मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story - Episode 1
लेखक:-इमरान
एपसोड 1
क्या बात है दोस्तो मेरानाम साहिल हैं मेरी उम्र सत्ताईस साल हैं औऱ मेरी पत्नि सलोनी छब्बीस साल कि हैं, हमारी विवाह कों करीबढाई साल हौ गए हें। अभि हमारा कोई बच्चा नहि हैं। मे औसत कदकाठी कां साधारण काम करने वाला इंसान हूं, समाज भीरू, अपनीकोई बात जगजाहिर करना नहि चाहता औऱ सेक्स केँ मामले मे भि साधारण हि हूं।
मगरइसे अपनी क़िस्मत कहूँ याँ बदकिस्मती कि मेरी विवाह एक् बहोत सुन्दर लड़की सलोनी सें हौ गई वोँ एक् क़यामत हि हैं 5 फुट 4 इंच लम्बी, बिल्कुल दूध जैसा सफ़ेद रंग जिसमें सिंदूर मिला होँ औऱ गजब केँ उसकेअंग, वक्ष 36″ पतलीकमर शायद 26″ औऱ खूब उभरेहुए उसके कूल्हे 38 ! उसके चूतड़ इतने गद्देदार हें कि अच्छों-अच्छों कां लण्ड पानी छोड़ देता हैं जिसे मैंने कईबार महसूस किया हैं, उसकीइसी गांड केँ कारण सुहागरात कों मेरे लण्ड नें भि जवाबदे दिया थां।
चलिए वोँ किस्सा भि आपकोबता देता हूं।
सुहागरात मे उसके गोरे सुन्दर औऱ गरम जिस्म नें हि मुझे बहोत उत्तेजित कर दिया थां औऱ ऊपर सें जब मे उसको प्रेम कररहा थां तब वोँ उल्टी पेट केँ बल पलंग पऱ लेट गई उसके सफ़ेद शरीर पऱ सिर्फ एक् काली पैंटी थि जोँ उसके चूतड़ों कों गजब कां सेक्सी बनारही थि।
फिनजब उसकीपीठ कों चूमते हुएजब मे उसकी कच्छी उसके चूतड़ों सें नीचे उतारने लगा तौ उसके हिलते हुए चूतड़ों केँ बीच उसका सुरमई गुदा-दरवाज़ा देख मेरे छक्के छूटगए औऱ जैसे हि मैंने उसकी झांकती गुलाबी, चिकनी बुर जिसके दोनों होंटआपस मे चिपके थें, देखते हि मेरे पसीने छूटगए।
उसकेइन अंगों नें मुझे उसके सामने शर्मिन्दा करवा दिया। मगर उसने बड़े प्रेम सें मुझसे कहा-कोई बात नहि, ऐसा होँ जाता हैं।
उसकाये प्रेम अभि भि जारी हैं, वोँ कभीकोई मांग नहि रखती औऱ नं कभी मुझसे लड़ाई करती हैं औऱ मेरा बहोत ध्यान रखती हैं इसलिये मे उससेकुछ नहि कहता औऱ न् हि उसकी हरकतों कों रोकपा रहा हूं। कपड़े उसके बहुत मॉडर्न हि होते थें पऱ इसकेलिए मैंने कभी उसकोमना नहि किया थां।
अब आपसे उसकेइसी व्यव्हार केँ बारे मे बताऊँगा।
सलोनी हमेशा बहोत हंसमुख सब सें खुलकर बातचीत करने वाली, सब कां ध्यान रखने वाली लड़की हैं। मेरेसब मित्र औऱ रिश्तेदार उसको बहोत मनपसंद करते हें।
हम् एक् अलग फ्लैट लेकर रहते हें। पहलेसाल तक तोँ सभीकुछ मुझे सामान्य हि लगा थां औऱ हमारा जिंदगी भि आम पति-पत्नि जैसा हि बीता थां। हाँ, हमारे बीच चुदाई कम होती थि, हफ़्ते मे एक्-दो बार हि, मगर उसनेकभी शिकायत नहि कि औऱ न् हि कभी वोँ कहती, जब मेरामन होता हैं, तोँ वोँ स्वयं हि सजधजकर हौ जाती हैं।
मेरे दोस्तों केँ संग उसका हंसी मजाक याँ मेरे भाइयों केँ संग उसकी छेड़छाड़ सभीकुछ सामान्य हि लगता थां मगर पिछले एक् साल सें सभीकुछ बदल गय़ा हैं, सलोनी कों मे सीधी-सादी समझता थां मगर वोँ तोँ सेक्स कि मूर्ति निकली, अब तौ बस मे उसको छिपकर उसकी हरकतों कों देखता रहता हूं नं तोँ उससेकुछ कहता हूं औऱ न् हि उसकी किसीबात कां विरोध करता हूं।
शायदयही सुन्दर पत्नि रखने कि सजा हैं।
दोस्तों विवाह केँ बाद कां एक् साल तौ ऐसे हि गुजर गय़ा, याँ तोँ मैंने अधिक ध्यान नहि दिया सलोनी कि हरकतों पऱ याँ फिन वोँ भि सती-सावित्री हि बनीरही।
असली किस्सा कोई एक् सालबाद शुरुआत हुइ जब मैंने उसकी हरकत पऱ ध्यान दिया।
हुआ यों कि मेरा छोटा भइया दिल्ली सें आयाहुआ थां, वोँ वहा इंजीनियरिंग कररहा हैं, 22 साल कां गठीला जवान हैं, दोनों देवर जी भाभी मे हंसी मजाक होता रहता हैं।
एक् सुभह मे उठकर अखबार पढ़ते हुएगरम चायपी रहा थां, तभी सलोनी बोलि- सुनो, आप् पौधों कों पानीदो नां, मे तब तक ब्रेकफास्ट रेडीकर लेती हूं।
सलोनी नें गुलाबी रेशमी हाफ पजामी पहनी थि जोँ उसके घुटनों तक हि थि, वोँ उसकी जांघों सें पूरीतरह कसी हुई थि जिससे उसके चूतड़ बाहर् निकले हुए साफ़दिख रहे थें औऱ इस पजामी मे जब वो अंदर चड्डी नहि पहनती थि तोँ उसकी बुर कां आकार भि साफ़ दिखता थां औऱ पीछे सें मुझेआज भि उसकी पजामी मे कहींकोई कच्छी कां निशान नहि दिखरहा थां, मतलब सामने सें उसकी बुर गजबढहा रही होगी।
मैंने एक् दोबार उसकोकहा भि हैं- जानइस पजामी केँ अंदर कच्छी जरुरपहन लियाकरो जबकोई औऱ घऱ मे आया हौ !
मगर वोँ ऐसी बातों कों नजरअंदाज़ कर देती थि, मे भि अधिक नहि टोकता थां। ऊपर उसने एक् सैंडो टॉप पहना थां जौ उसके विशाल उरोजों पऱ कसा थां औऱ उसकेपेट पर्र नाभि तक हि आँ रहा थां उसकी पजामी औऱ टॉप केँ बीच लगभग पाँचइंच सफ़ेद कमरदिख रही थि जौ उसको बहोत सेक्सी बनारही थि।
मे पौधों मे पानी डालने बाहर् जाने वाला थां कि तभी मेरा छोटा भइया भि किचन मे गय़ा- लाओ भाभी मे आपकी सहायता करता हूं, औऱ भैया कहां हें।
पता नहि क्यूं मे उन दोनों कों देखने अंदर हि रुक जाता हूं, ऐसा पहलीबार हुआ थां, शायद मैंने सोचा कि सलोनी कां वोँ सेक्सी रूपदेख कर पारस कों कैसालगा होगा? क्याँ वोँ सलोनी कों कुछ कहेगा?
मगरतभी पारस कि आवाज़ आई- क्याँ भाभी, बाहर् क्याँ कररहे हें भैया, क्याँ आज सुभह सुभह उनको बाहर् निकाल दिया।
सलोनी- चल पागल, वोँ पौधों मे पानी देनेगए हें।
पारस-वाउ, मतलबआज सुभह हि मौकामिल गय़ा? चलो तोँ इस पौधे मे पानी हम् डाल देते हें।
उसकीये बात सुनते हि मेरा माथाठनक गय़ा, ये क्याँ कहरहा हैं पारस?
मैंने दरवाजे कि आड़ लेतेहुए किचन मे झाँका औऱ मेरे सारे ख्वाब चकनाचूर होँ गए, पारस अपनी भाभी सें पीछे सें चिपका थां औऱ उसकेहाथ उसकोआगे सें बांधे हुए थें।
सलोनी- हाथहटा नं पगले, तेरे भैया अभि आते हि होंगे औऱ ये पौधा तोँ घऱ मे हि हैं, जब चाहे पानीडाल देना।
मैंने थोडा औऱ आगे कों होकर देखा तौ पारस कां सीधाहाथ सलोनी केँ पजामी केँ अंदर थां। मतलब वोँ उसकी बुर सहलारहा थां, जौ बिना किसी अवरोध केँ उसकी हथेली केँ नीचे थि।
पारस- भाभी, क्याँ गजबमाल लगरही होँ आज औऱ आपकी बुर पऱ तौ हाथ रखते हि मन करता हैं कि.
सलोनी- हाँ…हाँ, मुझेपता चलरहा हैं कि तुम्हारा क्याँ मनकररहा हैं वोँ तौ तुम्हारा ये मोटा मूसल लौड़ा हि बतारहा हैं जौ पजामी केँ संग हि मेरे चूतड़ों केँ बीच मे मेरी गाण्ड घुसाजा रहा हैं।
मे उनकी बातें सुनकर धक्क सें रह गय़ा थां कि सलोनी कभी मेरे सामने इतना खुलकर ऐसे नहि बोलती थि, कभीकभी मेरे बहोत ज़ोर देने पर्र बोल देती थि मगरआज तोँ पराये मर्द केँ सामने रंडी कि तरहबोल रही थि।
तभी उसने पीछेहाथ कर पारस कां लण्ड अपनेहाथ मे पकड़ लिया। पारस नें न् जानेकब उसे अपने पजामे सें बाहर् निकाल लिया थां वोँ अब सलोनी केँ हाथ मे थां। तभी सलोनी घूमी तौ मैंने देखा कि उसकी पजामी बुर सें नीचे खिसकी हुई हैं अब उसकी नंगे सुतवाँ पेट केँ संग उसकी छोटी सि बुर भि दिखरही हैं, पारस केँ लण्ड कों सलोनी नें अपनेहाथ सें सहलाकर उसके पजामे मे कर दिया औऱ बोलीं- इसको अभि आराम करनेदो, इस सबकेलिए अभि बहोत वक़्त मिलेगा।
मे उनकीयह सभी हरकतें देख चुपचाप बाहर् आँ गय़ा औऱ सोचने लगा कि क्याँ करूँ।
मे कुछदेर केँ लिए बाहर् आकर अपनासर पकड़कर बैठ गय़ा। एक् लम्हा तोँ मुझेलगा कि मेरी दुनिया पूरीलुट गई हैं, मे करीब चेतनाहीन होँ गय़ा थां पर्र जब अंदर सें कुछ आवाजें आईंतब मे उठा औऱ पौधों कों पानी देनेलगा।
भाग केँ लिए बहोत बहोत शुक्रिया अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story – New Episode
एपसोड 2
सलोनी- हाँ…हाँ, मुझेपता चलरहा हैं कि तुम्हारा क्याँ मनकररहा हैं वोँ तोँ तुम्हारा ये मोटा मूसल लौड़ा हि बतारहा हैं जोँ पजामी केँ संग हि मेरे चूतड़ों केँ बीच मे मेरी गाण्ड घुसाजा रहा हैं।
मे उनकी बातें सुनकर धक्क सें रह गय़ा थां कि सलोनी कभी मेरे सामने इतना खुलकर ऐसे नहि बोलती थि, कभीकभी मेरे बहोत ज़ोर देने पर्र बोल देती थि मगरआज तोँ पराये मर्द केँ सामने रंडी कि तरहबोल रही थि।
तभी उसने पीछेहाथ कर पारस कां लण्ड अपनेहाथ मे पकड़ लिया। पारस नें नं जानेकब उसे अपने पजामे सें बाहर् निकाल लिया थां वोँ अब सलोनी केँ हाथ मे थां। तभी सलोनी घूमी तौ मैंने देखा कि उसकी पजामी बुर सें नीचे खिसकी हुईँ हैं अब उसकी नंगे सुतवाँ पेट केँ संग उसकी छोटी सि बुर भि दिखरही हैं, पारस केँ लण्ड कों सलोनी नें अपनेहाथ सें सहलाकर उसके पजामे मे कर दिया औऱ बोलीं- इसको अभि आराम करनेदो, इस सबकेलिए अभि बहोत टाइम मिलेगा।
मे उनकीयह सभी हरकतें देख चुपचाप बाहर् आँ गय़ा औऱ सोचने लगा कि क्याँ करूँ।
मे कुछदेर केँ लिए बाहर् आकर अपनासर पकड़कर बैठ गय़ा। एक् समय तोँ मुझेलगा कि मेरी दुनिया पूरीलुट गई हैं, मे करीब-करीब चेतनाहीन होँ गय़ा थां पऱ जब अंदर सें कुछ आवाजें आईंतब मे उठा औऱ पौधों कों पानी देनेलगा।
पानी देतेहुए अचानक अपने भइया पारस कि बातमन मे गूंजने लगी औऱ नं जाने केसे मे सोचने लगा कि पौधे कि स्थान मेरी पत्नि नंगी अपनी टाँगें फैलाये लेटी हैं औऱ पारस अपने लण्ड कों हिला हिलाकर अपना पानी उसकी बुर मे डालरहा हैं।
औऱ यहसभी सोचते हि मेरा अपना लण्डसर उठाने लगा जाने कैसीबात हैं ये कि अभि दिमाग़ काम नहि कररहा थां औऱ अब लण्ड भि पूरेजोश मे थां।
अब मेरे सामने दो हि रास्ते थें कि याँ तौ लड़ झगड़कर सभीकुछ खत्मकर लिया जाये याँ फिन स्वयं भि मज़ेकरो औऱ उसको भि करनेदो।
मैंने दूसरा मार्ग चुना क्योंकि मे भि पाकसाफ नहि थां औऱ सेक्स कों मजे कि तरह हि देखता थां।
सबसे बड़ीबात तौ यही थि कि सलोनी एक् पत्नि केँ रूप मे तोँ मेरा पूरा ख्याल रखती हि थि बाकी शायद उसकी अपनी इच्छाएँ थि।
मेरेमन मे बसयही ख्याल आँ रहा थां कि ज़िंदगी बहोत छोटी हैं, इसमें जोँ मिलेउसे भोग लेना चाहिए।
कम सें कम सलोनी मेरा ख्याल तोँ रख हि रही थि, मेरी बेइज्जती तोँ नहि कररही थि। अब मेरे पीछे वोँ कुछ अपनी इच्छाओं कों पूराकर रही थि तौ मुझे इसमें कुछगलत नहि लगा।
यह सभीसोच मेरामन बहोत हल्का हौ गय़ा औऱ अपनाकाम समाप्त कर मे अंदर आँ गय़ा।
अंदरसभी कुछ सामान्य थां, सलोनी किचन मे वैसे हि कामकर रही थि औऱ पारस बाथरूम मे थां।
लगभगदस मिनट केँ बाद पारस नहाकर बाहर् निकला, उसके कसरती शरीर पऱ सिर्फ कमर मे एक् पतला तौलिया बंधा थां जिसमें उसके लण्ड केँ आकार कां आभास हौ रहा थां।
मे अपने कपड़े लें बाथरूम मे चला गय़ा, सलोनी वैसे हि किचन मे काम करतीरही।
पारस- भैया, क्याँ हुआ?आज कुछ जल्द हैं?
मे- हाँआज जरा जल्द दफ़्तर जानां हैं। सलोनी जल्द ब्रेकफास्ट रेडीकर दो, मे बस फ़टाफ़ट नहाकर आता हूं।
मैंने बाथरूम सें सलोनी कों बोल दिया।
सलोनी- ठीक हैं, आप् नहाकर आइये, ब्रेकफास्ट रेडी हि हैं। पारस तुम् भि जल्द सें आँ जाओसभी संग हि कर लेंगे।
पारस-ठीक हैं, भाभी मे तौ रेडी हि हूं, ऐसे हि कर लूँगा।
मैंने बाथरूम मे शॉवर चलाया औऱ उन दोनों कों देखने कां सोचा।
बाथरूम कि एक् तरफ़ कि दीवार मे ऊपर कि ओर छोटा रोशनदान हैं जोँ हवा केँ लिए खुला रहता हैं, वहा सें किचन कां कुछभाग दिखता हैं औऱ मे उनकी बातें भि सुन सकता थां।
मैंने पानी कां ड्रम खिसकाकर रोशनदान केँ नीचे किया औऱ उस पर्र चढ़कर किचन मे देखने कां प्रयास किया।
वहा सें कुछभाग हि दिखरहा थां, पऱ उनकी बातों कि आवाज़ जरूर सुनाई देरही थि।
पारस- भाभी, क्याँ बनाया नाश्ते मे आज?
सलोनी- सभीकुछ तुम्हारी पसंद कां हि हैं, ब्रेड सैंडविच औऱ गरमचाय याँ कप कॉफ़ी जौ तुम् बोलो।
पारस- आपको तोँ पता हैं, मे यहसभी नहि पीता, मुझे तोँ दूध हि पसंद हैं।
सलोनी- हाँहाँ… मुझेपता हैं औऱ वोँ भि तुम् सीधे हि पीते होँ।
औऱ दोनों केँ जोर सें हंसने कि आवाज़ आई।
सलोनी- अरे क्याँ करते होँ, अभि मैंने मना किया थां नं ! उफ़्फ़… क्याँ कररहे होँ !
मैंने बहोत कोशिश कि दोनों कों देखने कि मगरकभी कभीजरा सां भाग हि दिखरहा थां।
मगरये निश्चित थां कि पारस मेरी पत्नि केँ दूधपी रहा थां।
अब वोँ टॉप केँ ऊपर सें पीरहा थां याँ टॉप उठाकर ये मेरेलिए भि सस्पेन्स थां।
मे तौ सिर्फ उनकी आवाजें सुनकर हि उत्तेजित होँ रहा थां।
सलोनी- ओह पारस, क्याँ कररहे होँ? प्लीज अभि मतकरो ! देखो, वोँ आते होंगे… ओह… नहि… अहह… क्याँ करते होँ। ओह पारस… तुमने अंडरवियर भि नहि पहना।
पारस-पुच… पुच… सुपरररर… सपरर… अहाआआ… भाभी, कितने मस्त हें आपके मम्मे… ओह्ह्ह भाभी, ऐसे हि सहलाओ… आहा… कितना मस्त सहलाती होँ आप् लण्ड कों… आहाअ… ओह्हओ… पुच…पुच…
मे रोशनदान सें टंगा उनकी आवाजें सुनरहा थां औऱ सोचरहा थां कि यह मेरे सामने हि कितना आगेबढ़ सकते हें। क्याँ आज हि मुझे इनकी चुदाई देखने कों मिल जायेगी।
दोस्तो मे यानी आपका साथी सलील एक् औऱ मस्त औऱ कामुक किस्सा आपकी खिदमत मे पेशकर रहा हूं औऱ उम्मीद करता हूं यह आपको अवश्य पसन्द आएगी किस्सा केसेलगी जरूर बताये एपसोड आपको रेगुलर मिलते रहेंगे कमेंट जरूरकरे अगरये किस्सा किसी औऱ नाम सें इस फोरम पऱ हौ तौ जरूर बताये ............आपका सलील
मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story – New Episode
भाग 3
पता नहि क्याँ होगा…
तभी मुझे पारस कि छाया सि दिखी, वोँ कुछ पीछे कों हुआ थां।
“ओहमाय गॉड… वोँ पूरा नंगा थां, उसका तौलिया उसके पैरों मे थां जिसे उसने अपने पैरों सें पीछे कों धकेला।
शायदउसी केँ लिए वोँ पीछे कों हुआ होगा।
मुझे उसका लण्ड तोँ नहि दिखामगर मे इतना मूर्ख भि नहि थां कि ये नं समझ सकूँ कि इस स्थिति मे उसका लण्ड 90 डिग्री पर्र खड़ा हि होगा।
अब सोचने वालीबात ये थि कि मेरेघऱ मे रहते वोँ क्याँ करेगा।
वोँ फिनआगे कों होँ गय़ा औऱ मेरी नजरों सें ओझल होँ गय़ा।
तभीफिन सें आवाजे आने लगीं…
सलोनी- तुम् बिल्कुल पागल होँ पारस… क्याँ करते हौ, तुम्हारा लण्ड कितना सख्त होँ रहा हैं।
पारस-हाँ भाभी, अहा… आज तोँ भैया केँ सामने हि ये तुम्हारी बुर मे जानां चाहता हैं… ओहू…ओ… अहाह…ह…
सलोनी- नहि… ईईईइ… पारस… प्लीज ऐसामत करो, मे उनके सामने ऐसा नहि कर सकती। मे उनसे बहोत प्रेम करती हूं। अहाआ… आँ… पारस…हा… हा…ओह…मत करो न्… तुम् बहोत बदमाश हौ गए होँ।
‘अहा… क्याँ करते हौ… प्लीज तुम्हारा लण्ड तौ आज मेरी पजामी हि फाड़ देगा… अहाआ…आआ… नहि… ईईईई…’
पारस-पुच… पुछ्ह्ह्ह्ह… आहह-आहह… हआआ…आज नहि छोड़ूंगा… ओहू…ऊओ… लाओ इसकोहटा दो।
सलोनी- नहींईई पारस… क्याँ करते होँ, पगलागए हौ, देखो वोँ आते हि होंगे, मानजाओ नाँ प्लीज ह्ह्हाआ… ओह… ऊऊओह…
पारस- वो भाभी… क्याँ मस्त बुर हैं आपकी… बिल्कुल छोटी बच्ची कि तरह… कितनी चिकनी औऱ छोटी सि… दिल करता हैं खा जाऊँ… इसको…
वाकयी सलोनी कि बुर बहोत हसीन हैं, उसके छोटे छोटे होंटऐसे आपस मे चिपके रहते हें जैसे किसी किशोर लड़की केँ… औऱ बुर कां रंग गुलाबी हैं जौ उसकी गदराई सफ़ेद जांघों मे जानडाल देता हैं।
उसकी बुर बहोत गरम हैं औऱ उसके होंटों कों खोलजब लाली दिखती हैं तोँ मुझे पक्का यकीन हैं कि बुड्ढों तक कां लण्ड पानी छोड़दे।
मगरइस टाइम वोँ बुर मेरे छोटे भइया पारस केँ हाथ मे थि। पता नहि वोँ नालायक उसको केसे छेड़रहा होगा।
अब फिन सें भयंकर मादक आवाजें आने लगीं।
सलोनी- ह्हाआ… आअ… आआआअ…ओहू… ऊऊओ पारस… नहीईई… प्लीजज्ज… नहि… ईईईई…
पारस- भाभी…इइइ… बसजरा सां झुकजाओ।
सलोनी- वोँ आते होंगे ! तुम् मानोगे नहि।
पारस- भाभी, भैया अभि नहा हि रहे हें, शॉवर कि आवाज़ आँ रही हैं, उनकेआने सें पहले हौ जायेगा। बसजरा सां अहह…आआआ…
सलोनी- ओह…ऊऊओ… क्याँ करते होँ ओह…ऊऊ…वहा नहि पारस…आहआ… आआआआ… आआआआआ… सूखा हि आआआ… तुम् तौ मार हि दोगे।
‘पागल, मैंने कितनी बारकहा हैं गांड मे डालने सें पहलेकुछ चिकना लगालो। ’
पारस- मैंने थूक लगाया थां नाँ औऱ आपकी बुर कां पानी भि लगाया थां… अहा…आआआ… क्याँ छेद हैं भाभी… आनंद आँ गय़ा।
सलोनी- चल पहले मलाईलगा…
‘अरे क्याँ करता हैं सभीदूध ख़राब कर दिया, हाथ सें लेकरलगा न्, लण्ड हि दूध मे डाल दिया… तूँ तौ वाकयी पगला गय़ा हैं। ’
पारस- जल्दकरो भाभी…जब लण्डपी सकती होँ तौ क्याँ लण्ड सें डूबादूध नहि… अहा… जल्दकरो…
सलोनी- अहा…आआ… धीरे-धीरे… पागल… ह्हाआआअ… ह्हाआअ… ओहूऊऊऊ…
दस मिनट तक उनकी आवाजें आती रहीं।
झूठ नहि बोलूंगा, मैंने भि नहाने केँ लिए अपने कपड़े निकाल दिए थें औऱ इस टाइम पूरा नंगा हि उन दोनों कों सुनरहा थां, मेरा लण्ड भि पूरा खड़ा थां औऱ मे उसको मुठिया रहा थां।
सलोनी- अहा… हाआआआ… पारस बहोत जबर्दस्त हैं तुम्हारा लण्ड… अहा…आआ… क्याँ मस्त चोदते हौ… अहा…बस करो नं अब… ऐईईईइ…
पारस-आआ… आआआ…आआ… ह्हह्ह… बस होँ गय़ा भाभी आआआह ह्ह्ह्ह्हा…
सलोनी- ओह…ऊऊऊ… क्याँ कररहे होँ… सभी गन्दा कर दिया… उफ्फ्फ… फ्फ्फ्फ्फ…
तभी पारस पूरा नंगा अपना तौलिया उठा बाहर् आँ गय़ा।
उसका लण्ड अभि भि तना थां औऱ पूरालाल दिखरहा थां।
औऱ फिन सलोनी भि बाहर् आई, माय गॉड क्याँ लगरही थि।
उसकाटॉप बिल्कुल ऊपर थां उसकी दोनों मम्मों बाहर् निकली थि जिन पर्र लाल निशान दिखरहे थें।
ऊपरतनी हुईँ सफ़ेद मम्मों पर्र गुलाबी निप्पल चूसे औऱ मसले जाने कि किस्सा साफ़कह रहे थें।
उसकी ब्रा एक् औऱ कों लटकी थि उसकी शायद तक एक् फीताटूट गय़ा थां।
औऱ नीचे तौ पूरा धमाकेदार दृश्य थां उसकी पजामी उसके पंजों मे थि।
औऱ वोँ पजामी केँ संग हि पैरों कों खोलकर चलरही थि।
उसकी बुर इतनी गीली थि कि मेरामन उसमें अपना लण्ड एक् झटके मे डालने कों कररहा थां।
किचन सें बाहर् आँ उसने तौलिया लिया औऱ मेरीओर पीठ करके अपनी बुर साफ करनेलगी।
उसकीकमर सें लेकर चूतड़ों तक पारस कां वीर्य फैला थां। वोँ जल्द जल्द साफ़ करतेहुए पीछे मुड़कर बाथरूम कि ओर भि देखरही थि।
उसकीइस स्थिति कों देखते हुए मेरे लण्ड नें भि पानी छोड़ दिया।
अब मे नीचेउतर बिना नहाये सिर्फ हाथ मुंह धोकर हि बाहर् आँ गय़ा। हाँ, थोड़े सें बाल जरूर भिगोलिए जिससे नहाया हुआ लगूँ।
बाहर् एक् बार फ़िरसभी कुछ सामान्य थां, सलोनी फिन सें किचन मे थि औऱ पारस शायद अपने कमरे मे थां।
किस्सा जारी रहेगी।
मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story - Aage kya hua? Next part padhiye
Relavant source : click here