अपवित्र नाता-2 - Real Kahani Part 1
जयसिंह अपनी बेटी मनिका कों बेतहाशा चुमें जारहा थां|मनिका उसकी बाहों मे कसमसा रही थि| वो मनिका कों पलंग पर्र लेटाकर उसकेऊपर चढ़ गय़ा| मनिका भि उसकासंग देरही थि| दोनों केँ होंठ एक् दूसरे सें जुड़े हुए थें| जयसिंह कभी उसके होठों कों चूमता तौ कभी अपनाजीभ उसके मुंह मे डालने कि कोशिश करता, जब मनिका सें नहि रहा गय़ा तोँ उसने अपने दोनों बाहें उठाकर जयसिंह केँ गले मे डाल दि| दोनों बाप बेटी किसी पति-पत्नि कि तरह गाढ़े चुंबन मे जुड़गए| मनिका नें जयसिंह कों कस केँ पकड़ा हुआ थां| उसने अपने दोनों टांगउठा कर जयसिंह केँ पीछे कसली|जय सिंह कां लन्ड मनिका केँ बुर केँ पास टकरारहा थां| जब मनिका कों इसबात कां आभासहुआ तौ उसनेजय सिंह कों रोकना चाहा| जयसिंह नें उसके होठों कों छोड़कर उसके चेहरे कों देखा| मनिका कि आंखें बंद थि| जयसिंह नें अपना मुंह उसकेकान केँ पास लेँ जाकर बहोत कि कामुक अंदाज मे कहा| मनिका अपनी आंखे खोलो डार्लिंग| औऱ उसकीकान कों अपनीजीभ सें चूसने लगे, मनिका अपने पिता कि इस हरकत सें औऱ भि कसमसा गई| जयसिंह नें फिन उसकी आंखों मे देखा| उसकी आंखें फिन भि बंद थि| उसनेफिन कहा आंखें खोलोमनी, मनिका नें अपना चेहरा दूसरी तरफकर लिया| औऱ धीरे-धीरे सें कहा नहि मुझे लज्जा आती हैं पिताजी| जय सिंह नें कहाअरे मुझसे कैसा शर्माना डार्लिंग| देखो मे अपनी गर्लफ्रेंड कों प्रेम कररहा हूं| कुछदेर ऐसे हि रहने केँ बाद मनिका नें अपनासर सीधा किया| औऱ धीरे-धीरे सें अपनी आंखें खोली| जैसेउसे हि देखरहा थां| जैसे हि मनिका नें अपनी आंखें खोली| जयसिंह फिन सें उसके होठों पर्र टूट पड़ा| मनिका नें फिन अपनी आंखें बंद करके अपने पिता केँ संग प्रेम कि गोते लगाने लगी| दोनोऐसे एक् दूसरे कों किसकर रहे थें जैसे बरसो केँ प्यासे होँ, जयसिंह अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे कि ओर बढ़नेलगा, औऱ मनिका केँ गोरे चिकने गर्दन पे बिखरी हुईँ उसके बालों कों हटाने लगा, मनिका अपने बापू कि इस हरकत सें औऱ भि कसमसाने लगी, उसके मुंह केँ अहह निकल गयीँ,, जयसिंह नें उसकी गर्दन कि खुश्बू लेने केँ लिए अपनानाक उसकी गर्दन पे रगड़ा, क्याँ खुशबू थि, जयसिंह तौ जैसे पागल होँ गय़ा, उसका सपना पूरा हौ रहा थां, वोँ अपनी सेक्सी जवान बेटी केँ जवानी कां आनंद लेँ रहा थां, सबकोपता हैं किसी जवान लड़की कों अधिकजोश तभीआता हैं जबकोई मर्द उसकी गर्दन कों चूमेऔए चाटे, जयसिंह नें जैसे हि मनिका केँ गर्दन कों चुमना शुरुआत किया, मनिका मचलउठी, उसने जयसिंह कों कस केँ पकड़ लिया औऱ उसकेसर कों पकड़कर अपनी गर्दन मे दबाने लगी, उसके दोनों बड़ेबड़े गोल बूब्ज़ जयसिंह केँ सीने मे दबगए, उसके निप्पल कड़क होँ चुके थें जौ जयसिंह कों महसूस हौ रहे थें, उसके गर्दन कों चूमते हुए जयसिंह नें अपनाजीभ निकाला औऱ उसकी गर्दन कों चाटने लगे, उनकीइस हरकत सें मनिका केँ सब्र कां बांधटूट गय़ा, उसने दहकते हुए जयसिंह केँ कान मे कहा, ओह्ह बापू क्याँ कररहे हें आप्, मुझेकुछ होँ रहा हैं, पिताजी आईलवयू, ओह्ह पिताजी, आईलव यू.जयसिंह नें अपनासर उठा केँ मनिका कों देखा, तोँ मनिका नें शर्मा कर अपनी आँखें बंदकर ली, मनिका नें पिंककलर कि ब्रा पहनी थि औऱ उसकेऊपर एक् पतली स्ट्रेप वाली स्लीवलेस वाइट गाउन थि, गाउन कां गला इतनाबड़ा थां कि मनिका कि क्लेवज औऱ आधा मम्मों साफसाफ दिखरहा थां, जयसिंह कि हरकतों कि वजह सें उसके दोनों मम्मों एकदम टाइट औऱ बड़े होँ गए थें, इसकीवजह सें ऐसालग रहा थां कि ब्रा सें निकलकर बाहर् हि आँ जाएंगे, जयसिंह नें बड़ी हि मादक अंदाज़ मे उसकीकान मे कहा, आई लवयूटू मेरी जान.यह सुन केँ मनिका दहकउठी औऱ उसकी सांसे औऱ तेज चलने लगीं, जिससे उसके मम्मों ऊपर नीचे होनेलगे, जयसिंह नें उसके दोनों हाथ कि हथेलियों कों अपने हाथों मे पकड़ लिया औऱ उसके हाथो कों ऊपरकर दिया, औऱ एक् नजर उसने मनिका केँ सेक्सी शरीर पे डाला, उसकेबाल बिखरे हुए थें, गर्दन पे हल्की सि पसीने कि बूंदें आँ गई, थि, उसकाआधा बूब्ज़ नुमाया होँ रहा थां, उसके दोनों अंडरआर्म्स एकदम क्लीनसेवेंन थि, जयसिंह मन मे सोचता हैं, साली क्याँ माल हैं, क्याँ खुसबू हैं इसके शरीर कि, उसका लन्ड एकदम टाइट होँ गय़ा थां जोँ मनिका केँ बुर पर्र पैंटी केँ ऊपर सें हि रगड़खा रहा थां, जयसिंह नें अब एक् औऱ हरकत करने कि सोची, उसने अपना मुंह मनिका केँ क्लेवज मे दे दिया, औऱ उसके उबरेहुए स्तनों कों चूमने लगा, मनिका इस हरकत सें मचलउठी, वोँ जयसिंह केँ नीचे तड़फड़ाने लगी, जयसिंह अपनीजीभ सें उसके गर्दन सें लेँ कर उसके क्लेवज तक चाटने लगा, मनिका कां बदन अकड़ने लगा औऱ वोँ मदहोशी मे, उफ्फ्फ बापू, क्याँ कररहे हौ, क्यूं सतारहे होँ मुझे, उफ्फ्फ पिताजी, रुक जाइये नां.वैसे यह मनिका नें बेमन सें कहा थां उसे भि मज़ा आँ रहा थां, जयसिंह नें रुकने कां सुनकर अपनासर ऊपर किया औऱ उसकी आँखों मे देखा, जैसे हि दोनों कि आँखें मिली मनिका नें हल्का सां मुस्कुरा कर अपनी आँखें बंदकर ली, जयसिंह नें धीरे-धीरे सें कहा, रुक जाऊजान? मनिका नें कोई जबाब नहीं दिया, वोँ आँखें बंद किये मुस्कुरा रही थि, उसकोऐसा लगरहा थां कि जैसे वोँ अपने सुहागरात केँ सेज पऱ हैं औऱ उसका पति उसे प्रेम कररहा हैं, औऱ वोँ बेमन सें हल्का बिरोध कररही थि, जयसिंह नें फिन पूछा, रुक जाऊमनी? मनिका नें हल्के सें अपनी आँखें खोली औऱ इसारे सें शर्माते हुएकहा, नहीं.उसकी इसअदा पऱ जयसिंह कां जोश औऱ बढ़ गय़ा, उसने अपना होंठ मनिका कि ओर बढ़ाया औऱ जैसे मनिका इसी कां इन्तेजार कररही थि, दोनो केँ होंठफिन जुड़गए औऱ एक् लंबा चुम्बन फिन शुरुआत हौ गय़ा, दोनो एक् दूसरे केँ होंठो कों चूसते तोँ कभी एक् दूसरे केँ जीभ कों, जयसिंह तौ जैसे मनिका केँ मुखरस कों हि पीनेलगा, वोँ मनिका केँ जीभ कों अपने मुंह मे लेके चूसने लगा, ऐसा करतेहुए जयसिंह केँ मन मे एक् औऱ हरकत सूझी, उसकोडर थां कि कहीं मनिका नाराज न् हौ जाये, पऱ उसने हिम्मत करके अपने एक् हाथ कों मनिका केँ जवान मम्मों पऱ रख दिया, मनिका कों किस करते वक़्त यह महसूस नहींहुआ कि उसके पिताजी कां हाथ कहां हैं, दोनो एक् दूसरे कों पागलों कि तरह चूसेजा रहे थें जैसे बरसों केँ प्यासे हों, तभी जयसिंह नें उसके बूब्ज़ कों बेरहमी सें मसल दिया, इस हरकत सें मनिका अवाकरह गई,, उसने अपना होंठ जयसिंह केँ होंठ सें हटा लिया औऱ आंखें फाड्कर जयसिंह कों देखने लगी, जयसिंह कि हालत खराब हौ गयीँ,, जिसबात कां डर थां वहीहुआ, उसकाबना बनाया काम खराब होँ गय़ा, उसनेमन मे सोचा, कहां साली कों चोदने कां सपनादेख रहा थां, यह तोँ अभि हाथ सें निकलने लगी, वोँ रोनी सि शक्लबना कर मनिका सें माफी मांगने लगा, सॉरी डार्लिंग गलती होँ गई,, सॉरीमनी मुझेऐसा नहीं करना थां, माफकर दोजान प्लीज, मनिका कों इसबात कां बुरा नहींलगा थां, वोँ तौ मदहोश थि अपने पिताजी केँ संग प्रेम करके, जयसिंह तोँ उसे जवानी कां असलीमज़ा देरहे थें जौ हर जवान लड़की कां सपना होता हैं कि कोई मर्दउसे शरीर कों चूमे, चाटे, उसे मसलमसल कर प्रेम करे, वही तोँ जयसिंह कररहे थें, फिन भि वोँ जयसिंह कों सताने केँ लिए झूठा क्रोध लिएउसे ताड़रही थि, पऱ जयसिंह केँ रोनी सूरतदेख करउसे प्रेम आँ गय़ा औऱ उसकी हसीं निकल गई,, उसने धीरे-धीरे सें कहां, क्यूं सॉरीबोल रहे होँ आप्? आप् नें क्याँ गलती कि हैं कहो?, जयसिंह केँ जान मे जानआयी, उसने उसके बूब्ज़ कि औऱ इशारा करतेहुए कहा मैंने इन्हें टच किया तोँ लगा तुम् क्रोध हौ गयीँ,, आईएम सारीजान, आईलवयू मनिका, मनिका नें अपने दोनों हाथ सें जयसिंह कां सर पकड़ा औऱ अपनीओर खीचते हुए उसकेकान मे बड़ी सेक्सी अंदाज मे कहा, मे क्रोध नहि हूं पिताजी पर्र आपको प्रेम सें दबाना थां नां, इतनातेज क्यूं मसला,.जयसिंह उसका जबाबसुन केँ सन्नरह गय़ा औऱ उसकी आँखों मे देखने लगा, मनिका भि उसकी आँखों मे देखने लगी, जयसिंह नें धीरे-धीरे सें कहा, आई लवयूजान, मेरी मनिका.मनिका नें भि प्रेम सें कहा, आई लवयूटू पिताजी, मे अपने बिना नहींरह सकती.औऱ इतनाकह कर उसने जयसिंह कों फिन अपनेऊपर खीच लिया औऱ दोनों एक् गाढ़े चुम्बन मे जुड़गए, मनिका कों किस करते करतेअब जयसिंह नें अपने दोनों हाथ उसके दोनों स्तनों पऱ रख दिया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उन्हें मसलने लगे, मनिका नें कुछ नहींकहा उसे भि मज़ा आँ रहा थां.जयसिंह नें अपना चेहरा उठाया औऱ मनिका कों देखा, मनिका भि उनकोदेख रही थि औऱ जयसिंह उसके स्तनों सें खेलरहे थें, मानिक कि सांसें भारी हौ रही थि, जयसिंह नें उसके दाये कंधे पऱ सें गाउन औऱ ब्रा कि स्ट्रिप नीचे करना शुरुआत किया, मनिका कों लगा कि पिताजी कों नहीं रोका तौ गड़बड़ हौ जाएगी, उसके जयसिंह केँ रूम मे आये बहुत वक़्त हौ गय़ा थां औऱ उसे पकड़े जाने कां डरसता रहा थां, उसने जयसिंह केँ हाथ कों पकड़ लिया औऱ प्रेम सें कहा, पिताजी प्लीज अब नहीं, मुझे जानेदो, कोई आँ जायेगा, जयसिंह उसके एक् कंधे कों नंगाकर चुका थां, वोँ मनिका केँ चूचियों कों पीना चाहता थां, उसने मनिका सें कहा, कोई नहीं आएगाजान, प्लीज रुकजाओ, मनिका नें कहा नहीं मे जारही हूं कोई आँ जायेगा औऱ सभी गड़बड़ होँ जाएगी, औऱ हल्का सां शर्माते हुए धीरे-धीरे सें कहा, बाकी कां बाद मे कर लेना, जयसिंह कहा मानने वाले थें, उसने मनिका कां हाथपकड़ कर उसके नंगे कंधे कों चाटने लगे, तभी रसोई मे कुछ गिरने कि आवाज़आयी, दोनोसहम गए, मनिका नें डरतेहुए कहा, मैंने कहां थां नाँ कोई आँ जायेगा, जयसिंह नें अपनी उंगली मनिका केँ होंठ पे रख दिया औऱ कहा, शांतरहो मैंने कहां नाँ कुछ नहीं होगा, औऱ उठकरदबे पाव दरवाजे कि ओरगए औऱ दरवाजे पर्र कानलगा कर सुनने लगे, जब सभी शांत हौ गय़ा तोँ उन्होंने मनिका कों आने कां इशारा किया, मनिका अभि भि बेड मे पड़ी हुई थि, वोँ धीरे-धीरे सें नीचे उत्तरी, उसके कपड़े औऱ बाल बिखरे हुए थें, उसकी गाउन उसके गांड सें ऊपर हौ गई, थि, उसकी छोटी सि पैंटी दिखरही थि, उसका एक् ब्रा स्ट्रिप भि नीचे हौ रखा थां, वोँ अपने दोनों हाथउठा कर अपनेबाल सहीकर रही थि, औऱ जयसिंह उसेदेख कर कामुक मुस्कान देरहा थां, मनिका नें आँखों केँ इशारे सें पूछा, ऐसे क्याँ देखरहे हें? फिनउसे अपने कपड़ों कां खयालआया, तोँ शर्माते हुए उसने अपनी गाउन नीचे कि औऱ ब्रा कि स्ट्रिप ठीक कि.औऱदबे पॉव जयसिंह केँ पास आँ करखड़ी हुई औऱ उसकेहाथ केँ चिकोटी काटते हुएकहा, बड़े गंदे होँ गए होँ आप्, औऱ मुस्कुरा देती हैं, जयसिंह फिनउसे अपने बाहों मे भर लेता हैं औऱ उसकेकान मे कहता हैं, मेरेसंग दिल्ली चलोगी जान, मनिका आश्चर्य सें पूछती हैं, आपको दिल्ली क्यूं जानां हैं मेरेसंग? जयसिंह उसकीकान मे रोमांटिक अंदाज़ मे कहता हैं, वहां मात्र हम् दोनों होंगे, औऱ हमेकोई डिस्टर्ब नहीं करेगा, मनिका यहसुन कर कांप जाती हैं, उसकेमन मे ख्वाब आने लगते हें, दिल्ली केँ होटलरूम मे केवल मे औऱ पिताजी होंगे अकेले, पिताजी मेरेसंग क्याँ क्याँ करेंगे, कोईहमे डिस्टर्ब भि नहीं करेगा, यहसोच कर उसका जिस्म सिहर उठता हैं, वोँ अपनी नजरें झुका लेती हैं, जयसिंह उसके चेहरे कों ऊपर करता हैं औऱ फिन पूछता हैं, कहो डार्लिंग चलोगी न् ? वोँ शर्माते हुए धीरे-धीरे सें बोलती हैं, यस पिताजी, चलूंगी.जयसिंह फिनउसे किस करने लगता हैं इसबार मनिका उसे रोकती नहीं हें, कुछदेर किस केँ बाद मनिका कों फिनहोश आता हैं औऱ वोँ बोलती हैं, बापू मुझे जानां चाहिए, जयसिंह उसे नहीं रोकता हैं, हल्के सें दरवाजा खोलकर वोँ दबेहुए कदमो सें सीढिया चढ़ते वोँ अपनेरूम मे चली जाती हैं, औऱ धम्म सें अपनेबेड पे गिर पड़ती हैं,
अपवित्र नाता-2 – New Episode
दिल्ली कि प्लानिंग.
मनिका अपनेरूम मे जाती हैं, शीशे केँ सामने बैठ जाती हैं वो अपने जिस्म कों निहारने लगती हैं, उसे अपने बापू केँ संग बिताहुए लम्हा यादआने लगते हें, केसेकुछ देर पहले वो एक् दूसरे कों प्रेम कररहे थें, वो अपने पिताजी केँ कमरे मे उनकेखाट पर्र लेटी हुइ थि, औऱ उसके बापू उसको प्रेम कररहे थें, बापू उसके होठों कों चूमरहे थें, वो दोनों केसे दूसरे केँ संगकिस मे डूबेहुए थें, जय सिंह केसे उसके शरीर केँ संगखेल रहे थें, वो कभी उसके होठों कों चूमते कभी उसके गालों कों चाटते कभी उसके गर्दन कों चाटरहे थें, औऱ केसे उसके स्तनों कों चूमरहे थें, औऱ वो उनके नीचे तड़परही थि, जय सिंहजब उसके स्तनों कों मसलरहे थें उसके तन-जिस्म मे आगलग गई थि, सोचते सोचते उसकाहाथ अपनी पैंटी पऱ चला जाता हैं औऱ वो देखी हैं कि उसकी पैंटी गीली होँ गई हैं, उसकेतन जिस्म मे आगलग जाती हैं, जय सिंह केसे उसको प्रेम कररहे थें वो अभि येसोच हि रही थि कि उसकेफोन पर्र जय सिंह कां मैसेज आँ जाता हैं.
जय सिंह- क्याँ कररही होँ डार्लिंग?
मनिका- कुछ नहि पिताजी, आप् क्याँ कररहे हौ?
जय सिंह- तुम्हें मिसकर रहा हूं जान.
मनिका- अभि तोँ आपकेपास थि अब क्यूं मिसकर रहे हौ?
जय सिंह- मेरीजान तुम् बहोत सेक्सी होँ.
मनिका ये सुनकर मन हि मन शर्मा जाती हैं। उसे भि पिताजी केँ मुंह सें ये सुनना अच्छा लगता हैं.
मनिका- ओ पिताजी आप् भि नां.
जय सिंह- तुम् सच मे बहोत सेक्सी हौ जान, एकदम कयामत हौ, मनकररहा हैं तुम्हें खा जाऊं.
ये सुनकर मनिका कि हालत खराब होँ जाती हैं। वो लज्जा सें पानी पानी हौ जाती हैं.
मनिका- आप् भि तौ बहुत हैंडसम हैं पिताजी.
जय सिंह-आई लवयूजान.
मनिका- आईलवयू टू पिताजी.
जय सिंह- पिताजी नहि मुझेनाम सें बुलाओ.
मनिका ये पढ़कर शर्मा जाती हैं.
मनिका- मे आपकोनाम सें केसे बुला सकती हूं पिताजी.?
जय सिंह- क्यूं नहि, मे तुम्हारा बॉयफ्रेंड हूं, तुम् मुझेनाम सें बुला सकती होँ, मुझेजान बोल सकती हैं.
मनिका कि हालत खराब होँ जाती हैं। वो कोई जवाब नहि देती हैं.
जय सिंह-कहो जान.
फिन मनिका शरमाते हुए टाइप करती हैं.
मनिका- मुझे क्यूं सताते होँ बापू.आई लवयूटू जान.
ये मैसेज पढ़ केँ जय सिंह कां लन्ड उनके बरमूडा मे तूफान मचा देता हैं.
जय सिंह- एक् बार मेरानाम कहोजान.
मनिका- ओ पिताजी आप् मुझे कितना सताते हौ। जा मुझे आपसे नहि बात करनी.गुड नाइट
जय सिंह- अच्छा सुनो तोँ.
मनिका- बोलिए.
जय सिंह-कल मधु सें बात करता हूं दिल्ली जाने केँ लिए, चलोगी नां जान?
मनिका ये मैसेज पढ़कर शर्मा जाती हैं.
मनिका- आपको मुझे दिल्ली क्यूं लें जानां हैं बापू?
जय सिंह- वहां केवल हम् होंगे जान औऱ कोई डिस्टर्ब करने वाला नहि होगा। मुझे अपनीजान कों प्रेम करना हैं.
ये सुनकर मनिका कां जिस्म कांपने लगता हैं, सोचकर उसकी हालत खराब होँ जाती हैं कि बापू उसकेसंग क्याँ करेंगे अकेले मे.
मनिका- अभि तौ प्रेम किया थां बापू, औऱ कितना प्रेम करोगे.?
जय सिंह- अभि तौ थोडा सां प्रेम किया थां, वहां पर्र होटलरूम मे जब हम् अकेले होंगे मे अपनीजान कों अच्छे सें प्रेम करूंगा.
ये मैसेज पढ़कर मनिका आहे भरने लगती हैं,
मनिका- ओह्ह पिताजी अच्छे सें प्रेम केसे होता हैं? आप् भि नां.
जय सिंह- मुझे अपनीजान केँ संगखाट मे बिना कपड़ों केँ प्रेम करना हैं, जैसे पति पत्नि करते हें, मुझे तुम्हारे शरीर केँ संग खेलना हैं जान, तुम्हें मसलमसल केँ प्रेम करूंगा जान.चलोगी नां मेरेसंग?
ये मैसेज पढ़ केँ मनिका कां बदन सुन्न हौ जाता हैं, वो सोचती हैं बापू उसकेसंग सेक्स करना चाहते हें, उसकेतन जिस्म मे आगलग जाती हैं। उसे मैसेज कों दोबारा पड़ती हैं औऱ शर्मा जाती हैं। सोचने लगती हैं, केसे अपने पिताजी केँ संग बिना कपड़ों केँ पलंग मे प्रेम करेगी, केसे उसके बापूउसे चुमेंगे औऱ चाटेंगे। केसे उसके स्तनों सें खेलेंगे, वोँ केसे अपने पिताजी कों अपने मम्मों पिलाएगी। ये सोचकर उसकी पेंटिं मे बाढ़ आँ जाती हैं, उसकाबदन कांपने लगता हैं, औऱ मदहोशी मे वो जय सिंह कों मैसेज लिखती हैं.
मनिका- आईलवयू पिताजी.
जय सिंहसमझ जाता हैं, उसकी खुशी कां ठिकाना नहि रहता.
जय सिंह- तौ मे हां समझू?
मनिका- हां चलूंगी जी.
जय सिंह-जी? ओ होँ अभि सें पत्नि वाली हरकत.
मनिका ये पढ़कर शर्मा जाती हैं.
मनिका- जाओ मे आपसेबात नहि करती आप् बहोत गंदे हें। आईलवयू
जय सिंह- अच्छा जी, आईलव यूटूजान
मनिका- मुझे सोनेदो मुझे नींद आँ रही हैं, आप् अभि सोजाओ.
जय सिंह- अच्छा जानगुड नाइट.
मणिका केँ दिमाग़ मे अपने पिताजी कों सताने कां एक् ख्याल आता हैं, वो एक् आखरी मैसेज टाइप करके सिंह कों भेज देती हैं औऱ अपनाफोन स्विच ऑफकर लेती हैं.
मनिका- गुड नाइटजान, माय डियरहबी जय.आईलव यूसोमच.
जय सिंहजब मैसेज पड़ता हैं, वो खुशी सें पागल होँ जाता हैं, वो मनिका कों कॉलआई करता हैं, औऱ उसकाफोन स्विच ऑफ होता हैं तौ समझ जाता हैं कि मनिका शर्मा गई हैं। वो एक् आखरी मैसेज टाइप करता हैं औऱ मानिका कों भेज देता हैं, आने वालेकल केँ सुहाने ख्वाब मे खो जाता हैं औऱ उसे नींद आँ जाती हैं.
जय सिंह-आई लवयूटू माय सेक्सी हॉट वाइफमनी। तैयार फॉरयोर हनीमून बेबी।
ap Kha sali gyi hu,ap Puri Kero na kahani ko,aapki writing k aage sab fail hain,so I request you please write this complete kahani
अपवित्र नाता-2 – New Episode
दिल्ली कि प्लानिंग- 2
जय सिंह सुभह सोकर जल्द जगाता हैं, औऱ जल्द सें फ्रेश होकर मनिका कों मैसेज भेजता हैं,
जय सिंह-गुड मॉर्निंग मेरीजान.
उधर मनिका जोँ सो केँ जागती हैं जय सिंह कां रात वाला मैसेज देखकर लज्जा सें पानी पानी हौ जाती हैं, पिताजी नें उसे अपनी सेक्सी हॉट वाइफ बोला थां, औऱ लिखा हैं कि हनीमून केँ लिए रेडी रहना.ओह्ह बापू.मानिका आहें भरने लगती हैं.सोचती हैं बापू कितने चालाकी सें अपनी हि बेटी कों अपनी पत्नि बना लिया.क्याँ सच मे मे उनकी पत्नि हूं, औऱ वोँ मेरेहबी हौ गए हें.यह सोचसोच कर उसकी हालत खराब हौ जाती हैं.वोँ लज्जा सें लाल हौ जाती हैं.वोँ उनको रिप्लाई करती हैं.
मनिका- गुड मॉर्निंग बापू.
जय सिंह- मात्र पिताजी?
मनिका शर्मा जाती हैं औऱ वो सोचने लगती हैं कि बापू कों क्याँ जवाबदें, उसेपता थां कि पिताजी उससे क्याँ सुनना चाहते हें.उसे रहा नहि जाता हैं औऱ वो लिख भेजती हैं.
मनिका- औऱ भि बहोत कुछ होँ आप् मेरे.
जय सिंह- औऱ क्याँ हूं मे आपका.
मनिका शर्मा जाती हैं औऱ उसका शरीर टूटने लगता हैं.उसे समझ नहींआता क्याँ बोलू.
मनिका- सुनिए नाँ मुझे लज्जा आँ रही हैं.
जय सिंहये मैसेज पढ़कर खुश हौ जाता हैं, मानिका उसे पत्नि कि तरह बुलारही थि.
जय सिंह-कहो न् जान मुझसे क्याँ शर्माना.
मनिका- नहीं पिताजी मुझे लज्जा आँ रही हैं.जाओ आप् कितने गंदे हौ.मे नहींबता रही.
जय सिंह-जान अभि सें इतना शर्माओगी तोँ आगे क्याँ हाल होगा आपका.बताओ
मानिका पिताजी कि बातसमझ जाती कि वोँ आगे किसकी बातकर रहे हें.वोँ आहें भरने लगती हैं.जयसिंह सेक्स केँ वक्त कि बातकर रहे थें.मानिका सोचने लगती हैं कि जब पिताजी उसे अकेले मे प्रेम करेंगे, जब उसके जिस्म पऱ एक् कपड़े भि नहीं होंगे, औऱ वोँ उसेफ़क करेंगे तौ उसकी तौ हालत खराब हौ जाएगी लज्जा केँ मारे.
मगर फिन भि वोँ जयसिंह कों उकसाने केँ लिए मैसेज लिखती हैं.
मानिका- आगे क्याँ होगा पिताजी.आँ
जयसिंह- अपने हनीमून पे बेबी.वहां कितना शर्माओगी आप्.कहो
मानिका- ओह्ह पिताजी आप् भि न्.कितना सताते हौ मुझे.
जयसिंह - अभि कहासता रहा हूं जान.अभि तोँ कुछ नहीं किया मैंने। अभि तौ जब हम् अकेले होंगे तोँ नां सताउंगा आपको.
यह मैसेज पढ़ केँ मानिका केँ तन शरीर मे आगलग जाती हैं.वोँ बेड पे लेट जाती हैं औऱ आहें भरने लगती हैं.वोँ जानती हैं पिताजी उसको अकेले मे पाएंगे तौ छोड़ेंगे नहीं.उसके एक् एक् अंग कों चाट जाएंगे, उसके चुचियों कों मसलमसल केँ औऱ चूसचूस केँ लालकर देंगे.फिन भि वोँ जयसिंह केँ मुह सें सुनना चाहरही थि.
मानिका- अकेले मे केसे सताओगे पिताजी.आप् भि न् बहोत गंदे होँ.
जयसिंह समझ जाता हैं कि मानिका अबगरम हौ चुकी हैं वोँ अपना प्रश्न फिन पूछता हैं.
जयसिंह- बताऊंगा अकेले मे केसे सताते हें.पहले आप् बताओ मे कौन हूं आपका.?
मानिका सच मे गर्म होँ चुकी थि.उसके निप्पल टाइट होँ गए थें.औऱ पैंटी पूरी गीली हौ चुकी थि.वोँ शर्माते हुए जबाव देती हैं.
मानिका- ओह्ह पिताजी.आप् मेरेहबी होँ जान। मे आपकी पत्नि हूं.I love u my dear hubby jay.
जयसिंह यह मैसेज पढ़ केँ पागल हौ जाता हैं, उसका लण्ड एक् दम पैंट कों फाड़ केँ बाहर् आने कों होँ जाता हैं, वोँ सोचता हैं कि अभि मानिका केँ रूम मे जाये औऱ उसेपटक केँ चोददे, वोँ पैंट केँ ऊपर सें हि लण्ड कों सहलाता हैं औऱ मैसेज टाइप करता हैं.
जयसिंह- तौ अबयह बताओ एक् पति अपने पत्नि कों अकेले मे केसे सताता हैं.
मानिका यहपढ़ केँ शर्मा जाती हैं, फिन भि जयसिंह कों उकसाते हुए पूछती हैं.
मानिका- ओह्ह पिताजी मुझे नहीं पता.आप् बताओ केसे सताते हैं.
जयसिंह- सचसच बताओ, बता दूं केसे सताते हें.शर्माओगी तौ नहीं.
मानिका कि सासू तेज चलने लगती हैं, वोँ जानती हैं बापू उससे गंदी गंदीबात बोलेंगे, उसे भि अबमज़ा आँ रहा थां.
मानिका- i love u jay.
जयसिंह मानिका कां कोडवर्ड समझ जाता हैं कि वोँ सुनना चाहती हैं,.
जयसिंह- जब पति पत्नि अकेले होते हें तोँ पति अपनी पत्नि कों खूब प्रेम करता हैं, उसके छेड़ता हैं, सहलाता हैं, चूमता हैं, चाटता हैं.
मानिका बैड पे पड़ीपड़ी आहेभर रही होती हैं, वोँ यहसभी अपने औऱ जयसिंह केँ बीच होतेहुए महसूस कररही होती हैं, उसका एक् हाथ पैंटी केँ अंदरचला जाता हैं, वोँ अपनी गीली बुर रगड़रही होती हैं, औऱ जयसिंह कों रिप्लाई करती हैं,
मानिका- ओह्ह पिताजी.औऱ क्याँ करते हें पति.
जयसिंह- फिन वोँ अपनी पत्नि केँ कपड़े निकलता हैं,.औऱ उसकेहर एक् अंग कों चाटता हैं.
मानिका अपनेजोश केँ चरम पे आहेंभर रही होती हैं.वोँ सोचती हैं काश अभि बापूआके मुझेऐसी हि प्रेम करें.उसके कपड़े उतारदे औऱ उसेहर स्थान चाटे.
मानिका- फिन बापू.
जयसिंह- फिन वोँ उसकी ब्रा- पैंटी भि निकाल देता हैं.औऱ.
मानिका- औऱ क्याँ पिताजी.?
जयसिंह- औऱ फिन वोँ अपनी पत्नि केँ दूध पीता हैं.
मानिका यहपढ़ केँ पागल हौ जाती हैं, उसके पिताजी उसके स्तनों कों पीने कि बातकर रहे थें, उसकी चुचियाँ फूल जाती हैं, उसके निप्पल टाइट हौ जाते हैं, वोँ अपनेहाथ सें अपने स्तनों कों मसलने लगती हैं, औऱ जयसिंह कों कोई रिप्लाई नहीं देती.कुछ देर इंतेज़ार केँ बाद जयसिंह कां मैसेज आता हैं,
जयसिंह- क्याँ हुआजान शर्मा गयीँ, क्याँ.फिन मुझे केसेदूध पिलाओगी अपना.
यह मैसेज पढ़ते हि मानिका भलभला केँ पैंटी मे हि झड़ जाती हैं, उसके बापू नें डायरेक्टली उसके मम्मों पिने कि बातबोल दि.कुछ देर मे उसकाजोश ठंडा होता हैं औऱ वोँ जयसिंह केँ मैसेज पढ़ केँ लज्जा सें पानी पानी होँ जाती हें.वोँ सोचती हैं कि हाए मैंने बापू सें कितनी गंदी गंदीबात कर ली.बापू भि कितने गंदे हें जौ मुझसे ऐसीबात कर ली.वोँ मुझे पत्नि कि तरह प्रेम करना चाहते हैं, मेरे चुचियों कों पीना चाहते हें.मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगाकर केँ प्रेम करना चाहते हैं.औऱ जब हम् अकेले होंगे तोँ वोँ मुझे पक्का फ़क करेंगे.मे भि तोँ यही चाहती हूं कि बापू मुझे अपनी पत्नि कि तरह प्रेम करे.औऱ मेरेसंग सेक्स करें, मुझे अपनी बाहों मे भरकरफ़क करे.यह सोचसोच कर उसकी हालतफिन खराब होने लगती हैं, वोँ फिन जयसिंह कों मैसेज लिखती हैं मगरइस बार बेटी कि तरह नहीं पत्नि कि तरह.
मानिका- ओह्हजान.I love u my jay.
जयसिंह यहपढ़कर खुश हौ जाता हैं, उसको लगता हैं कि अब मानिका उसके चंगुल मे पूरीतरह फस गई, हैं, वोँ उसे अपना पति मान चुकी हैं, अबजब दिल्ली मे होटलरूम मे हम् अकेले होंगे तोँ मानिका सेक्स केँ लिएमना नहींकर पायेगी.जयसिंह फिनउसे छेड़ता हैं,
जयसिंह- तोँ फिन मे हाँ समझूजान.?
मानिका- किसबात कि हाँ पिताजी.?
जयसिंह- यही कि जब हम् बिल्कुल अकेले होंगे औऱ कोई नहीं होगाहमे डिस्टर्ब करने वाला तोँ तुम् मुझे अपनादूध पिलाओगी नां.
मानिका यहपढ़ केँ शर्मा जाती हैं.औऱ टाइप करती हैं.
मानिका- ओह्ह पिताजी, आप् कितने गंदे हौ.जाओ मे आपसेबात नहीं करतीअब.
जयसिंह- अच्छा सुनो.
मानिका- जी बोलिये जान.
जयसिंह- क्याँ कररही होँ अभि.फ्रेश हुइ कि नहीं.
मानिका- अभि सो केँ जगी हूं बापू, तबसे आप् मुझे परेसान कररहे होँ.मे अब फ्रेश होनेजा रही हूं.
जयसिंह- सुनो तोँ जान.क्याँ पहना हैं इस टाइम.
मानिका यहपढ़ केँ शर्मा जाती हैं, वोँ सोचती हैं झूठबोल देफिन वोँ अपने बापू कों तड़पाने कां सोचती हैं.
मानिका- वही जौ आपको पसन्द हैं,
जयसिंह- क्याँ जानकहो नाँ.
मानिका- नहीं मुझे लज्जा आती हैं, प्लीज जान मुझेमत सताइये नाँ.
जयसिंह- एक् बारबता दो बेबी क्याँ पहना हैं.
मानिका- केवल ब्रा औऱ पैंटी मे हैं आपकी पत्नि इस टाइम.
यह मैसेज पढ़ केँ जयसिंह कि हालत खराब हौ जाती हैं उनका लन्ड कुलाचे मारने लगता हैं,
जयसिंह- जान मे आँ रहा हूं आपकेरूम मे.गेट खोलो.
मानिका यहपढ़ केँ डर जाती हैं, उसे लगता हैं कि बापूअगर इस वक्त आँ गए औऱ मुझे मात्र ब्रा- पैंटी मे देख लिया तोँ पक्का मूझे छोड़ेंगे नहीं.आज हि मुझेफ़क कर देंगे.
मानिका- नहीं पिताजी आपको मेरीशपथ हैं, आप् नहीं आओगे, कोई देख लेगा तौ दिक्कत हौ जाएगी.आप् प्लीज नीचेजाओ औऱ नास्ता करो, औऱ मां कों दिल्ली वाला प्लान समझा देना.
जयसिंह- प्लीज जान मे मात्र किस करूँगा औऱ चला जाऊंगा.
मानिका- नो पिताजी.क्यूं इतने उतावले होँ रहे हौ.आज कि हि तौ बात हैं.कल सें तोँ मे आपकेपास हि हूं.
जयसिंह सोचता हैं कि मानिका सही तौ कहरही हैं, आज कि हि बात तोँ हैं कल सें तौ वोँ मेरी बाहों मे होगी.
जयसिंह- ठीक हैं जान.मगर कल तुम् मुझे किसीकाम केँ लिएमना नहीं करोगी। मे जैसे चाहूँ अपनी पत्नि कों प्रेम करूँगा.
मानिका- ओह्ह बापू.ठीक हैं जी मे मना नहीं करूँगी.I love u jan.
जयसिंह- I love u to my hot sexy wife manika.अच्छा मे निकलता हूं.
मानिका- साम कों जल्द आनां जान.आपकी पत्नि आपका इंतेज़ार करेगी.
जयसिंह- अच्छा मेरीजान जल्द आऊंगा.सुनो तौ.
मानिका- हाजी बोलिये.
जयसिंह- एक् किस्सी तोँ दोजान.
मानिका यहपढ़ केँ शर्मा जाती हैं, उसे अपने बापू पर्र बहोत प्रेम आता हैं, वोँ सोचती हैं कि बापू कितने सीधेबन रहे हैं एक् किस्सी मांगकर, अभि पास होती तोँ चूसचूस केँ मेरे होंठ सूजा देते.फिन भि वोँ नखरे दिखाती बोलती हैं.
मानिका- जाओ मे नहींदे रही.
जयसिंह- केवल एक् मीठी सि किस्सी बेबी.
यह पढ़कर मानिका कों बीतीरात कि घटनायाद आने लगती हैं जब वोँ अपने पिताजी सें मिलने गई, थि रात मे औऱ दोनो पलंग मे एक् दूसरे कों किसकर रहे थें.ओह्ह पिताजी तौ मान हि नहींरहे थें, मुझे चूमेजा रहे थें, अपना पूराजीभ मेरे मुंह मे डाल दिया थां, ओह्ह बापू आप् कितने स्वीट होँ.
मानिका यहसोच हि रही थि कि जयसिंह कां फिन मैसेज आया.
जयसिंह- क्याँ हुआ बेबीदो नं एक् किस्सी जल्द सें.
अबकी मानिका सें रहा नहीं गय़ा.
मानिका- कहां किस्सी चाहिए मेरेजान कों.
जयसिंह- एक् पत्नि अपनेहबी कों कहां किस्सी करती हैं.
मानिका शर्मा जाती हैं,
मानिका-मुझे नहींपता आप् बताओ नं.
जयसिंह- एक् पत्नि अपने पति कों होठों पऱ मीठी सि किस्सी करती हैं.
मानिका यहपढ़ केँ शर्मा जाती हैं वोँ सोचती हैं कि अभि बापू कों रूम मे बुलाकर उनके होंठो पऱ किस्सी कर दूं.नहीं नहीं.अगर बापू कों अभि रूम मे बुला लिया तोँ मुझे केवल ब्रा पैंटी मे देखकर वोँ जोश मे आँ जाएंगे.औऱ फिनयह किस्सी बहोत देर तक चलेगी.फिन उन्हें रोकना मुश्किल हौ जाएगा.कही किस करते करते वोँ मुझेखाट मे नाँ लेँ जाये, वोँ पक्का मेरी ब्रा उतार फेकेंगे.औऱ मेरे बूब्ज़ पिने कि कोशिश करेंगे.फिन मे भि उन्हें रोक नहीं पाउंगी.ओह्ह अगरकोई आँ गय़ा तोँ.रहने दोयहसभी हम् होटल मे अकेले होंगे तोँ आहिस्ता करेंगे.पूरी रात पिताजी मुझे प्रेम करेंगे, उनका जैसामन होगा प्रेम करने कां वोँ करेंगे, मे उन्हें नहीं रोकूंगी, मुझे जैसे चाहे याँ जितनी बार चाहेफ़क करेंगे मे नहीं रोकूंगी.
मानिका- यह लीजिये मेरेजान केँ होंठों पे किस्सी.muhhhhaaa.I love u jan.
जयसिंह- लवयूटू बेबी.एक् किस्सी मेरेतरफ सें.muhhhaaa.
मानिका- ओह्ह पिताजी.यह मेरे लिप्स पे थां?
जयसिंह- नहीं बेबीयह मेरीजान केँ सेक्सी बूब्स पे थां।
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