छोटी सी जान चूतो का तूफान complete Desi kamuk kahani Ek raat, ek sannsann rasta, aur ek anjaan ladki. Mukesh ka dil dhadhakne laga jab usne dekha ki ek 18 saal ki ladki sarak par leti hui hai, khun se latpat. Uska dil karta hai ki use bachaye, lekin kya use pata hai ki ye ladki uski zindagi ko kaise badal degi? Desi kamuk kahani, jismein lust, craving, aur desire ka mahaul hai.
छोटी सी जान चूतो का तूफान complete - Desi kamuk kahani - Real Story Continue Part 1
छोटी सि जान चूतो कां तूफान--1
लेखक- तुसार
मुकेश आज देल्ही सें वापिस अपनेघऱ आँ रहा थां….वोँ देल्ही अपने साथी केँ छोटे भइया केँ विवाह मे आया थां……संग मे उसका ड्राइवर भि थां…मुकेश गुरदासपुर कां रहने वाला थां, औऱ रात कों वापिस अपनेघऱ गुरदासपुर जारहा थां….रात केँ 1 बजे कां समय थां….मार्ग सुनसान थि, औऱ चारोतरफ अंधेरा फेलाहुआ थां….वोँ अभि गुरदासपुर सें कुछ 100 किमी केँ दूरी पर्र थि……मुकेश ड्राइवर केँ संग अगलीसीट पर्र बैठाहुआ थां….
तभी हेडलाइट केँ रोशनी मे सामने मार्ग पर्र कोई पड़ाहुआ नज़र आया…मुकेश कां ड्राइवर गाड़ी कों ड्राइव करतेहुए एक् साइड सें आगेबढ़ गय़ा। “ड्राइवर व्हीकल पीछेलो” मुकेश नें मार्ग पर्र पड़ेबदन कि ओर देखते हुएकहा….
ड्राइवर: साहब रहने दो…….पता नहींकोन हैं….फज़ूल मे लफडे मे काहे कों पढ़ना….
मुकेश: मेनेकहा नाँ वाहन केँ पीछेलो, देखेने मे कोई बच्चा लगता हैं….
ड्राइवर: ठीक साहब जैसे आपकी मर्ज़ी….
ड्राइवर नें व्हीकल रिवर्स गियर मे डाली, औऱ उस बच्चे केँ पास जाकररोक दि, दोनो वाहन सें नीचे उतरे, तौ उन्होने देखा, एक् 1***साल कां बच्चा, खून सें लत्पथ मार्ग पऱ बेहोश पड़ा थां…उसके सर औऱ मूह सें बहोत खूनबह रहा थां….मुकेश नें नीचे बैठते हुए, उसकी नब्ज़ देखी, औऱ ड्राइवर केँ तरफ देखता हुआ बोला, अभि जिंदा हैं….चलो जल्द सें उठाओइसे, इसको हॉस्पिटल लेकर जानां होगा….
ड्राइवर औऱ मुकेश नें उस बच्चे कों उठाया, औऱ गाड़ी कि पिछली सीट पऱ लेटा दिया….मुकेश जानता थां कि, वोँ अपनेसहर सें 100 किमी कि दूरी पऱ हैं, औऱ अगर वोँ टाइम रहतेवहा पहुच गय़ा तोँ, इस बच्चे केँ जान बचाईजा सकती थि। मुकेश नें ड्राइवर केँ संगआगे बैठते हुए कहा….जल्द वाहन चलाओ, जितना तेजचला सकते हौ….उतना तेज चलाओ….
मुकेश कां ड्राइवर भि एक्सपर्ट थां….फिन क्याँ थां, वोँ एक् घंटे मे हि गुरदासपुर केँ सबसे बड़े हॉस्पिटल केँ अंदर थें…उस
बच्चे कों आइसीयू मे भरतीकरा दया….औऱ पोलीस कों भि इनफॉर्म कर दिया गय़ा….मुकेश अपने इलाक़े कां नामी गिरामी ज़मींदार थां….कई सो एकड़ ज़मीन औऱ कई फार्महाउस थें….बड़े-2 लोगो सें उसकीजान पहचान थि.
मुकेश कों जौ पता थां, उसनेसभी पोलीस कों बतादया थां……अब बच्चे केँ होश मे आनने कां प्रतीक्षा थां….मुकेश हॉस्पिटल कि लॉबी मे टहलता हुआ, रिसेप्षन तक फुँचा, औऱ उसनेवहा सें अपनेघऱ अपनी पत्नि शीला कों मोबाइल लगाया……थोड़ी देरबाद शीला नें मोबाइल उठया….दोस्तो यह 1988 कि बात हैं, जबफोन मोबाइल नहींहुआ करते थें…सिर्फ़ लॅंडलाइन मोबाइल हि बात करने कां ज़रिया थें……थोड़ी देरबाद उसकी पत्नि शीला नें मोबाइल उठाया.
शीला: हेलोकॉन….
मुकेश: शीला मे हूं मुकेश……
शीला: आप् अभि तक आए नहीं क्याँ हुआ ? सभीठीक तोँ हैं नाँ ?
मुकेश: हां मे ठीक हूं….दरअसल अभि मे हॉस्पिटल मे हूं.
शीला: (घबराते हुए)जी क्याँ हुआ ? आप् ठीक तौ हैं नां ?
मुकेश: हां शीला मे एक् दमठीक हूं…दरअसल बातयह हैं कि,
उसकेबाद मुकेश नें शीला कों सारीबात बताई, औऱ कहा कि, वोँ सुभह हि घऱ वापिस आँ पाएगा….उसके बाद उसने मोबाइल रखदया…
मुकेश 35 साल कां हॅंडसम औऱ उँची हाइट काठी वाला व्यक्ति थां…उसकी पत्नि निहायत हि सुंदर औऱ 32 साल कि थि….बहोत हि धार्मिक विचारो वाली, दोनो मे बहोत प्रेम थां….पर्र विवाह केँ 10 सालबाद भि उनकेकोई संतान नहीं थि….वजह थि शीला कि बच्चेदानी मे कुछ प्राब्लम थि….मुकेश नें शीला कां कई स्थान इलाज करवाया….पर्र ईश्वर केँ आगे किसी कि क्याँ चलती हैं….
सुभह केँ 6 बजे, मुकेश लॉबी मे एक् बेंच पर्र बैठाहुआ थां….तभी डॉक्टर नें उसेआकर बताया कि, उस लड़के कों होश आँ गय़ा हैं….वहा कां इनस्पेक्टर भि वही थां….बच्चे केँ होश मे आने केँ खबर सुनते हि मुकेश औऱ इनस्पेक्टर दोनोरूम मे चले गये….इनस्पेक्टर नें बड़े हि प्रेम सें उस लड़के सें पूछा….
इनस्पेक्टर: बेटा तुम्हारा नाम क्याँ हैं ?
लड़का: (अपने आप् कों इस हालत मे देखकर घबराते हुए)जी जी साहिल…
इनस्पेक्टर: साहिल तुम्हारे मा बापूकोन हैं…….तुम्हारा आक्सिडेंट हुआ थां….औऱ तुम् इनको (मुकेश कि तरफ इशारा करतेहुए) मार्ग पऱ बेहोश मिले थें….यह हि तुम्हें यहा लेकरआए हैं….कोन हैं तुम्हारे मा बाप। उनकोखबर कर देते हैं……
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इनस्पेक्टर केँ बातसुन कर वोँ लड़का खामोश हौ गय़ा…मानो जैसे उसके जखमो कों फिन सें किसी नें कुरेद दिया होँ….उसकी आँखें नम हौ गई,.औऱ वोँ सुबक्ते हुए बोला……”मे अनाथ हूं” मुझे नहींपता मेरेमा बाप कोन हैं….
इनस्पेक्टर: ओह्ह अच्छा फिनयह बताओ तुम् कहां रहते हौ…….कोई तौ होगा जिसे तुम् जानते होगे ?
बच्चा: मे नहीं जानता किसी कों……मे तोँ मार्ग पर्र हि रहता हूं….
उसने बड़ी मासूमियत सें कहा….”अच्छा तौ फिनयह बताओ तुम्हारा आक्सिडेंट केसेहुआ” इनस्पेक्टर नें बहोत हि प्रेम सें पूछा….
लड़का: वोँ मे मार्ग पर्र चलरहा थां क़ी, पीछे सें एक् ट्रक नें मुझे टक्कर मार दि….उसके बाद मुझेकुछ याद नहीं…
इनस्पेक्टर: (मुकेश कि ओर देखते हुए) मुझे लगता हैं कि यह लड़कासही बोलरहा हैं….हम् इसमे ज़यादा कुछ नहींकर पाएँगे…कोई गवाह भि नहीं हैं…जिसने देखा होँ, कि किसने इसे टक्कर मारी हैं….
उसकेबाद इनस्पेक्टर औऱ मुकेश रूम सें बाहर् आँ गये…। इनस्पेक्टर नें मुकेश कों थॅंक्स बोला, औऱ कहा कि, आप् जैसे लोगो केँ कारण हि आज केँ दुनिया मे इंसांयत हैं…वरना आपकी स्थान कोई औऱ होता तोँ मार्ग पऱ पड़ेइस अनाथमर रहे बच्चे कि तरफकोई देखता भि नहीं…….
मुकेश नें हॉस्पिटल मे बिल दिया, औऱ डॉक्टर कों बोला कि, वोँ अबघऱजा रहा हैं…लड़के कि देखभाल करें….वोँ दोपहर कों फिन आएगा…उसके बाद मुकेश अपनेघऱ चला गय़ा…शीला बेसबरी सें मुकेश कां प्रतीक्षा कररही थि……मुकेश कों सही सलामत देखकर उसकीजान मे जान आई….उसके पूछने पऱ मुकेश नें सारा किस्सा अपनी पत्नि कों बतादया.
मुकेश: शीला तुम् थोडा सां खानां बनाकर पॅककर दो….मुझे फिन सें हॉस्पिटल जानां हैं….उस बेचारे बच्चे कां तोँ इस दुनियाँ मे कोई भि नहीं हैं। इतनी सि उमर मे हि नज़ाने अब तक उसने क्याँ-2 दुख देखे होंगे.
शीला:जी बना देती हूं….मे भि चलु आपकेसंग ?
मुकेश: तुम् क्याँ करोगी वहा जाकर ?
शीला:बस ऐसे हि.
मुकेश: ठीक दोपहर कों चलते हें….
शीला:ठीक हैं आप् जाकर आराम करिए….मे खानां बनाती हूं…आप् कलरात सें सोए नहीं हैं….
मुकेश अपनेरूम मे चला गय़ा…….शीला नें घऱ मे करने वाली नौकरानी कों खानां सजधजकर करने केँ लिए कहा….औऱ स्वयं उसकी सहायता कि। दोपहर कों जब वोँ अपनेरूम मे गई, तोँ, उसने देखा केँ मुकेश पहले सें सजधजकर होँ चुका हैं…
शीला: आप् उठ गये….खानां लगाऊ क्याँ ?
मुकेश: हां जल्द करो….खाने केँ बाद हॉस्पिटल भि जानां हैं….
शीला:जी आप् रेडी होकर बाहर् आँ जाए…मे खानां लगाती हूं…
खन्ना खाने केँ बाद दोनो हॉस्पिटल पहुच गये……वहा इनस्पेक्टर पहले सें हि माजूद थां….मुकेश कों देखते हि इनस्पेक्टर बोला…अब तोँ लड़के कि हालत मे काफ़ी सुधार हैं….बेचारा बच गय़ा….
मुकेश: इनस्पेक्टर अब क्याँ करना हैं इस बच्चे कां…
इनस्पेक्टर: करना क्याँ हैं सरजी। सिटी मे एक् अनाथ आश्रम हैं…आश्रम केँ ट्रस्टी सें कॉंटॅक्ट किया हैं, थोड़ी देर मे आता होगा….वही पर्र इसकोभेज देंगे…
उसने अपने मासूम सें चेहरे सें मुकेश औऱ शीला कि ओर देखते हुए कहा….औऱ फिन अपनी नज़रे नीचेकर ली………शीला साहिल कों एक् टक देखेजा रही थि…जिसकी वजह सें साहिल थोडा नर्वस फीलकर रहा थां…औऱ अपने छोटे- 2 हाथों कि उंगलयों कों आपस मे दबारहा थां.
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मुकेश: खानां खाया तुमने ?
साहिल: नहीं अभि नहीं खाया…
मुकेश: देखो हम् तुम्हारे लिए खानां लेकरआए हैं….
साहिल नें एक् बार शीला केँ हाथ मे पकड़े हुए दोपहर का खाना बॉक्स कि तरफ देखा, औऱ फिन सें अपनेसर कों झुका लिया….
मुकेश: अर्रे शीलादेख क्याँ रही होँ। खानां डालो प्लेट मे….
शीला: जी………जी अभि डालती हूं….
शीला नें प्लेट मे खानां डाला, औऱ साहिल कि तरफ बढ़ा दया…साहिल नें एक् बारफिन सें शीला कि तरफ देखा…औऱ प्लेट लेने केँ लिए जैसे हि हि हाथआगे बढ़ाया….वोँ एक् दम सें चीखउठा। शायद उसकेहाथ मे चोटलगी थि….”आहह-आहह माआ”
साहिल कि दर्दभरी पुकार सुनकर शीला केँ मम्मी मे अजीब सि टीसउठी, औऱ उसने प्लेट कों एक् साइड मे रखतेहुए, उसकाहाथ पकड़ लिया। औऱ फ़िकरमंद अंदाज़ मे बोलीं, क्याँ हुआ बेटा…….कहां दर्द हौ रहा हैं…
साहिल: वोँ हाथ मे चोटलगी हैं….
शीला: अच्छा रहने दो….मे खिला देती हूं….
मुकेश बैठासभी देखरहा थां…वोँ जानता थां कि, शीला केँ मन केँ किसी कोने मे आज भि मा बनने केँ चाहत हैं…जोँ साहिल कों देखकर दबी नां रह सकी.शीला कों जब ख़ुसी सें साहिल कों खानां खिलाते देखा, मुकेश कों भि अच्छा लगरहा थां…… तभी इनस्पेक्टर अंदर दाखिल हुआ औऱ मुकेश सें बोला…
मुकेश: (शीला केँ बातसुन कर थोड़ी देर सोचने केँ बाद) ह्म्म सोच तोँ मे भि यहीरहा थां। पऱ शीला किसी कों पालना औऱ वोँ भि किसीगेर कों बहोत बड़ी ज़िम्मेदारी होती हैं…….
शीला:हां जानती हूं….पऱ क्याँ हम् दोनो मिलकर भि यह ज़िम्मेदारी नहीं संभाल सकते….
मुकेश नें मुस्करा कर शीला कि तरफ देखा, औऱ बोला, ठीक हैं मे इनस्पेक्टर औऱ आश्रम केँ ट्रस्टी सें बात करता हूं…फिन मुकेश नें इनस्पेक्टर औऱ आश्रम केँ ट्रस्टी कों अपने औऱ शीला केँ दिल केँ बातबता दि… वोँ लोगझट सें राज़ी हौ गये….
इनस्पेक्टर: ठीक हैं मुकेश जी, आप् दोनो हमारे संगचल करकुछ फॉरमॅलिटी पूरीकर लें। उसकेबाद आप् इस बच्चे कों घऱ लेँ जा सकते हैं.
मुकेश: ठीक हें इनस्पेक्टर चलिए…….
उसकेबाद मुकेश इनस्पेक्टर केँ संग पोलीस स्टेशन चला गय़ा…औऱ ज़रूरी कागज़ी करवाई करने केँ बाद उन्होने नें साहिल कों गोद लिया……शीला तौ ख़ुसी सें फूली नहींसमा रही थि….औलाद केँ लिए वोँ कई सालो सें तरसी थि। औऱ आज साहिल केँ रूप मे उसे अपना बेटा मिल गय़ा थां….औऱ आज मुकेश साहिल कों हॉस्पिटल सें घऱ लाने वाला थां….
शीला तोँ जैसे बादलों मे उड़रही थि….उसने अपनेकई रिस्तेदारो औऱ दोस्तो कों यहखबर बता दि, औऱ उसने साहिल केँ घऱ पर्र आने कि ख़ुसी केँ मोके पर्र बहोत बड़ी जश्नरखी थि…
क्रमशः
छोटी सी जान चूतो का तूफान complete - Desi kamuk kahani - Next part mein bada twist
jay wrote:mubaarak mubaarak mubaarak for this stori shukriya friend अगरबुरा mano too aapne joo imege dali haen unkah size कुछकम karke daalo जैसे 007 ne किया h
Nafisa
show8814 wrote:इतनी जोरदार औऱ इंट्रेस्टिंग स्टोरी, मेरीसोच केँ परे, चलतीरहे, आप् खुशरहो. हमेंखुश रखो, इससे बड़ी समाज सेवा क्याँ हौ सकती हैं| contin........... सहीकहा आपनेयार आपकीतरह औऱ सब पढ़ने वाले मेरे दोस्त अगर उत्साह वर्धन करें तौ शायदकुछ औऱ लेखकइस साइट सें जुड़ जायं
Abhimanyu
भाईजान भाग करतेरहे । बड़ी सेक्सी अंदाज मे बधाररहे हें आप्
Lakshmi
dthaker wrote:भाईजान भाग करतेरहे । बड़ी सेक्सी अंदाज मे बधाररहे हें आप् update thodi hi der mai
Krisha
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Avanee
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