♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 62 》
अब तक,,,,,,,
सारादिन सबकेबीच ऐसाआलम रहा जैसेकोई हमारे बीच कां दुनियाॅ सें हि जा चुका होँ। डायनिंग टेबल पऱ नास्ते केँ लिए परोसी गई थालीव प्लेट सभी वैसी कि वैसी हि रखीरह गई थि। किसी नें उसतरफ देखा तक नं थां औऱ नाँ हि कोई अपने कमरे कि तरफ गय़ा थां। बॅगले केँ नौकर चाकर तक संजीदा थें इस सबसे। अभय सिंह सुभह सें अब तक हज़ारों बार जगदीश ओबराय कों मोबाइल लगा चुका थां लेकिन उसका नंबर अभि भि नेटवर्क क्षेत्र केँ बाहर् हि बतारहा थां।
बड़ी मुश्किल सें हि सही लेकिन टाइम अतिमंद्र गति सें गुज़र हि गय़ा। ट्रेन केँ निर्धारित टाइम सें आधा घंटा पहले हि सबकेसभी रेलवे स्टेशन केँ प्लेटफार्म पऱ पहुचगए। रुक्मिणी व करुणा गौरी केँ संग हि थि। हरकोई दुःखी व दुखी थां। आधे घंटेबाद जब ट्रेन आई तौ सभी ट्रेन कि तरफ करीब-करीब भागते हुए बढ़े। ट्रेन मे चढ़कर हरकोई सीट पर्र बैठ चुका थां। रिज़र्व सीटों पऱ औरतों औऱ लड़कियों कों बैठा दिया गय़ा थां। हलाॅकि रिज़र्व मे पाच हि सीटें मिली थि। जिनमें गौरी रुक्मिणी करुणा निधीव दिव्या कों बैठा दिया गय़ा थां। शगुन दिव्या केँ संग हि बैठाहुआ थां। जबकि पवनअभय वआशा ट्रेन केँ फर्श पऱ हि खड़े थें।
गौरी कों रुक्मिणी व करुणा नें बड़ी मुश्किल सें सम्हाला हुआ थां। सारादिन रोतीरही थि वोँ जिसकी वजह सें उसकी ऑखेंलाल सुर्ख पड़ चुकीथीं। चेहरे पऱ ऐसी वीरानी थि जैसेइस चेहरे नें कभी किसीतरह कि खुशियो सें भरी बहार कों देखा हि नं हौ। कुछ हि वक़्त बाद ट्रेन अपने गंतब्य जगह केँ लिएचल पड़ी। ट्रेन केँ चल पड़ने सें सबकेमन मे थोड़ी राहत केँ भावउभर आए थें। आने वाले टाइम मे किसके संग क्याँ क्याँ होने वाला थां इसकी कल्पना सें हि सबकी रूहें काॅप जाती थि।
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अबआगे,,,,,,,
दूसरे दिन।
उस समय दोपहर हौ चुकी थि।
अजय सिंह केँ इस विशाल फार्महाउस पऱ इस वक़्त अलग हि नज़ारा थां। यह दृष्य तौ गौरी केँ स्वप्न कि तरह हि थां लेकिन उससे थोडा भिन्न हि थां। लम्बे चौड़े फार्महाउस केँ बीचोबीच दो मंजिला बड़ा सां घर-मकान बनाहुआ थां। चारों तरफहरी हरी घाॅस सें भराहुआ विशाल मैदान तथाहर तरफलगे हुएतरह तरह केँ पेड़ पौधे यहाॅ कि हुस्न कां एक् बड़ा हि हसीन नज़ारा पेशकर रहे थें। लेकिन इस टाइमइस हसीन नज़ारे मे भि जैसे ग्रहण सां लगाहुआ थां।
मैदान मे लगे पेड़ पौधों केँ बीच कां हि दृष्य थां यह। कतार मे लगे पेड़ों पऱ कई सारेलोग रस्सियों सें बॅधे जकड़े हुए थें। विराज, रितू, आदित्य, नैना, सोनम, नीलम, बिंदिया, हरिया व शंकरआदि सभी कतार सें हि पेड़ों सें रस्सियों द्वारा बॅधेहुए थें। विशाल मैदान मे चारोतरफ काली वर्दी मे तैनात गुंडे मवालियों जैसी शक्ल केँ बहुत सारेलोग हाथों मे बंदूखें लिए खड़े थें। मैदान मे एक् तरफकुछ दूरी पऱ कई सारी गाड़ियाॅ भि खड़ी हुई थि।
उन्हीं पेड़ों कि गहरी छाॅव मे अजय सिंह एक् कुर्सी पऱ बैठा हाॅथ मे लिएहुए रिवाल्वर कों बारबार अपनी उॅगली पर्र नचारहा थां। उसके पीछे उसका बेटा शिवा खड़ा थां। उसकीकमर मे भि एक् रिवाल्वर ठुॅसा हुआ थां। अजय सिंह कि पत्नि यानी कि प्रतिमा भि अजय सिंह केँ पास हि खड़ी हुईँ थि। वातावरण मे चारोतरफ एक् अजीब सां भयावह सन्नाटा फैलाहुआ थां।
"दोपहर तौ होँ चुकी हैं ठाकुर साहब। "तभी सहसा एक् व्यक्ति अजय सिंह केँ पासआता हुआ बोला____"लेकिन आपके बाॅकी शिकार तोँ अभि तक यहाॅ नहि पहुॅचे। कहींऐसा तौ नहि कि वोँ लोग पुलिस केँ पासचले गएहों मदद माॅगने केँ लिए?अगर ऐसाहुआ तोँ यकीन मानिए हमारे सारे किये कराए पर्र पानीफिन जाएगा औऱ हम् सभीजेल केँ अंदर चक्की पीसते नज़र आएॅगे। "
"नहि सहाय। "अजय सिंह नें कठोरभाव सें कहा___"वोँ लोग पुलिस केँ पास जाने कां सोच भि नहि सकते हें। वोँ जानते हें कि अगरउन लोगों नें इस मामले मे पुलिस कों कुछ भि बताया तौ उसका अंजाम बहोत हि खतरनाॅक होँ सकता हैं। इसलिए तुम् इसबात सें बेफिक्र रहो। वोँ सभीसिर केँ बल भागते दौड़ते हुए रेलवे स्टेशन सें सीधा यहीं आएॅगे। उसकेबाद क्याँ होगायह समझाने कि ज़रूरत नहि हैं तुम्हें। "
"हाॅयह तोँ सहीकहा आपने। " अभिजीत सहाय नें कमीनी मुस्कान केँ संग कहा___"आज यहाॅ पऱ एक् अनोखा इतिहास लिखा जाएगा। आने वाले बाॅकी शिकार यहाॅ आँ तोँ जाएॅगे मगर जल्दी हि हमारे आदमियों द्वारा धरलिए जाएॅगे औऱ फिन वोँ सभी भि इन लोगों कि तरह पेड़ों पर्र रस्सियों मे बॅधे नज़रआने लगेंगे। "
"मुझसे तोँ अब बरदास्त हि नहि होँ रहाडैड। " शिवा अपने बाप केँ सामने आतेहुए बोला____"एक् एक् समय केसेकाट रहाहूॅ यह केवल मे जानता हूॅ। मेरी ऑखों केँ सामने हि मेरीयह बहने रस्सियों मे बॅधी पेड़ों पऱ चिपकी खड़ी हें औऱ आप् मुझेकुछ करने हि नहि देरहे हें। "
"बस थोड़ी देर औऱ सब्रकरो मेरे बेटे। "अजय सिंह नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"उसके बाद तुम्हें जौ करना हौ करते रहना। मजा तोँ तभी आएगा नं जब बाॅकी केँ लोग भि यहाॅ पऱ हरतरह कां तमाशा देखने केँ लिए पहुॅच जाएॅ। "
"ठीक हैं डैड। " शिवा नें मन मसोसकर कहा___"आप् कहते हें तोँ मे थोड़ी देर औऱ सब्रकर लेताहूॅ। "
"यह हुई न् बात। "अजय सिंह मुस्कुराया, फिन सहाय कि तरफ देखते हुए बोला___"अपने आदमियों कों पूरीतरह सें सतर्क रहने कां अल्टीमेटम दे दिया हैं नं सहाय तुमने?"
"डोन्ट वरी ठाकुर साहब। " अभिजीत सहाय नें कहा___"हमारे व्यक्ति पूरीतरह सें सतर्क हें। उनकी नज़र सें एक् परिंदा भि यहाॅ सें छूटकर नहि जा सकेगा। "
"वेरीगुड। " अजय सिंह नें कहा____"उन लोगों केँ आते हि हमारे व्यक्ति उन सबकोधर लेंगे औऱ फिन उन्हें भि इन लोगों कि तरह यहाॅ केँ पेड़ों पर्र रस्सियों सें बाॅध देंगे। यह फाइनल गेम हैं सहाय औऱ इसगेम कां विनर मात्र औऱ केवल हम् हि होंगे। असली खिलाड़ी वही हैं जौ सामने वाले कों पूरीतरह सें पस्त करकेउसे नेस्तनाबूत करदे। "
अभि अजय सिंह नें इतनाकहा हि थां कि पीछे कि तरफ सें किसी केँ ज़ोर ज़ोर सें चिल्लाने कि आवाज़ें सुनाई देनेलगी थीं। चिल्लाने कि आवाज़ें सुनते हि सबका ध्यान उसतरफ गय़ा। कई सारे बंदूख धारियों सें घिरेहुए अभय, पवन, गौरी, रुक्मिणी, करुणा, आशा, निधी, दिव्या व शगुन, इस तरफ हि चले आँ रहे थें। यहसभी देखकर अजय सिंह केँ संगसंग सहाय, शिवाव प्रतिमा केँ होंठो पऱ जानदार मुस्कान उभरआई।
देखते हि देखते कुछ हि देर मे सबकोअलग अलग पेड़ों पऱ रस्सियों सें बाॅध दिया गय़ा। रस्सियों मे जकड़ी गौरी बुरीतरह छटपटाए जारही थि। उसकी नज़र जैसे हि रस्सियों मे बॅधे अपने बेटे विराज पर्र पड़ी वैसे हि वो बुरीतरह उतावलापन कर रोनेलगी थि। विराज केँ संगसंग रितू नीलम सोनम आदित्य आदि कों रस्सियों मे बॅधे थें, लेकिन इस टाइमयह सभी अचेत अवस्था मे थें।
"तोँ आख़िर तुम् सभीलोग यहाॅ पर्र मरने केँ लिए आँ हि गए। "अजय सिंहउन सबकेबीच ज़मीन पऱ चहल क़दमी करतेहुए कठोरभाव सें बोला___"वैसे क्याँ समझते थें तुम् सभीलोग कि मेरे क़हर सें बचे रहोगे? हाहाहाहा ऐसाकभी नहि होँ सकता। जब तक मेरे द्वारा तुम् सबको सज़ा नहि मिल जातीतब तक तुम् लोग किसी भि चीज़ सें मुक्त नहि हौ सकते थें। "
"मेरे बेटे कों कुछमत करना। " सहसा गौरी नें रोतेहुए कहा____"मे आपके सामने हाॅथ जोड़ती हूॅ। ईश्वर केँ लिएउसे छोंड़ दो। उसके किये कि सज़ा मुझेदे लोमगर मेरे बेटे कों कुछमत करना। "
"अरे! मेरी बुलबुल यह क्याँ हालतबना ली हैं तुमने?" अजय सिंह गौरी केँ क़रीब आतेहुए चहका___"यकीन मानो तुम्हारी यह हालतदेख कर मेरेदिल कों बहोत दुख होँ रहा हैं। अरे तुम् तोँ मेरी जाने बहार होँ डियर। कभी मेरेदिल केँ बारे मे भि सोचा होता तौ समझ मे आता तुम्हें कि कोईकिस क़दर चाहता हैं तुम्हें? मगर तुमने तौ कभी मेरे बारे मे सोचना तक गवारा न् किया। आख़िर क्याँ कमी थि मुझमें? तुम्हारे उस अनपढ़ गवार पति सें तौ लाख गुना अच्छा थां मे। उससे कहीं ज़्यादा अच्छी हैंसियत भि हैं मेरी। वोँ तौ खेतों पऱ दिनरात काम करने वालामहज एक् मजदूर थां जबकि मे तौ यहाॅ कां सम्पन्न राजा थां। तुमको दुनियाॅ हरऐशो आरामव सुख देता। मगर तुमको तौ उस मजदूर सें हि प्यार थां। "
"कोई भि इंसान धन दौलत सें राजा नहि बन जातानीच इंसान। " गौरी कां लहजा एकाएक कठोर हौ उठा___"राजा बनने केँ लिए दूसरों केँ प्रति अपनी खुशियों कां तथा अपनेहर सुखों कां त्याग करना पड़ता हैं। तुझमें तोँ मात्र एक् हि खूबी हैं बेग़ैरत इंसान औऱ वोँ हैं हर रिश्तों कि मान मर्यादा कां हनन करना। तेरे जैसे कुकर्मी केँ लिए मात्र औऱ मात्र नफ़रत व घृणा हि हौ सकती हैं। "
"स्स्स। " अजय सिंह नें बुरा सां मुह बनाया___"मेरे प्रति इतनी घटिया बात केसेसोच सकती होँ तुम्? अरे तुम् कहती तोँ मे तुम्हारे लिए स्वयं कों पूरीतरह बदल भि देता मेरीजान। मे वोँ सभी बनने कों सजधजकर हौ जाता जोँ तुम् मुझे बनने कों कहती। मगर तुमने तौ मुझसे इस बारे मे कभीकुछ कहा हि नहि। इसमेभला मेरा क्याँ कसूर हैं गौरी? मे तौ बस अपनेदिल केँ हाॅथों मजबूर थां औऱ वही करताचला गय़ा जोँ मेरादिल कहतारहा थां। मगरकोई बात नहि डियर, अभि भि कुछ नहि बिगड़ा हैं। तुम् कहोगी तौ मे अब भि वैसा हि बन जाऊॅगा जैसा तुम् कहोगी। यहसमझ लो कि तुम्हारी स्वीकृति सें सभीकुछ एक् लम्हा मे बदल जाएगा। कहने कां मतलबयह कि तुम् अगरअब भि मेरी होँ जाओ तोँ यहसभी लोग मेरे क़हर सें बच जाएॅगे। "
"तूँ अपने औऱ अपनेइस सपोले केँ बारे मे सोच हरामज़ादे। " होश मे आते हि मेरी आवाज़ वातावरण मे गूॅज उठी___"तुँ अगरयह समझता हैं कि तूने हम् सबको रस्सियों मे इसतरह बाॅधकर बहोत बड़ातीर मार लिया हैं तौ इस खुशफहमी मे मतरह तुँ। दुनियाॅ कि कोई भि ताकत तुझको मेरे हाॅथों मरने सें बचा नहि सकती। "
"तूँ अबकुछ नहि कर सकता भतीजे। " अजय सिंह नें विराज कि तरफ देखते हुए कहा___"तेरा सारा उछलना कूदना खत्म हौ चुका हैं। अब तक तुझेही जौ कुछ भि करना थां वोँ सभीकर लिया हैं तूने। अब तोँ मेरी बारी हैं औऱ यकीनमान मे अपनी बारी मे अबकोई कसर नहि छोंड़ूॅगा कुछ भि करने मे। ख़ैर, अभि तौ तेरीयह भि पता नहि हैं कि मेरे एक् हि झटके मे तूँ औऱ यहसभी मेरीकैद मे केसे आँ गए? तुम्हे पूछना चाहिए भतीजे कि मुझे तेरे ठिकाने कां केसेपता चला? औऱ फिन केसे तुम् सभी यहाॅ पहुॅच गए?"
अजय सिंह कि इसबात पऱ सन्नाटा सां छा गय़ा। यहसच थां कि विराज एण्ड जश्न कों होशआते हि सबसे पहले उनकेमन मे यही प्रश्न उभरा थां कि वोँ अचानक यहाॅ केसे आँ पहुॅचे हें? एक् केँ बाद एक् सभीकोई होश मे आँ चुका थां। स्वयं कों इसतरह रस्सियों मे बॅधेदेख वोँ सभी बुरीतरह चौंके थें तथा बुरीतरह छटपटाने लगे थें। लेकिन जब यहाॅ केँ दृष्य व माहौल पर्र सबकी नज़र पड़ी तौ जैसे सबके पैरों तले सें ज़मीन हि गायब हौ गई थि। विराज औऱ रितूयह देखकर आश्चर्यचकित थें कि मुम्बई सें बाॅकी सभीलोग भि यहाॅ आँ चुके हें औऱ वोँ सभी भि उनकीतरह रस्सियों सें बॅधेहुए हें।
"हाहाहाहाहा क्यूं भतीजे ज़बान कों लकवा क्यूं मार गय़ा तुम्हारे?" अजय सिंह ठहाका लगाकर हॅसा___"पूछ न् कि यहसभी केसेहुआ? स्वयं कों बड़ा तीसमारखां समझरहा थां न् तुँ? अबपूछ कि यहसभी केसे हौ गय़ा? एक् हि झटके मे तुँ भि यहाॅ आँ गय़ा औऱ मुम्बई मे रहरहे तेरेयह सभी चाहने वाले भि यहाॅ आँ गए। होश मे आने केँ बाद तेरी सबसे पहलेयही पूछना चाहिए थां। "
"तुम् बताने केँ लिए इतना हि मरेजा रहे हौ तौ स्वयं हि बतादो। " आदित्य नें कहा____"वैसे मुझे पूरा यकीन हैं कि इसमें भि तेरे जैसे कूढ़मगज कां अपनाकोई दखल नहि होगा। "
"इससेकोई फर्क़ नहि पड़ता बेटा। " अजय सिंह नें कहा___"जंग मे सेना कां सारा हि योगदान होता हैं लेकिन जंग कि जीत कां सारा श्रेय राजा कों हि जाता हैं। ख़ैर, अगर मेरा भतीजा यहजान जाए कि यहसभी केसेहुआ हैं तौ यकीनन उसेदिल कां दौरापड़ जाएगा। "
"क्याँ मतलब??" मे चकरा सां गय़ा।
"छोटे कों रस्सियों सें मुक्त करदो सहाय। "अजय सिंह नें अभिजीत सहाय कि तरफ देखते हुए कहा___"मुझे लगता हैं कि यह स्वयं हि बताए तौ ज़्यादा बेहतर होगा। "
अजय सिंह कि इसबात सें हरकोई भौचक्का रह गय़ा। सचमुच सबके पैरों केँ तले सें ज़मीन खिसक गई लेकिन अभि भि बात पूरीतरह सें समझ मे नहि आई थि। उधरअजय सिंह केँ कहने पऱ अभिजीत सहाय नें एक् व्यक्ति कों इशारा किया तोँ उसनेजा करअभय सिंह कों रस्सियों सें मुक्त कर दिया। रस्सी सें छूटते हि अभय सिंह मुस्कुराया औऱ फिन अपने कपड़ों कों झाड़ता हुआअजय सिंह केँ पास आँ कर खड़ा होँ गय़ा।
अभय सिंह केँ होठों पऱ इस वक़्त बहोत हि रहस्यमय मुस्कान थि। मे हि क्याँ हम् सभी भि उसेइस तरहदेख कर चकित थें। जबकि अभय सिंहकुछ देर हम् सबकीतरफ उसी रहस्यमय मुस्कान केँ संग देखता रहा।
"क्षमा करनाराज। " अभय सिंह नें मेरीतरफ देखने केँ बादमाॅ कि तरफ देखा___"आप् भि मुझे क्षमा कीजिएगा भाभीजी। मगर मे क्याँ करता?इस दुनियाॅ मे हरकोई मात्र औऱ केवल अपने बारे मे हि तौ सोचता हैं। "
"अ.भय तुम्। " गौरी केँ होठ बुरीतरह थरथरा कररहगए, बोलि___"तुमने यहसभी किया हैं??"
"करने वाले तोँ बड़े भाई हि हें भाभी। "अभय सिंह नें मुस्कुरा कर कहा___"मैने तौ मात्र इन्हें मोबाइल पर्र राज केँ ठिकाने केँ बारे मे बताया थां। आप् सभीसमझ सकते हें कि राज केँ ठिकाने कां पताचल जाने केँ बाद बड़े भाई केँ लिएयह सभीकर लेना कितना आसानरहा होगा। "
"नहींऽऽऽ। " गौरी केँ कुछ बोलने सें पहले हि करुणा बुरीतरह रोतेहुए चीख पड़ी____"आप् ऐसा नहि कर सकते। आप् ऐसेनीच इंसान कां संग केसेदे सकते हें जिसके बेटे नें स्वयं आपकी पत्नि व बेटी केँ संग ग़लत करने कि कोशिश कि थि? नहि नहि, आप् इसनीच व्यक्ति कि तरह नहि हौ सकते। ईश्वर केँ लिएकह दीजिए कि यहसभी आपने नहि किया। "
हम् सभीअभय सिंह कि इसबात सें हक्के बक्के थें। मुख सें कोईबोल हि नहि फूटरहा थां। अभय सिंह कां इसतरह पलटी मारना हम् सबकेलिए यकीनन अविश्वसनीय थां। लेकिन सच्चाई तौ अब सबके सामने हि थि। उसे केसेकोई नकार सकता थां?
"वाउअभय। " गौरी नें हताशभाव सें कहा___"क्याँ खूब बेटे होने कां फर्ज़ निभाया हैं तुमने। कल तक तोँ बड़ाकह रहे थें कि तुमने हमेशा मुझे अपनीमाॅ कि तरह समझा हैं। फिनआज ऐसा क्याँ होँ गय़ा कि एक् झटके मे तुम् फरिश्ता सें राक्षस बनगए? आख़िर मैंने याँ मेरे बच्चों नें ऐसा क्याँ बुराकर दिया थां तुम्हारा कि तुमने हम् सबकोइस व्यक्ति केँ सामने लाकरइस तरह खड़ाकर दिया?"
"मैनेकहा न् भाभी। "अभय सिंह नें कहा___"हर कोई मात्र अपने बारे मे हि सोचता हैं। बड़े भाई नें अपने बारे मे सोचा थां इसलिए उन्होंने वोँ सभी किया। लेकिन क्याँ किसी नें मेरे बारे मे सोचाकभी? ईश्वर नें एक् बेटा दिया वोँ भि दिमाग़ सें डिस्टर्ब। आपके बेटे कों अरबपति व्यक्ति नें अपनी संपूर्ण दौलत सें नवाज दिया। इस लिए आप् भि खुश हौ गए। मगर मेरा क्याँ??? मेरा तोँ कहींकोई महत्व हि न् रह गय़ा। दिमाग़ सें डिस्टर्ब बेटा हैं, उसका क्याँ भविष्य होँ सकता हैं यह बताने कि ज़रूरत नहि हैं। इसलिए मैने बहोत सोचसमझ कर एक् सौदा किया। "
"स सौदा???" गौरी केँ होंठ काॅपे। हम् सभी केँ चेहरों पऱ भि गहन उलझन केँ भावउभर आए।
"हाॅ भाभी। "अभय सिंह नें कहा____"मैने बड़े भाई कों मोबाइल लगाया औऱ उनसेकहा कि अगर आपकोइस जंग मे जीत हासिल करनी हैं तोँ आपको मेरा कहना मानना पड़ेगा। वरना आप् किसी भि तरह सें इसजंग मे जीत नहि पाएॅगे। क्योंकि इनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी तोँ विराज केँ पासरखा इनका वोँ सभी ग़ैर कानूनी सामान हैं। उस सामान केँ तहत विराज इन्हें जब चाहे कानून कि गिरफ्त मे जिंदगी भर केँ लिए डलवा सकता हैं। यहबात इन्हें भि अच्छी तरहपता हैं। तब इन्होंने मुझसे कहा कि मे इसजंग मे क्याँ कर सकताहूॅ? मैने बताया कि इनका सारा ग़ैर कानूनी सामान आज कि तारीख़ मे मेरे कब्जे मे हैं। इस सामान कि कीमतयह होगी कि यह मेरे बेटे कां बेहतर सें बेहतर इलाज़ करवाएॅगे, संग हि ज़मीन जायदाद मे आधाहक़ मेरा होगा। इन्हें मेरा वोँ सौदा मंजूर थां, इसलिए बात कों आगे बढ़ा दिया गय़ा। यहउसी कां नतीजा हैं कि आज आप् सभी यहाॅ हें। कल जगदीश ओबराय कां मोबाइल इसीलिए नहि लगरहा थां क्योंकि मे ग़लत नंबर पऱ काललगा रहा थां। मे नहि चाहता थां कि उस सिचुएशन मे जगदीश वहाॅ आँ जाए औऱ मेरेकाम मे कोई अड़चन आँ जाए। यह मेरी हि स्कीम थि कि सुभह नास्ते केँ वक़्त मे बड़े भाई विराज केँ मोबाइल सें पवन केँ मोबाइल पऱ काल करें ताकि वैसे हालात बन जाएॅ। हलाॅकि जैसा मैने सोचा थां उससे बेहतर हि माहौल बन गय़ा थां। क्योंकि पवन नें अपनेफोन कां स्पीकर स्वयं हि ऑनकर दिया थां। "
"ओह तौ तुमने केवलइस वजह सें हम् सबकेसंग इतना बड़ा धोखा किया हैं। " गौरी नें कहा____"तुम्हें क्याँ लगता हैं कि अभयजिस व्यक्ति केँ संग तुमने हम् सबका सौदा किया हैं वोँ व्यक्ति तुम्हारे लिए इतनाकुछ करेगा? अरे जिसने ज़मीन जायदाद केँ लिए अपनेमाॅ बाप व भइया तक कों जान सें मार दिया वोँ तुम्हें भि तोँ मार सकता हैं। रहीबात तुम्हारे बेटे केँ इलाज़ कि तोँ वोँ हम् भि करवा देते। मैने तोँ इस बारे मे सोच भि लिया थां। यादकरो मैने हि इसबात केँ लिए ज़ोर दिया थां कि तुम् स्वयं कि समस्या कों भि दूरकर लो। मैने जगदीश भइया साहब सें बात कि औऱ फिन तुम्हारा इलाजहुआ। मे नहि जातनी कि इस सबकेबाद भि तुम्हारे अंदरयह बात केसे आँ गई कि हम् सबको एक् हि झटके मे इसतरह मौत केँ मुह मे डाल दियाजाए?"
गौरी कि यह बातें सुनकर अभय सिंह जल्दी कुछबोल नं सका। कदाचित गौरी कि इसबात नें उसे सोचने पर्र मजबूर किया कि "एक् तोँ अजय सिंह अपने स्वार्थ केँ लिए किसी भि हद सें गुज़र सकता हैं दूसरी यह कि वोँ स्वयं उसके बेटे केँ बेहतर इलाज़ केँ बारे मे सोचे बैठी थि"। इधरअभय सिंह कों एकदम सें चुप हौ जातेदेख अजय सिंहमन हि मन बुरीतरह चौंका।
"यह महिला तुम्हें बरगलाने कि कोशिश कररही हैं छोटे। "अजय सिंह नें तपाक सें कहा___"यह ऐसाकुछ भि नहि कर सकती जिसकी इस वक़्त यह बातें गढ़रही हैं। तुम्हारे बेटे कां बेहतर इलाज़ मे करवाऊॅगा। बल्कि अगरयह कहूॅ तौ अधिक उचित होगा कि मैंने तौ इस बारे मे शुरूआत भि कर दि हैं। तुम् अपने बच्चे केँ लिए बिलकुल भि फिक्र मतकरो छोटे। उसका इलाज़ मे स्वयं विदेश मे करवाऊॅगा। "
"तुम् अपनी मर्ज़ी सें कुछ भि करने केँ लिए स्वतंत्र हौ अभय। " गौरी नें कहा___"परमेश्वर जानता हैं कि मैने याँ मेरे मरहूम पति नें कभी किसी कां बुरा नहि चाहा थां। हॅसते खेलते घऱ मे आग लगाने वाला तौ मात्र यही एक् व्यक्ति थां। इतना तोँ अब तुम् भि समझ हि गए होँ कि इसने अपनी खुशी केँ लिएतथा अपने स्वार्थ केँ लिए हम् सबकेसंग क्याँ कुछ नहि किया हैं। ज़मीन जायदाद औऱ हवेली कों हड़पने केँ चक्कर मे इसने अपने हि भइया कों ज़हरीले सर्प सें डसवाकर मार डाला। उसकेबाद अपनी करतूत कों छुपाने केँ लिए इसनेमाॅ बाबूजी कां एक्सीडेन्ट करवाया। आजजब भगवान नें इंसाफ किया तोँ तिलमिला उठायह। मे हैरान हूॅ कि तुम् सभीकुछ जानते बूझते हुए भि इसकासंग देने केँ लिए अथवा इससेइस तरह कां सौदा केसेकर बैठे? हमेंइस बात कां दुख नहि हैं कि तुमने हम् सबको धोखा दिया औऱ फिन यहाॅ लेँ आए। क्योंकि जिंदगी मे इतनाकुछ पा लिया हैं औऱ सहनकर लिया हैं कि अब किसीबात सें कोई फर्क़ हि नहि पड़ता। लेकिन हाॅइस सबकेबाद भि तुम्हारे प्रति यहीदिल करता हैं कि तुम् ऐसी मुसीबत मे नं फॅसजाओ जिसके तहत एक् बारफिन सें यहकथा दोहरा दि जाए। "
"माॅ कि बातसही हैं चाचा जी। " सहसा मैने भि इसबीच हस्ताक्षेप किया____"दूसरी बात, आपको क्याँ लगता हैं कि मे यहसभी अपनेहक़ कों पाने केँ लिएकर रहाहूॅ?? नहि चाचू, आप् तोँ देख हि चुके हें कि आज केँ टाइम मे मे अगर चाहूॅ तोँ इस पूरे गाॅव कों एक् लम्हा मे खरीदलूॅ। बात ज़मीन जायदाद याँ किसी प्रापर्टी कि नहि हैं बल्कि बात हैं अपनेसंग हुए अन्याय कि औऱ अत्याचार कि। प्रश्न उठता हैं कि आख़िर इन्हें किस चीज़ कि कमी थि? दादाजी जी कि ज़मीन जायदाद मे तोँ उनकेसब बेटों कां बराबर हि हक़ थां। ज़मीनों मे रातदिन खून पसीना बहाकर मेरे पिता जी नें एक् मामूली सें घऱ कों इतनी बड़ी हवेली मे तब्दील कर दिया। घऱ मे हरसुख सुविधाएॅ हौ गईं, यहाॅ तक कि मेरे हि पिता जी केँ खून पसीने कि कमाई सें इनके स्वयं केँ कारोबार कि बुनियाद भि रखी गई। बदले मे इन्होंने कभीकुछ दिया नहि थां औऱ नाँ हि किसी नें इनसेकुछ पाने कि आशा कि थि कभी। अब प्रश्न यह उठता हैं कि ऐसी क्याँ वजह थि कि इन्होंने एक् हॅसते खेलते परिवार कों ख़ाक मे मिला दिला?अगर इन्हें ज़मीन जायदाद कि इतनी हि भूॅख थि तौ खुल केँ कहते। मुझे पूरा यकीन हैं कि उस टाइम मेरे पिता जी इनकी भूॅख कों शान्त करने कि पूरी कोशिश करते। भले हि उन्हें अपने पत्नि बच्चों कों लेकरघऱ सें निकल जानां पड़ता। "
"देखो तौ। " अजय सिंह अंदर हि अंदर बुरीतरह भिन्ना गय़ा थां, बोला____"साला आज कां छोकरा, कैसी भाषणबाज़ी कररहा हैं। इसे तौ इतनी भि तमीज़ नहि हैं कि जब बड़ेआपस मे बातकर रहेहों तोँ बच्चों कों बीच मे नहि बोल्ना चाहिए। "
"औऱ जब बड़े हि पाप करने कि हर सीमा लाॅघ जाएॅ तोँ उसका क्याँ?" सहसा रितू दिदी बोल पड़ीं____"इस लड़ाई मे किसके संग क्याँ होगाइस बात कां फैंसला तोँ ऊपर वालाकर हि देगा। लेकिन यहाॅ पर्र मे भि यह कहना चाहती हूॅ कि दुनियाॅ मे ऐसाकौन सां बाप हैं जोँ अपनी हि बेटियों कों अपने नीचे सुलाने कां तसव्वुर भि करता हौ? आप् कहते हें कि राज कों तमीज़ नहि हैं बात करने कि। जबकि सच्चाई तोँ यह हैं कि तमीज़, मान मर्यादा, इज्ज़त इनसभी चीज़ों कां अगर किसी मे हद सें ज़्यादा अभाव हैं तोँ वोँ केवल औऱ केवल आप् मे हैं। इस जन्म मे तोँ किसीतरह यह जिंदगी काटना हि होगा मुझे, क्योंकि मैने अपनायह जिंदगी अपने सच्चे भइयाराज कि सुरक्षा मे अर्पण कर दिया हैं। लेकिन मरने केँ बाद परमेश्वर सें केवलयही फरियाद करूॅगी कि किसी ग़रीब बाप कि औलादबना देनामगर आप् जैसे किसी पापी कि औलाद नं बनाना। " कहते कहते रितू दिदी कि ऑखेंछलक पड़ीथीं, फिन वोँ अभय सिंह कि तरफ देखते हुए बोलीं___"आपसे यह उम्मीद नहि थि चाचू कि आप् अपने बेटे केँ बेहतर इलाज़ केँ स्वार्थ मे अपनेइस नीचव घटिया भइया कां संग देंगे। इससे अच्छा तौ यही होता कि आपका बेटा जिंदगी भर वैसा हि रहाआता। "
"तुम् ठीक कहती हौ रितू। " करुणा नें रोतेहुए कहा___"मेरा बेटा ऐसे हि अच्छा हैं। मुझे इसकाकोई इलाज विलाज नहि करवाना। इसनीच व्यक्ति केँ पैसे कां एक् आनां भि अपने बेटे पऱ नहि लगाना चाहती मे। " कहने केँ संग हि करुणा नें अभय सिंह कि तरफ देखा औऱ फिन बोलि____"कितना अभिमान थां मुझे कि कम सें कम मेरा पति अपने मॅझले भइया कि तरहनेक दिल तोँ हैं। मगरआज आपने मेरेउस अभिमान कों चकनाचूर कर दिया हैं अभय सिंह। लेकिन एक् बातकान खोलकर सुनलो, यह मेरा बेटा हैं। मे इसे स्वयं जान सें मार देना पसन्द करूॅगी मगरइस व्यक्ति केँ पाप कां रुपया इस पऱ नहि लगाऊॅगी। औऱ अगर आपने मुझे मजबूर किया तोँ देख लेना अच्छा नहि होगा। मे अपने बच्चों केँ संग स्वयं ज़हरखा करजान दे दूॅगी। "
"नहींऽऽऽ करुणा नहि। " अभय सिंह पूरी शक्ति सें चीख़ पड़ा, बुरीतरह तड़पकर बोला____"तुम् ऐसाकुछ भि नहि करोगी। मुझसे ग़लती हौ गई करुणा, प्लीज मुझे क्षमा करदो। मेरीमति मारी गई थि जौ मैनेइस व्यक्ति केँ संगऐसा सौदाकर लिया। " कहने केँ संग हि अभय सिंह गौरी कि तरफ बढ़ाफिन बोला____"मुझे क्षमा करदो भाभी। आपने मेरेलिए इतनाकुछ किया औऱ मेरी जानकारी केँ बिना भि मेरे बेटे केँ इलाज़ करवाने कां सोचा, औऱ मे मूरख आप् हि केँ संग इतना बड़ापाप कर बैठा। हे ईश्वर! तुँ मुझेइस सबकेलिए क्षमा न् करना। "
अभय सिंह कों इसतरह पलटी खातेदेख अजय सिंह भौचक्का सां रह गय़ा। लेकिन फिन जल्द हि सम्हल भि गय़ा वो। कदाचित उसे अंदेशा थां कि अभय सिंह अपनी बातों सें मुकर जाएगा। अतः उसने जल्दी हि सहाय कि तरफ देखते हुए कहा____"इस नामुराद कों जल्दी रस्सियों मे बाॅधो सहाय। मुझेपता थां यह अपनीबात पऱ कायम नहि रह पाएगा। शायद इसका भि इन लोगों केँ संग हि मरना लिखा हैं तौ यहीसही। "
अजय सिंह कि बातसुन कर सहाय जल्दी हि हरकत मे आया। उसने अपने आदमियों कों भि इशारा किया औऱ स्वयं भि अभय सिंह कि तरफ लपका। उधर अजय सिंह कि यहबात अभय सिंह केँ भि कानों मे पड़ चुकी थि। जैसे हि सहाय उसके पीछे पहुॅचा वैसे हि अभय सिंह तेज़ी सें पलटा औऱ पलक झपकते हि उसने एक् हाथ सें सहाय कों उसकी गर्दन सें पकड़कर अपनी बाहों मे कसा औऱ दूसरे हाथ मे लिए रिवाल्वर कों उसकी कनपटी पऱ रख दिया।
अजय सिंहयह देखकर हक्का बक्का रह गय़ा। उसेसमझ न् आया कि अभय सिंह केँ पास रिवाल्वर कहाॅ सें औऱ कब आँ गय़ा? उधरअभय सिंह केँ बंधनों मे जकड़ा अभिजीत सहाय उससे छूटने केँ लिए छटपटाए जारहा थां।
"अपने आदमियों सें कह सहाय। "अभय सिंह नें खतरनाक भाव सें कहा___"कि यहसभी अपने अपने हथियार फेंकदें औऱ फिनइन सभी कों रस्सियों केँ बंधन सें मुक्त करदें। वरना तेराकाम तमाम करने मे मुझे ज़रा भि टाइम नहि लगेगा। "
"फ.फेंक दो। "मौत केँ डर सें थरथराता हुआ सहाय एकदम सें चीखा____"अपने अपने हथियार फेंकदो औऱ वहीकरो जौ इसनेकहा हैं। "
"कोई भि अपने हथियार नहि फेंकेगा सहाय। "अजय सिंह नें कहा___"औऱ हाॅडरो मत। यह तुम्हें कुछ नहि करेगा। "
"मे मरना नहि चाहता ठाकुर साहब। " सहाय बुरीतरह छटपटाते हुए बोला___"इस व्यक्ति कां लहजाबता रहा हैं कि यहइस वक़्त कुछ भि कर सकता हैं। हाॅ ठाकुर साहबअगर मैने अपने आदमियों कों हथियार फेंकने केँ लिए नहि कहा तोँ यह मुझे समाप्त कर देगा। "
"बड़े भाई। " अभय सिंह गुर्राया____"आजमाने कि कोशिश मतकरो। टाइम कि नज़ाकत कों देखकर कामकरो। औऱ हाॅ एक् बातयाद रखो, मुझे मरने कां कोईडर नहि हैं। अब तोँ बसहर स्थान मुझेमौत हि मौत दिखाई देरही हैं। इसलिए अगर भलाई चाहते होँ तोँ वहीकरो जौ मैनेकहा हैं। "
अजय सिंह अपने छोटे भइया केँ गुस्से सें भलीभाॅति परिचित थां। इसलिए उसने उसकाकहा मानने मे हि अपनी भलाई समझी। वोँ देखरहा थां कि इस वक्यअभय सिंह सहाय कों अपनेआगे कियेहुए हैं औऱ हरतरफ उसकी पैनी नज़र हैं। छोटी सि एक् ग़लती सहाय कां भेजा उड़ा सकती थि औऱ सहाय केँ मर जाने सें उसके व्यक्ति उसकाकोई आदेश नहि मानेंगे।
बहोत हि मजबूर व लाचार भाव सें अजय सिंह नें एक् बार सबकीतरफ देखा उसकेबाद उसनेसब गनमैनों कि तरफ देखते हुएहाॅ मे अपनेसिर कों हिलाया। प्रतिमा व शिवायह सभीदेख कर बुरीतरह आतंकित सें नज़रआने लगे थें। ख़ैरअजय सिंह केँ इशारे सें सब गनमैनों नें अपने हथियार फेंक दिये।
"अब इन सबके बंधनों कों भि खोलो। "अभय सिंह नें गनमैनों कों हुक्म सां दिया।
अजय सिंह कां दिमाग़ बड़ी तेज़ी सें दौड़रहा थां। वोँ जानता थां कि ऐसे मे वो जीती हुईँ बाज़ी हार जाएगा। अतः वो कोई नं कोई जुगत लगाने मे लगाहुआ थां। उधरअभय सिंह केँ कहने पर्र कुछ गनमैन आगे बढ़े औऱ सबके बंधनों कों खोलने लगे।
अभय सिंह पूरीतरह सतर्क थां। वो सहाय कि कनपटी पर्र रिवाल्वर सटाएहर तरफदेख रहा थां। लेकिन अधिकदेर तक उसकी सतर्कता उसकेकाम नं आँ सकी। अचानक हि एक् तरफ सें धाॅय कि आवाज़ हुई थि औऱ फिनअभय सिंह केँ हलक सें दर्द मे डूबी चीख़ निकल गई। रिवाल्वर कि गोली सीधा उसकेकान कों छूकर गुज़र गई थि। गरमगरम शोलाकान कि लौ कों मानो भीषण तपिश देकर गुज़रा थां। जिसका असरयह हुआ कि अभय सिंह छिटककर दूरहट गय़ा थां। रिवाल्वर जानेकब उसके हाॅथ सें निकल गय़ा थां। सहाय उसकी गिरफ्त सें छूटते हि एक् तरफ कों सरपट भागा थां।
इधरअभय सिंह केँ संगहुए इस हादसे नें अजय सिंह केँ पलड़े कों पुनः मजबूत करने कि राह पकड़ली। सबके बंधनों कों छुड़ाने मे लगे गनमैन इस हादसे केँ होते हि जल्दी अपनी अपनी गन्स कि तरफ लपके। उधर आदित्य, रितू, मे औऱ पवन जल्द जल्द अपने बंधन खोलते जारहे थें। दरअसल जोँ गनमैन हमारे बंधनों कों खोलरहे थें वोँ इस हादसे केँ होते हि उसे वैसी हि हालत मे छोंड़ कर अपने अपने हथियारों कि तरफ दौड़ पड़े थें।
उधरअभय सिंहजब तक स्वयं कों सम्हालता अजय सिंह उसकेपास पहुॅच चुका थां। उसने ज़ोर कि लातअभय सिंह केँ पेट मे मारी। अभय सिंह लहराता हुआदूर जाकर गिरा। अजय सिंहइस समय हिंसक जानवर कि तरहलग रहा थां। अफरा तफरी केँ माहौल कों देखकर शिवा कां भि दिमाग़ चल गय़ा। वो जल्दी हि इधरउधर देखने लगा। तत्काल हि उसकी नज़र सोनम पर्र पड़ी। वो तेज़ी सें उसकीतरफ बढ़ा। सोनम केँ पास पहुॅच कर उसने बेख़ौफ होकर उसकी दाहिनी कलाई कों पकड़ लियाफिन बोला___"आओ मेरीजान। हम् भि अपना प्रोग्राम बनाते हें। सोचा थां कि दिल कि बातमान करइस सबसे तौबाकर लूॅगा। मगर कदाचित यह मेरी भाग्य मे हि नहि हैं। "
"छोंड़ दे मुझे। " सोनम नें अपनी कलाई कों उससे छुड़ाते हुए कहा____"तेरे जैसा घटियाॅ इंसान तोँ सारे संसार मे भि न् होगा। अपनी हि बेहन केँ बारे मे इतना गंदा सोचने मे तुझेही ज़रा भि लज्जा नहि आती। "
"यही तौ बात हैं सोनम। " शिवा अपने सें बड़ी ऊम्र कि बेहन कों पूरी ढिठाई सें उसकेनाम सें संबोधित करतेहुए कहा___"जब मुझेपता चला कि मुझे तुमसे प्रेम होँ गय़ा हैं तोँ मैने भि सोचाचलो अच्छा हि हुआ। दुनियाॅ कि एक् हसींन लड़की सें अगर मेरी विवाह होँ जाएगी तोँ मेरा जिंदगी धन्य हौ जाएगा। मगर जल्द हि समझ मे आँ गय़ा कि प्रेम मुहब्बत साली होती हि उसी सें हैं जौ हमेंकभी मिलने वाला नहि होता। मुझेलगा दोस्त इससे अच्छा तोँ वही थां जबकि मे मात्र रासलीला सें हि खुश रहता थां। "
"मुझे तेरीयह बकवास नहि सुननी कमीने। " सोनम नें गुस्से मे कहा____"मे कहतीहूॅ छोंड़ दे मेरा हाॅथ वरना तेरेलिए अच्छा नहि होगा। "
"पर्र अगर तुम् चाहो तौ मे अब भि बदल सकताहूॅ। " शिवा नें उसकीबात पर्र ध्यान दिये बिना हि बोला___"हाॅ सोनम, तुम् मेरी इश्क कों स्वीकार करलो औऱ मुझसे विवाह करलो। हलाॅकि मे जानता हूॅ कि हम् दोनो केँ माॅ बाप इस रिश्ते केँ लिए एग्री नहि होंगे। इसलिए हम् कहींदूर चले जाएॅगे। वहीं कहीं एक् नया संसार बसाएॅगे। मैने तोँ सबकुछ सोच भि लिया हैं सोनम। तुम् किसी भि बात कि चिन्ता मतकरो। धन दौलत बहोत हैं, उसी मे हम् जिंदगी भरऐश करेंगे। क्याँ कहती हौ.आहहहहह। "
अभि शिवा कां वाक्य पूरा हि हुआ थां कि तभी उसकेगाल पऱ झन्नाटेदार थप्पड़ पड़ा थां। उसकेकान एकदम सें झनझना कररहगए थें। अपनेगाल कों सहलाता हुआ शिवाजब सीधाहुआ तौ उसकी नज़र विराज पऱ पड़ी। विराज कों देखते हि उसकी नानीमा मर गई।
"इससे बेहतर मौका नहि मिलेगा बेटा। " मैने उसकी ऑखों मे झाॅकते हुए कहा___"सुना हैं मुझसे दोदो हाॅथ करने केँ लिए बड़ा फुदकता थां तुँ। अब आँ गय़ा हूॅ सामने तोँ हौ जाएदो दो हाॅथ? क्याँ कहता हैं?"
"सभी टाइमसमय कि बातें हें भइया। " शिवा नें सहसा फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा____"हौ सकता हैं कि मे पहले भि तुमसे दोदो हाॅथ करने केँ काबिल नं रहा होऊॅ लेकिन फिन भि दोदो हाॅथ करने कि हिमाकत अवश्य करतामगर अब वोँ बात नहि रह गई। "
"क्यूं क्याँ हुआ?" मैने मुस्कुरा कर कहा___"शेर कां सामना होते हि सारी हेकड़ी निकल गई?"
"हेकड़ी तोँ अभि भि हैं भइया। " शिवा नें कहा___"मगर जैसा कि मैनेकहा न् कि अब वोँ बात नहि रह गई। अब तोँ बसबात यह हैं कि किसी सें इश्क़ हुआ औऱ हम् स्वयं हि मरगए। अब अगर तुम् एक् मरेहुए कों मारना चाहते हौ तोँ ठीक हैं लो हाज़िर हूॅ, जौ जी मे आएकरलो। वादा करताहूॅ कि ओह तक नहि करूॅगा। "
शिवा कि यहबात सुनकर मे बुरीतरह हैरान रह गय़ा। मुझेसमझ न् आया कि यह बद्जात बोल क्याँ रहा हैं। जबकि मेरी उलझन कों देखते हुए सोनम दिदी नें कहा___"यह कमीना कहता हैं कि यह मुझसे प्रेम करता हैं औऱ अब विवाह भि करना चाहता हैं। "
"क्याऽऽऽ?????" सोनम दिदी कि बातसुन कर मे बुरीतरह उछल पड़ा। आश्चर्य सें शिवा कि तरफ देखते हुए बोला___"आख़िर गंदाखून कर भि क्याँ सकता हैं? जिसका बाप हमेशा अपने हि घऱ कि बहू बेटियों पऱ नीयत ख़राब करतारहा होँ उसका बेटा भला केसेदूध कां धुलाहुआ हौ जाएगा?"
"इस बारे मे बात करने कां कोई फायदा नहि हैं भइया। " शिवा नें कहा___"क्योंकि इश्क़ जब किसी केँ सिरचढ़ जाता हैं न् तोँ फिनउसे ब्रम्हा भि नहि समझा सकता। अतः तुम् इस चक्कर मे मत पड़ो। बल्कि उस चक्कर मे पड़ो जिसके लिए तुम्हें पड़ना चाहिए। इस टाइम तुम् स्वयं केँ संगसंग अपने लोगों कि जान कि फिक्र करो। एक् बात औऱ, मेरीतरफ सें बेफिक्र रहना। "
शिवा नें इतनाकहा औऱ फिन बड़े हि करुणभाव सें सोनम कि तरफ देखा। उसकेबाद वो एक् लम्हा केँ लिए भि उस स्थान नहि रुका। मे उसकीइस विचित्र सि हरकत सें तथा उसकी बातों सें बुरीतरह चकित थां। तभी वातावरण मे गोलियाॅ चलने कि आवाज़ें आनेलगी। मे एकदम सें फिरकिनी कि मानिंद घूमा।
आदित्य, रितू दिदी वपवन केँ हाॅथों मे गनें थि औऱ वोँ अधाधुंध गोलियाॅ बरसाए जारहे थें। पवन कां तौ निशाना हि नहि लगरहा थां। यहदेख कर मे मुस्कुराया। साले नें जिंदगी मे कभी खिलौने कां तमंचा तक नं देखा थां औऱ आज दोस्ती केँ लिएगन लिएमौत कां ताण्डव कररहा थां। मैने चारोतरफ देखा, मुझे औरतों मे कहींकोई दिखाई नं दिया। यह देखकर मे बुरीतरह चौंक गय़ा। मन मे प्रश्न उभरा कि यहसभी कहाॅगईं? कहीं किसी कों कुछ होँ तौ नहि गय़ा। मे सोनम दिदी कों छोंड़ कर एक् तरफ कों भागा।
रितू दिदी, आदित्य वपवन पेड़ों कि ओट मे पोजीशन लिएहुए थें। अजय सिंह, प्रतिमा, अभय चाचा, व सहाय कहींदिख नहि रहे थें। संभव हैं उन्होंने भि किसी पेड़ कि ओट मे पोजीशन लियाहुआ थां। मे छिपते छिपाते हुए फार्महाउस कि इमारत केँ पिछले भाग मे आँ गय़ा। यहाॅ आँ कर मैने चारों तरफ देखा। कहींकोई नहि थां। नीचे ज़मीन पर्र मरेहुए गनमैन अपने हि खून मे नहाए पड़े थें।
माॅ लोगों कों कहीं नं देखकर मे बहोत अधिक चिंतित व परेशान होँ गय़ा। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि यहसभी इतना जल्द कहाॅचले गए? मे इमारत केँ पिछले भाग सें निकलकर सामने कि तरफआया हि थां कि तभी धाॅय कि आवाज़ हुईँ। कहीं सें गोलीचली थि जौ कि मेरे दाहिने बाजू कों छूकर निकल गई थि। मे इस सबसे बेखबर सां होँ गय़ा थां। मेरे ज़हन मे केवलमाॅ लोगों कां हि ख़याल तारी थां।
गोली कि आवाज़ सें तथा अपनी बाजू मे उसकी छुवन सें मे बुरीतरह उछल पड़ा थां औऱ इसी उछलाहट मे मे जल्दी हि एक् पेड़ कि ओट मे आँ गय़ा। ओट सें सिर निकाल कर मैंने आसपास कां बारीकी सें मुआयना किया। तभी मेरे कानों मे इमारत केँ अंदर सें कुछ लोगों कि आवाज़ सुनाई दि। मे आवाज़ों कों सुनने केँ लिए ग़ौर सें ध्यान लगाया। तभी मेरे कानों मे मेरीमाॅ कि आवाज़ पड़ी। वोँ कहरही थि____"मुझे बाहर् जानेदो। वहाॅ मेरा बेटा गोलियों केँ बीच मे खड़ा हैं औऱ तुम् सभी कहती होँ कि मे यहीं पऱ रहूॅ। अरे मेरे बेटे कों कुछ होँ गय़ा तोँ मेरे ज़िन्दा रहने कां क्याँ मतलबरह जाएगा?"
मे सभीसमझ गय़ा। मतलबमाॅ लोगसभी इमारत केँ अंदर हें औऱ शायद सुरक्षित भि हें। वरना वोँ ऐसीबात उन लोगों कों न् कहतीं। यहसोच कर मे जल्दी हि जम्पमार कर दूसरे पेड़ कि तरफ भागा। मेरेऐसा करते हि एकदम सें गोलियों कि आवाज़ें आने लगीं। किसीतरह बचते बचते मे आदित्य केँ पास पहुॅच हि गय़ा। आदित्य नें मुझे देखा तोँ इशारे सें हि पूछा बाॅकी सभी केसे हें? तौ मैने बताया सभीठीक हें।
अभि मे आदित्य कों इशारे सें यह बताया हि थां कि तभी सोनम दिदी कि चीख़गूज उठी। ऐसा लगा जैसे उन्हें कोईमार रहा होँ। मैने जल्दी हि उसतरफ देखने कि कोशिश कि। बाॅईतरफ अजय सिंह सोनम दिदी कों उनकेसिर केँ बालों सें पकड़े घसीटते हुएलिए आँ रहे थें। उनके एक् हाॅथ मे रिवाल्वर भि थां। यहदेख कर मे सकते मे आँ गय़ा।
"अगरइस लड़की कों ज़िन्दा देख्ना चाहते होँ तौ तुम् सभी सामने आँ जाओ। "अजय सिंह कि आवाज़ गूॅजी___"औऱ हाॅ अपने अपने हथियार फेंककर हि आनां, वरना मे इस लड़की कों गोलीमार दूॅगा। "
अजय सिंह कि इस धमकी पर्र हम् मे सें कोईकुछ न् बोला। कुछ पलों तक अजय सिंहइधर उधर देखते हुए खड़ारहा। उसकेबाद फिन बोला___"मे केवलतीन तक गिनूॅगा। अगर मेरेतीन गिनने तक तुम् लोग मेरे सामने नहि आए तोँ समझलो यह लड़की अपनी जीवन सें हाॅथधो बैठेगी। "
अजय सिंह नें गिनना शुरुआत कर दिया। पेड़ों कि ओट मे छुपे हम् सभी कों बाहर् निकलना अब अनिवार्य थां। अजय सिंह नें जैसे हि तीनकहा हम् सभी उसके सामने आँ गए। हम् लोगों कों देखकर अजय सिंह मुस्कुराया लेकिन फिन एकाएक हि उसके चेहरे केँ भाव खतरनाॅक रूप सें बदले। उसने रिवाल्वर वाला हाॅथ उठाया औऱ बिनाकुछ कहे फायरकर दिया। गोली सीधा रितू दिदी केँ पेट मे लगी। फिज़ा मे रितू दिदी कि हृदयविदारक चीख़ गूॅज गई।
अजय सिंह सें अचानक इस कृत्य कि कल्पना हम् मे सें किसी नें न् कि थि। उधरपेट मे गोली लगते हि रितू दिदी कटेहुए वृक्ष कि तरह लहराकर वहीं ज़मीन पर्र गिरने लगी। मे बिजली कि सि तेज़ी सें उनकीतरफ लपका। रितू दिदी कों बाॅहों मे सम्हाले मे बुरीतरह रोतेहुए चीखने लगा। वोँ मेरी बाॅहों मे थीं। उनके चेहरे पऱ पीड़ा केँ असहनीय भाव थें लेकिन ऑखेंमुझ पर्र स्थिर थीं।
"दिदी, यह क्याँ हौ गय़ा दिदी?" मे उन्हें सम्हालते हुए वहीं ज़मीन पर्र उकड़ू सां बैठ गय़ा____"नहि नहि, आपकोकुछ नहि हौ सकता। "
"अभि जंग समाप्त नहि हुईँ पगले। " रितू दिदी नें पीड़ित भाव सें कहा____"अभि तोँ इस धरती पर्र वोँ इंसान जीवित हैं जिसने अपना आख़िरी सबूतयह दे दिया हैं कि उसकेदिल मे किसी केँ लिए भि कोईरहम अथवा प्रेम नहि हैं। ऐसे इंसान कों जीवित रहने कां कोई अधिकार नहि हैं। "
"मे उसे ज़िंदा नहि छोंड़ूॅगा दिदी। " मैने सिसकते हुए कहा___"बस आप् कों कुछ नहि होना चाहिए। मे आपको खोना नहि चाहता। "
"होनी कों कौनटाल सकता हैं राज?" दिदी नें सहसा मेरे चेहरे कों एक् हाॅथ सें सहलाते हुए कहा___"बड़ी आरज़ू थि कि जिंदगी भर तेरेसंग रहूॅगी। तुम्हे स्वयं सें दूर नहि जाने दूॅगी। मगरदेख लें, आज स्वयं हि तुझसे दूरजा रहीहूॅ। "
"नहि नहि। " मैने उन्हें स्वयं सें छुपका लिया औऱ बुरीतरह रोतेहुए बोला___"आप् कहीं नहि जारही हें। मे आपको कहीं जाने भि नहि दूॅगा। मुझे मेरी दिदी सही सलामत चाहिए। मे आपके बिनाजी नहि पाऊॅगा। "
"इतना प्रेम मत दिखाराज। " रितू दिदी कि आवाज़ लड़खड़ा गई____"वरना मरने केँ बाद भि मुझे शान्ति नहि मिलेगी। ख़ैर, अभि तुँ जा मेरे भइया। वरना वोँ राक्षस फिन किसी कों गोलीमार देगा। देख तुझेही मेरीशपथ हैं, तुँ जाराज। "
दिदी कि शपथ नें मुझे मजबूर कर दिया। मे भारीमन सें उन्हें वहीं पर्र छोंड़ कर पलटा। इधर रितू केँ संगहुए इस हादसे नें आदित्य पवनवअभय चाचा कों भि अचेत सां कर दिया थां। वोँ सभीठगे सें ऑखें फाड़े देखेजा रहे थें।
"अपनी ज़िदव अपने अहंकार मे किसकिस कों मारोगे अजय?" सहसाइस बीच प्रतिमा नें अजय सिंह कि तरफ देखते हुए बेहद हि करुणभाव सें रोतेहुए कहा___"उस दिन भि तुमने नीलम कों जान सें मार हि दिया थां औऱ आज एक् औऱ बेटी कों जान सें मार दिया। आख़िर किसकिस कों जान सें मारोगे तुम्? यह दौलतयह ज़मीन जायदाद किसके भोगने केँ लिए बनाई हैं तुमने? मुझे भि मारदो, अपनी ऑखों केँ सामने अपनी बेटियों कों इसतरह मरतेदेख करभला केसे सुकून सें जी पाऊॅगी मे?"
"यह मेरीकोई नहि लगती प्रतिमा। " अजय सिंह गुर्राया___"अगर लगती तौ आजयह अपने बाप केँ संग खड़ी होती नाँ कि अपने बाप केँ दुश्मनों केँ संग। "
"तौ क्याँ ग़लत किया इन्होंने?" प्रतिमा नें बिफरे हुए लहजे सें कहा___"अरे इन लोगों नें तोँ वही किया जौ हर लड़की कों करना चाहिए। अपने इज्ज़त औऱ सम्मान कि रक्षा करनाहर लड़की याँ स्त्री कां धर्म हैं। तुम् तोँ उसके बाप होँ नं, तुम्हें तोँ स्वयं अपनेघऱ कि इज्ज़त कि हरतरह सें रक्षा करना चाहिए थि। मगर तुम् तोँ स्वयं हि अपनी हि बहू बेहनव बेटियों कि अस्मत कों लूटने वालेबन गए। "
"यह तुम् कौन सि भाषाबोल रही हौ प्रतिमा?" अजय सिंह कि ऑखें फैली____"आज तुम्हारे मुख सें ऐसी बातें केसे निकलने लगीं? क्याँ सभीकुछ भूल गई होँ तुम्? तुम् तोँ स्वयं भि उतनी हि गुनहगार हौ जितना कि तुम् इस टाइम मुझेसमझ रही होँ। इसलिए ऐसीबात मतकरो, क्योंकि यहसभी तुम् पऱ शोभा नहि देती हें। "
"मे मानती हूॅ कि मे इस सबमें बराबर कि गुनहगार हूॅअजय। " प्रतिमा नें कहा___"मगर यह भि एक् सच हैं कि इस सबकेलिए भि केवल तुम् हि जिम्मेदार होँ। मे तौ तुमसे अंधाधुंध प्रेम हि करती थि। लेकिन अपने मतलब केँ लिए तुमने हि मुझेऐसे काम कों करने केँ लिए प्रेरित किया थां। तुम्हारे प्रेम मे अच्छा बुराऊॅच नीचकभी नहि सोचा मैने। मात्र यही सोचा कि मेरे किसी भि काम सें मात्र तुम् खुशरहो। मगरअब यह जोँ कुछ भि हौ रहा हैं उसने मुझेइस बात कां एहसास करा दिया हैं कि तुमने कभी मुझे प्रेम किया हि नहि थां। तुम्हें तौ केवल स्वयं सें औऱ अपनी ख़्वाहिशों सें हि प्रेम थां। अगरऐसा न् होता तौ आज तुम् इसतरह अपनों केँ दुश्मन न् बनगए होते औऱ नां हि इसतरह क्रूरता सें अपनी हि बेटियों कों जान सें मार देने कां सोचते। ख़ैर, देर सें हि सहीमगर मे यह स्वीकार कर चुकीहूॅ कि मैंने तुम्हारे प्रेम केँ चलते सबकेसंग ऐसा गुनाह वपाप किया हैं जौ कदाचित माफ़ी केँ लायक हौ हि नहि सकता हैं। मुझे भि किसी सें माफ़ी कि ख़्वाहिश नहि हैं। इतनाकुछ होने केँ बाद तोँ वैसे भि अब जीने कां दिल नहि करता। मेरा वजूद इतना घिनौना होँ चुका हैं कि दुनिया कां गिरा सें गिराहुआ इंसान भि कदाचित मेरीतरफ देख्ना भि पसन्द नं करे। लेकिन सुना हैं पश्चाताप करने सें औऱ नेककाम करने सें मन कों शान्ति मिलती हैं। इसीलिए मैने पश्चाताप केँ रूप मे वोँ किया जौ मुझे बहोत पहले करना चाहिए थां। "
"क्याँ मतलब???"अजय सिंह चौंका____"क.क्याँ किया हैं तुमने?"
"अब तक तौ दिमाग़ पऱ दिल हि हावी थां अजय। " प्रतिमा नें कहा___"मगर जबदिल हि टूटकर बिखर गय़ा तौ दिमाग़ कां ज़ोरपड़ हि गय़ा उस पऱ। उससाम जब तुम् मोबाइल पर्र अभय सें बातें कररहे थें तब मैने भि ड्राइंग रूम मे रखे मोबाइल पऱ तुम् दोनो कि बातें सुनी थि। तुम् तोँ जानते हौ कि वोँ दोनो हि मोबाइल एक् हि हें। अगर एक् पर्र किसी कां मोबाइल आएगा तोँ उस दूसरे मोबाइल केँ माध्यम सें भि दूसरा ब्यक्ति पहले वाले मोबाइल पऱ होँ रही बातचीत कों बड़े आहिस्ता सुन सकता हैं। ख़ैर तुम् दोनो कि बातें सुनी मैने औऱ तब मुझे पूरीतरह समझ आँ गय़ा कि सारी ज़िंदगी तुम्हारे लिए अपनासभी कुछ लुटाने वाली मे कितनी पापिन थि जौ कभी तुम्हारी खुशियों केँ सिवा किसी औऱ पर्र होते अत्याचार कों न् देखसकी थि। तुमने अभय कों विश्वास दिलाया कि तुम् उसके बेटे कां बेहतर इलाज़ करवाओगे औऱ ज़मीन जायदाद मे आधा हिस्सा भि दोगे। बदले मे तुम्हें तुम्हारा वोँ ग़ैर कानूनी सामान व विराज केँ सब चाहने वाले अपनेपास चाहिए। अभय तोँ अपने बेटे केँ लिए अपना विवेक खोकर यकीन केँ संग तुमसे इतना बड़ा सौदाकर बैठा जबकि मे जानती थि कि तुम् वैसाकभी नहि करोगे जिसबात केँ लिए तुमने अभय कों विश्वास दिलाया थां। अपना मतलब निकल जाने केँ बाद तुम् वही करोगे जोँ सबकेसंग करना चाहते होँ। मे हैरान थि कि पढ़ा लिखाअभय इतनी बड़ी बेवकूफी व अपनों केँ संग केवल अपने बेटे केँ बारे मे सोचकर इतना बड़ा विश्वासघात केसेकर सकता हैं? मगर जल्द हि मुझेसमझ आया कि भइया किसका हैं। मेरे दिमाग़ मे यहबात भि आई कि संभव हैं कि अभय नें कोईदूर कि कौड़ी सोची हुईँ हैं। कहने कां मतलबयह कि इसजंग मे अगर तुम्हारे संगसंग मे व हमारा बेटा मारेगए याँ कानून कि चपेट मे आँ गए तोँ यह विराज कों भि किसीतरह अपने रास्ते सें हटा देगा। उस सूरत मे सारी ज़मीन जायदाद कां यह अकेला हक़दार हौ जाएगा। यहसभी बातें सोचकर मुझे एहसास हुआ कि जिसने इस सारी ज़मीन जायदाद कों हीरे कि शक्ल दि तथा जिसका कहींकोई कसूर हि नहि थां उसे उसके भइया नें तोँ पहले हि मिटा दिया थां औऱ अब एक् औऱ भइया आँ गय़ा उसी इतिहास कों दोहराने केँ लिए। मुझे पहलीबार गौरी केँ बारे मे सोचकर उस पर्र तरसआया। एकाएक हि मेरा हृदय झनझना उठा। अंदर कहीं सें कोई बड़े ज़ोर सें चीखकर कहा'इस बेचारी नें ऐसाकौन सां पाप किया थां जिसकी वजह सें इसकेसंग इतनाकुछ होँ गय़ा?' इंसान कों बदलने केँ लिए मात्र एक् हि मामूली सि चीज़ बहुत होती हैं। अगर हम् किसी केँ बारे मे एक् बारइस तरह सें सोच लें तौ फिन बहोत मुमकिन हैं कि फिन हमें उसकी अथवा अपनी वास्तविकता कां बोध होने लगता हैं। वहीहुआ मेरेसंग। हृदय परिवर्तन तौ अपनी बेटी केँ संगहुए हादसे सें हि होनेलगा थां लेकिन उस मोबाइल कि वजह सें पूरीतरह सें हि होँ गय़ा। सारी बातों कों सोचने केँ बाद मैने फैंसला कर लिया कि अब वोँ नहि होंने दूॅगी जिसके लिए तुमने एक् हॅसते खेलते परिवार कि बलि चढ़ाई थि। हाॅअजय, जैसेअभय नें अपने स्वार्थ केँ लिए अपनों केँ संग विश्वासघात कर तुमसे वोँ सौदा कियाउसी तरह मैने भि एक् मोबाइल किया। "
"क्याँ मतलब??"अजय सिंह बुरीतरह चौंका___"कैसा मोबाइल किया तुमने?"
"मेरेपास विराज कां नंबर नहि थां। " प्रतिमा नें कहा___"औऱ मेरी बेटी मेरा मोबाइल उठाती हि नहि थि। तब मैने सीधा पुलिस कमिश्नर कों मोबाइल किया। पुलिस कमिश्नर कों इसलिए क्योंकि मौजूदा टाइम मे जोँ कुछ भि हुआ उससेयह बात साबित हौ चुकी थि कि रितू अपने पुलिस महकमें कि सह पर्र हि वोँ सभीकर रही थि। हलाॅकि मे पूरीतरह श्योर नहि थि। लेकिन फिन भि मैने एक् बार कमिश्नर सें बात करने कां हि सोचा औऱ फिन उन्हें मोबाइल लगाया। मोबाइल पर्र मैने कमिश्नर सें साफसाफ शब्दों मे बता दिया कि सिचुएशन क्याँ हैं। उसकेबाद मैंने उनसेकहा कि मुझे एक् बार विराज सें बात करना हैं। उन्होंने मेरी बातों कों बारीकी सें सोचा समझा औऱ फिन रितू कों मोबाइल किया औऱ उससे विराज कां नंबर लेकर मुझे दिया। "
"उस वक़्त मे औऱ आदित्य बाहर् घूमने गए थें जब मेरे मोबाइल पर्र बड़ीमाॅ कां मोबाइल आया थां। " बड़ीमाॅ कि बात समाप्त होते हि मैने जल्दी कहा___"इन्होंने मुझे मोबाइल पऱ सारी बातें बता दि। हलाॅकि मुझे शुरुआत शुरुआत मे इनकीबात पऱ ज़रा भि यकीन न् हुआ। क्योंकि मे सोच हि नहि सकता थां कि अभय चाचा हमारे संगऐसा कर सकते हें। तब इन्होंने कहा कि यह अपनी बातों कां सबूत तौ नहि दे सकती हें मगर मे स्वयं इसबात कि जाॅच पड़ताल तोँ कर हि सकताहूॅ। दूसरी बात मुझे भि कहीं नं कहींलग रहा थां कि अपनी बेटी केँ संगहुए हादसे केँ चलते बड़ीमाॅ मे कुछ तौ परिवर्तन आनां हि चाहिए थां। ख़ैर, इनकी ख़बर केँ बाद मैने भि वहाॅ पऱ रितू दिदी आदि कों सभीकुछ बता दिया औऱ रात मे यहसभी होने कां इंतजार करने केँ लिएकह दिया। वहीं मैने मुम्बई मे भि पवन कों मोबाइल कर दिया थां। उसे मैने समझाया थां कि वोँ इस बारे मे किसी सें कुछ न् कहे लेकिन अगर बड़े बापू कां मोबाइल उसकेपास आए तौ वोँ मोबाइल कां स्पीकर ऑन करके अवश्य सबको इनकीबात सुनाए। क्योंकि उसकेबाद तौ उन्हें यहाॅ आनां हि थां। मे भि अबखुल केँ इनके सामने आनां चाहता थां। लेकिन यहसभी बहोत हि ज़्यादा खतरनाक भि थां। क्योंकि इससे किसी कों भि कुछ भि होँ सकता थां। ख़ैर रितू दिदी नें कमिश्नर सें बात कि औऱ उन्हें सारी बातों सें अवगत कराया औऱ पुलिस प्रोटेक्शन कि माॅग भि कि। कमिश्नर नें हमें बेफिक्र रहने कों कहा। कल रातजब आप् अपने दलबल केँ संग हमारे ठिकाने पऱ पहुॅचे तब हम् सभीजाग रहे थें। आप् यहसमझ रहे हें कि आप् बड़ी आसानी सें हम् सबको बेहोश कर यहाॅ लेँ आए जबकि सच्चाई तोँ यही हैं कि आपकाकाम हमने स्वयं आसान किया थां। वरना आप् हि सोचिए कि ऐसेआलम मे इतने लापरवाह हम् केसे होँ जाएॅगे कि कोईआए औऱ हम् सबको बड़ी सहजता सें बेहोश करके अपनेसंग जहाॅ चाहे लें जाए। जबकि मे चाहता तौ उसी वक़्त आप् औऱ आपकेसब व्यक्ति मौत केँ घाटउतर चुके होते। मगर मैने अपने मित्र शेखर केँ मौसाजी कों उसरात वहाॅ पऱ सिक्योरिटी रखने सें मनाकर दिया थां। उसकेबाद क्याँ हुआ वोँ तोँ आप् अच्छी तरह जानते हि हें। "
"चलो अच्छा हुआ कि तुमने स्वयं हि यहसभी बता दिया। "अजय सिंह नें भभकते हुए लहजे सें कहने केँ संग हि बड़ीमाॅ कि तरफ देखा___"पऱ तुमने यहसभी करके अच्छा नहि किया प्रतिमा औऱ इसकेलिए तुम्हें मौत सें कम सज़ा तौ हर्गिज़ भि नहि मिल सकती। "
"कितनी आश्चर्य कि बात हैं नं अजय। " प्रतिमा नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा___"इतना कुछ होने केँ बाद भि तुम्हारा हृदय परिवर्तन नहि हुआ। तुम्हें ज़रा भि एहसास नहि हुआ कि यह जौ कुछ भि तुमने किया हैं वोँ कितना ग़लत थां। बल्कि अभि भि तुम् वहीसभी करने पर्र आमादा होँ जिसका नतीजा तुम्हारे लिए किसी भि सूरत मे अच्छा नहि होँ सकता। आज तुम्हारी इस हालत कों देखकर सचमुच मुझेतरस आँ रहा हैं। आज मे यह सोचने पऱ मजबूर हूॅ कि पच्चीस साल पहले मैने तुममे ऐसा क्याँ देखा थां कि तुमसे इस क़दर प्रेम कर बैठी थि? तुम् किसी केँ नहि होँ सकतेअजय, तुम् अकेले हि ऐसीमौत मरोगे जिसकी लाश पर्र कीड़े पड़ेंगे। "
"हरामज़ादी कुतिया। " गुस्से मे तिलमिलाए हुएअजय सिंह नें बड़ी तेज़ी सें अपने रिवाल्वर वाले हाॅथ कों ऊपरहवा मे उठाया औऱ फिन___धाॅय।
प्रतिमा केँ सबसे क़रीब अभय सिंह हि थां। माहौल कि नज़ाकत कां जैसेउसे बखूबी एहसास थां तभी तौ उन्होंने गोली केँ चलते हि जम्प लगाई थि। लेकिन गोली कि स्पीड नें अपनाकाम तमाम करने मे कोईकसर न् छोंड़ी थि। प्रतिमा कों बचाने केँ चक्कर मे गोलीअभय सिंह केँ कंधे पऱ जालगी थि। फिज़ा मे अभय सिंह कि दर्द सें डूबी चीख़ निकल गई थि। अभय सिंह प्रतिमा कों लिए ज़मीन पऱ उलटता चला गय़ा थां।
इधरइस नज़ारे कों देखकर मैने भि अजय सिंह पऱ जम्प लगाई थि। मगर मेरे जम्प लगाने सें पहले हि उसने एक् औऱ फायरकर दिया थां। जिसका नतीजा यहहुआ कि इसबार गोलीअभय सिंह केँ पेट मे लगी थि। उस टाइम वोँ जल्द सें उठने कि कोशिश कररहा थां तभी गोलीआकर उसकेपेट मे लग गई थि। एक् संगकई चीखें फिज़ा मे गूॅज गई थि। इधर तीसरा फायर करने सें पहले हि मे अजय सिंह केँ ऊपर आँ गिरा थां। इस गुत्थम गुत्था मे सोनम दिदी भि लोटपोट हौ गई थीं। अजय सिंह कि पकड़ सें छूटते हि सोनम दिदी अभय सिंहव प्रतिमा कि तरफ चिल्लाते हुए दौड़ पड़ी थि।
इधर मैनेअजय सिंह केँ उस हाॅथ मे एक् कराट मारी जिसमें वोँ रिवाल्वर लियेहुए थां। कराट लगते हि अजय सिंह केँ हाॅथ सें रिवाल्वर छूटकर गिर गय़ा। मैनेउस पर्र लात घूॅसों कि बरसात कर दि। अजय सिंह हलाल होते बकरे कि तरह चिल्लाने लगा। वो स्वयं भि हाॅथ पांवचला रहा थां लेकिन सभी ब्यर्थ। मे उसकेऊपर सें उठा औऱ फिनउसे उठाकर पूरी ताकत सें दूर फेंक दिया। हवा मे लहराते हुएहुए अजय सिंहदूर जाकर गिरा।
जहाॅ पर्र अजय सिंह गिरा थां वहीं पऱ एक् गन पड़ी थि। जिसेदेख कर वो अपनाहर दर्दभूल गय़ा औऱ झपटकर उसनेउस गन कों उठा लिया। तभी फिज़ा मे पुलिस सायरन कि आवाज़ गूॅजने लगी। अजय सिंहगन लेकर जल्दी पलटा औऱ मेरीतरफ देखते हुएगन कों ऊपर करनेलगा। इससे पहले कि वो गन कां ट्रिगर दबा पाता कहीं सें एक् संगदो फायरहुए। एक् गोली सीधाअजय सिंह केँ सीने मे दिल वालेजगह पर्र लगी जबकि दूसरी उसके थोडा नीचे। पलक झपकते हि उन दोनो जगहों सें खून कि धारफूट पड़ी औऱ अजय सिंहकटे हुए बृक्ष कि भाॅति लहराकर ज़मीन पर्र गिरा औऱ फिन एकदम सें शान्त पड़ गय़ा।
फायर कि आवाज़ सें मे बिजली कि तरह पलटा थां। अजय सिंह केँ दाहिनी तरफकुछ हि दूरी पर्र शिवा रिवाल्वर लिए खड़ा थां। उसके चेहरे पर्र अजीब सें भाव थें। मे उसे चकितभाव सें देखेजा रहा थां। जबकि वो अपने बाप कों मारने केँ बाद पलटा औऱ मेरीतरफ देखते हुए बोला____"अपने हाॅथइस पापी केँ खून सें मत रॅगो भइया। इसे इससे बड़ी सज़ा औऱ क्याँ मिलेगी कि इसने जिसे सबसे ज़्यादा प्रेम कियाउसी नें इसकी साॅसें छीनली। नफ़रत केँ इस पुजारी कों मर हि जानां चाहिए थां। "
"मगर तूने.। " मेरा वाक्य अधूरा रह गय़ा।
"कुछमत कहिए भइया। " शिवा कि आवाज़ लड़खड़ा गई, बोला___"मे नहि जानता कि मुझसे यहसभी केसे हौ गय़ा। मगर अंदर सें कोईकह रहा हैं कि बहोत अच्छा किया तुमने। माॅ बाप अपने बच्चों कों अच्छे संस्कार व स्वावलम्बी बनने कि सीख देते हें मगर मेरेइस बाप नें तोँ मुझे अपनी हि तरह बनने कि सीख दि। ख़ैर छोंड़िये भइया, मुझे भि अब खुशी हौ रही हैं कि मैनेआज कोई अच्छा काम किया हैं। यह नियति मैने स्वयं चुनी हैं। अपने बाप केँ कत्ल केँ इल्ज़ाम मे याँ तौ मुझे फाॅसी होँ जाएगी याँ फिन ऊम्रकैद। किसी सें बेपनाह इश्क़ भि हुआमगर केवल मुझे ऊम्रभर तड़पाने केँ लिए। मैने अपनेइस छोटे सें जिंदगी मे हि इतने ऊॅचे दर्ज़े केँ पाप किये हें जिसके लिए परमेश्वर मुझेकभी क्षमा नहि करेगा। "
"यह तूँ कैसी बकवास कररहा पगले?" उसकी बातें सुन मेरागला रुॅध सां गय़ा। जाने क्यूं इस टाइम वोँ मुझे बहोत प्यारा सां लगा जिसके लिए मेरादिल रोनेलग गय़ा थां। हलाॅकि उसने भि अपने बाप कि तरह हमें जलील करने मे कोईकसर न् छोंड़ी थि।
"जाइये भइया। "तभी शिवा नें कहा____"अब तोँ सभीखेल ख़त्म होँ गय़ा हैं। पुलिस भि आँ गई हैं औऱ अब वोँ मुझे कानूनन फाॅसी केँ फंदे पर्र झुलाने केँ लिए यहाॅ सें लेँ जाएगी। सबकीदेख भाल करना भइया, औऱ सबकोढेर सारी खुशियाॅ देना। एक् नया संसार बनाइये औऱ उसमें सबकोखुश रखिये। "
अभि शिवा अपनीइन बातों सें मुझे चकित हि किये थां कि हरतरफ पुलिस केँ व्यक्ति फैलते हुए आँ गए। मेरी नज़रदूर सें हि कमिश्नर पर्र पड़ी। मैनेपलट कर देखा तौ शिवा अपने बाप केँ मृत जिस्म केँ पास हि अपने हाॅथ मे रिवाल्वर लिएबैठ गय़ा थां। मतलबसाफ थां कि वोँ पुलिस कों दिखाना चाहता थां कि उसने स्वयं हि अपने बाप कां खून किया हैं औऱ अब पुलिस कों उसे गिरफ्तार कर लेना चाहिए। बड़ी अजीबबात थि वोँ चाहता तोँ स्वयं कों बचा भि सकता थां। क्योंकि खून करतेहुए पुलिस नें उसे देखा हि नहि थां औऱ हम् लोगयह बात पुलिस कों बताने केँ बारे मे सोच भि सकते थें याँ नहि भि।
कमिश्नर जब शिवा केँ पास पहुॅचा तोँ शिवा उसकीतरफ देखकर बोला___"अच्छा हुआ कि आप् आँ गए। आजइस पापी कों इसके हि पापी बेटे नें मौत केँ घाट उतार दिया हैं। लीजिए अब मुझे गिरफ्तार कर लीजिए। "
शिवा कि इसबात पऱ कमिश्नर बुरीतरह हैरान रह गय़ा। लेकिन अपराधी जब स्वयं हि अपना गुनाह कबूलकर रहा थां तौ भला उन्हें क्याँ आपत्ति होँ सकती थि? कमिश्नर नें अपनेसंग आए एक् एसआई कों इशारा किया। एसआई नें शिवा केँ हाॅथ सें रिवाल्वर कों रुमाल मे लपेटकर लिया औऱ फिन उसके दोनो हाॅथों मे हॅथकड़ी डाल दि।
मे दौड़ते हुए रितू दिदी केँ पासआया थां। रितू दिदी कों आदित्य अपनी गोंद मे लिए बैठा थां। रितू दिदी कि साॅसें अभि चलरही थि। पवनअभय चाचा केँ पासचला गय़ा थां। जहाॅ पर्र प्रतिमा अभय कि हालत कों देखकर रोरही थि। अभय चाचा कि हालत भि बहुत ख़राब थि। उनका पूरा शरीर उनकेखून सें नहाया हुआ थां। प्रतिमा बारबार एक् हि बातकह रही थि कि मुझेमर जाने दिया होता। मुझ पापिन कों क्यूं बचाया तुमने?
पुलिस सायरन कि आवाज़ सुनकर इमारत केँ अंदर सें बाॅकी सभीलोग भि आँ गए थें। यहाॅ कां मंज़र देखकर सबकी चीख़ें निकल गई थि। माॅ नें जब मुझेसही सलामत देखा तोँ मुझे स्वयं सें छुपका लिया औऱ मेरे चेहरे पर्र हर स्थान चूमने चाटने लगीं। मैने उन्हें स्वयं सें अलग किया औऱ बताया कि रितू दिदी वअभय चाचा कों गोलीलगी हैं। उन्हें जल्द हि हास्पिटल लें जानां पड़ेगा। मेरीबात सुनकर सभीलोग रितू दिदी वअभय चाचा केँ पास आँ गए।
रितू दिदी वअभय चाचा कि हालत बहोत ख़राब थि। सभीलोग रोरहे थें। मे औऱ पवन दौड़ते हुएकुछ हि दूरी पर्र खड़ीकई सारी गाड़ियों कि तरफगए। उनमें सें एक् व्हीकल कों स्टार्ट कर मे जल्दी हि उसेइस तरफ लें आया। आदित्य नें रितू दिदी कों उठाकर जल्द सें टाटा सफारी मे बड़े एहतियात सें बिठाया। रितू दिदी केँ बैठते हि नैना फूफी भि उनकेपास आकरबैठ गईं। आदित्य भागकर गय़ा औऱ दूसरी वाहन लेँ आया। उस व्हीकल मे अभय चाचा कों जल्दी लेटाया गय़ा। उसमें करुणा चाची व रुक्मिणी चाची बैठगईं। दूसरी अन्य गाड़ियों मे बाॅकी सभीलोग भि बैठगए। इसकेबाद हम् सभी तेज़ी सें गुनगुन कि तरफबढ़ चले।
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दोस्तो, आप् सबके सामने एपसोड हाज़िर हैं। आशा हैं आप् सबको मनपसंद आएगा।
दोस्तो इसभाग केँ बादअब एक् आख़िरी एपसोड हि आएगा। ख़ैर, आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,
बहोत बहोत शुक्रिय आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Behtarin pradarsan bhay क्या update दिया he bhot emotinal rula दिया aur parivartan bi dekhneko मिला abhai chacha ne gaddari की लेकिन phir sudhar bi gaye siva ko isaq ne badal दिया moorti kaa parivartan ma की mamta की vajah से huwaa behtarin bhay update padhke lagta he 2nd last update he
he waiting for next update
अद्भुत इससे बेहतर एपसोड हौ हि नहीं सकता थां । शिवाओर प्रतिमा कां हृदय परिवर्तन बहोत हि जबर्दस्त ओर रोमांचक मोड़ थां ।। अति उत्तम ।।
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhay yeh update Bilkul bi Achchha नहीं laga। Ajay ko itani aasan moth नहीं milni चाहिए thi.
Shiva और moorti kaa dusara roop Achchha laga.
Ajay की bebasi और उसका akelapan उसका pachhatawa bi dikhana thaa.
jb viraj ko Sab kuchh ptaa thaa too phir itani Fight की jarurat hi kyon padi। Ek fulproof plan hnaa चाहिए thaa jaisa Har baar hotha thaa.
Last update kaa besabari से intzaar h।
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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