अगर खुदा ना करे - Swaad Ki Talaash – New Episode
मैंने सुषमा कि ओर मुस्कुराते हुए भौंहे उचकाईं।
सुषमा थोडा गर्व सें हँसी – हम् झूठ नहि कहते थें। प्रकाश पूरे लगाव सें अंजलि कि योनि कों चूम औऱ चूसरहा थां। उसकी दीवानगी देखकर मुझे गर्व हौ रहा थां अंजलि पऱ।
मे अंजलि केँ स्तनों कों हौले-हौले हि सहलारहा थां ताकि वो योनिप्रदेश सें मिलरहे आनन्द पर्र ज़्यादा ध्यान लगासके।
सुषमा उसकी जाँघों कों, पेट कों, जिस्म केँ अन्य हिस्सों कों सहलारही थि।
सचमुच ये अंजलि कां यादगार अनुभव होगा! वो इतनी चंचल होँ रही थि कि प्रकाश कों सुविधा देने केँ लिए हमेंउसे पकड़ना पड़रहा थां। वो जोरजोर सें सीत्कार भररही थि औऱ हमें चिंता होँ रही थि कि आवाज़ कहीं बाहर् न् चलीजाए।
सुषमा उसकी उग्रता सें चकित थि, कभीकभी तोँ अंजलि छटपटा-सि जाती। जिस वक़्त प्रकाश कि जीभ कि अंदर भगनासा पर्र गुदगुदी करती, वो सहन नहि कर पाती, वो उसकासिर हटा देती।
प्रकाश रुककर फिन शुरुआत करता।
मैंने काम देवता कों शुक्रिया दिया, उनकी पूरी मेहरबानी अंजलि पऱ हौ रही थि, अंजलि आहेंभर भरकर मानो उनकी आराधना मे मंत्र-पाठ कररही थि। प्रकाश उसे पूरेदिल सें चूसरहा थां।
मे योनि औऱ मुख केँ संगम केँ इस अनोखे दृश्य कों मंत्रमुग्ध होकरदेख रहा थां, मुझमें तरंगें उठरही थीं, कितनी गहरी इ्च्छा पूरी हौ रही थि। कोई औऱ महिला होती तोँ मुझ पर्र इतनाअसर नं होता पर्र अपनी प्राण प्यारी पत्नि कों इसहाल मे देख्ना।
ये खुशी कि इंतिहा थि। मुझेडर लगरहा थां कहीं मेराआधे रास्ते मे हि…
मुख-सुख कि अभ्यस्त अंजलि जल्द हि स्खलित होने केँ कगार पर्र आँ पहुँची। अनुभवी खिलाड़ी प्रकाश नें मुँहहटा लिया। अंजलि नें उसके मुँह सें मिलने केँ लिएकमर उठाई तोँ प्रकाश नें योनि केँ उभार पर्र एक् चपतजड़ दि। अवाक होकर अंजलि कि हलचलबंद हौ गई।
मैंने प्रकाश कों देखा, वो आत्मविश्वास सें भरा थां।
हमने भि अपने हरकतें रोकदीं।
कुछ क्षणों बाद प्रकाश उस पर्र पुनः झुका औऱ हम् भि चालूहुए। पुनः अंजलि स्खलन पर्र पहुँचने कों हुइ कि वो उठ गय़ा। वहीचपत, वही अपमानजनित स्थिरता। फिन सें शुरूआत।
तीसरे दौर मे तौ अंजलि बेकरार हौ गई। वो आतुरता मे कमर उठाकर प्रकाश कां सिर घसीटकर अपनी योनिस्थल पऱ लगाने लगी। हमारी पकड़ने कि कोशिश कों भि उसनेहाथ सें झटक दिया।
निर्णय कां क्षण आँ गय़ा थां, लोहा गर्मलाल थां, अबउस पर्र चोट कि जरूरत थि।
अगर खुदा ना करे - Swaad Ki Talaash – New Episode
तीसरे दौर मे तौ अंजलि बेकरार हौ गई। वो आतुरता मे कमर उठाकर प्रकाश कां सिर घसीटकर अपनी योनिस्थल पर्र लगाने लगी। हमारी पकड़ने कि कोशिश कों भि उसनेहाथ सें झटक दिया।
निर्णय कां क्षण आँ गय़ा थां, लोहा गर्मलाल थां, अबउस पऱ चोट कि जरूरत थि।
प्रकाश बड़ीदेर सें सम्हाले थां। उसने हड़बड़ाते हुए पैंट उतारी औऱ अंजलि केँ खुले पैरों केँ बीच आँ गय़ा।
उसका लिंग मुझसे बड़ा औऱ मोटा थां।
मे उत्कंठापूर्वक देखने लगा – केसे सुषमा उसके लिंग कों चूमकर गीलाकर रही हैं औऱ केसे प्रकाश उसे अंजलि कि योनि-होंठों पऱ लगाकर उनकेबीच ऊपर-नीचे फिरारहा हैं।
मेरे अंदर झुरझुरी सि होनेलगी, मेरी पत्नि कि योनि मे एक् पराए मर्द कां लिंग घुसने वाला थां, उसके मुँह सें सि-सि-सि निकलरही थि।
लिंग कि नोकऊपर सें नीचे तक लंबाई मे घूमती हुईँ अंदर कि बनावट औऱ बुनावट कां जायजा लेँ रही थि, गीले होंठों नें खुलकर लिंग कों बीच मे उतरने कां मार्ग दे दिया थां।
कुछ हि सहलाहटों केँ बाद अंजलि नें अंदर लेने केँ लिएकमर उचकाई औऱ प्रकाश नें लिंग कों योनि केँ मुँह पर्र लगा दिया।
असल काम कि घड़ी, वर्षों इंतजार कि घड़ी, मेरी पतिव्रता पत्नि केँ व्यभिचार कि घड़ी, उसकी योनि मे परपुरूष केँ प्रवेश कि घड़ी…
मे – उसका पति – उत्साह सें उसकी योनि केँ होंठों कों फैलाकर उसके शीलभंग मे सहायता कररहा थां।
प्रकाश कोमलता सें हि अंदरठेल रहा थां।
उसमें डूबते लिंग केँ संग हि मे आनन्द केँ सागर मे डूबाजा रहा थां। लिंग जैसे हि अदृश्य हुआ, पेड़ू सें पेड़ू सटे, प्रकाश नें एक् धक्के केँ संग पूर्ण प्रवेश कि क्रिया सम्पन्न कि, मेरे सम्हलने कि इंतिहा हौ गई, आनन्द कां लावाबह निकला, कुछ नहि कर पाया, बस ‘अरे’‘अरे’ करता किसीतरह पैंट कों दबोचकर उसेइधर उधर फैलने सें बचाने कि कोशिश करनेलगा।
प्रकाश हँसामगर सुषमा कां रवैया अलग थां, उसने सहानुभूति सें मेरा माथा सहलाया, वो मेरीतरफ आई औऱ मेरे पैंट कां बकल खोलकर जिप नीचे कि औऱ कमर सें चड्डी सहित घसीटकर बाहर् निकाल दिया।
अंजलि कों भि कुछ अजीब होने कां पताचल गय़ा औऱ उसने गरदन उठाकर ‘क्याँ हुआ’ पूछा। पऱ प्रकाश केँ धक्के चालू हौ गए थें औऱ कोई स्त्री संभोग केँ धक्कों केँ बीच कहीं औऱ ध्यान दे भि तौ केसे।
मे उसे प्रेम सें गाल थपथपाकर आश्वस्त करना चाहता थां पर्र मे खुद लज्जित थां। सुषमा मुझे चादर सें पोंछरही थि। मेरा लिंग सिकुड़कर छोटा होँ गय़ा थां जिसे मे हाथों सें छिपारहा थां।
सुषमा नें हाथ घुसाकर उसे हथेली मे भरकर सहलाया औऱ हंसते हुएकहा- देख्ना, बड़ा होकरये बड़ाकाम करेगा।
प्रकाश औऱ अंजलि कि रतिक्रीड़ा, पुरुष औऱ औरत कि संयोग-प्रक्रिया मेरी आँखों केँ आगेचल रही थि – मगरअब मेरामन उचट गय़ा थां।
हालाँकि मुझे अंजलि कां चुदना अच्छा लगरहा थां – अंजलि कि कमरउचक रही थि औऱ प्रकाश हुमक हुमककर धक्के लगारहा थां। वैसा हि गरम, जोरदार औऱ जबरदस्त मैथुन जैसा मैंने चाहा थां, पर्र मे अपने कों इससे नहि जोड़पा रहा थां।
वे दोनों बहुतदेर सें गर्म थें, मिनटभर मे हि चरमोत्कर्ष पऱ पहुँच गए।
प्रकाश नें पूछा- कहां करूँ?
तौ मैंने उसे अंदर हि झड़ जाने कों कह दिया।
अंजलि पिल्स पऱ थि, दोनों एक्-दूसरे कों चिपटाकर संग-संग झड़ने लगे।
सुषमा मेरे अलगाव कों समझ गई थि। वो तेज instinct वाली महिला थि। उसने मेराहाथ पकड़ा औऱ कहा- आइये, इन दोनों कों थोड़ी देर केँ लिए अकेले छोड़ देते हें औऱ हम् बाहर् चलते हें।
शुक्र हैं, मैंने अपनेबैग मे हम् दोनों केँ लिए एक् एक् जोड़ी एक्स्ट्रा कपड़े रखलिए थें।
अगर खुदा ना करे - Swaad Ki Talaash – New Episode
बाहर् दुनिया कितनी अलग थि, फैली हुइ औऱ विविधतापूर्ण, पहलीबार मुझे सेक्स कां घोरबंद एकांत गलतलगा।
हम् होटल केँ रेस्टोरेंट मे चलेआए। कप कॉफ़ी कि चुस्कियाँ लेतेहुए सुषमा नें कहा- It was to much for you। First waqt थां नां, so it iss natural.
मुझेउस वक़्त वो बहोत अच्छी लगी – अपने मोटापे औऱ अंजलि कि तुलना मे सामान्य चेहरे-मोहरे केँ बावजूद। लगा कि इसके भारी वक्षों औऱ मोटीकमर कों सह जाऊंगा। उसने मुझे बधाई दि, अंजलि केँ चुद जाने कि।
‘हाँ, ये मेरा बहोत बड़ा सपना थां। ’ मैंने कहा।
‘मैंने कहा थां न् उन्हें एक् बार हमारे संग होने दीजिए, वे स्वयं आगे बढ़कर सेक्स कराएँगी। पर्र ये सपना आपके सहयोग केँ बिनासच नहीं होता। आपको पूरा श्रेय जाता हैं। ’
‘Thanks for being so understanding.’
रेस्तराँ केँ हल्का म्यूज़िक मेरे दिमाग़ केँ थके रेशों कों चैनदे रहा थां। कप कॉफ़ी कि चुस्कियों केँ बीच वो मुझेदेख रही थि, पलंग पर्र मे कैसा साबित हूँगा, शायद इसका अंदाजा लगारही थि।
‘You are a thorough gentleman.’
मे अचकचा गय़ा- अरे, ये आपने क्याँ कहा!
‘ठीक कहरही हूं। हमनेकई दम्पतियों केँ संग किया हैं। औऱ लोग स्वैप केँ लिए कमरे मे संग होते हि मुझ पऱ टूट पड़ने केँ लिए आतुर होँ जाते हें। पर्र आपने अंजलि जी पऱ ध्यान दिया। आप् उन्हें बहोत चाहते हें। ये भि पहलीबार हि देखा कि कोई अपनी पत्नि कों देखते देखते हि स्खलित होँ जाए। इतना लगाव तौ दुर्लभ हैं। ’
मे शरमा गय़ा।
‘प्रकाश केँ संग पत्नि कों अकेले छोड़कर बाहर् आने मे भि आपने एतराज नहि किया। अपनी पत्नि पर्र औऱ किसी दूसरे पुरुष पऱ इतनी उदारता औऱ भरोसा कम हि लोग दिखा पाते हें। ’
मे उससेनजर मिलाए रखने कि कोशिश कररहा थां, पऱ संकोच हावी हौ जाता थां। मुझेलगा मे सचमुच बहोत gentle शख्स हूं।
‘मे आपकेसंग अकेले होना चाहती थि, इसीलिए बाहर् बुला लिया। कमरे मे भि मे आपकेसंग अकेले हि…’
I felt honored…
‘आपको एतराज तौ नहि होगा?’
मैंने नां कहा।
‘अंजलि जी कों?’
मैंने जवाबी प्रश्न किया- प्रकाश कों बुरा तोँ नहि लगेगा? वोँ आपको नहि देख पाएँगे तोँ?
‘उन्होंने मुझेकई बार देखा हैं, मेरी ख़्वाहिश उनकेलिए सबसे बड़ी हैं। ’
‘औऱ अंजलि कां कहना हैं कि मे तुमको मुझे दूसरी स्त्री केँ संग नहि देख सकती। इतना प्रेम करती हूं तुमको। ’
वो जोर सें हँस पड़ी‘सही कहा, मुझे भि ईर्ष्या होती हैं उस टाइम!’
‘कहां, आज तोँ आपने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। ’
‘आपकी खातिर!’
दोनों जोर सें हँस पड़े।
उसने मेरेहाथ पर्र अपनाहाथ रख दिया, मैंने चारों ओर देखा, लोग अपने मे डूबे थें, मैंने टेबल केँ नीचे पाँव बढ़ाकर उसके पाँवों कों महसूस किया, लगा कि एक् बारफिन सें किशोर वय कि कोई घड़ीलौट आई हैं।
मेरा लिंग धड़कउठा।
महिला साधारण भि होँ, उसकासंग होना मादकता लें हि जाता हैं।
कप कॉफ़ी समाप्त करके हम् एक्-दूसरे कां हाथ पकड़े हि कमरे तक वापसआए।
रूम प्रकाश नें खोला। अंजलि कपड़े पहन चुकी थि। वो सिकुड़ी हुईँ बैठी थि।
प्रकाश कमर सें ऊपर खुला थां, उसका चेहरा खुशी सें चमकरहा थां।
मैंने उससेहाथ मिलाया औऱ शुक्रिया कहा
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