♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 22 》
अब तक,,,,,,,
"चिन्ता मतकरो करुणा। " अभय नें कठोरभाव सें कहा__"मुझे पता हैं कि अपने रास्ते पर्र आने वाली रुकावट सें केसे निपटना हैं। "
"फिन भि सावधान रहिएगा। " करुणा नें कहा__"क्योंकि इस सबसेयह तौ समझ आँ हि गय़ा हैं कि वोँ लोग किसी केँ संगकुछ भि कर सकते हें। "
"कुछ भि करने वालों कों मे देख लूॅगा करुणा। " अभय नें कहा__"मेरे मुम्बई जाने केँ बाद तुम् यहाॅ सबकीदेख भाल अच्छे सें करना। दिव्या तब तक विद्यालय नहि जाएगी जब तक मे मुम्बई सें लौट नहि आता। "
"क्याँ ऐसा नहि होँ सकता कि हम् सभी हि मुम्बई चलें?" करुणा नें कहा__"कौन जाने आपके जाने केँ बाद यहाॅ केसे हालात बन जाएॅ?उस स्थिति मे मे अकेली स्त्री भला किसी कां केसे मुकाबला करूॅगी??"
"मे तुम् सबको मुम्बई नहि लेँ जा सकता क्योंकि मुम्बई मे तुम् लोगों कों लिए मे कहाॅ कहाॅ भटकूॅगा? अंजान शहर मे अपना कहींकोई ठिकाना भि तोँ होना चाहिए। " अभय नें कहा__"इस लिए तुम् ऐसाकरो कि कुछदिन केँ लिए दिव्या औऱ शगुन कों लेकर अपने मायके चलीजाओ। वहाॅ तुम् सभी सुरक्षित रहोगे, औऱ मे भि तुम् लोगों केँ लिए निश्चिंत रहूॅगा। "
"हाॅयह ठीक रहेगा। " करुणा नें कहा__"आप् मेरे भइया कों मोबाइल कर दीजिए वोँ आँ जाएगा औऱ हम् लोगों कों अपनेसंग लेँ जाएगा। "
"ठीक हैं। " अभय नें कहा__"मे बात करताहूॅ तुम्हारे भइया सें, तब तक तुम् ज़रागरम चाय तौ बनाकर पिलादो मुझे। "
"जी अभि लाई। " करुणा नें बेड सें उठतेहुए कहा।
अब आगे,,,,,,,,
जैसा कि अभय नें निर्णय लेँ लिया थां इसलिए उसने ससुराल मे अपने साले युवराज सिंह कों मोबाइल कर दिया थां औऱ उसे जल्द सें जल्द यहाॅ सें करुणा केँ संग दिव्या तथा शगुन कों लेँ जाने केँ लिएकह दिया थां। अभय केँ साले युवराज नें अचानक इसतरह यहाॅआने औऱ फिन अपनेसंग उसकी बेहनव भांजा भांजी कों घऱ लें जाने कां कारण पूॅछा तोँ अभय नें कुछ नहि बताया। बसयही कहा कि वो कुछ दिनों केँ लिए बाहर् जारहा हैं।
अभय नें करुणा तथा दिव्या सें भि कह दिया थां कि इसबात कि चर्चा वोँ लोग अपने मायके तथा ननिहाल मे किसी सें नहि करेंगी। अभय कि ससुराल हल्दीपुर सें अधिकदूर नहि थि। बल्कि एक् घंटे कि दूरी पऱ थि। इसलिए उसके साले कों आने मे अधिकदेर नहि हुई।
करुणा नें अपने पति अभय केँ लिएसाम कां खानां बनाकर रख दिया थां जिसे वो गर्म करकेसाम कों खा लेगा औऱ स्वयं भारीमन सें अपने बच्चों कों लेकर अपने भइया केँ संग अपने मायके मणिपुर चली गई थि। अभय नें उसेबता दिया थां कि वो अगलेदिन सुभह हि यहाॅ सें मुम्बई केँ लिए निकलेगा। अभय नें अपनी पत्नि औऱ बच्चों कों अपने साले केँ संग बेहद हि गुप्त रूप सें भेजा थां। किसी कों भनक तक न् लगने दि थि कि उसकी पत्नि औऱ बच्चे किसके संगकब कहाॅगए हें?
करुणा नें अभय सें कहा थां कि वो आजरात यहाॅ हवेली मे न् रहे बल्कि अपने किसी मित्र याँ दोस्त केँ यहाॅरात रुकजाए औऱ सुभह वहीं सें मुम्बई केँ लिए रवाना होँ जाएं। करुणा यहसभी किसी अंजानी आशंका कि वजह सें कहरही थि जबकि उसकीइस सलाह पर्र अभय नें आवेश मे कहा थां__"मे किसी सें बाल बराबर भि नहि डरता करुणा। मैंने किसी केँ संगकोई ग़लतकाम नहि किया हैं, इसलिए किसी सें डरने कां प्रश्न हि नहि हैं। रहीबात बड़े भाई कि तौ उन्हें भि देख लूॅगा। मे भि तोँ देखूॅ कि कितने बड़े तीसमारखाॅ हें वोँ???" करुणा अभय कि इसबात पर्र कुछ नं बोलसकी थि।
उधर प्रतिमा नें अपने पति अजय सिंह कों मोबाइल करकेआज हुइ इस घटना केँ बारे मे सभीकुछ बता दिया थां। जिसेसुन करअजय सिंह केँ पैरों तले सें ज़मीन निकल गई थि। उसे अपने बेटे पर्र बेहद क्रोध आँ रहा थां। उसी कि वजह सें यहसभी हुआ थां वर्ना अभययह सभीकभी न् सोचता कि उससे क्याँ कुछ छुपाया गय़ा थां??
अजय सिंह अपने बेटे केँ इस कार्य पर्र क्रोध तोँ बहोत हुआ थां लेकिन वो यह भि जानता थां कि अब क्रोध करने कां कोई मतलब नहि हैं। यानी जोँ होना थां वोँ तोँ होँ हि चुका थां। अब तौ उसेयह करना थां कि इससेआगे कोईबात बढ़े हि न् औऱ नाँ हि उस पर्र कोईबात आए।
अजय सिंह अपनी फैक्टरी कों फिन सें चालू करने कि कोशिशों मे लगाहुआ थां इसलिए वो अधिकतर हवेली सें बाहर् हि रहता थां। लेकिन आज हुइ इस घटना कि जानकारी जब उसकी पत्नि द्वारा मोबाइल केँ माध्यम सें उसे मिली तौ वो शहर सें हवेली आने केँ लिएकह दिया थां प्रतिमा सें। उसनेयह भि हिदायत दि थि कि आज कि घटना केँ बारे मे उसकी बेटी रितू कों पता नं चले। जबकि अपने बेटे शिवा कों कुछदिन केँ लिएशहर मे बने घर-मकान पऱ रहने केँ लिएकह दिया थां। ऐसाइस लिए थां क्योंकि शिवा कि बुरी हालत देखकर कोई भि ढेरों प्रश्न पूॅछने लगता। जबकि रितू तौ अब पुलिस वाली थि, हरबात पऱ शक करना उसका पेशा थां। दूसरी बात वो अपने भइया कि आवारा गर्दी करने वालीइस असलियत सें अंजान भि नहि थि। इसलिए वो कईतरह केँ प्रश्न पूछने लगती सबसे। अजय सिंह नें प्रतिमा सें यह भि कह दिया थां कि वो हवेली मे रहने वाले नौकरव नौकरानियों कों भि इसबात कि ठोस शब्दों मे हिदायत देदे कि वोँ लोगआज हुई इस घटना केँ बारे मे एक् लफ्ज़ भि रितू सें न् कहें याँ उनके द्वारा किसीतरह रितू केँ कानों तक यहबात न् पहुॅचे।
अजय सिंहसाम कों हवेली पहुॅचा थां। हवेली मे शमशान कि तरह सन्नाटा फैलाहुआ थां। ऐसा लगता थां जैसे इतनी बड़ी हवेली मे किसीजीव कां कहींकोई वजूद हि नं हौ। अजय सिंहसमझ सकता थां कि हवेली मे यह सन्नाटा क्यूं फैलाहुआ हैं। उसकी बेटी रितू किसीकेस केँ सिलसिले मे बाहर् हि थि, यानी अभि तक वो हवेली नहि लौटी थि पुलिस थाने सें। जबकि शिवाअजय सिंह केँ पालतू कुछ आदमियों केँ संगशहर वाले घर-मकान मे कुछदिन रहने केँ लिएचला गय़ा थां।
अजय सिंह खामोशी सें अपने कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। कमरे मे पहुॅचते हि अजय सिंह नें देखा कि उसकी पत्नि प्रतिमा बेड पऱ पड़ी हैं। बेड पर्र पड़ी प्रतिमा एकटकव निरंतर कमरे कि छत पर्र झूलरहे पंखे कों घूरेजा रही थि। बल्कि अगरयह कहें तौ ज़रा भि ग़लत नं होगा कि वो पंखे कों भि नहि देखरही थि वो तोँ बस शून्य मे हि देखेजा रही थि। उसकामन कहीं औऱ हि भटकाहुआ नज़र आँ रहा थां। कदाचित् यहीवजह थि कि उसे कमरे मे अजय सिंह केँ दाखिल होने कां ज़रा भि एहसास न् हुआ थां।
अजय सिंह नें गौर सें अपनी पत्नि कि तरफ देखाफिन उसने अपने शरीर पर्र मौजूद कोट कों उतारकर उसे दीवार पऱ लगे एक् हैंगर पर्र लटका दिया। इसकेबाद वो बेड कि तरफ बढ़ा। प्रतिमा अभि भि कहींखोई हुइ शून्य मे घूरेजा रही थि।
"ऐसेकिन ख़यालों मे गुम हौ प्रतिमा?" अजय सिंह नें उसे देखते हुए कहा__"जिसकी वजह सें तुम्हें यह भि एहसास नहि होँ रहा कि मे कब सें इस कमरे मे आयाहुआ हूॅ?"
"सभी कुछ ख़त्म होँ गय़ा अजय। " प्रतिमा उसी मुद्रा मे तथा अजीब सें भाव केँ संग बिनाअजय कि तरफ देखे हि बोलि__"सभी कुछ समाप्त होँ गय़ा। कुछ भि शेष नहि बचा। हमने गुज़रे हुएकल मे जौ कुछ भि अपनेहित केँ लिए किया थां वोँ सभीअब बेपर्दा हौ चुका हैं। कैसी अजीब सि स्थित होँ गई हैं हमारी। मे औऱ तुम् ज़िंदा तौ हें मगरऐसा लगता हैं जैसे हमारी एक् एक् साॅस हमारे मरेहुए होने कि गवाही देरही हैं। हम् ऐसेजी रहे हें अजय जैसेहर साॅस हमने किसी सें उधारली हुई हैं। आजआलम यह हैं कि हम् अपने हि बच्चों केँ बीचडर डरकर जिंदगी कां एक् एक् समय गुज़ार रहे हें। कहींऐसा तौ नहि अजय कि हमने जौ कुछ भि अपनेसुख सुविधा केँ लिए अपनों केँ संग किया हैं उसी कां प्रतिफल आज हमेंइस रूप मे मिलरहा हैं?"
"यह तुम् क्याँ कहरही होँ प्रतिमा?" अजय सिंह पहले तोँ चौंका थां फिन अजीबभाव सें प्रतिमा कि तरफ देखते हुए कहा__"यकीन नहि होता दोस्त। अरे इतनी सि बात पऱ तुम् इतना हताशव विचलित होँ गई??? नहि डियर, तुम् इतनी निराशावादी बातें नहि कर सकती। तुमने तौ गुज़रे हुएकल मे मेरे कहने पर्र ऐसेऐसे कठिनव हैरतअंगेज कामों कों अंजाम दिया हैं जिसे करने केँ लिएकोई साधारण महिला सोच भि न् सके। "
"मे भि तोँ एक् इंसान हूॅ, एक् स्त्री हि हूॅअजय। " प्रतिमा नें बेड सें उठकरतथा गंभीर होकर कहा__"भले हि गुज़रे हुएकल मे मैंने तुम्हारे कहने पर्र याँ हमारे हित केँ लिए हैरतअंगेज कामों कों अंजाम दिया हौ मगर मुझेइस बात कां भि एहसास हैं कि वो सभी जौ मैने किया थां वोँ निहायत हि ग़लत थां। यह एक् सच्चाई हैं अजय कि इंसान जौ कुछ भि कर्म करता हैं उसके बारे मे वोँ इंसान भि भली भाॅति जानरहा होता हैं कि वो किस प्रकार कां कर्मकर रहा हैं? इंसान जानरहा होता हैं कि वो ग़लत कर्मकर रहा हैं इसके बावजूद वो रुकता नहि हैं बल्कि ग़लत कर्म कों करता हि चला जाता हैं। कदाचित् इसलिए कि उसमें हि उसकाहित होता हैं। जब इंसान केवल अपने हि हित केँ लिए ज़ोर देता हैं तब वो यह नहि देखता कि अपनेहित मे उसनेकिस किस कि खुशियों कि याँ किसकिस केँ जिंदगी कि बलि चढ़ा दि हैं?"
"यहआज तुम्हें क्याँ होँ गय़ा हैं प्रतिमा?" अजय सिंह हैरान परेशान होकर बोला__"कैसी बहकी बहकी बातें कररही हौ तुम्?"
"सच्चाई किसी भि तरह कि हौ अजयउसे सुनकर ऐसा हि लगता हैं सबको। " प्रतिमा नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा__"क्याँ यहसच नहि हैं कि हमने केवल अपने स्वार्थ वहित केँ लिए अपने हि रिश्तों केँ संग अहित किया हैं? यहबात तुम् भि भली भाॅति जानते औऱ समझते होँ अजय। हाॅ यहअलग बात हैं कि तुम् इससभी कों स्वीकार नं करो। "
"इन सभी बातों कां अबकोई मतलब नहि रह गय़ा हैं प्रतिमा। " अजय नें बेचैनी सें पहलू बदलते हुए कहा__"औऱ मत भूलो इसके पहले तुमने भि इनसभी बातों केँ बारे मे नहि सोचा थां। आजऐसा क्याँ होँ गय़ा हैं जिसकी वजह सें तुम् किसी केँ संगसही ग़लत औऱ हित अहित कि बातें करनेलगी? "
"आज हालात बदलगए हें अजय। " प्रतिमा नें कहा__"पहले हम् दूसरों केँ संग अहितकर रहे थें इसलिए कुछ भि नहि सोचरहे थें। मगरआज जब हमारे संग अहित होनेलगा हैं तब हमेंइन सबका एहसास होना स्वाभाविक हि हैं। यह इंसानी फितरत हैं अजय, जब तक कोईबात स्वयं पर्र नहि आतीतब तक हमें किसीबात कां एहसास हि नहि होता। "
"यह सभी बेकार कि बातें हें प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"आज कि घटना सें तुम् ज़रा विचलित होँ गई होँ। जबकि इस सबसे इतना परेशान याँ दुखी होने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। "
"तुम्हें आज केँ टाइम कि वस्तुस्थित कां एहसास हि नहि हैं अजय। " प्रतिमा नें कहा__"अगर होता तोँ समझते कि हालात किसकदर बिगड़ गए हें। ज़रा सोचो अजय.जोँ अभयआज तक हमारी हि कही बातों पऱ आॅखबंद करके यकीन करताआया थां वहीआज हमारी हरबात पर्र शक करनेलगा हैं। इतना हि नहि उसने तौ हर सच्चाई कां पता लगाने केँ लिएकदम भि उठाने कि बातकर रहा थां। अगर उसनेऐसा किया औऱ इस सबसेउसे सारी सच्चाई कां पताचल गय़ा तौ सोचो क्याँ होगाअजय?"
"कुछ नहि होगा प्रतिमा। " अजय नें बड़ी सहजता सें कहा__"तुम् बेकार हि इतना परेशान होँ रही होँ। तुम्हें मैंने बताया नहि हैं.हमारी सारी ज़मीन औऱ ज़ायदाद अब केवल हमारे हि बच्चों केँ नाम पऱ हें। यह हवेली भि मैंने तुम्हारे नाम पर्र करवा दि हैं। मे जब चाहूॅ तबअभय कों इस हवेली औऱ सारी ज़मीनों सें बेदखल कर सकताहूॅ। यूॅ समझो कि वोँ केवल मेरे रहमोकरम पऱ इस हवेली पर्र हैं। मुम्बई मे किसी होटल याँ ढाबे पऱ अपनीमाॅ बेहन केँ संगकप प्लेट धोने वालेउस हरामज़ादे विराज कां तौ पत्ता हि साफ हैं। इसलिए कानूनन कोईकुछ भि नहि कर सकता मेरा। अभय कों अगर सच्चाई कां पताचल भि गय़ा तौ क्याँ कर लेगा हमारा??"
प्रतिमा अवाक् सि देखती रह गई अजय कि तरफ। उसे कुछ कहने केँ लिए जल्दी कुछ सूझा हि नहि। जबकि.
"मैनेकहा थां नं कि तुम् बेकार हि इतना परेशान होँ रही हौ। " अजय सिंह नें मुस्कुराते हुए प्रतिमा केँ हसीन चेहरे कों सहलाकर कहा__"तुमने तोँ स्वयं मेरेसंग कानून कि एलएलबी कि हैं। इसलिए जानती होँ कि कानूनन कोईकुछ नहि कर सकता। मैंने सारी ज़मीनें हमारे बच्चों केँ नामकर दि हें। औऱ अगरकोई बात होगी भि तोँ इनमें सें किसी केँ पास इतनी क्षमता हि नहि हैं कि यहलोग ज़मीन ज़ायदाद कों पाने केँ लिए मेरेसंग कोई मुकदमा वगैरह कर सकें। औऱ अगरइन लोगों नें मुकदमा चलाने कि कोशिश भि कि तोँ सारी ज़िन्दगी इनसे कोर्ट कचहरी कां चक्कर लगवाऊॅगा। इतने मे हि इन सबकामूत निकल जाएगा। "
"वोँ सभी तोँ ठीक हैं अजय। " प्रतिमा केँ चेहरे पऱ पहलीबार राहत केँ भाव उभरे थें, लेकिन फिन जल्दी हि असहज होकर बोलि__"मगर हम् अपनी बेटियों कों इस सबकेलिए केसे कन्विंस करेंगे? नीलम कां तौ भरोसा हैं कि वोँ हमसेकोई प्रश्न जवाब नहि करेगी, मगर रितू कां कुछकह नहि सकते। वोँ शुरुआत सें हि तेज़ तर्रार रही हें औऱ न्यायप्रिय भि। अब तौ वो पुलिस वाली भि बन गई हैं इसलिए इस सबकापता चलते हि वो कहीं हम् पर्र हि न् कोईकेस ठोंकदे। "
"हद करती होँ दोस्त। " अजय सिंह ठहाका लगाकर हॅसते हुए बोला__"अपनी हि बेटी सें इतना डरनेलगी हौ तुम्। "
"अधिक शेखी न् बघारो तुम्। " प्रतिमा नें अजीबभाव सें कहा__"आज भले हि इतनाहॅस रहे होँ तुम्, मगर थोड़े दिन पहले तुम्हारी भि जानहलक मे अटकी पड़ी थि जब रितू नें फैक्टरी वालाकेस रिओपेन किया थां। "
"दोस्त सचकहरही होँ तुम्। " अजय सिंह नें मुस्कुराते हुए कहा__"यकीनन उस वक्त मेरी हालत कि वाटलगी हुईँ थि। कितनी अजीबबात थि कि मेरी हि बेटी मेरी हि*****मारने पर्र तुली हुईँ थि। भलाउस बेचारी कों क्याँ पता थां कि उसके द्वारा इस प्रकार सें मेरी*****मारने सें मुझे कितनी तक़लीफ होँ रही थि। "
"अबआए न् लाइन पऱ। " प्रतिमा खिलखिला कर हॅसते हुए बोलीं__"बड़ा उड़ने लगे थें अभि तोँ। "
"दोस्त मेरा तौ केँ एलपीडी भि होँ गय़ा। " अजय सिंह नें दुःखी भाव सें कहा__"मेरे बेटे नें हि साराकाम खराबकर दिया वर्ना करुणा कि आगे पीछे सें लेने कां चान्स बन हि जानां थां। अब तोँ यह असंभव नहि तोँ नामुमकिन अवश्य हौ गय़ा हैं। "
"असंभव क्यूं नहि??" प्रतिमा चौंकी।
"असंभव इसलिए नहि क्यूं कि मे चाहूॅ तोँ अभि भि उसकोआगे पीछे सें ठोंक सकताहूॅ। " अजय सिंह नें कहा__"मगर यहसभी अब प्रेम याँ उसकी रज़ामंदी सें नहि हौ सकेगा बल्कि इसकेलिए मुझेबल कां प्रयोग करना पड़ेगा। "
"क्याँ मतलब हैं तुम्हारा?" प्रतिमा हैरान।
"साली कों उठवा लूॅगा किसीदिन। " अजय सिंह सहसा कठोरभाव सें बोला__"औऱ शहर मे अपनेनये वाले फार्महाउस पऱ रखूॅगा उसे। वहींरात दिन उसकीआगे पीछे सें लूॅगा। इतना हि नहि अपने आदमियों कों भि मजा करने कां कह दूॅगा। मेरे व्यक्ति उसकीआगे पीछे सें बजाबजा कर उसकी***** कां ****** बना देंगे। "
"ऐसा सोचना भि मत। " प्रतिमा नें आॅखें फैलाकर कहा__"वर्ना अभय तुम्हें कच्चा चबा जाएगा। "
"अभय कि माॅ कि ***** साले कि। " अजय नें कहा__"उसने अगर अधिकउछल कूद करने कि कोशिश कि तौ उसका भि वही अंजाम होगा जौ विजय कां हुआ थां, मगर ज़राअलग तरीके सें। "
"उसकी छोंड़ो अजय। " प्रतिमा नें सहसा पहलू बदलते हुए कहा__"हमारी बेटी रितू केँ बारे मे सोचो। उसे इस झमेले केँ लिए केसे मनाएंगे?"
"उसकी भि फिक्र मतकरो डियर। "अजय सिंह नें कुछ सोचते हुए कहा__"तुम् तोँ जानती होँ कि मुझे अपने रास्तों पर्र किसीतरह केँ काॅटें मनपसंद नहि हें। हम् दोनोउसे इस सबकेलिए पहले प्रेम सें समझाएंगे, अगरउसे हमारी बातें समझ आँ गईं तौ ठीक हैं वर्ना मजबूरन उसकेसंग भि हमेंबल कां प्रयोग करना हि पड़ेगा। "
"नं नहि अजय नहि। " प्रतिमा नें सहसा घबराकर कहा__"तुम् उसकेलिए ऐसा केसेकह सकते होँ? वो हमारी अपनी बेटी हैं। हर ब्यक्ति कि अपनी एक् फितरत होती हैं, रितू कि फितरत हम् जैसी नहि हैं तौ इसमें उसकी क्याँ ग़लती हैं? इंसान कां स्वभाव जन्म सें हि बनने लगता हैं, औऱ फिनहर इंसान कां अपना एक् प्रारब्ध भि तोँ होता हैं। सभी एक् जैसीसोच विचार केँ नहि होँ सकतेअजय, यह प्रकृति केँ नियमों केँ खिलाफ हैं। "
"मुझेपता हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें गंभीरता सें कहा__"मे जानता हूॅ कि हमारी बेटी उनमें सें हैं जिनकी रॅगों मे सच्चाई औऱ ईमानदारी कां खून दौड़ता हैं। मगर हमारे संग मामला ज़रा जुदा हैं, यानी हमारी बेटी कां यह सच्चाई औऱ ईमानदारी वालाखून भविस्य मे हमारे लिए बड़ी मुसीबत भि खड़ीकर सकता हैं। "
"ऐसाकुछ नहि होगाअजय। " प्रतिमा नें मजबूती सें कहा__"मे अपनी बेटी कों अपने तरीके सें समझाऊॅगी। वोँ अवश्य मेरीबात कों समझेगी औऱ मानेगी भि। "
"अच्छी बात हैं। " अजय नें कहा__"तुम् उसे अपने तरीके सें अवश्य समझा देना। क्योंकि तुम्हारे बादअगर मुझे समझाना पड़ाउसे तौ होँ सकता हैं मेरा समझाना तुम्हें पसन्द नं आए। "
"मे अवश्य समझाऊॅगी अजय। " प्रतिमा केँ बदन मे ठण्डी सि सिहरन दौड़ती चली गई थि, फिन बोलीं__"मगर अबअभय केँ बारे मे भि तोँ सोचो। उसनेसाफ शब्दों मे कहा हैं कि वो इस सच्चाई कां पता लगाएगा कि गौरी औऱ उसके बच्चों केँ संग वास्तव मे हुआ क्याँ थां? इसलिए वो इस सबकापता लगाने केँ लिए मुम्बई मे विराज तथा विराज कि माॅ बेहन केँ पास जाने कां बोलरहा थां। अगरउसे सारी बातों कां पताचल गय़ा तौ क्याँ होगाअजय??"
"उसे जानेदो मेरीजान। " अजय नें अजीब सें लहजे मे कहा__"उसे सारी सच्चाई कां पतालग भि जाएगा तोँ अबकोई कुछ भि नहि कर सकेगा। जिस चीज़ केँ लिए हमनेयह सभी किया थां वोँ तोँ हमें हासिल होँ हि चुका हैं। इसलिए जानेदो जिसे जहाॅ जानां होँ। विराज केँ संगसंग उसकीमाॅ बेहन कों तोँ मेरे व्यक्ति भि ढूॅढ़ रहे हें। अच्छा हैं कि अभय भि उन्हें तलाश करेगा वहाॅ मुम्बई मे। साला इतनी बड़ी मुम्बई मे कहाॅ ढूॅढेगा उनकप प्लेट धोने वालों कों?"
"इस बारे मे कुछकहा नहि जा सकता। " प्रतिमा नें कहा__"संभव हैं किसी संयोग केँ चलतेअभय उन लोगों कों ढूॅढ़ हि लेँ। "
"अगरऐसा हैं तौ मे अपनेकुछ आदमियों कों अभय केँ पीछेलगा देताहूॅ। " अजय नें कुछ सोचते हुए कहा__"यदि अभयउन लोगों कों ढूॅढने मे कामयाब हौ जाएगा तोँ मेरे व्यक्ति जल्दी हि इसबात कि मुझे सूचना दे देंगे। "
"हाॅयह बिलकुल ठीक रहेगा अजय। " प्रतिमा नें खुश होकर कहा__"उस सूरत मे तुम् अपने आदमियों कों आदेशदे देना कि वोँ इन सबको किसी भि तरह यहाॅ हमारे पास लेँ आएं। उसकेबाद हम् अपने तरीके सें उन सबका कल्याण करेंगे। "
"ऐसा हि होगा मेरीजान। " अजय सिंह नें मुस्कुराते हुए कहा__"सभी कुछ हमारे हिसाब सें हि होगा औऱ अभय केँ यहाॅ सें जाते हि मे उसकी सुंदर पत्नि करुणा कों भि अपने आदमियों केँ द्वारा उठवा लूॅगा। "
"ऐसा करना हमारे लिए कहीं खतरे कां सबब नं बनजाए अजय। " प्रतिमा नें अजय कों अजीबभाव सें देखते हुए कहा__"मुझे लगता हैं कि इसकाम मे तुम्हें अभि इतनी जल्द इतना बड़ा क़दम नहि उठाना चाहिए। "
"एक् दिन तोँ यह होना हि हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"औऱ वैसे भि आजजिस तरह केँ हालात बनगए हें उससे सारी बातें सबके सामने आँ हि जाएॅगी। इसलिए जब सारी बातों कों खुल हि जानां हैं तोँ इसकाम मे मे देरी क्यूं करूॅ? मुझेहर हाल मे अपनी ख्वाहिशों कों परवान चढ़ाना हैं डियर। मेरी शुरुआत सें हि यह ख्वाहिश थि कि मे गौरीतथा करुणा कों अपनेइसी बेड पऱ अपने नीचे लिटाऊॅ औऱ उन दोनो केँ हसीन लेकिन गदराए हुए मादक शरीर कां भोग करूॅ। "
"ख्वाहिश तोँ तुम्हारी अपनी बेटियों कों भि अपने नीचे लिटाने कि हैं अजय। " प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा__"तौ क्याँ अपनी बेटियों केँ संग भि अपने छोटे भाईयों कि बीवियों कि तरह जबरदस्ती करोगे?"
"अगर ज़रूरत पड़ी तौ ऐसा भि करुॅगा मेरीजान। " अजय नें स्पष्ट भाव सें कहा__"मगर हमारी बेटियों कों मेरे नीचे लाने कि जिम्मेदारी तुम्हारी हैं। तुम् अगरइस काम मे सफल होँ जाती होँ तौ अच्छी बात हैं वर्ना घी निकालने केँ लिए मुझे अपनी उॅगली कों टेंढ़ा करना हि पड़ेगा। "
प्रतिमा हैरान परेशान सि देखती रह गई अपने पति कों। वो समझ नहि पारही थि कि उसका पति किसतरह कां इंसान हैं??????
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उधर मुम्बई मे।
विराज अपने वादे केँ अनुसार रविवार यानी विद्यालय कि छुट्टी केँ दिन निधि कों बड़े सें शिप मे समुंदर घुमाने लें आया थां। निधि बेहदखुश थि इस सबसे। पता नहि क्याँ क्याँ उसके दिमाग़ मे चलता रहता थां। कदाचित् फिल्में देखने कां असर ज़्यादा होँ गय़ा थां उस पर्र।
पिछली सारीरात वो विराज केँ कमरे मे रही थि। सारीरात उसनेतरह तरह कि योजनाएं बनाबना कर विराज कों बताती रही थि कि कल समुंदर मे किसकिस तरह सें हम् मस्ती करेंगे। उसकीऊल जुलूल बातों सें विराज बुरीतरह परेशान हौ गय़ा थां। लेकिन वो उसेकुछ कह नहि सकता थां क्योंकि निधि उसकीजान थि। उसकी खुशी केँ लिए वो कुछ भि कर सकता थां। विराज नें उसकीसब बातों पऱ अमल करने कां उसेवचन दिया औऱ फिन प्रेम सें उसे अपने सीने सें छुपका करकहा थां__"गुड़िया अब हम् लोगसो जाते हें, कल सुभह हमें जल्द निकलना भि हैं नं। " विराज कि इसबात सें औऱ उसकोइस तरह सीने सें छुपका लेने सें निधिखुश होँ गई औऱ खुशी खुशी हि नींद कि आगोश मे चली गई थि।
सुभह हुई तौ दोनो नें नास्ता पानी किया औऱ कुछ ज़रूरी चीज़ें लेकरघऱ सें निकल पड़े। गौरी केँ द्वारा उन्हें शख्त हिदायतें भि दि गई थि कि वहाॅ पर्र सावधानी सें हि काम लेना औऱ साम होने सें पहले पहलेघऱ वापिस आँ जानां। विराज निधि कों लेकर गाड़ी सें निकल गय़ा थां।
जगदीश ओबराय कि अच्छी जान पहचान थि जिसकी वजह सें विराज कों किसीबात कि कोई तकलीफ़ नहि हुइ थि। कहने कां मतलबयह कि विराज नें एक् बेहतरीन सुख सुविधा सम्पन्न शिप कों साम तक केँ लिएबुक करवा लिया थां।
शिप मे दो चालक औऱ एक् गाइड करने वाला थां बाॅकी पूराशिप खाली हि थां। इस हसीनशिप मे चढ़कर निधि खुशी सें फूली नहि समारही थि। उसकाबस चलता तोँ वो मारे खुशी केँ आसमान मे उड़ने लगती। वो विराज सें चिपकी हुइ थि। फिन वो उससेअलग होकरशिप केँ किनारे पऱ आँ गई तथा यहीं सें हरतरफ कां नज़ारा करनेलगी थि। विराज उसेइस तरहखुश होतेदेख स्वयं भि खुश थां। उसेआज पहलीबार यहाॅ खुले आसमान केँ नीचे समुंदर मे इसतरह अपनी बेहन केँ संगआकर खुशी हुईँ थि। वो अपनी बेहन कों हि देखरहा थां, जौ कभी कहीं देखती तोँ कभी कहीं औऱ देखने लगती। उसकेलिए यहसभी नया थां, हलाॅकि फिल्मों मे उसने जाने कितनी दफा एक् सें बढ़कर एक् सीन्स देखे थें। लेकिन ये नज़ारा उसके जिंदगी कां पहला औऱ वास्तविक थां। विराज अपनी गुड़िया कों इसतरह खुश होतेदेख स्वयं भि खुश थां। फिन एकाएक हि जाने क्याँ सोचकर उसकी आॅखों मे आॅसू आँ गए। कदाचित् यहसोच कर कि इसके पहलेउन लोगों नें ऐसी किसी खुशी कों पाने कि कल्पना भि नं कि थि। उसके अपनों नें किसतरह उसे औऱ उसकीमाॅ बेहन कों हर चीज़ सें बेदखल कर दिया थां। कुछ दर्दऐसे भि थें जौ अक्सर तन्हाई मे उसे रुलाते थें।
अभि वो यहसभी सोचकर आॅसूबहा हि रहा थां कि निधि उसके सामने आँ गई। उसने निधि कों देखकर जल्द सें मुहफेर लिया ताकि वो उसकी आॅखों मे आॅसू न् देखसके।
"आप् क्याँ समझते हें मुझेकुछ पता नहि चलता??" निधि नें भर्राए गले सें कहा__"अगर आप् ऐसा समझते हें तौ ग़लत समझते हें आप्। संसार कि ऐसीकोई चीज़ नहि हैं जिसेदेख कर मे अपनेहोश खोदूॅ औऱ मुझेयह भि न् पताचल सके कि जोँ मेरीजान हैं उसेकिस लम्हा किस दर्द नें आकर रुला दिया हैं। आप् कहीं भि रहेंमगर मे यह महसूस कर लेतीहूॅ कि आप् किस लम्हें मे किस दर्द सें गुज़रे हें। "
"यहसभी क्याँ बोलरही हैं पगली?" विराज नें स्वयं कों सम्हालते हुएतथा हॅसते हुए कहा__"चल छोंड़ यहसभी औऱ आँ हम् दोनों एंज्वाय करते हें। "
"आप् बातों कों टालिये मत। " निधि नें विराज केँ चेहरे कि तरफ एकटक देखते हुए कहा__"मुझे वचन दीजिए कि आज केँ बाद आप् कभी भि अपनी आॅखों मे आॅसू नहि लाएॅगे। "
"जिन चीज़ों पऱ किसी इंसान कां कोईबस हि न् होँ उन चीज़ों केँ लिए केसेभला कोईवचन दे सकता हैं गुड़िया?" विराज नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा__"हाॅ इतना अवश्य कह सकताहूॅ कि आइंदा ऐसा न् हौ ऐसी कोशिश करूॅगा। "
निधि एक् झटके सें विराज सें लिपट गई, उसकी आॅखों मे आॅसू थें, बोलि__"क्यूं उनसभी चीज़ों केँ बारे मे इतना सोचते हें आप् जिनके बारे मे सोचने सें हमें केवलदुख औऱ आॅसू मिलते हें? मत सोचा कीजिए न् वोँ सभी.आप् नहि जानते कि आपकोइस तरहदुख मे आॅसू बहाते देखकर मुझ पर्र औऱ माॅ पर्र क्याँ गुज़रती हैं? सबसे अधिक मुझे तक़लीफ होती हैं.आप् उसेभूल जाइए नं भाईया.क्यूं उसे इतनायाद करते हें जिसे आपकीपाक इश्क कि कोई क़दर हि नं थि कभी। "
विराज केँ दिलो दिमाग़ कों ज़बरदस्त झटकालगा। यह क्याँ कह गई थि उसकी गुड़िया?? उसेऐसा लगा जैसे उसकेपास मे हि कोई बम्ब बड़े ज़ोर सें फटा हौ औऱ फिनसभी कुछ ख़त्म व शान्त। कानों मे केवल साॅय साॅय कि ध्वनि गूॅजती महसूस होँ रही थि। विराग किसीबुत कि तरह खड़ारह गय़ा थां। उसकी पथराई सि आॅखें निधि केँ उस चेहरे पर्र जमी हुइ थि जिस चेहरे कों आॅसुओं नें धो डाला थां। फिन सहसा जैसेउसे होशआया। उसने निधि केँ मासूम सें चेहरे कों अपनी दोनों हॅथेलियों केँ बीच लिया औऱ झुककर उसके माॅथे पऱ एक् चुबन लिया। इसकेबाद वो पलटा औऱ शिप केँ अंदर कि तरफचला गय़ा। जबकि निधि वहीं पऱ खड़ीरह गई।
जब बहुतदेर हौ जाने पऱ भि विराज अंदर सें नं आया तौ निधि केँ चेहरे पऱ चिंता व तकलीफ़ केँ भाव गर्दिश करनेलगे। उसे अपने भइया केँ लिए चिन्ता होनेलगी औऱ उसका दिलो दिमाग़ बेचैन हौ उठा। वो जल्दी हि अंदर कि तरफबढ़ गई। समुंदर मे उठती हुइ लहरों केँ बीच तैरता हुआशिप बढ़ता हि जारहा थां। निधिजब अंदर पहुॅची तोँ शिप मे मौजूद गाइड करने वाला व्यक्ति बाहर् कि हि तरफआता दिखाई दिया। निधि नें उससे विराज केँ बारे मे पूछा तोँ उसनेहाथ केँ इशारे सें एक् तरफ संकेत किया औऱ बाहर् निकल गय़ा। जबकि निधि उसकी बताई हुइ दिशा कि तरफबढ़ गई। एक् कमरे मे दाखिल होते हि उसकी नज़र जैसे हि अपने भइया पऱ पड़ी तौ उसे झटका सां लगा। उसके पाॅव वहीं पर्र ठिठकगए। उसकी आॅखों सें बड़े तेज़ प्रवाह सें आॅसू बहनेलगे। उसकादिल बुरीतरह हाहाकार करउठा थां।
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,
दोस्तो यह एपसोड कलरात हि आधे सें ज़्यादा रेडी किया थां, आज जैसे जैसे वक्त मिलाइसे पूरा किया औऱ आपके सामने हाज़िर कर दिया,,,,,
bhut hi shandar bhay Ab kya hu gay viraj ko Kya dekha nidhi ne aesa. Ajay say bada ghatia janwar koy hu nahee sakta yah sabit hu gyaa.
Behad hi shandaar aur jabardast update bhay. bhut khoob superb. Sala Ajay too ekdam pakka wala harami Nikla sala . Sabse jabardasti kee hi kah Raha hain. Ohhhh yar ayese najuk mod par bi koy rukta hain kya. Kya huwa ?? aur isilye , Aage kaa intjar
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Jabardast Update Bhaiii
Ajay kaa character अब dhire dhire partima ke samne aa rah hain
yeh bij partima ke hii boye huee hain अब fal dekhkar dar kyu gyii
Jiss ganit से lag rah last m ajay akela na rha jaye dhire dhire एक एक उसके nakk ke नीचे से nikal jayenge pta bhii nhio chalega
Abay ko क्या pta lagta hain dekhte hain
Viraj aur nidhi kaa pyar jabardast hain
Vese nidhi choki kyu dekhte hain क्या hotha hain
aj kaa update bhut acha hain bt muze lgta hain ab ritu ko kuch sak hu jana chahiye aur ritu ko hero say pyar bi hnaa chahiye its my wish aage jaesa ap kee marji
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Mind blowing update bro
kahani too bade hi jabardast mod पर aa gai h bro। iss sale ajay ko aisi moth milni चाहिए jiske bare mai kisi ne socha tak na hu
Ajay kaa character बहुत hi ghatiya h.sala घर की sabhi ladies ko apne नीचे sulana chahta h yaha tak की apni betiyo ko bi.iski too mummy chudegi एक दिन mein janta ho
Ajay jaisa dasha उसकी iss randi biwi moorti kaa bi hoga.isi की vajah से yeh sab hua.iski too har कोई bajaye too mazaa aa jaye
Abhay क्या krta h yeh dekhne wali बात h bro :biggboss:
Viraj and Nidhi kaa pyar sabse sweet h लेकिन अब yeh kiski mohabbat kaa mara dikhne laga bro???? or nidhi ne aesa क्या dekh लिया ship के andar jisse उसकी waisi haalat hu gai h????
So waiting waiting for the next bro
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
Super duper updated bhay.☆ kahani toh acchi h pr sex na k barabar h, kahani main sex bi dalo yar, Keep going We will wait for next update.☆
Shubham bro kee story mai sex na k barabar hi milega bro halanki incest kahani h.too dekhte haen kahin too sex seen milega hi, mein bi usi seen kaa wait krr raha ho
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