Adultery ऋतू दीदी - Shaadi Ki Raat - Full Story Part 1
ऋतू दिदी
मेरे एक् रीडर नें अपनी आपबीति मेरेसंग शेयर कि औऱ उसको मैंने एक् किस्सा मे ढ़ाल दिया हैं। येकथा हें एक् लड़के प्रशांत कि। आप् उसी केँ नज़रिये सें येकथा पढिये।
मेरानाम प्रशांत हें औऱ मे २३साल कां नौजवांन हूं। मेरे मां बाप कां इक्लौता लड़का हूं औऱ गर्ल फ्रेंड बनाने केँ चक्कर मे कभी पड़ा नहि क्युकी मे बहोत शायरहा हूं औऱ काम बोलता हूं। कॉलेज समाप्त होते हि पास केँ बड़ेशहर मे मेरी नौकरी लग गई, औऱ मे मम्मी बाप कां घऱ छोड़कर नएशहर मे रहनेलगा। मे अपने करियर पऱ कंसन्ट्रेट कररहा थां औऱ घऱ वालें मेरी विवाह करवाना चाहते थें औऱ मे उनको हमेशा ताल देता।
एक् बारजब मे कुछदिन कि छुट्टियो मे घऱ गय़ा तोँ घऱ वालों नें मुझे बोला कि उन्होंने एक् लड़की देखि हें औऱ मे एक् बारउस लड़की कों देख औऱ मिललु। विवाह चाहे तौ मे बाद मे करलु। घऱ वालों कां दिल रखने केँ लिए मे रेडी हौ गय़ा औऱ मे अपने माता-पिता केँ संग लड़की केँ घऱ गय़ा। मन मे यही थां कि वापिस घऱआकर लड़की कों रेजेक्ट कर दूंगा औऱ पीछा छुड़ा लुंगा। लड़की कों मेरे सामने लाय गय़ा औऱ मेरी सिट्टी पिट्टी घुम हौ गयीँ,। सुंदर सि लड़की थि औऱ उसका फिगर एकदम पेरफ़ेक्ट। कभी सोचा नहि थां कि ऐसी लड़की सें विवाह करने कां मौका मिलेंगा। उसकेसंग अलग सें बात करने कों भि मिला।
उसकानाम निरु थां औऱ मे उसकी खुबसुरती मे इतनाखो गय़ा कि कुछ पुछा हि नहि, येसोच कर कि कही वोँ नाराज न् हौ जाए। वोँ जरूर मेरे बारे मे जानकार इम्प्रेस हुयी औऱ इंटरेस्ट दिखाया। उसकेघऱ वालों नें बताया कि निरु कि नौकरी उसीशहर मे लगी हें जहा मे अभि नौकरी कररहा हूं। वोँ लोग निरु कों उस अनजान शहर मे अकेले नहि भेजना चाहते थें औऱ उसीशहर मे किसी सें विवाह करवाना चाहते थें। मुझसे पुछा गय़ा कि मे विवाह कों रेडी हूं याँ नहि, मे चाहु तौ सोचकर जवाबदे सकता हूं। मैंने जल्दी हांबोल दिया औऱ हम् दोनों केँ घऱ वाले बहोत खुश हुये। मे खुश थां कि मुझे इतनी सुंदर बिवी मिलेगी। निरुखुश थि कि उसकी नौकरी कां सपना पूरा होगा औऱ मुझे तोँ वोँ, वैसे हि पसन्द कर चुकी थि।
अगले महीने हि हमारी विवाह होँ गयीँ,। एक् महीने पहले मैंने सोचा भि नहि थां कि मे विवाह कर लूंगा औऱ अबसभी कुछ इतना जल्द हौ गय़ा। मगर मुझे अपने डिसिशन पऱ कोई पछ्तावा नहि थां। मेरा किराए केँ घऱ कों शेयर करने केँ लिए एक् लाइफ पार्टनर आँ चूका थां। विवाह सें पहले केँ इस एक् महीने मे भि मेरीबात निरु सें होतीरही थि। एक् चीज जौ मुझेपता चली थि वोँ ये कि वोँ बहोत चुलबुली सि लड़की हैं। मेरा बिहेवियर उसके बिहेवियर सें एकदम उलटा थां तोँ मुझे वोँ बहोत पसन्द आयी। मे चुपचाप कमबात करता औऱ वोँ जल्द हि किसी केँ संग घुलमिल जाती औऱ ज़्यादा बात करने कि बहोत आदत थि। मेरे शांतघऱ मे हमेशा चहलपहल रहनेलगी। जिन पड़ोसियो सें मैंने कभीबात नहि कि थि, निरु कि वजह सें उनकेनाम भि जानने लगा औऱ वोँ हमारे घऱ भि कभीआते थें। मुझेलगा जैसे मेरी लाइफ कम्पलीट होँ गयीँ, हैं। मेरी ज़िन्दगी कां अधुरापन दूर होँ गय़ा थां। विवाह केँ बाद भि वोँ चुलबुली, बब्बली सि लड़की अपनी शरारत औऱ नटखटपन नहि भूलि थि। हम् दोनों नें करियर कों देखते हुए डिसाइड किया थां कि हम् अपना बच्चा अभि प्लान नहि करेंगे। निरु कों बच्चो सें बहोत लगाव थां। वोँ अपना बच्चा चाहती थि पऱ उसे हम् दोनों केँ करियर कि भि परवाह थि।
हमारी विवाह कों एक् साल होँ चूका थां औऱ हमारी ज़िन्दगी बहोत धीरे-धीरे चलरही थि। पऱ फिन हमारी ज़िन्दगी मे एक् तूफ़ान आया। एक् दिन निरु मेरेपास आयी औऱ हमेशा कि तरह मुझसे बातें करनेलगी।
नीरु: "प्रशांत, हम् लम्बे टूर पऱ कभी नहि गए, क्याँ हम् लोग किसीबीच वाली स्थान घुमने जाए, ३-४ दिन केँ लिये। आगे लॉन्ग वीकेंड भि आने वाला हें"
प्रशांत: "कोई स्थान सोची हें तुम्हे कि कहां जानां हें? मगर अभि समय बहोत कमबचा हें, इतना जल्द हम् सारी बुकिंग करवा नहि पाएंगे"
नीरु: "उसकी चिंता तुम् मतकरो। मे सभी सम्भाल लुंग। तुम् रेडी हौ याँ नहि?"
प्रशांत: "अगरसभी अच्छे सें मैनेज होँ जायेगा तौ मे तैयार हूं, पर्र तुम् अकेले केसे मैनेज करेगी? पूरा प्लान तौ बताओ"
नीरु: "बंदोबश्त हौ चूका हैं। जिजाजी औऱ दिदी यहा आँ रहे हैं। फिन हम् चारो घुमने जाएंगे। जीजाजी नें ट्रैन केँ टिकटबुक करदिए हें औऱ होटल भि बुक होँ गई, हें"
नीरुचहक रही थि औऱ बहोत एक्ससिटेड लगरही थि औऱ मे दंग थां कि उसने सारी तयारी पहले हि करली पऱ मुझसे अबपुछ रही थि।
प्रशांत: "सारा प्लान तोँ तुमने औऱ नीरज जीजाजी नें बना हि लिया हें। कब सें प्लान चलरहा थां? मुझे पहले क्यूं नहि बताया?"
नीरु: "मुझेपता थां तुम् मना नहि करोगे। मुझे भि कल जीजाजी नें फ़ोन करके बताया कि ये प्लान हें औऱ हम् दोनों कों उनकेसंग जानां हि पड़ेगा"
नीरु केँ घऱ मे उसकी माता-पिता केँ अलावा मात्र उसकी एक् बड़ी बेहनऋतु दिदी हैं। ऋतु दिदी निरु सें ७साल बड़ी हें औऱ उनकी विवाह लगभग६-७ साल पहले नीरजजी सें हुयी थि। जोँ अब रिश्ते मे मेरा साढु भइया हौ गए थें। नीरु कि दिदी कों मे भि दिदी कहकर हि बुलाता हूं औऱ वोँ दोनों मुझे प्रशांत नाम सें बुलाते हें क्यूं कि मे उनसे उमरा मे ४-५साल छोटा हूं।
Adultery ऋतू दीदी - Shaadi Ki Raat – New Episode
अगलेवीक नीरज जीजा औऱ ऋतू दिदी हमारे घऱआने वाले थें औऱ हम् सभी हमारे शहर सें ट्रैन सें निकलने वाले थें। पूरे सप्ताह निरुघऱ मे इधर सें उधरदौड रही थि औऱ तयारी मे लगी थि। साम कों दफ़्तर सें आने केँ बाद वोँ फ़ोन पर्र लग जाती औऱ अपनी दिदी औऱ जिजा केँ संगबात कर क्याँ लेना औऱ क्याँ नहि लेना कि तयारी करती। मुझे निरु कां एक्ससिटेमेंट देखकर बहोत अच्छा लगरहा थां औऱ मेरे चेहरे पऱ भि उसकोदेख स्माइल आँ जाती। कुछ महिनो पहलेजब मे निरु केँ संग उसकेघऱ गय़ा थां तोँ वहा नीरज जीजाजी सें भि मिला। इन दोनों जीजा साली कां नाता एकदम मस्ती वाला थां। दोनो एक् दूसरे सें हँसी मजाक करते रहते औऱ एक् दूजे कि टाँग खीचने कां कोई मौका नहि छोड़ते थें। वोँ दोनों जबसंग होते तौ एंटरटेनमेंट बारबार होता रहता थां। ऋतू दिदी सें सुना थां कि निरु शुरुआत सें हि अपने जीजाजी केँ मुहलग गई, थि औऱ बिना शरमाये उनसेसभी शेयर करती थि औऱ खुलकर बातें करती थि। ऋतू दिदी कां स्वभाव निरु सें उलटा थां। बहोत हि शान्त औऱ गम्भीर मगर समजाहदार थि। वोँ हाउसवाइफ थि औऱ आगे पीछे कां सारा नॉलेज रखती थि औऱ मौका पड़ने पर्र मुझे औऱ निरु कों भि समझती रहती थि। नीरु हसीन थि तोँ ऋतु दिदी भि काम नहि थि। दिदी कां वजन निरु सें थोडा ज़्यादा थां पर्र दोनों कि शकले बहुत मिलती थि औऱ खुबसुरती लाजवाब थि।
मै अपनीआदत केँ हिसाब सें ऋतु दिदी सें शरमाता थां औऱ ज़्यादा बात नहि करता थां। ऋतू दिदी हि आगे बढ़कर मुझसे बात करती औऱ मुझे नार्मल करने कि कोहिश करती थि। क्यूं कि निरुजब बोल्ना शुरुआत करती तौ मुझेसभी भूल हि जाते हैं। अबबात करते हें नीरज जीजा कि। नीरज जीजा औऱ ऋतू दिदी भि मेरी औऱ नीरू कि तरह अपोजिट थें। ऋतू दिदी शांत औऱ समझदार थि तोँ नीरज बहोत बातूनी औऱ हमेशा मजाक केँ मूड मे रहते थें। शायदये भि एक् कारण थां कि निरु कि नीरज जीजा सें बहोत अच्छी बनती थि। निरु चाहे कपडे खरीदती तोँ भि नीरज जीजा केँ पसन्द कां कलर याँ डिज़ाइन लेती। वोँ नए कपडेपहन कर मुझे दिखाती औऱ पूछती कैसीलग रही हूं। निरु तौ मुझेहर तरह केँ कपड़ो मे हसीन हि लगती थि तोँ मे शान्ति सें बोल देता कि अच्छी लगरही हौ। येह सुनकर वोँ मुझे सुना देती कि कैसी फिकी तारीफ़ कि हैं। जीजाजी होते तौ उसकी बहोत तारीफ़ करत। मुझे जिजा सें तारीफ़ करना सीखना चहिये। मात्र कपड़ो कि बात नहि थि, दूसरे मौको पऱ भि मेरा कम्पैरिजन हमेशा नीरज जीजा सें करती कि अगर जीजाजी होते तोँ ये करते याँ वोँ करते। एक् समझदार व्यक्ति कि तरह मे उसकीबात हमेशा हँसी मे टाल देता औऱ कभीमंद नहि किया औऱ नाँ हि मुझे बुरा लगता थां क्यूं कि मे जानता थां कि निरु कि आदत उसके जिजा सें बहोत मिलती हें औऱ मे एकदम उलटा हूं।
आखीर वोँ दिन भि आयाजब निरु केँ जीजा औऱ दिदी हमारे घऱआने वाले थें। वोँ लोग दोपहर बादसाम होते होतेआने वाले थें औऱ देररात कों हमें ट्रेन पकड़नी थि। नीरु सुभह सें हि एक्ससिटेड थि। इतनेदिन केँ लिए पहलीबार घुमने जारहे थें औऱ उसकोबीच पऱ जानां बहोत मनपसंद भि थां। उस सें भि बड़ी ख़ुशी थि कि संग मे जीजाजी होंग। वार्ना मेरेसंग कही घुमने जाने पर्र तोँ वोँ बोर हौ जाती थि। मेरेलिए भि अच्चा त। जब भि कही घुमने जाते तौ वोँ मुझे घुमा घुमाकर परेशान कर देती। अब वोँ सारी परेशानिया जीजाजी कों झेलनी थि।
नीरुघऱ मे वैसे तौ साड़ी नहि पहनती पर्र क्यूं कि जीजाजी आने वाले थें तौ उसने ख़ासतौर सें जिजाजी कि दि हुयी साड़ी पहनी थि उनकोखुश करने केँ लिये। साड़ी पहन वोँ मेरेपास आयी औऱ ख़ुशी केँ मारे मुझे थैंकयू थैंकयू बोलते हुए मेरेगले लगउछल रही थि। उसके मम्मो कां साइज बहुत अच्चा खासा थां औऱ उसके उछलने केँ संग हि उसके माँ मेरे सीने सें दबकर मुझेचोट मारते हुए गुदगुदी केँ संग मेरामूड भि बनारहे थें। साड़ी मे तौ वैसे हि वो दूसरे कपड़ो केँ मुकाबले कुछ अधिक हि सेक्सी लगती हें औऱ गजब धाती हें तोँ मैंने भि उसको अपने सें चिपका लिया औऱ एक् क्विक सेक्स कि डिमांड रख दि। मागर निरु नें नाँ बोल दिया। निरु नें बोलै कि जिजाजी केँ आने केँ बाद वोँ कोईकाम नहि करेगी, इसलिये वोँ अभि सें खानां बनाकर रख डेगी। मुझे अपने अरमानो कां गला घोंटना पद। नीरु रसोई मे काम पर्र लग गयीँ, थि औऱ दरवाजा बजते हि मैंने दरवाजा खोला। नीरज जीजाजी नें दरवाजा खुलते हि जोर सें "निरु" कि आवाज़ लगाई पऱ मुझेदेख हलका सां मुस्कुराये औऱ आगेबढ़ गए औऱ निरु निरु केँ नाम कि झाडीलगा दि। नीरु रसोई सें दौड़ती हुयीआयी। उसने एप्रन पहनरखा थां औऱ आते हि उछलकर जीजाजी केँ गलेलग उछलने लगी। मुझे दोपहर कि घटनायाद आँ गयीँ,। जब वोँ ऐसे हि मेरेगले लग उछली थि औऱ मेरामूड बन गय़ा थां। मै सोचने लगा अभि नीरज जीजा कि क्याँ हालत होगी। मुझे थोडा ऑक्वर्ड भि लगरहा थां पऱ निरु कि एक्साइमेंट देखकर मुझे हँसी भि आँ रही थि।
मैउन दोनों कों देखरहा थां कि पीछे सें ऋतु दिदी कि आवाज़ आयी औऱ मुझसे मेराहाल चाल पुछा। मे जब भि अपने ससुराल जाता हूं तौ निरु मुझेभूल जाती हें पर्र ऋतू दिदी मेरा बराबर ध्यान रखती हैं। मैनेऋतु दिदी कों अंदर लिया औऱ उनसे भि हालचाल पुछा। निरु औऱ जीजाजी अब तक अलग होँ कर नार्मल हौ चुके थें। तभी निरु कों अपने रसोई कां ख़याल आया औऱ "मेरी रोटीजल गई, " बोलते हुएभाग करफिन रसोई मे गयीँ,। जीजाजी भि उसके पीछे रसोई मे चलेगए ये कहतेहुए कि "निरु नें जीजाजी केँ लिए क्याँ पकाया हें"
मैने दिदी कों बैठने केँ लिए बोला।
ऋतु: "ये निरु एकदम पगली हैं। तुमको परेशान तौ नहि करती नं?"
प्रशांत: "नहि दीदि, मुझे अच्छा लगता हें उसकोइस तरहखुश देखकर। "
अंदर रसोई सें निरु औऱ जिजा दोनों केँ चीख़ने कि आवाज़ आँ रही थि औऱ मेरा ध्यान बारबार उधरजा रहा थां।
ऋतु: "तुम् परेशान मत होँ, इन दोनों कां शुरुआत सें ऐसा हि हैं। पूराघऱ सर पऱ उठे लेते हें"
थोड़ि देरबाद जिजाजी औऱ निरु दोनों रसोई सें बाहर् आए, एक् दूसरे केँ हाथों मे हाथ डाले औऱ चहकते हुये। निरु अपनी दिदी केँ पास जाकरबैठ गई, औऱ जीजाजी मेरेपास पड़े सोफेसीट पर्र आकरबैठ गए। उन दोनों कि बातें चालु हौ गयीँ, औऱ ऋतू दिदी बीचबीच मे थोडा बोल देती पर्र मे पुरे वक्तचुप हि रहा। उन लोगो केँ बीच बातें होतीदेख मैंने भि बातआगे बढ़ाने औऱ मेरी प्रजेंस दिखाने केँ लिएबात कि।
प्रशांत: "ट्रैन कितने बजे कि हैं, ए.सि। ट्रेन बुक कि हें?"
नीरज: "निरु कों ए.सि। स्लीपर मे सोने मे प्रॉब्लम होती हें इसलिये मैंने उसकेलिए नॉन-ए.सि। फर्स्ट क्लास क्प्म्पार्टमेन्ट बुक किया हें"
मेरी बिवी केँ बारे मे जौ जानकारी मुझे नहि थि वोँ जीजा कों ज़्यादा पता थि। मे अपनाबजट जोड़ने लगा। फर्स्ट क्लास केँ मुकाबले ए.सि। ३टिएर ज़्यादा सस्ता पड़ता औऱ ए.सि। भि मिलता। वोँ लोगफिन सें प्लान करनेलगे कि बीच पर्र जाकर वोँ क्याँ मस्ती करेंगे औऱ मे फिन सें लेफ्ट आउटफील करनेलगा। मैंने सोचा मुझेअब टॉपिक बदलना चेहये।
प्रशांत: "आपकी विवाह कों इतनेसाल होँ गए, आप् लोगखुश खबरीकब सुनारहे होँ?"
मैखुश हुआ कि मैंने अच्चा टॉपिक ढून्ढ कर उनकी बातचीत मे शामिल हौ पाउँगा पऱ एक् बारफिन मैंने मुह कि खायी। इतनीदेर सें जीजा औऱ निरु कि चहचहाने कि आवाज़ एकदमबंद हौ गयीँ, औऱ ख़ामोशी पसर गयीँ,। निरुअब एकदम गम्भीर होँ गयीँ, औऱ बोलीं।
नीरु: "मैंने तुम्हे कभी बताया नहि, दिदी कों मेडिकल प्रॉब्लम हें औऱ वोँ कन्सीव नहि कर सकती हें"
ऋतू दिदी नें निराशा मे अपनामुह झुका लिया औऱ निरु नें उनके कंधे पर्र हाथरख उनको सान्त्वना दि। ये प्रश्न पुछ मैंने बेवकूफ़ी कर दि थि औऱ मैंने जल्दी उनसभी सें माफ़ी मांगी।
दिदी नें मुझको गिल्टी फील नाँ करने केँ लिए बोलीं, कि इसमें मेराकोई दोष नहि, क्यूं कि मुझेपता हि नहि थां इस बारे मे। तभी जीजाजी नें माहौल कों लाइट बनया।
नीरज:"अरे तोँ क्याँ हौ गय़ा! निरु कों जौ बच्चा होगा वोँ मेरा हि तोँ होगा"
नीरु: "ओह्ह्ह्ह! आईलवयू जीजाजी, युआरद बेस्ट"
ये कहतेहुए निरु अपनीसीट सें उठी औऱ जाकर जीजाजी कि गोद मे बैठ गयीँ, औऱ उनकोगले लगा दिया औऱ जिजाजी नें भि उसकी नंगीकमर कों पकडे उसको जकड़ लिया।
Adultery ऋतू दीदी - Shaadi Ki Raat – New Episode
मै एक् बार तौ खुशहुआ कि मेरीवजह सें खराबहुआ माहौल फिनठीक हुआ पर्र फिन जीजाजी केँ शब्दो पऱ ध्यान दिया। क्याँ उनके कहने कां मतलबये थां कि वोँ निरु कों मम्मी बनायेंगे। उन्होंने कहा थां कि "निरु कों जौ बच्चा होगा वोँ मेरा हि तोँ होगा"
मैनेइन शब्दो पऱ ध्यान दिया पऱ बाकी किसी नें उस पर्र ध्यान नहि दिया। निरु तोँ उलटाखुश होकर अपने जीजा कि गोद मे हि बैठ गयीँ, थि। दिदी भि अपनी चिंता छोड़कर हलकी मुस्करायी। मै भि सोचने लगा शायद मैंने हि गलत सुना याँ फिनगलत मतलब निकला होगा। फिलहाल मेरी बिवी अपने जीजा केँ गले पड़ी थि। हलांकि ये पहला मौका नहि थां जब वोँ अपने जीजा सें इतने लगभग थि पऱ मे थोडा असहज महसूस कररहा थां पऱ बाकी तीनो कों ये सामान्य लगरहा थां तोँ मैंने भि इसको लाइटली लिया। नीरुफिन अपनी स्थान आकर बैठी औऱ जीजा साली मे टाँग खिचाई औऱ मजाक शुरुआत हौ गय़ा औऱ मे मात्र दर्शक हि बनारहा। ऋतू दिदी बीच मे अपने एक्सपर्ट कमेंट कर देती औऱ निरु कों डांटकर समझा भि देती।
हम् सभी लोगो नें डिनरकर लिया थां औऱ फिनसंग बैठे थें। थोड़देर प्लानिंग केँ बाद दिदी नें बोला कि उनका सामान तोँ पैक हें मगर हम् लोगो नें पैकिंग कि हें याँ नहि। उन्होंने सजेस्ट किया कि हमें पहले अपनेबैग पैककर लेने चहिये। मेरी लास्ट मिनट पैकिंग हि बाकी थि तौ मे उठ गय़ा। निरु भि उठ गयीँ,।
नीरु: "जीजाजी मैंने अपनीतरफ सें कपडे फाइनल करलिए हें पऱ आप् मेरी सहायता करो कि क्याँ लेना हैं। आप् मेरेसंग चलो"
दिदी: "तुम् लोग पैकिंग फाइनल करोतब तक मे रसोई कां काम समाप्त कर देती हूं फिन सजधजकर होंगे"
मैअब अपने बैडरूम मे आए औऱ पीछे पीछे निरु अपने जीजा कों लेकर अंदरआयी। मे अपनी पैकिंग सें ज़्यादा उन दोनों कों आब्जर्वर कररहा थां।
नीरु नें अपना सूटकेस खोलकर जीजाजी कों दिखाया। उसमे उसके कपडे पड़े थें। उसने एक् एक् करसभी बाहर् निकाले औऱ जीजाजी कों दिखाने लगी कि क्याँ रखा हें औऱ क्याँ नहि। कपडे निकलने केँ संग हि सूटकेस मे नीचे पड़े निरु केँ ब्रा औऱ पेंटी भि दिखने लगे। मुझे थोड़ी लज्जा महसूस हुयी कि इसतरह अपने अंदर पहनने केँ कपडे उसके जीजाजी बैग मे देखपा रहे थें पऱ उन दोनों पर्र कोई फर्क नहि थां। वोँ दोनों कपड़ो कों फाइनल करने मे लगे थें औऱ मेरी पैकिंग हौ गयीँ, तोँ मे उनको देखता रहा। पैकिंग होते हि हम् सभी बाहर् आँ गए। दिदी भि रसोई कां काम समाप्त कर बाहर् आँ गई, थि। टी.वी.चल रहा थां पऱ मात्र मे देखरहा थां। बाकी तीनो अपनेकल केँ प्लान बनारहे थें। आधे घंटेबाद दिदी नें आगे केँ काम समाप्त करने कों कहा। दिदी नें बोला कि अब हम् रेडी होँ जाते हैं। ख़ासतौर सें निरु कों रेडी होने मे अधिकसमय लगेगा तौ उसको जाने कों बोला।
नीरु: "जीजाजी आप् मेरेसंग चलो औऱ बताओ कि मे क्याँ पहनू"
नीरुअब अपने जीजा कों लेकर मेरे बैडरूम मे चली गई, औऱ दरवाजा बंद हौ गय़ा। अन्दर सें केवल निरु केँ चहकने औऱ खिलखिलाने कि आवाज़ आँ रही थि औऱ बीचबीच मे जीजाजी केँ हंसी कि। इधर दिदी मेरेसंग बातकर रही थि।
दिदी: "निरुघऱ मे सबसे छोटी हें तौ सबकी लाड़ली रही हैं। उसकी बचपने कि आदत तुम्हे अजीब तौ नहि लगती नं?"
प्रशांत: "बिलकुल नहि दिदी। घऱ चहकता हें तौ अच्छा लगता हैं। जब वोँ घऱ पर्र नहि होती हें तोँ घऱ सुना औऱ अजीब लगता हें"
दिदी: "मेरा पीहर होँ याँ मेरा ससुराल, जब तक निरु रहती हें तौ किसी बच्चे कि कमी नहि खलती। उसके जाते हि सन्नाटा छा जाता हें औऱ सभी उसकोमिस करते हें"
प्रशांत: "अच्छा हें उसकोसभी मिस करते हैं। मेरे जैसे कां तौ होना न् होनासभी एक् हें"
दिदी: "नहि, ऐसीबात नहि हैं। माँ बापू तुम्हारी बहोत तारीफ़ करते हैं। नीरज सें भि अधिक वोँ तुम्हे पसन्द करते हें"
दिदी सें बात करके थोड़ी शान्ति मिलरही थि पर्र बेडरूम सें लगातार आती आवाजो सें मे थोडा अनकम्फर्टेबल होँ रहा थां। मैंने दिदी कों भि सजधजकर होने कों बोल दिया। दिदी अबउठ खड़ी हुयी औऱ नीरज कों आवाज़ लगाकर बुलाया ताकि निरु रेडी होँ सके ताकिदेर न् हौ। दिदी अब गेस्ट रूम मे चेंज करने गई,।
मै अपने बैडरूम केँ दरवाजे तक पंहुचा औऱ अंदर सें आती जीजा साली कि मस्तियो कि आवाज़ मे मेरी अंदर जाने कि हिम्मत नहि थि। क्याँ पता क्याँ देखने कों मिले?मन मे कही न् कही एक् डरघऱकर गय़ा थां। मे वही सोफे सें लेकर बैडरूम केँ दरवाजे तक चक्कर लगतारहा। कुछ मिनट्स केँ बाद हि जीजाजी मेरे बैडरूम सें बाहर् आए। मै चुपके सें जीजाजी कों ऊपर सें नीचे देखते हुए निरिक्षण करनेलगा कि वोँ क्याँ करकेआये होंगे। उनकेबाल बिखरे हुए थें औऱ टीशर्ट पर्र खींचने कि वजह सें सिलवटे थि। मै अपने बैडरूम कि तरफबढा ताकि अंदर जाकर निरु कि खोजखबर लें सकू। पर्र जीजाजी नें बीच मे हि रोक दिया। जीजाजी नें बोला कि लड़कियो कों रेडी होने मे समय लगता हैं, हम् मर्दो कों नहि। हम् थोड़ी देरबाद जायेंगे रेडी होंने। उन्होंने मुझे बातों मे उलझाये २-३ मिनट रोकेरखा। फिन मैंने हि उन्हें कहा कि मुझे कपडे थोड़े आयरन भि करने हें तोँ मे अंदर जाता हूं। जीजाजी वहीं सोफे पर्र बैठ अपना फ़ोनचेक करनेलगे औऱ मे बैडरूम मे गय़ा। नीरु अल्मारी केँ सामने हि खड़ी थि औऱ केवल अपनी ब्रा औऱ पेंटी मे थि। मुझे देखते हि उसने दरवाजा बंद करने कों कहा। मैंने दरवाजा बंद किया औऱ टाइमिंग गिनने लगा। जीजजी केँ बैडरूम सें जाने केँ बाद सें लेकरअब तक २-३ मिनट्स हुए होंगे। क्याँ निरु इतना जल्द अपने कपडेखोल कर मात्र ब्रा औऱ पेंटी मे आँ सकती हें कि नहि। उसने साड़ी, पेटीकोट औऱ ब्लाउज जीजाजी केँ जाने केँ बाद इतना जल्दखोल लिए होंगे याँ जीजाजी केँ रहतेहुए हि उसने कपडेखोल दिए थें? याँ फिन होँ सकता हें कि निरु केँ कपडे स्वयं जीजाजी नें हि खोले होंगे तभी तोँ अंदर सें इतनी मस्ती कि अवाजे आँ रही थि। मैने अपने आप् कों डांट दिया कि मे भि क्याँ सोचरहा हूं। मेरे बाहर् बैठे रहते जीजाजी कि इतनी हिम्मत नहि हौ सकती हैं। उन दोनों केँ अंदर रहते तोँ मैंने दरवाजा खोलने कि कोशिश भि नहि कि थि। हौ सकता हें उससमय दरवाजा अंदर सें लॉक्ड थां। अबयेसभी चीजेपता करने केँ लिए तौ बहोत देर हौ चुकी थि। निरु नें अपना ब्रा निकाल दिया थां ताकि दूसरा मैचिंग कां ब्रापहन पाए।
Adultery ऋतू दीदी - Shaadi Ki Raat - Kahani ab aur interesting hogi
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