ज़िंदगी केँ रंग 🌈(हिन्दी औऱ HINGLISH मे) - Real Story Continue Part 1
नमस्ते दोस्तों! आप् लोगमंच पऱ मेरी कहानियों सें तौ वाकिफ हें हि, मगरआज मे आपको अपने अतीत केँ एक् बेहदखास औऱ अनछुए पन्ने सें रूबरू कराने जारहा हूं।
दोस्तों, सफर कां मजातब औऱ बढ़ जाता हैं जबकोई पुरानां हमसफ़र बरसों बाद अचानक मिलजाए। आज मे आपकेसंग एक् ऐसी हि एक् याद साझा करनेजा रहा हूं।
लगभग१६ साल पहले, जब इस महफ़िल कों हम् Xossip केँ नाम सें जानते थें, तब मैंने यहा एक् गुजराती किस्सा कि शुरुआत कि थि। आज अचानक उस किस्सा केँ पन्नों कों खंगालते हुए मुझे महसूस हुआ कि उसमें कुछऐसा छिपा हैं, जोँ आज केँ टाइम मे भि आपको भीतर तक झकझोर सकता हैं। इतने सालों मे बहोत कुछबदल गय़ा, दुनिया बदल गई, हमारा नज़रिया बदल गय़ा, मगरउन पन्नों मे कैद जज़्बात आज भि उतने हि ताज़ा हें।
आजउस पुरानी डायरी कि धूल झाड़कर, मे वो किस्सा एक् बारफिन आप् सबके सामने पेशकर रहा हूं। इसबार हिन्दी मे। आखिर इतने सालों बादइसे दोबारा पोस्ट करने कि वजह क्याँ हैं? वजहये हैं कि कुछ कहानियाँ समय कि मोहताज नहि होतीं। वेबससही समय पर्र दोबारा पढ़े जाने कां इंतजार करती हें।
आखिरऐसा क्याँ थां उस स्टोरी मे जिसने मुझेडेढ़ दशकबाद उसे दोबारा यहा पोस्ट करने पऱ मजबूर कर दिया?कुछ रहस्य ऐसे होते हें जौ पुरानी यादों कि तरह वक़्त केँ संग औऱ भि गहरे होँ जाते हें।
तौ आइए, मेरेसंग एक् बारफिन उसदौर मे चलिए। अपनी कुर्सियों कि पेटी बाँध लीजिए औऱ सजधजकर होँ जाइए एक् ऐसेसफर केँ लिए, जिसकी शुरुआत तौ अतीत मे हुई थि, मगर जिसका रोमांच आपकोआज भि अगले पन्ने कां इंतजार करने पऱ मजबूर कर देगा। देखते हें कि १६साल प्राचीन वोँ तिलिस्म आज आपकोकिस नए एहसास सें रूबरू कराता हैं.! क्याँ आप् सजधजकर हें पुरानी शराब कां वोँ पुरानां नशा एक् बारफिन महसूस करने केँ लिए?
ज़िंदगी केँ रंग 🌈(हिन्दी औऱ HINGLISH मे) – New Episode
भाग - १
भरूचशहर सें २५ किलोमीटर दूर हाइवै पर्र दुधाई गाँव केँ बड़े सें जमीन केँ टुकड़े पऱ डॉक्टर अविनाश औऱ डॉक्टर अवनी कां “अंकुर फर्टिलिटी सेंटर” स्थित थां। हररोज कि तरहआज भि मरीजों कि चहलपहल सें भरा थां। अविनाश औऱ अवनी दोनों मेडिकल मे संग हि अभ्यास करते थें औऱ डाक्टरी केँ संग उन्हों नें प्रेमशास्त्र कों भि भलीभांति सिख लिया थां। अविनाश गायनेक थां औऱ अवनी रेडियोलॉजिस्ट थि। डॉ अविनाश अविनाश ४० कि उम्र केँ गोरे चिट्टे गठीले जिस्म केँ होने केँ कारण अपनीऔरत मरीजों मे बहुत प्रिय थें।
डॉ अवनी३९ केँ आसपास कि उम्र कि एक् बड़ी हि आकर्षक औरत थि। हमेशा लेबकोट मे छुपे रहते उनके जिस्म केँ मदहोश उभारों केँ कायल थें उनके पति अविनाश। उम्र कि कोई ज़्यादा असर दोनों कों हि न् छुपाई क्योंकि अपने स्वास्थ्य कां बड़ा हि ध्यान रखते थें।
कुछ टाइम तक बरोड़ा केँ अलगअलग अस्पतालों मे अपनी सेवा देने केँ बाद अविनाश औऱ अवनी नें स्वयं कां फर्टिलिटी सेंटर बनाने कां सोच। अवनी कों शहर सें दूर प्राकृतिक माहोल मे अपनानय
