♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
हैलो दोस्तो, केसे हें आप् सभी?????
आशा करताहूॅ कि आप् सभी बहोत अच्छे सें हि होंगे।
जैसा कि मैने आपसेकहा थां कि 16 जुलाई केँ बाद आप् सबके सामने भाग हाज़िर कर दूॅगा तोँ यहसच हैं दोस्तो। आज मैनेकाम सें फारिग़ होकर एपसोड कां करीब-करीब 95% हिस्सा लिखा हैं। हलाॅकि कुछ हिस्सा कल भि लिखा थां औऱ परसों भि। वरना इतना बड़ा एपसोड एक् हि दिन मे तौ लिख पाना मुमकिन नहि हें। क्योंकि उसकेलिए बहोत सारा वक़्त भि चाहिए होता हैं जौ कि मेरेपास होता नहि हैं। मगर मेरी भरपूर कोशिश थि कि 16 जुलाई केँ बाद आप् सबके सामने एपसोड हाज़िर हौ हि जाए। इस लिए दोस्तो एपसोड कां 95% हिस्सा लिखाजा चुका हैं। बाॅकी कां 5% आजरात औऱ लिखूॅगा। अगर जल्दलिख गय़ा तौ आजरात हि एपसोड दे दूॅगा वरनाकल तोँ एपसोड हर कीमत पर्र आपके सामने होगा।
आशा करताहूॅ कि आप् सभी अपना धैर्य बनाए रखेंगे औऱ मेरेसंग अपनासंग व सहयोग भि।
!! शुक्रिया !!
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 55 》
अब तक,,,,,,,,
"कुछ भि करने सें पहले तुम्हें नीलम औऱ सोनम कों सुरक्षित वहाॅ सें निकालना होगा। " रितू दिदी नें समझाने वाले अंदाज़ सें कहा___"उसके बाद हि हम् कोईठोस क़दम उठाने मे सक्षम हौ सकते हें। "
"ठीक हैं दिदी। " मैने कहा___"मे नीलम सें बात करकेउसे सभीकुछ समझाता हूॅ कि उसे क्याँ औऱ केसे करना हैं। आप् भि गुड़िया सें बातकर लीजिए, औऱ हाॅइस बात कि बिलकुल भि फिक्र मत कीजिए कि नीलमव सोनम दिदी मे सें किसी कों भि मेरे रहतेकुछ होगा। मे अपनीजान देकर भि उनकी इज्ज़त औऱ जान कि हिफाज़त करूॅगा। "
"ऐसामत कहराज। " रितू दिदी कि ऑखेंछलक पड़ी, बोलि___"तुझे हीकुछ होने सें पहले हि मे अपनीजान दे दूॅगी। मेरा सबसे प्यारा भइया हि नहि रहेगा तौ मे इस पापी दुनियाॅ मे अकेली जीकर क्याँ करूॅगी?"
"सभीठीक हि होगा दिदी। " मैने दिदी कों अपने सें छुपका लिया___"औऱ मे सभीकुछ ठीक करने कि पूरी कोशिश भि करूॅगा। चलिएअब आप् भि फ्रेश हौ लीजिए, सुभह होँ गई हैं। नैना फूफी आपको आपके कमरे मे नं देखेंगी तौ कहीं आपको ढूॅढ़ने न् लग जाएॅ। अतः अब आप् जाइये औऱ हाॅ गुड़िया सें अवश्य बातकर लीजिएगा। "
मेरे कहने पर्र रितू दिदी नें मुझसे अलग होकरहाॅ मे सिर हिलाया। मैने उन्हें अपने मोबाइल सें गुड़िया कां नंबर मैसेज किया। उसकेबाद दिदी कमरे सें चलीगईं। उनके जाने केँ बाद मैंने गहरी साॅसली तथाफिन मैने नीलम कों मैसेज किया। अपनेफोन कों हाॅथ मे लिए मे नीलम कि तरफ सें उसके रिप्लाई कां इन्तज़ार करनेलगा।
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अबआगे,,,,,,,,
उधर मंत्री दिवाकर चौधरी केँ आवास पऱ।
अशोक मेहरा व अवधेश श्रीवास्तव ड्राइंग रूम मे बैठे थें। सामने केँ सोफे पऱ एक् ब्यक्ति औऱ बैठाहुआ थां जोँ कि अवधेश केँ संग हि आयाहुआ थां। उसकानाम हरीश राणे थां। हरीश राणे पेशे सें एक् प्राइवेट डिटेक्टिव थां। उसने बाकायदा अपनी एक् अलग डिटेक्टिव एजेंसी खोली हुई थि तथा उसके अंडर मे बहुत सारेलोग काम करते थें। अवधेश श्रीवास्तव औऱ हरीश राणे कि मुलाक़ात कईसाल पहले किसीकेस केँ सिलसिले पर्र हि हुई थि। तब सें इन दोनो केँ बीच यारी दोस्ती कां गहरा रिश्ता थां।
हरीश राणे बहोत हि क़ाबिल औऱ तेज़ दिमाग़ कां डिटेक्टिव थां। उसके बारे मे कहा जाता हैं कि उसनेअब तक जिसकेस कों भि अपने हाॅथ मे लियाउसे बहोत हि कम वक़्त मे साल्व किया थां। कदाचित यहीवजह हैं कि आज केँ टाइम मे हरीश राणे एक् केस केँ लिए अच्छी खासीफीस चार्ज़ करता थां। फीस तौ उसकी होती हि थि लेकिन उसकेआने जाने कां खर्चा पानी भि उसेअलग सें देना पड़ता थां। ख़ैर, इस समययह तीनों हि ड्राइंग रूम मे बैठे चौधरी केँ आने कां पिछले एक् घंटे सें इन्तज़ार कररहे थें।
चौधरी केँ पीए नें बताया थां कि चौधरी साहब अपनी रखैल सुनीता केँ संग कमरे मे हें। अवधेश व अशोकयह जानकर हैरान रहगए थें कि चौधरी आज सुभह सुभह हि सुनीता कों भोगने मे लग गय़ा थां। आमतौर पऱ ऐसा होता नहि थां, औऱ नां हि चौधरी इस क़दर सुनीता कां दीवाना थां। मगर जाने क्याँ बात थि कि आज सुभह सुभह हि चौधरी सुनीता केँ संग कमरे मे बंद थां। उसेयह तक होश नहि थां कि हालात कितने गंभीर थें आजकल।
अवधेश श्रीवास्तव अपने डिटेक्टिव साथी हरीश राणे कों चौधरी सें मिलवाने लाया थां। वोँ चाहता थां कि चौधरी राणे सें मिलकर अपने तरीके सें उसेकेस केँ सिलसिले मे बताएॅ औऱ आगे कां काम शुरुआत करने कि परमीशन दे। ख़ैर एक् घंटेदस मिनटबाद चौधरी औऱ सुनीता एकदम सें फ्रेश होकर ड्राइंग रूम मे आए। उन दोनो केँ हावभाव सें बिलकुल भि ऐसा नहि लगरहा थां कि वोँ दोनो बाॅकी सबकी जानकारी केँ अंदर क्याँ गुल खिलाकर आए थें। बल्कि ऐसालग रहा थां जैसेकुछ हुआ हि न् होँ।
"क्षमा करना यारो। " दिवाकर चौधरी नें सोफे पऱ बैठते हुएतथा सबकीतरफ नज़रें दौड़ाते हुए कहा___"तुम् सबको इन्तज़ार करना पड़ा। "
"कोई बात नहि चौधरी साहब। " अवधेश नें मजबूरी मे हि सही लेकिन मुस्कुराते हुए कहा___"इतना तौ चलता हैं। ख़ैर जैसा कि मैने आपसे ज़िक्र किया थां तौ मे अपनेसंग अपने डिटेक्टिव मित्र हरीश राणे कों लेकरआया हूॅ। आप् इनसेमिल लीजिए औऱ केस सें संबंधित बातकर लीजिए। "
"ओह हैलो राणे। " चौधरी नें हरीश कि तरफ देखते हुए लेकिन तनिक मुस्कुराते हुए कहा___"भई तुम् अवधेश केँ साथी हौ तौ हमारे भि साथी हि हुए। इस लिए हमसे किसी भि बात केँ लिए संकोच याँ झिझक करने कि ज़हमत मत उठाना। "
"जी बिलकुल चौधरी साहब। " हरीश राणे नें भावहीन स्वर मे कहा___"वैसे भि हमारे पेशे मे संकोच याँ झिझक केँ लिएकोई स्थान नहि होती हैं। ख़ैर आप् बताएॅ मेरेलिए क्याँ आदेश हैं? आपकेलिए कुछकर सकूॅयह मेरा सौभाग्य हि होगा। "
"सारी बातें तौ तुम्हें अवधेश नें बता हि दि होंगी। " चौधरी नें कहा___"औऱ शायदयह भि समझा दिया होगा कि तुम्हें करना क्याँ हैं?"
"जी बिलकुल। " हरीश राणे नें कहा___"अवधेश नें मुझेइस केस सें संबंधित सारी बातें बताई हें। इसके बावजूद आप् अगर अपनेमुख सें एक् बारफिन सें इस बारें मे मुझेबता देंगे तौ अधिक बेहतर होगा। "
"दरअसल हालात ऐसे हें। " दिवाकर चौधरी नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"कि हम् सभीकुछ कर गुज़रने कि क्षमता रखतेहुए भि कुछकर नहि सकते। अवधेश नें हि सुझाव दिया थां कि इसकाम मे हमारे अलावा एक् डिटेक्टिव हि बेहतर तरीके सें कोई कार्यवाही कर सकता हैं। हमें भि लगा कि आइडिया अच्छा हैं। ख़ैर, हम् मात्र यह चाहते हें कि जिस व्यक्ति कि वजह सें हम् कुछकर नहि पारहे हें उसे तुम् हमारे सामने लाकर खड़ाकर दो। लेकिन इसबात कां बखूबी औऱ सबसे पहले ख़याल रहे कि उसेइस बात कि भनक भि न् लगे कि हमने तुम्हारे रूप मे कोई जासूस उसके पीछेलगा रखा हैं। क्योंकि अगरउसे तुम्हारे बारे मे पताचल गय़ा तौ तुम् सोच भि नहि सकते होँ कि तुम्हें हायर करने केँ लिएतथा उसके पीछे लगाने केँ लिए हमें इसका कितना संगीन अंजाम भुगतना पड़ सकता हैं। ख़ैर, हम् यह चाहते हें कि उस आदमी केँ पास सें वोँ सारे वीडियोज तुम् हमें वापस लाकरदो औऱ उसकीकैद सें हमारे बच्चों कों भि सही सलामत यहाॅ लेकरआओ। उसकेबाद हम् स्वयं देख लेंगे उस बास्टर्ड कों कि वोँ खाली हाॅथ हमारा क्याँ उखाड़ लेता हैं?"
"ठीक हैं चौधरी साहब। " हरीश राणे नें कहा___"मे आज औऱ अभि सें इसकाम मे लग जाताहूॅ। हलाॅकि इसकाम मे कोई बहोत बड़ीबात नहि हैं जिसके लिए आपको किसी डिटेक्टिव कि ज़रूरत पड़ती, मगर चूॅकि आप् उस आदमी केँ द्वारा पंगूबने हुए हें इसलिए स्वयं कुछकर नहि सकते हें। अतः आपकोकोई ऐसा ब्यक्ति चाहिए जोँ आपकेलिए यहसभी इस तरीके सें करे कि स्वयं डिटेक्टिव कों भि पता नं चलपाए कि वोँ क्याँ कर गय़ा हैं?"
"बिलकुल, तुम् सही समझे राणे। " चौधरी नें प्रभावित नज़रों सें हरीश कों देखते हुए कहा___"तुम् स्वयं समझ सकते हौ कि जब तक उसकेपास हम् लोगों केँ वोँ वीडियोज हें तब तक हम् मे सें कोई भि कोईठोस ऐक्शन नहि लेँ सकता उसके खिलाफ। "
"आप् बेफिक्र रहिए चौधरी साहब। " हरीश राणे नें कहा___"बहोत जल्द आप् इस बेबसी केँ आलम सें उबर जाएॅगे औऱ फिन आप् स्वतंत्र रूप सें कुछ भि करने कि हालत मे भि आँ जाएॅगे। "
"आईहोप कि ऐसा हि होँ। " चौधरी नें कहा___"हम् चाहते हें कि यहकाम जितना जल्द होँ सके तुम् कर डालो। क्योंकि हमसेअब औऱ अधिकयह सभी झेला नहि जारहा हैं। अपनीफीस केँ रूप मे जितना चाहो पैसा लें सकते हौ हमसे। हमें जल्द सें जल्दबस अच्छा रिजल्ट चाहिए। "
"डोन्ट वरी चौधरी साहब। " हरीश राणे नें कहा___"आपको इस सबसे बहोत जल्द हि मुक्ति मिल जाएगी। अच्छा अब मुझे यहाॅ सें जाने कि इजाज़त दीजिए। "
"ठीक हैं तुम् जाओ राणे। " चौधरी नें कहा___"हमें बड़ी शिद्दत सें उसदिन कि इंतज़ार रहेगी जबकि हमारे बच्चे औऱ वोँ वीडियोज हमारे पास होंगे। "
मंत्री दिवाकर चौधरी सें इजाज़त लेकर हरीश राणेनाम कां वोँ डिटेक्टिव वहाॅ सें चला गय़ा। उसके जाने केँ बादकुछ देर तक ड्राइंगरूम मे सन्नाटा छायारहा। सबके चेहरों पर्र सोचो केँ भाव गर्दिश करते नज़र आँ रहे थें।
"यहकाम तोँ बहोत अच्छा हुआ चौधरी साहब। " सहसा पहलीबार इसबीच अशोक मेहरा नें अपनामुख खोलते हुए कहा___"मगर आपने तौ उस ठाकुर सें भि इसकेलिए सहायता करने कि बात कि थि तोँ फिन उसका क्याँ? मेरा मतलब हैं कि क्याँ सचमुच इस मामले मे वोँ हमारी सहायता करेगा अथवा उसका वोँ सहायता केँ लिए हाॅमी भरनामहज उस टाइम कि बस एक् औपचारिकता थि?"
"बेशक, उसकी औपचारिकाता भि समझ सकते हौ। " मंत्री नें कहा___"क्योंकि हमें भि ऐसा लगता हैं कि वोँ इस मामले मे कुछखास हमारी सहायता नहि कर सकता। उसकी स्वयं कि थानेदारनी बेटी उसके खिलाफ़ हैं। बेटी केँ खिलाफ़ होने कि जौ वजह उसने हमें बताई थि उसवजह मे कोईखास बात नहि थि। क्योंकि महज इतनी सि बात पऱ कि उसके औऱ उसकी पत्नि कों बेटी कां पुलिस कि जॉब करना पसन्द नहि थां औऱ वोँ इस बारे मे बेटी सें बोलते भि थें तोँ ऐसा नहि होँ सकता कि बेटी इतनी सि बात पऱ वोँ अपने पैरेंट्स केँ खिलाफ़ होँ जाए। खिलाफ़ होने केँ पीछे अवश्य कोईऐसी ठोसवजह होगी जिसके बारे मे ठाकुर नें हमें बताना शायद ज़रूरी नहि समझा याँ फिनऐसा होँ सकता हैं कि वोँ उसवजह कों हमसे बताना हि नं चाहता रहा होँ। "
"बात तोँ आपकी एकदमसही हैं चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें सोचने वालेभाव सें कहा___"लेकिन सोचने वालीबात तोँ हैं हि कि ऐसी क्याँ वजह हौ सकती हैं जिसके तहत उसकी स्वयं कि बेटी उसके खिलाफ़ हौ गई हैं?"
"हमें लगता हैं कि ठाकुर स्वयं भि दूध कां धुलाहुआ नहि हैं। " चौधरी नें कहा___"उसने अपने भतीजे औऱ छोटे भइया कि पत्नि केँ संबंध मे जौ कुछ भि हमें बताया थां संभव हैं कि उसकीउस बात मे कोई सच्चाई होँ हि न्। कहने कां मतलबयह कि जिन आरोपों केँ तहत उसने अपने छोटे भइया कि पत्नि औऱ उसके बच्चों कों हर चीज़ सें बेदखल किया थां वोँ सब आरोपमहज उसी कि चाल कां एक् हिस्सा रहेहों। हम् ऐसा उसकी बेटी केँ खिलाफ़ होँ जाने कि बात केँ आधार पऱ कहरहे हें। यह तौ एक् यथार्थ सच्चाई हैं कि झूॅठ याँ बुराई एक् न् एक् दिन अपना चेहरा सबको दिखा हि देती हैं। इसलिए अगर ठाकुर नें वोँ आरोप किसी साजिश केँ तहत झूॅठ कि बुनियाद पऱ लगाएरहे होंगे तौ संभव हैं कि उसकी वोँ सच्चाई किसीतरह सामने आँ गई होँ औऱ उसकी बेटी कों भि पताचल गई होँ। इतना तोँ वोँ भि समझ सकती हैं कि बुरा करने वालाकभी पलटकर अपनेहक़ केँ लिएइस तरह लड़ाई नहि किया करता। अगर विराज कि माॅ कां चरित्र सचमुच मे गिराहुआ रहा होगा तौ यहबात कहीं नं कहीं सें विराज कों भि पता चलती औऱ वोँ उस सूरत मे लज्जा सें पानी पानी होतातथा संग हि फिन वोँ कभीपलट कर गाॅव मे किसी कों अपनी शक्ल नं दिखाता। मगर उसनेऐसा कुछ भि नहि किया उल्टा इसके विपरीत वोँ ठाकुर सें अपनेहक़ केँ लिएतथा अपनेसंग हुए अन्याय केँ लिए लड़ाई कररहा हैं। इसबात सें कहीं न् कहीं सोचने वालीबात हौ हि जाती हैं कि कहीं ठाकुर नें वोँ सभी आरोपझूठ मूॅठ मे हि तौ नहि लगाए थें विराज कि माॅ पऱ? वरना वोँ इसतरह सीनातान करतथा इतनी दिलेरी सें उससेजंग क्यूं करता?यही बात ठाकुर कि बेटी भि सोची होगी औऱ फिन उसने सच्चाई कां पता भि लगाया होगा। संभव हैं कि उसे वास्तविक सच्चाई कां पताचल गय़ा हौ, उस सूरत मे वोँ अपनेमाॅ बाप केँ खिलाफ़ होँ गई। हलाॅकि सोचने वालीबात तौ यह भि हैं कि अगरमाॅ बाप बुरे हें तोँ संतान इतनी पाक़साफ केसे हौ गई कि वोँ अपने हि माॅ बाप केँ खिलाफ़ हौ जाए?"
"आपकी बातों मे यकीनन वजन हैं। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"मगर ऐसा होता हैं चौधरी साहब कि कीचड़ मे हि कमल खिलते हें। कहने कां मतलबयह कि भले हि ठाकुर औऱ ठाकुर कि पत्नि बुरे चरित्र वालेरहे हों लेकिन ज़रूरी नहि कि उसकेसब बच्चे भि उनकीतरह हि बुरे निकलें। हर इंसान कि सोचव स्वभाव अलग होता हैं। अतः संभव हैं कि ठाकुर कि बेटी अच्छी सोचव अच्छे नेचर कि लड़की हौ औऱ वोँ अन्याय कां संग देने कि सोच नं रखती होँ। "
"बिलकुल। " चौधरी नें कहा___"अगर तुम्हारी बातों कों मानकर चलें तोँ यह प्रश्न भि पैदा हौ जाता हैं कि अगर ठाकुर कि बेटी अपने पैरेंट्स केँ रूप मे अन्याय केँ खिलाफ़ होँ गई हैं तौ यह भि ज़ाहिर सि बात हैं कि फिन उसने न्याय औऱ सच्चाई कां संग देने कां भि सोचा होँ। "
"यकीनन ऐसा होँ सकता हैं चौधरी साहब। " अशोक मेहरा कह उठा___"न्याय औऱ सच्चाई कां संग देने कां मतलब हैं कि वोँ विराज कां संगदे रही होगी। उसे सच्चाई कां पताचल गय़ा होगा कि विराज औऱ उसकीमाॅ पऱ उसके बाप द्वारा लगाएगए वोँ सब आरोप फर्ज़ी थें इसलिए उसे विराज औऱ उसकीमाॅ सें सहानुभूति हुई होगी औऱ उसने विराज कां हक़ दिलाने केँ लिए उसकासंग देनेलगी होगी। "
"अगर सच्चाई यही हैं। " अवधेश नें कहा___"तौ इसका मतलबयह हुआ कि हमारा दुश्मन विराज हि नहि बल्कि ठाकुर कि बेटी भि हुइ। इससे एक् बात औऱ भि समझ मे आती हैं जोँ कि अपनी स्थान सटीक हि बैठती हैं। "
"कौन सि बात??" चौधरी केँ माॅथे पऱ शिकनउभर आई।
"यही कि। " अवधेश नें कहा___"विधी रेपकेस केँ टाइम रितू नें हि विराज कों मुम्बई सें यहाॅ बुलाया होगा। "
"यह तुम् क्याँ कहरहे होँ अवधेश?" चौधरी केँ संगसंग बाॅकी सबकी भि ऑखें फैली।
"हाॅ चौधरी साहब। " अवधेश नें कहा___"रितू कां नामआने सें कुछ बातें मुझेसमझ आँ रही हें। जैसा कि ठाकुर कि बेटी अपने पैरेंट्स केँ खिलाफ हैं तोँ यकीनन वोँ विराज कां हि संगदे रही होगी। इस मामले मे बहोत गहरीबात भि छुपी हैं चौधरी साहब जिसकी हमने कल्पना भि नहि कर सकते थें। "
"यह तुम् क्याँ ऊल जलूल बकनेलगे अवधेश?" चौधरी नें बुरा सां मुह बनाते हुए कहा___"साफ साफकहो कि क्याँ कहना चाहते होँ तुम्?"
"इन सारी बातों कां केन्द्र बिंदू। " अवधेश नें कहा___"विधी कां रेपकेस हि हैं। हम् सभीयही समझरहे थें कि उसरेप केस पर्र पुलिस कां कोईहाथ नहि हैं औऱ यहसच भि थां। मगरगौर कीजिए रितू केँ हि थाना क्षेत्र मे विधी गंभीर हालत मे पाई गई थि। रितू क्योंकि थानेदारनी थि इसलिए उसेजब गंभीर हालत मे पड़ी किसी लड़की कि सूचना मिली होगी तौ वोँ जल्दी वहाॅ पहुॅची होगी। गंभीर हालत मे पड़ीउस लड़की कों सर्वप्रथम उसने किसी हास्पिटल मे भर्ती कराया होगा। लड़की केँ होश मे आने पर्र उसने उससेरेप केँ बारे मे सभीकुछ पूछा होगा। रितू नें लड़की केँ घऱ वालों कों भि बुलाया होगा जैसा कि आमतौर होता हैं। विधी केँ माॅ बाप आए होंगे औऱ अपनी बेटी कि उस हालत कों देखकर वोँ यकीनन दुखी भि हुए होंगे। यहाॅ पर्र पुलिस केस करने कि भि बातआई होगी। लेकिन जब विधी नें बताया होगा कि उसकेसंग रेप करने वाले लड़के कौन थें तौ विधी केँ माॅ बाप केँ हाथ पाॅवफूल गए होंगे औऱ उन्होंने केस करने सें मनाकर दिया होगा। इधर रितू नें अपनेआला अफरान कों भि विधीरेप केस केँ बारे मे बताया होगा। बात कमिश्नर तक पहुॅची होगी औऱ कमिश्नर नें भि रितू कों यहीकहा होगा कि मामले कों किसीतरह दबादो। ख़ैर, रितू कों विधी केँ द्वारा हि तहकीक़ात मे पताचला होगा कि विधीअसल मे उसके भइया विराज सें प्यार भि करती थि। यहजान कर निश्चय हि रितू नें विराज सें संबंध स्थापित करउसे सभी बताया होगा औऱ यहाॅ बुलाया होगा। विराज यहाॅआया औऱ उसने अपनी प्रेमिका कि वोँ हालत देखी तोँ उसेसहन नहि हुआ। उसने अपनी मासूक़ा कां बदला लेने केँ लिए ऐलान किया होगा। इसमे उसकासंग देने केँ लिए रितू भि सहमत हुइ होगी। उसकेबाद क्याँ हुआ आप् सबकोपता हि हैं। "
"तुम्हारे कहने कां मतलब हैं कि ठाकुर कि थानेदारनी बेटी केँ द्वारा हि विराज यहाॅआया औऱ फिन उसने बदला लेने केँ रूप मे यहसभी किया?" चौधरी नें कहा___"औऱ इतना हि नहि वोँ स्वयं अपने भइया कां संग भि देरही हैं?"
"मे यही कहना चाहता हूॅ चौधरी साहब। " अवधेश नें पुरज़ोर लहजे मे कहा___"औऱ मुझे तोँ यह भि लगता हैं कि यह सारा बखेड़ा हि उस थानेदारनी केँ द्वारा हुआ हैं। "
"पता नहि तुम् क्याँ फालतू कि बकवास किएजा रहे होँ अवधेश। " चौधरी नें खीझते हुए कहा___"तुम् अपनीकोई बात पऱ कामय हि नहि होँ। पहलेकह रहे थें कि विराज नें यहसभी किया हैं औऱ अबकहरहे हौ कि ठाकुर कि उस बेटी नें किया हैं। आख़िर तुम्हारे दिमाग़ मे यह बेसिर पेर कि बातें कहाॅ सें आती हें?"
"यह मामला हि ऐसा थां चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"कि हम् मे सें कोई भि इसके बारे मे ठीक सें समझ नहि पाया थां। मगर जैसे जैसे हालात सामने आएउस हिसाब सें संभावनाओं कि बातें कि हमने। ख़ैर, मे ऐसाइस लिएकह रहाहूॅ कि इसके पीछे भि एक् वजह हैं। जैसे कि जिस वक्त विधी केँ रेप कां मामला सामने आयाउस वक़्त तौ विराज यहाॅ थां हि नहि बल्कि रितू हि थि। जिसने पुलिस केँ रूप मे हि सहीमगर विधी केँ केस कों हाॅथ मे लिया थां। यहअलग बात हैं कि हमारे दबदबे औऱ पुलिस कमिश्नर केँ मनाकर देने पर्र उसनेकोई केस फाइल नहि किया थां। मगरजब उसेपता लगा कि विधी वोँ लड़की हैं जौ स्वयं उसके हि चचेरे भइया सें प्यार करती थि तौ उसके प्रति रितू कि हमदर्दी याँ सहानुभूति यकीनन अलग हि तरह कि हौ गई होगी। उसकेमन मे यह तौ आया हि होगा कि विधी केँ संगहुए इस कुकर्म पऱ इंसाफ होँ यानीरेप करने वाले लड़कों कों कानूनन शख्त सें शख्त सज़ा मिले। मगर मामला क्योंकि आपसे ताल्लुक रखता थां अतःउस केस पऱ कानूनी तौर पर्र कोई ऐक्शन वोँ चाहते हुए भि न् लें पाई थि। इसलिए संभव हैं कि उसने हमारे बच्चों कों सज़ा देने केँ लिए कानून कों अपने हाॅथ मे लें लिया होँ। जिसके तहत सबसे पहले वोँ हमारे बच्चों केँ बारे मे अपने मुखबिरों सें पता लगवाया होगा औऱ जबउसे पताचल गय़ा होगा कि रेप करने वाले हमारे बच्चे हमारे फार्महाउस पर्र हें तोँ वोँ उन्हें पकड़ने केँ लिए वहाॅजा धमकी होगी। वहाॅ पऱ उसने हमारे बच्चों कों जबरन ग़ैर कानूनी तरीके सें गिरफ्तार किया होगातथा फार्महाउस कि तलाशी भि ली होगी। जहाॅ सें उसे हमारे खिलाफ़ वोँ सारे वीडियोज मिले। इसकेबाद वोँ हमारे बच्चों कों लेकरऐसी स्थान गई जहाॅ पऱ कोई भि जा हि नहि सकता थां। "
"अगर तुम्हारी बातों कों सच मानें तोँ। " चौधरी कां दिमाग़ साॅय साॅय करनेलगा थां, बोला___"फिन वोँ वीडियोज औऱ वोँ मोबाइल भि उसी नें किया थां हमें। मगर उसकी आवाज़ सें ऐसा तोँ लगता हि नहि थां कि वोँ किसी लड़की कि आवाज़ हैं बल्कि वोँ आवाज़ किसी भरभूर मर्द कि हि लगती थि। "
"आज केँ वक्त मे किसी किसीफोन मोबाइल पर्र ऐसे ऑप्शन भि होते हें चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"जिसमें एक् ब्यक्ति किसी कि भि आवाज़ बदलकर बातकर सकता हैं। संभव हैं कि उसनेऐसे हि किसी मोबाइल सें मर्दाना आवाज़ मे आपसेबात कि थि। ऐसाइस लिए ताकि आप् यही समझें कि सामने वालाकोई मेल पर्शन हि हैं नां कि फीमेल। इससे होगायह कि आप् इस बारे मे सोच हि नं सकेंगे कि कोई लड़कीऐसा कर सकती हैं। आप् अपनाहर क़दमयह सोचते हुए हि उठाएॅगे कि आपका दुश्मन कोईमेल पर्शन हैं। "
दिवाकर चौधरी जल्दी कुछबोल न् सका। उसे कहीं न् कहीं अवधेश कि बातों मे सच्चाई कि बू आँ रही थि। कदाचित यहीवजह थि कि वो सोचने पऱ मजबूर होँ गय़ा थां।
"उसदिन जब आपने उससे मोबाइल पर्र यहकहा कि आप् यहजान चुके हें कि वोँ कौन हैं। " उधर अवधेश मानोफुल फार्म मे कहेजा रहा थां___"तोँ वोँ चौंक पड़ी होगी। उसे लगा होगा कि आपका सोचना भि अपनी स्थान सही हैं। आख़िर ऐसा करने कि वजह विधी केँ बाप केँ पास हि तौ होँ सकती थि। ख़ैरजब उसने जानां कि आप् उसको विधी कां बाप समझरहे हें तोँ उसेयह भि लगा होगा कि अब विधी केँ पैरेंट्स कों आपसे खतरा होँ गय़ा हैं। इसलिए इससे पहले कि आप् विधी केँ पैरेंट्स तक पहुॅच पाते उससे पहले हि उसने बुद्धिमानी कां परिचय देतेहुए विधी केँ पैरेंट्स कों आपसे सुरक्षित कर दिया। वरना सोचने वालीबात हैं कि इससे पहले तोँ उसे विधी केँ पैरेंट्स कों सुरक्षा प्रदान करने कां ख़याल तक न् आया थां औऱ अगरउस दिन आप् वैसाउसे न् कहते तौ आगे भि यह ख़याल उसकेमन मे आने वाला नहि थां। कहने कां मतलबयह कि आपने स्वयं हि उसेबता दिया औऱ फिन उसने बड़ी हुस्न सें आपकी चतुराई कों बेवकूफी मे बदल दिया। "
"यकीनन तुम्हारी बातों मे वजन हैं अवधेश। " चौधरी नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"जितने कम टाइम मे उसनेयह सभी किया थां उसे विराज तोँ हर्गिज़ भि नहि कर पाता। क्योंकि मामला प्यार कां थां। वोँ विधी केँ संगहुए उस हादसे केँ सदमें मे हि रह जाता औऱ फिनअगर किसी केँ समझाने बुझाने पऱ वोँ सदमे सें बाहर् आता भि तोँ यहसभी करने मे उसेकुछ तौ टाइम लगता हि। "
"जी बिलकुल। " अवधेश नें कहा___"यही सारी बातें हें जिसकी वजह सें मुझेऐसा लगरहा हैं कि यहसभी ठाकुर कि बेटी कां हि कियाधरा होँ सकता हैं। दूसरी बात विराज जब यहाॅआया तोँ उसे विधी केँ संगहुए उस सदमें सें भि रितू नें हि निकाला होगा औऱ फिन उसनेउसे बताया होगा उसकी प्रेमिका केँ संगजिन लोगों नें यहसभी किया हैं उन लोगों कों उसने अपने कब्जे मे लियाहुआ हैं। बस उसकेबाद आप् स्वयं सोच लीजिए कि विराज नें क्याँ किया होगा अथवायह सभी करना उसकेलिए कितना आसान हौ गय़ा होगा। "
"अगर ठाकुर कि उस थानेदारनी बेटी नें यहसभी विधी केँ लिए हमदर्दी केँ चलतेतथा कानून कों अपने हाॅथ मे लेकर किया हैं। " चौधरी नें सोचते हुए कहा___"तोँ यह भि होँ सकता हैं कि उसनेइस सबके बारे मे अपने पुलिस विभाग केँ किसीआला अफसर कों भि नहि बताया होगा। "
"ज़ाहिर सि बात हैं। " अवधेश नें कहा___"अगर वोँ बताती तोँ उसेयह सभी करने कां कोई भि उसकाआला अफसर इजाज़त नं देता औऱ अगर उसकेइस कृत्य कि जानकारी किसीआला अफसर कों होती तोँ अवश्य वोँ उसके खिलाफ़ कानून कों अपने हाॅथ मे लेने केँ लिए ऐक्शन लेता। "
"यहाॅ पऱ मे भि अपनीबात रखना चाहता हूॅ। " सहसा अशोक मेहरा नें कहा___"औऱ वोँ यह कि ऐसा भि तोँ हौ सकता हैं कि रितू केँ इस कृत्य केँ बारे मे उसके किसीआला अधिकारी कों सभीकुछ पता हि होँ औऱ वोँ उसकी सहमति मे हि यहसभी कररही होँ। "
"यह तुम् कैसी बेवकूफी कि बातें कररहे हौ अशोक?" चौधरी कि ऑखें फैलीं___"यह बात तुम् भि अच्छी तरह जानते होँ कि यहाॅ केँ पुलिस महकमें केँ किसी भि आला ऑफिसर कि ऐसी ज़ुर्रत नहि होँ सकती कि वोँ हमारे खिलाफ़ ऐसाकोई क़दम उठाने केँ लिए अपने किसी जूनियर शिपाही कों कहसके। उन्हें भि पता हैं कि ऐसा करने कां अंजाम कितना भयंकर होँ सकता हैं उनकेलिए। "
"भयंकर अंजाम तोँ तब होगा नं चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें कहा___"जब आपको सबूत केँ संगयह नज़रआए कि पुलिस नें ऐसाकुछ किया हैं। जब आपकोकुछ ऐसा नज़र हि नहि आएगा तौ आप् भला क्याँ कर लेंगे उनका? ख़ैरयह बात तोँ पुलिस केँ आला अफसरान कों पता हि हैं कि वोँ आपके खिलाफ़ ज़ाहिर रूप सें कोईठोस कार्यवाही नहि कर सकते हें, इसलिए संभव हैं कि उन लोगों नें यहसभी गुप्त रूप सें शुरुआत किया हौ ताकि हमें उनकी किसी कार्यवाही कां भान तक न् हौ सके। वरना आप् स्वयं सोचिए चौधरी साहब कि पुलिस कि एक् मामूली सि इंस्पेक्टरनी मे इतना साहस औऱ जज़्बा केसे होँ जाएगा कि वोँ आपके खिलाफ़ स्वयं कोई ऐक्शन लें सके?यह तौ उसे भि पता होगा नं कि पोलखुल जाने पर्र आप् उसका क्याँ हस्रकर सकते हें? इसलिए यह स्पष्ट हें चौधरी साहब कि बग़ैर किसीआला ऑफीसर कि सह केँ वोँ थानेदारनी ऐसा करने कां सोच भि नहि सकती हैं। "
"तुम्हारी बात भि सही हैं। " चौधरी केँ दिमाग़ कि बत्तियाॅ जैसे एकाएक हि रौशन हौ उठीथीं, बोला___"दूसरी बातयह कि सारा प्रदेश औऱ पुलिस महकमा इसबात कों जानता हैं कि हम् जनता केँ संग कितना बड़ा अत्याचार करते हें। यही नहि बल्कि ऐसा वोँ हरकाम भि करते हें जिसे ग़ैर कानूनी क़रार दिया जाता हैं। पुलिस महकमा इसकेलिए हमारे खिलाफ़ कोई कार्यवाही इसलिए नहि कर पाता क्योंकि एक् तोँ उसकेपास हमारे खिलाफ़ कोई सबूत नहि होता दूसरे हमारा दबदबा औऱ पहुॅच केँ असर सें भि वोँ ख़ामोश रह जाते हें। "
"निःसंदेह। " अवधेश कह उठा___"आपकी बात बिलकुल सच हैं चौधरी साहब। इस लिएअब पुलिस प्रशासन केँ पासयही एक् चारा हैं कि वोँ गुप्त रूप सें हमारे खिलाफ़ किसी कार्यवाही कों अंजाम दें। "
"इसका मतलबयह हुआ। " अशोक नें कहा___"कि रितू औऱ विराज केँ संगसंग अब हमें पुलिस कां भि ख़तरा हैं। इन दोनो भइया बेहन सें तौ हम् निपट भि लेंगे मगर पुलिस प्रशासन सें केसे निपटेंगे? मामला अगर केन्द्र तक गय़ा होगा तौ हमारे लिए बड़ी मुश्किल होँ जाएगी चौधरी साहब। "
"नहि अशोक। " चौधरी नें ठोस लहजे मे कहा___"यह मामला इतना भि संगीन नहि हैं कि इसकी गूॅज केन्द्र तक पहुॅच जाए। तुम् कुछ अधिक हि ऊपर कि सोचरहे होँ। "
"फिन भि चौधरी साहब। " सहसाइस बीच अवधेश बोल पड़ा___"हमें इस बारें मे भि सोचना तोँ चाहिए हि। क्याँ पता हमारा कोईऐसा दुश्मन होँ जिसने इसकेलिए केन्द्र सरकार केँ काॅन खड़ेकर दियेहों। "
"अगरऐसा होता भि। " चौधरी नें कहा___"तौ केन्द्र सरकार अपनीतरफ सें हमारे खिलाफ़ जाॅच पड़ताल केँ लिए किसी सीबीआई जैसे लोगों कों नियुक्त करती। वोँ यहाॅआते औऱ हमसे पूॅछताछ करते। मगर ऐसा तोँ कहींदूर दूर तक समझ मे हि नहि आँ रहा कि ऐसाकुछ हैं। ज़ाहिर हैं कि यह मामला यहीं तक सीमित हैं। अतः हम् यहाॅ केँ पुलिस महकमें केँ आला ऑफिसर्स कि क्लास अब अवश्य लेंगे। "
"वैसे डिटेक्टिव केँ रूप मे हमने हरीश राणे कों इस मामले मे लगा तौ दिया हि हैं। " अवधेश नें कहा___"सारी सच्चाई कां पताअब वही लगाएगा। देखते हें वोँ इस सबकी क्याँ रिपोर्ट देता हैं हमें?"
अवधेश कि बात पऱ चौधरी केवलसिर हिलाकर रह गय़ा। कुछदेर ऐसी हि कुछ औऱ बातें हुईं उसकेबाद सभी अपने अपनेकाम केँ सिलसिले मे वहाॅ सें निकललिए।
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उधर हवेली मे।
सबने एक् संग हि बैठकर नाश्ता किया थां। उसकेबाद प्रतिमा केँ पिता जगमोहन सिंह सबसे विदा लेकर हवेली सें निकललिए थें। उनको गुनगुन तक छोंड़ने केँ लिए स्वयं अजय सिंह अपनी वाहन सें गय़ा थां। प्रतिमा कों अपने पिता केँ चले जाने सें बहुतदुख हुआ थां। वर्षों बादउसे अपने पिता इसरूप मे मिले थें। उसकादिल कररहा थां कि वोँ भि अपने पिता केँ संग हि चलीजाए। जगमोहन सिंह नें चलने केँ लिएकहा भि थां मगर ज़रूरी कामों कां हवाला देकरअजय सिंह नें यहीकहा कि हम् सभीफिन कभी अवश्य आएॅगे। अजय सिंह जानता थां कि हालात अभि ऐसे नहि हें कि उसके पत्नि बच्चे कहीं आँ जा सकें।
इस वक़्त ड्राइंग रूम मे प्रतिमा औऱ शिवा हि थें। जोँ आमने सामने सोफों पर्र बैठेहुए थें। प्रतिमा जहाॅ अपने पिता केँ बारे मे सोचसोच कर दुखी होँ रही थि वहीं शिवा नीलमव सोनम केँ बारे मे सोचसोच कर ख़याली पुलाव बनारहा थां। उसके चेहरे पऱ गर्दिश कररहे भावों मे प्रतिपल बदलाव आता नज़ररहा थां। सोनमउसे पहली नज़र मे हि बेहद मनपसंद आँ गई थि औऱ उसनेइस बात कां ज़िक्र अपनीमाॅ प्रतिमा सें भि किया थां। उसने प्रतिमा सें कहा थां कि उसे सोनम बहोत अच्छी लगती हैं। काश उससे उसकी विवाह होँ जाए। मगर प्रतिमा नें इसबात केँ लिए शिवा कों शख्ती सें समझा दिया थां कि ऐसाकभी नहि होँ सकता। वोँ उसकी बड़ी बेहन हैं औऱ बेहन सें भइया कि विवाह कभी नहि हौ सकती हैं। प्रतिमा कि यहबात सुनकर शिवा कां दिल बुरीतरह सें टूट गय़ा थां।
गाॅव कि हर लड़की याँ स्त्री कों मात्र भोगने कि चीज़ समझने वाला शिवा आजकल सोनम केँ प्रेम मे देवदास सां नज़रआने लगा थां। उसेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि यह अचानक उसे क्याँ हौ गय़ा हैं? सोनम केँ प्रति उसकेदिल मे मीठा मीठा सां दर्द क्यूं होनेलगा हैं? हर लड़की कि भाॅति वोँ उसे भि हाॅसिल करके भोगने कि बात क्यूं नहि सोचरहा? पिछली सारीरात वोँ इन्हीं सभी बातों कि वजह सें सो नहि पाया थां। उसे सोनम सें खुलकर बात करने मे अब झिझक होनेलगी थि। हलाॅकि वोँ उसकी मौसी कि लड़की थि औऱ उसकी बड़ी बेहन लगती थि। मगर पहली नज़र मे उसे देखने केँ बाद हि उसके प्रति उसकीसोच औऱ उसके अंदर कां हाल बड़ा अजीब सां गय़ा थां। नाश्ता करते टाइम भि वो सबकी नज़रें बचाकर सोनम कों चोरी सें देख हि लेता थां। यद्दपि सोनम उससेखुल कर बातें कररही थि, लेकिन एक् भइया बेहन केँ रिश्ते सें। सोनम कि बातों कां वोँ हाॅ याँ नहि मे थोडा बहोत जवाबदे देता थां। उसकेइस बिहैवियर सें अजय सिंह भि अंदर हि अंदर चौंक पड़ा थां। अनुभवी अजय सिंह कों समझते देर न् लगी कि उसका अय्याश बेटा सोनम केँ हुश्नो शबाब कों देखकर चारो खाने चित्त हौ चुका हैं। हलाॅकि सोनम औऱ नीलम कों देखकर उसका स्वयं कां हाल भि शिवा सें जुदा नं थां मगर उसके अंदर उनके प्रति प्रेमी वाला प्रेम कां अंकुर नं फूटा थां।
नानाजी औऱ अजय सिंह केँ जाने केँ कुछदेर बाद हि नीलमव सोनमऊपर अपने कमरे मे चली गई थि। जबकि प्रतिमा व शिवा ड्राइंगरूम मे हि बैठेरहे थें। इस ड्राइंग रूम मे छाईगहन ख़ामोशी सें सहसा प्रतिमा कि तंद्रा टूटी। उसने अपने बेटे शिवा कि तरफ देखा तौ उसेगहन सोचों मे गुमहुआ पाया। यह देखकर वो हौले सें चौंकी।
"कहाॅगुम हैं मेरा बेटा?" फिन प्रतिमा नें ज़रा स्वयं कों सम्हालते हुए कहा___"क्याँ अभि तक भूत नहि उतरा?"
"अ.आपने कुछकहा क्याँ?" शिवा नें सहसा चौंकते हुएकहा।
"हाॅपूछ रहीहूॅ कि क्याँ अभि भि भूत नहि उतरा हैं दिलो दिमाग़ सें?" प्रतिमा कहने केँ संग हि मुस्कुराई थि।
"भ.भूत???" शिवा चकरा सां गय़ा___"कौन सां भूत माॅम?"
"प्रेम वालाभूत। " प्रतिमा नें कहा___"बेटा यह प्रेम वालाभूत बहोत हि खतरनाॅक होता हैं। जिसके सिर चढ़ता हैं न् फिनकभी उतरता हि नहि हैं। "
"यह आप् क्याँ कहरही हें माॅम?" शिवा नें झेंपते हुएकहा।
"अरेरे। " प्रतिमा मुस्कुराई___"देखो तोँ केसे शरमारहा हैं आज मेरा बेटा। बेटा यह इश्क़ न् बहोत बुरीबला हैं। यह इश्क़ कम्बख्त उसी सें होता हैं जोँ हमेंकभी नसीब हि नहि हौ सकता। "
"यह तोँ ग़लतबात हैं माॅम। " शिवा नें कहा___"आपने भि तौ डैड सें इश्क़ हि किया थां औऱ फिन वोँ आपको नसीब भि तोँ होँ गए। "
"हाॅ मगर तेरेडैड औऱ मे आपस मे भइया बेहन तोँ नहि थें नं। " प्रतिमा नें कहा___"उन रिश्तों मे अगर इश्क़ हौ तौ कुछ भि करके हम् एक् होँ सकते हें मगरइस रिश्ते मे ऐसा नहि होता। क्योंकि इस रिश्ते वाले इश्क़ कों यह समाजयह दुनियाॅ कभी स्वीकार नहि करती बल्कि इन रिश्तों केँ बीच होँ गए इश्क़ कों पाप कां नाम देती हैं यह दुनिया। इससे परिवार कि मान मर्यादा औऱ इज्ज़त कां हनन होँ जाता हैं। "
"मे यहसभी समझता हूॅ माॅम। " शिवा नें कहा___"मुझे पता हैं कि भइया बेहन केँ बीचयह नाता ग़लत हैं। मगरयह उनकेलिए ग़लत होता हैं नं माॅम जौ पाक़साफ होते हें। हम् तौ ऐसे हें जौ इन्हीं रिश्तों कों भोगने कि सुंदर ख़्वाहिश रखते हि नहि हें बल्कि भोगते भि हें। "
"हाॅमगर यहबात देश समाज कों पता तौ नहि हैं नं। " प्रतिमा नें कहा___"यह सभी तौ घऱ केँ अंदर होता हैं औऱ बिना किसी कि जानकारी केँ होता हैं। इसलिए जब तक इन रिश्तों केँ बीच कि सच्चाई दुनिया सें छुपी हैं तब तक हम् भि पाक़साफ हि हें बेटा। "
"कुछ भि कहिये माॅम। " शिवा नें जैसे दृढ़ता सें कहा___"मे सोनम कों हद सें ज़्यादा पसन्द करनेलगा हूॅ। मेरेदिल मे उसके प्रति प्यार कां अंकुर फूट चुका हैं। कल सारीरात मे इस बारे मे सोचता रहा औऱ फिनइस नतीजे पर्र पहुॅचा हूॅ कि मे अगर किसी लड़की सें विवाह करूॅगा तौ वोँ सोनम सें हि करूॅगा। हाॅ माॅम, पता नहि क्यूं पर्र मुझेअब ऐसा लगनेलगा हैं कि अगर सोनम मेरी जाने हयात नं बनी तौ मे एक् भि लम्हा जी नं सकूॅगा। "
प्रतिमा अपने बेटे कि इसबात सें आश्चर्यचकित रह गई। अभि तक तोँ उसेयही लगरहा थां कि शिवायह सभी उससे सोनम कों भोगने केँ उद्देश्य सें हि कहरहा थां मगरइस समय उसके चेहरे केँ भावचीख चीखकर उसेबता रहे थें कि वोँ सोनम केँ लिए कितना सीरियस हौ चुका हैं। प्रतिमा कां दिलो दिमाग़ सुन्न सां पड़ गय़ा। उसेसमझ न् आया कि इस विषम परिस्थिति मे वोँ अपने बेटे कों आख़िर केसे समझाए? वोँ समझ सकती थि कि प्रेम मुहब्बत कैसी चीज़ होती हैं औऱ फिन इंसान कि क्याँ हालत होँ जाती हैं।
"देखो बेटा। " फिन प्रतिमा नें बहोत हि सीरियस भाव सें लेकिन समझाते हुए कहा___"यह सभीठीक नहि हैं। सोनम केँ प्रति ऐसी फीलिंग्स रखना अच्छी बात नहि हैं। होँ सकता हैं कि तुम्हारा सोनम केँ प्रति यह मात्र एक् आकर्षण हौ, जिसे तुम् प्रेम समझरहे होँ। ख़ैर, मे यहकहरही हूॅ कि यह अभि पहली स्टेज हैं। अभि तुम् इस सबकेलिए स्वयं कों समझा भि सकते हौ औऱ स्वयं कों इसके प्रभाव सें बचा भि सकते होँ। इसलिए बेहतर होगा कि तुम् इस पर्र विचार करकेअमल करो। दूसरी बात, सोनम तुम्हारी बड़ी बेहन हैं। उसकेमन मे तुम्हारे प्रति ऐसाकुछ भि नहि होगा मुझे अच्छी तरहपता हैं। लेकिन अगरउसे पताचल गय़ा कि तुम् उसके बारे मे ऐसा सोचते होँ तोँ वोँ तुम्हारे दिल कां हाल नहि समझेगी बल्कि तुम्हें ग़लत नेचर कां मानते हुए तुमसे नफ़रत करने लगेगी। "
"ऐसा नहि होगा माॅम। " शिवा कि आवाज़ सहसा भर्रा सि गई, बोला___"मे उसे स्वयं समझाऊॅगा कि मे उससे कितना प्रेम करनेलगा हूॅ। उसे बताऊॅगा कि मेरेदिल मे उसकेलिए केवल औऱ केवल प्रेम हैं औऱ हाॅयह भि कहूॅगा माॅम कि अगरउसे लगता हैं कि मेरे प्रेम मे कोईखोट याँ गंदगी हैं तौ उसे मुझे ठुकरा देने कां औऱ मुझसे नफ़रत करने कां पूराहक़ हैं। मे सारी ज़िंदगी उसके सुंदर चेहरे कों अपनी ऑखों मे बसाकर तथा उसकी यादों केँ सहारे जी लूॅगा। उसके अलावा मेरी ज़िंदगी मे दूसरी कोई लड़कीकभी नहि आएगी। "
प्रतिमा कों ज़बरदस्त झटकालगा। ऐसालगा जैसे सारा आसमान एकाएक हि भरभरा कर उसकेसिर पऱ गिर पड़ा हौ। उसे अपने काॅनों पऱ यकीन नहि हौ रहा थां कि उसने शिवा केँ मुख सें जौ सुना वोँ सच हैं याँ ग़लत। कितनी हि देर तक वोँ किंकर्तब्यविमूढ़ सि स्थिति मे बैठीउसे अपलक देखती रही।
"मे जानता हूॅ माॅम कि आपकोआज मेरीइन सभी बातों पर्र बेहद आश्चर्य हौ रहा होगा। " शिवा गंभीरता सें कहरहा थां___"बात भि सच हैं। किसीकौए सें यह उम्मीद नहि कि जा सकती कि वोँ कोयल कि तरह मीठा भि बोल सकता हैं। मगर सुना हैं कि जहाॅ किसी चीज़ कि उम्मीद नहि होती वहीं पऱ एक् नया जादूहुआ करता हैं। कदाचित मेरेसंग भि ऐसा हि होँ गय़ा हैं। कल सारीरात सोचता रहा मे कि मे क्यूं सोनम कि तरफइस हद तक अट्रैक्ट होताजा रहाहूॅ? मेरेदिल मे क्यूं उसकेलिए प्रेम जागरहा हैं? प्रश्न तौ मुझे नहि मिलामगर इतना एहसास अवश्य हुआ कि सोनम केँ बिना मेरी ज़िंदगी कां कोई मतलब नहि रह जाएगा। आज आपकी बातों नें मुझे अंदर सें हिला तौ दिया हैं माॅममगर मेरे दृढ़ निश्चय मे औऱ भि अधिक इज़ाफा भि होँ गय़ा हैं। "
प्रतिमा कों झटके पर्र झटकेलग रहे थें। उसका दिलो दिमाग़ जाम सां हौ चुका थां। सुना तोँ थां उसने भि कि प्यार कां रोगजब लगता हैं तोँ पत्थर सें पत्थर दिल इंसान कों भि पिघला देता हैं औऱ उसकाअसर यह होता हैं कि इश्क़ केँ नशे मे डूबाहुआ इंसान फिन बहोत हि हसीन ख़यालों कां बन जाता हैं। उसकेमुख सें कड़वी बातें नहि निकला करती। इश्क़ हौ जाने केँ बाद इंसान कि सोच औऱ उसके ख़यालात बदल जाते हें। वोँ अपने प्रियतम कि हि खुशियों केँ बारें मे सोचता रहता हैं। हर लम्हा यही सोचता हैं कि कभीऐसा कोई लम्हा न् आनेपाए जिसके तहत उसके प्रियतम कों ज़रा सि भि तक़लीफ होँ जाए। किसी केँ सुंदर चेहरे कों अपनी पलकों तलेबसा करतथा उसकीयाद केँ सहारे सारी ऊम्रकाट लेने वाले डायलाॅग आज शिवा केँ मुख सें खारिज़ हौ रहे थें। जिसने किसी सें इश्क़ किया होगाउसे यहबात अवश्य समझ मे आई होगी कि शिवा केँ यह डायलाॅग किसहद तक सच थें।
अभि प्रतिमा शिवा कि इनसभी बातों सें बुतबनी बैठी हि थि कि सहसातभी ड्राइंगरूम मे नीलमव सोनम एक् संगआकर खड़ी हौ गईं। प्रतिमा कि नज़र जैसे हि उन दोनो पर्र पड़ी तौ उसने जल्द सें अपने चेहरे केँ भावों कों छुपा लिया औऱ फिन एकाएक हि उसकी नज़र शिवा पर्र पड़ी तोँ मन हि मन चौंक पड़ी। शिवा कि नज़र सोनम पर्र स्थिर थि। एकाएक हि उसकी ऑखों मे सोनम केँ प्रति बेपनाह मुहब्बत कां सागर भीषण हिलोरें लेताहुआ नज़रआया उसे। कहते हें कि ऑखेंसभी कुछ बयांकर देती हें। प्रतिमा कों शिवा कि ऑखों नें बता दिया कि वोँ सोनम केँ प्रति अपने वजूद केँ हर ज़र्रे पर्र केवल औऱ केवल मुहब्बत छलकाए बैठी हें।
"माॅम मे औऱ सोनम दिदी। " उधर ड्राइंगरूम मे आते हि नीलम नें खुशी वाले लहजे मे कहा___"घूमने जारहे हें। दिदी कहरही हें कि उन्हें हमारा यह गाॅव देख्ना हैं औ हमारे खेत भि देख्ना हैं। "
"ओहचलठीक हैं। " प्रतिमा नें सहसा नीलम कि तरह ध्यान सें देखते हुए कहा___"पर्र तुम् दोनो अकेले केसे जाओगी?"
"इनकेसंग मे चला जाताहूॅ माॅम। " शिवाभला यह सुनहरा अवसर अपने हाॅथ सें केसे जाने देता, अतः तपाक सें बोल पड़ा थां____"मे इन्हें बहोत अच्छे सें अपनायह गाॅव औऱ अपने सारेखेत दिखा दूॅगा। "
"कोई ज़रूरत नहि तुम्हें हमारे संग जाने कि। " नीलम नें सहसा तुनक मिजाज़ी सें कहा___"हम् दोनो स्वयं हि देख लेंगे। क्यूं दिदी?"
"बात तोँ तेरीसही हैं। " सोनम नें कहा___"मगर शिवा कों भि संग लें लेंगे तौ कोई दिक्कत थोड़ी न् हैं। आख़िर भइया हैं वोँ हमारा। हमारे संग रहेगा तोँ हमें भि कंफर्टेबल फील होगा। हैं नं मौसी?"
"बिलकुल ठीककहा तुमने बेटा। " प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा___"मगर अगरयह जाएगा तोँ नीलम औऱ यह दोनोआपस मे झगड़ा हि करेंगे। इसलिए एक् कामकरो बाहर् खड़े हमारे सुरक्षा करने वाले आदमियों मे सें एक् दो कों संग लेँ जाओ। वोँ क्याँ हैं नं ज़माना बहोत ख़राब हैं। कोईऊॅच नीच हौ गई तोँ समस्या हौ जाएगी। इसलिए तुम् दोनो केँ संग मे दो सुरक्षा करने वाले व्यक्ति रहेंगे तौ मे भि बेफिक्र रहूॅगी। "
"हाॅयह ठीक रहेगा माॅम। " नीलम नें शिवा कों चिढ़ाने केँ लिए अपनीजीभ दिखाते हुए कहा___"इस लंगूर सें तौ वोँ हि अच्छे रहेंगे। हमें भि लगेगा कि उनके रहते हम् पर्र कोईऑच नहि आएगी। इसके रहते तौ कोई भि हमें छेंड़ सकता हैं औऱ यह बेचारा मार केँ डर सें कुछबोल भि नहि पाएगा। "
"ओये क्यूं मेरे भइया कों ऐसाबोल रही हैं तूँ?" सोनम नें ऑखें दिखाते हुए कहा___"अच्छा भला स्मार्ट तौ हैं हमारा भइया। तेरी ऑखें ख़राब हें जोँ तुम्हे वोँ लंगूर नज़रआता हैं। "
"आपनेसही कहा दिदी। " शिवा नें आवेश मे सोनम कों दिदी कह तौ दियामगर अगले हि समय उसकी आवाज़ काॅप गई। मन हि मनउसे अपनी बेबसी पऱ बेहद गुस्सा आयामगर फिन स्वयं कों सम्हाल कर बोला___"जोँ स्वयं हि बंदरिया जैसीहों उन्हें सामने वाला लंगूर हि दिखेगा न्। "
"ओये तमीज़ सें बातकर समझा। " नीलम नें घुड़की सि दि उसे___"भूल मत कि मुझसे छोटा हैं तूँ औऱ फिनअगर मैने तुम्हे लंगूर कह भि दिया तौ क्याँ हौ गय़ा? मैने तोँ तुम्हें प्रेम सें लंगूर कहा हैं। "
"वाउ दिदी वाउ। " शिवाकह उठा___"प्रेम सें कहने केँ लिए लंगूर शब्द हि मिला थां आपको?देख लीजिए माॅम, मे छोटाहूॅ तौ सभी मुझसे अपने बड़े होने कां रौब झाड़ते हें। "
शिवा नें इतनी मासूमियत सें यहकहा थां कि सोनम केँ होठों पर्र मुस्कान उभरआई। वोँ जल्दी हि शिवा केँ बगल पऱ जाकर बैठी औऱ फिनउसे अपने साइड सें छुपका कर बोलि____"जाने दे नं भइया। यह छिपकली तौ हैं हि दिमाग़ सें पैदलमगर मैने तौ तुझेही ऐसा वैसाकुछ नहि कहा नं? मुझेपता हैं तूँ हमारा सबसे स्वीटेस्ट भइया हैं। चलअब नाराज़गी छोंड़ औऱ मुस्कुरा कर दिखा। उसकेबाद हमें घूमने भि जानां हैं। "
सोनम कि बातों कां असरपलक झपकते हि शिवा पर्र न् हौ ऐसा तौ अब होँ हि नहि सकता थां। वैसे भि अब तोँ अगर वोँ उसे ज़हर खाने कों भि बोलती तौ वोँ खुशी सें खा लेता। ख़ैर सोनम केँ कहने पऱ उसकेइस तरहउसे छुपका लेने पऱ शिवा कां चेहरा ताज़े खिले गुलाब कि मानिंद खिलउठा थां। इस टाइम वोँ इतनाखुश हौ गय़ा थां कि अबअगर उसेमौत भि आँ जाती तौ वोँ उसकेलिए ईश्वर सें शिकवा न् करता।
उधर प्रतिमा चुप बैठीइन तीनो कि बातें सुनरही थि औऱ नीलमव सोनम दोनो केँ हि चेहरों कों बड़े ध्यान सें देखेजा रही थि। जैसे समझना चाहती हौ कि दोनो केँ मन मे घूमने जाने केँ सिवाकुछ औऱ तोँ नहि हैं। शिवा कों वोँ इन दोनो केँ संगजान बूझकर नहि भेजरही थि। क्योंकि उसेपता थां कि शिवाइस समय सोनम केँ प्रेम मे पागल हैं। सोनम नें अगरउसे किसीबात केँ लिए कहींभेज दिया तोँ वोँ बिनाकुछ सोचे समझेचला जाएगा औऱ यह दोनो उसकेचले जाने पऱ कुछ भि करने केँ लिए आज़ाद होँ जाएॅगी। प्रतिमा इसबात केँ लिएमना भि नहि कर सकती थि कि वोँ दोनो घूमने न् जाएॅ। इसी लिए शिवा कि स्थान वोँ उन्हें सुरक्षा गार्ड्स कों संग मे जाने कां कहरही थि।
"तोँ कब जानां हैं तुम् दोनो कों?" फिन प्रतिमा नें पूछा।
"कब जानां हैं क्याँ मतलब हैं माॅम?" नीलम नें कहा___"हम् दोनो तौ रेडी होकर आँ हि गए हें औऱ जा हि रहे थें। "
"चलोठीक हैं। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि शिवा कि तरफ देखा___"बेटा जाओ तुम् गेस्ट हाउस सें दो आदमियों कों बोलदो। वोँ इन दोनो केँ संगचले जाएॅगे। "
प्रतिमा केँ मन मे अचानक हि गेस्ट हाउस मे ठहरेउन आदमियों कां ख़याल आया थां। जिन्हें अजय सिंह केँ बिजनेस संबंधी यार सहायता केँ लिएभेज गए थें। नीलमव सोनम केँ संग उनमे सें हि किन्हीं दो आदमियों कों भेजना उचितलगा थां उसे। वोँ हरतरह सें इन दोनो कि सुरक्षा कर सकते थें। उसे अपने आदमियों कि काबीलियत पर्र अबकोई भरोसा नहि रह गय़ा थां। ख़ैर प्रतिमा केँ कहने पऱ शिवा सोफे सें उठा औऱ बाहर् कि तरफचला गय़ा।
"तौ तुम् दोनो केसे जाओगी यहाॅ सें?" प्रतिमा नें शिवा केँ जाते हि पूछा___"मेरा मतलब हैं कि घूमने केँ लिए किसी गाड़ी याँ जीप सें जाओगी याँ ऐसे हि पैदल जानां हैं?"
"इतना ज़्यादा पैदलकौन चल पाएगा माॅम?" नीलम नें कहा___"पहले सारा गाॅव घूमना फिन खेतों कि तरफ जानां। नहि माॅम, इतना ज़्यादा पैदल चलना मेरेबस कां तौ हर्गिज़ भि नहि हैं। "
"हाॅ मुझेपता थां यही कहोगी तुम्। " प्रतिमा नें मन हि मनखुश होतेहुए कहा___"ख़ैर, बाहर् जीप खड़ी हैं। उसमे हि बैठकर चले जानां औऱ हाॅउन आदमियों केँ संग हि रहना। "
"ओके माॅम। " नीलम नें कहा___"वैसे आज लञ्च मे क्याँ बनेगा? वोँ क्याँ हैं नं मुझेआज आपके हाॅथ कां बना बैगन कां हलवा खानां हैं। "
"क.क्याँ कहा????" सोनम उसकीबात सुनकर बुरीतरह चौंकी थि। जबकि प्रतिमा कहने केँ संग हि इधरउधर देखने लगी थि।
"भागो दिदी भागो। " नीलम सोनम कां हाॅथ पकड़कर खींचते हुए बोलि___"वरना माॅम मेरेसंग संग आपकी भि पिटाई करने लगेंगी डंडे सें। "
सोनम कों कुछ भि समझ मे नं आया कि यह अचानक हुआ हैं क्याँ हैं? बैगन कां हलवा औऱ फिन नीलम कां यह कहना कि भागो वरना माॅम डंडे सें पिटाई करने लगेंगी। सोनम कों कुछसमझ नं आया। यह अलगबात हैं कि नीलम केँ खींचने पर्र वो सोफे सें उठकर बाहर् कि तरफ हि लड़खड़ाते हुएभाग ली थि। जबकि इधर प्रतिमा उन दोनो केँ जाते हि मुस्कुरा कररह गई थि।
नीलमव सोनम जैसे हि बाहर् आईं तौ देखा कि शिवा केँ संगदो हट्टे कट्टे व्यक्ति जीप केँ पास हि खड़े थें। शिवा उन्हें कुछबता रहा थां। यहदेख कर नीलमव सोनमउस तरफबढ़ चलीं। जीप केँ पास पहुॅचते हि वोँ दोनो शिवा केँ पास हि खड़ी हौ गईं।
"दिदी यह दोनो आप् लोगों केँ संग जाएॅगे। " शिवा नें नीलम कि तरफ देखते हुए कहा___"बाॅकी माॅम नें तोँ आपकोसभी कुछ समझा हि दिया होगा। "
"हाॅ समझा दिया हैं। " नीलम नें कहा___"औऱ हाॅ इनकोबोल दे कि हमारा हर कहना भि मानेंगे। "
"अरे दिदी यहसभी कहने कि ज़रूरत नहि हैं। " शिवा नें कहा___"यह दोनो बहोत अच्छे औऱ समझदार ब्यक्ति हें। आपकोपता नहि हैं यह दोनो हि तगड़े फाइटर हें। इनके रहते आप् दोनो कों कोईछू भि नहि सकता। "
"ओह आई सि। " नीलम नें कहा___"फिन तौ अच्छी बात हैं। चलिये दिदी जीप मे बैठते हें। "
थोड़ी हि देर मे नीलमव सोनमजीप मे बैठगईं। एक् व्यक्ति जीप कि ड्राइविंग शीट पऱ बैठ गय़ा जबकि दूसरा उसकेबगल मे। जीप कि पिछली शीट पर्र नीलमव सोनमबैठ गई थि। जीप जैसे हि चलनेलगी तोँ शिवा नें सोनम कि तरफ प्रेम भरी नज़रों सें देखते हुएबस इतना हि कहाघूम फिनकर जल्द आइयेगा। उसकीइस बात पऱ नीलमव सोनम दोनो हि मुस्कुरा उठीं। लेकिन इसबार उनकीइस मुस्कान मे ऐसाभेद छिपा थां जिसे शिवा जैसा कूढ़मगज लड़का किसी भि तरह सें नहि समझ सकता थां।
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उधर मुम्बई मे।
सबके आँ जाने सें पूरे बॅगले मे एक् अलग हि रौनकतथा चहलपहल सि होँ गई थि। लेकिन खिले खिले चेहरों पर्र भि एक् उदासी थि जोँ इसबात कां सबूत थि कि विराज केँ यहाॅ न् होने सें सभी कितने दुःखी थें। सबकोपता थां कि विराज किसकाम केँ लिएइस बार गाॅव गय़ा हुआ थां। सबकेसंग तौ गौरी घुली मिली रहती लेकिन अकेले मे अपने बेटे केँ लिए बहोत दुखी हौ जाती थि। उसेइस बात कि तक़लीफ भि थि कि विराज जब सें गय़ा थां तब सें एक् दिन भि मोबाइल नहि लगाया थां औऱ नां हि जगदीश ओबराय कि वजह सें उसने अपने बेटे कों मोबाइल लगाया थां।
जगदीश ओबराय नें गौरी सें कहा थां कि वोँ मोबाइल करके विराज कों कमज़ोर नं बनाए। माॅ बेटे केँ बीच कां नाता भावनाओं केँ बहोत हि नाज़ुक बंधन सें जुड़ा होता हैं जिससे दोनो हि ऐसे हालातों मे कमज़ोर पड़ जाते हें। लेकिन जगदीश ओबराय नें यह भि कहा थां वोँ परमेश्वर सें अपने बेटे कि सलामती कि दुवाकरे। यह उसकीजंग हैं उसे स्वतंत्रता पूर्वक इसजंग कों इसके अंजाम तक पहुॅचाने दो। सभी अपनी अपनी स्थान विराज केँ लिए चिंतित थें तथा परेशान थें मगर सबके दिलों मे उसकेलिए प्रेम थां। सबके होठों पऱ उसकी सलामती केँ लिए दुवाएॅ थि।
गौरी, करुणा तथापवन कि माॅ। पवन कि माॅ कां नाम रुक्मणी थां। यह तीनो हि आपस मे खूब सारी बातें करती रहती थि। लेकिन अकेले मे तीनों हि विराज केँ लिए चिंतित हौ जाती थि। एक् दूसरे कों अपनी चिंता व तकलीफ़ नहि दिखाती थि। क्योंकि कोई नहि चाहता थां कि सबकेबीच एक् तनाव याँ दुखभरा माहौल क्रियेट हौ जाए। जगदीश ओबराय वअभय सिंह स्वयं भि अपनी स्थान विराज केँ लिए चिंतित थें मगर सबको तसल्ली देते रहते थें औऱ यही कहते कि सच्चाई कि हमेशा विजय होती हैं। इसलिए इसकेलिए इतना चिंतित व परेशान नं होंकोई।
पवन कों जगदीश ओबराय नें अपनी कंपनी मे हि एक् अच्छी पोस्ट पर्र काम मे लगा दिया थां। अतःपवन अब अधिकतर कंपनी मे हि रहता थां। लेकिन हर वक़्त उसकामन अपनेयार केँ लिए अशान्त रहता थां। उसे विराज सें शिकायत भि थि कि वोँ उसे यहाॅ सुरक्षित छोंड़ कर स्वयं मौत केँ मुह मे चला गय़ा थां।
पवन कि बेहनआशा अधिकतर निधी केँ संग हि रहती थि। निधी सुभह विद्यालय जाती औऱ फिनसाम कों वापस आँ जाती थि। हर वक्त अपनी शरारतों सें सबको परेशान करने वालीयह गुड़िया अचानक सें इसतरह ख़ामोश होँ गई थि जैसेयह शदियों सें ऐसी हि रही थि। उसकीइस ख़ामोशी कों सभीयही समझते कि वोँ अपने प्यारे सें बड़े भाई केँ लिए सबकीतरह हि दुखी हैं। कोईयह नहि जानता थां कि उसने अपनी छोटी सि इस ऊम्र अपने हि भाई सें प्यार कां कितना बड़ारोग लगा लिया थां। जिसके चलते उसकाहर वक़्त शरारतें करना जाने कहाॅगुम होकररह गय़ा थां।
आशा कों पता थां कि निधी शुरुआत सें हि ऐसी नहि थि। शुरुआत शुरुआत मे उसकीइस ख़ामोशी कों वोँ स्वयं भि यही समझती थि कि वोँ सबकीतरह विराज केँ लिए दुखी हैं। इसलिए अब वोँ शरारतें नहि करती हैं। मगर जल्द हि उसेइस कारण केँ अलावा भि दूसरा कारणसमझ मे आँ गय़ा थां। दरअसल निधी भि अब अपने भइया कि तरह डायरी लिखने लगी थि। जिसमें वोँ अपने औऱ अपने प्रियतम भइया केँ बीच जन्में इस प्यार केँ हर पहलुओं केँ बारें मे लिखती थि। अपनेदिल केँ जज़्बातों कों वोँ डायरी केँ कागज़ों पऱ लिखती थि। उसेपता थां कि डायरी मे उसके द्वारा लिखा गय़ा हर लफ़्फ किसी डायनामाइट सें कम नहि हैं। कहने कां मतलबयह कि अगर किसी कों यहपता चलजाए कि सबके दिलों मे राज करने वाली उनकीयह नटखट गुड़िया अपने हि सगे भइया सें प्यार करती हैं तोँ यकीनन इसबात सें डायनामाइट कि तरह विस्फोट हौ जानां थां।
डायरी मे अपनेदिल कां हाल बयां करने केँ बाद निधीउस डायरी कों अपने कमरे मे हि रखी आलमारी केँ अंदर वाले लाॅकर मे रखकर लाॅकलगा देती थि। मगर एक् दिन कदाचित उसकाभेद खुल जानां थां इसलिए उससे ग़लती होँ गई। दरअसल पिछले दिन सुहब सुभह कि हि बात हैं। आशागरम चाय लेकर निधी केँ कमरे मे पहुॅच गई। उसने देखा कि बेड पऱ चित्त अवस्था मे लेटी निधी केँ सीने पऱ एक् मोटी सि डायरी थि जिसे वोँ दोनो हाॅथों सें पकड़े सोई हुइ थि। आशा जोँ कि निधी केँ संग हि रहती थि। पिछली रातउसे आधीरात केँ क़रीब शूशूलगी तौ उसकी नींदखुल गई। उसने देखा कि रात केँ उस टाइम टेबल लैम्प जलाकर निधीकुछ लिखरही थि। उस टाइम उसने सोचा थां कि वोँ अपनी पढ़ाई हि कररही हैं। बाथरूम सें आने केँ बाद उसनेकहा भि थां उससे कि अबउसे सो जानां चाहिए।
आशा नें प्लेट सहितगरम चाय केँ कप कों बेड केँ पास हि दीवार सें सटे एक् छोटे सें टेबल पऱ रखा औऱ फिन वोँ निधी केँ पास गई। उसकी नज़र डायरी पर्र पड़ी। आशा नें ग्रेजुएशन तौ नहि किया थां लेकिन दस बारह तक पढ़ी लिखी थि वोँ। हल्दीपुर गाॅव मे बारवीं तक विद्यालय थां। आगे काॅलेज कि पढ़ाई पढ़ने केँ लिए चिमनी जानां पड़ता थां, जौ कि पास केँ हि गाॅव मे थां। ख़ैर, डायरी देखकर उसेयह तोँ समझ आँ गय़ा कि ऐसी डायरी निधी कि पढ़ाई मे तोँ उपयोग होती नहि होगी तौ फिनऐसा क्याँ हैं इसमें जिसे वोँ सोते वक़्त भि लिएहुए हैं।
आशा नें बहोत हि आहिस्ता सें निधी केँ हाॅथों सें उस डायरी कों निकाला औऱ फिनबेड सें दोकदम पीछेहट कर उसने डायरी कों खोला। डायरी केँ शुरुआत केँ बहुतपेज अलगअलग चीज़ों सें भरे थें। जैसे कि हरदेश केँ कोड्स वगैरा। अपनेदेश भारत केँ अलगअलग राज्यों केँ मानचित्र। उसकेबाद मुख्य पेज शुरुआत होते थें।
मुख्य पेज पर्र हि मोटे मोटे अच्छरों मे आशा कों लिखा नज़र आया____"जियें तोँ जियें केसे.बिन आपके??"इस टाइटल केँ नीचे हि एक् मध्यम साइज़ केँ दोदिल बनेहुए थें, जोँ कि संग मे हि मिलेहुए थें। जिसमे एक् तरफ वाले मे राज औऱ दूसरे वाले मे निधी लिखा थां। उसके नीचे मोटे अच्छरों मे हि लिखा थां____"MY LOVE"
आशा कों यहसभी देखकर ज़बरदस्त झटकालगा। इतनाकुछ देखकर कोई भि समझ सकता थां कि माज़रा क्याँ हैं? आशायह जानकर हैरान रह गई कि निधी अपने हि बड़े भइया सें प्रेम करती हैं। आशा नें झटके सें बेड पर्र सोरही निधी केँ चेहरे कि तरफ देखा। निधी केँ चेहरे पऱ इस टाइम सारे संसार कि मासूमियत विद्यमान थि। उस चेहरे कों देखकर उसे यकीन हि नहि हुआ कि यहऐसा कर सकती हैं। मगर उसके हि द्वारा लिखा गय़ा यहहर लफ्ज़ क्याँ झूॅठा होँ सकता थां?
आशा केँ पूरे शरीर मे एक् अजीब सि झुरझुरी तेज़ रफ्तार सें दौड़ गई। अंदर हि अंदर जैसे एकाएक हि कोई तेज़ जज़्बातों कां भयंकर तूफान उठा जिसने उसके समूचे अस्तित्व कों हिलाकर रख दिया। उसी जज़्बातों केँ तूफान कां असर थां कि उसकी ऑखों मे एकाएक हि ऑसूभर आए थें। फिन जैसे उसने स्वयं केँ जज़्बातों कों सम्हाला औऱ डायरी केँ उसपेज कों पलटा। दूसरे पेज पर्र कोई ग़ज़ल लिखी हुई थि जिसेआशा नें पढ़ना शुरुआत किया।
अजब हाल हैं दिल कां बताना भि नहि मुमकिन।
लब ख़ामोश हें ऑखों सें जताना भि नहि मुमकिन।।
सबके सामने मुस्कुराने कां हुनर भि सीख लेंगे,
मगर तन्हाई मे वोँ हुनर आजमाना भि नहि मुमकिन।।
तौबा तोँ कि हैं हमने केँ तुमसे रूबरू नं होंगे मगर,
एक् लम्हा फाॅसलों मे रह पाना भि नहि मुमकिन।।
बहोत दिल कों समझाया मगरयह एहसास हुआ,
किसीतरह दिल कों बहलाना भि नहि मुमकिन।।
ज़हरदे दो हमको औऱ यह किस्सा तमामकर दो,
यूॅ प्यास बेचैनी करजी पाना भि नहि मुमकिन।।
क्षमा करना केँ हमने बेरुख़ी अख़्तियार करली,
क्याँ करें केँ कोई औऱ एक्सक्यूज़ भि नहि मुमकिन।।
पूरी ग़ज़ल पढ़ने केँ बादआशा कां दिलो दिमाग़ सुन्न सां पड़ता चला गय़ा। अभि वोँ यहसभी सोच हि रही थि कि सहसा वोँ बुरीतरह चौंकी। बेड पर्र पड़ी निधी केँ शरीर मे हलचल सि हुइ प्रतीत हुइ उसे। यह देखकर आशा नें जल्द सें डायरी कों आगेबढ़ कर निधी केँ बगल सें हि ऐसी पोजीशन मे रख दिया कि अगर निधी कि नज़रउस पर्र पड़े भि तोँ उसेयही लगे कि वोँ डायरी उसके हाॅथों सें सोते टाइम हि छूटकर एक् तरफगिर गई थि। डायरी रखने केँ बादआशा जल्द सें टेबल पर्र सें गरमचाय कां कब प्लेट सहित उठाया औऱ फिन अपने चेहरे पऱ खुशीतथा प्रेम केँ भाव लातेहुए निधी केँ चेहरे केँ क़रीब झुकते हुए कहा____"गुड मार्निंग गुड़िया। चलोचलो सुभह होँ गई हैं। देखो तौ गरमा गर्मगरम चाय तुम्हारे पेट मे जाने केँ लिए केसे उतावली होँ रही हैं। "
आशा केँ इस प्रकार कहने पऱ निधी नें कुछ हि पलों मे अपनी ऑखेंखोल दि औऱ फिनआशा कि तरफदेख कर वोँ बस ज़रा सां हि मुस्कुराई। आशा केँ हाॅथ मे गरमचाय कां कपदेख कर वोँ बेड सें उठी औऱ बेड कि पिछली पुश्त कि तरफ खिसककर उसने अपनीपीठ उस पर्र टिकाई औऱ फिन उसनेआशा केँ हाथ सें गरमचाय कां कप लें लिया। जबकि गरमचाय कां कप पकड़ाते हि आशा सीधी खड़ी हौ गई। वोँ देख्ना चाहती थि कि निधी कि नज़रजब अपनी डायरी पऱ पड़ेगी तौ उसका कैसा रिएक्शन होता हैं?
आशा कों इसकेलिए ज़्यादा देर तक इन्तज़ार नहि करना पड़ा। निधी नें कप सें गरमचाय कां पहला हि शिप लिया थां कि उसकी नज़र बाएॅ साइड उल्टी पड़ी अपनी डायरी पर्र पड़ी औऱ फिन उसके चेहरे पऱ एकदम सें डर औऱ घबराहट केँ मिले जुलेभाव उभरआए। उसके पीछे खिसकने सें डायरी उलटकर थोड़ी औऱ दूर हौ गई थि तथाउलट सि गई थि। निधी नें जल्दी हि अपना एक् हाॅथ बढ़ाकर डायरी कों अपने कब्जे मे लें लिया औऱ वहीं अपने हिप्स केँ पास हि करीब-करीब छुपा सां लियाउसे। उसकीइस नादानी पूर्ण हरकत सें आशा केँ होठों पऱ फीकी सि मुस्कान उभरआई। उसकेमन मे पहले तौ आया कि वो उससेउस डायरी तथा डायरी मे लिखे मजमून केँ संबंध मे कोईबात करेमगर उसनेयह सोचकर अपनेमन सें इस ख़याल कों झटक दिया कि उसके पूछने पर्र कहीं निधी बुरीतरह डर न् जाए।
"अच्छा मे जारही हूॅ गुड़िया। " फिनआशा नें सामान्य भाव सें कहा___"पवन कों भि उठादूॅ। उसे भि ड्यूटी जानां होगा न् औऱ हाॅ तुँ भि जल्द सें फ्रेश होकर नीचे आँ जानां। नाश्ता तैयार होने हि वाला हैं। "
"ठीक हैं दिदी। " निधी नें भि स्वयं कों सामान्य दर्शाते हुए कहा___"आप् जाइये मे आतीहूॅ थोड़ी देर मे। "
निधी कि बातसुन करआशा कमरे सें बाहर् चली गई। जबकि उसके जाने केँ बाद निधी एकाएक हि गहन विचारों मे कहींखो सि गई। अभि वोँ विचारों मे खोई हि थि कि तभी उसकाफोन मोबाइल बजउठा। उसने सिरहाने पऱ हि एक् तरफरखे फोन कों उठाया औऱ स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे अनजान नंबर कों देखा। उसके चेहरे पऱ सोचने वालेभाव उभरे। उसे समझ नं आया कि उसकेफोन पऱ यह अनजान नंबर सें आने वालीकाल किसकी होँ सकती हैं?
"हैलो। "फिन जाने क्याँ सोचकर उसनेकाल रिसीव किया औऱ उसे कानों सें लगाते हि कहा थां।
"हैलो गुड़िया। " उधर सें रितू कि जानी पहचानी आवाज़ सुनकर निधी बुरीतरह चौंक पड़ी थि। उसेआशा, रुक्मणी, पवन औऱ करुणा आदि केँ द्वारा पताचल गय़ा थां कि रितू विराज कां पूरीतरह सें संगदे रही हैं। रितू केँ इसतरह अपने हि माॅ बाप केँ खिलाफ़ हौ जाने सें हरकोई हैरान थां। मगरसभी यह भि जानते थें कि रितू एक् अच्छी लड़की हैं। वोँ ग़लत कां संगकभी नहि दे सकती। उसकेमाॅ बाप नें अब तक उससेसच छुपाया हुआ थां इसीलिए उसका व्यवहार इन लोगों केँ प्रति ऐसा थां।
"गुड़िया तुँ सुनरही हैं न्?" निधी केँ चुपरह जाने पर्र उधर सें रितू कि पुनः आवाज़ उभरी___"देख, तुझेही पूराहक़ हैं मुझसे नाराज़ होने कां औऱ तुम्हारी तरफ नाराज़ होना भि चाहिए। मे चाहती हूॅ कि तेरा जोँ मनकरे तुँ मुझे वोँ सज़ादे मेरी गुड़िया। तेरीहर सज़ा मे हॅसते हॅसते कुबूल कर लूॅगी। बस एक् बार अपनेमुख सें मुझे दिदी कहदे। शपथ सें उसकेबाद अगर मुझेमौत भि आँ जाएगी तौ उसका मुझेकोई दुख नहि होगा। "
"नं.नहींऽऽऽ। " रितू कि बातों सें निधी कि ऑखों सें पलक झपकते हि ऑसूबह चले, बुरीतरह उतावलापन कर बोलि___"यह आप् कैसी बातें कररही हें दिदी? मुझे आपसेकोई शिकायत कोई नाराज़गी नहि हैं। मुझेपता हैं कि इस सबमें आपकाकभी कोईदोष थां हि नहि। इसलिए प्लीज आप् यहसभी मत कहिए। मुझे तौ बहोत खुशी हौ रही हैं कि मेरी सबसे अच्छी वाली दिदी नें मुझे मोबाइल किया। "
"हाॅ पऱ मुझे खुशी नहि हुईँ। " उधर सें रितू नें अजीबभाव सें कहा___"औऱ वोँ इसलिए कि मेरी सबसे प्यारी गुड़िया नें अपनीइस गंदी दिदी कों कोई सज़ा नहि सुनाई। "
"प्लीज दिदी। " निधी नें आहतभाव सें कहा___"ऐसा मत कहिए नं स्वयं कों औऱ अगर आपने दुबारा फिन सें अपनेलिए ऐसाकहा तोँ मे आपसेबात नहि करूॅगी, हाॅ नहि तोँ। "
इसबार निधी केँ ऐसा कहने पर्र उधर सें रितू कि रुलाई फूट गई। यहीयो सुनना चाहती थि वोँ निधी केँ मुख सें। निधी केँ मुख सें उसकायह तकिया कलाम कितना मीठा लगता थां इसका एहसास वहींकर सकती थि। फोन पर्र रितू केँ सिसकने कि आवाज़ सुनकर निधी भि दुखी हौ गई। वो मोबाइल पऱ हि रितू कों अपने तरीके सें मनाने लगी कि वोँ नं रोएॅ। आख़िर कुछदेर बादसभी ठीक होँ हि गय़ा।
"औऱ बताइये दिदी। " फिन निधी नें सामान्य भाव सें कहा___"आज आपको मेरीयाद केसे आँ गई?"
"तेरीयाद तौ रोज़ हि आती हैं गुड़िया। " उधर सें रितू नें सहसा गंभीरता सें कहा___"लेकिन अपराध बोझ केँ चलते तुझसे बात करने कि हिम्मत नहि करपारही थि। "
"आप् फिन सें ऐसी बातें करने लगीं। " निधी नें कहा___"इन बातों कों अब जाने दीजिए न् दिदी। ख़ैरयह बताइये कि कैसी हें आप्?"
"मे तोँ अच्छी हि हूॅ गुड़िया। " रितू नें कहा___"पर्र मेरादिल करता हैं कि तुम्हारी तरफ कितना जल्द अपनी ऑखों केँ सामने देखूॅ औऱ तुझसे ढेर सारी अच्छी अच्छी बातें करूॅ भि औऱ तुझसे सीखूॅ भि। "
"मेरा भि ऐसा हि दिल करता हैं दिदी। " निधी नें कहा___"मगर शायद अभि यह मुमकिन नहि हैं। "
"हाॅयह तोँ हैं गुड़िया। " रितू नें कहा___"अच्छा एक् बात पूछूॅ तुझसे?"
"हाॅजी दिदी। " निधी केँ चेहरे पर्र सोचने वालेभाव उभरे___"पूॅछिए न्। "
"क्याँ राज नें तुझेही कुछकहा हैं?" उधर सें रितू नें कहा___"याँ फिन किसीबात पर्र उसने तुझेही डाॅटा हैं। तुँ मुझसे बता गुड़िया मे यहाॅ इसके काॅन खींचूॅगी। इसकी हिम्मत कैसी हुईँ मेरी गुड़िया कों कुछ कहने कि। "
"नहि नहि दिदी। " निधी बुरीतरह हड़बड़ा गई थि, बोलीं___"ऐसा कुछ भि नहि हैं। मुझे किसी नें कुछ नहि कहा। आपकोऐसा क्यूं लगा दिदी?"
"राजबता रहा थां। " रितू नें निधी कि धड़कनों कों बढ़ाते हुए कहा___"कि तुँ कुछ वक्त सें उससेबात हि नहि कररही हैं औऱ नाँ हि तूँ उसके सामने आती हैं। उसका कहना हैं कि उसने तौ ऐसा तुम कोकुछ भि नहि कहा जिससे तूँ उससेबात हि करनाबंद करदे। मुझेपता हैं कि वोँ तुम्हे अपनीजान सें भि अधिक चाहता हैं। अगर तुम को ज़रा सि भि किसी चीज़ सें तक़लीफ होँ जाए तौ उसकी जैसेजान पऱ बनआती हैं। फिन क्याँ बात हैं गुड़िया, आख़िर ऐसीकौन सि बात हौ गई हैं जिससे तूँ उससेबात नहि करती हैं। यहाॅ तक कि उसके सामने भि नहि आनां चाहती?"
निधी कों समझ नं आया कि वोँ रितू कों इसका क्याँ जवाबदे? सच्चाई वोँ बता नहि सकती थि औऱ झूॅठ तौ ऐसा होता हैं जौ अधिक दिनों तक छुपा नहि रह सकता थां। हलाॅकि उसेयह उम्मीद नहि थि कि विराज यहसभी समझता न् होगा। उसे तोँ यह भि उम्मीद नहि थि कि वोँ यहबात सीधेतौर पर्र रितू दिदी सें बोल देगा।
"क्याँ हुआ गुड़िया?" निधी कों ख़ामोश जानकर उधर सें रितू नें फिन कहा___"तूँ चुप क्यूं होँ गई? बता न् क्याँ बात होँ गई हैं ऐसी?"
"ऐसी कोईबात नहि हैं दिदी। " निधीअब बोले भि तोँ क्याँ___"मे तोँ बसऐसे हि नाराज़ हूॅ उनसे। आप् तोँ जानती हि हें कि मे कैसीहूॅ। "
"एक् बात हमेशा याद रखना गुड़िया। " उधर सें रितू नें कहा___"तुँ हम् सबकीजान हैं, खासकर राज कि। तुम्हारी तरफ नहि पता कि तेरेबात न् करने सें वोँ यहाॅ कितना दुखी रहता हैं। मुझे तोँ पता हि नं चलताअगर मे कलरात उसके कमरे मे अचानक पहुॅच नं गई होती तोँ। मेरे पूछने पर्र हि उसनेयह सभी बताया। ख़ैर, एक् बात औऱ कहना चाहती हूॅ गुड़िया औऱ वोँ यह कि मैने तौ अपनेमाॅ बाप औऱ भइया सें हर नाता तोड़ लिया हैं। क्योंकि वोँ सभी बुरे हि नहि बल्कि पापीलोग हें। इस दुनिया मे अबअगर मेराकोई सच्चा भइया हैं तौ वोँ हैं राज। मुझेपता हैं कि हमारा भइयाराज कोहिनूर हीरा हैं। उसकेदिल मे सबकेलिए बेपनाह प्रेम औऱ सम्मान हैं। इसलिए यह हम् सबका भि फर्ज़ बनता हैं कि हम् उसे वैसा हि प्रेम व सम्मान दें। "
"मुझेपता हैं दिदी। " निधी नें कहा___"औऱ यकीन मानिए कि उनकेलिए मेरेदिल मे बेपनाह प्रेम व सम्मान हैं औऱ यह मरतेदम तक कम नं होगा बल्कि बढ़ता हि जाएगा। "
"मुझे तुमसे यही उम्मीद हैं गुड़िया। " रितू नें निधी कि बातों कों सामान्य हि समझते हुए कहा___"औऱ देख्ना जिसदिन सभीकुछ ठीक हौ जाएगा नं उसदिन सें हम् सभी एक् संग हि रहेंगे औऱ हम् सब बहनें अपने भइया कों जीभर केँ प्रेम करेंगे। "
"जी बिलकुल दिदी। " निधी केँ होठों पर्र सहसा फीकी सि मुस्कान उभर आई___"अच्छा दिदी अब हम् बाद मे बात करेंगे। वोँ क्याँ हैं न् कि मुझे बाथरूम जानां हैं। फिन विद्यालय भि जानां हैं। "
"ओहहाॅ। " रितू नें कहा___"चल ठीक हैं गुड़िया। अच्छे सें पढ़ाई करना औऱ हाॅ अपना ख़याल भि रखना। "
इसकेसंग हि मोबाइल कालकट गई। निधी नें गहरी साॅसली औऱ फिनकुछ देर तक इन सारी बातों केँ बारे मे सोचती रही। फिन वोँ उठी औऱ बाथरूम कि तरफबढ़ गई।
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इधर मे नीलम कों मैसेज केँ द्वारा सभीकुछ समझाने केँ बाद विधी केँ मां पिताजी याँ यूॅ कहूॅ कि अपने सासू माँ ससुरजी सें मिला। यह पहला अवसर थां जब मे उनकेपास हरकाम सें फारिग़ होकर मिला थां। मैने इसके पहले उनसे नं मिल पाने केँ लिए माफ़ी भि माॅगी। यहअलग बात हैं कि उन दोनो नें मुझे अपने सीने सें लगा लिया औऱ ढेर सारा प्रेम औऱ दुवाएॅ दि। मुझे अपने सीने सें जाने कितनी हि देर तक लगाएरहे थें वोँ। मे समझ सकता थां कि वोँ इससमय भावनाओं केँ भॅवर मे गोतेलगा रहे होंगे। नैना फूफी नें मेरे बारे मे सभीकुछ उन्हें बता दिया थां। सभीकुछ जानकर उन्हें दुख भि हुआ औऱ खुशी भि हुई।
बहुतदेर तक मे उनकेपास हि बैठारहा उसकेबाद मे उनसे इजाज़त लेकर हरिया काका केँ पास आँ गय़ा। हरिया काका सें मैने मंत्री केँ पिल्लों कां हालचाल लिया औऱ उन्हें यहकहा कि मंत्री कि बेटी कों गंदे तरीके सें टार्चर नं करें। उन्हें यह भि कहा कि वोँ उन लड़कों केँ संग भि वोँ सभी नं करें जोँ इसके पहले वोँ कररहे थें। मैनेऐसा इसलिए कहा कि अबउन लड़कों केँ संग हि उनकी बेहन भि थि। उसकाइस सबमें कोई कुसूर तौ थां नहि इसलिए उसके सामने उन लड़कों केँ संग वोँ सभी करना उचित नहि थां।
मेरी बातें हरिया काका कों समझ मे आँ गई थि। मंत्री कि बेटी रचना पहले कि अपेक्षा अब बिलकुल चुप हि रहती थि। अपने भइया केँ संगसंग तथा भइया केँ तीनों दोस्तों कि तरफ उसका देखने कां भि मन नहि करता थां। ज़ाहिर हैं कि उसकी ऑखों केँ सामने हरिया काका नें उसके भइया केँ संग वोँ सभी किया थां जिसके चलतेउसे अपने आप् मे जिल्लत महसूस हुइ थि औऱ वोँ सभी उसके भइया कि करतूतों कि वजहहे हि हुआ थां।
सुभह कां नास्ता हम् सबने एक् संग हि किया औऱ फिन मे औऱ आदित्य घऱ सें बाहर् कि तरफचल दिये। अभि दो क़दम हि हम् दोनोआगे बढ़े थें कि पीछे सें रितू दिदी कि आवाज़ आई। उनकी आवाज़ सें हम् दोनो हि ठिठकगए। थोड़ी देर मे रितू दिदी हमारे पास आँ गईं। इस वक़्त वोँ कत्थई कलर केँ जीन्स औऱ उसी सें मैच करतेटाप मे थि। टाप केँ ऊपर लेदर कि छोटी सि जाॅकेट डालाहुआ थां उन्होंने। ऑखों मे सन ग्लासेज थां। मे उन्हें इसलुक मे देखता हि रह गय़ा। मेरेइस तरह देखने पर्र उन्होंने मुस्कुरा कर मेरे दाहिने गाल पर्र हल्की सि चपत लगाई औऱ फिन हमारे संग हि बाहर् कि तरफ चलने लगीं।
"एक् बात तुम् दोनो हि कानखोल करसुन लो। " बाहर् आते हि रितू दिदी नें हिटलरी अंदाज़ मे हम् दोनो कि तरफ एक् एक् नज़र देखते हुए कहा___"मुझसे बग़ैर पूॅछे अथवा मेरी जानकारी केँ बिना तुम् दोनोकोई भि काम नहि करोगे। हम् हरकाम एक् संग हि करेंगे। कुछसमझ मे आया तुम् दोनो कों? याँ फिन मे दूसरे तरीके सें समझाऊॅ?"
"दूसरे तरीके सें केसे दिदी?" मैने मुस्कुराते हुए शरारत सें पूछा थां।
"मेरेपास दूसरा एक् हि तरीका हैं माई डियर ब्रदर। " रितू नें लेदर कि जाॅकेट केँ एक् छोर कों पकड़कर हल्का सां एक् तरफ किया तोँ जींस केँ पैन्ट मे खोंसा हुआ उनका सर्विस रिवाल्वर नज़र आँ गय़ा हमें। जबकि उसे दिखाते हि उन्होंने कहा____"जब काम बातों सें नं बने तोँ जल्दी इस रिवाल्वर कि नाल सामने वाले कि खोपड़ी मे लगाकर साराकाम उसे समझा देना चाहिए। दैट्स आल। आईहोप कि तुम् दोनोअब अच्छी तरहसमझ गए होगे। "
"चलिए आपने इतना कान्फिडेंस केँ संगकहा हैं तौ समझ हि लेते हें। " मैने पुनः शरारत सें कहा___"वरना हम् दोनो तौ ऐसे कूढ़मगज इंसान हें जोँ किसी भि तरह सें नहि समझ पाते। क्यूं आदी??"
"तुँ मुझे अवश्य मरवाएगा अब। " आदित्य दूर हटतेहुए बोल पड़ा थां।
"क्याँ दोस्त। " मैने बुरा सां मुह बनाते हुए कहा___"सारे इमेज कां बेड़ा गर्क़ कर दिया तुमने। मेरायार होकरडर गय़ा? हद हैं दोस्त, तुम्हें तोँ मेरीतरह थरथर काॅपने लग जानां चाहिए थां। "
"बहोत हौ गय़ा। " रितू दिदी नें ऑखें दिखाईं___"अब बोलराज क्याँ प्लान बनाया हैं तूने नीलमव सोनम कों सुरक्षित यहाॅ लाने कां?"
"भइया वाहन कहाॅ गई?" मैने दिदी केँ प्रश्न केँ जवाब मे आदित्य कि तरफ देखते हुए कहा___"तुम् तोँ कहरहे थें कि सुभहजब हम् यहाॅ सें चलेंगे तोँ वाहन हमारे दरवाजे पऱ खड़ी मिलेगी। जबकि यहाॅ तोँ गाड़ी कहींदिख हि नहि रही। भइया इतना हसीन मज़ाक मत कियाकरो न्, वरना तुम् नहि जानते मुझेदिल कां दौरा सां पड़ने लगता हैं। "
"अबे मे मज़ाक नहि कररहा हूॅ दोस्त। " आदित्य नें अपना हाॅथ नचाते हुए कहा___"वोँ क्याँ हैं कि अभि कुछ हि देर पहले शेखर केँ मौसाजी आए थें। उन्होंने जबघऱ केँ बाहर् वाहन खड़ी देखी तोँ पूछने लगे कि यह कहाॅ सें आई? उनके पूछने पर्र मैने बताया कि हमने खरीदा हैं इसे। बस फिन क्याँ थां, बोलेचला कर बताएॅगे कि उन्हें वाहन कैसीलगी। "
"ओह तोँ इसका मतलब। " मैने कहा___"मौसा जी लेकेगए हें। मगर अभि तक आए क्यूं नहि वोँ?"
"आँ जाएॅगे दोस्त। " आदित्य नें कहा___"अभि थोड़ी देर पहले हि तोँ वोँ गए हें जब मे अंदर तुम्हें बताने गय़ा थां। "
"ओये तूने मुझे बताया क्यूं नहि कि तूनेकोई वाहन खरीदी हैं?" सहसा रितू दिदी शिकायती लहजे मे बोल पड़ीं___"औऱ मे अभि क्याँ बोलरही थि कि तुम् दोनो बिना मुझसे पूछेकोई काम नहि करोगे फिन क्यूं किया?"
"यह बात तौ आपने अभि कही हैं न् दिदी। " मैने उन्हें मनाने वाले लहजे सें कहा___"जबकि गाड़ी लेने कि बात तौ हमनेचार दिन पहलेआपस मे कि थि। बट प्राॅमिस दिदी, इसकेबाद कां हरकाम आपसेपूछ कर हि करेंगे। "
"चलकोई बात नहि। " रितू दिदी नें कहा___"लो वाहन भि आँ गई। क्याँ बात हैं राज, गाड़ी तोँ बहोत अच्छी ली हैं तूने। "
"इतनी भि अच्छी नहि हैं दिदी। " मैने कहा___"सेकण्ड हैण्ड हैं। ज़रूरत थि इसलिए थोडा ज़्यादा पैसे देकर लेना पड़ा। नई गाड़ी लेने कां अभि कोई मतलब नहि हैं। "
अभि हम् बात हि कररहे थें कि शेखर केँ मौसाजी नें हमारे पास हि वाहन कों रोंका औऱ फिन ड्राइविंग डोरखोल कर बाहर् आए।
"दोस्त आदित्य वाहन तोँ अच्छी हैं यह। " केशवजी नें कहा___"कितने मे पड़ीयह?"
"अधिक नहि मौसाजी। " आदित्य नें कहा___"दो लाख अस्सी हज़ार। हलाॅकि गरज़ हमारी थि वरना अस्सी हज़ार कां चूना नहि लगता हमें। "
"फिन भि दोस्त। " केशवजी नें कहा___"घाटा इतने मे भि नहि हैं। ख़ैर, छोंड़ो मे भि किसी ज़रूरी काम सें इधर सें गुज़र रहा थां। इसलिए अब मे चलताहूॅ। "
"जीठीक हैं मौसाजी। " हम् सबनेअदब सें हाॅथ जोड़लिए थें।
मौसाजी केँ जाने केँ बाद हम् तीनो हि उस गाड़ी मे जाकरबैठ गए। मैने ड्राइविंग शीट सम्हाली। मेरेबगल सें रितू दिदी बैठ गई जबकि आदित्य पिछली शीट पर्र बैठ गय़ा। सबकेबैठ जाने केँ बाद मैने वाहन कों स्टार्ट करआगे बढ़ा दिया।
"तौ क्याँ प्लान बनाया हैं तूने?" रास्ते मे रितू दिदी नें फिन मुझसे पूछा___"हम् उन दोनो कों वहाॅ सें केसे यहाॅ लाएॅगे? प्रकाश नाम कां मेरा एक् व्यक्ति हवेली मे हि सुरक्षा गार्ड केँ रूप मे काम करता हैं। उसी केँ द्वारा मुझेपता चला थां कि जिसदिन तुम्हारे वोँ नकली सीबीआई वालेडैड कों लेँ करगए थें उसीदिन हवेली पऱ डैड केँ कुछ बिजनेस संबंधी मित्र भि आए थें। उन सबकेसंग बहुत सारेऐसे व्यक्ति थें जोँ दिखने मे फाइटर लगते थें। प्रकाश नें बताया कि उनमे सें एक् कां नाम पाटिल थां जौ माॅम सें कहरहा थां कि ठाकुर साहबआएॅ तौ बता दीजिएगा कि हमारे यहसब व्यक्ति आज सें उनके हि आदेशों कां पालन करेंगे। "
"हाॅइस बात कां ज़िक्र नीलम नें भि मुझसे किया थां कल। " मैने दिदी कि तरफ एक् नज़र डालने केँ बाद कहा___"उसने बताया थां कि गेस्ट रूम मे कुछऐसे लोग ठहरेहुए हें जोँ दिखने मे बहुत हट्टे कट्टे लगते हें। "
"मतलबसाफ हैं कि हवेली जाकर वहाॅ सें उन दोनो कों लाना असंभव काम हैं। " रितू दिदी नें कहा___"वैसे भि उनसब आदमियों केँ रहते हवेली जाने कां मतलब हैं कि मौत केँ मुह मे जानां। सीबीआई वाले हादसे केँ बाद तोँ वैसे भि डैड कां क्रोध तुम् पर्र याँ यूॅ बोलो कि हम् पर्र अपनेचरम पर्र होगा। अतः उन्होंने सिक्योरिटी कां भि तगड़ा प्रबंध कर लिया होगा। ऐसे मे हम् हवेली नहि जा सकते औऱ अगर जाने कां सोचें भि तौ हमेंरात केँ वक़्त मे हि जानां चाहिए क्योंकि रात केँ अॅधेरे मे खतराकम हि रहता हैं। "
"हमें हवेली जाने कि ज़रूरत हि नहि हैं दिदी। " मैने दिदी सें कहा___"नीलम औऱ सोनम दिदी स्वयं हि हवेली सें बाहर् आएॅगी। "
"ऐसा केसे संभव होँ सकता हैं?" रितू दिदी केँ चेहरे पर्र चौंकने केँ भाव उभरे थें, बोलि___"मौजूदा हालात मे माॅम याँ डैडउन दोनो कों बाहर् आने हि नहि देंगे। क्योंकि अगर उन्होंने यहजान लिया होगा कि नीलम भि सच्चाई जान गई हैं तौ वोँ भि मेरीतरह उनके खिलाफ होँ जाएगी औऱ हवेली सें बाहर् जाने कि कोशिश करेगी। यहसोच कर माॅम याँ डैडउन दोनो कों किसी भि वजह सें हवेली केँ बाहर् नहि जाने देंगे। "
"औऱ अगर मे यह कहूॅ। " मैने दिदी केँ ऊपर जैसे धमाका सां किया___"कि इस सबके बावजूद नीलम औऱ सोनम दिदी हवेली सें बाहर् आएॅगी तोँ?"
"यह तोँ फिन जादू हि होगा। " रितू दिदी नें चकितभाव सें कहा___"जिस जादू कि मौजूदा हालात मे ज़रा भि उम्मीद नहि हैं। "
"जहाॅ उम्मीद नहि होतीअसल मे वहीं पऱ उम्मीद कि संभावना होती हैं दिदी। " मैने दार्शनिकों वाले अंदाज़ सें कहा____"खैर, यह जादू तौ होने हि वाला हैं। मैने नीलम कों हवेली सें बाहर् निकलने कां शानदार तरीका समझाया दिया थां। "
"त तरीका???" रितू दिदी बुरीतरह चौंक पड़ी____"कैसा तरीका?"
"दरअसल मैने सोनम दिदी केँ बारे मे सोचकर हि प्लान बनाया हैं दिदी। " मैने कहा____"यह तौ मुझे भि पता हैं कि सोनम दिदी पहलीबार हि यहाॅआई हें। इसलिए यह तौ एक् स्वाभाविक बात होती हैं कि जोँ इंसान पहलीबार कहीं जाता हैं तोँ वोँ उस स्थान केँ बारे मे अधिक सें ज़्यादा जानने याँ देख लेने कि ख्वाहिश रखता हैं। मैने भि इसीसोच केँ तहत प्लान बनाया। दूसरी महत्वपूर्ण बात नीलम नें यह भि बताया कि आज आपके नानाजी जीजारहे हें तथा उन्हें गुनगुन तक छोंड़ने केँ लिए स्वयं बड़े बापू गाड़ी सें जाने वाले हें। मैनेइन सभी बातों कों भि अपने प्लान केँ लिए सोचा थां। कहने कां मतलबयह कि जब बड़े पिताजी नानाजी जी कों लेकर गुनगुन जा चुके होंगे तब नीलमव सोनम दिदी सजधजकर होकरतथा अपने मिनीबैग मे अपनी सबसे ज़्यादा ज़रूरी चीज़ हि लेकर बड़ीमाॅ केँ पास आएॅगी। बड़ीमाॅ सें नीलमयह कहेगी कि सोनम दिदी हमारा गाॅवतथा हमारे खेत देख्ना चाहती हें, इसलिए हम् दोनोजा रहे हें। नीलम केँ मुख सें सोनम सहित जाने कि बातसुन कर यकीनन बड़ीमाॅ केँ मन मे यहबात आएगी कि कहींयह लोग यहाॅ सें भागने कां तोँ नहि सोचरही हें। लेकिन वोँ इसकेलिए उन्हें मना भि नहि कर पाएॅगी। क्योंकि बात तोँ मात्र गाॅवतथा खेत देखने कि होगी। इसकेलिए मना करने कि उनकेपास कोईठोस वजह नहि होगी। इस लिए वोँ उन दोनो कों जाने सें रोंक न् सकेंगी, मगरहाॅ ऐसा प्रबंध अवश्य कर सकती हें कि वोँ हवेली सें भागने वाले अपनेकाम मे सफल न् हौ सकें। इसकेलिए संभव हैं कि वोँ उन दोनो केँ संग एक् दोउनदो आदमियों कों भेजेंगी जोँ फाइटर जैसे दिखते हें। उनकेसंग अपने आदमियों कों यहसोच कर नहि भेजेंगी कि उन्हें अपने आदमियों पऱ अब भरोसा हीं नहि होगा। बात भि सही हैं, भला उनके आदमियों नें भरोसा करने लायकअब तक कोईकाम हि क्याँ किया हैं? ख़ैर, इस सारे मामले केँ लिए मैने नीलम कों भली भाॅति समझाया हुआ हैं कि वोँ तथा सोनम दिदी एक् समय केँ लिए भि अपने चेहरों पऱ ऐसेभाव नं लाएॅगी जिससे बड़ीमाॅ कों उन पऱ शक हौ जाए। क्योंकि फिनउस सूरत मे उनका वहाॅ सें निकलना मुश्किल होँ जानां हैं। यानी आप् यह भि कह सकती हें कि वोँ दोनो वहाॅ सें अपने सफलता पूर्वक कियेगए अभिनय केँ द्वारा हि निकल पाएॅगी। अब प्रश्न यह थां कि गाॅव याँ खेत घूमने पैदल याँ जीप सें जाएॅगी तोँ इसमें अधिककोई समस्या नहि थि। क्योंकि मुख्य कामयह हैं कि उन दोनो कां हवेली सें बाहर् आकर गाॅव कि सीमाओं कि तरफ बढ़ना थां। हवेली केँ बाहर् याँ यूॅ कहें कि गाॅव कि सीमा मे हि किसीखास स्थान पर्र हम् उन्हें घेर लेंगे। दैट्स आल। "
"उन दोनों कों हवेली सें बाहर् निकालने कां तरीका तौ बहोत हि अच्छा सोचा हैं तुमने। " रितू दिदी नें कहा___"मगर उन आदमियों केँ रहतेउन दोनो कों अपनेपास सुरक्षित लाना इतना आसानकाम नहि हैं। दूसरी बातयह भि हैं कि संभव हैं कि यहीबात मेरी माॅम केँ मन मे भि आई हौ। यानी कि उन्होने यह अंदाज़ा लगा लिया होँ कि नीलम नें तुम्हें मैसेज भेज दिया होगा कि उसे सच्चाई पताचल गई हैं अतःअब वोँ तुमसे मिलना चाहती हैं। उस सूरत मे तुम् सोचोगे कि अगर नीलम कां राज़ बड़ीमाॅ केँ सामने फाश होँ गय़ा तौ वोँ यकीनन बड़े पिताजी सें बताएॅगी औऱ फिन बहोत मुमकिन हैं कि नीलमव सोनम दोनो हि भयानक खतरे मे पड़ जाएॅ। ऐसे हाल मे तुम्हारी सबसे पहली प्राथमिकता यही होगी कि तुम् उन दोनो कों हवेली सें सुरक्षित बाहर् निकलना चाहोगे। आजजब नीलम नें उनसेयह कहा होगा कि सोनम दिदी यह गाॅवतथा हमारे खेत देख्ना चाहती हें औऱ वोँ उन्हें लेकरजा रही हैं तोँ यकीनन उनकेमन मे सबसे पहलेयही बातआई होगी कि कहींऐसा तौ नहि यह दोनो यहाॅ सें बहाने बनाकर निकल जानां चाहती हों। लेकिन उनकेमन मे यह भि होगा कि ऐसे हालात मे वोँ क्याँ करेंगी इसका अंदाज़ा भि तुम् लगा लोगे। अतः वोँ कुछऐसा इंतजाम करेंगी जोँ तुम्हारी सोच सें परे होँ अथवा जिसके बारे मे तुम् सोच हि न् सको। यानी कि संभव हैं कि उन्होंने तुम्हारे अंदाज़े कों ध्यान मे रखतेहुए अपनेदो आदमियों कों उन दोनो केँ संगभेज तोँ दिया हि होँ संग हि उनके जाने केँ बाद उन्होंने कुछ व्यक्ति औऱ भि उनके पीछेयह सोचकर लगा दियेहों कि अगर उनकी शंकासच हुइ तोँ बैकअप केँ लिएकुछ व्यक्ति एक्स्ट्रा रहेंगे। ताकिअगर ऐसी सिचुएशन बनजाए कि तुम् उनके पहले वाले आदमियों कां तिया पाॅचा करने मे कामयाब हौ जाओ तोँ पीछे सें आँ रहे उनके दूसरे व्यक्ति तुम्हें तुम्हारे इरादों मे कामयाब न् होनेदें। "
"मे रितू कि इन बातों सें पूरीतरह सहमतहूॅ राज। " सहसा आदित्य पीछे सें बोल पड़ा थां____"यकीनन ऐसा होँ सकता हैं। रितू कि माॅम केँ दिमाग़ केँ बारे मे जैसा तुमने बताया थां उस हिसाब सें मुझे भि लगता हैं कि वोँ ऐसाकुछ अंदाज़ा लगाकर सकती हें। अतः हमें भि उनके अनुसार हि सोचकर क़दम बढ़ाना होगा। वरना हम् पर्र तोँ जौ मुसीबत आएगी वोँ तौ आएगी हि लेकिन इस सबकेलिए नीलमव सोनम कां कितना बुराहाल हौ सकता हैं इसका हम् अंदाज़ा भि नहि लगा सकते। "
"तुम्हें क्याँ लगता हैं आदी?" मैने कहा___"कि यहसभी बातें मेरे दिमाग़ मे नहि आई होंगी? बेशकआई हें मेरे दोस्त। मुझे भि इसबात कां ख़याल हैं कि हरबार एक् हि दाॅव अथवा तरीका कारगर सिद्ध नहि हौ सकता। इससे सामने वाला हमारी सोच कां दायरा देख लेता हैं। हलाॅकि मेरा उसूल हि यही हैं कि मे सामने वाले कों वही सोचने पर्र मजबूर कर देताहूॅ जौ मे चाहता हूॅ। मे चाहता हूॅ कि सामने वालायह सोच बैठे याँ यहसमझ जाए कि मेरेपास बस एक् हि तरह कां दाॅव हैं। क्योंकि जबऐसा होगा तोँ सामने वालाफिन उसी केँ हिसाब सें अपनी चालें चलता हैं। जबकि मे उसकीउस चाल केँ बाद अपना दूसरा पैंतरा शुरुआत करूॅगा। ऐसा पैंतरा जिसके बारे मे वोँ सोच भि न् सकेगा। "
"इसका मतलब। " रितू दिदी नें कहा___"तुमने इस बारे मे पहले सें हि कुछ सोचाहुआ हैं याँ फिनयह कहूॅ कि ऐसाकुछ इंतजाम कररखा हैं तुमने। "
"बिलकुल सहीकहा दिदी आपने। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"आख़िर मुझे भि तोँ इसबात कां ख़याल रखना हि पड़ेगा न् कि उसतरफ शातिर दिमाग़ वाली मेरी बड़ीमाॅ भि मौजूद हें। बातअगर मात्र बड़े पिताजी कि होती तौ इतना घुमा फिराकर काम करने कि ज़रूरत हि नं पड़ती। लेकिन बड़ीमाॅ तौ फिन बड़ीमाॅ हें न्। ख़ैर, मे यहकहरहा हूॅ कि जिसतरह बैकअप केँ लिए बड़ीमाॅ नें दिमाग़ लगाया हौ सकता हैं उसीतरह मैने भि बैकअप कां इंतजाम कियाहुआ हैं। औऱ वैसे भि जंग मे बैकअप कां होना तोँ निहायत हि ज़रूरी होता हैं। जिस योद्धा केँ पास बैकअप नहि होता वोँ जंग केँ शुरुआत होते हि मातखा जाता हैं। "
"वोँ सभी तौ ठीक हैं। " आदित्य रितू दिदी सें पहले हि पूछ बैठा____"मगर तुमने बैकअप कां आख़िर इंतजाम क्याँ किया हैं?"
"क्याँ दोस्त आदी। " मैनेपलट कर एक् नज़रउसे देखने केँ बाद कहा____"तुम् न् ज़रा भि दिमाग़ नहि लगाते होँ। "
"अधिकबनो मत। " आदित्य नें तीखेभाव सें कहा___"साफ साफ बताओ कि क्याँ तीर मारा हैं तुमने?"
"लगता हैं शेखर केँ मौसा कों भूलगए हौ तुम्। " मैने पुनःपलट कर आदित्य कों देखकर कहा___"कल देखा नहि थां क्याँ तुमने कि केसे वोँ फार्महाउस पऱ अपने लट्ठधारी आदमियों कों लेकर हम् लोगों कों लेनेआए थें? बाद मे उन्होंने कहा भि थां कि अगर किसीबात कि ज़रूरत पड़े तौ जल्दी उन्हें याद करें हम्। बसफिन क्याँ थां समझदार व्यक्ति कों ऐसे मददगार व्यक्ति कां सहारा लेने मे ज़रा भि देर नहि करना चाहिए। कहने कां मतलबयह कि मैने उन्हें सारी सिचुएशन केँ बारे मे समझा दिया थां औऱ यहकहा थां कि बैकअप केँ रूप मे वोँ हमारे पीछे हि रहें। वोँ मैदान मे तभीआएॅ जब उन्हें यकीन होँ जाए कि हमारा पलड़ा अब डगमगाने लगा हैं औऱ हम् हारने वाले हें। तब उन्हें अचानक हि मैदान मे एन्ट्री मारनी हैं। बस उसकेबाद तोँ फिन हम् सभीकुछ सम्हाल हि लेंगे। "
"ओहअबसमझ आया। " आदित्य नें सहसा गहरी साॅस लेकर कहा___"इसी लिए वोँ उस वक़्त बोलरहे थें कि वोँ किसी ज़रूरी काम सें यहाॅ सें गुज़र रहे थें। "
"अब समझे तोँ क्याँ समझे डियर?" मैने मुस्कुराते हुए कहा___"बात तोँ तब थि जब तुम् इसके पहले हि समझ जाते। "
"हाॅ हाॅठीक हैं न्। " आदित्य नें खिसियाते हुए कहा___"पर्र मुझेयह बातसमझ नहि आई कि अगरयही बात थि तौ उस वक़्त उन्होंने हम् मे सें किसी कों बताया क्यूं नहि कि वोँ किस ज़रूरी काम सें गुज़र रहे थें?"
"लोकरलो बात। " मैने हॅसते हुए कहा___"उन्हें भला बताने कि ज़रूरत हि क्याँ थि? मुझे तोँ सभीपता हि थां क्योंकि मैने हि उनसेबात कि थि। उन्होंने तुमसे याँ दिदी सें इसलिए नहि बताया कि उन्होंने सोचा होगा कि मैने आप् दोनो कों बता दिया होगा। दूसरी बात आप् मे सें कोई उनसे पूछा भि तौ नहि कि वोँ किस ज़रूरी काम केँ लिए वहाॅ सें गुज़र रहे थें?"
"हाॅयह तोँ सहीकहा तुमने। " सहसा दिदी नें मेरीतरफ प्रसंसा भरी नज़रों सें देखते हुए कहा___"हमने तोँ उनसे पूछा हि नहि थां। मगर प्रश्न तौ हैं हि कि वोँ किस ज़रूरी काम सें गुज़र रहे थें?"
"ओफ्फो दिदी। " मैने कहा___"आपसे ऐसे प्रश्न कि उम्मीद नहि थि मुझे। बड़ी सीधी सि बात हैं वोँ अपने आदमियों कों इकट्ठा करने केँ लिएजा रहे थें। "
"ओहआई सि। " रितू दिदी नें कहा___"चल यह तोँ बहोत अच्छा किया तुमने जौ स्वयं केँ लिए भि बैकअप इंतजाम कर लिया हैं। वरना मे तौ सोचरही थि कि कहीं हम् फॅस हि न् जाएॅ किसीजाल मे। "
"ऐसे केसेफॅस जाएॅगे दिदी?" मैने कहा___"औऱ फिन रिस्क तोँ लेना हि पड़ेगा। यह तोँ कुछ भि नहि हैं, आने वाले वक़्त मे इससेकई गुना अधिक खतरा भि होगा जिसका हमें सामना करना पड़ेगा। "
"हाॅयह तोँ हैं। " दिदी नें कहा____"ख़ैर अभि तोँ सबसे ज़रूरी यही हैं कि किसीतरह नीलमव सोनम सुरक्षित हमें हाॅसिल होँ जाएॅ। उसकेबाद कि इतनी चिंता नहि हैं क्योंकि तबइसबात कां भय नहि रहेगा कि हमारा कोई अपना उनके चंगुल मे हैं। "
मे रितू दिदी कि इसबात पर्र बस मुस्कुरा कररह गय़ा। ऐसे हि बातें करतेहुए हम् बढ़ेचले जारहे थें हल्दीपुर कि तरफ। हम् तीनों हि पूरीतरह सतर्क थें। हम् इसबात कों भि बखूबी समझते थें कि खतरा केवलअजय सिंह कि तरफबस कां हि नहि थां बल्कि मंत्री दिवाकर चौधरी कि तरफ सें भि थां। दूसरी बातअब हम् पहचाने जा चुके थें दोनोतरफ इसलिए ख़तरा औऱ भि बढ़ गय़ा थां हमारे लिए। मगर सच्चाई कि राह पऱ चलने केँ लिए हम् अपने अपने हौंसलों कों आसमां कि बुलंदियों मे परवाज़ करवारहे थें। आने वाला वक्त बताएगा कि इसखेल मे किसकी जीत मिलती हैं औऱ किसेहार कां कड़वा स्वाद चखना होगा??
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दोस्तो, आप् सबके सामने मेगा एपसोड हाज़िर हैं। आशा करताहूॅ कि आप् सब कों पसन्द आएगा।
आप् सबकी प्रतिक्रिया औऱ आपके रिव्यू कां इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
bahut shandaar update. Ab aayega asli mazaa. q kee viraj ke sath sath mantri or ajay kaa bjb dimag ab chalne laga h. Khair dekhte h aage kya hotha h. Wait for another update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
awesome update bhay.तो अपना hero apne shikar से दो नहीं balki dus kadam aage की सोच raha h.mananaa padega raj के dimag ko bahut aage की सोच rakhi h usne.अब dekhte h aane wale updates में क्या क्या hotha h और lagta h sayad agle update में action bi hoga.ye shiva तो full lattu hu गया soniya pe.लेकिन अब change aake क्या fayda.usne और उसके baap ne milke joo काम kiye h vo तो नहीं badalne wale.un karmo के kiye की sazaa तो unhe bhugatni hi padegi.well mantri और उसके gang ne bi kind of sab कुछ samjh में aa गया h.अब देखना ye h vo detective क्या क्या krta h और अपना hero us से kese nipatataa h.ye क्या nidhi kaa raaz अब aasha ko ptaa chl गया अब क्या kare gi vo.क्या vo nidhi के bare में sab ko bata degi yaa khud hi nidhi ko samjhane की try kare gi.well let's see what happens next.
PEACE।
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