मम्मी औऱ खेत – New Episode
मे खिड़की केँ पिछेचुप देखरहा थां मगर मुझेपता नहि थां कि माँ नें देख लिया हैं। अब माँ बाल्टी सें पानी निकाल केँ अपने जिस्म पर्र डालने लगती हें मगर मम्मी नें अपने कपड़े नहि उतारे ते वो कपड़े केँ उपर सें हि अपने आप् कों गिलाकर रही थि।
मम्मी(मन मे): तुम्हे क्याँ लगा कि मे कपड़े उतार केँ नहाऊंगी तेरे सामने।
मे माँ कों देखता हु कि वो मन हि मन मुस्कुरा रही थि औऱ अपने जिस्म पऱ पानीडाल रही थि। मे तौ ये देख्ना चाहरहा थां कि मम्मी कब अपनी चूत कों साफ करेंगी उस दाढ़ी बनाने वाली सेविंग सें।
मे(मन मे): मम्मी अपनी झांटों केँ बलसाफ करो नाँ तुम्हारा बेटा देखने कों चाहरहा हैं माँ माँ।
मम्मी अपनी साड़ी केँ ऊपर सें पानीडाल रही थि औऱ साड़ी केँ ऊपर सें हि अपनीबदन कों मलरही थि। माँ पानी सें भींगी हुईँ औऱ ऊपर सें उनके चूतड़ कां गोलआकर दिखरहा थां औऱ उनकी मम्मों जौ ब्लाउज केँ अंदर थि उसका भि शेपदिख रहा थां।
मम्मी(मन मे): क्याँ करूं इसके सामने नन्गी हौ जाऊ क्याँ मे कैसी मम्मी हु जोँ अपने बेटे केँ सामने नन्गी होने कों सोचरही हु।
माँ(कां मन): हौ जा संगीता तु भि तौ ये करना चाहती हैं औऱ तुने औऱ बबीता नें मिलकर कहा हैं कि अपने बेटे सें प्रेम करने मे क्याँ गलत हैं।
माँ(मन मे): नहि उस वक्त तौ मैंने ऐसे हि बोल दि थि मगरअब करने मे डरलगरहा हैं।
मे मम्मी कों देखता हु कि वो मुझेपीठ दिखा केँ चुपचाप बैठी थि मम्मी अब अपनेबदन पर्र पानी भि नहि डालरही थि।
मे(मन मे): क्याँ कररही हैं माँ मुझे तौ कुछ अंदाजा भि नहि लगरहा हें।
माँ(कां दिमाग़): उस वक्त तोँ तु बबीता कों बहोत ज्ञान पेलरही थि अब क्याँ हुआ अपनेसमय पर्र बता।
मम्मी(मन मे): उससमय तौ मैंने जोश मे बोल दि थि।
माँ(कां दिमाग़): तु भि प्यासी हैं औऱ आज तौ तुने अपने बेटे कां लंड भि देख लिया थां उसके पेंट मे जौ तम्बू बनाहुआ थां औऱ तोँ औऱ तेरे पति सें तोँ बड़ा हि हैं उसका लंड।
मम्मी(मन मे): हापता हैं मेरे पति सें बड़ा हैं उसका औजारमगर।
माँ(कां दिमाग़): मगरवगर कुछ नहि आजतुकर केँ दिखा अपने बेटे कों जौ तेरेमन मे हैं।
मे अभि भि यही खिड़की केँ पीछे खड़ा हौ केँ देखरहा थां औऱ अभि भि वैसे हि बैठी थि औऱ जग केँ पानी मे अपनाहाथ डाले हुई थि। औऱ कभीकभी माँ अपनाशर हिलारही थि मगर मुझेपता नहि थां क्यूं हिलारही हैं।
माँ(मन मे): सही हैं जब मुझे बबिता कों बताने मे लज्जा नहि आई तोँ मुझे करने मे कैसी लज्जा।
माँ(कां दिमाग़): हाअबसही फैसला लिया हैं।
मे अब मम्मी कों उठतेहुए देखता हु औऱ मम्मी अपनी साड़ी खोलने लगती हैं।
मे(मन मे): मम्मी आजअपन पुरी नन्गी हौ जाओ मे अपको पुरा नन्गा देख्ना चाहता हु।
मम्मी(मन मे): बेटा तुआज अपनी मम्मी कों नन्गी देख केँ अपना हथियार खड़ाकर औऱ तेरी मम्मी तेरी अपनीबदन दिखायह गी।
मम्मी(कां दिमाग़): आजतुलाज लज्जा छोड़दे संगीता आज नन्गी हौ केँ दिखा अपने बेटे कों औऱ एक् कपड़ा भि नहि रहना चाहिए तेरेबदन पऱ।
माँ अब साड़ी उतार केँ रस्सी पर्र रख देती हैं औऱ वो अब पेटिकोट औऱ ब्लाउज मे होँ जाती हैं मे यहदेख केँ अपना लंड निकाल केँ अपने हाथों सें आगे पीछे मरने लगताहु औऱ मेरीदिल कि धड़कने तेज होने लगती हैं।
मम्मी येसभी बहोत धीरे-धीरे धीरे-धीरे कररही थि जब मम्मी पेटीकोट मे थि तोँ ये औऱ अपनेऊपर पानीडाल रही थि औऱ मे उनके पेटिकोट केँ अन्दर कच्छी कां छापदेख रहा थां जोँ गीले होने केँ कारणउभर आया थां। थोड़ी देरबाद मम्मी पेटिकोट उठा केँ अपनी कच्छी उतारने लगती हैं। औऱ मे येदेख केँ मेरीदिल कि धड़कने औऱ तेज होने लगती हें जब माँ कच्छी उतार देती हैं तोँ वो वहीरख देती हैं।
अब माँ कां पेटिकोट मम्मी केँ चूतड़ों मे घुसाहुआ थां औऱ चूतड़ कां साइजअब औऱ निखरकर आँ रहा थां मेरामन कररहा थां कि अभि माँ केँ पास जाके उनके चूतड़ों कों चाटने लागू औऱ अपनीनाक घुसा केँ चूतड़ कों सुंघने लागु। अब देखता हु कि मम्मी अपनी एक् टांगउठा केँ नल पऱ रख देती हैं औऱ अपने हाथों मे साबुन रगड़ती हैं औऱ साबुन केँ झाग कों अपनीचुत पर्र लगा देती हैं औऱ दाढ़ी बनाने वाली सें अपनीझाट केँ बालसाफ करने लगती हैं। मगर मुझेसही सें दिख नहि रही थि मम्मी कि चुत क्योंकी पेटिकोट चुत कों ढकदेरहा थां।
माँ(मन मे): मेरी चूत देख्ना चाहरहा हें मगर मे तुम को नहि दिखाऊंगी अभि बेटा थोड़ी सबरकर।
माँ अबपीठ मेरीतरफ कर केँ खड़ी होके अपनीझाट बनाने लगती हें। कुछदेर बाद माँ अपनीचुत साफकर केँ अपनीचुत पऱ पानी मारने लगती हैं।
माँ(कां दिमाग़): तु तोँ नन्गी होने वाली थि क्याँ कररही हैं।
माँ (मन मे): रुको तोँ सही अभि रात होने हि वाली हैं तब नन्गी होऊंगी।
मे अभि भि मम्मी कों देख अपना लंड हिलाए जारहा थां। थोड़ी देर मे रात होती हैं तब मम्मी अपनी ब्लाउज कों खोलती हें औऱ अपनी ब्रा कि हुक कों खोल केँ नीचे गिरा देती हें।
मे(मन मे): माँ रात होने कां प्रतीक्षा कररही थि क्याँ।
देखते देखते माँ अब मेरे नजरों केँ सामने पुरी नन्गी होँ जाती हैं औऱ उनका पेटिकोट भि उनके नीचे गिराहुआ थां।
मे यहदेख मेरा लंड औऱ टाइट होनेलगा थां औऱ मे जल्दी सें अपना पैंट उतार देताहु औऱ मे भि नन्गा होँ जाताहु औऱ अपनेहाथ कि रफ्तार कों तेजकर देताहु। मम्मी अपनेबदन पर्र साबुन लगारही थि औऱ अपनेबदन कों मलरही थि।
मम्मी साबुन लगारही थि तौ वो अपने जिस्म केँ हर एक् अंग कों अपने हाथों सें आराम आहिस्ता साबुन कों रगड़रही थि औऱ अपनी चूचियों कों दबा भि रही थि। अब माँ अपनेऊपर पानीडाल ती हें औऱ जोँ साबुन लगा थां मम्मी केँ बदन सें हट जाता हैं औऱ मम्मी कां दूधिया शरीर इतनीरात मे चमकने लगता हैं।
मे( मन मे): मम्मी देख्ना तुम्हारे बेटे कां लंड तुम्हें देखकर केसे खड़ा हैं औऱ आपको बुलारहा हैं aaaaaahhhh sssssssshhhh।
माँ(मन मे): ये कमीनी मेरी चूत इसे हमेशा पेशाब करने कों चाहिए होता हैं जब भि नहाने आतीहु।
फिन माँ वहीबैठ जाती हें औऱ अपनी प्यारी सि चूत सें पानी केँ फव्वारे निकलना शुरुआत कर देती हैं। जब मे मम्मी मुत्ते देखता हु तौ मेरीबदन मे एक् अलग हि एहसास होता हैं औऱ मेरा लंड झड़ने कों रेडी होँ जाता हैं औऱ मेराबदन पूरी तरीके सें टाइट होँ जाता हैं जब मे झड़ने वाला होताहु।
मम्मी(मन मे): देख लें बेटा आज अपनी मम्मी कों पेशाब करतेहुए केसे तेरी मम्मी नन्गी बैठकर पेशाब कररही हैं तेरे सामने।
माँ जब पेशाब कररही थि तौ उसमें सें सिटी कि आवाज़ आँ रही थि मगर मेरे कानों तक नहि पहुंच पारही थि वो सिटी कि आवाज़। अब मे झड़ जाताहु औऱ मेरे लंड सें निकाला मालवही उसीरूम केँ फर्श पऱ गिरा देताहु।
मे(मन मे): माँ जौ अपने अपनी चूत सें जौ पानी निकाला हैं वो आपके बेटे केँ लिए एक् अमृत समान हैं मेरामन कररहा हैं अभि आपकी चूत आकरचाट लु जौ भि पेशाब कि पानी कि बूंदे बची होगीसभी चाट केँ साफकर दु।
माँ पेशाब कर केँ उठ जाती हैं औऱ अपनी चूत पऱ जग सें पानी गिरने लगती हैं औऱ साफ करती हैं। फिनबाद मे तोलिया सें अपनेबदन कों पोंछती हैं औऱ अपने बालों कों झट कारती हैं। माँ जब तौलिया सें अपने बालों कों झटकार रही थि तब माँ कि चूचियां ऊपर नीचे हौ रही थि। मेराये देख लंड फिन सें खड़ा होनेलगा थां मम्मी कि चूचियां एक् दम टाइट थि औऱ जबयेऊपर नीचे होँ रही थि मेरामन कररहा थां कि उन चूचियों केँ बीच अपना मुंहरख दो औऱ मम्मी अपनी चूचियों सें मेरे मुंह पऱ मारेजब येऊपर नीचे होँ रही होँ तब।
फिन जब मेरीनजर मम्मी कि चूतड़ पढ़ती हैं तौ जौ मेरा लंड अभि सही सें खड़ा भि नहि थां तोँ वो अब चूतड़ कों हिलता देखफन फना केँ खड़ा होने लगता हैं। मम्मी चूतड़ भि हिलरहे थें औऱ ऊपर नीचे होँ रहते थें औऱ जोँ कुछ पानी कि बूंदे चूतड़ों पऱ थि वो भि टपकटपक केँ नीचेगिर रही थि। अबजब माँ अपनेबाल सुखा लेती हैं तोँ ये रस्सी पर्र रखी पेटिकोट कों उठाकर पहने लगती हैं औऱ पेटिकोट कों अपनी चुचियों तक लाकर बांध देती हें औऱ जोँ मैंने मम्मी कि कच्छी रस्सी पर्र रखी थि पाउडर लगा केँ मम्मी उसे लेँ लेती हैं औऱ यहां सें निकल केँ अपनेरूम मे आजाती हैं।
मे(मन मे): अब मज़ा आएगाजब मम्मी वो कच्छी पहनेगी तोँ मे भि देखूंगा उस पाउडर कां कमाल।
मे यहां सें निकल जाताहु औऱ अपनेरूम मे आकरलेट केँ सोचने लगताहु।
मे(मन मे): क्याँ माँ मुझे बुलाएगी कि आकर मुझेचोद दे जैसे बबीता आंटी कों कहरही थि याँ फिन गाजर औऱ मूली सें काम चलाएगी।
इधर मम्मी अपनेरूम मे आकर कपड़े पहने लगती हैं औऱ माँ नें अपनेरूम कां दरवाजा खुला छोड़रखा थां ताकि मे आकरदेख सकूमगर मे तोँ अपनेरूम मे थां।
माँ(मन मे): जरा पीछे मुड़कर केँ तोँ देखो कहीं दरवाजे सें देखा तौ नहि रहा मेरे कों।
मगर मे वहां नहि थां तौ मे माँ कों नहि देखता हु।
मम्मी(मन मे): चलोकोई नहि अभि नहि आया तोँ क्याँ बाद मे दिखा दूंगी।
अबये कच्छी पहन लेती हैं जिस मे मैने पाउडर लगाया थां औऱ उसकेबाद साड़ी पहन केँ बाहर् आती हैं औऱ मेरे कों खानां खाने केँ लिए आवाज़ लगती हैं।
माँ: रोहित आजा खानां खाल लेँ।
मे: आया माँ।
मे अपनेरूम सें निकल केँ घऱ केँ आंगन मे आकरबैठ जाता हूं औऱ मम्मी भि खानां लेके आँ जाती हैं औऱ वो भि मेरेसंग बैठकर खानां खाने लगती हैं। औऱ माँ अपना साड़ी कां पल्लू नीचे गिरा देती हैं औऱ कहती हैं। औऱ मेरीनजर मम्मी कि चूचियों पर्र पड़ती हैं जोँ ब्लाउज केँ अंदरकैद थें औऱ मम्मी कि चूचियों कि दरार(क्लीवेज)मेरे कों पागलकर रही थि।
मम्मी: आज बहोत गर्मी हैं न् बेटा।
मे: हा माँ आज बहोत गर्मी हैं देखोये पंखा भि हवासही सें नहि करपारहा हैं।
मम्मी: मे तोँ अभि नहाकर आईहु तोँ भि इतनी गर्मी लगरही हैं।
मे(मन मे): लगता हैं पाउडर नें अपना कमाल करना शुरुआत कर दिया हैं।
मगर अभि माँ मुझे सें मजे लें रही थि अभि पाउडर नें अपना कमाल करना शुरुआत नहि करा थां।
मे: गर्मी इतनी हैं माँ कि नहाने कां कोई फायदा नहि हौ रहा हैं।
मम्मी(मन मे): औऱ जोँ तु अपनी मम्मी कों देखरहा थां नहाते वक़्त उसका क्याँ बेटा।
मम्मी: हासही कहरहा हैं।
तभीघऱ केँ दरवाजे पर्र कोईआता हैं औऱ दरवाजा बजने लगता हैं।
मम्मी: इस वक्तकौन आगया।
मे: आप् खाओ माँ मे देखता हु।
मम्मी: हाजाजरा देखकौन आया हें।
मे घऱ कां दरवाजा खोलता हु तौ देखता हु बबिता आंटीआई होती हैं।
बबीता: तेरी माँ कहा हैं रोहित।
बबीता आंटीकुछ ज़्यादा हि जल्द मे थि तोँ वो घऱ केँ अंदर आँ जाति हैं।
बबीता: संगीता तेरेखेत कि फसल पूरे जंगली सूअर बर्बाद कररहे हें।
माँ: क्याँ कहरही हैं तु।
बबीता: हा तुम् दोनों जल्दजाओ औऱ उनसुर कों भगाओ नहि तौ तुम्हारी फसल बर्बाद कर देंगे वो।
माँ अपना खानां जल्द सें खा लेती हैं औऱ मे तौ पहले हि खा लिया थां।
मे: चलो मम्मी जल्द नहि तौ फसल बर्बाद हि जाएगा।
बबीता: हाचल।
माँ खानां खा केँ चलने केँ लिए सजधजकर होँ जाती हैं। औऱ हम् तीनों घऱ सें निकल जाते हें औऱ घऱ कां दरवाजा बंद करके तालालगा देते हें।
बबीता: वो तोँ अच्छा हुआ कि मेरा बेटा उधर हि घूमने गय़ा थां उसने देखा कि तुम्हारी खेत कि फसल बर्बाद कररहे हें तौ आकर मुझे बताया तौ मे तुम्हें बताने आँ गई।
माँ: जंगली जानवरों कां कुछ करना पड़ेगा बबीता क्याँ करेंऐसी हमारी फसल पहले कि थि वो भि ऐसी बर्बाद कर दिया थां।
बबीता: सुन संगीता कुछ कहना हैं तेरे सें।
माँ: हाबोल।
बबीता: बेटा तु थोडा आगेचला जा हम् दोनों कुछ पर्सनल बात करनी हैं।
मे: जी आंटी।
मे थोडा आगे आँ जाताहु औऱ वो दोनों वहीं खड़े होकरकुछ बातें करने लगती हैं।
मम्मी: बोलअब।
बबीता(शरमा केँ): आज मेरी सुहागरात।
मम्मी(तेज आवाज़ मे): क्याँ।
बबीता (चुप करतेहुए): धीरे-धीरे बोल।
माँ: येकबहुआ।
बबीता: आज हि जौ तुने बताया मैंने कर दिया।
मम्मी: तु तोँ बड़ीतेज निकली बबीता उससमय केसे शरमारही थि औऱ घबरा भि रही थि औऱ येसभी करने केँ लिएअब देखो रेडी हैं।
बबीता: हातु कहां तक पहुंची अभि।
मम्मी: मेरी भाग्य कहां तेरी जैसी।
बबीता: क्याँ हुआ।
मम्मी: कुछ भि नहि हुआ हमारे बीचमगर मे अपनीतरफ सें कररही हु।
बबीता: सही हैं लगीरह अपनीतरफ सें।
मम्मी: केसे जाएगी अपने बेटे केँ पास एकदमनई दुल्हन बनके।
बबीता: हा मैंने तौ आज अपने चूत केँ बाल भि साफकर लिया हैं एकदम चिकना कर दिया हैं।
माँ: औऱ तु मुझे छिनार कहरही थि।
बबीता(हंसते हुए): वोँ तौ ऐसे हि कहरही थि।
मम्मी: ह्म्म पता हैं।
बबीता: चल मे चलतीहु तेरे जीजाजी प्रतीक्षा कररहे होंगे।
माँ: क्याँ बात हैं बबीता "तेरे जीजाजी"।
बबीता(शरमा केँ): ह्म्म औऱ नहि तोँ क्याँ अब सें मेरा बेटा तेरे जीजाजी।
माँ(मम्मी मेरीतरफ इशारा कर केँ): अच्छा जी औऱ जौ वहां खड़ा हैं वो तेरा क्याँ हैं।
बबिता(मस्ती मे): वो मेरे जीजाजी हैं।
मम्मी: ह्म्म्म।
बबीता: चलतीहु मे अब।
माँ: ठीक हैं जा तेरी सुहागरात कि बहोत-बहोत बधाइयां।
बबीता आंटी वहां सें चली जाती हैं औऱ मम्मी औऱ मे खेत केँ लिए निकल जाते हैं। हम् दोनों पैदल हि चलरहे थें औऱ रात कां माहौल थां सड़कों पऱ कोई भि नहि थां औऱ हम् दोनों चलतेजा रहे थें तभी मे सोचता हु।
मे(मन मे): उस पाउडर नें अभि तक कुछअसर नहि दिखाई। माँ तोँ बिल्कुल मस्तचल रही हैं।
कुछदूर चलने केँ बाद हम् खेत तक पहुंचने वाले थें औऱ अब हम् खेतों केँ बीच मे थें औऱ खेत मे पतले सें स्थान मे चलरहे थें हमारे आजू-बाजू मे लंबे-लंबे झाड़ियां थि।
मम्मी: बेटा जरा टॉर्च जालना।
मे: जी मम्मी लो।
मे टॉर्च जलाकर मम्मी कों दे देताहु औऱ अब माँ मेरेआगे थि औऱ मे उनके पीछेचल रहा थां औऱ दोनों केँ हाथों मे टॉर्च थां।
माँ आगे कां मार्ग टॉर्च सें देखरही थि औऱ मे मम्मी केँ चूतड़ों कों देखरहा थां जौ ऊपर नीचे होँ रही थि साड़ी केँ अंदर औऱ दाएं बाएं भि औऱ मेरी टोर्च कि लाइट माँ केँ चूतड़ों पऱ रोशनी कररही थि।
मम्मी(मन मे): लगता हें कि यह मेरे चूतड़ देखरहा हैं तभी तौ इसकी टोर्च कि लाइट इधर-उधर नहि जारही हैं मेरेकमर केँ नीचेरह रही हैं। रुक अभि कुछ दिखाती हु।
तभी मम्मी अपनीकमर कों लचकाने लगती हें। औऱ अब माँ चूतड़ कुछ ज़्यादा हि हिलेरी माररहे थें ऊपर नीचे दाएं बाएं होँ रहे थें। मे येदेख मम्मी केँ पीछे पागल होँ जारहा थां औऱ मेरा लंड अपने विराट रूप मे आनेलगा थां पैंट केँ अंदर हि। मे अभि भि यहीसोच रहा थां।
मे(मन मे): दोस्त यह पाउडर कुछकर क्यूं नहि रहा लगता हैं रुपया बर्बाद हैं। इतनादेर होँ गय़ा हैं अभि तक तौ असरकर देना चाहिए थां।
माँ(मन मे): ये क्याँ होँ रहा हें मेरी चूत मे मुझे खुजली क्यूं होनेलगी।
अब हम् अपनेखेत मे आहते हैं औऱ देखते हें कि फसल तोँ बिल्कुल सही हैं औऱ कोई भि जंगली जानवर नहि थें।
मे:फसल तोँ बिल्कुल सही हैं माँ यहां तौ कोई जंगली जानवर भि नहि हैं।
माँ(तोड़ी परेशान कों केँ): हासही कहरहा हैं।
तभी माँ केँ मोबाइल पऱ फोनआती हैं। औऱ मे खेत मे जाकर देखने लगताहु कहींफसल बर्बाद तौ नहि हुई हैं।
बबीता(चीखते हुए): ahhhh औऱ तेज बेटा aaaahhh संगीता तु पहुंच गई खेत मे।
मम्मी: ये तेरी आवाज़ कों क्याँ हुआ।
बबीता: aaaaahhhh ssssshhhhh बेटा aaaaaahhhhh बताया तोँ थां तेरे कों आज हमारी सुहागरात हैं।
मम्मी बबीता आंटी कि चीखे औऱ उनकी शासकीया सुनरही थि। औऱ जौ माँ कि चूत मे खुजली होँ रही थि माँ यहीखेत केँ कुटिया केँ पास खड़ी होँ केँ साड़ी केँ ऊपर सें हि अपने हाथों सें अपनी चूत कि खुजली मिटारही थि।
माँ: तुने अपनी चीखे सुनने केँ लिए मोबाइल किया हैं।
बबीता: aahhhh नहि मे येकहरही हुआजरात तु भि मजे लें लेँ उसखेत मे।
माँ(मन मे): मुझे तौ पसीना भि होनेलगा हैं औऱ मेरी चूत तौ आगमार रही हैं ये क्याँ हौ रहा हैं मुझे।
माँ: क्याँ।
बबीता: shhhhhh ahhhhh हा मे झूठ बोलकर तेरे कों खेत मे भेजीहु ताकितु भि कुछकर सके।
माँ: इसका मतलब कि तुनेझूठ बोला थां कि हमारे खेत मे जंगली जानवर आँ गए हैं।
बबीता: हाचलअब कॉलआई कटरही हु।
मे पूरेखेत कों देख लेताहु कुछ भि नहि होता हैं तौ मे माँ केँ पासआता हु औऱ माँ कों पसीने मे तरबतर देखता हु।
मे: माँ आपको गर्मी लगरही हैं।
माँ: हा बेटा बहोत अधिक हि गर्मी लगरही हैं मेरे कों पसीना रुकने कां नाम हि नहि लें रहा हैं।
मे(मन मे): अहहअब जाकर पाउडर नें अपना कमाल करना शुरुआत करा हैं।
माँ केँ माथे सें पसीना टपकेजा रहा थां औऱ उनका पूरा जिस्म पसीने सनाहुआ थां।
मे: रुको माँ मे कुछ करताहु।
फिन मे कुटिया केँ अंदर जाताहु औऱ वहां सें चारपाई लेकरआता हु औऱ हाथ वाला पंखा भि लेकर आँ जाताहु जोँ कुटिया मे रखी हुइ थि औऱ कुटिया केँ बाहर् चारपाई लाकररख देताहु औऱ मन सें कहताहु।
मे: मम्मी चारपाई पर्र बैठजाओ मे हाथ वाला पंखाकर देताहु आपको।
माँ(मन मे): बेटा तुहवा तौ कर देगामगर जोँ मेरी चूत कि गरम होँ रही हैं उसका क्याँ आजपता नहि क्याँ होँ रहा हैं मेरेसंग।
मम्मी चारपाई पऱ बैठ जाती हैं औऱ माँ कों हाथ वाला पंखा करता रहताहु। माँ कभी-कभी अपनी चूत पर्र हाथलग रही थि मगर मेरे कों देखकर हटादे रही थि हाथ कों।
मम्मी(मन मे): क्याँ करूंअब ये गर्मी औऱ खुजली मुझे सें सहा नहि जारहा हैं।
मे: मम्मी अब राहत मिलीरही हैं हवाकर रहाहु तुम्हें तोँ।
माँ: नहि बेटा ये पसीना रुकने कां नाम नहि लें रहा हैं तुहवा कररहा हैं तौ भि।
फिन चारपाई सें ऊट खड़ी होती हैं औऱ कहती हैं।
मम्मी: मुझे अपनी साड़ी उतार नें देतभी गर्मी शांत होगी।
मे(मन मे): माँ मेरे सामने अपनी साड़ी उतरेगी अहहमजे हि मजे मेरे तोँ आज।
माँ अपनी साड़ी साड़ी उतार केँ चारपाई पऱ रख देती हैं औऱ मम्मी अब पेटिकोट औऱ ब्लाउज मे थि उनका ब्लाउज भि गीला होँ चुका थां पसीने सें।
माँ(मन मे): आज तोँ मे अपने बेटे केँ सामने अपनी साड़ी उतार दि हु।
मम्मी चारपाई पर्र बैठ जाती हैं औऱ मे कहताहु।
मे: माँ मे आपके पसीना पोंछदु।
माँ: हा बेटा।
फिन मे अपनीजेब मे हाथ डालकर देखाहु कि रुमाल हैं कि नहि मगर रुमाल नहि थां मेरेजेब मे।
मे: माँ रुमाल तौ हैं हि नहि केसे पसीना साफकरु।
माँ: मेरी साड़ी सें करदे।
फिन मे माँ कि साड़ी उठाकर उनका पसीना पोंछ नें लगताहु पहले मे माँ केँ हाथों साफ करता हूं फिन उनकेकमर कों औऱ जब मेरी एक् ऊंगली माँ कि नाभि मे जाती हैं तोँ माँ केँ मुंह सें अहह कि आवाज़ आती हैं।
माँ: aaahh सहीसाफ कररहा हैं बेटा।
माँ(मन मे): ये कैसा एहसास थां इसकी उंगली मेरे नाभि पर्र पड़ी मानो कि मेरे जिस्म मे करंट सें दौड़ गय़ा होँ।
मे पसीना साफकर देता हूं फिन भि मम्मी कां पसीना नहि रुकता हैं। औऱ मम्मी कि चूत कि गर्मी औऱ बढ़ते जारही थि।
माँ(मन मे): अहहये क्याँ हौ रहा हैं मेरे कों ऐसालग रहा हैं कि मे झड़ने वालीहु ये कैसा एहसास हैं।
मे माँ कों देखता हु कि वो अपनीआंख ऊपरकर रही थि मानो कि ये अपनेचरम सीमा पर्र हौ।
मे(मन मे): ये माँ अपनी आंखों कों ऊपर क्यूं कररही हैं कहींइस पाउडर कि वजह सें माँ झाड़ने वाले तोँ नहि हैं।
मम्मी( मन मे): aaaaahhh मे झड़ने वालीहु वो भि अपने बेटे केँ आंखों केँ सामने।
मम्मी चारपाई पऱ बैठेहुए थि औऱ उनकाबदन हिलने लगा थां मानो कि मम्मी अपनी चूत कों चारपाई सें रगड़रही होँ औऱ उनकेपेर टाइट होनेलगे थें। मे येसभी बड़े ध्यान सें देखरहा थां औऱ देखते देखते हि माँ कां जिस्म हिलने लगता हैं।
माँ(मन मे): aaaaahhh गई मे aaaaahhhh बेटा।
औऱ मेरीनजर चारपाई केँ नीचे पड़ती हैं तौ देखता हु नीचे पानीटपक रहा थां। ये जोँ पानीटपक रहा थां वो माँ कां पेशाब थां जब वो झड़ी थि तौ उनके चूत सें पेशाब निकल गय़ा थां याँ बोलो कि जब औरतों कों ऑर्गेज्म मिलता हैं तक ये होता हैं। मे ये देखकर माँ कों कहताहु।
मे: माँ ये क्याँ कररही होँ अपने बैठे-बैठे पेशाब कर दिया।
मम्मी(मन मे): ये क्याँ कर दिया मैंने औऱ मे इतना मदहोश हौ गई थि कि मुझेकुछ एहसास नहि थां कि मे क्याँ कररही हु औऱ ये पेशाब वाला एहसास तोँ मैने जीवन मे पहलीबार करा हैं।
मम्मी: क्याँ कहरहा हैं तु।
मे: हा मम्मी अपने पेशाब कर दिया हैं उठो देखो आपका पेटिकोट गिला होगा औऱ चारपाई केँ नीचे देखो।
माँ: क्याँ सही मे मे पेशाब कर दिया हैं।
मे: हा।
मम्मी जानबूझकर कहरही थि उन्हें पता थां कि पेशाब कररहा हैं औऱ अब माँ चारपाई सें उठकर नीचे देखने लगती हैं जहा पेशाब अभि भि बहरहा थां जमीन पर्र।
मे: देखो।
मम्मी: हाये केसे हौ गय़ा मुझेपता नहि बेटा।
मे(मन मे): मगर मुझेपता हैं माँ केसेहुआ यह।
मे: मम्मी अब आप् केसे रहोगी इस गीले पेटीकोट मे।
माँ: अच्छा सुन बेटा एक् काम करते हें आजरात यहीं पऱ रुक जाते हें औऱ जब तक मेरी पेटीकोट भि सूख जाएगी।
मे(मजे लेतेहुए): क्याँ अब आप् पेटिकोट उतार केँ सोउगी।
मम्मी: क्याँ कहा तुने।
मे: मम्मी मेरा मतलब वो नहि थां।
मम्मी(मजे लेतेहुए): सभीसमझ रहीहु तेरा मतलब।
मे: आपने तोँ कहा थां कि जब पेटिकोट सूख जाएगा तब चलेंगे घऱ सुभह।
माँ: मैने सुभहघऱ जाने कि तौ बात हि नहि करी इसका मतलब कि मे अपना पेटिकोट उतारदु औऱ तेरे सामने अपनी कच्छी औऱ ब्रासो जाऊं।
माँ केँ मुंह सें कच्छी औऱ ब्रा शाब्द सुनकर मुझे अच्छा लगता हैं औऱ उस पाउडर कां असरअब काम हौ रहा थां।
माँ: बोल।
मे: नहि मम्मी कैसीबात कररही होँ आप्।
माँ(मन मे): देखो केसेडर रहा हैं अब औऱ साम केँ वक़्त देखो केसेचुप केँ देखरहा थां मेरे कों नहाते हुए अभि बिल्कुल भीगी बिल्ली बन गय़ा।
माँ: नहि तेरा मतलबवही थां।
मे: नहि माँ मे केसेसोच सकताहु अपनी माँ केँ बारे मे।
मम्मी(मन मे): अगर सोचता नहि तौ मुझे नहाते हुए नहि देखता।
माँ: अच्छा।
मे: हा माँ।
मम्मी: नहि तोँ वहीसोच रहा थां औऱ अब मे तेरे सामने अपना पेटिकोट खोलूंगी औऱ तेरेसंग सो जाऊंगी।
मे: माँ क्याँ कररही होँ।
माँ: नहि अबतु अपनी मम्मी कों कच्छी औऱ ब्रा मे देख।
माँ(मन मे): इसके चेहरे कां तोँ
रंग उड़ाहुआ हैं जैसे मे बातें कररही होँ एकदमडरा हुआचल बेटा अधिक नहि डराऊंगी।
Next।।।।
मम्मी औऱ खेत - Next part mein bada twist
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