पत्ते उठाये औऱ उसकी आंखों मे देखते हुए पत्तों कों जीभ सें चाटने लगा। वोँ यह देखकर बहुत उत्तेजित हौ गई। मे उसके नमकीन पानी कों चाटकर पत्ते सें पुरीतरह साफकर दिया। फिन उसके पत्तों पऱ देखा।
उसकेपास बहोत हि अच्छा कार्ड आया थां। उसकेपास तीन बेगमआई थि। मे गेम हारने वाला थां। मुझे उसकीचुत कों देख नें कि लालसा धूमिल होतेहुए दिखाई देनेलगी।
" तुम्हारे कार्ड मे देखूंगी। " बोलकर उसने मेरे कार्ड उठालिए।
मे धड़कते दिल सें उसे देखा कि शायद मेरेपास उससे भि अच्छा कार्ड आँ जाय औऱ मे उसकीचुत कों देख सकूं।
उसने मुझे देखा औऱ निराशा भरे स्वर मे कहा - " तुम्हारी क़िस्मत आज अच्छी हैं। तुम् जीतगए। "
मे आश्चर्य औऱ खुशी सें मन हि मनझुम गय़ा। मुझेऐसा लगा जैसे मैंने करोड़ों रुपए कि लाटरी कि बमपर प्राइज जीतली होँ। मे मछली केँ आंख कि तरह उसके पैन्टी पर्र नजर टिका दि।
श्वेता दि नें बड़ी हि कामुकता पूर्वक अपनी उंगलियों कों अपने पैन्टी पऱ रखा औऱ आहिस्ता नीचे कि तरफ खिसकाने लगी। पैन्टी कों उतारकर मेरे मुंह पऱ फेंक दिया। मैंने जल्द सें उसे लपका औऱ उसकी नंगीचुत कों देखने कां प्रयास करनेलगा।
श्वेता दि फिन सें अपने सुखे होंठों पऱ जीभ फिराई औऱ मेरी नज़रों मे देखते हुए आंखों सें नीचे कि तरफ देखने कि इशारा करतेहुए अपनी दोनों टांगें फैला दि।
मेरीनजर उसकी दोनों टांगों केँ बीच पर्र गयीँ,।
मेरी आंखों केँ सामने उसकीचुत थि।
एक् दम चिकनी, डबल पावरोटी केँ समान फुली फुली, चुत केँ बीचों-बीच लम्बी दरार औऱ मोटे मोटेओंठ। उसके दरारों सें रिसता हुआ पानी जौ उसके जांघों तक आँ पहुँचा थां।
" कैसी हैं ?"
मेरा ध्यान उसके बोलने सें टुटा। मे वासना सें लथपथ उसकीतरफ सवालभरी नजरों सें देखते हुएकहा -" क। क्याँ ?"
" यह." - उसने अपनीचुत कि तरफ इशारा करतेहुए कहा।
" क्याँ यह ?" - मैंने उसे दिखाकर अपना लौड़ा मसलते हुएकहा।
वोँ थोड़ी सि मेरे तरफ़ घिसकी औऱ मेरे जांघों केँ उपर अपनेपैर रखतेहुए फुसफुसा कर बोलीं - " तुम्हारी बेहन कि चूत। "
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Update 9 B। Continue.
उसके लफ्ज़ सुनकर मेरे कानों सें धुआं निकलने लगा। मेरेबदन कां साराखून मेरे लंड पऱ पऱ एकत्रित होँ गय़ा। धड़कने तेज होँ गई। मे उसके आंखों मे देखते हुए अपनी जांघिया कों पकड़कर नीचे खिसका दिया। जांघिया केँ हटते हि लंड स्प्रिंग कि तरहउछल पड़ा।
श्वेता दि कि नजर मेरे लंड पऱ पड़ी। उसकी आंखें वहींफंस गई।
वोँ मेरा लंड देखरही थि औऱ मे उसकीचुत देखरहा थां।
" अद्भुत, अनुपम, अदि्वतीय, अव्वल " मे फुसफुसाया।
" क्याँ। "
" तेरी चूत। "
" शरम नहि आती हैं। "
" किसलिए। "
" अपनी बेहन कि चूत कि बड़ाई करतेहुए। "
" जब देखते हुए औऱ ' चूत ' बोलते हुए लज्जा नहि आती हैं तोँ बड़ाई करने मे शरम क्यूं आयेगी। "
" हमम "." मेरी कच्छी दो। "
" क्यूं। "
देखते नहि कितनी पानी छोड़रही हैं। " -उसने अपनी टांगें फैलाकर अपनेचुत मे ऊंगली डालकर चोदने लगी औऱ रस सें सराबोर अपनी ऊंगली मुझे दिखाते हुए बोलि।
मैंने तेजी सें अपना जांघिया निकाल फर्श पऱ फेंक दिया। हम् दोनों पुरीतरह मादरजात नंगें हौ गये थें।
हम् दोनों अपने अपने गुप्तांगों कों एक् दुसरे कों दिखाकर मसलने लगे।
" तुम्हारी कछी गन्दी हौ जाएगी। "- मे कभी उसकीचुत तौ कभी उसकीरस सें भरी हुइ ऊंगली कों देखते हुएकहा -" इससे अच्छा हैं मे चाटकर साफकर देता हूं। "
" मेरी चूत चाटकर साफ करोगे। "
" हमम। "
" कहीं तुम्हारे जीजा कों पताचल गय़ा तोँ। "
" क्याँ। "
" कि उनकी पत्नि कि चूत कों उसका छोटा भइयाचाट चाटकर साफ़ करता हैं। "
अब वोँ तेजी सें अपनीचुत कों उंगलियों सें चोदरही थि औऱ मे उसके सामने बैठामुठ मारेजा रहा थां।
" जीजा कों केसेपता चलेगा कि उसकी पत्नि अपने भइया सें अपनी चूत चुसवा रही हैं। जीजा कों केसेपता चलेगा कि उसकी पत्नि अपने भइया सें चोदवा रही हैं। "
' अच्छा चोदवा भि रही हैं " - वोँ सरककर मेरेगोद मे बैठ गई।
" हां " कहकर मैंने उसकी चूचियों कों दबोच लिया।
" उसेपता चल जाएगा। "
" केसे। "
वोँ मेरा लंड पकड़कर मसलते हुए बोलि -" चूत फट जायेगी। तुम्हारा लौड़ा बहोत बड़ा जौ हैं। "
मैंने उसकीचुत मे अपनी ऊंगली डाल दि औऱ ऊंगली सें चोदते हुएकहा -" चूत तोँ फटने केँ लिए हि होती हैं। लंड जितना बड़ा होगा चूत कों उतनी हि ज़्यादा मज़ा आयेगा। "
" अच्छा ! औऱ उसेपता नहि चल जाएगा कि उसकी पत्नि कि चूत अपने भइया केँ मोटे लंड सें चुदचुद कर ज़्यादा ढीली होँ गई हैं। " वोँ मेरे लंड कों मुठ मारते हुए बोलीं।
" उसे तोँ यह भि पता नहि चल पाएगा कि उसके होने वाले बच्चों कां बाप वोँ नहि बल्कि उसके बीबी कां भइया होगा.उसे यह भि पता नहि चलेगा कि उसकी पत्नि उसी केँ बगल मे लेटकर अपने भइया सें अपनी रसीली चुत कुटवायेगी। "
वोँ बहुत उत्तेजित होँ गई।
" अच्छा ?.तौ शुरुआत करो। "
" क्याँ। "
" चोदन पर्व। तभी नं बहनचोद बनोगे। "
" हां औऱ तुम्हारे होने वाले बच्चों कां मामाजी औऱ बाप। "
अब बर्दाश्त नहि हौ रहा थां। उसने मुझे धक्का दिया। मे खाट पऱ पीठ केँ बलगिर पड़ा। वोँ मुझ पर्र झुकी। अपनी मम्मों कों मेरे सीने पऱ रगड़ी औऱ अपने होंठ मेरे होंठों सें लगा दि।
मैंने उसे अपने बाहों मे कसकर दबोच लिया। वोँ अपने बाहों कों हार मेरेगले मे डालकर मुझ पर्र पसर गई। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां मेरे चौड़े सीने सें दब गई।
हम् दोनों कां गहरा चुम्बन शुरुआत हौ गय़ा थां। मे उसके निचले होंठ कों अपने होंठों मे दबाकर चूसने लगा। वोँ मेराउपर वाले होंठचुस रही थि। थोड़ी देरबाद उसने मेरे निचले होंठ कों अपने होंठों मे दबा लिया औऱ बुरीतरह चूसने लगी। मे उसकेऊपर वाले होंठ चूसने लगा।
मे उसकी चूचियों कों दबाना चाहता थां मगर वोँ मुझसे जोंक कि तरह चिपकी हुईँ थि अतः मैंने उसके बड़े बड़े गांड़ कों हाथों सें सहलाने औऱ मसलने लगा। क्याँ गांड़ थि उसकी। एक् दम बड़े बड़े औऱ मांस सें भरपूर। वोँ उत्तेजित होँ कर मेरे होंठों कों बुरीतरह चूसने लगी। हम् दोनों इतनी बुरीतरह एक् दूसरे कों चूमरहे थें कि ऐसालग रहा थां जैसे वोँ मेरे मुंह मे अपनी मुंह घुसाए जारही थि औऱ मे उसके मुंह मे। दोनों केँ थुकलार मिलकर एक् होँ गए थें। मै उसकेथूक अपनेगले सें निगलरहा थां औऱ वोँ मेरीथूक निगलरही थि।
हमारी सांसें फूलने लगी थि। उसने अपना मुंहउपर कियातब जाकर हमारी सांसें व्यवस्थित हुईँ। हम् दोनों एक्-दूसरे केँ आंखों मे देखते जारहे थें। मैंने उसकी आंखों मे देखते हुए अपनी ऊंगली उसके गांड़ केँ छेद मे डालकर कुरेदने लगा। उसकी आंखें वासना सें लाल होँ गई थि। उसने मेरी आंखों मे देखते हुए अपनी रसीली जीभ कों बाहर् निकाला तोँ मैंने भि अपनीजीभ निकाल ली। वोँ फिन मेरे होंठों पर्र झुकी औऱ अपनेजीभ सें मेरीजीभ कों लड़ाने लगी। एक्-दूसरे केँ जीभ सें कुछदेर खेलने केँ बाद वोँ मेरेजीभ कों अपने मुंह मे लेँ कर चूसने लगी। थोड़ी देरबाद मैंने उसेपलट कर अपने नीचे लिटा दिया औऱ मे उसकेऊपर चढ़ गय़ा औऱ उसकेचुत सें लंड कों रगड़ते हुए उसकीजीभ कों अपने मुंह मे लिया औऱ उसे चुसने लगा। मनकररहा थां उसकेजीभ कों चुसता रहुं चुसता रहुं औऱ चुसता हि रहुं। वोँ बेचैन हौ कर अपने हाथोंको बीच मे डालकर मेरे लंड कों पकड़ लिया औऱ उसेजोर जोर सें मरोड़ने लगी।
हम् दोनों एक् दूसरे केँ चुमाई चटाई सें थक हि नहि रहे थें। मे उसके दोनों चूचियों कों अपने हथेलियों मे भरकर दबाने लगा। उसकी चुची मे कुंवारी लड़कियों जैसी कड़ापन थां। लगभगआधे घंटे तक दोनों नें एक् दूसरे केँ जीभ औऱ होठों कों चूमा। चूसा। फिन मे धीरे धीरे नीचे कि ओर बढ़ने लगा औऱ उसके पुरे चुचियों कों दबादबा कर चूसने लगा काटने लगा।
" लगता हैं " वोँ दर्द सें कराही।
मगर मे तौ बावला हौ गय़ा थां। मैंने उसकी चूचियों कों हाथों सें दबोचते हुए निप्पल कों अपने मुंह मे लेँ कर चूसने लगा।
अबउसे मजाआने लगा।
वोँ अपनी सीने कों उठाकर निप्पल कों मुंह मे ठूंसते हुए कामुक हौ कर बोलीं -
" मेरे भैया कों भुखलगी हैं.दुधु पियेगा। अपनी दिदी कि मम्मों कां दूध पियेगा.। "
" Ssrrrruuuupppp.Ssssrrruuuuppp.qqquuuummm। ssrrrruuuupppp."- मे उसके निप्पल कों होंठों सें दबोच दबोचकर चुसने लगा।
" aaaahhhh.aaahhhhh.ooohhhh."- वोँ बस सिसकारियां भररही थि औऱ " अहह ' ' ओह'कररही थि। औऱ मेरे लंड कों पकड़कर मुठ मारने लगी। औऱ अपनी गांड़ उठाकर झटके पर्र झटके देतेहुए झर गई।
मे बदलबदल कर उसके दोनों निप्पलों कों चूसना शुरुकर दिया। बहुतदेर तक उनको चूसा। जब मे उसके चुचियों पर्र सें हटातब देखा कि उसकी पुरी चुचिया लाल हौ गई थि। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे कि तरफ जानेलगा। उसके नंगेपेट कों जीभ सें चाटते हुए उसकी नाभि पऱ आया। मैंने अपनेजीभ कां नोकबना कर उसके नाभि मे प्रवेश करा दिया। वोँ मेरेसर केँ बालों कों सहलाये जारही थि।
उसके नाभि कों गीला करने केँ बाद मे उसके उसकेचुत केँ ऊपरी हिस्से पऱ जीभ फिराने लगा।
थोड़ी देरबाद मे उठा औऱ उसके दोनों पांवों केँ बीचबैठ गय़ा। मैंने उसकीतरफ नजर फेराई। वोँ मुझे हि देखरही थि। मे मुस्कराया तौ वोँ भि मुस्कुरा दि। मे झुककर उसके मोटे मोटे जांघों पर्र अपने होंठरख दिए। उसकी जांघें भि उसकेचुत रस सें भीगी हुइ थि। मैंने उन्हें चाट लिया। अब मे तुरंत उसकेचुत केँ पास जानां चाहता थां।
मैंने जांघों कों चाटते चाटते उसके दोनों पैरों कों पकड़ा औऱ उसे विपरीत दिशा मे फैला दिया। उसकेडबल पावरोटी केँ समान फुली हुइ चुत मेरे आंखों केँ समकक्ष आँ गयीँ,। उसकीचुत उसके कामरस सें भीगी हुई थि। वोँ थोड़ी देर पहले झड़ी थि इसलिये उसकेचुत केँ संगसंग खाट भि गीली हौ गई थि। ताश केँ सारे पत्ते बिखरे पड़े थें। पत्ते मुड़ गई थि औऱ पलंग केँ केँ चारों तरफफैल गए थें। तभी मेरीनजर एक् स्थान रखेंताश केँ उन
तीन पत्तों पर्र पड़ी जोँ शायद मेरे थें औऱ जीतने कां कारणबने थें। वे पत्ते उस केँ गांड़ केँ नीचेदबे हुए थें। मैंने उन पत्तों कों उसके गांड़ केँ नीचे सें निकाला तौ देखाउन पत्तों मे एक् स्प्रेड कां छः, एक् डायमंड कां गुलाम औऱ एक् हार्ट कां सातआया थां। मे आश्चर्यचकित होँ गय़ा। लास्ट गेम मे नहि श्वेता दि जीती थि औऱ उसनेकहा थां कि मे जीता हूं। उसने मुझेझुठ बोला थां। वोँ मेरे सामने नंगी होना चाहती थि।
मैंने उन पत्तों कों उठाया औऱ श्वेता दि कों वहीं सें दिखाया। श्वेता दि उन पत्तों कों देखकर मुस्कराई। मेरेदिल मे उसकेलिए बहोत प्रेम आया। मैंने झुककर उनके होंठों कों चुम लिया। मे वापस उनके पैरों केँ बीच बैठा औऱ उनके पांवों कों उठाकर उनके सीने पऱ कर दिया जिससे उनकीचुत फैल गई। मैंने उनकीचुत कों जीभर केँ देखाफिन अपने होंठों कों चुत सें सटा दिया।
मैंने सबसे पहलेचुत केँ मोटेओंठ पऱ अपनीजीभ फिराई फिनउन कों अपने होंठों सें भरकर चूसने लगा। वोँ दुबारा गर्म हौ गई थि। चुतरस सें भींगने लगा थां। वोँ अपनाकाम रस छोड़ने लगी थि जिसे मे चुसचुस करपीरहा थां। मैंने अपनी ऊंगली चुत केँ छेद मे डाल दिया औऱ भगनासे कों होंठों सें दबाकर चुसने लगा। वोँ हायअरे करउठी। अपनेकमर उठाकर मेरे मुंह पऱ फेंकने लगी। उसकीचुत मे पानी कां सैलाब आँ गय़ा। मे उस पानी कां एक् कतरा भि जाया नहि होने देना चाहता थां। मैंने अपने होंठ कों उसकेचुत सें चिपका कर उसकेछेद मे अपनीजीभ डाल दिया। वोँ मलाई छोडती रही औऱ मे उसेचाट चाटकर गले सें निगलता रहा।
श्वेता दि कि उत्तेजना चरम पऱ थि। वोँ मेरे बालों कों कसकर पकड़ली औऱ अपनीचुत कि तरफ खिंचने लगी। ऐसी प्रतित हौ रहा थां जैसे वोँ मुझे अपने बुर मे हि घुसेड़ लेगी। औऱ मे रेडी थां उनकेचुत मे घुसने केँ लिए। मुझे उनकेचुत कि गंध नें पागल सां कर दिया थां। अपनेनाक सें चुत कि गंध कों सुंघते हुए तेजी सें छेद केँ अंदरजीभ कों डालने लगा औऱ निकालने लगा। वोँ अपने गांड़ कों उपर कि तरफ धकेलती हुई बोलि -
" म.मेरा निकलने वाला हैं। "
मे चुत कों चाटते चाटते हि बोला - " निकलने दोमगर सभी मेरे मुंह केँ अंदर हि छोड़ना। सारी मलाई पीनी हैं मुझे। "
वोँ पूर्ववत अपने गांड़ उछालते हुए बोलि -" मुझे भि पीना हैं। "
मैंने उसकेचुत सें मुंहउपर करतेहुए बोला -" तुम् केसे पियोगी। "
वोँ मुझे धकेलते हुए बोलि -" बेवकूफ मे इसकीबात कररही हूं "- बोलकर मेरे लंड कों पकड़ लिया।
वोँ मेरा लंड केँ पानी केँ लिएबोल रही थि। मे उसकेऊपर सें उठा औऱ पलंग पऱ लेट गय़ा औऱ उसे मेरेउपर आने कां इशारा किया। वोँ मेरेसिर कि तरफ अपनीपैर करके मेरेउपर लेट गई। हम् 69 पोजीशन मे आँ गये थें।
वोँ मेरे लंड कों हाथों सें पकड़ते हुए बोलि -" कितना लम्बा हैं। मोटा भि बहोत हैं। "
" क्यूं जीजू कां नहि हैं ?"
" हैं पऱ इतना ज़्यादा नहि। "
" तुम्हे कैसालगा। "
" वोँ तौ तुमसे पहले हि बोल चुकी हूं। बहोत खूबसूरत। "
" क्यूं नहि होगा। आखिर हैं किसका। " मैंने मजाक किया।
" मेरे छोटे भइया कां जौ अब मेरा भतारबन गय़ा हैं। " बोलकर मेरे लंड केँ सूपाडे पऱ अपनीजीभ लड़ाने लगी। मैंने भि उसके पांवों कों अलगकर केँ उसकेचुत पर्र अपना मुंहरख दिया। धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने लंड कों अपने मुंह मे डालने कां प्रयास किया। थोड़ी दिक्कत हुई मगर अंततः उसे अपने मुंह मे लें हि ली औऱ चुसने लगी। कभी सुपाड़ा केँ छिद्र पऱ जीभ रगडती कभी मुंहउपर नीचे करके पुरे लंड कों चूसने लगती।
मे उत्तेजित तौ पहले सें हि थां अबऐसा लगरहा थां कि मे एक् दो मिनट मे हि झड़ जाऊंगा। मे अपनेकमर उठाउठा कर लंड कों उसके मुंह मे पेलने लगा। संग हि उसकेचुत केँ भि चूमता चाटता रहा। बड़ी मुश्किल सें पांच मिनट तक कन्ट्रोल किया।
" मेरा होने वाला हैं "- मैंने चुत सें मुंहहटा कर बोला।
" मेरा भि "- वोँ जोरजोर सें लंड चूसती हुइ बोलि।
मे वापस अपने मुंह उसकेचुत सें सटा दिया। तभी मेरे लंड नें जोर कि पिचकारी मारी औऱ उसके मुंह मे झड़ने लगा। उसीसमय उसने भि अपनेचुत सें अमृतरस कि बौछार शुरुआत कर दि। उसकेचुत कि मलाई मेरेगले सें होतेहुए पेट मे जानेलगी। वोँ झड़ती रही औऱ मे पीतारहा उसीतरह मे झड़ता रहा औऱ वोँ पीती रहीं। दोनों कां जबरदस्त इजेकुलेशन हुआ थां। झड़ने केँ बाद बहुतदेर तक हम् वैसे हि पड़ेरहे।
कुछदेर बाद वोँ उठी औऱ बाथरूम चली गई। उसकेआने केँ बाद मे बाथरूम गय़ा औऱ फ्रेश होकर बाहर् आया। वोँ नंगे जिस्म पलंग पऱ लेटी थि। रूम कि लाइट पहले कि हि तरहजल रही थि। मे जाकर उसकेबगल मे लेट गय़ा। फिन मैंने करवटली औऱ उसे अपने बाहों मे भर लिया। वोँ मुझ सें लिपट गई।
मेरे होंठों पर्र एक् चुम्बन देकर बोलीं -" इतना आनंद मुझेआज तक नहि आया थां। "
" जीजू केँ संग भि नहि। " मैंने उसकी मम्मों कों सहलाते हुएकहा।
" नहि। " कहकर उसने थोड़ी स्थान बनाई जिससे मे उसके चुचियों कों प्रेम कर पाता।
" इसकीवजह बताऊं। "
" हमम। "
" हम् दोनों भइया बेहन हें नाँ इसलिये। सगे संबंधियों मे सेक्स करने सें उत्तेजना ज्यादा आती हैं। "
" हम्मम.सच मे मे इतनी उत्तेजित कभी नहि हुई थि औऱ अपनी जीवन मे इतने गन्दे शब्दकभी नहि बोले हें। मगर तुम्हारे संग नं जाने केसेयह सभी बोलती गई,। उनकेसंग तौ कभी भि नहि बोलि। "
" ऐसा हि होता हैं गुल जिस्म। अपने भइया सें चोदवाओगी तौ इससे भि अधिक गन्दे शब्द निकलेंगें "- बोलकर मैंने उसकीचुत कों हथेलियों सें मसल दिया।
वोँ मेरे लंड कों पकड़कर सहलाने लगी औऱ बोलीं -"मगर तुम्हें मेरीशपथ जोँ इसके बारे मे किसी कों कहा तोँ। "
" पागल हूं जौ यहसभी किसी सें कहुंगा। औऱ कहुंगा भि क्याँ कि मे अपनी दिदी कों चोदता हूं। क्याँ तुम् किसी सें कहोगी मेरा भइया मुझेरोज पुरी नंगीकर केँ मेरी चूत मे अपना मोटा लौड़ा डालकर चोदता हैं। "
वोँ लंड कों जोरजोर सें मुठ मारते हुए उत्तेजित होँ कर बोलीं -" कितनी गंदीबात करते हें नां हम्। "
मैंने उसकेचुत केँ दरारों मे ऊंगली डालते हुएकहा -" मे नहि तुम्। "
" गन्दे भइया कि गन्दी बेहन। " वोँ मेरेबदन पऱ चढ़ गयीँ,।
उसके पुरे जिस्म कों सहलाते हुएकहा -" गन्दे भइया कि सबसे प्यारी चहेती बेहन। "
हम् दोनों उत्तेजित होँ गये थें। एक् दुसरे केँ जिस्म कों सहलाते दबाते गुत्थम गुत्थी हुएऊपर नीचे होनेलगे। मैंने उसेपेट केँ बल लिटा दिया औऱ उसके पांवों कों पकड़कर उसकीकमर उपरउठा दि। वोँ चौपाया जानवर कि तरह अपनी गांड़ कों उठा दि। उसके गांड़ कों चूमता चाटता हुआ मैंने अपनीजीभ उसके गांड़ केँ छेद मे डाल दि औऱ उसेजीभ सें चाटने लगा। वोँ सिहर गई औऱ अपनी गांड़ मेरे मुंह पऱ पटकने लगी। गांड़ कों चाटते चाटते उसकीचुत कों मुंह मे भर लिया औऱ उससे टपकते रसों कों पीनेलगा। वोँ बेचैन होँ कर बोलीं -
" क.करो। बर्दाश्त नहि होँ रहा हैं। "
मैंने उसेपीठ केँ बल लिटा दिया औऱ उसकेउपर चढ़ गय़ा। मैंने लंड कों उसकेचुत सें रगड़ते हुएकहा -" क्याँ करूं। "
" साले कमीने अपनी दिदी केँ चूत केँ छेद मे लंड लगा केँ बोलता हैं क्याँ करूं। चोद मुझे बेहनचोद। "
मैंने उत्तेजित हौ कर धक्का दिया। लंड कां सुपारा उसकेचुत मे घुस गय़ा। वोँ दर्द सें कराही।
" धीरे-धीरे सें कर नाँ। "
" अब धीरे-धीरे सें नहीं तेरी चूत कों जोरजोर सें चोदूंगा मेरीजान। " कहकर मैंने जोर कां धक्का दिया औऱ आधा लंड उसकेचुत मे समा गय़ा।
वोँ जोर सें चिल्लाई।
" धीरे-धीरे सें नहींकर सकता हैं। " वोँ कराहती हुइ बोलीं।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पऱ रखकर एक् औऱ प्रहार किया। लंड उसकीचुत मे पुरीतरह सें घुस गय़ा। उसकेआंख केँ कोने सें आंसूछलक पड़े। मे थोड़ी देर वैसे हि पड़ारहा। फिनकुछ देरबाद उसके चुचियों कों प्रेम सें दबाया फिन उसके निप्पल कों मुंह मे लेँ कर चूसने लगा। थोड़ी देर मे वोँ नोर्मल हुई। मैंने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरुआत कर दिया। उसकी दर्दअब कम हौ गई, थि। उसकीचुत अब गीली होनेलगी थि। थोड़ी देर मे हि उसने अपने कुल्हे उठाने लगी।
मैंने धक्के तेजकर दिए। वोँ भि नीचे सें ऊपर कि ओर अपनीचुत कों ढकेलने लगी। मेरा लंड उसकेचुत मे तेजी सें घुसने औऱ निकलने लगा। चोदाई फुल स्पीड मे चालु होँ गई थि। हम् दोनों ताल सें ताल मिलाकर कमरउपर नीचेकर रहे थें। उसकीचुत बहुत गीली हौ गई थि। जिससे ' फच ' ' फच ' कि आवाज़ आनेलगी। मे उसके होंठों कों चूसने लगा। उसने अपनीजीभ मेरे मुंह मे डाल दि। मे उसकेजीभ कों चुसते हुएकमर उठाउठा कर धक्के मारने लगा। वोँ अपने पांवों कों मेरेकमर सें लिपटा कर मेरे गांड़ कों अपने हाथों सें दबाने लगी।
दोनों सेक्सी भरी आवाज़ निकालते हुए घमासान चुदाई मे लगेहुए थें। उसकीचुत कि गर्मी सें मुझे लगता नहि थां कि अब मे अधिकदेर तक टिक पाऊंगा।
चोदाई केँ दौरान उसने मुझे नीचेपलट दिया औऱ वोँ मेरेउपर आँ गयीँ,। अब मे नीचे थां औऱ वोँ उपर। वोँ उछलउछल कर मुझे चोदने लगी औऱ मे नीचे सें ऊपर कि तरफ धक्का मारने लगा। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां जोरों सें हीलरही थि।
" हाय। कितना मजा आँ रहा हैं बेहन कों चोदते हुए। "
" कुछकहो मत " - वोँ अपनी गांड़ जोरजोर सें पटकते हुए बोलीं - " अब हम् नहि मात्र उन्हें बात करनेदो। "
मैंने उसेपलट कर अपने नीचे किया औऱ उसकीचुत मे तेजी सें धक्का देतेहुए कहा -" किन्हें बात करनेदो। "
" उन्हें " - वोँ नीचे कि तरफ इशारा करतेहुए बोलि -" फचफच कि आवाज़ नहि सुनरहे होँ। "
हम् दोनों केँ घमासान चुदाई सें जौ ' फच ' ' फच ' कि आवाज़ आँ रही थि वोँ उसकीबात कररही थि।
" सहीकह रही हौ। अब केवल तुम्हारी चूत औऱ मेरी लंड कों बात करनेदो। "
लगभगपौन घंटे कि चुदाई केँ बाद वोँ हांफते हुए बोलि -" मे झडने वाली हूं। "
" मे भि। दोनों एक् संग झडते हैं। "
अचानक उसका जिस्म अकड़ा औऱ वोँ झटकेदे देकर अपनी गर्म पानी मेरे लंड पर्र छोड़ने लगी। उसकी गर्मी सें मे भि बच नाँ सका। मे भि अपना वीर्य उसकेचुत मे तेजी सें छोड़ने लगा। ज्योंहि मेरे विर्य कों उसने अपने अन्दर महसूस किया वोँ मेरे होंठों कों अपने होंठों सें दबाकर चूसने लगी। दोनों नें बहुत पानी फेंका थां। हम् एक्-दूसरे सें जोंक कि तरह लिपटें हुए बहुतदेर तक पड़ेरहे।
हमारा चोदन पर्व अपनी पराकाष्ठा पऱ पहुंच करशेष हुआ।
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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