दहेज़ - Complete Kahani All Parts
हेलो दोस्तों मैयहा पे नयीहू, मै हमेशा हि साइलेंट रीडररही हूं.
मैकोई राइटर नहि हूमगर xforum पे हि "मेरी पत्नि अनुश्री " किस्सा पढ़ केँ एक् जज्बा जग गय़ा.
जिसे andypndy जी नें लिखा हैं.
उन्ही कि सलाह औऱ मार्गदर्शन मे एक् कथा बयान करना चाहती हू.
"दहेज़"
हमारे समाज कि सबसेबड़ी बुराई.
यह किस्सा "बाप बेटी" केँ अनोखे सम्बन्ध सें परिचित करवाएगी। एक् पिता केँ लिए बेटी कि कीमत क्याँ होती हैं यहकथा वही बताएगी.
यहा जौ लड़की शादीसुदा हैं वोँ यहबात अच्छे सें समझती हैं
इस स्टोरी केँ माध्यम सें इस "दहेज़ " कां दर्द आप् सब केँ सामने प्रस्तुत करना चाहूंगी.
शुक्रिया
तौ चलिए शुरुआत करते हैं.
मेरासंग दे, हौसला बढ़ाये।
बिल्कुल यदि भइया बेहन कि विवाह आपस मे होती तोँ सोचो दोनो कितना खुशी रहेंगे औऱ प्रेम भि अटूट रहेगा
दहेज़ – New Episode
भाग -1
"अरे बेटा जल्द सें सजधजकर हौ लड़के वालेकभी भि आते होंगे देखने "
देहात कामगंज मे एक् छोटा सां टुटा फूटाघऱ जहाँ एक् बाप नरेश काफ़ी तकलीफ़ मे पुरेघऱ मे चहल कदमीकर रहा थां.
देहात कामगंज
अब देहात कां नाम कामगंज क्यूं पड़ायह तोँ कोई नहि जानता
मगरयहा केँ लोग थें बड़े सीधे साधे, हर रिश्तो कि कद्र जानते थें.
इसी देहात केँ बीचघऱ थां किसान नरेश कां, जिसके पास जमीन ज़्यादा तोँ नहि मगरकाम भर कि इतनी ज़मीन थि कि गुजारा चला लेता थां.
नरेशचहल कदमी करता परेशान थां.
करता भि क्यूं नाँ आज उसकी एकलौती बेटी कों लड़के वाले जोँ देखने आँ रहे थें
नरेश कि एकलौती बेटी नमिता, आजउसे हि लड़की वाले देखने आँ रहे थें.
"क्याँ पिताजी आप् भि मुझे नहि करनी विवाह वादी, मै चली गई तौ कौन ध्यान रखेगा आपका "
नमिता जिसे उसके बाप नें खूब पढ़ाया लिखाया, अपना पेटकाट केँ उसे खिलाया
औऱ यह मेहनत जाया भि नां गई देहात केँ शुद्ध खाने कां असर नेहा केँ शरीर पे दिखता थां.
सिर्फ 21 साल कि उम्र मे हि उसके मम्मों पूरीतरह फूल केँ बहार कों निकाल आये थें, पतली लहराती कमर उसके शरीर कि शोभा थि उस पे भि मालिक नें ऐसे नितम्भ दिये कि जौ देखभर लें तोँ अपने लिंग सें पानी फेंकदे.
नमिता केँ नितम्भ हि उसका सबसे अनमोल खजाना थां, एक् दमगोल मटोल बहार कों निकले हुएकसे हुए नितम्भ
कभी सलवार पहन केँ बहार निकलती तोँ देखने वालो कि जानहलक मे रुक जातीइस तरह गादराया थां उसका शरीर
मगर अफ़सोस बिन मां कि बच्ची थि.नरेश कि पत्नि कों गुजरे 10 साल होँ गए थें.
नरेश अपनी पत्नि केँ जाने केँ बाद समाज सें विमुख होँ चला उसने पूरा जिंदगी मात्र औऱ केवल अपनी बेटी केँ लालन पालन मे हि लगा दिया.
उसे खूब पढ़ाया, लिखाया आज पुरे कस्बे मे केवल वोँ हि एकलौती लड़की थि जोँ इंग्लिश मे MA कि हुईँ थि.
"अरे नरेशकब तक रखेगा इसेघऱ मे देख कैसी घोड़ी होँ गई हैं, पूरा देहात इसके हि पीछेमरा जाता हैं, कही जवानी मे कुछगलत कर गई तौ " नरेश कि बेहन नें उसे बहोत समझाया.
पहले तौ बातसमझ नाँ आई नरेश कों मगरयह समाज जीने कहां देता हैं,
नरेश चाहता थां कि नमिता पहलेजॉब लग जाये परन्तु समाज औऱ रिश्तेदारों केँ दबाव मे उसे नमिता कि विवाह करनीपड़ रही थि.
"पिताजी मुझे नहि करनी विवाह " नमिता नें भोलेपन सें नरेश सें जिद्द कि.
"अरे मेरी बच्ची विवाह तोँ करनी हि पड़ती हैं एक् नाँ एक् दिन " नरेश अपनी भावनाओं कों काबू कियेबोल रहा थां.
नां जानेकब रो पड़ता
" मै भि चली गई तोँ आप् अकेले होँ जायेंगे, आपका ध्यान कौन रखेगा पिताजी, ? मै नहि जाउंगी "
नमिता नें जैसे फैसला सुना दिया
"तुझेही मेरीशपथ मेरी लाडो, एक् बाप कां फर्ज़ होता हैं वोँ अपनी बेटी कि विवाह करे, कन्यादान करे " नरेश कि आँखों सें आँसूबह निकले
वोँ भि नहि चाहता थां कि उसकी बेटी उसेछोड़ केँ कही जाये, मगर यह समाजयह रिश्ते, यह परंपरा उसे धिक्कार रही थि.
नरेश मजबूर थां, एक् बाप मजबूर थां.
नमिता कुछ नहि बोलीं बस पिताजी केँ गलेलग गई जोर सें उसकी आँखों मे आँसू थें बस.
बाप बेटी कां नाता भि कैसा होता हैं शायद स्वयं ईश्वर नां समझपाए कभी.
"मालती ओ मालती.नमिता कों सजधजकर करो " नरेश अपनी बेहन कों बोलता हुआ बहार निकाल गय़ा सर झुकाये.
आजउसे इतने सालोबाद अपनी पत्नि कि कमीखल रही थि, उसे अभि सें हि अकेलापन काटने कों दौड़रहा थां.
"काश कौशल्या होती तौ इतनादुख न् होता मुझे " नरेश बहार मेहमानों केँ स्वागत कि तैयारी मे व्यस्त होँ चला.
नरेश आँखों मे बेटी केँ जाने कां गम औऱ उसकी विवाह केँ दहेज़ कि चिंता मे डूबाजा रहा थां.
केसे करेगा वोँ यह सभी.मगर करना तौ होगा आखिर एकलौती बेटी हैं मेरी.
औकात सें ज़्यादा दूंगा मगर अपनी बेटी कि विवाह अच्छे घऱ मे करूँगा.
नरेश निर्णय लें चूका थां.
देहात केँ कुछ प्रतिष्ठ लोग नरेश केँ घऱ पधार चुके थें.
लड़को वाले किसी भि वक़्त आँ सकते थें.
कर्मशः
किस्सा कां अभि केवल एक् हि एपसोड आया हैं, मगर बहोत हि शानदार तरीके सें लिखा गय़ा हैं। फोरम कि अच्छी कहानियों मे शामिल होगीयह.
दहेज़ – New Episode
kahani के ganit से too lagta h dahej mein ager naresh ko कई beta hotha too mazaa aata.
1। Age jaker naresh garib hone के karan ldki Wale naresh के bete ko gulam ya nokar के hissab से mang lete।
2। Our behna की khusii के liye vah khusii khusii ban jata
3.फिर age jaker उसका fayda as dahej ladke Wale uthate
दहेज़ - Next part miss mat karna
Thank you apne samaja halanki mene koy baimaini nahee kee jb muze laga me vakai nahinlikh sakti too mene maafi mangna hi thik samaja. me reader hi achi ho
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