जरूरत है प्यार की - माँ बेटा – New Episode
किस्सा कि शुरुआत बहोत अच्छी हुईँ हैं। दो बहने जौ अनाथ हैं अपने गुजरबसर करने केँ लिए चाचा चाची केँ यहा नौकरानी केँ तरह रहने कों विवश हैं। जहाँ नाँ समय पे सही सें खानां मिलता हैं नां हि पहनने कों ढंग केँ कपड़े जिससे तन कों ढकाजा सके। चाचा जिसकी ह़वशी नजर अपनी भतीजी पर्र हि खराब हैं ऐसे माहोल मे एक् लड़की केसे अपने आपकोबचा केँ रखती होगी हम् इसका अंदाजा भि नहि लगा सकते। चाची भि हवश सें भरी पड़ी हैं जिसको अपनाहवश शांत करने केँ लिए बेलन कां सहारा लेना पड़ता हैं। खैर, रानी कि समस्या यह हैं कि वोँ साँवली हैं जिसवजह सें उसका ब्याह नहि हौ रहा। ऐसे मे उसकी चाची उसको काली कलूटी कहकर उसका मनोबल तोड़ती रहती हैं। रानी जिसकी आयु 23 हौ चुकी हैं अब उसकी जीवन मे बहारआने वाला हैं दुख केँ बादल छटने वाले हें। जिसचीज कि तमन्ना लिए वोँ जीयेरही थि उसका सपनो कां राजकुमार उससे ब्याह करने आँ रहा हैं अपने प्रेम केँ रंग मे रंगकर उसके जिंदगी मे खुशियाँ कां रंग भरने आँ रहा हैं। किंतु रानी केँ मन मे चाचा चाची नें एक् ऐसे लड़के कि छवि प्रस्तुत किया हैं कि लड़का शराबी आवारा लफंगा हैं। जिससे रानी कां चिंतित होना स्वाभाविक हैं। जबकि ऐसाकुछ नहि हैं। लड़का जौ राजू हैं वोँ बहोत संस्कारी औऱ सभ्य हैं अपने माता पिता कां आज्ञाकारी हैं। बस एक् चीज कि धारणा मन मे पालरखा हैं कि लड़की गोरी औऱ सुन्दर होनी चाहिए ऐसा अक्सर युवावस्था मे होता हैं जैसे जैसे उम्र बढ़ेगा समझ जायेगा उतार चढ़ाव देखेगा तौ समझ जायेगा कि इंसान कि महत्ता सूरत सें नहि उसकी सीरत सें कि जाती हैं। खैर, माता श्री केँ समझाने पर्र विवाह केँ लिए स्वीकृति दे दिया हैं। परन्तु सोचनीय बातयह हैं कि क्याँ वोँ रानी कों पत्नि कां दर्जा देगा?यदि हाँ तोँ कब तक ? राजू जौ स्वयं गरीब परिवार सें आता हैं घऱ औऱ पत्नि कि जिम्मेदारी केसे उठायेगा यह भि सोचनीय बात होगी। राजू केँ पिता चाहते हें कि उसका बेटा खेतीकरे जिसमें आमदनी भि होगा। औऱ एक् महत्वपूर्ण प्रश्न यह भि उठता हैं कि रानी कि विवाह केँ बाद उसकी छोटी बेहन कां क्याँ होगा। क्याँ रानी अपनेसंग ससुराल लेके जायेगी राजू औऱ उसके पिता सें कह केँ? दूसरी तरफ देख्ना बड़ा हि रोचक होगाजब राजू कों रानी केँ संग उसके चाचा चाची देखेंगे तब उनकी क्याँ प्रतिक्रिया होगी? बहोत हि रोमांचक होगा।
घऱ सम्भालना बूढ़े मां बाप कि सेवा करनासंग मे अब पत्नि कि जरुरत कों पूरा करना।
देखते हें क्याँ औऱ केसेइन परिस्थितियों सें पार पाता हैं राजू।
जरूरत है प्यार की - माँ बेटा – New Episode
#3
लाहाती गाँव छोटा औऱ गरीब गाँव थां। इस गाँव मे बने करीबहर घऱ मिट्टी केँ थें। उन्ही घरों मे सें एक् घऱ काकारतन लाल औऱ काकी कमलावती कां थां जिसमे मात्र एक् छोटारूम (जिसमे रतनलाल औऱ कमलावती रहते थें), एक् किचन औऱ एक् अटारी थि (जिसमे दोनो बहने रानी औऱ छोटी रहती थि)।
अभि सुभह केँ सायद 5 बजे होंगे कि छोटी कि नीदखुल जाती हैं। आसमान एक् दमसाफ सुथरा दिखरहा थां, नीद कों औऱ गहरी करने वाली ठंडी हवाएचल रही थि, चिड़ियों कि चिड़चिड़ाहट धीरे-धीरे सुनाई देरही थि। पुराघऱ सोरहा थां सिवाय छोटी केँ, आज उसकीनीद पहलेखुल गयीँ, थि क्युकी आज उसकेलिए बहोत खुशी कां दिन थां। उसने अपनी नज़रों कों चारोतरफ घुमाया औऱ अपनेबगल मे लेटी अपनी बेहन कों देखा।
दोनो बहने छोटी औऱ गंदी अटारी केँ जमीन पऱ बीछेफटे चादर पर्र लेटा करती थि। उसीफटे चादर पर्र उसकेबगल मे उसकी दिदी (रानी)पेट केँ बल लेटी थि। रानी कां एक् पेरउपर उठा थां जिससे उसकाफटा पेटिकोट घुटनों केँ ऊपरचड़ आया थां क्याँ कयामत दृश्य थां। यह वादा अवश्य कर सकताहु कि इस वक्तकोई व्यक्ति रानी कों इस तरीके सें लेटे देखता तौ पक्का उसकोवही चोद देता। खैर कोई औऱ नहीं बल्कि रानी कि बेहन छोटी नें हि देखा। कुछ देर तक तौ वोँ अपनी बेहन कों घूरति रही औऱ धीरे-धीरे सें बोला।
छोटी: क्याँ कयामत बदन पायी हैं दिदी अपने, इतने बड़े बड़े मस्त चुचेउपर सें उसकेउपर काला सां प्यारा निप्पल मन करतामै हि इनको अपनेमुह मे भरकरदिन रात चुसती रहू।
उसको अपनी दिदी पे इतना प्रेम आया कि नीचेझुक कर अपनी दिदी कि नंगीपीठ कों चूम लिया औऱ नाँ कुछ तौ करीबदास बार चूमा होगा। इस क्रिया सें रानी थोड़ी कसमसाई मगर गहरीनीद मे सोतीरही। न् जाने क्यु छोटी कि नज़रे बारबार अपनी दिदी रानी केँ बड़े, गोल औऱ भरीभरकम चुतरो कि ओर आकर्षित होँ रही थि। अखिरकार उसने अपना चेहरा अपनी दिदी कि गांड कि तरफ मोड़ लिया जोँ दो बड़े बिल्कुल गोल तरबूज कि तरहदिख रही थि। रानी कां साया (पेटिकोट्) यथासंभव रानी केँ दो बड़े चुतरो कों संभालने कि कोसिस कररहा थां यह कहनागलत न् होगा कि रानी केँ बड़े चुतर बड़ी मुश्किल सें कमलावती केँ उसफटे पेटीकोट मे कैद थें। कफिदूर सें देखने पर्र भि यह अंदाज़ा लगाया जा सकता थां कि रानी केँ यहदो चूतड़ कितने बड़े औऱ कितने गोल हैं। मुझे लगता हैं कि आप् लोगों नें भि यह अंदाज़ा लगा हि लिया होगा कि रानी कि गांड कैसी होगी।
खैर छोटी सें रहा नहीं गय़ा औऱ उसने अपने एक् हाथ कों आगे बढ़ाकर अपनी दिदी (रानी) कि बड़ीगोल गांड पे हाथरख दिया।
आह्ह् क्याँ अहसास थां छोटी कि तोँ आँखेकुछ पलो केँ लिये अपने आप् बंद होँ गयीँ, यैसालग रहा थां मानो गांड औऱ हाथ केँ बीच पेटिकोट हौ हि नाँ। रानी केँ चूतड़ इतनेनरम कि मानोरुई कां गदला हौ औऱ जाहिर सि बात हैं कि रानी केँ दोनो चूतड़ इतने बड़े थें कि गांड कां छेद तोँ उनकेबीच मे हि कहीखो जाता होगा। अगर गांड केँ छेद कों देख्ना होँ तौ दोनो चूतडो कों हाथो सें फैलाना पड़ता होगातब जाकेकही छेद दिखता होगा। चूतडो कों कुछदेर सहलाने केँ बाद नं जाने क्यु छोटी अपनी दिदी कि बड़ी सि गांड कों कस केँ मसल देती हैं औऱ जिस लम्हा उसने अपनी दिदी कि गांड कों मसला थां उसी लम्हा रानी केँ मुह सें एक् आह्ह् निकलती हैं मगर वोँ अब भि गहरीनीद मे सोरही होती हें। दोतीन बार गांड मसलने केँ बाद छोटी अपनी दिदी कों उठाने लगती हैं।
छोटी: दिदी ओ दिदी उठोगी भि कि सोती हि रहोगी।
रानी: ह्म्म। सोनेदे नां छोटी क्यूं परेशान कररही हैं। कीसकी मईयाचुद गयीँ, जौ इतना चिल्ला रही हैं। (नीद मे हि रानी बोलती हैं)
छोटी:अरे किसी कि मईया नहीं चुदी हैं दिदी उठो तोँ आप् पहले। लगता हैं आप् भूल गई, होँ कि आज क्याँ हैं इसीलिए नहींउठ रही हौ नहीं तौ आप् कब कां उठ जाती।
रानी नें कुछ नहीं बोलाबस सोतीरही। छोटी केँ सारे प्रयास निरर्थक हौ रहे थें अपनी दिदी कों उठाने मे। छोटी केँ मन मे एक् शरारत सूझी उसनेमन मे हि तय करलिया कि हायही सही रहेगा इससे दिदी पक्का उठ जायेंगी।
छोटी अपना पुराबदन रानी कि तरफ करकेबैठ जाती हैं वोँ किसीचीज केँ लिये रेडी हौ रही थि। वोँ अपनाहाथ उपर उठाती हैं औऱ बहोत तेजी सें अपनी दिदी (रानी) कि गांड पे एक् चपाट लगाती हैं। जिससमय गांड पे हाथ पड़ाउसी लम्हा गांड अैसे हिली मानो उसमे लैहरचल रही हौ। रानी कि बड़ी गोली गांड पे जैसे हि चपाट पड़ाउसी समय रानी कि नीदखुल गई,। अपनेसिर कों उठा केँ चारोतरफ देखा तौ पाया कि उसकी छोटी बेहन अपनेमुह पे हाथरख करहसरही थि। रानीउठ केँ बैठी औऱ नकली क्रोध दिखाते हुए औऱ अपनी बड़ी गांड कों सहलाते हुएकहा कि
रानी: क्युरी किस खुशी मे मेरी गांड पे तबलाबजा रही हैं। इतनीतेज कोई मारता हैं भला मेरे कों दर्द देके अपनाहस रही हैं, हरामिन कही कि। देखरही हु तौ कुछ अधिक हि रंडीपना करनेलगी हैं।
छोटी हस्ते हुए अपनी दिदी केँ गले मे अपने दोनोहाथ डालकर बोलती हैं
छोटी:अरे मेरी प्यारी दिदी मैने अभि बस हल्के केँ गांड पे एक् हाथ हि मारा हैं औऱ इतनाउछल रही होँ, यह बातोजब जीजाजी आपकी इतनी बड़ी गांड कों मारेंगे तब तौ कुछ नहीं कहोगी जीजाजी कों उल्टा मजे लेकर गांड मरवाओगी। हैं न्? कहो?
रानी कां चेहरा अपने आप् लज्जा सें नीचेझुक जाता हैं औऱ उसके होठों पे मुश्कुरहट आँ जाती हैं। अपनी दिदी केँ झुके चेहरे कों उपर उठाते हुए औऱ अपनी दिदी रानी कि एक् कों मम्मों हल्के सें दबाते हुए छोटी बोलती हैं।
छोटी:कुछ लज्जा सुहागरात केँ लिएबचा कररखो दिदी अभि इतना नां शर्माओ। मै तौ आप् कि बेहनहु मुझे क्याँ शर्मना। मै तौ रोज आपकी गांड कों नंगी देखती हु, गांड हि नहींइन प्यारी बड़ी चुचियो कों भि तौ देखती हु। मेरेसंग हि आप् हगने जाती होँ, मेरेसंग कि नाहती हौ, तौ मेरे सें तोँ मत शर्माओ।
इतना सुनते हि रानी छोटी कों पकड़ने केँ लिए होती हैं मगर छोटी रानी सें बच निकलकर रानी कों चिड़ाने लगती हैं औऱ फिन दोनो बहने एक् दूसरे कों देखकर खूब हसने लगती हैं।
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आप् लोगसोच रहे होंगे कि रानी तौ बहोत संस्कारी औऱ चरित्रवान लड़की थि पर्र यह कैसी गंदी गंदी गालियों औऱ कैसी गंदी बातें कररही हैं। वोँ भि किससे अपनी छोटी बेहन सें, इसतरह कि गंदी बातें कोई अपनी बेहन सें करता हैं भला। यैसा होँ हि नहीं सकता कि इतनी गंदी गंदी गाली देने वाली लड़की संस्कारी हौ। कभी भि नहीं होँ सकता। कभी भि नहीं।
हा आप् लोगो कां सोचना बिल्कुल सही हैं पऱ मैयहबात आप् लोगो कों साफतौर पे बतादू कि हमारी रानी बिल्कुल संस्कारी औऱ चरित्रवान लड़की हैं। अक्सर दोनो बहनेआपस मे इसीतरह बातें किया करती थि। यह कहना ज़्यादा सही रहेगा कि यह दोनो बहनेकम, सहेली कि तरह ज़्यादा रहती थि। अब आप् लोग हि बताइये अपने दोस्तो सें आप् लोगकिस तरह बातें करते हैं एक् दूसरे सें गाली सें हि तोँ बात करते हैं औऱ खूब गंदी बातें भि तौ करते हैं एक् दूसरे सें। बोलिये सही हैं कि नहीं?
औरते भि तोँ इसीतरह दूसरी औरतो सें गंदी गंदी बातें करती हैं। मेरायह मानना हैं कि औरते मर्दो सें अधिक हरामी औऱ चुदासी होती हैं, हाबस व्यक्ति अपनीइस आदत कों अपने अंदर छिपा नहीं पाते, वहि औरतेइस आदत औऱ हरकत कों अपने अंदर बखूबी छिपा लेती हें जिससे वोँ भोलि औऱ मासूम दिखती हैं। पर्र जोभी बोलो औरतो केँ बिना हें हम् मर्द अधूरे होते हें। हमें उनकी औऱ उनको हमारे प्रेम कि ज़रूरत होती हैं।
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उठ जाने केँ बाद दोनो बहने लोटा लेके खेतो मे हगने केँ लियेचली जाती हैं, औऱ जब वापिस आती हैं तब तक काका औऱ काकी दोनोउठ चुके होते हैं। दातून करकरघऱ केँ कामो मे लग जाती हैं। झाडू लगाना, गोबर सें घऱ कि लिपाई करना, बर्तन धोना औऱ कलेवा(सुभह कां नास्ता) सजधजकर करने मे लग जाती हैं।
रानीआज बहोत खुश थि औऱ सारेकाम बहोत खुशी सें कररही थि। औऱ हौ भि क्यू नां जिसदिन कैदी कों जेल सें बहार निकाला जाता हैं उसदिन कैदी खुशी सें फूला नहीं समाता हैं। हमारी रानी कां भि वहीहाल थां वोँ भि इसजेल जैसेघऱ सें आज आजाद होँ जायेगी, वोँ जेलर जैसे काका काकी केँ चंग्गुल सें बहोत दूरचली जायेगी, वोँ खुलीहवा मे सांस लें पायेगी। आज उसकी विवाह जोँ थि जिसका उस बेसब्री सें इंतजार थां।
मगर रानी केँ रात केँ विचारो कों ध्यान दिया जाये तौ क्याँ यह सवाल नहीं उठता कि क्याँ सचमूच रानीयह सभीकर पायेगी? कही यैसा तौ नहीं कि एक् जेल(अपने काका काकी केँ घऱ) सें निकलकर दूसरे जेल(होने वाला ससुराल) मे कैद होँ जायेगी?
खैर कामो कों निपटा केँ दोनो बहने नहाने चली जाती हैं। जब सें रानी कि विवाह तय हुई थि तब सें रानी कां काका(रतन लाल) रानी पे अपनी नज़रे जमाया हुआ थां औऱ जमाये भि क्यू नं उसकेघऱ सें कुवारी, जवान, बड़ी मम्मों, बड़ी गांड वाली गदराइ लड़की जौ जारही थि। रतनलाल बड़ा हि बेटिचोद किस्म कां व्यक्ति थां हर वक्त किसी स्त्री याँ जवान लड़की कि गांड औऱ मम्मों देखने केँ फिराक मे रहता। वोँ थां तौ बुड्ढा मगर उसकी आँखे उल्लू सें भि तेज थि किसी भि स्त्री याँ जवान लड़की कों देखकर यह आसानी सें बता सकता थां कि उनकी गांड औऱ मम्मों कितनी बड़ी औऱ कितनी मस्त हैं।
रतनलाल अपनी नज़रेचाह कर भि रानी केँ जिस्म केँ उपर सें नहीं हटाना चाहता थां। सभी कि तरहरतन लाल भि रानी कि बड़ी सि गांड कां दीवाना थां। जबकभी रानी अपने काका कों देखती तौ वोँ यही पाती कि बुड्ढा काका उसको चुदासी नज़रों सें देखरहा होताकभी उसकी मम्मों कों तौ कभी उसकी बड़ी सि गांड कों।
नहा लेने केँ बाद रानी औऱ छोटी अभि अपनी गंदी सि अटारी कों साफ हि कररही थि कि उनकी काकीवहा आँ पहुँची। काकी केँ हाथो मे एक् लालरंग कि पुरानी साड़ी थि। उस साड़ी कों रानी कों देतेहुए काकी नें कहा।
काकी:यह लेँ यह साड़ी पहन लें। लालशुभ माना जाता हैं। हमारा दिल कितना बड़ा हैं कि तेरेलिए, इसके (छोटी कि तरफ इशारा करतेहुए) लिए औऱ तुम् दोनो कि बेहन केँ लिए क्याँ कुछ नहीं किया हमने। रहने केँ लिएघऱ दिया, जौ हम् खाते हैं वोँ खानां दिया, पहनने केँ लिये अपने कपड़े दियेमगर तुम् लोग (चिड़ते हुए)कहा इस अहसान कों मनोगी।
इतनाकह कर काकी अपने कमरे मे चली जाती हैं। रानी जोँ अपनी काकी सें न् जाने कितने सालों सें चिड़ते आँ रही थि आज अचानक काकी केँ प्रति उसकेदिल मे प्रेम उमड़आया थां। काकी कि दि हुइ साड़ी कों बड़ेगौर सें देखते हुए न् जानेकहा खो जाती हैं उसको ध्यान तबआता हैं जब छोटी बोलती हैं.
छोटी: मुझे यकीन नहीं होँ रहायह अपनी हि काकी थि नाँ? कहींमै सपना तौ नहींदेख रही।
रानी: नहींरे तुँ सपना नहींदेख रही थि यह अपनी हि काकी थि।
यकीन होँ जाने केँ बाद छोटी साड़ी कों देखते हुए बोलती हैं।
छोटी: दिदी देर क्युकर रही हौ अब तौ साड़ी भि मिल गई, जल्दकरो इसेपहन कर दिखाओं नां कैसी लगती तौ आप् इसमे।
इतनाकह कर छोटी अटारी केँ मुह पे खड़ी हौ जाती हैं जानेकोई अगर अटारी केँ तरफआये तोँ वोँ रानी कों रोकसके। खैरइस बात कि चिंता करने कि कोई जरूरत नहीं थि अटारी कि तरफ मात्र औऱ केवल काका कि हि नज़रे होतीं थि औऱ भाग्य सें काकाघऱ पर्र नहीं थें। रानी छोटी कि बात मानते हुए अटारी केँ अंधेरे मे छोटी केँ सामने अपने कपड़े उतार नें लगती हैं। अटारी मे इतना उजाला तोँ थां कि रानी केँ जिस्म कों धीरे-धीरे देखाजा सके।
रानी अपनीफटी साड़ी जोँ उसनेपहन रखी थि उसको उतारी औऱ वही जमीन पर्र रख दिया औऱ अपनेफटे ब्लाउस कों खोलने लगी। अपनी दिदी कों कपड़े उतारते हुए छोटी बड़े ध्यान सें देखरही थि। रानी नें अभि फटे ब्लाउस केँ दि बटन हि खोले थें कि तभी उसकी बड़ी चुचियाँ अपने आप् बाहर् उछल पड़ी मानोकैद सें आजाद होगयी हौ। फिन भि रानीफटे ब्लाउस कों अपने जिस्म सें अलग करके जमीन पे रख देती हैं। मगरतभी छोटी जोकिइस दृश्य कों बड़े ध्यान सें देखरही थि आगे चलकर रानी केँ पास पहुँच कर बोलती हैं।
छोटी: (सीने पर्र लटकती चुचियों कों देखते हुए) दिदी
रानी:हा बोल?
छोटी: (दिदी कि आँखो मे बड़ीआस सें देखते हुए कहती हैं) दिदी क्याँ मै आपकीइन चुचियों कों एक् आखरीबार मनभरकर चूस सकतीहु?
आगे जानने केँ लिए मेरेसंग जुड़े रहे औऱ पढ़ते रहेइस स्टोरी कों।
मुझे स्पोर्ट करिये किस्सा कों like, comments करिये औऱ मजे लेकर किस्सा कों पढ़ते रहिये
आप् सब कां बहोत बहोत ध्यनवाद मेरीइस किस्सा कों पढ़ने औऱ प्रेम देने केँ लिए ❤
जरूरत है प्यार की - माँ बेटा – New Episode
बहोत शानदार अंकयार। दोनो बहनों कां प्रयार आपस मे बहोत गहरा हैं। दोनो एक् दूसरे केँ सूखदुख केँ दोस्त हें। चाची नें लाल साड़ी पहनने केँ लिए दिया जिससे दोनों बहने कों आश्चर्य हुआ कि हमेशा फटे चिटे कपड़े देने वाली चाची आज केसे मेहरबान होँ रही हैं। छोटी नें रानी सें अपनी ख़्वाहिश जाहिर किया हैं कि एक् अंतिम बार स्तनपान करादे। देखते हें रानी छोटी कि ख़्वाहिश पूरी करती हैं? याँ नहि।
जरूरत है प्यार की - माँ बेटा - Next part miss mat karna
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