भुज गई प्यास-2 - सास बहू की चुदाई - Real Story Continue Part 1
मेरी पिछली किस्सा भुज गई प्यास मे अपने पढ़ा कि केसे एक् सासू माँ औबहू नें घऱ मे रहरहे नौकर कों चालाकी सें अपनेजाल मे फंसाया औऱ फिन केसेउसे सेक्स केँ लिए मजबूर किया। अपने पाठकों केँ सुझाव पर्र मैंने इस किस्सा कां दूसरा भाग लिखने कि कोशिश कि हैं.उम्मीद हैं आपको पसन्द आएगी.
भुज गई प्यास -2
इसतरह घऱ मे जौ चुदाई कां खेल शुरुआत हुआ थां वोँ अगलेकुछ दिनयूं हि चलतारहा मगर खिलाड़ी केवलदो हि थें.सरिता औऱ राजू। रिशाचाह कर भि इसखेल मे शामिल नहि हौ पारही थि। एक् तौ सरिता नें पहला हि बोल दिया थां कि हमारे इस राज़ कां राजू कों पता नां चले औऱ दूसरा सरिता राजू कों छोड़ हि नहि रही थि। अब तौ सरिता रोजरात कों सोने सें पहले लालाजी केँ दूध केँ गिलास मे नींद कि गोली मिला देती औऱ जब लालाखाट पऱ खर्राटे माररहा होता हैं तौ सरिता वही पलंग पऱ राजू सें अपना बुर कि आग ठंडी करवाती।
रिशा नें कईबार दरवाजे कि ओट सें उन दोनों कों पलंग पऱ एक् दूसरे सें संभोग करते देखा थां। वापीस कमरे मे आँ वोँ अपनी बुर कों अपने हाथों सें शांत करने कि कोशिश करती थि मगर लन्ड कि भूख उंगली सें कहां शांत होने वाली थि.
रिशा नें जाने अंजाने उसे वोँ दे दिया थां जिसकी कल्पना सरिता नें कभी नहि कि थि !लाला कि कमज़ोरी केँ कारण उसने एक् दोबार बाहर् मुँह मारने कां सोचा भि थां मगरडर केँ मारे वोँ ऐसाकुछ कर नहि पाई। जोँ भि ऐशो आराम रुपया इज्जत उसे यहांमिल रही थि वोँ सभी एक् नए लन्ड केँ कारण खतरे मे नहि पड़ सकती थि औऱ सरिता वोँ जोखिम कभी भि लेना नहि चाहती थि। अब राजू कां लन्ड मिल जाने केँ बादउसे चुदाई कां भरपुर सुखमिल रहा थां। राजू जैसा जोशीला औऱ जवान मर्द एक् तगड़े लन्ड कां मालिक थां औऱ अपने मालिकिन कि जमकर चुदाई कररहा थां औऱ सभी सें बड़ीबात ये हैं कि घऱ कि बातघऱ मे हि रह गई थि। किसीतरह कां कोई खतरा नहि !!
बस बेचारी रिशा अपनी बेवकूफी पर्र क्रोध हौ रही थि। क्यो उसने राजू कां राज़ सरिता कों बताया। अब तक रिशा मात्र एक् बार हि राजू केँ लन्ड कां स्वाद चखपाई थि.दूसरी रात तोँ सरिता राजू कों छीन केँ लेँ गई थि औऱ तब सें अब तक मात्र सरिता हि राजू केँ लन्ड कि स्वाद चखपाई थि। एक् दोबार रिशा नें सरिता सें अपनी बुर कि आग राजू सें चुदवा कर मिटाने कि बातकरी मगर सरिता हमेशा यहबोल केँ चुप करवा देती कि जवान छोरा हैं.कहीं कुछबक नाँ दे। पहले मुझे अच्छे सें उसे काबू मे कर लेनेदे फिन हम् दोनों मिलकर ऐश करेंगे। मगर सरिता कि यहबात रिशा कों पच नहि रही थि.यहां वोँ लन्ड केँ लिए उतावलापन रही थि औऱ वहां सरिता अब तोँ जब मौका मिलता हैं राजू कों कमरे मे खींचकर लें जाती.
एक् दिन रिशा थोडा देर सें उठकरजब रसोई कि तरफआई तोँ जौ उसने देखाउसे पैर वहींरुक गए। उसकी सासू रसोई मे कामकर रही थि औऱ राजू सरिता केँ पीछे खड़ा अपने लन्ड कां दबाव सरिता कि गांड पर्र बनाकर खड़ा थां औऱ उसके दोनों हाथआगे सें ब्लाउज केँ अंदर घुसेहुए थें औऱ सरिता कि चुची कों मसलरहे थें।
देखने सें हि पताचल रहा थां कि सरिता औऱ राजूअब इसखेल मे बहुतआगे निकल चुके हें।
सरिता। "राजू छोड़दो मुझे!कोई देख लेगा तोँ मुसीबत होँ जाएगी"
राजू"कौन देखेगा मालिकिन.सेठ जी तोँ कब सें दुकान पे चलेगए औऱ भाभी शायद अभि सोई पड़ी होगी"इतना बोल राजू नें सरिता कों अपनीगोद मे उठा लिया
सरिता." नहि राजू। रिशा अभि आती हि होगी। उसने हमेंऐसे देख लिया तोँ मुसीबत हौ जाएगी औऱ वैसे भि तूनेकल रात हि तौ दोबार मेरी बुर मारी हैं औऱ अब सुभह सुभह तेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा हैं"
राजू.”क्याँ करु मालिकिन। आपकी बुर हैं हि किसी कुंवारी लौडिया जैसी। जितनी बार भि चोदता हूं एक् अलग हि मज़ाआता हैं”। इतनाबोल राजू नें सरिता केँ ब्लाउज केँ हुकखोल दिया औऱ ब्रा केँ ऊपर सें उसकी मम्मों औऱ गर्दन कों चूमने लगा
राजू। “मालिकिन आप् कब सें मुझे अपनी गांड देने कां वादाकर रही हें। आज तोँ आप् इस साड़ी मे कयामत ढारही होँ। आपकी बाहर् कों निकली हुइ गांडदेख कर हि मेरा लौड़ा खड़ा हौ गय़ा हैं आप् कहें तौ यहीं पऱ साड़ी उठाकर अपना लौड़ा पेलदूं गांड मे”
सरिता" पागलमत बन राजू। रिशा अभि यहांआती हि होगी। तूँ एक् कामकर। तूँ अपने कमरे मे वापसजा। मे रिशा कों कोई एक्सक्यूज़ कर बाहर् भेजती हूं औऱ फिन तेरेपास आती हूं। आजमार लेना मेरी गांड!
राजू"ठीक हैं मालिकिन मे अभि जाता हूं मगर जल्द आँ जानां आप्”। इतनाबोल राजू वहां सें निकल जाता हैं औऱ तभी रिशा रसोई मे प्रवेश करती हैं।
रिशा "दिदी राजूआज दुकान पर्र नहि गय़ा क्याँ ?
सरिता." नहि उसकी तबीयत कुछठीक नहि हैं तोँ मैंने उसको अपने कमरे मे आराम करने कों बोला हैं। अभि थोड़ी देर मे मे उसकेलिए काड़ा बनाकर दे आऊंगी।
रिशा.लगता हैं दिदी आप् कुछ ज़्यादा हि मेहनत करवारही हैं राजू सें
सरिता.अंजान बनते हुए.अरे नहि। कलकुछ अधिक गर्मी थि तौ कहीं उल्टा सीधा खाने सें तबियत बिगड गई होगी
रिशा."दिदी आप् बोलो तौ मे उसको काड़ा बनाकर देआती हूं
सरिता." नहि बहू तोँ एक् कामकर तूँ आज मंदिर हौ आँ औऱ वापीस आतेहुए बाजार सें थोड़ी सब्जी औऱ राशन-पानी लेँ आनां। तब तक मे लंच भि बना लूंगी.
रिशा: खाने-पीने तोँ कल लें आऊंगी दिदी.अगर आपकोठीक लगे तौ आतेहुए मेरी एक् सहेली हैं उसकेपास कुछ वक्त बिताकर आँ जाउ। काफ़ी दिन सें बोलरही हैं। रिशा नें यह जानबूझ कर बोला ताकि सरिता कों लगे कि उसको ज़्यादा समय लगेगा वापसआने मे।
सरिता: हांहां क्यू नहि बहू। तूँ धीरे-धीरे अपनी सहेली सें मिलकर आँ जानां। मे यहांसभी संभाल लूंगी
इतनाबोल रिशा वहां सें निकल पड़ी औऱ घऱ केँ पिछवाड़े बने एक् पेड़ केँ पीछेछुप कर देखने लगी कि आखिरउन दोनों केँ बीच क्याँ चलरहा हैं।
रिशा केँ निकलते हि सरिता चुपचाप पिछले दरवाजे सें राजू केँ कमरे कि तरफचल पड़ी। सरिता केँ जाते हि रिशा वहां सें निकली औऱ राजू केँ कमरे केँ बाहर् दबेपैर पहुंच गई
एक् छोटी सि खिड़की थोड़ी सि खुली थि जहां सें रिशा कों अंदर कां नजारा साफदिख रहा थां। उसने देखा कि राजू नें उसकी सासू कों अपनी बाहों मे दबोच लिया थां औऱ दोनों एक् दूसरे केँ होठों कों चूसरहे थें। कुछदेर सरिता केँ होंठ चूसने केँ बाद राजू नें सरिता कों दीवार केँ संगलगा दिया औऱ उसकी साड़ी उसकी जांघों तक सरकाकर पैंटी केँ ऊपर सें हि सरिता कि बुर कों दबा लिया
सरिता.क्यो राजूआज यहीं खड़े खड़े हि चोद देगा क्याँ मुझे? इतनाबोल सरिता नें राजू कों खाट पर्र धकेल दिया औऱ उसकेऊपर सवार होँ गई।
शर्ट तोँ राजू नें पहले हि निकलरखी थि। उसकी चौड़ी छाती पर्र हाथ फिराते हुए सरिता उठेजाना भर स्वर मे बोलि."क्यू राजूआज सुभह सुभह तूने अपना औज़ार खड़ाकर रखा हैं। पता हैं इसमें कितना जोखिम हैं.ऐसा बोल सरिता एक् हाथ उसकी छाती पऱ हाथ फेरने लगी औऱ दूसरा हाथ नीचे लेजा उसका लन्ड पकड़ लिया।
राजू."क्याँ करु मालिकिन। आपसेदूर अब नहि जाता। ऐसा बोल उसने पीछे सें सरिता कि गांड कों पकड़ लिया औऱ उसके होठों कों फिन सें चूसने लगा। अगलेकुछ पली मे हि उसने सरिता कों नंगेकर दिया औऱ उसकी चुची कों दबाकर चूसने लगा
भुज गई प्यास-2 - सास बहू की चुदाई – New Episode
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भुज गई प्यास-2 - सास बहू की चुदाई – New Episode
Update-2
शर्ट तोँ राजू नें पहले हि निकलरखी थि। उसकी चौड़ी छाती पर्र हाथ फिराते हुए सरिता उठेजाना भर स्वर मे बोलीं."क्यू राजूआज सुभह सुभह तूने अपना औज़ार खड़ाकर रखा हैं। पता हैं इसमें कितना जोखिम हैं.ऐसा बोल सरिता एक् हाथ उसकी छाती पर्र हाथ फेरने लगी औऱ दूसरा हाथ नीचे लेजा उसका लन्ड पकड़ लिया।
राजू."क्याँ करु मालिकिन। आपसेदूर अब नहि जाता। ऐसा बोल उसने पीछे सें सरिता कि गांड कों पकड़ लिया औऱ उसके होठों कों फिन सें चूसने लगा। अगलेकुछ पली मे हि उसने सरिता कों नंगेकर दिया औऱ उसकी चुची कों दबाकर चूसने लगा…
अब आगे.
वैसे तौ राजू नें सरिता कों पहले भि नंगा देखा थां मगरउन दोनों कि अधिकतर चुदाई रात कों हि होती थि। आजदिन केँ उजाले मे सरिता कां नंगा जिस्म देख राजू एक् दम पागल होँ गय़ा थां। 36 कि बड़ी बड़ी सुडोल चुचिया औऱ उसकेऊपर भूरेरंग केँ तनेहुए निपल। नीचेबल खातीकमर औऱ फिन 38 इंच कि चौड़ी गांड।
सरोज कां ऐसा कामुक रूपदेख राजू पागल होँ गय़ा। हमसेझट सें सरिता कों पीठ केँ बल पलंग पर्र लिटाया औऱ उसकी चिपचिपी चूत पऱ अपने होंठरख दिए।
अपनी लंबीजीभ सें वोँ सरिता केँ छत्ते सें बहताहुआ शहद चाटने लगा.सरिता अपनी आंखें बंदकिए हुए राजू कां सिर पकड़कर अपनी बुर दबारही थि औऱ उसके मुंह सें उन्माद भारी सिस्कारिया निकलरही थि।
सरिता."चाट राजूचाट। अपनी मालकिन कि बुर कां सारारस पी लें आज.उफ्फ्फ राजू …जितनी अंदर तक तेरीजीभ जारही हैं वहां तक तोँ तेरेसेठ जी कां लन्ड भि नहि जाता। तूँ तोँ किसी भि महिला कों अपनीजीभ सें हि ठंडाकर सकता हैं। काश !तेरे लालाजी कां लन्ड भि तेरे जैसा होता”
राजू."अरे मालिकिन.अगर लालाजी कां लन्ड भि मेरा जैसा होता तोँ आज आप् लाला केँ नीचे होती औऱ न् कि मेरे नीचे.फिन मे आपकीइस रसीली बुर कों केसेचोद पाता”
सरिता.”ओह राजू इतनी मीठी बातें करना तुँ कहां सें सिखा रे.वैसे क्याँ तेरी मेरी बुर सच मे इतनी मनपसंद हैं?”
राजू। "आपकी बुर तौ मे सारादिन चाट सकता हूं"
सरिता.”सुन राजू केवल बुर चाटने सें काम नहि चलेगा मुझे तेरा लन्ड चाहिए अपनी बुर मे। बोल राजू.अपनी मालिकिन कों रोज़ऐसे हि चोदेगा नां?
राजू.हां मालिकिन आप् जब कहोगी तभी आपको नंगा करके अपने लौड़े पर्र बिठा लूँगा औऱ ख़ूब चोदूंगा”
सरिता.” चलअबदेर नां कर औऱ घुसादे अपना लौड़ा मेरी बुर मे
राजू."इतनी भि जल्द क्याँ मालिकिन। पहले आप् भि तोँ एक् बार मेरा लौड़ा चूसकर इसको अपनी बुर केँ लिए सजधजकर करो.बेचारा कब सें अप्पके सुर्ख होठों कों स्पर्श पाने कों तरसरहा हैं। इतनाबोल राजू नें अपना लौड़ा सरिता केँ मुँह केँ पासकर दिया। राजू कां लौड़ा पूरातन गय़ा थां।
सरिता नें हाथ बढ़ाया औऱ राजू कां लौड़ा पकड़ लिया। गर्म गर्म लौड़ा पकड़उसे लगा जैसाकोई गर्म लोहे कि छड़ पकड़ली हौ। उसकी आँखों मे देखते हुए उसने लन्ड कि चमड़ी कों पीछे सरकया औऱ टोपा बाहर् निकाल दियाफिन ज़्यादा देर नां करतेहुए टोपे पर्र अपनीजीभ चला दि। राजू कि सिस्की निकल गयीँ,। गाँव कि बहोत सें औरतों नें राजू कां लौड़ा पहले भि चूसा थां मगर सरिता कि बात हि कुछ औऱ थि। वोँ पूरा लौड़ा मुँह मे लेकर चूसती थि औऱ लन्ड केँ नीचेलटक रहे टट्टे भि संग मे चाटती थि.
राजूखाट पऱ बैठ गय़ा औऱ सरिता उसकी टांगो केँ बीचबैठ कर पूरा लौड़ा मुँह मे घुसाकर चूसने लगी.इस बीच राजू उसके बालों सें खेलरहा थां औऱ अपनीकमर उठाकर उसकेगले तक लन्ड पेलरहा थां। सरिता केँ मुंह सें गोंगों कि आवाज़ आँ रही थि। रिशा अधिकदेर वहां औऱ नाँ रुकसकी औऱ अपने कमरे मे अपने सारे कपड़े उतर नंगी हौ गई औऱ बुर कों मसलने लगी। अपनी सासू कां ऐसा रंडीपना देख उसको विश्वास नहि होँ रहा थां। रसोई मे जा वोँ एक् मोटा सां खीराउठा लाई औऱ उसको अपनी बुर मे पेल दिया। पांचसात मिनट मे उसका पानी निकल गय़ा। जब थोडा शांत हुईँ तौ सोचने लगी कि वोँ राजू कों अब केसे उसकेखाट तक लायाजाए.
उधर राजू सरिता कां सर पकड़कर धक्के लगाकर सरिता केँ मुँह मे लन्ड पेलरहा थां। जबउसे लगा कि अब वोँ औऱ अधिकदेर सरिता कि चुसाई केँ आगेटिक नहि पाएगा तौ उसने सरिता केँ मुंह सें लौड़ा बाहर् निकाल दिया औऱ सरिता कों उठाकर पलंग पऱ पटक दिया। सरिता कि टांगो कों पकड़ उसने अपने कंधों पर्र रखा औऱ बुर केँ मुहाने पे लौड़ा रखजोर कां धक्का मार दिया। सरसराता हुआ लौड़ा बुर केँ अंदरघुस गय़ा औऱ सीधा बच्चेदानी पे ठोकरमार दि। सरिता केँ मुँह सें अहह निकल गई।
सरिता। “जरा आहिस्ता राजू.तेरा लौड़ा कुछ ज़्यादा हि लंबा औऱ मोटा हैं”
राजू.मालिकिन आपको भि तोँ लंबा औऱ मोटा हि पसन्द हैं नां?
सरिता."हां राजू पसन्द तोँ हैं मगर तेरायह लौड़ा मेरी बुर कां भोसड़ा बना देगा औऱ फिन तेरे लालाजी कों पताचल जाएगा तौ मुसीबत हौ जाएगी!
राजू.लालाजी तोँ अब बुड्ढे होँ गए हें। आप् अभि जवान होँ औऱ कोई तगड़ा मर्द हि आपकी प्यास बुझा सकता हैं। इसलिये तड़पने सें बेहतर हैं मेरासंग दो औऱ चुदाई कां मज़ालो। सरिता कि बुर बहुत पानी छोड़रही थि औऱ राजू कां लौड़ा गपागप बुर कि धुनाई कररहा थां
कुछ टाइमबाद सरिता नें राजू कों बैड पऱ लिटा दिया औऱ स्वयं उसके लन्ड पऱ बैठकर चुदवाने लगी बुर पऱ बजतेहुए हर धक्के केँ संग सरिता केँ गले मे लटका मंगलसूत्र उसकी चुचियों केँ बीचझूल रहा थां औऱ इन अद्भुत क्षणों कां गवाहबन रहा थां.
इसीबीच सरिता एक् बारछूट चुकी थि मगर राजू केँ धक्के अभि भि जारी थें.
दोनों कि कमरलय मे एक् दूसरे केँ संग थिरकती जारही थि औऱ मुंह सें काम वासना कि आहें निकलरही थि।
सरिता नें अपनी बाहों कों केँ राजूगले मे डालकर सहारा लिया औऱ स्वयं कों संतुलित किया।
राजू नें सरिता केँ होंठों कों अपने कब्जे मे लेकर उन्हें चूसना शुरुआत कर दिया।
नीचे उसका औजार सरिता कि मुनिया कि खुदाई करताजा रहा थां। आज राजू कां लिंगअलग हि तरह कां तनाव औऱ आकारलिए हुए थां। उसका सुपारा टमाटर जैसा फूलाहुआ थां औऱ उस नसें खुरदरापन लिए फूली हुईँ थि जिसकी वजह सें योनि मे रगड़बढ़ गई थि.
उनका सुपारा जब बच्चेदानी पर्र ठोकर मारता तोँ सरिता कों मीठा मीठा दर्द होता।
सरिता कि योनि तौ अब झरनाबन चुकी थि जिससे लगातार योनिरस बहताजा रहा थां.
राजू केँ लिंग कि रगड़ औऱ धक्के कि स्पीड इतनी अधिक थि कि अधिक टाइम तक सरिता इस आनन्द कों झेल नहि पाई औऱ सरिता कि योनि सें फव्वारा फूट पड़ा।
झड़ने केँ बाद सरिता कि योनि ढीलीपड़ गई मगर राजू अभि भि धक्के लगाते जारहा थां। राजू नें एक् बारफिन सें सरिता कों पलंग पऱ लिटा दिया औऱ चुदाई चालूकर दि!
सरिता नें अपनी दोनों टांगे कैंची कि तरह राजू कि कमर पऱ लपेटली औऱ फिन स्वयं कों उसके हवाले कर दिया।
राजू नें सरिता केँ नितम्बों पऱ हाथ लगाया औऱ उनके सहारे सरिता कों उठाउठा कर धक्के लगाने लगा
उसकेहर धक्के सें सरिता केँ शरीर मे कम्पन पैदा हौ जाती
औऱ उसके कंगन औऱ पायल आवाज़ करने लगते।
सरिता कि आंखें आनन्द केँ मारेबंद होँ गई थि औऱ मुंह सें जोरजोर कि आवाजें आँ रही थि।
लगभगदस मिनट औऱ चोदने औऱ दोबार सरिता कों स्खलित करने केँ बाद राजू कि जवानी अपनेचरम पर्र पहुंच गई औऱ उसने सरिता कि बुर कों अपने वीर्य सें सराबोर कर दिया।
वोँ किसी जोंक कि तरह सरिता सें चिपक गय़ा औऱ अपने लिंग कां एक् एक् हिस्सा योनि कि गहराई मे उतार दिया।
सरिता कि योनि उनके लिंग कां गर्मागर्म वीर्य पाकर सिकुड़ गई.
जब उसने अपना लिंग बाहर् निकाल लिया तौ उसका वीर्य सरिता केँ कामरस केँ संग मिक्स होकर बुर केँ दरवाजे सें बहनेलगा.
सरिता नें पहले उंगली सें वीर्य कों उठाया औऱ मजे सें चाट गई, फिन टिशू पेपर सें स्वयं कों साफ किया।
सरिता अब तक दोबार झड़ी थि इसीलिए उसकी भि सांसें राजू कि तरह हि तेज हौ गई थि।
वो बेड पे लेट गई औऱ स्वयं कों संभालने लगी।
10 मिनटबाद जब सरिता कां बदनजरा संभल गय़ा तौ वोँ राजू कि तरफ मुंहकर उसकी छाती पर्र हाथ फेरने लगी.
सरिता.”गधा जैसा लन्ड हैं तेरा औऱ घोड़ा जैसी ताकत.मुझ जैसी स्त्री कि तूँ जान निकल देता हैं। कोईनई बयाही याँ कुंवारी लड़की तौ तेरा लन्ड झेल नहि पाएगी”
इतनाबोल सरिता नें हाथ नीचेकर राजू कां लौड़ा पकड़ लिया। हाथ लगते हि राजू कां लन्ड फिन सें कुनमुनाने लगा।
सरिता.”हे ईश्वर। यह तोँ फिन सें तन गय़ा। नहि राजू मे अब औऱ नहि झेल पाऊंगी.वैसे भि रिशाकभी भि वापस आँ सकती हैं”
राजू.अभि तोँ भाभी कों वापसआने मे बहुतसमय हैं औऱ फिन आपनेआज अपनी गांड देने कां वादा किया थां। आप् जल्द सें पलंग पर्र घोड़ी बनजाओ.
जाब राजू नें सरिता कों घोड़ी बनाने कों कहा तोँ सरिता भि समझ गई कि आज राजू गांड कां उद्घाटन कर केँ हि मानेगा। टाइम बर्बाद नाँ करतेहुए वोँ जल्द सें बैड पऱ घुटने रख केँ झुक गई.
घोड़ी बनी सरिता कि उभरी हुइ गांडदेख राजू केँ मुँह मे पानी आँ गय़ा। राजू नें सरिता केँ बाल पकड़कर उनको पोनीटेल कि तरह सें बांध दिया औऱ फिन उसकी गांड पर्र दोतीन बारजोर सें चपत लगाई।
सरिता मदहोशी मे इस दर्द कां मज़ा लेनेलगी।
राजू नें अपनेहाथ सरिता कि गांड पऱ फेरने शुरुआत करदिए औऱ फिन गांड कि दरार मे अपनी उंगलियां घुमाने लगा। राजू कां सरिता कि गांड मे उंगली करना उसको बहोत उत्तेजित कररहा थां।
राजू कि उंगली सरिता कि गांड मे हलचल मचाने लगी, औऱ वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी गांड कों अंदर कि तरफ भींचने लगी।
अचानक वोँ हुआ जिसकी उसकोजरा भि उम्मीद नहि थि।
राजू कि उंगली गांड मे घुसने लगी तोँ सरिता चीखी-आआह … मादरचोद यह क्याँ कररहा हैं, दर्द होता हैं मुझे, मेरी गांड मे उंगली मतकर राजा.
मगर राजू नें सरिता कि एक् नहि सुनी औऱ अपनीबीच कि पूरी उंगली गांड मे घुसा दि।
सरिता दर्द औऱ जलन सें सिसकी लेनेलगी-, राजू प्लीज निकाल लोइसे, बहोत दर्द होँ रहा हैं! प्लीज मानजा, मे यह नहि कर पाऊंगी।
राजू-“डरो मत मालिकिन मे इतनी धीरे-धीरे करूंगा कि दर्द नहि बल्कि आनंद आयेगा”।
सरिता जानती थि कि आज राजू उसकी गांड मारे बिना नहि मानेगा
सरिता.राजू मुझेपता हैं तेरी नज़रअब मेरी गांड पर्र हैं.मगर मेरी गांड मारने सें पहले अपना लौड़ा तेल सें अच्छे सें चिकना कर लें औऱ थोडा तेल मेरी गांड मे भि उड़ेल दे ताकि तेरा लौड़ा लेने मे ज़्यादा दर्द नं हौ
राजू नें पासरखी तेल कि शीशी सें कुछतेल सरिता कि गांड मे उड़ेल दिया औऱ थोडा सां तेल अपने लन्ड पे मल लिया.फिन उसने अपना लन्ड सरिता कि गांड केँ छेद पर्र टिका दिया अपनालन सरिता कि कुंवारी गांड मे डालने लगा पहले धक्के मे तौ लौड़ा फिसल गय़ा मगर राजू नें फिन सें लौड़ा गांड केँ छेद पऱ सेट किया औऱ अबकीबार गांड केँ छल्ले कों पार करने मे सफल हौ गय़ा.
सरिता केँ चेहरे पऱ दर्द केँ भाव थें।
वोँ होंठों कों भींचे किसीतरह अपनी सिसकी रोककर लेटी थि।
राजू नें एक् हाथ सें उसकी चोटी पकड़ी औऱ फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकीपीठ पऱ किस करनेलगा औऱ जितना लौड़ा अंदर घुसा थां उसको हि अंदर बाहर् करनेलगा। सरिता कां थोडा दर्दकम हुआ तोँ वोँ भि अपनी गांड कों पीछे ढकेल लन्ड कां स्वाद लेनेलगी
राजू नें अचानक सें एक् धक्का लगाया औऱ आधा लिंग सरिता कि गांड मे जा घुसा-हाय राम दईया … मर गई मे!
सरिता केँ मुंह सें यहीअहह निकली तोँ राजू नें फिन सें एक् धक्का लगाया.
इसबार सरिता दर्द सें चीखउठी औऱ इसी केँ संग राजू कां पूरा लन्ड गांड मे घुस गय़ा।
सरिता कि आंखें दर्द केँ मारेभर आई औऱ होंठ कांपने लगे।
उसके मुंह सें एक् घुटी हुई अहह निकली- हायरे मां। राजू बहोत दर्द होँ रहा हैं।
मगर मर्द अपनीहवस मिटाने केँ लिए स्त्री कों हमेशा दर्द देताआया हैं।
राजू पर्र सरिता कि सिसकी कां कोईअसर नहि पड़ा।
सरिता कि गांड अंदर कि तरफ सिकुड़ गई औऱ राजू केँ लन्ड कों पूरी ताकत सें भींच लिया।
सरिता कों ऐसालग रहा थां कि जैसेकोई मोटागरम लोहे कां रॉड उसकी गांड मे घुसाहुआ हौ।
राजू कों सरिता कि गांड कि कसावट कि वजह सें धक्के लगाने मे दिक्कत पेश आँ रही थि- मालिकिन अपनी गांड कों ढीलाकरो वरना धक्के केसे लगाऊंगा।
सरिता सुबकती हुई बोलि- राजू मुझसे नहि हौ पाएगा.प्लीज इसको निकाल लें औऱ जितना चाहे मेरी बुर मार लेँ
राजू-ठीक हैं मालिकिन निकाल लूंगा मगरइसे ढीलाकरो तभी तौ निकलेगा।
राजू कि बात सुनकर सरिता नें गांड कों ढीला छोड़ दिया।
राजू नें अपना लन्ड बाहर् खींचना शुरुआत किया औऱ जैसे हि सुपारा गांड केँ छल्ले केँ पास पहुँचा, उसने पूरेजोर सें सरिता कि गांड मे अपना लन्ड दोबारा उतार दिया।
सरिता केँ मुंह सें दर्दभरी चीख निकल पड़ी औऱ उसनेबैड पर्र पड़े तकिये सें अपनीचीख दबाने कि नाकाम कोशिश कि
थोड़ी देरबाद जब सरिता कां दर्दकम हुआ तोँ वोँ मस्ती सें करहाने लगी
सरिता."राजू.पहलीबार मैंने अपनी कुंवारी बुर अपने पति कों दि थि औऱ आज अपनी कुंवारी गांड मैंने तेरे कों दे दि हैं.एक् तरह सें अब तुँ भि मेरा पति हैं। मेरे अपने पति सें अधिकअब यह बुर औऱ गांड पर्र तेराहक हैं”
इधर राजू धीरे-धीरे धीरे-धीरे कर केँ सरिता गांड कों चोदने लगा औऱ अपना एक् अंगूठा उसके मुंह मे औऱ अपनी उंगली सें उसकी योनि कों सहलाने लगे।
राजू कां हर धक्का अब सरिता केँ शरीर मे दर्द केँ संगसंग मजे कि लहर भि उत्पन्न करनेलगा।
उसकी गांड कों पहलीबार लन्ड कां स्वाद मिला थां।
सरिता कों दर्द औऱ मज़ा दोनों कां मिला-जुला एहसास हौ रहा थां.
सरिता केँ नये हरजाई खसम राजू नें सरिता कि गांड पर्र अपने मोटे लौड़े सें जोँ मेहनत कि थि, उसी कां नतीजा थां कि सरिता मस्ती केँ सागर मे गोतेखा रही थि
सरिता कि जुबान मुँह सें बाहर् आँ गई औऱ कंठ सें दबी हुईँ आवाज़ निकल गई ‘उओह्ह्ह उह्ह साले हरामी अहहफाड़ दे सालेअहह राजू मेरीजान क्याँ पेला हैं तूनेअहह.’
राजूमजे सें एक् शॉट औऱ मारता हुआ बोला- अभि सहीबोल रही हैं कुतिया अहह लेँ बेहन कि लवड़ी, लन्ड कां आनंद लें!
राजू केँ मुँह सें यह भद्दी गलियाँ भि आज सरिता कों अच्छी लगरही थि
‘अहहसच मे राजू तेरेइन झटकों मे जन्नत नज़र आँ गई … अहह लेँ चलो अपनीइस घोड़ी कों चाँद पऱ अहह.’
राजू सरिता कि चुची मसलता हुआ धीमे धीमे चोदने लगा.
सरिता नें उसे क्रोध दिलाने केँ लिए बोला- “क्याँ हुआ मादरचोद… कहींथक तोँ नहि गय़ा?”
राजू.”हम् थकते नहि रानी … थका देते हें। आजदिन भर तुम्हारी तरफ घोड़ी बनाकर तेरी गांड कां भोसड़ा बना दूंगा साली रंडी! “
इतनाकह कर उसनेदो चारतेज झटकेमार दिए.
उन झटकों सें सरिता कि दर्द औऱ आनन्द भरी मीठी आवाजें निकलने लगीं ‘वाआह्हह अहहहाय हुउई उम्ममा … आई.’
सरिता कि अंगड़ाइयां औऱ खुला मुँह राजू कों औऱ उत्तेजित किएजा रहे थें, यह उसके झटकों कि तेजी मे साफनजर आँ रहा थां। पूरारूम धकधकपक पक कि आवाज़ सें गूंजरहा थां.
अब उसके दोनों हाथ सरिता कि मुसम्मियों कों पकड़कर उसकी चुदाई मे सहायक बनेहुए थें.
उसके झटकों कि मार सें सरिता कि कमरहवा मे उठउठजा रही थि औऱ लन्ड गांड कि गहराई तक खोदेजा रहा थां.
लगभगआधा घंटा तक राजू नें सरिता कों खूब ठोका.
राजू केँ इसआधा घंटा केँ हड्डी तोड़ गांडफाड़ अभियान नें सरिता कों स्वर्ग मे पहुँचा दिया थां। वोँ समझ गई थि मात्र उसकी जवानी सही मर्द केँ हाथ मे हैं.
राजूअब अपनारस छोड़ने वालालग रहा थां, उसकेतेज होते धक्के इसबात कां सबूत थें.
कुछ हि झटकों मे सरिता कों एक् तेज औऱ गरमधार मेरेपेट तक महसूस हुइ। राजू नें झट सें लन्ड सरिता कि गांड सें निकाला अपना औऱ सारामाल सीधा सरिता केँ चेहरे औऱ बूब्स पर्र टपका दिया.
अबदिन केँ एक् बज चुके थें औऱ रिशा केँ वापसआने कां वक्त भि हौ चुका थां मगर राजू कां मन अभि नहि भरा थां उसके लन्ड कां तनाव सरिता कि बजाने केँ लिए वापस तैयार थां.
राजू.”मालिकिन अगर मज़ाआया तोँ एक् राउंड औऱ होँ जाए?”
सरिता.”राजू आनंद तौ बहोत आया पर्र अभि एक् औऱ राउंड केँ लिए टाइम नहि हैं “
राजू.ठीक हैं मालिकिन मगरआज रात कों आपका बुर औऱ गांड दोनों चोदूंगा
सरिता: बोल तोँ ऐसारहा हैं जैसे मेरेमना करने पे तुँ मान जाएगा.रात कों आँ जानां कमरे मे.मेरी बुर औऱ गांड तेरे लन्ड केँ लिए त्यार मिलेगी इतनाबोल दोनों नें अपने कपड़े पहने औऱ सरिता हल्का सां लड़खड़ाती हुई राजू केँ कमरे सें निकल गई
भुज गई प्यास-2 - सास बहू की चुदाई - Kahani ab aur interesting hogi
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