जरूरत है प्यार की - माँ बेटा – New Episode
#4
अभि तक:
रानी अपनीफटी साड़ी जोँ उसनेपहन रखी थि उसको उतारी औऱ वही जमीन पऱ रख दिया औऱ अपनेफटे ब्लाउस कों खोलने लगी। अपनी दिदी कों कपड़े उतारते हुए छोटी बड़े ध्यान सें देखरही थि। रानी नें अभि फटे ब्लाउस केँ दि बटन हि खोले थें कि तभी उसकी बड़ी चुचियाँ अपने आप् बाहर् उछल पड़ी मानोकैद सें आजाद होगयी होँ। फिन भि रानीफटे ब्लाउस कों अपनेबदन सें अलग करके जमीन पे रख देती हैं। मगरतभी छोटी जोकिइस दृश्य कों बड़े ध्यान सें देखरही थि आगे चलकर रानी केँ पास पहुँच कर बोलती हैं।
छोटी: (सीने पर्र लटकती चुचियों कों देखते हुए) दिदी
रानी:हा बोल?
छोटी: (दिदी कि आँखो मे बड़ीआस सें देखते हुए कहती हैं) दिदी क्याँ मै आपकीइन चुचियों कों एक् आखरीबार मनभरकर चूस सकतीहु?
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अबआगे:
रानी अपनीफटी साड़ी जोँ उसनेपहन रखी थि उसको उतारी औऱ वही जमीन पऱ रख दिया औऱ अपनेफटे ब्लाउस कों खोलने लगी। अपनी दिदी कों कपड़े उतारते हुए छोटी बड़े ध्यान सें देखरही थि। रानी नें अभि फटे ब्लाउस केँ दोबटन हि खोले थें कि तभी उसकी बड़ी चुचियाँ अपने आप् बाहर् उछल पड़ी मानोकैद सें आजाद होगयी हौ। फिन भि रानीफटे ब्लाउस कों अपनेबदन सें अलग करके जमीन पे रख देती हैं। मगरतभी छोटी जोकिइस दृश्य कों बड़े ध्यान सें देखरही थि आगे चलकर रानी केँ पास पहुँच कर बोलती हैं।
छोटी: (सीने पर्र लटकती चुचियों कों देखते हुए) दिदी
रानी:हा बोल?
छोटी: (दिदी कि आँखो मे बड़ीआस सें देखते हुए कहती हैं) दिदी क्याँ मै आपकीइन चुचियों कों एक् आखरीबार मनभरकर चूस सकतीहु?
छोटी कि इस मासूम भरीबात कों रानीमना नं करपाई औऱ स्वयं छोटी केँ मुह कों अपनी बड़ी चुचियों पे रख दिया। औऱ छोटी अपनी दिदी कि बड़ी चुचियों कों बड़ेमजे लेकर पीनेलगी। रानी कि आँखे अपने आप् बंद हौ गयीँ, औऱ उसकेमुह सें धीमी धीमी सिक्सिकारिया निकलने लगी। छोटी अपनी दिदी कि बड़ी चुचियों कों बड़ेमजे सें चूसरही थि उसकामुह रानी कि एक् मम्मों कों चूसरहा थां तोँ उसकाहाथ दूसरी मम्मों कों तेजी तेजीमसल रहा थां चूचे इतनी बड़ी थि कि हाथो मे आँ हि नहींपा रही थि। छोटी रानी कि चुचियों कों कभी पुरामुह मे भर केँ चूसती तौ कभी केवल निप्पल कों, कभी हाथो सें चुचियों कों तबाती तौ कभी दातों केँ निप्पल कों काट लेती। रानी कों छोटी केँ इस क्रिया दे दर्द तौ होतामगर इस सें ज़्यादा उसे मज़ाआता। खैरमन भरकर चुचियों कों चूस लेने केँ बाद छोटी अपनामुह अपनी दिदी कि चुचियों सें अलग करतेहुए बोलती हैं
छोटी: (मस्त होकर) आनंद आगया दिदी शपथ सें इतनी मस्त चुचियाँ हैं आपकीमन करता हैं बसमुह मे डालकर चूसती रहु।
रानी:मन भर गय़ा तेरा मेरी चुचियों कों पीकर औऱ पीना होतोपी लेँ फिन जल्द नाँ मिलेंगी यह। अगर औऱ भि कुछ देख्ना हौ याँ चूसना हौ तोँ बतादे?
छोटी:बस दिदी मनभर गय़ा अब। चलो जल्दकरो अपना साया उतारो आपकोबस एक् बार पूरी नंगीदेख लू।
रानी छोटी कि इसबात पर्र हस्ती हैं औऱ अपने पेटिकोट केँ नाड़े कों खिचकर खोल देती हैं जिससमय नाडा खूलाउसी समय सायासर सराता हुआ नीचेगिर गय़ा। अपने पैरो सें साया कों बगल करतेहुए बोलती हैं
रानी: लें देख लें जोँ जौ देख्ना हैं तेरे सामने पूरी नंगीहू।
छोटीकुछ नहीं बोलती बस अपनी नंगी खड़ी दिदी कों देखती रहती हैं औऱ कुछदेर बाद बोलती हैं
छोटी:शपथ सें दिदी बहोत गदराइ माल हौ आप्। जीजाजी बहोत खुशनसीब हैं जोँ आप् उनकोमिल रही हौ। मुझे तौ पक्का लगता हैं जीजाजी आपकोदिन भर चोदते हि फिरेंगे ( औऱ हसने लगती हैं) उसघऱ मे सायद हि आप् जैसीकोई औरते होगी। देख लेनाउस घऱ कि औरते आप् सें जलेंगी, आपकेइस जिस्म सें जलेंगी।
रानी:हट पागल!
छोटीफिन कुछ नहीं बोलती बस अपनी दिदी केँ टाँगो केँ बीच मे देखने लगती हैं। रानी छोटी कों अपने टाँगो केँ बीच मे देखते हुए बोलती हैं
रानी: क्याँ देखरही हैं?
छोटी:यही कि आप् कि झाँटे कितनी प्यारी हैं (झांटो मे हाथ फेरते हुए)।
रानी: ( आह्ह्) इतनी पसन्द हैं तेरे कों मेरी झाँटे।
छोटी: ( कुछ नहीं बोलती बस अपनाहाथ अपनी नंगी दिदी कि बुर पे रखकर बुर कों सहलाने लगती हैं)
छोटी केँ इस हमले सें रानी केँ मुह सें आह्ह् निकल जाती हैं औऱ आँखेबंद करके रानी भि मजे लेने लगती हैं। कुछदेर बुर कों सहलाने केँ बाद छोटी बोलती हैं
छोटी: मज़ाआया दिदी?
रानी:हा रे।
छोटी: सोचो दिदी इसमे इतना आनंद आँ रहा हैं तौ जब चुदोगी तौ कितना आनंद आयेगा। हाये दिदी।।
रानी: जिन्ता मतकर मेरी बिट्टो तेरी विवाह मै बहोत जल्द करवा दूंगी फिन तूँ भि खूबमजे लेना।
छोटी: (चिड़ाते हुए) बड़ीआई विवाह कराने वाली।
रानी कों बड़ीहसी आती हैं छोटी कि इसबात पे।
छोटी: दिदी अपनी बड़ी गांड दिखाओ नां।
रानी छोटी कि बात मानते हुए पीछेघूम जाती हैं। क्याँ गांड थि रानी कि वाउमुह मे पानी आगया। जोँ भि रानी कि बड़ी औऱ भरीभरकम गांड कों देखता उसका दीवाना हौ जाता औऱ यहीहाल रानी कि बेहन छोटी कां भि थां हालाँकि वोँ थि तोँ लड़की हि मगर अपनी दिदी केँ बड़ी गांड कि दिवानी थि। रानी अपनी दिदी कि बड़ी औऱ गोल गांड पे हाथरख कर उसको सहलाने लगती हैं
छोटी: वाह्ह दिदी क्याँ चूतड़ हैं आपके, क्याँ गांड मिली हैं आपको। मन करता हैं बस इन्हे दबाती रहू।
रानी: तेरी भि तौ गांड बड़ी प्यारी हैं।
छोटी: पऱ आप् जैसीकहा हैं।
कुछदेर गांड कों सहलाने औऱ मसलने केँ बाद छोटी अपनी दिदी सें बोलती हैं
छोटी: दिदी एक् आख़िरी बार आपकी गांड कों लाल करने दोना।
रानी: दर्द होता हैं रे नां कर नं।
छोटी:मान जाओ नं दिदी बस एक् अंतिम बार।
रानी: तुँ बहोत ज़िद्दी होतीं जारही हैं।
रानी छोटी कों मायूस होतेदेख बोलती हैं।।
रानी: अच्छा ठीक हैं पऱ अधिक नहीं दर्द होता हैं।
छोटी: (खुशी सें) बस गीनके पंचबार।
रानी मिट्टी कि दीवाल सें टिककर नीचेझुक जाती हैं औऱ छोटी अपने हाथों पे अपनाथूक गिराती हैं औऱ उसे अच्छे सें पूरे हाथों मे मिलाती हैं औऱ अपनाहाथ पीछे करके तेजी सें अपनी दिदी कि बड़ी सि गांड पे दे मारती हैं.
.चट्ट।.आह्ह्।
जिस लम्हा रानी केँ गांड पे छोटी कां हाथ पड़ाउसी लम्हा रानीउछल पड़ी।
रानी: धीरे-धीरे मार कुतिया। दर्द होता हैं।
छोटीकुछ नहीं बोलती बस जल्दी अपने नंगी दिदी केँ गांड पे एक् औऱ हाथदे मारती हैं औऱ फिन बिनारुक।
.चट्ट।.आह्ह्।
.चट्ट।.आह्ह्.
.चट्ट।.आह्ह्।
.चट्ट।.आह्ह्.
जितनी बार गांड पे हाथ पढ़ते उतनीबार रानी केँ मुह सें मात्र औऱ मात्र हल्की सि दर्दभरी चीख केँ संग आह्ह् निकलती, मगर छोटी कों इससेकोई फर्क नहीं पड़ता, रानी केँ मुह सें जितनी आह्ह् निकलती छोटी उतना हि तेजी सें अपनी नंगी दिदी कि बड़ी सि गांड पे मारती। पर्र कहीं नं कहीं रानी कों भि इसमें मज़ा आँ रहा थां। रानी केँ गांड पांचबार मे हि इतनीलाल होगयी थि क्याँ कहना। जितनी बार छोटी कां हाथ रानी केँ गांड पे पड़ता उतनीबार गांडइस तरह हिलती मानो गांड मे लहर दौड़रही हौ।
इस क्रिया कों करने केँ बाद छोटी मस्त होकर अपनी दिदी सें बोलती हैं
छोटी: (संतुष्टि कां भाव लेकर) मज़ा आगया दिदी.क्या बात है क्याँ गांड हैं आपकी।
रानी: इतनातेज कौन मरता कुतिया.साली रंडी ( झूठा क्रोध औऱ नाराज होतेहुए) कितना दर्द हौ रहा थां.पूरी गांडलाल करदी।
छोटी:झूठ नां कहो दिदी मुझेपता हैं कि कितना दर्द होँ रहा थां औऱ कितना मज़ा आराहा थां।
रानी: (हल्का कां मुस्कुराते हुए) अच्छा तुम को बड़ापता हैं।
दोनो बहनो मे बाते हौ रही थि तभी काकी कि आवाज़ आती हैं।
काकी:अरे लड़कियों रेडी हुइ कि नहीं। कि रंडीपना कररही हौ?
दोनो बहनेइस आवाज़ सें डर जाती हैं उनको लगता हैं काकी नें उनकी सारी हरकतो औऱ बातों कों देख औऱ सून लिया। खैर जिन्ता करने कि कोईबात नहीं थि क्युकी काकी नें न् हि तौ बात सुनी थि औऱ न् हि कुछ भि देखा थां। काकी कि बात कां जवाब देने केँ लिए छोटी बोलती हैं।
छोटी: होँ रहे हैं काकीबस दस मिंट औऱ।
काकीइस बात कि कोई पर्तिक्रिया नहीं देती हैं। दोनो बहने जोँ कि अपने रासलीला मे वेस्त थि वोँ अब रेडी होने मे लग जाती हैं। काकी कि दि हुईँ साड़ी कों पहनने लगती हैं औऱ औऱ कुछ हि देर मे रेडी होँ जाती हैं।
काकी कि दि हुईँ इसलाल साड़ी कों पहनने केँ बाद रानी औऱ भि खूबसूरत, प्यारी औऱ बहोत हि सुंदर लगने लगती हैं। रानी थि तोँ काली (सावली) मगर उसकी बनावट बहोत हि खूबसूरत औऱ बहोत हि आकर्षक थि। यह कहनागलत नां होगा कि रानी केँ कपड़े रानी केँ शरीर कों बड़ी मुश्किल सें ढक पाते थें क्युकी उसकाबदन बहोत भरा औऱ बहोत गद्राया हुआ थां। कहीं नं कहीं एक् कारणयह भि थां कि उसको कपड़े हि नाप केँ नहीं मिलते थें काकी केँ फटे पुराने कपड़े उसको छोटे औऱ कसे पड़ते थें क्युकी काकी कां शरीर रानी केँ अंतर मे कमथा
रेडी होने केँ बाद रानी बोलती हैं।
रानी: कैसीलग रहीहु मै छोटी?
छोटी: ( अपनी दिदी कि नजर उतारते हुए) किसी कि भि नजर नाँ लगे आपको। बहोत खूबसूरत लगरही होँ दिदी बस एक् चीज कि कमी हैं औऱ वोँ यह (रानी केँ माथे पऱ बिंदी लगतेहुए) पूरी होगयी।
रानी: (अपने माथे पे लगी बिंदी कों छुतेहुए बोलती हैं) अरेयह कहा सें लाई?
छोटी:अरे दिदी वोँ कलसाम कों जब काकी हगने गई थि न् तब उनके कमरे सें चुपके सें निकाल लाई थि। आपकी विवाह होनेजा रही हैं औऱ माथे पे बिंदी नं होँ तोँ अच्छा नहीं लगता न्। अब आप् पूरी दुल्हन लगरही होँ।
रानी छोटी कों बड़े प्रेम सें देखरही थि औऱ सोचरही थि कि आज अपनीइस प्यारी बेहन कों छोड़कर चली जायेगी। रानी केँ आँखो मे आँशू आँ जाते हैं औऱ छोटी कों कस केँ गलेलगा लेती हैं। छोटी थि तोँ बहोत हिम्मती, दुखउसे भि थां अपनी दिदी केँ चले जाने कां मगर वोँ अपनी दिदी कों रुलाना नहीं चाहती थि वोँ जानती थि कि अगर वोँ रोई तोँ उसकी दिदी भि जरूररो देगी। पर्र नं जाने क्यु रानी केँ गले लगते हि छोटी केँ आँखो सें आँशुफूट पड़े औऱ दोनो बहने एक् दूसरे कों पकड़के रोनेलगी। कुछदेर रोने केँ बाद छोटी अपनी दिदी सें अलग होती हैं औऱ जल्द सें अपनी आँखो कों पोछती हुए बोलती हैं
छोटी: आप् एक् नंबर कि पागल होँ दिदी आज केँ दिनकोई रोता हैं भला। कुछ आँशु अपने सुहागरात केँ लिएबचा कर रखोगी कि नहीं।
छोटी कि इसबात पऱ रानी अपनी आँखो कों पोछते हुए हसने लगती हैं औऱ फिन बोलती हैं
रानी: (छोटी कां चेहरा अपने हाथों मे लेकर) तूँ हैं नं हम् सबको हसाने केँ लिए।
छोटीइस मौके कों केसे छोड़ सकती थि अपने दिदी केँ गालों कों प्रेम सें चुम लेती हैं औऱ बोलती हैं
छोटी:चलो अब दिदी नहीं तौ काकी अजायेंगी।
औऱ दोनो बहने रानी केँ फटे पुराने कपड़ो कों एक् फटे रुमाल मे बांधती हैं औऱ काकी केँ कमरे मे जाती हैं
काकी चारपाई पऱ लेती थि औऱ उनकी आँखेबंद थि। रानीआगे जाकर काकी केँ पैरों कों गोडे गिरती हैं। अपने पैरों पे किसी केँ हाथ कां एहसास पाते हि काकी कि आँखेखुल जाती हैं औऱ अपने चहरे कों उठा केँ देखती हैं तौ रानी कों अपने पैरों केँ पासखडा पति हैं। काकी जोँ हमेसा रानी सें जलती थि आज रानी केँ चले जाने कां उसे भि दुख हैं। काकी चरपाई पर्र उठकरबैठ जाती हैं औऱ बोलती हैं
काकी:खुश रहो। छोटी, गाँव कि पुरानी मंदिर मे तेरे काका औऱ वोँ लोग इंतजार कररहे हैं।
काकी इतनाबोल कर वापिस चारपाई पे लेट जाती हैं औऱ दोनो बहनेघऱ सें बाहर् निकलती हैं। निकलते हि रानी काका काकी केँ इसघऱ कों देखने लगती हैं उसके दिमाक मे बचपन सें लेकरके अभि तक कि सारी यादें एक् लम्हा मे आँ जाती हैं कि कैसा उसका बचपनयहा बिता, केसे वोँ अपनी बहनो केँ संगयहा रहती थि। रानी कों इसघऱ कों छोड़कर जाने मे बहोत तकलीफ हौ रही थि मगरउसे जानां हि थां। औऱ दोनो बहने पुराने मंदिर केँ ओरचल देती हैं।
रास्ते मे चलतेहुए रानीसोच रही थि कि अभि कुछदेर मे वोँ इसगाव कों छोड़कर दूसरे गाव मे चली जायेगी। रानी कों लाहाति गाव बहोत पसन्द थां वोँ यहसोच रही थि कि उसके ससुराल कां गाव भि क्याँ इतना हि खूबसूरत होगा कि नहीं। दोनो बहनेबात करतेहुए गाव केँ पुराने मंदिर केँ पास पहुँच जाती हैं।
मंदिर केँ पास पहुँचते हि रानी अपनेमुह कों अपने पल्लू सें ढक लेती हैं। मंदिर मे मात्र रानी कां होने वाला पति (राजू), राजू केँ पापा (कमलेश), एक् पंडित जी औऱ रानी औऱ छोटी कां काका(रतन लाल) थें। राजू केँ चहरे पऱ सहरालगा थां जिससे उसकामुह ढका थां, हौ सकता हैं इसका कारण राजू केँ घऱ कां रिवाज हौ, कि लड़का औऱ लड़की एक् दूसरे कों विवाह केँ बाद हि देख सकते हैं। खैरयह तोँ तै होँ गय़ा कि अभि तक राजू कों रानी केँ परिवार मे कोई भि नहीं देखा थां।
मंदिर मे पहुँच कर छोटी पंडित जी कों प्रणाम करके रानी कों राजू केँ बगल मे बैठा देती हैं औऱ फिन राजू केँ पिता (कमलेश) कों पांवछु कर प्रणाम करती हैं औऱ अपनी दिदी औऱ होने वाले जीजाजी केँ पीछे खड़ी हौ जाती हैं। राजू केँ पिता जी पंडित जी सें बोलते हैं
कमलेश: पंडित जीअब देरी नं करिये। जल्द सें विवाह करा दीजिये।
फिन क्याँ पंडित जी चालू होगये।
पूरे मंदिर मे दोलोग इस विवाह केँ होने सें दुःखी थें एक् तोँ थां अपना राजू औऱ दूसरे थें रतनलाल। राजूइस विवाह कों नहीं करना चाहता थां वोँ यह विवाह मात्र औऱ मात्र अपनी मां केँ लिएकर रहा थां। औऱ वहीरतन लालइस लिए दुखी थां कि रानीआज चली जायेगी, रानी हि थि जोँ रतनलाल कि आँखो कों ठंडा करती थि कहने कां मतलब पूरे गाँव मे एक् रानी हि थि जिसेदेख कररतन लाल अपनी आँखे सेक्ता थां।
खैर पंडित जी मंत्रो कों जल्द जल्दपढ़ कर विवाह कों पूरीकरा दिये औऱ राजू केँ पिता जी (कमलेश) राजू औऱ रानी कों लेकर अपने गाँव बिलासपुर केँ लिए रवाना होँ गये।
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क्याँ राजू रानी कों अपनी पत्नि मनेगा? क्याँ उससे प्रेम करेगा? क्याँ उसे पति कां सुख देगा याँ नहीं?
आगे जानने केँ लिए मेरेसंग जुड़े रहे औऱ पढ़ते रहेइस कथा कों।
मुझे स्पोर्ट करिये स्टोरी कों like, comments करिये औऱ मजे लेकर स्टोरी कों पढ़ते रहिये
आप् सब कां बहोत बहोत ध्यनवाद मेरीइस कथा कों पढ़ने औऱ प्रेम देने केँ लिए ❤
जरूरत है प्यार की - माँ बेटा – New Episode
अंतत: राजा औऱ रानी कां शादीसह प्यार संपन्न हुआ। परन्तु एक् बातमन कों विचलित किये हैं कि कमलेश जी दूल्हा दुल्हन कों अपनेसंग लिये देहात कों प्रस्थान करगये किंतु जाने सें पहले रानी केँ चाचा कों राजा कां चेहरा तोँ दिखा देते जौ उसकेलिए किसी झटके सें कम नहि होता। खैर, यह तौ शुरुआत हैं आज नहि तौ कल चाचा औऱ चाची कों राजा कां चेहरा देखने कां सौभाग्य प्राप्त होगा हि। किंतु रानी कि बेहन कां क्याँ? उस बच्ची कां क्याँ? चाचा चाची तोँ कच्चा खा जायेंगे। पहले तौ दो बहने थि तोँ एक् दूसरे केँ सहारे सुख दुःख बांट लेती थि किंतु अब तोँ वोँ बच्ची बेचारी अकेले केसे सहेगी चाचा चाची केँ जुल्मों सितम कों। खैर, रानी नें छोटी बेहन कों स्तनपान एक् मां केँ तरह कराया हाँ वोँ अलगबात हैं कि उसमें दूध नहि।
अब रानी अपनेनये सफर पऱ निकल चुकी हैं। जहाँ उसके ससुराल वालेबहु केँ संगसंग बेटी कां भि प्रेम देंगे। जिसका मुझे पुरा विश्वास हैं। बस राजा कों शायद थोडा टाइम लगेगा। मुझे हमारी रानी पर्र भि पुरा विश्वास हैं वोँ अपने प्रेम समर्पण औऱ सादगी सें राजा कों रानी सें प्रेम करने पऱ विवशकर देगी।
स्टोरी बहोत अच्छी हैं। ऐसे हि लिखते रहिए दोस्त। टाइम टाइम पऱ भाग देते रहिए। पाठकलोग स्वयं बा स्वयं खिंचे चले आयेंगे।
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