जरूरत है प्यार की - माँ बेटा - Real Story Continue Part 1
#1
दूरकही गाव मे एक् मां अपने बेटे कों उठारही हैं।
मम्मी: बेटा ओ बेटा उठजा कितनी देर तक सोयेगा।
बेटा: सोनेदो नाँ मां।
मम्मी: बेटा भूल गय़ा क्याँ आज तेरी शादि हैं आज केँ दिन भि भलाकोई सोता हैं। आज केँ दिन कां इंतजार सब लड़को कों बेसब्री सें होता हैं, औऱ तौ हैं कि सोरहा हैं चलउठ जल्द सें। टट्टी मैदान जा, मुखारि कर, खूब साबुन लगाके नहा, नये नये कपड़े पहनकर सजधजकर होजा। तेरेलिए प्यारी सि दुल्हनिया लेके आएँगे आज हम् जौ तेरेखूब सेवा करेगी, तेराखूब खयाल रखेगी औऱ तेरे कों सुधार देगीअब तोँ मेरीबात नहीं मानता हैं नाँ।
उठजा मेरा राजा बेटा।
बेटा: मुझे नहीं करनी विवाह वादी। मुझे सोनेदो बस।
मां: केसे नहीं करनी विवाह। विवाह नहीं करेगा तोँ बाल बच्चे नहीं होंगे औऱ बाल बच्चे नहीं होंगे तौ पीढीआगे केसे बढ़ेगी।
सभी लड़के मरते हैं विवाह करने केँ लिए औऱ एक् तौ हैं जिसे विवाह हि नहीं करनी।
बेटा: मै जनताहु कि सभी लड़के किसचीज केँ लिए विवाह करना चाहते हैं। औऱ विवाह भि उस लड़की सें जौ मेरे सें पाचसाल बड़ी हैं। अम्मा दिखती होगीउपर सें काली भि हैं। पापा कों पुरेदेश मे औऱ कोई नहीं मिली जोँ इसी कों मेरेगले बाँधना थां। उस कल्लू कों देखलो कितनी खूबसूरत पत्नि मिली हैं उसे।
मम्मी: इसतरह नहीं कहते बेटा, लड़की कां चरित्र औऱ उसके संस्कार देखे जाते हैं उसकी सुंदरता नहीं। बहोत खूबसूरत लड़की हैं पऱ उसके अंदर संस्कार नहीं हैं तौ क्याँ फायेदा। विवाह तौ करलेगा सुंदरता केँ कारण, पर्र उसके अंदर नाँ लाज होगी नां शर्म। नाँ वोँ तेरी इज्जत करेगी नाँ तेरे माता पिता कि। औऱ मुझे हि देख लेँ मै भि तोँ कालीहु पर्र तेरे बाबूजी मुझसे विवाह किये नाँ।
बेटा: पर्र मां एक् लड़की केँ अंदर दोनो तोँ हौ सकते हैं नाँ।
मां: बेटा हमारी औकात उतनी नहीं हैं कि अच्छे घऱ मे तेरी विवाह करसके इसीलिए इतनीदूर कररहे हैं। तेरे बाबूजी वाहन चलाके हम् लोगो कां किसीतरह पेटभर ते हैं। पता नहींमै औऱ तेरे बाबूजी कबचलबसस.
बेटा अपनी मम्मी केँ मुह केँ ऊपरहाथ रखकर कहता हैं कि
बेटा: नहीं मां ऐसा नां बोलोमै आप् लोग केँ बिनामर जाऊंगा आप् लोग केँ बिना नहींरह पाऊंगा।
मां: इसलिये तौ विवाह करहिहु जाने तेरीआदत पड़ जाये।
अब मै भि थक गई, हु खानां बनाते बनाते। बहौरीया आयेगी तौ वही खानां बनाके देगी।
बेटा: पऱ मां.
एक् अजीब सि खामोसी होती हैं।
इस अजीब खामोसी कों तोड़ते हुए उसकी मम्मी बोलती हैं.
मम्मी: बेटा आज तक मैनेकभी भि तेरे सें कुछ भि नहीं माँगा, एक् ग्लास पानी तक नहींमगर आज तेरे सें कुछ मांगती हु (एक् आस केँ संग अपने बेटे कों देखते हुए) तूँ चाहे तोँ मना भि करदेना मै तुझेही कुछ भि नहीं कहुंगी (अपने हाथों कों जोड़ते हुए बोलती हैं) बेटा यह विवाह करले अपने लिये नाँ सही मेरेलिए करले मेरीयह ख़्वाहिश पूरी करदे बेटा।
कुछदेर सांत रहने केँ बाद बेटा बोलता हैं
बेटा: ठीक हैं मम्मी अगर तेरीयही ख़्वाहिश हैं तौ मै तेरीयह ख़्वाहिश जरूर पूरी करूँगा। मैयह विवाह करने केँ लिए सजधजकर हु। मैयह विवाह करूँगा। अब तोँ खुश नां, चल जल्द सें हसअब।
यह सुनते हि मां कि आँखो मे आँसू आगये औऱ उसने अपने बेटे कों गले सें लगा लिया
मम्मी: बेटा अबदेर नाँ करजा जल्द सें मैदान मुखारि करकेनहा धोकर सजधजकर होजा। तेरे बाबूजी आते हि होंगे।
तभी बाहर् सें आवाज़ आती हैं कि अरे वोँ उठा कि नहींसो तोँ नहींरहा हैं अभि तक।
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आईये आप् सब कां परिचाये करवाता हु:
बेटा: राजू हमारे कथा कां मुख्य पात्र। 18 साल कां खूबसूरत लड़का पतला-दुबला लंबाई नं जादा न् कम। अपने माता पिता केँ कारण बहोत हि संस्कारी औऱ बहौत हि प्रतिभासाली। अभि अभि जवानी मे कदमरख नें केँ कारण लंबाई केँ संगसंग बहौतकुछ लंबा होगया हैं इसका। लम्बे कालेबाल, चेहरे पर्र मुछ कां नमो निशान नहीं। कुल मिलाकर जवान लड़का पर्र दिखने नें बच्चा।
मम्मी: गुलाब कली अपनेनाम केँ तरह हि हसीन औऱ संस्कारी। अपने लड़के कों अपनीजान सें जादा प्रेम करती हैं। यहकुछ 60 वर्ष कि होंगी औऱ बुड्ढ़ापे केँ कारण दिनों दिन बीमार होतीचली जारही हैं।
आवाज़: यह आवाज़ राजू केँ पापा कमलेश कि थि जोँ 62 वर्ष केँ होंगे। यह भि बुड्ढापे मे कदमरख चुके हैं औऱ इनकी दिली ख़्वाहिश हैं कि बेटे कि विवाह करके उसको ज़िमेदरिया देकेघऱ बार छोड़ केँ सन्यास लेले औऱ ईश्वर कि सेवा मे प्राण गवादे।
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स्टोरी चालू:
राजू अपनेदीन दायिक कामो कों करके आँ चुका थां औऱ मुह मे मुखारि भरकर आंगन मे लगे हैंडपंप कों चलारहा थां। राजू केँ पिता जीउसी हैंडपम्प सें निकलरहे पानी सें नहारहे थें। पापा केँ नहाने केँ बाद राजू भि जल्द सें नहा लिया। राजू केँ नहा लेने केँ बाद उसकी मम्मी गुलाब काली उसके लियेनये कपड़े (कुर्ता पायजामा) राजू कों पहनने केँ लिये दिये। राजू जौ कि पतला दुबला थां उसके हिसाब सें कुर्ता बहोत डिलादिख रहा थां पऱ खूबसूरत लगरहा थां। कुर्ता पायजामा पहन लेने केँ बाद राजू नें जब पांव मे अपनीनई चप्पल डाली तौ उसकी मम्मी गुलाब कली नें उसे रोकते हुएकहा
गुलाब कली : रुकजा बेटा पहले रंगना लगा लेँ फिन चप्पल पहन। रंगना लगाना शुभ होता हैं।
गुलाब कली नें बहौत प्रेम सें राजू केँ पैरो मे रंगना लगाया औऱ रंगना केँ सूख जाने केँ बाद राजू नें अपनी चप्पल पहनी औऱ रेडी होगया। गुलाब कली केँ आँखो मे ख़ुशी केँ आशु आगये औऱ उसने राजू कों गले लगाते हुए बोलीं
गुलाब कली : न् जानेतु कब बड़ा होँ गय़ा। कितना खूबसूरत लगरहा हैं किसी कि नज़र नां लगे।
इतना कहते हि अपने आँखो केँ काजल कों निकालते हुए राजू केँ कान केँ नीचे टिकालगा दिया। रेडी होजाने केँ बाद राजू औऱ राजू केँ पिता जी विवाह केँ लिए रवाना हुए।
राजू औऱ राजू कां परिवार छोटे सें बिलास जिले केँ छोटे सें गरीबगाव बिलासपुर केँ रहने वाले थें। राजू केँ पिता जीकार (टांगा) चलाकर अपना औऱ अपने परिवार कां पेट भरते थें। एसा नहीं थां कि राजू केँ पापा केँ पास जमीन नहीं थि, हा जादा नहीं पर्र एक् बीघा जमीन थि। जोकि राजू केँ पिता जी कां किसानी मे मन नहीं लगता थां तोँ उन्होंने कार चलना सुरु करदिया। राजू केँ पिता यह नहीं चाहते थें कि राजू भि कार चलाये बल्कि वोँ तौ यह चाहते थें कि राजू किसानी करे। वोँ यह अच्छी तरह सें जानते थें कि किसानी मे जादा मुनाफा हैं।
राजू कि विवाह 40 km दुर लाहाति नामकगाव मे तय कि गई, थि। इसगाव कां नाम लाहाति हि क्यु पड़ाइसे पीछे एक् कारण हैं हरबार इसगाव कि नदीयहा केँ किशानो केँ खेती कों लहा देती हैं। लहा देने सें मतलब हैं कि पानी कि कमी नहीं होने देती। इसी कारणइस गाव कां नाम लाहाति पड़ा।
इसी छोटे सें गरीबगाव मे एक् छोटा गरीब परिवार रहता थां जिसमे एक् महिला, एक् व्यक्ति औऱ दो लड़किया रहती थि।
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आईये आप् कां परीचेये करवाता हु:
रतन लाल: एक् 50 वर्ष कां ठरकी बुड्ढा। जौ नां तौ दिखने मे हसीन थां औऱ नां हि चरित्र मे। 50 वर्ष कि आयु मे हि बुड्ढापआ इतना ज़्यादा थां कि क्याँ कहना। मगर जोशकम नहीं थां ठरकएसी कि हर कुवारी औऱ जवान लड़की कों चोदना चाहते थें। हर दूसरी स्त्री कों देख केँ अपना लंड मसल देते थें। एसीबात नहीं थि कि इनकेपास पत्नि नहीं थि पर्र यह उसको चोदते चोदते थकगये थें औऱ नहीं चोदना चाहते थें। औऱ चोदते भि केसे लंड नें जोँ जवाब देदिया थां। लंड खड़ा होते हि झर जाता थां।
कमलावती : अपनेनाम कि हि तरह कलाकार। 45 वर्ष कि यह महिला बहौत हि खूबसूरत औऱ बहौत हि चुदासी औरत हैं। बड़ी मम्मों भरा शरीर औऱ मस्त बड़ीगोल गांड। अपनी जवानी कि दहेलिस् कों पारकर चुकी पर्र अपनी बुर कि आग कों सांत नहींकर पायी। औऱ करती भि केसे इसका पति रतनलाल थां बड़ा माधरचोद साले कां लंड खड़ा हि नहीं होताअब। पर्र कमलावती कों हमेसा सें हि लंबा औऱ मोटा लंड मनपसंद थां मगर क़िस्मत एसी कि 5 इंच कां छोटा लंड मिला। हर रात कों अपने पति कों चोदने केँ लिये विवस तोँ करती हैं पऱ आख़िर मे स्वयं अपनी बुर मे उँगली करकेसो जाती हैं।
रानी: 23 वर्ष कि एक् बहौत हि सुशील औऱ चरित्र वान लड़की। लंबाई न् जादा न् कम पऱ जिस्म मानो कयामत। बहौत ज़्यादा नां मोटी न् पतलीहर स्थान सें बिल्कुल सही। काले लम्बे घनेबल, बड़ीबडी आँखे, लाल गुलाब कि तरहहोठ, प्यारी सि कमर। सीने केँ उभार कि बातकरे तोँ क्याँ कहने। इतनी बड़ी औऱ प्यारी चुचियाँ सायद हि पुरेगाव मे किसी केँ पास हौ। माफ करियेगा इतने बड़ी औऱ मस्त चुचियो कों चुचे कहनासही होगा। अगर इनको घोड़ी बना दिया जाये तोँ इनके चुचेइस तरह लटकते होंगे मानोकोई दुधारू गाय कां बड़ाथन लटकरहा हौ। इससे भि अधिक कयामत इनके पीछे वाले हिस्से सें होती हैं। दो बड़े बड़े मस्त एकदमगोल चूतर आह्ह् मज़ा आगया। इतने बड़ी गांड कि मानो तरबुज रखा होँ। कोई भि इनकोदेख केँ यह नहींकह सकता थां कि यह कुवारी हैं यानीइस 23 साल कि गदराइ होने केँ बावजूद चुदी नहीं हैं। इस कि बदन कि बनावट केँ कारणसभी यही सोचते होंगे कि यह नं जाने कितनो सें चुदी होगी। इतना हि कहना होगा कि ईश्वर नें बड़ी फुर्सत सें बनाया होगा इनको। दुख इसबात कां हैं कि सभीकुछ इतना प्यारा मिला पऱ ईश्वर नें रंग काला (सवला) देदिया जोकि इनकी विवाह होने मे रोड़ा बनरही थि। पऱ अब क़िस्मत खुलने वाली थि।
छोटी: दूसरी लड़की रानी कि छोटी बेहन। यह अपनी बेहन सें कुछआठ साल छोटी होगीमगर बहोत हि चंचल औऱ बहौततेज पर्र बहोत प्यारी। इसके बारे मे आगे जानेंगे।
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आप् लोगयह समझरहे होंगे कि यह दोनो लड़किया रानी औऱ छोटीरतन लाल औऱ कमलावती कि बेटिया हैं। नहीं नहीं बिल्कुल भि नहींयह दोनो इनकी भतीजीया हैं। हा अपनेसही समझायह दोनो लड़किया रानी औऱ छोटी इनकेपास इनकेघऱ मे रहती हैं। परंतु प्रश्न यहउठता हैं कि इनके माता पिता कहा हैं? यह दोनो लड़किया रानी औऱ छोटीबिन मम्मी बाप कि हैं यानी अनाथ हैं।
रतनलाल औऱ कमलावती कि कोई संतान नहि थि। मगर उनकेघऱ मे दो लड़किया जोकि उनकी बेटी कि उमर कि थि।
मां बाप केँ नं रहने कां दुःख तोँ होता हि हैं पऱ यहदुख दूर हौ जाता हैं जब परिवार वाले अपनासमझ कर अपनी बेटी अपना बेटा समझकर पालन पोसन् करे तौ। परंतु यहदुख औऱ भि अधिक होँ जाता हैं जब परिवार वाले उनको अपनेघऱ मे अपनेपास तोँ रखते हैं पर्र केवल औऱ मात्र नौकर कि तरह। उनको खाने केँ लिए खानां तोँ देते हैं पर्र उससे ज़्यादा घऱ कां काम करवाते हैं।
जीहा आप् सहीसमझ रहे हैं रानी औऱ छोटी कां भि वहीहाल हैं। उनकेलिए वोँ घऱ नहीं बल्कि एक् जेल हैं जहा उनके काका औऱ काकी(रतन लाल औऱ कमलावती) जेलर हैं जौ सारादिन उनसेकाम करवाते हैं औऱ गलती याँ बहस करने पऱ उनको पिटते हैं। कमलावती घऱ कां एक् भि काम नहीं करती थि सारा कां साराकाम इन्ही दोनो लड़कियो (रानी औऱ छोटी) कों करना पड़ता थां। अगर कमलावती कां बस चलता तोँ हगने केँ बाद उन्ही दोनो सें अपनी गांड धुलवाती। जैसे जैसे दोनो लड़किया बड़ी हौ रही थि इधर कमलावती मन हि मन बहोत चिड़ती थि उनसे क्युकी वोँ अधिक खूबसूरत होतीजा रही थि। कमलावती अपना क्रोध निकालने केँ लिए रानी कों ताना मारती थि कि वोँ काली हैं औऱ उससेकोई विवाह नहीं करेगा।
विवाह हि एक् उपाय थां उसजेल जैसेघऱ सें बहारआने कां। परंतु जब कमलावती रानी कों ताना मारती थि कि वोँ काली हैं औऱ उससेकोई विवाह नहीं करेगा तौ रानी बहोत ज़्यादा दुखी हौ जाती थि औऱ रोने लगती थि। उसेइस जेल सें बस निकालना थां।
पऱ अब उसकी भाग्य खुल गई, थि क्युकी राजू कां नाता आगया थां। न् जाने केसे काका औऱ काकी दोनोलोग इस विवाह केँ लिएमान गये थें l मगर काका नें यहबात साफ तोऔर पर्र राजू केँ पापा ( कमलेश) सें कह दि थि कि यह विवाह बहोत हि सांति सें मंदिर मे होगी औऱ वोँ एक् भुटि-कोडडी नहीं देंगे दहेज मे। जोकि राजू कां परिवार भि गरीब थां उनकेपास पैसे नहीं थें कि राजू कि विवाह धूमधाम सें करसके इसलिये राजू केँ पिता जी काका(रतन लाल) कि कही बातो कों आसानी सें मानलिए।
यहबात तौ तैय थि कि काकी( कमलावती) राजू कों नहीं देखी थि नहीं तौ इतने हसीन लड़के सें रानी कि विवाह कभी नहीं होने देती। वोँ तोँ हमेसा सें चाहती थि कि इन लड़कियो कों बेकर सें बेकरघऱ मिले। मात्र काकी हि नहीं काका भि राजू कों नहीं देखे थें वोँ तोँ यही सोचे थें कि कोई आवारा, लफंगा औऱ सरबी होगा जोँ उनके हिसाब सें बहोत अधिक अच्छा थां रानी केँ लिए।
क़िस्मत सें राजू केँ पापा (कमलेश) रानी सें मिल चुके थें हुआयू थां कि राजू केँ पापा जब विवाह कि बात करनेरतन लाल केँ घऱ पहुँचे तौ रतनलाल घऱ पऱ थें नहीं। गाव मे जबकोई घऱ मे आता हैं तोँ पानी पिलाने कां रिवाज होता हैं। औऱ क़िस्मत सें पानी लेकर रानी हि राजू केँ पापा केँ पासआई थि। राजू केँ पापा रानी केँ संस्कार औऱ चरित्र देखकर मन मे हि यहठान लिए कि अपने बेटे कि विवाह इसी लड़की सें करेगे। औऱ हुआ भि यही कि राजू कि विवाह रानी सें तय हौ गयीँ,।
घऱ मे दोनो लड़कियो रानी औऱ छोटी कों बड़ी मुश्किल सें खाने कों मिलता थां, रहने औऱ पहनने कि तोँ बात छोड़ो। उसीघऱ मे रहने कों एक् छोटी सि गंदी अटारी थि जिसमे यह दोनो बहने जमीन पे चादरडाल केँ सोती थि। कमलावती जितनी हि खूबसूरत औऱ चुदासी स्त्री थि उससे अधिक हरामी कुतिया स्त्री भि थि। उसने दोनो बहनो सें यहसाफ तोऔर पर्र कह दिया थां कि मेरे सोने केँ बाद सोगी औऱ मेरे जागने सें पहले जगोगी औऱ जिसदिन एसा नहीं होता थां उसदिन दोनो बहनो कि जमकर पिटाई होती थि। दोनो बहनो कों अपनी काकी कमलावती केँ फटे पुराने कपड़े पहनने पड़ते थें। छोटी जोँ अभि उमर मे छोटी थि उसे उतना दिक्कत नहीं होती थि पुराने कपड़े पहनने मे परंतु रानी जिसका शरीर जवानी सें अधिकभर गय़ा थां उसको बहोत परेसानी होती थि। अपने बड़ी चुचियो कों अपने सीने पर्र संभलना कोई छोटीबात थोड़ी थि उपर सें जबहर स्थान सें फटा ब्लाउस हौ। ब्लाउस भि एसा कि कही पऱ कखाउरी केँ बाल दिखते थें तोँ कही पऱ मम्मों कि लकीर धीरे-धीरे देखने कों मिलजाति। चुकी कमलावती कि चुचियाँ रानी केँ अंतर मे कम थि तौ उसको ब्लाउस भि छोटा लगता थां पर्र रानी कों कमलावती केँ छोटेफटे ब्लाउस मे हि किसीतरह अपनी चुचियो कों कैद करना पड़ता थां जौ कि नां मुमकिन सां लगता थां। बेचारी रानी कों बहोत दिक्कत होती थि अपनी मम्मों कों उस छोटे सें ब्लाउस मे बंद करने मे मानो मम्मों उस ब्लाउस केँ अंदरबंद नहीं होना चाहती हौ। मम्मों तोँ मानो खुले सीने पर्र मस्त लहराना चाहती हौ औऱ अपना हसीन बड़ाआकर दिखाना चाहती होँ। मगर रानी कों यह मंजूर नहीं थां वोँ इन बड़ी औऱ गोल चुचियो कों अपने पति केँ सिवा किसी औऱ कों दिखती फिरे इसलिये वोँ चुचियो कों ब्लाउस केँ अंदर हि रखती थि।
रानी कि जवानी कमलावती केँ हि नजरो मे बस नहीं चढ़ी थि बल्कि कमलावती केँ पति रतनलाल केँ आँखो मे खूब चढ़ी थि। बुड्ढे कि ठरकएसी कि मानो आँखो सें हि मा चोदेंगे। रतनलाल कि आँखो सें रानी कि चुचियाँ भि नहींबच पाई, बुड्ढा रानी कों चुदासी नजरो सें देखता थां हमेसा रानी कि मम्मों कि लकीर कों देखने केँ फिराक मे रहता थां मानो मम्मों कों मुह मे भरकरबस चूसने लगेगा। रानीयह बात भालीभति जानती थि कि उसका बुड्ढा काका उसकी जवानी कों चखने केँ फिराक मे हैं इसीलिए रानी अपने आप् कों बहोत बचाती फिरती थि। मगर बुड्ढा कुछ नं कुछ तरकीब निकाल हि लेता थां अपनी आँखो कों सेकने केँ लिए। जब कभी रानीघऱ मे झाड़ू-पोछा करहि होती थि तोँ बुड्ढा काका जवान रानी कों हि देखरहा होता रानी केँ बड़े बड़े चूतरो कों पेटिकोट् भि न् संभाल पाता औऱ अपना जलवा दिखाते हुएरतन लाल कों अपनीओर खिचता। यहहाल मात्र रतनलाल कां हि नहीं थां बल्कि पुरे लाहाती गाव केँ आदमियो कां थां। गाव केँ बच्चे, जवान औऱ बुड्ढे रानी केँ गांड केँ दीवाने थें रानी केँ चूतरो केँ दर्शन करने केलिए लोग उसकेघऱ केँ आसपास मंडरते रहते थें जिस कारण कमलावती रानी कों औऱ नहीं पसन्द करती थि।
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आगे क्याँ होगापता नहीं। क्याँ राजू रानी कों मनपसंद करेगा? क्याँ उसे अपनी पत्नि मनेगा? याँ मात्र औऱ मात्र अपने मां केँ लिए रानी सें विवाह करेगा।
आगे जानने केँ लिए मेरेसंग जुड़े रहे औऱ पढ़ते रहेइस कथा कों।
मुझे स्पोर्ट करिये स्टोरी कों like, comments करिये औऱ मजे लेकरकथा कों पढ़ते रहिये
आप् सब कां बहोत बहोत ध्यनवाद मेरीइस किस्सा कों पढ़ने औऱ प्रेम देने केँ लिए ❤
जरूरत है प्यार की - माँ बेटा – New Episode
नयी किस्सा केँ लिए बहोत बहोत बधाई। हीरो कों 18 करदो भइयायदि आप् लड़की कों हीरो सें उम्र मे बड़ी दिखाना चाहते हौ तौ रानी कि उम्र 21 करदो। परन्तु हीरो केँ माता पिता केँ उम्र अधिक दिखाया आपने इसका कारण तोँ एक् हि हौ सकता हैं हीरो कि मम्मी देरी सें गर्भवती हुइ होगी। बाकीसभी ठीक हैं। आपसे एक् विनती हैं स्टोरी साफ सुथरा रखना हमारा कहने कां मतलबयह हैं कि हीरोइन रानी सिर्फ़ हीरो कि रहे। हीरो हि अपना अल्फा मेल हौ तोँ अच्छा हैं। ऐसे हि कथा कि आशा करता हूं। शुक्रिया
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#2
बिलासपुर सें 40km दूर लाहाती गाव केँ एक् छोटे सें घऱ केँ एक् कमरे मे पति पत्नि लडरहे हैं आईये देखते हैं.
पत्नि: लंड तोँ खडा होता नहीं तुम्हारा औऱ हमेसा दूसरी स्त्री औऱ लड़कियो कों चोदने केँ फिराक मे रहते होँ। जब लंड हि नहींखडा होगा तौ चोदोगे केसे??
पति: कम बोलाकर समझी। रांड नहीं तोँ। रंडी कि औलाद, कुतिया साली। तेरे सें कितनी बारकहा हु कि मेरे सें सही सें बात कियाकर। समझी?
पत्नि: क्याँ कम बोलू, सही तौ बोलरही हु, अपनी पत्नि कों तोँ चोद नहीं पाते हौ औऱ चले होँ दूसरी महिला कों चोदने। कभीमुझ पे ध्यान दिया हैं पता नहींकब सें बुर मे उँगली करके बुर कों सांतकर रहीहु।
पति: रंडी माधरचोद कुतिया साली बहोत चुदासी हैं जा सांड कां लंड लेलेतब सायद तेरी बुर सांत होजाए। चुदासी हैं, बुड्ढी होगयी मगर चुदना हैं। चल लंड चूस केँ पानी निकाल।
यह दृष्य मे दोनो पति पत्नि बिल्कुल नंगे हैं। पत्नि चारपाई पे बैठी हैं औऱ पति पत्नि केँ सामने 5 इंच कां पकपका लंड लिएखडा हैं
पति जौ कि 50 वर्ष अधिक कां लगता हैं नं जिस्म मे दम हैं नाँ हि लंड मे। मगरठरक इतनी कि दूसरी जवान औऱ कुवारी लड़कियो औऱ औरतो कों चोदना चाहता हैं। लंड नें तौ मानोसंग देना हि छोड़ दिया बड़ी मुश्किल सें खडा होता औऱ खडा होते हि झर जाता हैं मानोकुछ हुआ हि नहीं।
वहीं पत्नि जौ कि 45 वर्ष केँ आसपास होगी दिखने मे अभि भि बिल्कुल हसीन औऱ जवान। बड़ी बड़ी चुचियाँ, मस्त जिस्म औऱ बड़ी सि गांड। जवान कहनागलत न् होगा क्युकी जितनी चुदासी जवानी मे होती हैं उतनी हि चुदने कि ख़्वाहिश इनके अंदरआज भि हैं। हमेसा सें लंबा औऱ मोटा लंड कि चाहत थि मगर भाग्य सें 5 इंच कां बिनकाम कां लंड मिला जोँ नां तोँ इनकेमन कों भाता थां औऱ नां हि इनकी बुर कि प्यास भुजाता पाता।
पत्नि अपने पति केँ पकपके लंड कों छूना भि नहीं चाहती मगर उसका पति उसकामुह पकड़कर अपना लंड उसकेमुह मे डाल देता हैं।
नां चाहते हुए भि पत्नि उसके लंड कों चूसने लगती हैं। अभि कुछदो मिंट्स हि हुए होंगे कि उसका पति उसकेमुह मे झाड़ देता हैं। लंड कां पानी निकाल जाने केँ बाद पति वैसा हि नंगा चारपाई पे करवटलेट केँ सो जाता हैं औऱ अपनी पत्नि कों गर्म करके छोड़ जाता हैं। बेचारी पत्नि इसउमर मे इतनी हसीन होने केँ बाद भि तड़पती रहती हैं चुदने केलिए बेताब रहती हैं। यह कहनागलत नां होगा कि अगरकोई औऱ व्यक्ति इसके स्थान होता तौ इसउमर मे भि इतनी खूबसूरत पत्नि कों रातदिन मात्र चोदता हि रहता। उसकी बड़ी बड़ी चुचियो कों खूब दबता, चाटता औऱ चूसता औऱ अपने लंड कों उसकी बड़ी सि गोली गांड औऱ प्यारी सि बुर मे डालकर केवल चोदता रहता।
खैर कुछदेर बीतने केँ बाद उसके कानों मे अपने पति कि खर्राटो कि आवाज़ सुनाई देनेलगी, अपने पति कों मुड़ केँ देखती हैं औऱ नं जाने क्याँ सोच केँ अपनी नंगी गीली बुर कों सहलाने लगती हैं। औऱ अपनी बुर मे दो उँगली डाल केँ तेजी सें आगे पीछे करने लगती हैं।
पत्नि: अह्ह्ह्.आह्ह्.अरेरे.आह्ह्.कोई चोदो मुझे चोदो नां अपना मोटा लंबा लंड मेरी बुर मे डालो नां चोदो चोदोखूब चोदो.अह्ह्ह्.आह्ह्.अम्म्.
पूरे कमरे मे तेज सिक्सिकारियो कि अवाज गूंजरही थि। कमरे मे रोशनी थि एक् तरफ पति नंगा हि सोयाहुआ थां तोँ दूसरी तरफ पत्नि माधर्जात नंगी हौ कर अपनी बुर मे उँगली कररही थि। अपनी एक् हाथ कि दो उंगलियो कों बुर मे तेजी सें चलारही थि तौ दूसरे हाथ सें अपनी दांयी मम्मों दबारही थि। कभी एक् मम्मों तोँ कभी दूसरी मम्मों केँ निप्पल कों कस केँ मरोड़ रही थि। एक् तोँ सफ़ेद शरीरउपर सें काले निप्पल मम्मों औऱ उसके शरीर कि हुस्न मे चारचंद लगारहे थें। काले निप्पल्लो कों इसतरह मरोड़ औऱ नोचरही थि कि मानो निप्पल्लो कों मम्मों सें अलगकर देगी। अभि कुछ 5 मिंट्स हि हुए होंगे कि पत्नि अचानक रुक गई, अपनी बुर सें अपनी दोनो उंगलिया निकली औऱ उसमेलगे गिले औऱ चिपचिपे सफेदरस कों देखने केँ बाद अपनेमुह मे भरकरमजे सें चूसने लगी। चूसने केँ बाद पत्नि उठी औऱ नंगी हि किचन कि तरफ चलनेलगी। किचन मे पहुँच कर.
पत्नि: यह बेलन नहींदिख रहा, कहा रख दियाइन रंडी कि बच्चियों नें (बेलन कों अन्धेरे मे ढूंढते हुए)। इस रंडी कि बच्ची नें कही अपने बुर मे तोँ नहींडाल लिया, साली रंडी कि गांड भि तोँ बहोत बड़ी हैं डाल हि लिया होगा।
तभी बेलनमिल जाता हैं औऱ पत्नि उसे लेकर वापिस अपने कमरे मे आँ जाती हैं। 5 मिंट्स पहले जैसा उसनेरूम छोड़ा थां बिल्कुल वैसा हि पाया अपने पति कों नंगा सोतेहुए। पत्नि नंगी हि बेलन कों लेकर जमीन पर्र बैठ जाती हें औऱ बेलन कों बड़ी हसरत देखते हुए बोलती हैं
पत्नि: एक् तूँ हि हैं जौ मेरी बुर कों कुछ लम्हा केँ लिए सांत तोँ करदेती हैं।
यह कहते हि बेलन कों लंड समझकर अपनेमुह मे लेकर चूसने लगती हैं औऱ कुछदेर चूसने केँ बाद बेलन पे ढेर साराथूक गिराकर अपनी बुर केँ मुह पे रखती हैं औऱ आह्ह् केँ संग बेलन कों अपनी बुर मे उतार देती हैं औऱ बहोत तेजी सें बुर मे बेलन कों आगे पीछे करने लगती हैं.
पत्नि: अरे माँ रे.आह्ह्.अह्ह्ह्.अम्म् चोदो औऱ जोर सें चोदो फाड़डड दो मेरी बुर कों.आह्ह्.अगह्ह्ह् लेलो लेलो मेरी
चोदो मुझे अपनी रंडी बनाके चोदो अपनी रंडी बनालो चोदो.
पूरे कमरे मे उसकी सिसक्सिकारियो औऱ बुर कि चपचप कि आवाज़ गूंजरही थि। कुछदेर केँ बाद बेलन कों अपनी बुर सें निकाल केँ अपनेमुह मे लेके चूसने लगती हैं। औऱ अपनी चुचियो कों दबाते हुए बेलन केँ रसभरे हिस्से कों खूबमजे सें चुसती हें।
पत्नि: पिलो बहोत तड़पाती हैं यह मम्मों इसको दबाओखूब दबाओआह्ह् चोदोखूब चोदो आह्ह्। उसकेमुह सें यह शब्द अपने आप् निकलरहे थें जोँ इसबात कां सबूत थें कि वोँ कितनी चुदासी होगी। उस समय वोँ इतनी अधिक चुदासी थि कि अगर उसको कुत्ते कां लण्ड भि मिल जाता तोँ उसको अपनी बुर मे डाल केँ कुत्ते सें हि चुदवा लेती।
थोड़ी देर बेलन कों चूसने औऱ मम्मों कों दबाने केँ बाद वोँ घोड़ी बन जाती हैं। अपनी बड़ीगोल औऱ गोरी गांड कों सहलती हैं औऱ गांड केँ छेद कों कुरेदती हैं। अगरइस लम्हा कोईउस स्त्री कों इसतरह देखले अपनी बड़ीगोल औऱ गोरी गांड कों बाहर् निकाले हुए तौ उसकोवही पटक केँ चोददे औऱ अपना लंड उसकी गांड मे डालदे। अरे आप् हि लोगइस तरह किसी स्त्री कों देख लेँ तौ वहीपटक केँ चोदेंगे कि नहीं। प्रेम सें गांड कों सहलाने केँ बाद अपने चूतरो पे बहोत तेज सें चपात लगाती हैं तीनचार चपाट गांड पे मारने केँ बाद बेलन पे ढेर साराथूक गिराती हैं औऱ अपने गांड केँ छेद पे बेलन कों रगड़ती हैं। औऱ फिन थोड़ी देरमजे लेने केँ बाद अपनी गांड मे बेलन कों डालती हैं।
पत्नि: अह्ह्ह् औऱ गांड मे बेलन कों तेजी सें आगे पीछे करने लगती हैं कुछदेर बाद गांड सें बेलन कों निकाल केँ वापिस अपनी बुर मे डाल लेती हैं औऱ बेलन सें हि अपने आपको चोदने लगती हैं आह्ह्.आह्ह्.चोदो चोदो अपनी रंडी बनालो चोदो.आह्ह् अह्ह्ह्। औऱ बहोत तेजी तेजी सें अपनी बुर मे बेलन डालने लगती हैं औऱ आख़िर मे एक् तेज आह्ह् केँ संग जमीन पे लेट जाती हैं।
बेलन अभि भि महिला कि बुर मे फसा थां मगर उसकी बुर सें सफेदरस बहरहा थां जोकिइस बात कां सबूत थां कि थोड़े देर केँ लिए हि सहीमगर उसकी बुर सांत होँ गयीँ, होगी। थोड़ी देर तक लेटी रहने केँ बाद पत्नि उठती हैं औऱ अपनी बुर मे फसे बेलन कों निकाल ती हैं औऱ उसमेलगे बुर केँ सफेदरस कों मुह मे भरकर चूसने लगती हैं। चूस लेने केँ बाद बेलन कों बगल मे रखती हैं औऱ चरपाइ सें अपने पेटिकोअट् कों उठाकर अपनी बुर कों साफ करती हैं।
इस बेलन चुदाई केँ बादउस महिला कों बहोत संतुष्टि मिली थि नं जाने क्यु पऱ उसकी आँखे मदहोसी मे बन्द होनेलगी औऱ आख़िर मे अपने चेहरे पर्र मुस्कुराहट लेकर अपने नंगे पति केँ बगल मे नंगी हि चरपाई पे सो जाती हैं।
मुझे लगता हैं कि आप् लोगोने यह अंदाज़ा ज़ुरूर लगा लिया होगा कि यह पति पत्नि आख़िर मे हैं कौन??जी हैं यह पति पत्नि रानी केँ काका काकी औऱ राजू केँ होने वाले सासू माँ ससूररतन लाल औऱ कमलावती थें। जोँ यह बुर चुदाई कां खेलखेल रहे थें। यहबात तौ तय थि कि राजू कों दूरदूर तक इसबात कि भनक नहीं थि कि जौ लंड उसके पैरो केँ बीच मे लटकरहा थां असल मे वही लंड कि ज़रूरत कमलावती कों थि।
खैरइस बुर चुदाई औऱ बेलन चुदाई कां खेल करीब-करीब रात केँ 10 बजे सें 12 बजे तक चला होगा। जोकिगाव मे सब लोगों कों रात मे जल्द सोने कि आदत होती हैं जिस कारणयह चुदाई कां खेलहर घऱ मे इस वक़्त सें चालू होँ जाता होगा औऱ रातरात तक चलता होगा।
रतनलाल औऱ कमलावती केँ घऱ मे मात्र रतनलाल औऱ कमलावती हि नहींजाग रहे थें बल्कि एक् लड़की भि जागरही थि जौ कि अपने हि ख्यालो मे खोयी हुइ थि। वोँ लड़की रानी थि हालाँकि रोजरात कों पूरेघऱ मे केवलतीन लोग हि जागते थें। औऱ रोज कि यही दिनचर्या थि।
रानी अटारी मे लेटे लेटेरोज अपने काका काकी कि गंदी गंदी बाते औऱ सिक्सिकारिया सुनती थि। जोकि रानी भि जवान थि उसका जिस्म भरा थां चुचियाँ बड़ी थि औऱ गांड तोँ तर्बुज़ जैसी। इन आवाजो कां रानी पऱ भि असर होता थां। अपनी रंडी काकी कि मस्त चुदासी आवाजो कों सुनकर रानी कि बुर मे भि पानी कां रिसाव होता थां। कभी कभार मस्त होकर रानी भि अपनी चुचियो कों फटे ब्लाउस केँ ऊपर सें हि दबाती थि। यह कहनागलत नां होगा कि रानी वोँ सभीकुछ जानती थि जोँ एक् पति पत्नि केँ बीच मे होता थां। वोँ जानती थि कि चुदाई क्याँ होता हैं, वोँ जानती थि कि लड़कियो कों मोटे औऱ लम्बे लंड हि क्यु मनपसंद होते हैं, वोँ जानती थि कि चुदाई केँ वक्त जितनी गंदी बातेकरो उतना आनंदआता हैं, वोँ यह भालीभति जानती थि कि अगर जीवन मे खूबमजे लेना हैं तोँ चुदाई कां होना बहोत जरूरी हैं, इसकेसंग संग औऱ भि बहोत कुछ जानती थि अपनी रानी। मगर रानीकभी भि अपनी बुर मे उँगली नहीं करनी चाहि, मन तौ बहोत करता थां पर्र वोँ अपनीसील पैक बुर कों अपने पति केँ लिएबचा कर रखना चाहती थि। वोँ अपने होने वाले पति कों वोँ सारेसुख देना चाहती थि जोँ एक् पत्नि अपने पति कों देती हैं।
परंतु आज रानीअलग हि दुनिया मे खोयी थि अपने विचारो कि दुनिया मे। उसको तौ आजयह भि नहींपता थां कि कब उसके काका कि बुर चुदाई चालू हुईँ औऱ कब काकी कि बेलन चुदाई ख़त्म। आख़िर रानीसोच क्याँ रही थि??वोँ अपने काका कि कही बातो कों सोचरही थि। काका कि सुनी बातो कों बड़ीदेर तक सोचती रही। काका नें कहा थां कि उसके होने वाले पति कां नाम राजू हैं काका नें यह भि कहा थां कि यह लड़का एक् नंबर कां लफंगा, आवारा, गवार, दारूबाज हैं जौ अपने माता पिता पर्र एक् बोझ हैं। यह कहनागलत नां होगा कि यही मुख्य कारण थां जिससे रतनलाल औऱ कमलावती इस विवाह केँ लिए रेडी होँ गये थें।
वहीसोच रही थि जौ एक् लड़की अपनी विवाह सें पहले सोचती हैं। कि न् जाने उसका होने वाला पति कैसा दिखता होगा? क्याँ वोँ भि रानी कि हि तरह काला(सावला) होगा याँ फिन सफ़ेद चिट्टा बहोत खूबसूरत दिखता होगा। क्याँ उसका पति उससे प्रेम करेगा?याँ नहि। याँ फिन उसको केवल औऱ केवल एक् रंडी बनाके रखेगा ((रानी केँ मन मे यहबात इसलिये आई क्युकी रानी नें यहबात बहोत बारसुन रखा थां कि एक् आवारा, लफंगा, कमीना, दारूबाज लड़का अपनी पत्नि कों प्रेम करना तोँ दूर कि बात, केवल औऱ केवल अपनी रखैल अपनी रंडी केँ सिवा औऱ कुछ नहीं समझता। किसी रंडीखाने कि रंडी कि तरहजब मनकरे तब चोदता हैं औऱ बात नां मानने पऱ खूब पिटाई करता हैं)) क्याँ उसके सासू माँ ससुरजी उसको मानेंगे याँ फिन काका काकी कि हि तरह उसकेसंग नौकरो जैसा व्यवहार करेंगे?उसका होने वाला ससुराल कैसा दिखता होगा? क्याँ काका काकी केँ घऱ सें बड़ा होगा याँ फिन छोटा होगा?अगर उसघऱ मे एक् हि रूमहुआ जहासभी लोग सोते होंगे तौ वोँ अपने होने वाले पति सें प्यारी केसे करेगी? क्याँ उसका पति उसी एक् कमरे मे सबके सामने उसको रंडी कि तरह चोदेगा? याँ फिन चुपके सें खेत मे लेजाकर? याँ फिनघऱ केँ पीछे? याँ फिन गाये केँ तबेले मे उसको कुतिया बनाकर चोदेगा? यह प्रश्न उसकेमन मे आते हि उसनेयह सोचा कि उसके ससुराल मे गाये भैसों केँ तबेले होंगे कि नहीं?क्याँ घऱ मे एक् हि रूम होने केँ कारण उसकी चुदाई उसके सासू माँ ससुरजी भि देखेंगे? क्याँ उसकाकोई देवरु भि होगा याँ ननदी याँ फिन जेठ जेठानी? अगर होंगे तौ वोँ सभी भि उसकी चुदाई देखेंगे? एक् लम्हा रुकने केँ बाद उसनेसोच कि अगर जेठ जेठानी होंगे तोँ वोँ भि तोँ चुदाई करते होंगे क्याँ वोँ सबके सामने चुदाई करते होंगे? फिन उसने सोचा कि होँ सकता हैं कि उस परिवार जिस परिवार मे वोँ जारही थि उसमे बुर चुदाई कां खेल सबके सामने किया जाता हौ?
अगरघऱ मे चुदाई खुलेआम होती होगी तौ कोई भि मर्द किसी भि स्त्री कों जब चाहेतब चोद सकता होगाजिस तरह जाहेउस तरहचोद सकता होगा कुलमिलाकर उसघऱ कि औरते एक् रंडी केँ समान होंगी। वोँ रंडी जिसे बुर चुदाई सुख तौ खूब मिलता होगा पर्र संगसंग हि उसे इज्जत औऱ प्रेम भि दिया जाता होगा। अगर एसहुआ तोँ रानी कों भि अपने पति केँ सिवा दूसरे मर्दो ससुरजी, जेठ औऱ देवरो सें भि चुदना होगा। हौ सकता हैं कि उसघऱ कि औरते कपड़े हि नं पहनती होँ माधर्जात नंगी होकर पूरेघऱ मे घुमती होँ अपनी मम्मों औऱ अपनी गांड दिखाते होँ जिससे मर्दो कों चोदने मे आसानी हौ औऱ वोँ जब जाहे जिसे जाहे आहिस्ता चोदसके। क्याँ उसघऱ केँ मर्द भि नंगे घूमते होंगे अपना लंड दिखाते हुए जौ कि घऱ कि औरतेउस लटकते लंड कों देखे औऱ जब जाहेतब उस लटकते लंड कों मुह मे भरकरखूब चुसे औऱ अपनी बुर औऱ गांड मे लंड डाल केँ अपनीखूब चुदाई करवाये। क्याँ वहा छोटे बच्चे भि होंगे जौ यहसभी देखते होंगे, खैर छोटे बच्चो कि तोँ लुल्ली होती हैं वोँ कर भि क्याँ लेंगे। याँ होँ सकता हैं कि जबघऱ केँ सब मर्दकाम सें बाहर् चले जाये तोँ औरतें अपनी चुदासी कों मिटाने केँ लिए उन्ही छोटे बच्चों कि लुल्ली कों मुह मे भरकर चुसती हौ। याँ होँ सकता हैं कि उन्ही बच्चो सें अपनी चुचियो कों डबवाती हौ औऱ चुस्वाती हौ। याँ होँ सकता हैं कि उन्ही छोटे बच्चो सें अपनी चुते औऱ गांडे चटवाती हौ औऱ उँगली करवाती होँ। वोँ बच्चे भि मजे लेकर चूतों औऱ गांड केँ छेदों मे उँगली करते हौ औऱ मजे सें चाटते हौ। हौ सकता हौ कि यह छोटे बच्चे होंहि बड़े माधरचोद जौ हर वक्त चुचियो सें दूध पीने केँ फिराक मे रहते हौ। हौ सकता होगा कि इन बच्चो कों जबकभी मूतआती होगी तौ यह बच्चे घऱ कि औरतो केँ पास जाते होंगे औऱ कहते होंगे कि मुझेमूत आई हैं औऱ वे औरते बड़े प्रेम सें पहले तोँ बच्चो केँ गालो कों चूमती होंगी औऱ फिन उनको अपनीगोद मे बिठाकर उनकी लुल्ली कों अपनेमुह मे भरकर उनकेमूत कों पीजाति होंगी।
ध्यान दीजियेगा यह बातेयह प्रश्न मात्र औऱ मात्र रानी केँ दिमाक मे चलरहा थां। यहसभी उसकीबस एक् कल्पना केवल थि। बेचारी रानी सचाई सें अंजान थि उसे राजू औऱ उसके परिवार केँ बारे मे बिलकुल भि कुछपता नहीं थां। बस एक् बार वोँ राजू कि पापा (कमलेश) सें मिली थि जब राजू केँ पापा पहलीबार रानी केँ काका केँ घऱआये थें। राजू केँ पापा यानी अपने होने वाले ससुरजी सें उसनेबात भि कि थि। बातचित सें तौ उसके ससुरजी बहोत सभ्यलगे औऱ उनकी सभ्यता सें अंदाजा लगाया जा सकता थां कि उनका परिवार कैसा होंगा परंतु अपने होने वाले पति राजू सें नहीं मिली थि वोँ यह नहीं जानती थि कि राजू कैसा हैं। असल मे रानी अपने काका कि बातो सें परेशान थि काका कां कहना थां कि राजू एक् आवारा, लफंगा, कमीना, दारूबाज लड़का हैं परंतु राजू केँ पापा कि सभ्यता केँ हिसाब सें राजू संस्कारी होगा। वोँ कहते हैं न् कि आम केँ पेड़ों मे लगेआम भि खट्टे निकल जाते हैं तोँ पता नहीं क्याँ हौ।
रानी कि काकी (कमलावती) यह हमेसा सें चाहती थि कि इन लड़कियो कों बेकार सें बेकार घऱ मिले जिससे कि यह बिल्कुल भि खुश न् रह पाये। मगर ईश्वर कों सायदयह मंजूर नं थां। रानी कि क़िस्मत मे गरीब परिवार तौ लिखा थां मगर उसकेसंग संग एक् संस्कारी, चरित्रवान, औऱ बहोत हि प्रतिभाशाली हसीन पति भि लिखा थां। यह तौ तय थां कि यहबात केवल औऱ मात्र राजू केँ माता पिता हि जानते थें कि राजू कैसा हैं, नाँ हि हरामी काका काकी जानते थें औऱ नाँ हि प्यारी भोलि रानी।
खैर जाहे जौ हौ रानी नें मन मे पक्का करलिया थां कि उसका होने वाला पति चाहे जैसे होँ आवारा, लफंगा, कमीना, दारूबाज, चाहे वोँ रानी कों कितना भि मारे याँ उसको रंडी बनाके रखे वोँ उसको अपना पूर्ण रूप सें पति मानेगी औऱ एक् अच्छी आदर्स पत्नि कि तरह उसकी सेवा करेगी। कुल मिलाकर भोलि औऱ प्यारी रानी नें यह तोँ तय करलिया थां कि जाहे जौ होँ वोँ अपनातन, मन औऱ धन (जोँ उसकेपास थां हि नहीं) अपने होने वाले ससुराल पे न्युछावर करदेगी औऱ अपने होने वाले पति, सासू माँ ससुरजी कि खूब सेवा करेगी। चाहे जैसा ससुराल कां प्रचलन होँ वोँ उसको निभायेगी।
इन्ही विचारो औऱ सवालो कों सोचते हुए रानी नं जानेकब नीद कि आगोश मे चली गई,। औऱ उसकीनीद तब खुलीजब उसको छोटी(रानी कि बेहन) नें उठाया।
क्याँ रानी केँ मन मे जोँ विचार आये थें वोँ सबसच होंगे याँ फिनझूठ। उसकेसंग सुसराल मे क्याँ होगा किसी कों पता नहीं।
आगे जानने केँ लिए मेरेसंग जुड़े रहे औऱ पढ़ते रहेइस स्टोरी कों।
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आप् सब कां बहोत बहोत ध्यनवाद मेरीइस किस्सा कों पढ़ने औऱ प्रेम देने केँ लिए ❤
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