WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
friends mein एक story shuru karne jaa raha hoon। joo एक ladke की love kahani पर aadharit h, ye tabki story h जब wo apne shuruati jivan में sangharsh krr raha thaa। use abi duniadari की utni samajh bi नहीं thi। us vaqt use apni mausi के यहाँ rehna pad गया। वहाँ use apni mausi की nanad की beti mili jiske saath उसका ishq sambandh shuru हुआ और दिन ba दिन dono एक dusre के kese karib aaye और phir ant में क्या हुआ ye sab ap iss story में padhenge। muze poori umid h के ye story ap logon ko पसंद ayegi.
WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
वोँ सुनहरे दिन (मेरी मौसी कि ननदी कि बेटी कि स्टोरी)
क्याँ एक् ऐसे इंसान केँ लिए महीनों तक घऱ सें दूर रहना आसान हैं, जौ सीए कि तैयारी कररहा हैं? उत्तर "बिगनो" हैं, संभव नहि हैं। मगर कभी-कभी हम् अपने माँ-बाप कों अपनी समस्याओं केँ बारे मे नहि समझा पाते। जब हम् उनका पालन नहि करते, तौ वेइसे इसतरह लेते हें कि हम् उनकीबात नहि मानरहे। मेरी मासी हरियाणा केँ एक् छोटे सें शहर मे रहती हें। मासी नें गर्भ धारण करने कि बहोत कोशिश कि मगर वो मम्मी नहि बनसकी। इसलिये उनकेघऱ मे सिर्फ मासी औऱ मौसा थें। मसाड कां एक् जनरल स्टोर थां जौ शोरूम केँ रूप मे थां औऱ उसकेपास करीब 5-6 सेल्समैन औऱ एक् चपरासी औऱ एक् असिस्टेंट थां।
एक् बार मां कों मासी कां मोबाइल आया, जिन्होंने उन्हें बताया कि मेरे मौसाजी कों दिल कां दौरा पड़ा हैं। ये हमारे लिए बहोत हि चौंकाने वालीखबर थि क्योंकि मासी केँ अलावा किसी कि देखरेख करने केँ लिए नहि थां। इसलिये मे औऱ मां उसशहर मे चलेगए जहाँ पऱ मौसाजी कों भर्ती कराया गय़ा थां। मैंने अपना फर्ज निभाया औऱ मासी कों राहत दि। मैंने डॉक्टरों केँ संग चर्चा कि जिन्होंने मुझे बताया कि मौसाजी कों कम सें कम एक् सप्ताह तक वहां रहने कि आवश्यकता थि। मैंने उनसेउन चीजों कों करने केँ लिएकहा, जोँ मौसाजी केँ स्वास्थ्य केँ लिए आवश्यक हें। मेरे भइया औऱ बापू भि आँ गए। हम् वहा बैठे थें औऱ उसके टेस्ट कि इंतजार कररहे थें जब मासी नें मम्मी केँ संग बातचीत शुरुआत करतेहुए कहा कि मणि (माणिक) कों मेरेघऱ पर्र रहने कि आवश्यकता हैं औऱ वो शोरूम कि देखभाल करने वाला हैं, क्योंकि वो अभि कोईकाम तोँ नहि करता हैं औऱ घऱ सें उसकी पढ़ाई चलती हैं तोँ वोँ हमारे घऱरहकर भि पढाई जारीरख सकता हैं। ये मेरेलिए मेरे मौसाजी केँ दिल कां दौरा पड़ने सें ज्यादा चौंकाने वाला थां, क्योंकि मासी नें सोचा थां कि मे बेरोजगार थां, क्योंकि वो समझ नहि पारही थि कि मे घऱ पर्र क्याँ कररहा थां। मे मम्मी कों एक् संकेत देता हूं कि उन्हें मासी केँ प्रस्ताव कों स्वीकार नहि करना चाहिए।
मे माँ भइया औऱ पिताजी अब कैंटीन मे थें औऱ मां पिताजी मुझेशो रूम पऱ बैठने केँ लिए मासी केँ घऱ पऱ रुकने केँ लिएमना रहे थें। मैंने उन्हें समझाने कि कोशिश कि कि मे अपनी पढ़ाई औऱ शोरूम कां काम एक् संग नहि कर सकता। मगर वे मेरीबात सुनने कों रेडी नहि थें। अंत मे, जब मे रेडी नहि होँ रहा थां, तौ मम्मी नें अपनी ट्रम्प कार्ड खेला, क्याँ होताअगर वो तुम्हारे बापू होते, तौ क्याँ तुम् तब भि अपनी जिम्मेदारी सें भागते ? मैंने आत्मसमर्पण कर दिया, क्योंकि मे उन्हें समझने मे असमर्थ थां। मे घऱ वापस गय़ा, अपना सामान पैक किया औऱ अपरिभाषित अवधि केँ लिए रहने केँ लिए मासी केँ घऱ गय़ा। अब मुझे स्वयं कों समझाने कि जरूरत थि कि मुझेइस स्थिति सें मुकाबला करना हैं औऱ मुझेइस माहौल मे हि अपनी पढ़ाई करनी हैं।
मेरी मां भि मेरेसंग थीं। वो मासी, मौसा केँ आने तक मेरेसंग रहने वाली थि। मैंने देररात तक पढ़ाई कि, मगर जल्द उठना पड़ा क्योंकि मुझेशो रूम जानां थां। मे सजधजकर होकरशो रूम मे गय़ा। शोरूम केँ लोग मुझे अच्छी तरह सें जानते थें मगर एक् लड़की थि जौ मुझे पहचानती नहि थि। अन्य लोगों नें उसे मेरा परिचय दिया औऱ उसने मुझेगुड मॉर्निंग बोला। उनसब नें मुझसे मौसाजी कां हालचाल पूछा, मैंने उन्हें सभीकुछ बताया। उन्होंने ईश्वर सें उनके जल्द स्वस्थ होने कि प्रार्थना कि औऱ सब नें अपनाकाम शुरुआत कर दिया।
मे लञ्च केँ टाइमघऱ गय़ा थां। मे दोपहर का खाना करने केँ लिए कुर्सी पर्र बैठ गय़ा। जब मैंने अपनालंच खाया तौ सर्व करने वाला शख्स मेरी मम्मी नहि थि। मैंने अपना चेहरा उठाया कि वो कौन हैं। ओह, वो मेरी मासी कि ननदी कि बेटी, नितिका थि। हम् उसे नीती कहते थें। हमारे बचपन केँ दौरान जब भि हम् अपनी छुट्टियों केँ दौरान मासी केँ घऱ जाते थें, अधिकतर वक़्त वो भि वहीं होती थि। मैंने उसे अंतिम बार पांचसाल पहले देखा थां। तब वो एक् छोटी लड़की थि मगरअब वो बड़ी होँ गई थि। जब मे उसके चेहरे कि ओर चिपक सां गय़ा, तौ वो शरमा गई। उसने मुझे नमस्कार किया औऱ मैंने भि उसे बदले मे नमस्कार बोला!
मम्मी नें मुझे बताया कि वो भि कुछ वक़्त केँ लिएवहा रहने वाली थि। इसने मुझेकुछ राहत दि, क्योंकि मे पहलीनजर मे भि उसकीओर आकर्षित होँ गय़ा थां। मगर मैंने देखा कि उसनेऐसा नहि देखा जैसे मैंने उसे देखा थां। मैंने स्वयं सें कहा कि मे फिन सें ऐसा नं देखूं।
WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
Second part
नीती एक् खूबसूरत सुडौल लड़की थि
अन्य पतली लड़कियों केँ विपरीत, नीती एक् खूबसूरत व सुडौल बदन कि मालिक थि। बहोत कम उम्र मे वो बड़ी हौ गई लगती थि। वो एक् अद्भुत हसीन लड़की थि। उसकेखून सें सने मोटे कामुक होंठ उसकी सुंदरता कों औऱ निखार रहे थें। मे उसके पूरे जिस्म कों एक् नज़रदे रहा थां जब उसने मुझेइस तरह देखा औऱ उसने अपने दुपट्टे कों असहज महसूस करतेहुए ठीक किया। मुझे भि लगा कि इसतरह कां बोल्ड लुक देना मेरेलिए अच्छा नहि थां।
उसने मुझसे औऱ चपाती केँ लिए पूछामगर मैंने मनाकर दिया क्योंकि मेरा खानां होँ चूका थां। उसने मुझसे फिन पूछा कि क्याँ सब्जी स्वाद नहि हैं क्योंकि उसनेइसे पकाया थां। मैंने उससेकहा कि ये बहोत लजीज हैं औऱ मुझेये पसन्द हैं मगर मे सच मे खा चूका हूं औऱ साम कों एक् अतिरिक्त चपाती लूंगा। हम् दोनों मुस्कुरा दिए। मे स्वयं कों ये कहने सें नहि रोक पाया कि वो जवान औऱ खूबसूरत हौ गई थि। उसने जवाब दिया कि तुम् भि तौ बड़े हौ गए हौ, हर इंसान वक़्त केँ संग बढ़ता हैं। मैंने उसकीबात मानली औऱ उसे दोपहर का खाना करने कों कहा। उसनेकहा कि वो मेरी मां केँ संग खाने वाली थि।
साम कों मुझेशो रूमबंद करने केँ बाद आनां थां। मे रात 8 बजेघऱ पहुंचा, मैंने देखा कि रात कां खानां सजधजकर थां। उसने मुझे खाने परोसने केँ लिएकहा। मगर मे उन दोनों केँ संग डिनर लेना चाहता थां। उसनेकहा कि येठीक रहेगा केँ तीनो इकठे खाएंगे। हमनेसंग मे डिनर कियामगर वो मां केँ पासबैठ गई। "उसने हि पूरा खानां पकाया हैं", मां नें मुझे बताया। मैंने उनके खानां पकाने केँ कौशल कि प्रशंसा कि। उसने मुझे शुक्रिया दिया। ये बहुत नहि थां; उसने मुझे खाने केँ बाद desert मे हलवा परोसा। ये बहोत स्वाद थां औऱ मेरे स्वाद केँ हिसाब सें बना थां। इसमें उसने बहुत ड्राई फ्रूट डालरखा थां औऱ मैंने उसके हलवे कि बहुत तारीफ कि। वो मेरी तारीफ करने पर्र शरमा गई औऱ फिन सें मुझे शुक्रिया दिया।
हम् अब सोनेजा रहे थें, जब मां नें कहा कि हम् सब कों एक् हि कमरे मे सोना चाहिए, क्योंकि इससे हम् एक् हि ए.सि। मे एडजस्ट होँ सकते थें। मुझे एक् फोल्डिंग बेड पऱ सोने केँ लिएकहा गय़ा, जिसेडबल बेड केँ संग बिछाया गय़ा थां। मैंने प्रार्थना कि कि वो मेरीतरफ सें सोए औऱ वहीहुआ। मेरे ड्रीम्स सच होँ गएजब मैंने उसे अपनेपास सोतेहुए पाया, क्योंकि मां कों a.c सें एलर्जी थि। उसके घुटनों मे दर्द केँ कारण। मे खाट पर्र बैठ गय़ा औऱ अपने लैपटॉप पऱ अपनाकाम शुरुआत कर दिया। वो आई औऱ मे ये देखकर चौंक गय़ा कि वो नाईटसूट मे थि जिसका लोअर ट्रांसपैरंटमें थि। उसकेगले केँ दो बटनों मे सें एक् खुला थां औऱ मे उसकी दूधिया सफेद दरार कां थोडा दृश्य देखपा रहा थां। मे सीधे नहि देखरहा थां थोड़ा तिरछा होकरदेख रहा थां !
मुझे एक् खासकाम पूरा करना थां। इसलिये मैंने उससे पूछा कि मे अपनाकाम दूसरे कमरे मे कर सकता हूं अगरउसे लैपटॉप कि रौशनी सें कोई दिक्कत होँ। उसनेकहा कि उसेकोई दिक्कत नहि हैं। मां सोरही थि औऱ खर्राटे लें रही थि जिससे साबित होता हैं कि वो बहोत गहरी नींद मे थीं औऱ बम विस्फोट सें भि वो नहि जागती। उसने मुझसे मेरी पढ़ाई केँ बारे मे पूछा, जबकि उसेपता थां कि मे सीएकर रहा हूं। मैंने उसेबता दिया। उसने मेरे वापसी प्रश्न कां जवाब दिया कि वो बी.एससी कररही हैं। सेकंड ईयर मे हैं औऱ वो भि वहा रहने केँ लिए मजबूर हैं। मैंने उसे अपनी बेबसी केँ बारे मे बताया। हम् दोनों नें स्वीकार किया कि हमें अपने अंकल कि स्थिति केँ कारण एडजस्टमेंट करने कि आवश्यकता हैं। मैंने उससे मजाक मे पूछा कि क्याँ उसकी लाइफ मे कोई हैं। उसने उत्तर दिया कि पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने सें पहले उसके जिंदगी मे किसी केँ लिएकोई स्थान नहि हैं। उसने मुझसे भि पूछा औऱ मैंने वही जवाब दिया कि मे अपनेसीए केँ पूरा होने सें पहले अपने जिंदगी मे किसी कों नहि चाहता। हमनेफिन अपने बचपन कि शरारतों केँ बारे मे बात करना शुरुआत किया, कि हम् एक्-दूसरे कों केसे छेड़ते थें। मगरअब हम् बड़े होँ गए थें औऱ ढंग सें बात करने केँ लिए बहुत परिपक्व हौ गए थें। हमारी बातचीत आधे घंटे तक चलतीरही। उसने मुझसे कहा कि वो अब सोना चाहती हैं। मैंने मुस्कुराते हुएसिर हिला दिया।
उसने अपनी आँखें बंदकर लींमगर सो नहि रही थि। मेरी आँखें थोड़ी देरबाद उसके खुलेभाग कों देखने लगती हें। मैंने अपने आप् कों नियंत्रित करने कि कोशिश कि मगर नहि करसका। वो भि खर्राटे लेना शुरुआत कर दियाजब मैंने उसकेबदन कि एक् मीठीमहक केँ लिए अपनासिर उसकीओर बढ़ाया। मुझे उसकेबदन सें एक् महक, महक महसूस हुई जैसे वो गुलाब कि पंखुड़ियों पर्र लेटी हुइ थि, उसके काले बालों कि महक, उसकी लंबी आंखों कि गंध, उसकी बड़ी-बड़ी गहरी आंखें। मे उसकेबदन केँ अरोमा सें अभिभूत थां। मे उसकेनम होंठों कां स्वाद लेना चाहता थां मगर मुझेपता हैं कि ये मेरेलिए संभव नहि थां। मे उसको नॉनस्टॉप सूंघरहा थां मगरउसी वक़्त मुझेलगा कि वो उठ सकती हैं। मे हमेशा अपनी सम्मान कों लेकर चिंतित रहा हूं।
इसने मुझेकई चीजें करने सें रोकेरखा। मगरउस वक़्त मे वो मणि नहि रहा थां। मे बोल्ड होँ गय़ा थां। मैंने उसके बालों कों छूने कि कोशिश कि। मैंने उसके बालों कों इसतरह सें छुआ कि उसने मेरा स्पर्श महसूस नहि किया। मे बहोत बड़ी गुस्ताखी करने वाला थां; मे खून सें भरे उसके मोटे होंठों कों छूने वाला थां। मैंने ये सोचकर भि अपने आप् कों डाँटा। वो एक् मासूम बच्ची कि तरहसो रही थि। मगरउसे पता नहि थां कि वासना सें भरा आदमीउसे छूने कि कोशिश कररहा हैं। मैंने कोशिश कि मगरकुछ नहि किया।
मैंने फिन सें अपनाकाम करना शुरुआत कर दिया। मगर मात्र 10 मिनट केँ बाद मेरी इच्छाओं नें मुझेउसे छूने केँ लिए उसकीतरफ मोड़ दिया। मैंने उसके खुलेबटन कों फिन सें देखा, अब मुझे उसकेबदन केँ उस हिस्से सें महकआरही थि। जब मे उसके लगभगआया, तोँ मुझे उसकेबदन कि गर्मी महसूस हुईँ, जबकि मैंने उसेछुआ तक नहि। मैंने अपने आपको चेतावनी दि कि वो भि मुझे महसूस कर सकती हैं। मे अपनेकाम पऱ वापस आँ गय़ा। वो बार-बार मेरा ध्यान भटकारही थि। मे अपनाहाथ उसकेटॉप केँ कॉलर पर्र लें गय़ा औऱ उसे धीरे-धीरे सें छुआ। मुझेलगा जैसे मैंने उसेछुआ हैं। फिन भि उसनेकोई प्रतिक्रिया नहि दि। फिन मैंने एक् साहसिक कदम उठाया। मैंने उसकी दरार कों छूने कि कोशिश कि। ये एक् स्पर्श थां जैसे मैंने स्पर्श नहि किया थां मगर एक् स्पर्श, एक् मामूली स्पर्श। मगरअब उसके जिस्म मे कुछ हरकत होँ रही थि। मैंने जल्दी अपनाहाथ उसकी औऱ सें अपने लैपटॉप केँ कीबोर्ड पर्र घुमाया।
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