♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Superb kahani.abi puri padhi.gajab.
bhut jabardast likhte hu bhay.apka hindi bhasha pe prabhutv h.तो apki lekhni और khubsurat lagti h.
This iss one of the best kahaniyan I've ever read.
Jis prakaar से dhere dheere kahani ko unfold किया h woh wakai kabil e tarif h.
kahani me incest ko बहुत khub introduce किया woh bi sai जगह pe.
Kya ismein gauri और viraj के bich bi incest hoga?
Ek suggestion h.
Saare incest relations ko sensuously और seductively batana bhay.too mazaa aayega.
Eagerly waiting for next
I agree with you bro.hindi bhasha sacch mai kathin hoty h.lekin aapke pas iss bhasha pr bhut ankush h yeh pakki baat h. Waiting for the next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 14 》
अब तक,,,,,,
"अरे क्याँ बात हैं अजय?" प्रतिमा बुरीतरह चौंकते हुएबेड पर्र उठकर बैठते हुए बोलि__"इतनी रात कों कहाॅजा रहे होँ तुम्? औऱ औऱ अभि किसका मोबाइल आया थां?"
"अभि कुछ बताने कां वक्त नहि हैं। " अजय सिंह गाड़ी कि चाभी अपने एक् हाॅथ मे थामते हुए बोला__"अभि मुझे यहाॅ सें जल्दी हि निकलना होगा, मेरा इंतजार मत करना। "
कहने केँ संग हि अजय सिंह कमरे सें बाहर् निकल गय़ा जबकि प्रतिमा नंगी हालत मे हि भाड़ कि तरह अपनी आॅखें औऱ मुॅह फाड़े दरवाजे कि तरफ देखती रह गई इसबात सें बेख़बर कि दो आॅखें निरंतर उसके नंगे शरीर कों देखेजा रही हें।
अबआगे.
अजय सिंह कों शहर मे अपनी कपड़ा मील कि फैक्टरी पहुॅचते पहुॅचते करीब-करीब सुभह होँ गई थि। देररात तक तौ वो स्वयं हि अपनी पत्नि प्रतिमा केँ संगमौज मस्ती मे ब्यस्त रहा थां।
अजय सिंह नें जब फैक्टरी केँ सामने अपनी गाड़ी रोंकी तोँ वहाॅ कां माहौल हि अलग थां। हरतरफ आग औऱ धुएॅ कां साम्राज्य नज़र आँ रहा थां। फैक्टरी केँ चारोतरफ भीषणआग कि लपटें आसमान कों छूती नज़र आँ रही थि। दमकल कि कई गाड़ियाॅ इसआग कों बुझाने कि कोशिश मे लगी हुईँ थि। फैक्टरी मे काम करने वालेकुछ मजदूर भि इधरउधर नज़र आँ रहे थें।
अजय सिंह कि हालत तौ मोबाइल मे मिली जानकारी सें हि खराब थि लेकिन स्वयं अपनी आॅखों सें ऐसा भयानक मंज़र देखकर उसकीरही सहीकसर भि काफूर होँ गई। उसके चेहरे पऱ उसीतरह केँ भाव थें जैसेसभी कुछलुट जाने पर्र होते हें।
अजय सिंह लुटे पिटेभाव केँ संग वाहन सें नीचे उतरा औऱ फैक्टरी कि तरफचल दिया। अभि वो कुछ हि कदमआगे बढ़ा थां कि उसकापीए दीनदयाल शर्मा उसकीतरफ हि आताहुआ नज़रआया। उसके चेहरे पर्र भि बड़े अजीब सें भाव थें।
"सभीकुछ बरबाद होँ गय़ा सर। " दीनदयाल लगभग पहुॅचते हि हताशभाव सें बोला__"कुछ भि शेष नहि बचा। फैक्टरी केँ हर हिस्से मे भीषणआग लगी हुई हैं। पिछले दो घंटे सें फायर ब्रिगेड वालेइस आग पऱ काबू पाने कि कोशिश मे लगेहुए हें। "
"क केसेहुआ दीनदयाल?" अजय सिंह कि आवाज़ ऐसी थि जैसे किसी गहरे कुएॅ सें बोलरहा होँ__"आख़िर केसेहुआ यहसभी? फैक्टरी मे आग केसेलग गई?"
"मुझे स्वयं भि कुछसमझ मे नहि आँ रहासर कि यहसभी केसे हौ गय़ा?" दीनदयाल दीनहीन लहजे सें हि कहा__"फैक्टरी केँ अंदरआग लगने कां प्रश्न हि नहि थां क्योकि इसके बहुत तगड़े इतजामात थें। यहाॅ तक कि फैक्टरी मे काम करने वाले मजदूरों कों भि फैक्टरी केँ अंदर बीड़ी सिगरेट तम्बाकू याँ गुटका खाने कि इजाज़त नहि थि। "
"तोँ फिन केसेलगी यहआग?"अजय सिंह आवेश मे बोला__"मुझे इस बारे मे ठोस सबूत केँ संग जानकारी चाहिए दीनदयाल। तुम् जानते होँ कि इससे हमें कितना बड़ा नुकसान हुआ हैं। जिसतरह आगलगी हुईँ नज़र आँ रही हैं उससेसाफ ज़ाहिर होता हैं कि फैक्टरी केँ अंदर कि हर चीज़ ख़ाक़ मे मिल चुकी हैं। तुम् अंदाज़ा लगा सकते होँ कि कितना नुकसान हौ गय़ा हैं। "
"मे जानता हूॅसर। " दीनदयाल नें कहा__"पूरी कि पूरी फैक्टरी हि जल गई हैं, यहकोई मामूली बात नहि हैं। यह करोड़ों सें भि ऊपर कां नुकसान हैं। "
"पुलिस कों सूचित किया?"अजय सिंह नें पूॅछा।
"जीसर पुलिस कों सूचित कर दिया गय़ा हैं औऱ पुलिस कां एक् इन्स्पेक्टर अंदर आपकी हि इंतजार कररहा हैं। " दीनदयाल नें कहा__"वोँ कहरहा हैं कि आज केँ बाद सें यहाॅ केँ थाने सें उसका तबादला होँ जाएगा औऱ अब उसकी स्थान पर्र आपकी बेटी रितू सिंह बघेल इंस्पेक्टर कां चार्ज सम्हालेंगी। "
"ओहआई सि। " अजय सिंह केँ चेहरे पऱ सोचपूर्ण भाव नुमायां हुए__"तौ वहीहुआ जोँ हम् नहि चाहते थें, ख़ैर। "
कहने केँ संग हि अजय सिंह फैक्टरी कि तरफबढ़ गय़ा। यह लिखने कि आवश्यकता नहि कि उसके पीछे पीछे हि उसकापीए दीनदयाल भि बढ़ गय़ा थां।
कुछदेर मे हि अजय सिंहउस इंस्पेक्टर केँ सामने थां जिसकी पुलिस कि वर्दी पर्र लगीनेम प्लेट पर्र उसकानाम अनिल वर्मा लिखा नज़रआया। हाइट काठी सें ठीकठाक हि नज़र आँ रहा थां वो। तीस सें बत्तीस कि उमर कां रहा होगा। उसनेअजय सिंह कों देखकर बड़े हि अदब सें नमस्कार किया।
"ठाकुर साहब बड़े हि अफसोस कि बात हैं। " फिनउस इंस्पेक्टर नें कहा__"कि आपकी फैक्टरी मे लगीआग सें दूरदूर तक कुछ भि साबुत बचाहुआ नज़र नहि आँ रहा हैं। इससेइस बात कां अंदाज़ा लगाना ज़रा भि मुश्किल नहि हैं कि इस हादसे सें आपको भारी भरकम नुकसान हौ गय़ा हैं, अगर.। "
अजय सिंह नें उसके'अगर' पर्र अचानक हि कहतेहुए रुक जाने पर्र उसकीतरफ सवालिया निगाहों सें देखा।
"अगर आपने अपनीइस फैक्टरी कां जिंदगी बीमा पहले सें नहि करवाया हुआ हैं तोँ। " फिन उसनेयह कहकर अपने पिछले कथन कों पूरा किया__"वैसे पूछना तौ नहि चाहिए मगरफिन भि आपसे पूॅछने कि यह हिमाक़त कर हि लेताहूॅ, ड्यूटी इज ड्यूटी भले हि आज हि बस केँ लिए यहां केँ एरिये कां इंचार्ज हूॅकल सें तौ आपकी बेटी हि इस सबकी तहकीक़ात करेंगी नं। ख़ैर, तोँ मे यह पूछने कि हिमाक़त कररहा थां कि.क्याँ लगता हैं आपको.यह आग किसने लगाई हौ सकती हैं आपकीइस विसाल फैक्टरी मे?"
"यहपता लगाना तौ तुम्हारा काम हैं इंस्पेक्टर। " अजय सिंह नें तनिक कठोरता सें कहा थां, उसेइस इंस्पेक्टर कां बिहैवियर आजकुछ बदलाहुआ लगा थां, इसके पहले तौ यहसभी स्वयं उसके हि पालतू कुत्ते जैसे थें, बोला__"औऱ अगर नहि पतालगा सकते तौ यहाॅ तुम्हारी कोई ज़रूरत नहि हैं समझे?"
"अरे आप् तौ नाराज़ हौ गए लगते हें ठाकुर साहब। " इंस्पेक्टर नें मुस्कुराकर कहा__"माफ कीजियेगा। पर्र प्रश्न तौ मैंने ठीक हि पूॅछा थां आपसे। "
"हाॅ तौ हमें भि इस बारे मे भला केसेपता होगा कि यहआग किसने लगाई हैं?" अजय सिंह उखड़े हुए लहजे सें बोला__"अगर पता होता तौ क्याँ वोँ अब तक ज़िन्दा बचा होता?"
"हाॅ यह तोँ हैं। " इंस्पेकटर नें अजीबभाव सें अपनेसिर कों हिलाया__"आपके हाॅथों अब तक तौ उसका कल्याण होँ जानां निश्चित हि थां। "
"वैसेयह तुम् केसेकह सकते हौ?" सहसाइस बीच दीनदयाल नें प्रश्न किया__"कि फैक्टरी मे लगीयह आग किसी केँ द्वारा लगाई गई हैं?"
"देखा आपने ठाकुर साहब। " इंस्पेक्टर नें तपाक सें कहा__"आपका यहपीए कितना दिमाग़दार हैं? मेरे पूॅछने पऱ जौ प्रश्न आपको पहले हि मुझसे पूॅछना चाहिये थां वोँ आपने नहि पूॅछा मगर आपकेइस दीन केँ दयाल नें पूॅछ लिया। ख़ैर, अब जबकि पूॅछ हि लिया हैं तौ मुझे भि प्रश्न कां जवाब देने मे कोई ऐतराज़ नहि हैं। बात दरअसल यह हैं ठाकुर साहब कि फैक्टरी मे लगीआग अगर साधारण रूप सें लगी होती तौ उसकारूप इतना उग्र न् होता, ऐसा मेरा मानना हैं.जोकि बाॅकि सबके नज़रिये सें ग़लत भि हौ सकता हैं। ख़ैर.अब जबकि आगइस प्रकार भीषणरूप सें लगी हुइ हैं कि फैक्टरी कां कोई कोना तक खाली नहि बचा हैं तोँ कहीं न् कहींमन मे यहबात आँ हि जाती हैं कि होँ सकता हैं यहआग किसी केँ द्वारा सोचसमझ करतथा तसल्ली सें इस प्रकार लगाई गई हौ कि आपकी फैक्टरी कां कोई भि हिस्सा रामनाम सत्य होने सें नं बचसके। "
अजय सिंह कों इंस्पेक्टर कि ऊल जलूल बातों सें क्रोध तौ बहोत आँ रहा थां लेकिन वोँ उसकीइन सभी बातों सें सहमत भि थां। यकीनन ऐसा होँ सकता थां। क्योंकि पिछले कुछ वक्त सें जिसतरह कि घटनाएं उसकेसंग घटरही थि उससेयही ज़ाहिर होता थां कि एक् बारफिन किसी नें उसकेसंग इस प्रकार कां नुकसानदायी खेल खेला हैं। यहअलग बात हैं कि इसबार इसखेल मे उसकी समूची फैक्टरी कों हि आग केँ हवाले कर दिया गय़ा थां। अजय सिंह कों समझ नहि आँ रहा थां कि आख़िर कौंन हैं जौ उसकेसंग यहसभी कररहा हैं?
"ठाकुर साहबइसी दुनियाॅ मे हें नं आप्?" उधर इंस्पेक्टर नें अजय सिंह कों गहरीसोच मे डूबेहुए देखकर कहा__"अगर हें तोँ प्लीज ज़रा ग़ौर फरमाइये, मुझे आपसेकुछ सवालात करने हें। "
"केसे सवालात इंस्पेक्टर?" अजय सिंह बोला।
"यही कि फैक्टरी मे लगीइस भीषणआग मे किसी कि जान तौ नहि गई न्?" इंस्पेक्टर नें पूछा__"क्योंकि अगरऐसा हौ गय़ा तोँ आपकेलिए मुसीबत हौ सकती हैं। फैक्टरी तोँ जल हि गई ऊपर सें इसआग मे जिनकी जानचली गई होगी उससे लम्बा बखेड़ा भि खड़ा होँ जाएगा। अच्छा खासाकेस बनेगा औऱ आपको कानून कि गिरफ्त मे भि लेनापड़ सकता हैं। "
"अधिक बकवास करने कि ज़रूरत नहि हैं इंस्पेक्टर। " अजय सिंह गुर्राया__"जोँ भि होगा हम् देख लेंगे। तुम् अपनाकाम करो औऱ फुटास कि गोलीलो, समझे??"
"जैसी आपकी मर्ज़ी ठाकुर साहब। " इंस्पेक्टर नें कहा औऱ एक् तरफबढ़ गय़ा।
"दीनदयाल। " इंस्पेक्टर केँ जाने केँ बादअजय सिंह दीनदयाल सें मुखातिब होकर कहा__"इस सबका न्यूज औऱ मीडिया वालों कों पता नहि चलना चाहिए। "
"वैसे तोँ अब तक यहबात करीब-करीब फैल हि चुकी होगीसर। " दीनदयाल नें कहा__"फिन भि न्यूज औऱ मीडिया वालों सें कुछ भि छुपा नहि रह सकेगा। क्योंकि यहकोई साधारण मामला नहि हैं, वोँ तोँ अच्छा हुआ कि हमारी फैक्टरी शहर सें हटकरतथा शहर कि आबादी सें बहोत दूर थि जिससे फैक्टरी केँ अलावा बाकी औऱ किसी कां कुछ भि नुकसान नहि हुआ। वर्ना सोचिए अगरयह फैक्टरी शहर मे किसी आबादी वाली स्थान पर्र होती तौ क्याँ होता?आग कि भीषण लपटों सें आसपास केँ मकानों याँ औऱ भि बहोत सि चीज़ों पऱ आगलग जाती जिसके परिणाम कि कल्पना हि बड़ी भयंकर हैं। इस सबकेबाद हम् कहीं मुॅह छुपाने केँ काबिल नहि रह जाते। जनता औऱ कानून हमारे पीछे हि पड़ जाते। "
"जौ नहि हुआ उसके बारे मे बात करने कां कोई मतलब नहि हैं दीनदयाल। "अजय सिंह नें गहरी साॅस ली__"यूॅ तोँ कानूनी रूप सें इसबात कि जाॅच तौ होगी हि कि फैक्टरी मे आग लगने कि मुख्य वजह क्याँ थि? मगर.हमें तोँ पहले सें हि इसबात कां अंदेशा हैं कि इस सबमें उसी कां हाॅथ हैं जिसने पिछले कुछ वक़्त सें हमारे संगखेल खेलना शुरुआत किया हैं। समझ मे नहि आता कि आख़िर क्यूं कररहा हैं वोँ ऐसा? क्यूं हमें बरबाद करने पऱ तुलाहुआ हैं वोँ?"
"हैरत कि बात हैं सर। " दीनदयाल नें गंभीरता सें कहा__"हमें अब तक उसके बारे मे कुछपता नहि चल पाया। वोँ हरबार धोखे सें हमारा कुछ न् कुछ नुकसान कर देता हैं औऱ हम् कुछ नहि कर पाते। "
यह दोनोऐसे हि अपना माथा पच्ची करने मे लगेरहे। फैक्टरी केँ अंदरअब बहुतहद तक आग पर्र काबूपा लिया गय़ा थां।
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उधर मुम्बई मे आज एक् बारफिन सभीलोग एक् संग ड्राइंगरूम मे रखे कीमती सोफों पऱ बैठेहुए थें।
"शहर केँ मशहूर बिजनेस मैनअजय सिंह कि फैक्टरी मे लगीआग, जिसमें सबकुछ जलकर खाक़ होँ गय़ा। " निधि नें अखबार मे छपी ख़बर कों पढ़ते हुए कहा__"मिली जानकारी केँ अनुसार यहआगउस टाइमलगी जब साराशहर रात केँ अॅधेरे मे गहरी नींद सोया पड़ा थां। रातदो सें तीनबजे केँ बीच फैक्टरी मे आगलगी, औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे समूची फैक्टरी भीषणआग कि चपेट मे आँ गई। फैक्टरी मे मौजूद वर्कर स्वयं इसबात सें अंजान हें। फैक्टरी मे लगीआग केँ उग्ररूप धारण करने सें पहले हि फायर ब्रिगेड वालों कों सूचित किया गय़ा, जब तक दमकल कि गाड़ियाॅ वहाॅ पहॅची तब तक फैक्टरी मे लगीआग भयंकर रूप धारणकर चुकी थि। करीबचार घंटे कि मसक्कत केँ बाद फायर ब्रिगेड द्वारा इस भयंकर आग पऱ काबू पाया गय़ा। फैक्टरी मे आग लगने कि सूचना फैक्टरी केँ मालिक अजय सिंह बघेल कों दे दि गई थि। फैक्टरी मे आग लगने सें जोँ करोड़ों कां नुकसान हुआ हैं उससे फैक्टरी केँ मालिक अजय सिंह गहरे सदमे मे हें। हमें विश्वस्त सूत्रों द्वारा यहपता चला हैं कि फैक्टरी केँ मालिक अजय सिंह नें अपनी फैक्टरी कां कोई जिंदगी बीमा वगैरा नहि करवारखा थां, इसलिए अब आप् समझ सकते हें कि आग लगने कि वजह सें फैक्टरी केँ मालिक अजय सिंह कां कितना नुकसान हुआ होगा। फैक्टरी मे आग लगने कि वजह अभि तक सामने नहि आई हैं। इस बारे मे अभि पुलिस द्वारा जाॅच पड़ताड़ कि जारही हें। "
"कैसीरही अंकल?" विराज नें होठों पऱ मनमोहक मुस्कान बिखेरते हुए कहा__"अजय सिंह कों एक् औऱ झटकादे दिया मैंने। "
"तौ क्याँ यही वोँ काम थां जिसे तुम् अजय सिंह केँ बिजनेस पार्टनर अरविंद सक्सेना द्वारा अंजाम देने कि बातकह रहे थें?" जगदीश नें हैरत सें कहा__"पर्र केसेहुआ यहसभी?"
"हाॅराज केसे किया तुमने यहसभी?" गौरी नें भि चौंकते हुए पूछा।
"सभी कुछ शुरुआत सें औऱ अच्छे सें आप् लोगों कों बताता हूॅ। " विराज नें एक् लम्बी साॅस खींचते हुए कहा__"जब अजय सिंह कां बिजनेस पार्टनर अरविंद सक्सेना अपनेउन फोटोग्राफ्स कि वजह सें मेरे इशारों पर्र काम करने कों रेडी हौ गय़ा तौ मैने उससेअजय सिंह केँ बिजनेस सें संबंधित औऱ भि कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हाॅसिल कि जिसका किसी कों कुछपता नहि थां। "
"क्याँ मतलब??" विराज कि इसबात पर्र सभी एक् संग चौंके थें__"कैसी जानकारी??"
"अरविंद सक्सेना केँ अनुसार। " विराज नें इत्मीनान सें कहा__"अजय सिंह कपड़ा मील कि आड़ मे गैर कानूनी धंधा भि करता हैं। जिसमें गाॅजा, अफीम, चरस, आदिकई चीज़ें शामिल हें। इन सबसेउसे लाखों करोड़ों कां भारी मुनाफा होता हैं। चूॅकि यहगैर कानूनी धंधा हैं इसलिए इसमें उसे कानून कां भि डर थां मगर उसने अपनी चतुराई सें कानून कों भि इसमें शामिल कर लिया। कहने कां मतलबयह कि इस धंधे सें होने वाले मुनाफे मे पुलिस औऱ कानून केँ कई सारे नुमाइंदों कां भि हिस्सा होता थां। पुलिस औऱ कानून कां संग मिलते हि यह धंधा औऱ भि जोर हंगामा सें चलनेलगा मगरछिप छिपाकर हि। अजय सिंह कि फैक्टरी शहर सें बाहर् ऐसी स्थान पर्र हैं जहाॅ आबादी न् केँ बाराबर हि हैं इसलिए फैक्टरी मे हि इनसभी चीज़ों कां भि एक् अलग सें कारखाना बनाया गय़ा थां जोँ फैक्टरी केँ नीचे तहखाने मे थां। अब आप् समझ सकते हें कि अजय सिंह क्याँ हैं? कपड़ा मील कि कमाई सें इतना मुनाफा नहि थां जितना इसगैर कानूनी धंधे सें थां। यह तोँ ख़ैर शुरूआत हैं, अभि औऱ भि बहोत सि चीज़ें हें जिनके बारे मे कोई नहि जानता। "
"तुम् तोँ जान हि गए होगे नं?" जगदीश नें कहा__"फिन तोँ कोई समस्या हि नहि हैं। "
"मुझे भि उतना हि पता हैं जितना सक्सेना कों पता थां। " विराज नें कहा।
"क्याँ मतलब??" जगदीश चौंका।
"सक्सेना अजय सिंह कां पार्टनर अवश्य थां अंकल। " विराज कहरहा थां__"मगर उसे स्वयं यह नहि पता थां कि उसका बिजनेस पार्टनर अजय सिंह वास्तव मे हैं क्याँ? अरविंद सक्सेना एक् फट्टू किस्म कां इंसान थां तथासाफ दिल कां, यहअलग बात हैं कि उसका कैरेक्टर बाॅकी चीज़ मे अजय सिंह सें जुदा नहि थां। हाॅयह जरूर थां कि सक्सेना गैर कानूनी काम करने सें डरता थां, औऱ शायदयही वजहरही थि कि अजय सिंह नें इस धंधे मे सक्सेना कों शामिल नं करकेउसे इससेदूर हि रखा। ख़ैर, एक् दिन सक्सेना कों किसीवजह सें यहपता चल गय़ा कि अजय सिंहगैर कानूनी धंधा भि करता हैं। उसने अपनी आखों सें फैक्टरी केँ बेसमेंट मे बने एक् अलग हि कारखाने कों देखा थां। अजय सिंह कों यहपता नहि थां कि सक्सेना उसकी असलियत जान चुका हैं। सक्सेना नें कभीअजय सिंह सें इसबात कां ज़िक्र भि नहि किया। क्योकि वो जानता थां कि इस धंधे मे कोई किसी कां नहि होता, अगर बातइधर सें उधर हौ गई तौ उसकीजान भि जा सकती हैं। सक्सेना उसदिन सें परेशान भि रहनेलगा लेकिन उसनेयह सभीअजय सिंह पऱ ज़ाहिर नं होने दिया। वोँ अब किसीतरह अजय सिंह सें पार्टनरशिप तोड़कर उससे कहींदूर चला जानां चाहता थां, मगर प्रश्न थां कि केसेकरे यहसभी? फिन एक् दिन वोँ मेरी पकड़ मे आँ गय़ा, मैनेजब उसे अपने तरीके सें टार्चर करके उससेअजय सिंह केँ बारे मे पूॅछा तथा उससे पार्टनरशिप तोड़ने कि बातकही तौ वो कुछदेर नं नुकुर करने केँ बाद इसकेलिए सजधजकर हौ गय़ा। उसने मुझसे शर्तरखी कि इस सबमें उसकानाम नहि आनां चाहिए औऱ उसे सुरक्षित इसदेश सें बाहर् परिवार सहितभेज दियाजाए। मुझे उसकी शर्त सें कोई आपत्ति नहि थि इसलिए मैंने भि उसकी शर्तमान ली। "
"तौ अजय सिंह कां एक् सचयह भि बाहर् आँ गय़ा कि वो अपनेइस बिजनेस कि आड़ मे गैर कानूनी काम भि करता हैं। " जगदीश नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा__"खैर तौ तुमने इस सबकेबाद सक्सेना सें केसेइस काम कों अंजाम दिलवाया?"
"हे ईश्वर। " गौरी आश्चर्यचकित भाव केँ संगकह उठी__"कितना गिराहुआ इंसान हैं यह, ऐसा कोईकाम नहि बचा जोँ इसने किया नहि हैं। "
"मेराबस चले तोँ। " निधि नें बुरा सां मुॅह बनाते हुए कहा__"ऐसे ब्यक्ति कों बीच चौराहे पऱ गोलीमार दूॅ, हाॅ नहि तौ। "
"सक्सेना केँ बाॅकी जौ छोटे मोटे कारोबार थें उन्हें मैंने आपके द्वारा खरीद लिया। " विराज कहरहा थां__"औऱ उसके एकाउन्ट मे रुपया भि डलवा दिया गय़ा। संग हि उसको उसके परिवार सहित विदेश जाने कां इंतजाम भि कर दिया गय़ा थां। अब सक्सेना केँ पास एक् हि कामरह गय़ा थां जिसे वोँ मेरे कहने पर्र करने वाला थां। कलरात उसने फैक्टरी जाकर बेसमेंट मे तीनसमय बम्ब स्लिम किये थें। यहकाम उसने बड़ी सावधानी सें तथा किसी कि नज़र मे आए बिना किया थां। इसबात कां खयाल किया गय़ा थां कि उस वक्त फैक्टरी मे कोई न् हौ क्योंकि इससे बाॅकी तमाम वर्कर्स कि याँ बहोत सें बेकसूर लोगों कि जान जाने कां भि भीषण खतरा थां। फिन सक्सेना नें बताया कि फैक्टरी मे हप्ते मे एक् दिन कां अवकाश होता हैं औऱ इत्तेफाक़ सें कल अवकाश हि थां। तीन घंटे केँ समय केँ बाद बमों कों फटना थां। बमों केँ फटने सें पहले हि सक्सेना अपने परिवार केँ संग विदेश जाने वाली फ्लाइट पऱ बैठकर निकल लिया थां औऱ इधरतीन घंटेबाद फैक्टरी केँ अंदर धमाका हौ जानां थां औऱ खेलखतम। "
"बहोत खूब बेटे। " जगदीश केँ चेहरे पऱ प्रसंसा केँ भाव थें, बोला__"जब दिमाग़ सें हि काम होँ जाए तौ हाॅथ पांव चलाने कि ज़रूरत हि क्याँ हैं? वेलडन बेटे.आई एम प्राउड आफयू। "
"वाउ भाई वाउ आपने तौ कमाल हि कर दिया। " निधि नें खुशी मे झूमते हुए कहा__"औऱ साड़ी कों फाड़कर रुमाल कर दिया, हाॅ नहि तौ। "
"बेटा जोँ कुछ भि करना बहोत सोचसमझ कर करना। " गौरी अंदर हि अंदर अपने बेटे केँ इस सराहनीय कार्य सें खुश तौ थि लेकिन प्रत्यक्ष मे उसनेयही कहा__"क्योंकि तुम् जिसके संगयह जंगकर रहे होँ वोँ बहोत खराब व्यक्ति हैं। "
"फिक्र मत कीजिए माॅ। " विराज नें सहसा ठंडे स्वर मे कहा__"उस खराब व्यक्ति केँ पऱ हि तौ कुतररहा हूॅ औऱ एक् दिनउसे अपाहिज भि कर दूॅगा। उसकेलिए बहोत कुछसोच रखा हैं मैंने। वक़्त आने पर्र आप् देखेंगी कि उसका क्याँ हस्र करताहूॅ मे। "
"इस धमाके केँ बाद तौ उसकी हालत खराब होँ गई होगी बेटे। " जगदीश नें कहा__"संभव हैं कि इस हादसे कि जाॅच हि नं करवाए वोँ। "
"आपने बिलकुल ठीककहा अंकल। " विराज नें कहा__"फैक्टरी मे हुएइस भीषण काण्ड कि जाॅच नहि करवाएगा वोँ। क्योकि इससेउसे मिलेगा तौ कुछ नहि बल्कि उल्टा जाॅच सें फॅस अवश्य जाएगा। पुलिस औऱ फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट वालेहर चीज़ कों बारीकी सें जाॅचेंगे परखेंगे। उस दौरान वोँ लोग फैक्टरी कां चप्पा चप्पा छान मारेंगे औऱ इस सबसे उन्हें वोँ सबूत भि मिलेंगे जौ इसबात कि चीखचीख कर गवाही देंगे कि शहर कां मशहूर बिजनेस मैन ग़ैर कानूनी धंधा भि करता थां। बसखेल खतम। "
"देखते हें क्याँ होता हैं?" जगदीश नें कहने केँ संग हि पहलू बदला__"वैसे अबआगे कां क्याँ करने कां विचार हैं?"
"अभि औऱ कुछ नहि करना हैं। " सहसा गौरी नें हस्ताक्षेप किया__"अपनी पढ़ाई पर्र भि ध्यान देनाकुछ, यहकाम तोँ होता हि रहेगा। "
"गौरी बेहनसही कहरही हैं राज। " जगदीश नें अपनेपन सें कहा__"कुछ दिन मे तुम्हारा काॅलेज भि शुरुआत हौ जाएगा इसलिए अपनेमन कों थोडा शान्त भि रखो। "
"मे भि यहीसोच रहाहूॅ। " विराज नें मुस्कुरा कर कहा__"कुछ दिनअजय सिंह कों भि अपनी हालत पर्र काबूपा लेना चाहिए। वर्ना कहींऐसा नं हौ कि हादसे पऱ हादसे देखकर वो हार्ट अटैक सें हि मरजाए। फिन किससे मे अपने तरीके सें इंतकाम लें सकूॅगा?"
"एक् केँ मर जाने सें क्याँ होता हैं भाई?" निधि नें कहा__"सभी उसके जैसे हि तोँ हें, उनका भि वहीहाल करना, हाॅ नहि तोँ। "
निधि कि बात पर्र सभी मुस्कुरा कररहगए।
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
बहोत हि उम्दा एपसोड थां इसभाग मे पताचला कि जहांमन कां इस्तेमाल करते हें वहां पऱ हाथ पांव कां इस्तेमाल करना जरूरी नहि होता आप् अपनेमन केँ इस्तेमाल सें भि अपने दुश्मन कों मारदे सकते हें अजय कि हालत तौ पऱ कटे परिंदे सें भि बुरी होँ गई हैं नां तौ वो अपनी फैक्ट्री केँ आग लगने कि कंप्लेंट कर सकता हैं नां हि उसकी जांचकरा सकता हैं मगरअब उसकी बेटी police officer ban kar Wohi Aa gai h और wo उसकी जांच जरूर करवाएगी औऱ अगर उसमें उसेये पताचला कि उसका बाप गैरकानूनी काम करता थां फिन देख्ना होगा कि वो क्याँ करती हैं क्याँ वो अपने बाप कों गिरफ्तार करेगी औऱ उधर विशाल फिन सें कॉलेज जाने लगेगा जहां उसकी मुलाकात अजय कि दूसरी बेटी सें होगी जिसे वो अपने प्रेम केँ जाल मे फंसाकर कुछ भि करवा सकता हैं इन सबसेअलग वो जोँ दो आंखें प्रतिमा कों नंगादेख रही थि उनका भि कुछ खुलासा करो मेरे भइया वैसे तौ पता हैं कि ये उसके बेटे कां हि काम होगाफिन भि जिज्ञासा तौ रहती हैं नां आपके अगलेअपडेट कां बेसब्री सें प्रतीक्षा रहेगा शुक्रिया
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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