sanskari mummy with buddha kirayedar - Real Kahani Part 1
hello friends, mai ap से जानना chahata ho की kahani kis font mai likhu - hindi ya english
दोस्तों इस स्टोरी केँ सारे किरदार एंडयह किस्सा असली हैं। तोँ आइये सुरु करते हैं
मे स्टोरी मेरी मां एंड हमारे किरायेदार कि हैं
introduction
बापू - सुरेश, उम्र 56
माँ - सुनीता, उम्र 50
दिदी - सलोनी, उम्र 30
मे -- दीपक, उम्र 26
किरायेदार - वीरेंद्र, उम्र 55
sanskari mummy with buddha kirayedar – New Episode
दोस्तों मेरे बापू सब्जी कि दुकान लगते हैं औऱ माँ housewife हैं, मे कपडे कि दुकान मे काम करताहु, औऱ मेरी दिदी कि विवाह होँ चुक्की हैं। उसका पति टेलर कां काम करता हैं
मेरे बापूकाम केँ केँ चाकर मे मां सें सेक्स नहि करपते, इसीलिए मां मे अपनी सेक्स कि भूक मिटने केँ लिए किरायेदार अंकल सें सेटिंग कि
हमारा घऱ२ फ्लोर कां हैं, नीचे वाला किराए पर्र दियाहुआ हैं औऱ ऊपर वाले मे हम् रहते हैं।
एक् दिन मैंने देखा कि किरायेदार अंकल नाहा केँ बहारआये थें औऱ तोलिये मे थें। माँ उससेऊपर सें देखरही थि औऱ अपनीचुत साड़ी केँ ऊपर सें मसलरही थि
मैंने खांसने कि acting कि जिससे मां कों पताचल जाये कि मे वो खड़ाहु। मां मेरी आवाज़ सुनकर वाला सें चली गई
फिन मैंने मां सें खानां माँगा औऱ हम् दोनों खानां खानेचले गए
फिन मैंने मां सें पूछा -
मे - मां तुम् वो जाल मे सें क्याँ देखरही थि
माँ - कुछ नहि बेटा, जल कमजोर हौ गय़ा हैं उससे बदलवाने कि सोचरही थि
मे - फिन क्याँ सोचा
मां - बदलवाना तोँ पड़ेगा हैं, इस पे इतना पानी गिरता हैं, आगरकल कों कुछ होँ गय़ा तोँ,
मे -ठीक हैं मे किसी मिस्त्री कों बुला लेताहु, उससे खर्चा पूछ लेते हैं
मां - नहि बेटा, तूँ फिकरमत कर मे अपने आप् करवा लुंगी, यह मेराकाम हैं
sanskari mummy with buddha kirayedar – New Episode
माँ - तूँ रहनेदे
अबआगे
मे - क्यूं मां, मे भेजता हु किसी कों.
माँ (गुस्से मे) - तुम को बोला नाँ नहि,
मे समझ गय़ा कि मां कोण सें जाल कि बातकर रही थि
मे - ठीक हैं, तूँ स्वयं बुला लें, मगर जल्द
माँ - ठीक हैं अब तूँ जा
मैंने काम पे जाने कां नाटक किया औऱ घऱ सें निकल गय़ा
मे एक् तरफचुप गय़ा ताकि माँ कों नां दिखू
मेरे जाते हि माँ निचे किरायेदार केँ कमरे कि तरफचल दि, मां नें गेट बजाय
किरायेदार (अंदर सें) - कौन हैं
मां कुछ नहि बोलीं औऱ फिनगेट बजा दिया
किरायेदार - कौन हैं boshdike, उसने केवल तोलिया लपेटा थां, उसनेगेट खोला, मां सामने खड़ी थि
माँ - क्याँ बोलरहे थें तुम्
वोँ - कुछ नहि भाभीजी,, मैंने सोचा पड़ोस केँ बच्चे हैं
मां - अच्छा, अब अंदरचले, वोँ डर गय़ा
वोँ - अंदर क्यूं भाभी, यही बोलिये
माँ - यहा नहि, अंदरचलो
मे साईड सें यहसभी देखरहा थां, जब वोँ दोनों अंदरगए तोँ मे बहारआया औऱ खिड़की सें देखने लगा
मां - आज तुम् मुझे क्याँ दिखारहे थां जाल मे सें
sanskari mummy with buddha kirayedar - Kahani ab aur interesting hogi
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