आखिर मा चुद ही गई completee - Maa Beta Ka Pyaar - Complete Kahani Part 1
नईकथा हिंदी मे शुरुआत कररहा हु मुझे हिंदी मे ज़्यादा लिखना नहींआता अगरकुछ गलती होँ तोँ माफ् करनाये स्टोरी मा औऱ बेटे केँ बीच संबंध पर्र आधारित हैं शुक्रिया
IGI एयरपोर्ट दिल्ली केँ अराइवल गेट पर्र खड़ी अंजलि बैचनी सें अपनी साड़ी केँ पल्लू सें उँगलियाँ उलझाये अंदर सें आँ रहे यात्रियों कों देख रेहि थि। वोँ वहां पिछले तीन घंटो सें खड़ी थि। उसके पति केँ बारबार कहने केँ बावजूद केँ फ्लाइट उतरने मे अभि दो घंटो सें भि ज़्यादा कां वक़्त हैं वोँ वहां सें नहि हटी थि। वोँ अपने पति कों जिद्द करके टाइम सें बहोत पहले वहां लेँ आई थि। औऱ अब जब्ब फ्लाइट उतरे करीबआधा घंटा हौ चुका थां तो उससे एक् पल्ल भि सबर नहि हौ रहा थां। वोँ भीड़ मे सें ऐड़ियों केँ बल ऊँची होकरआने वालेहर यात्री कों देखति मगर वोँ उसदिख नहि रहा थां। उसके पति नें उसकी बेचैनी जानकर उसे थोड़ी हिम्मत बंधाने कि कोशिश औऱ उसे समझाया केँ कभीकभी भीड़ होने केँ कारनचेक आउट मे अधिक वक़्त लग्ग जाता हैं। मगर पति केँ हर अस्वाशन केँ बावजूद आंजली कि बैचेनि, उसकी अधीरता बढ़ती जारही थि। उसकी आँखे, उसकी गर्दन, उसके कन्धो मे दरद होनेलगा थां। वोँ एयरपोर्ट पऱ काम करने वाले कर्मचारियों कों कोसरही थि। चारसाल सें ज़्यादा वक़्त बीत चुका थां। उसने इतना लम्बा टाइम सीने पर्र पथ्थर रखकर झेला थां मगरअब उससे एक् पल्ल भि झेला नहि जारहा थां। अखिरकार जब्ब उसकी इंतजार कि पीडा बेचैनी आंसूयों कां रूप लेने वाली थि उसे सामने सें वोँ आता दिखयी दिया। उस पऱ नज़र पढते हि अंजलि कां दिलकुछ पलों केँ लिए धड़कना भूल गेया। उसनेउसे पहली नज़र मे हि पहचान लिया थां। हालाँकि उसके चेहरे मे, डीलडौल मे बहुतफरक आँ चुका थां मगर वोँ फरक अंजलि कि नज़र केँ सामने कुछ भि नहि थां। व ट्राली पऱ तीनबैग रखे तेज़ी सें बहार कों आँ रहा थां। वोँ तेज़ तेज़ चलता भीड़ मे सें किसी कां चेहरा ढूंढरहा थां। सबलोग जिनके अपने बाहर् आँ रहे थें, उन्हें देखकर हाथ हिलारहे थें उनको पुकार रहे थें मगर अंजलि उसे पुकार न् सकी, उसके रुंधे गले सें आवाज़ नं निकल सकीऔर नं हि वोँ अपनाहाथ उठाकर हिलासकी। वोँ बसबूथ कि तेरहउसे देखरही थि। तभी उसकी नज़र अंजलि पऱ पढी। भीड़ मे सें चेहरा तलाशते जब्ब उसकी नज़र आखिरकार अंजलि केँ चेहरे सें टकराई तो एक् समय कों उसने अपनी ऑंखे सिकोड़ी जैसे पह्चानने कि कोशिश कररहा हौ। मगर अगले हि लम्हा उसका पूरा चेहर ख़ुशी सें खीलउथ।
"माअअअअअअअ" वोँ मुस्कराते हुए ज़ोर सें चिल्लाया।
आंजलि कां पूर वजूद कांपउठा वोँ इतने वक़्त सें स्वयं कों रोकेहुए थि। मगर वोँ लफ़ज़ सुनते हि अंजली कि आँखों सें आंसूयों कि धाराएँ बह नीकली आगर उसके पति नें उसेथमा न् होता तो सायद वोँ गिर हि जाती।
एयरोप्लेन मे ब्रेकफास्ट देणे केँ बादजलद हि लाइट्स बंदकर दि गई, थि जिन्ह सोना थां वोँ सो सकते थें। मगर विशाल कि आँखों मे नींद नहि थि। चौदह घंटे कि लम्बी फ्लाइट थि औऱ इतने लम्बे अरसेबाद उसकेलिए ये चौदह घंटे काटने बेहद्द मुश्किल थें पिछले चार सालों सें भि ज़्यादा वक़्त सें वोँ परदेश मे रहरहा थां। आज भि उसे वोँ दिनयाद थां जिसदिन उसने अमेरिका केँ लिएघऱ सें निकलना थां। उसकी मां कितनी खुश थि मगर जितनी वोँ खुश थि उससे कहीं बढ़कर वोँ दुःखी थि। उसके चेहरे पऱ इतनी उदासी देख स्वयं विशाल कां गालाभर आया थां। वोँ बड़ेभरी दिल सें घऱ सें निकला थां। विशाल अपनी यादों मे खो जाता हैं।
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बेहतरीन भाग हें दोस्त जितनी तारीफ़ कि जाय उतनीकम हैं
शानदार एपसोड
आखिर मा चुद ही गई completee - Maa Beta Ka Pyaar – New Episode
विशाल सुरु सें हि बहोत तेज़ तर्रार दिमाग़ वाला लड़का थां। उसने हमेशा क्लास मे टॉप किया थां। पढ़ने मे उसकी इतनी दिलचप्सी थि केँ वोँ कभीकभी पूरी पूरीरात जागकर पढता थां। उसके मां बाप कों उसके टीचर्स कों उस पर्र फक्र थां। उसने जब्ब इंजीनियरिंग कॉलेज सें इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग कि डिग्री मे पूरे स्टेट मे टॉप किया तो ऊसके सामने नौकरी ऑफर्स कि झड़ीलग गायी। मगर इससे पहले केँ वोँ कोईऑफर स्वीकार कर पाता, उसे एक् औऱ ऑफर मिला। वोँ थां अमेरिका कि एक् टॉप यूनिवर्सिटी द्वारा आगे पढ़ने केँ लिएफुल स्कालरशिप कां ऑफर। मतलब पढ़ाई औऱ रेहना खाने पिने कां सबका खर्चा स्कालरशिप मे कवर्ड थां। वोँ ऐसाऑफर थां जिसको पाने केँ लिए हज़ारों लाखों स्टूडेंट्स ख़्वाब देखते हें। मगर विशाल खुश नहि थां। अपने मां बाप कि एकलौती औलाद होने केँ कारन उन्होनो विशाल कों इतने प्रेम सें पाला थां खास करके उसकी मां नें केँ वोँ उनसेदूर जाने केँ बारे मे सोच भि नहि सकता थां। अपनी मां कों अकेला छोडने कां ख्याल भि उसे गंवारा नहि थां।
मगर आंतता उसे मानना पढा। स्वयं उसके मम्मी बाप कि जिद्द थि। उसका बाप जौ स्वयं एक् जूनियर इंजीनियर थां, विशाल कों इंडिया केँ किसी अच्छे कॉलेज मे पढ़ा सकता थां मगर विदेश मे खास करके अमेरिका जैसेदेश मे, ये उसके बूते केँ बहार कि बात थि। इसलिये जब विशाल कों स्कालरशिप कां ऑफर मिला तो उसके मां बाप कि ख़ुशी कि कोई सिमा नहि थि। मगरफिन विशाल जानां नहि चाहता थां। उसका तर्क थां केँ उसकेपास कई नौकरी ऑफर्स हें औऱ वोँ कोईजॉब करके बहोत अच्छे सें रह सकता हैं। मगर उसके मां बाप नहि माने। मानते भि केसे, अमेरिका मे उच्च पढ़ाई करने केँ बाद उनका बेटा जिस मुकाम कों हासिल कर सकता थां, रुपया, नाम सोहरत कि जिस बुलन्दी कों वोँ छू सकता थां उस वक्तजॉब करकेकभी नहि कर सकता थां। आखिर विशाल नें अपने मम्मी बाप कि जिद्द केँ आगे घुटने टेकदिए।
वक्त अपनी रफ़्तार सें चलतारहा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे विशाल कि डिग्री केँ चारसाल पूरे हौ गये रिजल्ट आने सें पहले हि उसेकई बड़े बड़ेऑफर आये जिनमे सें उसने एक् मल्टीनेशनल कंपनी कां ऑफर स्वीकार कर लिया। चार साल पहलेउसे जोँ ऑफर मिला थां इसबार उसनेउस ऑफर सें दस् गुणा अधिक पाया थां। एक्साम्स देते हि उसनेजॉब ज्वाइन करली। उसे अपना स्टडी वीसाअब वर्किंग वीसा मे तब्दील करना थां। अखिरकार एक्साम्स कां रिजल्ट आँ गेया, उसने हमेशा कि तेरहटॉप किया थां। उसका वीसा भि लग्ग चुका थां। अब वोँ अपने मम्मी बाप कों अपनेपास बुला सकता थां जिनसे मिलने केँ लिए वोँ तरसाहुआ थां।
जीसदिन विशाल नें अंजलि कों बताया केँ उसका वीसा लग्ग चुका हैं तोँ वोँ उसेजलद सें जलदघऱ आने केँ लिए कहने लागी। स्वयं विशाल भि अपनी मम्मी सें केह चुका थां केँ वोँ वीसा लगते हि छुट्टी लेकरघऱ आँ जाएग। मगर उसदिन ७थ जुलाई कों वीसा लागने केँ अगलेदिन, जब्ब उसने अपनी मां कों फ़ोन किया औऱ उसने उससे बतायाके उसे एक् औऱ हफ्ता लगेगा तो अंजलि कां दिलटूट गेया। विशाल नें अगर पहले नं कहा होता तो कोई औऱ बात होतीमगर वोँ स्वयं अपनी मम्मी कों बता चुका थां केँ वीसा लगते हि वोँ महीने भर केँ लिएघऱ आने वाला हैं मगरअब वोँ अपनी मम्मी कों कहरहा थां केँ वोँ १४ जुलाई केँ बाद हि घऱ आँ सकता थां औऱ वोँ वजह बताने मे भि अनाकानी कररहा थां। अंजलि कां दिलटूट गय़ा। वोँ तो कब्ब सें एक् एक् समयगिण कर निकाल रही थि केँ कब्ब वोँ अपने जिगर केँ टुकड़े कों देख पाएगी। एक् हफ्ता उसकेलिए एक् सदी केँ बराबर थां। उसनेभरे गले सें विशाल कों येकहा केँ "जब उसकामन करे वोँ तब्बआए" फ़ोनकाट दिया।
विशाल येदेख कर केँ उसने अपनी मम्मी कां दिल दुखाया थां आतम गलानि सें भरउठा उसनेउसी टाइम टिकट कां इन्तेज़ाम किया औऱ उसीरात अपनी मम्मी कों फ़ोन पऱ बताया केँ वोँ अगलेदिन दोपहर तक्क दिल्ली मे होगा। अंजलि कां तो जैसे ख़ुशी कां ठिकाना हि नं रहा वोँ पूरीरात सो नं सकी औऱ अगलेदिन अपने पति कों फ्लाइट उतरने केँ कई घंटे पहले हि एयरपोर्ट पर्र लें गायी। वोँ ख़ुशी केँ मारे करीब-करीब नाचति फिनरही थि।
विशाल केँ बाहर् आते हि जैसे हि वोँ भीड़ सें थोड़ी दूर पहुँचा औऱ उधर उसके मां बाप उसकेपास पहुंचे तो उसनेआगे बढ़कर अपनी रोती हुयी मां कों अपनी बाँहों मे भर लिया। उसनेउसे अपने सीने सें भींच लिया। अंजलि औऱ भि बुरी तेरहरो पढी। विशाल नें अपनी मां सें अलग होकरउसे देखा। उसके चेहरे सें अभि भि आंसूबहे जारहे थें। विशाल नें उसके चेहरे सें आंसू पोंछे औऱ उसेफिन सें गलेलगा लिया। उसकी स्वयं कि ऑंखेनम होँ चुकी थि।
मम्मी देखअब रोमत। अब आँ गय़ा हु नां तेरेपास हि रेहंगा। औऱ तुम्हे अपनेसंग लेँ जाऊंगा विशाल अपनी मां केँ चेहरे कों अपने हाथों मे लेकर बोला
आंजलि अपनी साड़ी केँ पल्लू सें अपना चेहरा पोंछती हैं औऱ स्वयं कों कण्ट्रोल करने कि कोशिश करती हैं। विशाल अपने बाप केँ पांव छूता हैं। उसका बाप उसे अशीर्वाद देता हैं, स्वयं उसकी ऑंखे भि नम होँ चुकी थि। जलद हि विशाल कां सामान वाहन मे रखकर तीनोघऱ केँ लिए निकल पढते हैं। अंजलि कि नज़र अपने बेटे केँ चेहरे पऱ तिकी हुयी थि। वोँ इतने प्रेम औऱ स्नेह सें अपलकउसे देखेजा रही थि। वोँ अबरो नहि रही थि। अब वोँ खुश थि। उसका चेहरा उस ख़ुशी सें चमकरहा थां। आजउसे संसार कि सब खुशियां सबसुख मिलगए थें उसका बेटा उसकेपास थां, उसे औऱ कुछ नहि चाहिए थां।
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नई किस्सा केँ लिए बधाई मस्त कहानियाँ पोस्ट कररहे हें दोस्त आपसे एक् रिक्वेस्ट हैं कि पाँचछः एपसोड कि कथा हिन्दी सेक्सी कहानियाँ सेक्शन मे पोस्ट किया करेंइस फोरम पऱ सिर्फ़ लंबी कहानियाँ पोस्ट करे . आपका योगदान सराहनीय हैं थॅंक्स
आखिर मा चुद ही गई completee - Maa Beta Ka Pyaar – New Episode
विशाल नें घऱ पहुंचते हि नहा लिया औऱ अपना सामान खोलने लगा जबकि उसकी मम्मी नें उसकेलिए हल्का फुल्का खानां बनाया क्योंकि विशाल नें स्वयं कहा थां केँ वोँ जलद सें जलद सोना चाहता हैं, उसकी ऑंखे नींद औऱ थकन सें बोझिल होँ रही थि। ऊपर कि मंजिल पर्र उसकारूम रेडी थां। खानां खाकर उसने अपने मां बाप कों वोँ ढेरों तोहफे दिए जिन्हें वोँ कब्ब सें खरीदरहा थां। वोँ तोहफे बेहद्द महंगे थें जिन्हे उसका बाप शायद अफ़्फोर्ड नहि कर सकता थां। उसके मां बाप बेहद्द खुश थें। अखिरकार उसका बाप अंजलि कों लेकर कमरे सें बहार आँ जाता हैं ताकि वोँ सोसके क्योंके अंजलि केँ वहां रहते शायद हि वोँ सो पाता।
विशाल नें अकेला रह जाने पऱ एक् गहरी सांसली औऱ मुसकरा पडा। अपनो केँ संग उनके प्रेम कि गर्माहट मे वोँ कितना सुखद महसूस कररहा थां। उसकेमन कों कितनी शान्ति थि, औऱ उसके अंदर एक् रोमांचकता सें भरपूर ख़ुशी थि। विशाल नें ऑंखेबंद करली औऱ जल्द हि लम्बे सफर कि थकन औऱ नींद नें उसे अपने आग़ोश मे लें लिया।
रात केँ करीब-करीब आठबजरहे थें जब अंजलि नें विशाल कों जगाया। विशाल अभि भि सोने केँ मूड मे थां। मगर अंजलि नें उसे उठने केँ लिए मजबूर कर दिया। विशाल जब नाहा धोकर निचेआया तो उसके मां बाप उसका हि इंतजार कररहे द। खाने केँ टेबल सें स्वाधिष्ट खाने कि प्यारी खुसबू आँ रही थि। उसकी मां नें उसके पसन्द केँ खाने कि सारी डीशेस सें पूरा टेबलभर दिया थां। विशाल मुसकरा उठाउसे बेहद्द तेज़भूख लगी हुयी थि। एक् बारजब वोँ सुरुहुआ तो उसने इतना खाया जितना वोँ आमतौर पऱ दो वक़त केँ खाने मे भि नहि खाता थां। अपनी मम्मी केँ हाथों केँ खाने केँ सामने उन फाइव स्टार होटल्स कां खानां भि कुछ नहि थां जिनमे उसने नजाने कितनी बार खाया थां। आजउसे महसूस हौ रहा थां केँ उसने पिछले चारसाल मे कितना कुछमिस किया थां। औऱ संग हि उसे स्वयं पऱ शर्मिंदगी भि महसूस होँ रही थि केँ इतना प्रेम करने वाली मम्मी सें वोँ अभि औऱ वक्तदूर रेहना चाहता थां।
खाने केँ बाद वोँ अपने पीता सें बाते करने लगता हैं। वोँ अपनी कंपनी औऱ जॉब केँ बारे मे बतारहा थां। औऱ उसकी बातें सुनकर उसके बाप कों उस पऱ फखर होताजा रहा थां। उसका बेटा अब बड़ा व्यक्ति बन चुका थां। जितना वोँ एक् साल मे भि नहि कमा सकता थां, विशाल उससे ज़्यादा एक् महीने मे कमा सकता थां।
कफीदेर बाद विशाल जब अपने कमरे मे गय़ा तो उसने अपनाबैग खोले औऱ अपना सामान सेट करनेलगा उसने अभि तक्क अपनाबैग भि नहि खोला थां। आधे घंटेबाद जब वोँ फ्रीहुआ तो उसकी मम्मी उसकेलिए दूध लेकर आँ गायी। विशाल मुसकरा पडा पुराणी यादें ताज़ा हौ गायी। विशाल बेड पऱ बैठा बैठादूध पिरहा थां जबके अंजलि रूम मे घूमरही थि औऱ फिन वोँ बेड पर्र उसकेपास बैठ गई,। वोँ उसे बड़े धयान सें देखरही थि।
ऐसे क्याँ देखरही होँ मां? विशाल मुस्कराते हुए पूछता हैं।
"देखरही हुन मेरा बेटा कितना जवान कितना बड़ा हौ गय़ा हैं".अंजलि कां चेहरा खिलाहुआ थां। वोँ विशाल केँ गाल पर्र हाथफेर रही थि।
"मगरफिन भि तुमने एक् हि नज़र मे पहचान लिया"। मा कां स्पर्श कितना प्यारा कितना गर्माहट भरा थां।
"हुन तो क्याँ मे अपने बच्चे कों नहि पहचानती"।
"मगर मां मे तुम्हे नहि पहचान सका मेरा मतलब मैंने तुम्हे पहचान तो लिया थां मगर एक् लम्हा केँ लिए मुझे यकीन हि नहि हुआ तुम् कितनी बदल गई, होँ "। विशाल अपनी मां केँ जिस्म पर्र निगाह दौडता बोल।
"मतलब। मुझमेंकेसा क्याँ फरक आँ गय़ा हैं"। अंजलि मुसकरा उठि थि। वोँ जन्ति थि केँ उसमे क्याँ फरक आँ चुक्का थां क्योंके उसेये बोलने वाला विशाल अकेला सख़्श नहि थां बल्कि वोँ कई लोगों केँ मुंह सें येसुन चुकी थि।
"मतलबतुम कितनी पतली होँ गई, होँ मां यकीन नहि होतासच मै औऱ तुम् कितनी सुन्दर दिखरही होँ"। विशाल अपनी मम्मी केँ चेहरे कों हैरत सें देखता केहता हैं।
"मतलब पहले मे बदसूरत थि"। अंजलि हँसते हुए केहती हैं।
"नहि मां तुम् जानती हि मेरा वोँ मतलब नहि थां मगरअब इतनावजन कम् करने केँ बाद तोँ तुम् एकदम जवानलग रही होँ जैसे केँ तुम् मात्र तीस कि हौ सच मे" अंजलि हंस पड़ती हैं।
"बसघऱ पर्र कुछ करने केँ लिए नहि थां इसीलिए थोडा बहोत एक्सरसाइज करनी सुरुकर दि एक् बार सुरुआत करने केँ बाद तो बास मुझे इतना अच्चा लाग्ने लगा केँ मे ज़्यादा सें अधिकवजन कम् करने कि कोशिश करनेलगी मगर वोँ सभ छोड़ो मुझेये बतायो केँ तुम्हारी दोस्ती किसी लड़की सें भि हुयी क्याँ मैने तो जैसा अमेरिका केँ बारे मे सुना थां मुझेडर लगता थां कहींकोई गोरीमेम तुम्हे हमसेछीन हि नं लें".
"अरे मां वहां मुझेकोई भि गोरीऐसी नहि मिली जौ तुम् जैसी सुन्दर हौ अगर तुम् जैसीमिल जाती तो मे सचमुच शायद वापस नहि आता"। विशाल हँसते हुए मज़ाक़ करता हैं।
"बेशरम"अंजलि बेटे केँ बाजु पर्र चापट मारती हैं।
दोनो मां बेटा इसी तेरह बाते करते रेह्ते हैं। कब्बरात केँ गयारह बाज्ज जाते हें उन्हें पता हि नहि चलता। अखिरकार अंजलि अपने बेटे कां माथाचूम करउसे गुड नाईट केहती हैं औऱ वहां सें रुख्सत होती हैं।
विशाल कों लगा थां केँ सायद दोपहर कों सोने केँ बादउसे इतनी जल्द नींद नहि आएगी। मगर खाने औऱ सफर कि अधूरी थकन नें उसेकुछ हि पलों मे गहरी नींद मे पहुँचा दिया।
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