मां का "दूध छुड़वाने से चुसवाने" तक का सफर - desi chudai mom son - Episode 1
माँ कां "दूध छुड़वाने सें चुसवाने" तक कां सफर : पार्ट 1
वैसे तौ मेरानाम साहिल हैं पऱ घऱ मे सब मुझे गोलू कहकर बुलाते हैं। हमारे घऱ मे 3 हि लोग हें। मे मम्मी औऱ बापू। मे अपनी बारवी कि पढ़ाई पूरीकर चुका थां औऱ अबबस प्रतीक्षा कररहा थां रिजल्ट आने कां। हुआयूं केँ एक् दिन मे सोफे पर्र बैठकर टेलीविज़न देखरहा थां औऱ हमारे घऱ कि घंटीबजी। मम्मी रसोई सें निकलकर गेट खोलने गई औऱ आतेहुए बोलि: अरे काजलआओ आओ अंदरआओ।
हमारे पड़ोस कि आंटी कि बेटी कां नाम काजल थां। मे उन्हे दिदी कहकर बुलाया करता थां। आज काजल दिदी अपनी विवाह केँ 5-6 सालबाद अपनेघऱ आई थि। उनकेसंग एक् छोटा सां बच्चा भि थां। मैंने उन्हें नमस्कार किया औऱ बच्चे कों हेलो किया। माँ रसोई मे उनकेलिए पानी लेने गई।
दिदी बोलि : अरे गोलू, कैसा हैं तु?
मे: बिल्कुल बढ़िया दिदी, आप् बताओ।
दिदी : मे भि मस्त
मे: आप् बड़ेसमय बादआए हौ.
दिदी : हां गोलू, बस विवाह केँ बादऐसा हि हैं, इतनीदूर सें रोजरोज नहि आया जाता नाँ।
मे: हां दिदी वोँ तोँ हैं, (मेने बच्चे कि तरफ इशारा करतेहुए कहा)यह अंशु हैं? इतना बड़ा होँ गय़ा यह?
दिदी बोलीं : औऱ नहि तौ क्याँ, ढाईसाल कां होने वाला हैं।
माँ रसोई सें आई औऱ उन्हें सोफे पर्र बैठने केँ लियाकहा औऱ पानी दिया।
माँ : औऱ बता काजल, ससुराल मे सभी केसे हें?
दिदी : जीसभी बढ़िया आंटी
मम्मी : तेरा चेहरा बड़े वक्तबाद देखरही हूं, कबआई वैसे?
दिदी : आंटी, बस आज सुभह हि, अब अंशु केँ पिताजी यहां आँ रहे थें किसीकाम सें तौ मैंने सोचा मम्मी सें भि मिलआती हूं इसी बहाने।
माँ : हां बढ़िया किया, क्याँ लोगीगरम चाय याँ कप कॉफ़ी?
दिदी : अरेकुछ भि नहि आंटी, मे तौ बस आपसे यूंही मिलने चलीआई। आप् बताइए कैसीचल रही हैं लाइफ?
मम्मी : सभी अच्छा चलरहा हैं बेटा, ऐसे केसेकुछ भि नहि लेना, मे कप कॉफ़ी बनाकर लाती हूं, तुम् बैठो।
दिदी : अरे रहने दीजिए नां.
माँ उठकर रसोई कि औऱ जातेहुए : तुम् गोलू सें बातें करो, मे अभि आईबस।
दिदी औऱ मे फिन बाते करनेलगे इधरउधर कि औऱ 5 मिनटबाद माँ कप कॉफ़ी बनाकर लेँ आई।
फिन हम् नें मिलकर कप कॉफ़ी पी औऱ थोड़ी बातें कि। कुछ 10 मिनटबाद अंशु सोफे सें नीचे खिसककर दिदी केँ आगे चिपककर खड़ा होँ गय़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे दिदी कों कुछ बोलने लगा। इतने मे दिदी बोलीं : अभि नहि बेटा, घऱ जाकर।
दिदी केँ ऐसा बोलते हि वोँ रोनेलगा केँ मम्मी नें पूछा : क्याँ हुआ अंशु, जाओ भईया केँ संग, भईया तुमको दुकान सें चीजी दिलवाएगा।
अंशुफिन औऱ रोनेलगा औऱ दिदी कि चुन्नी खींचने लगा।
दिदी : नहि बाबू, अच्छे बच्चे होँ नं आप्, अभि नहि, घऱ जाकर।
जब अंशु औऱ तेज रोनेलगा तौ माँ नें पूछा :क्याँ हुआ काजलइसे? क्याँ बोलरहा हैं यह तेरे सें?
दिदी : अरे आंटीइसे भूखलगी हैं औऱ.
मम्मी : औऱ क्याँ?
दिदी : दरअसल यह अभि भि मेरादूध पीता हैं, यहआदत छोड़ हि नहि रहा।
माँ : ओ अच्छा ऐसा हैं। ओए अंशु शैतान, इतना बड़ा होँ गय़ा हैं फिन भि माँ कां दूध पीना हैं, अब तोँ छोड़दे मां कों।
दिदी : यह तौ जिद्दी हैं एकदम, रोने लग जाता हैं इसेमना करती हूं तोँ।
अंशु कों फिन रोतादेख मम्मी बोलीं : चलोकोई नहि बेटा, तुम् पीलालो इसेदूध।
दिदी नें मम्मी केँ मुंह सें यह सुनते हि बिना मेरे वहां होने कि फिक्र किए अंशु कों उठाया औऱ बोलि : चल आँ, जिद्दी कहीं कां, जब देखो रोनेलग जाता हैं।
दिदी नें उसे थोडा ऊपर उठाया औऱ गोद मे लिटाकर मेरे सामने हि अपनी कुर्ती थोड़ी सि ऊपर कि ओर अपना एक् बूब्स निकाल कर उसके मुंह मे दे दिया। मे यहसभी देखकर हैरान सां हौ गय़ा। आज पहलीबार मैने अपनी आखों सें किसी केँ बूब्स देखें हौ मानो।
शायदयह बस एक् माँ कि ममता हि थि अपने बच्चे कि लिए जिसने फिक्र नाँ कि मेरी मौजूदगी कि भि। मुझेयूं तौ थोड़ी सि हि झलक मिली उनके गोरे गोरे बूब्स कि पर्र, जोँ भि थां यह एहसास मजेदार सां थां।
फिन मम्मी उन्हे ऐसा देखकर बोलि : वैसे अंशु भि गोलू पर्र हि गय़ा हैं इस मामले मे
दिदी : क्याँ, केसे?
माँ मेरीओर इशारा करतेहुए बोलीं : यह भि बड़ा शैतान थां, इसनेतीन साल तक मेरादूध पीना नहि छोड़ा थां। बड़ी मुश्किल सें इस सें पीछा छुड़ाया थां।
दिदी औऱ माँ हसनेलगी औऱ मे चुपचाप सोचने लगा : क्याँ सच मे?
दिदी : अरे आंटी मुझे भि बताओ नें, केसे आपने गोलू सें पीछा छुड़वाया थां?
मम्मी : हां, हुआयूं कि, यह गोलू तौ तेरे अंशु सें भि जिद्दी थां, अगर मे मना करती थि तौ रोता नहि थां बल्कि गुस्से मे आके मेरी कमीज खींचने लगता थां औऱ जबरदस्ती पीने कि कोशिश करता थां।
मे हैरान हुआ औऱ पूछा : सच मे मम्मी?
माँ : औऱ नहि तोँ क्याँ, तूने बहुत परेशान किया हैं मुझे बचपन मे
मे: आप् झूठबोल रहे हौ माँ
मम्मी : लोकरलो बात, अब इसमें क्याँ झूठ बोलूंगी।
दिदी हसनेलगी औऱ बोलीं : आंटी बताओ नाँ केसे पीछा छुड़वाया थां आपने। मे भि अंशु सें छुड़वाना चाहती हूं।
मम्मी : अरे मेरी सासू नें मुझे बताया थां केँ अगर बच्चा दूध नाँ छोड़े पीना औऱ छुड़वाना हौ तोँ दूध पर्र थोड़ी सि लाल मिर्ची पाउडर लगा लियाकरो। ऐसा 5-6 बारकरो। इस सें होगायह केँ जब बच्चा दूध पिएगा औऱ उसे पीने पे मिर्ची लगेगी तौ वोँ अपने आप् धीरे-धीरे धीरे-धीरे छोड़ देगा।
दिदी : हां शायद होँ सकता हैं, पऱ आंटी इसमें मुझेजलन तौ नहि होगीबदन पऱ?
मम्मी : नहि नहि इतनी नहि होगी, बिल्कुल हल्की सि हि चिरमिराहट होती हैं, ज़्यादा नहि।
दिदी : ठीक हैं आंटी मे ट्राई करूंगी।
फिन थोड़ी बहोत औऱ बातें हुईँ परिवार वगैरा केँ बारे मे औऱ दिदी अपनेघऱ चली गई।
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मम्मी कां "दूध छुड़वाने सें चुसवाने" तक कां सफर : पार्ट 2
दिदी केँ चले जाने केँ बाद मैनें माँ सें कहा : माँ.
मम्मी : हैं, क्याँ?
मे: माँ, जोँ आपने दिदी कों बोला, वोँ सच हैं क्याँ?
मम्मी : क्याँ?
मे: वही केँ मे 3 साल तक आपका.
मम्मी : अच्छा वोँ, हां बिलकुल सच हैं
मे: नहि मम्मी, मे नहि मानता, आप् झूठबोल रहे होँ।
मम्मी : अरेसच बोलरही हूं, तेरे बापू आएंगे नां तोँ उन्हीं सें पूछ लेनाबस।
मे: नहि, नहि।
माँ: क्यूं अब क्याँ हुआ?
मे: माँ, बापू सें केसेयह पूछूंगा?
मम्मी : फिनमान लें जौ मे कहरही हूं
मे: नहि माँ, मे नहि मान सकताइसे सच।
माँ : अरेसच मे तुनेऐसा किया हैं। अब केसे यकीन दिलाऊं तुम्हें।
मे: जबसच होगा तौ दिलाओगे नाँ यकीन तौ।
माँ : अरेहां, जब तूँ छोटा कां थां नां तोँ हम् तेरी मोसी केँ यहांगए थें औऱ तब तूने उनकेघऱ पर्र जिद्द कर केँ मेरादूध पीते टाइम मुझेकाट लिया थां गुस्से मे। तु अपनी मोसी सें पूछ लेनाभले, बापू सें नहि पूछ सकता तौ।
मे: क्याँ सच मे मम्मी?
मम्मी : ओर क्याँ, लें मे तेरी मोसी सें अभि बात करवा देती हूं।
माँ नें मोसी कों मोबाइल मिलाया फिन 1 मिनटहाल चाल पूछने केँ बाद मोबाइल स्पीकर पऱ रखकर बोलीं : अच्छा निशायह लें गोलू सें बातकर, इसनेकुछ पूछना हैं तुझसे
मे: नमस्कार मोसी, कैसी होँ आप्?
मोसी : नमस्कार गोलू, मे ठीक हूं तुबता?
मे: मे भि अच्छा हूं मोसी
मोसी : क्याँ पूछना हैं तुम को मुझसे?
मे: मोसी वोँ.वोँ दरअसल
मोसी : हां, क्याँ???
माँ : अरेपूछ भि लें, क्यूं शर्मा रहा हैं।
मे: वोँ वोँ.
मोसी : क्याँ हुआ?कहो नां
माँ : अरे निशाइसे यहबात केँ यह बचपन मे कितना जिद्दी थां।
मोसी : हां गोलू, बहोत जिद्दी थां तु, बसयही पूछने केँ लिए मोबाइल किया थां?
मे: नहि मोसी वोँ, दरअसल.
मोसी : अरे गोलू, बोल नाँ क्याँ पूछना हैं, शर्मा रहा हैं क्याँ? कोई औऱ बात हैं क्याँ? कोई गर्लफ्रेंड बनाली क्याँ? जौ उसके बारे मे कुछ पूछने मे शर्मा रहा हैं।
इसबात पऱ हम् तीनों हसनेलगे औऱ माँ बोलीं : अरे निशा वोँ इसेआज मैंने बताया केँ यह 3 साल तक मेरादूध पीतारहा औऱ इसेलग रहा हैं केँ मे झूठबोल रही हूं।
मोसी जल्दी बोलीं : नहि गोलू, बिलकुल भि झूठ नहि हैं यह, दिदी एकदमसच बोलरही हैं।
मे: नहि मोसी, आप् भि मम्मी कि बात मे हां मिलारहे होँ बस।
मोसी : अरे नहि नहि, सहीकह रही हैं दिदी, तुसच मे पिता थां।
माँ: अच्छा निशा, तुझेही वोँ याद हैं जब हम् तेरेघऱ आए थें औऱ इसने गुस्से मे क्याँ किया थां?
मोसी : हां दिदी वोँ केसेभूल सकती हूं।
माँ : हां, बता तोँ इसेजरा।
मोसी : अरेहुआ यूं केँ दिदी मार्केट गई थि सामान लेने तुम को मेरेपास सोता छोड़कर औऱ तुजबउठा तौ रोनेलगा, तेरे रोने कों चुप कराने कां मेरेपास कोई तरीका थां नहि तोँ दिदी नें मुझसे कहा केँ तेरी मे अपनादूध पिलादूं तौ तुँ शायदचुप हौ गए।
मे: क्याँ सच मे, आपने?
मोसी : ओर नहि तौ क्याँ, वोँ पहलीबार थां जब मैने तुम कोदूध पिलाया थां औऱ हैं ईश्वर तूने तोँ मेरीजान हि निकाल दि थि, तभी मुझे वोँ दिनयाद रह गय़ा।
मे: जान निकाल दि थि, वोँ केसे?
मोसी : दूधचूस चूसकर, तु एक् दमदबा दबाकर चूसरहा थां औऱ मेरे बच्चो नें कभी तेरीतरह इतनादबा करदूध नहि पिया थां इसीलिए।
मे: ओ, अच्छा।
मोसी : हां औऱ फिनजब दिदी मार्केट सें आई तौ तूँ उनका पीनेलगा औऱ तूने उन्हे गुस्से मे काट भि लिया थां वहां पर्र।
माँ : लेँ सुन लेँ होँ गय़ा यकीनअब।
मे: हम्म, हां, हां माँ।
मैनें अचानक नें मोबाइल पर्र मोसी कों बोला : सॉरी मोसी
मोसी : किसलिए?
मे: वोँ मैनें आपको इतना परेशान किया, ओर दबादबा करदूध पियाइस लिए
यह सुनते हि माँ ओर मोसी हसनेलगे औऱ माँ बोलीं : अब सॉरी बोलने सें क्याँ होगा, उस समय केहना थां नाँ।
मे: उस टाइम मुझेपता थोड़ी थां यहसभी।
मम्मी : हां तोँ अब कोनसा तु मोसी कां दूधपी रहा हैं जोँ उन्हे सॉरीबोल रहा हैं।
इस पर्र हम् तीनों हसनेलगे औऱ मे बोला : हां, नहि पीरहा पऱ सॉरी तोँ बनता हैं नां।
माँ : अच्छा जी, जिस माँ कों तूने काटा उन्हे सॉरी नहि बोला औऱ मोसी कों पहले हि सॉरीबोल दिया, वाउ बेटा मोसी सें अधिक प्रेम करता हैं तु।
मे: नहि मम्मी, सॉरी आपको, मैनें आपको गुस्से मे काटा उसकेलिए।
मे भोला बनतेहुए बोला : माँ, आपको दर्द तौ नहि होँ रहा वोँ काटने सें?
मम्मी औऱ मोसी हस्ते हुए : लो दिदी करलोबात, यह हमारा गोलू जितना बचपन मे जिद्दी थां अब बड़ा होकर उतना हि भोलाबन गय़ा हैं। अबपूछ रहा हैं आपसे दर्द कां, इतने सालोबाद।
मम्मी : हां, अब तक तौ वोँ काटने कां निशान भि चला गय़ा होगा, बेटा जी
मोसी : सहीकहा दिदी।
माँ : हां, ओर वैसे भि मे किसी कां सॉरी नहि लेती बेवजह।
मोसी : औऱ मे भि दिदी, गोलू वोँ बचपन कि बात थि बेटा, अगर तूनेअब दबाकर चूसा होता औऱ फिन सॉरी बोला होता तौ मे तेरा सॉरी लेँ भि लेती पर्र वोँ बचपन कां सॉरी केसे लें सकती हूं अब।
इसबात पर्र माँ हसनेलगी औऱ मोसी सोचने लगी केँ यह मे क्याँ बोल गई।
मम्मी भि मज़ा लेतेहुए बोलीं: हां गोलू, जा मोसी कां दूधपी लें दबा केँ औऱ फिन सॉरीबोल देना, फिन मोसी लेँ लेगी।
मोसी हस्ते हुए नॉटी अंदाज मे : क्याँ लेँ लेगी दिदी?
माँ भि हस्ते हुए : अरे सॉरी लें लेगी औऱ क्याँ.
मे हैरान नहि थां माँ ओर मोसी कि ऐसी बातें सुनकर, वोँ अक्सर यूंही खुलकर सहेलियों कि तरह बाते किया करती थि।
मोसी : अच्छा अच्छा सॉरी
मम्मी: हां।
मोसी : ओर दिदी, आप् भि सॉरीमत लेनाऐसे, इसनेकोई आपकोअब थोड़ी चूसते हुए काटा हैं, जोँ आप् इसका सॉरीअब लें।
मम्मी : हां, सही बात हैं।
मे: तौ आप् दोनो क्याँ चाहती हें, मे फिन सें वोँ गलती करूं औऱ फिन आपसे माफी मांगूं?
मोसी : मेरीतरफ सें तोँ कोई मनाही नहि हैं।
माँ : चुपकर बदमाश कहीं कि
मां का "दूध छुड़वाने से चुसवाने" तक का सफर - desi chudai mom son – New Episode
मम्मी कां "दूध छुड़वाने सें चुस्वाने" तक कां सफर : पार्ट 3
फिन मोसी केँ मोबाइल काटने केँ बाद मम्मी मुझसे बोलीं: होँ गय़ा अब तुझेही यकीन।
मे: हां मम्मी
माँ : चलअब टेलीविज़न देखतु, मे खानां बनालूं।
मे: माँ सुनो तोँ
माँ : हां क्याँ?
मे: मम्मी क्याँ मैनें बचपन मे गुस्से मे ज़्यादा तेजी सें काटा थां आपको?
माँ : औऱ नहि तोँ क्याँ, तुम्हारी तरफ अकेला छोड़कर बाजार चली गई थि इसबात सें क्रोध होकर तूने तौ ऐसा काटा केँ बस.
मे: केँ बस.क्याँ माँ?
मम्मी : केँ बस जैसेतु मेरा निपल हि उखाड़ देता वहां सें।
फिन हम् दोनो हसनेलगे औऱ मे बोला : ऐसा थोड़ी होता मम्मी
मम्मी : तेरा क्रोध शांत नां होता तोँ तूँ शायद वोँ भि कर देता।
मे: हम्म, शायद, मुझे तोँ कुछ भि याद हि नहि माँ।
माँ : हांयाद भि केसे होगा, छोटा जौ थां तुउस वक़्त।
मे: हां।
मम्मी : चल मे चलती हूं अब खानां बनाने।
मे: अरे सुनो नाँ, रुको एक् बार
मम्मी : अब क्याँ हैं?
मे: क्याँ आपको अभि भि दुखता हैं माँ, कोई निशान भि हैं क्याँ उसका अभि भि?
माँ : नहि दुखता तोँ नहि अब, ओर निशान थां पऱ अबकम होँ गय़ा हैं इतनेसमय बाद तौ।
मेरेमन मे मम्मी केँ निपल पर्र बनेइस काटने केँ निशान कों देखने कि ख़्वाहिश होनेलगी तौ मैनें अधिक नां सोचते हुए माँ सें कहा : मम्मी, क्याँ मे वोँ निशान देख सकता हूं?
माँ : क्याँ?
मे: मेरा मतलब वोँ, काटने कां निशान दिखाओ नां एक् बार मुझे।
माँ : पागल हौ गय़ा हैं तु?
मे: दिखाओ नां माँ
मम्मी : नहि बेटा, अबतु इतना बड़ा होँ गय़ा हैं, तुम्हे अब केसे दिखा सकती हूं
मे: माँ, मे आपकेलिए तोँ अभि भि बच्चा हि हूं नाँ?
मम्मी : हां वोँ तौ हैं पऱ.
मे: पर्र वर क्याँ मम्मी?
माँ : कुछ नहि, मे नहि दिखारही, तु पागल हैं सच मे। कोईभला अपनी मम्मी सें ऐसे कहता हैं
मे: इसमें क्याँ हुआ माँ?
मम्मी : अरे मेरे भोले गोलू, समझाकर बात, बेटा अबतु बड़ा हौ गय़ा, तूने मुझसे तौ ऐसेबोल दिया, किसी औऱ स्त्री सें ऐसेमत कहना केँ दिखाओ, वरनामार पड़ेगी।
मे भि अब मम्मी केँ बूब्स केँ दर्शन करने कां मनबना हि चुका थां औऱ अपने भोलेपन कां फायदा उठाते हुए प्रेम प्रेम सें मम्मी सें बोलने लगा : क्यूं मम्मी, ऐसा क्यूं?
मम्मी : समझाकर गोलू, कुछ बातें बिनाकहे हि समझ जाया करनी पड़ती हैं।
मे: ठीक हैं मम्मी, जाओ कट्टी आपसे, अब जब तक आप् मुझे वोँ नहि दिखाओगी तब तक मे आपसेबात नहि करूंगा।
मम्मी: जैसी तेरी मर्जी, मे तोँ चली खानां बनाने।
मम्मी उठकर रसोई मे चली गई औऱ मे सोचने लगा केँ अब केसे माँ कों मनाया जाए बूब्स दिखाने केँ लिए। मे सोचता रहा औऱ जबकुछ दिमाग़ मे नाँ आया तोँ टेलीविज़न देखने लगा।
यूंही टेलीविज़न देखते देखते दोपहर हौ गई औऱ माँ कि आवाज़ आई : गोलू बेटा, खानां बना दिया हैं खा लेँ।
मे उनकी आवाज़ सुनकर चुपरहा औऱ कोई जवाब नहि दिया। मम्मी नें फिन 2 मिनटबाद मुझे बुलाया : सो गय़ा क्याँ गोलू?
मे फिनचुप रहा तोँ मम्मी रसोई सें निकलकर आई औऱ बोलीं : तुम्हें दोबार बुलाया मैनें, तूनेकोई जवाब हि नहि दिया, क्याँ हुआ?
मे जिद्दी फिनचुप रहा तौ माँ सोचने लगी क्याँ हौ गय़ा मुझेफिन सोचकर बोलीं : तु अभि तक वही वालीबात लेकर बैठा हैं क्याँ?, सच मे पागल हैं तु.
मे: हां मम्मी, पागल हि कहलोअब आप् मुझे।
मैनें उम्मीद नहि कि थि केँ यहसच होगा पऱ शायद तकदीर अच्छी थि मेरी।
माँ नें फिनपता नहि क्याँ सोचकर मुझे बोला : चलठीक हैं, तुम्हारी तरफ दिखा दूंगी, खानां खा लें अब मेरे बाप।
मे: सच्ची मम्मी?
माँ : हां मेरे बाप हां, चल अब खड़ा होँ औऱ खानां खा।
मे सोफे सें उठा औऱ हाथ धोनेचला गय़ा। फिन हम् दोनों नें मिलकर खानां खाया औऱ मैंने माँ सें कहा : मम्मी दिखाओ नां अब
माँ : नहि अभि नहि बाद मे।
मे: बाद मे कब
मम्मी बर्तन उठाने लगी औऱ बोलि : बाद मे।
मेरा तोँ मानो खड़ा लंड हि बैठ गय़ा होँ यह सुनकर। मम्मी नें तोँ मेरा चूतीया हि बना दिया। फिन मे घऱ सें बाहर् चला गय़ा औऱ साम मे लोटा, घऱ लोटा तौ पिताजी काम सें आँ चुके थें।
बापू सें थोड़ी बहोत बात हुइ, फिन यूंही रात कां खानां खाकर मे अपने कमरे मे जा बैठा औऱ सोचने लगा केँ मम्मी दिखाएगी भि याँ यूंही मुझे खानां खिलाने केँ बहाने सें उन्होंने बोल दिया। इतने मे मम्मी मेरेरूम मे दूध कां गिलास लेकरआई औऱ बोलीं : लें गोलू, तेरादूध कां गिलास।
मे: हां, अच्छा मम्मी सुनो नाँ?
माँ : क्याँ?
मे: वोँ आपने दोपहर मे बोला थां केँ दिखाऊंगी पर्र.
मम्मी : हांयाद हैं मुझे।
मे: तौ फिनकब दिखाओगी?
मम्मी : तु किसी सें कहेगा तौ नहि नां यहबात?
मे: नहि मम्मी।
मम्मी : हां, अपने पिताजी सें भि नहि।
मे: ठीक हैं।
इतने मे माँ नें अपनी नाइटी केँ ऊपर केँ दोबटन खोले औऱ अपना एक् बूब्स बाहर् निकाला। वाउयह नजारा देखकर तोँ मेरा लंड टाइट हौ गय़ा। मम्मी नें केवल नाइटी डाली थि वोँ भि बिना ब्रा केँ। माँ नें आधा बूब्स ढकतेहुए कहा : बसअबखुश हैं जाऊं मे?
मे तौ वोँ आधेढके बूब्स कों उनकी नाइटी सें बाहर् निकला देखकर खुश सां होँ कर बोला : क्याँ, क्याँ कहा आपने?
माँ : जाऊं मे अब, देख लिया?
मे: कहां मम्मी, आपनेइसे हाथ सें तौ छुपारखा हैं, वोँ निशान तौ मुझे दिखा हि नहि।
माँ नें मेरेयह कहने पर्र अपनाहाथ बूब्स सें हटाकर निपल पर्र उंगली लगाते हुएकहा, देखयहा पर्र काटा थां तूने, यह हल्का हल्का सां निशान हैं।
माँ कां वोँ एक् दम सफ़ेद बूब्स औऱ उसपर वोँ बने ब्राउन फैले निप्पल कों पहलीबार इस उम्र मे देख मे तौ मानो पागल सां होँ गय़ा औऱ खुदपर सें कंट्रोल खोने सां लगा। उनके बूब्स कों घुटकर देखने लगा औऱ हल्का हल्का मुस्कुराने लगा केँ माँ बोलि : ओए गोलू, कहां खो गय़ा?
मे: मम्मी वोँ, निशान देखने दो नाँ मुझे
ऐसा कहते हि मैनें अपनाहाथ आगे बढाया हि थां उनके बूब्स पर्र रखने केँ लिए केँ उन्होंने फट सें पीछे होकर अपनी नाइटी केँ अंदर बूब्स कों डाला औऱ बोलीं : क्याँ कररहा हैं बदमाश। बसअबदेख लिया तूने, मे जारही हूं सोने।
फिन माँ चली गई औऱ मे उस लम्हा कों बारबार अपनी आखों केँ सामने लाकर अपना लंड पकड़कर हिलाने लगा। यह पहलीदफा थां केँ मे अपनी माँ केँ नाम कि मुठमार रहा थां। लंड भि माँ केँ नाम सें इतनाखुश हुआ केँ जीभरकर पानी छोड़ा औऱ जल्द हि ढेर होँ गय़ा औऱ सो गय़ा। मे भि इस एहसास सें खुश होकर सुकून कि नींदसो गय़ा।
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