अजब प्यार कि गजबकथा – New Episode
अजब प्यार कि गजब स्टोरी --1
लेखक-RKS
हिन्दी फ़ॉन्ट बाइमी
डिंपल, ओ डिंपल यहअवी कहां गय़ा हैं आज उसकोकहा थां मैने कि मेरी वर्दी मे प्रेस कर देनामगर मुझेकही दिखाई नहींदे रही हैं, अरेसमझ मे नहींआता कि जब उसको नहीं करना थां तौ जाकर धोबी केँ यहा सें करवा लाता पऱ इस नालयक कों आवारा गर्दि केँ अलावा कोईकम नहीं हैं, किसीदिन मेरेहाथ सें पिट जाएगा औऱ कुछ नहीं,
डिंपल- अरे बापू उसने प्रेस करके आप् कि ड्रेस अलमारी मे रख दि थि यहलो, आप् तौ बेकार मे बेचारे केँ उपर नाराज़ हौ रहे हैं,
अनिल-अरे अपनेइस बेचारे कों समझा कि घूमना फिरना बंदकरे इसबार 12थ कि बोर्ड एग्ज़ॅम हैं अगरफैल हुआ तौ कह देना कि इसघऱ मे आने कि ज़रूरत नहीं हैं,
डिंपल- पिताजी हौ जाएगा पास आप् क्यो चिंता करते होँ
अनिल-अरे क्याँ नाँ चिंता करू बड़ी मुश्किल मे 10थ जैसे तैसेपास हुआ हैं औऱ अब मे कहताहू कि पोलीस भरती केँ लिए थोड़ी दौड़धूप कर लेँ मे एसपी साहेब सें बात करके कोशिश कर लूँगा पऱ इतना नालयक हैं सुभह 10 बजेसो कर उठता हैं अब तूँ हि बताकौन भरती करेगा ऐसे लाड़ साहेब कों, कहता हैं पिताजी मुझे नहीं बनना पोलीस वाला, सबसे गंदीजॉब हैं वो, अब तुँ हि उसेकुछ समझा कमाई तोँ पोलीस वाले कि हि खारहा हैं औऱ पोलीस कि जॉब कों गंदा कहता हैं,
डिंपल- ऑफ हौ बापूअब वो पोलीस मे नहीं जानां चाहता तोँ नां सहीकुछ औऱ कर लेगा
अनिल- क्याँ खाककर लेगा 10 मे थर्ड डिविषन पासहुआ हैं औऱ 12 पास होने केँ कोई ठिकाने नहीं हैं, आजकल 80-80 पर्सेंट वालो कों जॉब नहीं मिलती इस 40 पेसेंट वाले कों कोई चपरासी भि नहीं बनाएगा,
डिंपल- आपकीचाइ ठंडी हौ रही हैं जल्दपी लो
अनिलचाइ पीतेहुए अपनेपैर कों जूते मे डालकर, अच्छा डिंपल मे चलताहू दोदिन बाद इनस्पेक्षन हैं थाने मे जाकर देखता हू डूटी कहां लगी हैं तूँ अवी सें कहकर मेरे बाकी केँ कपड़े प्रेस करवा देना, अच्छा मे जारहा हू औऱ फिन अनिलघऱ सें निकल जाता हैं औऱ डिंपल गाना गुनगुनाते हुएघऱ केँ कम मे लग जाती हैं,
वो अपनाकाम ख़तम करके अपने कॉलेज जाने केँ लिए दरवाजे तक पहुचती हैं तभी मनोजनाम कां लड़का भागता हुआ उसके दरवाजे केँ पासआकर
मनोज- हॅयन्फ्ट हुए डिंपल दिदी, डिंपल दिदी,
डिंपल-घबरा कर क्याँ मनोज इतना घबराया हुआ क्यो हैं,
मनोज- दिदी वोँ अवी किसी लड़के कों साइकल कि सुकून हि सुकून सें बुरीतरह माररहा हैं
डिंपल- घबराकर कहां
मनोज- वोँ सामने वाले चौराहे पर्र
डिंपल मनोज कों संग लेकर तूँ चल मेरेसंग औऱ फिन डिंपल दौड़लगा करवहा पहुचती हैं तब तक वहाकोई नहीं होता हैं,
डिंपल- कहां हैं
मनोज- दिदी अभि इसी स्थान अवीमार रहा थां औ एक् दूसरे लड़के सें पूछते हुए क्यो अभि एक् लड़कायहा किसी कों माररहा थां नाँ,
लड़का-हाँ माररहा थां मगर पोलीस कि वाहन कों देखकर भाग गय़ा औऱ जौ मारखा रहा थां वो भि उठकरभाग गय़ा
उसकीबात सुनकर डिंपल अपना माथा पकड़ते हुएहे ईश्वर क्याँ करूइस लड़के कां, कही पिताजी कों पतालगा तौ आजअवी कि खेर नहीं हैं,
डिंपल वापसघऱ आकर अपने आप् सें बाते करती हुई, कितनी देर होँ रही हैं अभि तक खानां भि नहींबन पाया औऱ फिनआज 11:30 पऱ कॉलेज मे प्रॅक्टिकल भि हैं औऱ उपर सें इसअवी कां कोई ठिकाना नहीं विद्यालय कहकर जाता हैं औऱ फिनकही नां कही लड़ाई झगड़ा करताहुआ नज़रआता हैं, अगरये इससाल 12 मे फैलहुआ तौ बापू तौ अवश्य इसेघऱ सें निकाल कर हि मानेगे, अभि कुछदेर मे हि स्वीटी भि आती हि होगी, चलो आजदाल चावलबना कर हि अवी केँ लिएरख देतीहू पिताजी कां तोँ कोई ठिकाना हि नहीं हैं वो कब आएगे औऱ फिन डिंपल जल्द सें सभीकाम निपटा कर जैसे हि अपने कपड़े चेंज करने केँ लिएघऱ कां गेट लगाने जाती हैं उसे सामने सें अपनी स्कूटी मे स्वीटी आतेहुए दिखाई देती हैं,
स्वीटी- वाहन खड़ी करती हुईँ ओ मेडम अभि तक तुम्हारा मेकप हि होँ रहा थां क्याँ आज कॉलेज जाने कां इरादा नहीं हैं याँ फिनआज एमसी मे होँ, रोज केँ रोजलेट आख़िर कब तक तेरे चक्कर मे मुझे भि लेट होना पड़ेगा,
डिंपल- मुस्कुराते हुएबस दो मिनिट स्वीटी तूँ बैठ मे अभि कपड़े बदलकर आतीहू औऱ स्वीटी वहीचेर पऱ बैठ जाती हैं, डिंपल जल्द सें अपने कपड़े चेंज करने केँ बाद बाहर् आती हैं औऱ अपनाबॅग उठाते हुएचल स्वीटी
स्वीटी- मुस्कुरा कर क्याँ बात हैं आज तौ मेडम जीन्स औऱ टीशर्त फसाकर जारही हैं अगर किसी लोंडे नें तुम्हारी ये गदराई जवानी औऱ भारी चूतादो कों दबा दिया तौ फिन मुझसे मत कहना
डिंपल-मुस्कुराते हुए, क्यो तुँ गदराई नहीं हैं, तेरे भि चूतड़ क्याँ कम फैले औऱ उठेहुए हैं औऱ उपर सें जद्दि कि साइज़ कि तेरीये स्कर्ट ज़रा स्वयं कों देखआधी नंगी तौ वैसे हि लगरही हैं औऱ उस पऱ तेरी मोटी-मोटी जंघे पूरी नज़र आँ रही हैं, लड़के मुझे नहीं तुझेही पकड़ लें तौ फिन मुझसे मत कहना,
अजब प्यार कि गजबकथा – New Episode
डिंपल-चिंता मतकर तेरी मुराद भि पूरी हौ जाएगी जब तुँ फस्ना चाहती हैं तोँ तुम कोकोई नहींरोक सकता
स्वीटी- मेरीजान कभी-कभी उल्टा होँ जाता हैं जौ फस्ना चाहती हैं उसेकोई नहीं फसाता औऱ जौ नहीं फस्ना चाहती हैं उसे अवश्य कोई नाँ कोईफसा लेता हैं, कहीऐसा नाँ होँ कि मुझसे पहले तुम्हे हि कोईफसा लेँ
डिंपल- अरे डिंपल कों फसाने वाला अभि तक कोई पेदा नहींहुआ हैं
स्वीटी- अरे मेरीजान वो पेदा भि हौ गय़ा होगा औऱ तुम्हारी तरफफसा भि लेगा, याँ तोँ वो अभि तक तुझसे मिला नहीं होगा याँ फिनअगर वो तुझसे मिल लिया होगा तोँ तेरी गदराई जवानी पर्र उसकी नज़र नहीं पड़ी होगी
डिंपल- चलठीक हैं देखते हैं तुँ भि यही हैं औऱ मे भि सभीपता चल जाएगा कि कौन फस्ता हैं औऱ कौन नहीं
स्वीटी- अच्छा एक् बातबता कभी तुँ मूठ मारती हैं कि नहीं
डिंपल-मुस्कुराते हुए स्वीटी अबबंद भि कर अपनी बकवास
स्वीटी- अरेबता नां मुझसे क्यो शर्मा रही हैं
डिंपल- मुस्कुराते हुए नहीं मैनेऐसा कामकभी नहीं किया,
स्वीटी- अरेकुछ तौ करती होगीजब तेरामन करता होगा
डिंपल- मुस्कुराते हुएबस ऐसे हि थोडा बहोत अपनेहाथ सें सहला लेतीहू
स्वीटी- दोस्त तूँ तौ गजब हैं मे तौ जब 10 मे थि तब सें हि अपने भैया औऱ भाभी कि चुदाई देख चुकी थि औऱ तब सें कईबार अपनी बुर मे नां जाने क्याँ-क्याँ ट्राइ कर चुकीहू सचजब आख़िरी मे निकलता हैं नां तौ बहोत मजाआता हैं पता नहींजब लड़को कां मोटा लॅंड घुसता होगा तोँ कितना मजाआता होगा, मेरेपास तोँ कई सारी सेक्सी पुस्तक भि हैं अगर तुझेही चाहिए तोँ दे सकतीहू
डिंपल- अपनेपास हि रख अपनी पुस्तक मुझे नहीं
देख्ना वैसे भि मेरेघऱ मे मेरा भइया औऱ पिताजी रहते हैं कही किसी नें तेरी गंदी किताबो कों देख लिया तोँ मुझेघऱ सें हि निकल देंगे
स्वीटी- दोस्त तुँ डरती बहोत हैं, अच्छा एक् कामकर कंप्यूटर हि खरीद लें उसमे भि नेटचला कर तूँ मजा लें सकती हैं
डिंपल- देखा जाएगा अभि तोँ मुझे पढ़ने सें हि फ़ुर्सत नहीं मिलती हैं उपर सें पूरेघऱ कां काम भि मुझे अकेले हि करना पड़ता हैं, इनसभी केँ बादसमय हि कहां मिलता हैं इनसभी बातो केँ लिए
स्वीटी- अच्छा तेरेघऱ मे तोँ दो हि बेडरूम हैं तुँ किसके संग सोती हैं
डिंपल- मे औऱ अवी एक् हि रूम मे सोते हैं मगर तूँ येसभी क्योपूछ रही हैं
स्वीटी- मतलब तुम कोअगर मूठ मारना हौ तोँ तुम्हे बाथरूम मे हि जानां पड़ेगा तुँ तोँ अपनेबेड पर्र पूरी नंगी होकर भि नहींसो सकती हैं
डिंपल- क्यो तूँ अपनेबेड पर्र रात कों नंगी होकर सोती हैं क्याँ
स्वीटी- हाँ मे तौ कब सें रोजरात कों पूरी नंगी होकर हि सोतीहू जब तक मे अपनी बुर औऱ दूध सें पूरी नंगी होकरखेल नहीं लेतीहू मुझे तौ नींद हि नहींआती हैं
डिंपल- औऱ तुँ अपने भैया औऱ भाभी केँ रूम मे भि झाँककर देखती हैं नाँ
स्वीटी- हाँ मुझेउन दोनो कों नंगे होकर चुदाई करते देखने मे बहोत मजाआता हैं
डिंपल- तुझेही लज्जा आनां चाहिए ऐसी हरकते करतेहुए
स्वीटी- अरे इसमे लज्जा कि क्याँ बात हैं, अगर तूँ किसी कों चोद्ते हुए देखती तौ ऐसीबात नहीं करती तूँ नहीं जानती कितना मजाआता हैं जबकोई किसी कों चोद्ता हैं औऱ हम् अपनी बुर सहलाते हुए उन्हे चोद्ते देखते हैं
डिंपल- मतलब तूँ अपने भैया कां लन्ड देखती हैं औऱ उत्तेजित होती हैं
स्वीटी- अरे तोँ इसमे ग़लत क्याँ हैं मुझे अच्छा लगता हैं तोँ मे देख लेतीहू
डिंपल- फिन तौ तुम को अपने भैया सें भि चुदने कां मन करता होगा
स्वीटी- देख दोस्त मैनेऐसा कभी सोचा तौ नहीं पऱ हाँये अवश्य सच हैं कि जब मे मूठ मारती हू तौ कभी-कभी मुझे अपने भैया कां मोटा लन्ड यादआने लगता हैं औऱ ऐसा लगने लगता हैं जैसे मेरे भैया हि मुझे नंगी करकेचोद रहे हौ,
डिंपल- छि तूँ कितनी गंदी हैं स्वीटी,
स्वीटी- अरेअब इसमे गंदीबात क्याँ हैं क्याँ किसी कां लन्ड देख्ना गंदीबात हैं
डिंपल- किसी कां लन्ड देख्ना गंदीबात नहीं हैं पऱ अपने बड़े भइया केँ लन्ड कों सोचकर अपनी कल्पना मे चुदना गंदीबात हैं
स्वीटी- देख डिंपल हर इंसान कि सोच टाइम केँ संगबदल जाती हैं पहले मे भि अपने भैया केँ बारे मे कभीऐसा नहीं सोचती थि मगर एक् दिनजब ग़लती सें मैने उनका मोटा लन्ड देख लिया तौ आहिस्ता मेरीसोच भि चेंज होँ गई औऱ अभि तेरीऐसा लगता हैं कि ये ग़लत हैं होँ सकता हैं कभी तूँ भि अपने भइया कां लन्ड देख लें औऱ तुम्हारी तरफ उसके लन्ड सें चुदने कां मन होनेलगे
डिंपल- मे तेरी जैसी चुड़क्कड़ नहींहू कि अपने भइया केँ लन्ड सें हि चुदजाउ
स्वीटी- सभी वक़्त कि बाते हैं मेरीजान समयकब क्याँ करवादे कोई नहीं जानता
डिम्पलाए- चलअबचले यहा सें क्लास कां वक्त हौ रहा हैं औऱ फिन दोनोउठ कर क्लास मे चली जाती हैं,
अवी- औऱ क्याँ रघु भइया क्याँ हाल हैं
रघु-अरे आओअवी भैया क्याँ बात हैं आजकल तौ आपको हमारी याद हि नहींआती बहोत दिनो मे हमारी दुकान पऱ आए होँ
अवी-अरे ऐसीबात नहीं हैं रघु भइया थोडा बिज़ी थां फिनआज सोचा कि चल केँ रघु भइया केँ यहापान हि खा लियाजाए
रघु- तोँ फिन आँ जाओयहा काउंटर कों थोडा सरकाकर बैठो मे अभि आपको बढ़िया बनारसी पत्ता बनाकर खिलाता हू
अवी- अरेरघु भइया वोँ सामने वाली भाभी नें आज अपनीशॉप नहीं खोलीकही गई हैं क्याँ
रघु- मुस्कुराते हुए, आप् भि नाँ अवी भैया जब तक उसके मतकते चूतादो कों देख नहीं लेते आपकादिल नहीं लगता हैं,
अरेउधर देखो क्याँ मालजा रहा हैं क्याँ गदराई गंद हैं साली कि
अवी-अरे रघु भइया बहोत हि मोटीगंद हैं उसकी तौ क्याँ मस्त महिला हैं कितने साल कि होगी
रघु- अरेअवी हैया होगीकम सें कम 35-40 कि
अवी- दोस्त रघु भइया अपनेयहा कि औरतो केँ चूतड़ गजब भारी-भारी होँ गये हैं बहोत हि मजादे अगर चोदने कों मिल
जाए तोँ
रघु- अपने लन्ड कों पेंट केँ उपर सें मसलता हुआ, मुस्कुरकर अवी भैया हमे आपकीयही बात तोँ सबसे अच्छी लगती हैं
आप् 5 मिनिट केँ लिए भि हमारी दुकान पऱ आते हौ तोँ हमारा लन्ड खड़ाकिए बिना नहीं मानते हौ
अवी-अरे रघु भइया तुम्हारी दुकान हैं हि ऐसी स्थान पऱ कि अगर मे यहादिन भर बैठारहू तोँ यहा सें इतने गदराए हुए
माल निकलते हैं क मेरा लन्ड दिनभर खड़ारहे पता नहीं तुम् केसे चुपचाप पान लगाते बैठे रहते हौ
रघु-लो पानलो भैया हमारी तोँ आदतपड़ गई हैं, कभी-कभी तौ इतने गदराए औऱ भारी चूतादो वाली औरतेदिख जाती हैं
कि लगता हैं साला पेंट मे हि पानी निकल जाएगा,
रघु- अच्छा अवी भैया मैने सुनाआज तुमने फिन किसी कि धुनाई करदी
अवी- हा दोस्त बहन्चोद तीनचार दिन सें मेरी दिदी कों लाइन मारने कि कोशिश कररहा थां अब नहींमा चुदायेगा अपनीजम कर बजाया हैं साले कों आज
रघु- मगरअवी भैया तुम्हे केसेपता चला कि वो डिंपल दिदी केँ चक्कर मे थां
अवी-अरे मे दिदी केँ कॉलेज मे नहीं पढ़ता तोँ क्याँ हुआ मेरे खबरी उसके कॉलेज मे भि मौजूद हैं मुझेउस कॉलेज कि
हरखबर रहती हैं कि कब क्याँ हौ रहा हैं औऱ फिनबस इसीसाल कि बात हैं रघु भइया अगलेसाल सें तौ मे स्वयं उस कॉलेज मे
चला जाउन्गा फिन देख्ना तुम् केसे मैया चोद्ता हूइन बहन्चोदो कि
रघु- औऱ थानेदार साहेब कि ड्यूटी कहां लगी हैं आजकल
अवी- अरे बापू कां क्याँ हैं उनके संबंध तौ सीधे एसपी सें हैं वो जब चाहेजहा चाहे ट्रान्स्फर भि लेँ सकते हैं याँ ड्यूटी भि
बदल सकते हैं वैसे अभि तोँ वो हमारे थाना क्षेत्रा केँ हि इंचार्ग हैं
अच्छा रघु भइयापान केँ पैसे खाते मे लिख लेनाअब मे चलताहू दिदी वेटकर रही होगी,
अजब प्यार कि गजबकथा – New Episode
गतान्क सें आगे.
रघु- अरेअवी भैया आप् बार-बार पैसो कां कहकरहमे शर्मिंदा नां कियाकरो, आपसे रुपया माँगता कौन हैं
अवी- नहींरघु भइया दोस्ती अपनी स्थान औऱ धंधा अपनी स्थान होना चाहिए, ठीक हैं अब मे चलताहू
रघु- अच्छा अवी भैया फिन आनां
अवी- अपनेघऱ कि ओर पेदल-पेदल चल देता हैं औऱ घऱ पहुचकर
डिंपल- आँ गये लाड़ साहेब, पूरादिन आवारा गार्दी केँ अलावा भि कुछकाम रहता हैं आपकेपास
अवी- मुस्कुराता हुआ, कहां दिदी मे तोँ ट्यूशन गय़ा थां
डिंपल- अपने चेहरे पर्र क्रोध दिखाते हुए, झूठ मतबोल, तुँ क्याँ मुझे पागल समझता हैं, मे सभी जानती हूदिन भर
यहा वहा फिरने केँ अलावा औऱ कुछ नहीं करता हैं औऱ उपर सें विद्यालय सें भि गायब रहता हैं, औऱ आज किसके संग मारपीट
कररहा थां, हैं बोलता क्यो नहीं
अवी- अरे दिदी वो तोँ बसऐसे हि छोटी मोटीबात थि तुम् तोँ बेकार परेशान होँ रही होँ
डिंपल- मुझे क्याँ करना हैं, जब पिताजी पूछेगे तब बताना उनको कि छोटीबात थि याँ बड़ी, वैसे भि वो तुझ पर्र सुभह सें
हि भड़करहे थें
अवी- क्योअब मैनेऐसा क्याँ कर दिया
डिंपल- देखअवी अब बहोत मौज मस्ती करली तूने डिसेंबर भि ख़तम होने वाला हैं सिर्फ़ दो महीने हैं तेरी एग्ज़ॅम केँ
थोडा पढ़ लेँ तोँ कम सें कमपास तौ होँ जाएगा, नहीं तोँ समझ लें अगरफैल हुआ तौ बापू तुम्हें घऱ सें हि भगा देंगे
अवी- डिंपल कां हाथ पकड़ते हुएठीक हैं अगर बापू भागाते हैं तोँ मे चला जाउन्गा पर्र तुम्हे भि मेरेसंग चलना
होगा, क्यो कि मे पिताजी केँ बगैर तोँ रह लूँगा पर्र तुम्हारे बिना केसेरह पाउन्गा
डिंपल- मुस्कुराते हुए उसकेगाल खींचकर चलअब ज्यादा बाते नाँ बनाजा जाकरहाथ मूहधो कर आँ मे तेरेलिए खानां
लगाती हू, अवी हाथमूह धोकर आँ जाता हैं औऱ डिंपल सोफे केँ सामने नीचे आसानलगा करअवी कि थालीरख देती हैं औऱ
स्वयं सोफे पऱ टिककर अपने दोनोपैर मोड़कर सोफे पर्र रख लेती हैं औऱ अवीआकर उसके सामने आसान पर्र बैठकर खानां
शुरुआत करता हैं फिन खातेहुए डिंपल कि ओर देखता हैं औऱ अचानक उसकी नज़र डिम्पल कि सलवार पर्र पड़ती हैं जौ उसकी
फूली हुइ बुर केँ पास सें फटाहुआ थां औऱ उसकी सफेदकलर कि पेंटी उसकी बुर कों फुलाए हुएसाफ नज़र आँ रही थि,
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