बिना झान्टो वाली बुर complete - bur chudai - Complete Kahani Part 1
RajSharma kahaniyan
बिना झान्टो वाली चूत पार्ट--1
मेरी दिदी कि विवाह चूत-हान पुर मे अभि तीन महीने पहले हुई थि। मेरी बेहन मुझसे दोसाल बरी हैं। विवाह केँ बाद पहलीबार मेरे जीजाजी दिदी कों बीदा कराने महीनेभर पहलेआए थें। उस वक्त सिर्फ एक् दिन हि रुके थें। उस टाइम उनसे बहोत बाते तोँ नहीं हुई मगर मेरी भोली-भली दिदी अपने पति केँ बारे मे वो सभीबता गयीँ, जोँ नई-नई ब्याहता नहींबता पाती।
उसने बताया कि वे बड़े सेक्सी हैं औऱ कामकला मे पारंगत हैं। उनका वोँ (कॉक) बड़ा मोटा हैं, पहलीबार बहोत दर्दहुआ थां। उस टाइम दिदी कि बाते सुनकर नाँ जाने क्यूं जीजाजी केँ प्रति मेरी उत्सकता बहोत बढ़ गयीँ,। सोचती उनका लॉरा नज़ाने कितना बरा औऱ लंबा होगा। बात-बात मे मैने बारे अंतरंग चर्चा मे जीजाजी कि येबात अपनी सहेली कामिनी कों बता दिया। उसको तौ सेक्स केँ सिवाकुछ सूझता हि नहीं.उस चूत चोदि नें मेरेसंग सेक्स कां खेल खेलते हुए (चपटी)हुए जीजाजी सें चुदवाने केँ सबगुर सिखाना सुरूकर दिए। वो स्वयं भि अपने जीजाजी सें फँसी हैं औऱ उनसे चुदवाने कां कोई अवसर नहीं छोड़ती। अपने ट्यूशन टीचर कों भि पतारखा हैं जिससे वो अपनी खुजली मिटवाती रहती हैं। उससे मेरे बहोत अच्छे सम्बन्ध हैं। वो बहोत हि मिलनसार औऱ हँसमुख लड़की हैं मगर सेक्स उसकी कमज़ोरी हैं औऱ मे वो बुरा नहीं मानती। उसका मानना हैं कि परमेश्वर नें महिला पुरुष कों इसीलिए अलगअलग बनाया हैं कि वेआपस मे चुदाई कां खेल खेलें। सेक्स करने केँ लिए हि तोँ अलगअलग सेक्स बनाया हैं। उसकाये भि मानना हैं कि येसभी करतेहुए कुवारि कन्या कों बहोत चालाक होना चाहिए नहीं तोँ वो कभी भि फस सकती हैं औऱ बदनाम भि हौ सकती हैं।
कल मेरी मां नें बताया कि रेखा (दिदी) कां मोबाइल आया थां कि मदन (जीजाजी) एक् हफ्ते केँ लिए ऑफीस केँ काम सें यहा शुक्रवार (फ्राइडे) कों आँ रहें हैं। रेखा उनकेसंग नहीं आँ पाएगी, उसकेयहा कुछकाम हैं.उन्होने हिदायत देतेहुए कहा कि तेरे बापू तोँ दौरे पर्र गयेहुए हैं अब तुम्हे हि उनका ख्याल रखना होगा। रेखा कां उपरवाला रूमठीक कर देना। परसों सें मे भि जल्दकथा सुनकर आँ जाया करूँगी। वैसे वो दिन मे तौ ऑफीस मे हि रहेगा सुभह-साम मे देख लूँगी
जीजाजी परसों आँ रहे हैं जानकर मन अंजान ख़ुसी सें भरउठा। मेरा शरीर बार-बार बेचैन होँ रहा थां औऱ पहलीबार उनसे केसे चुदवाउन्गि इसका सपने देखने लगी। दिदी सें तौ मे येजान हि चुकी थि कि वेबरे चुड़ककर हें।
मे तुम्हे बतादूं कि मेरे पिताजी जोँ इंजीनियर हें उन्होने मेरा औऱ दिदी कां रूमउपर बनवाया हैं ग्राउंड-फ्लोर पर्र मॅमी पिताजी कां बराबेड रूम, ड्रॉयिंग-रूम, किचेन स्टोर, गेस्ट रूम, वरॅंडा, लोन, तथा पीछे सां छ्होटा बगीचा हैं। उपर औऱ कमरे हैं जोँ करीब-करीब खाली हि रहते हें क्योकि मेरे बड़े भैया भाभी अमेरिका मे रहते हैं औऱ बहोत कम हि दिनो केँ लिए हि यहा आँ पाते हें। वेजब भि आते हें अपनेसंग बहोत सि चीज़ें लें आते हैं इसलिये कंप्यूटर, टेलीविज़न, डVड प्लेयर, हांडीकम एत्यादि सब चीज़ें हें। मेरी भाभी भि खुले विचारो कि हैं औऱ अमेरिका जाते वक्त अपनी अलमारी कि चाभी देतेहुए बोलि देखो! अलमारी मे कुच्छा अडल्ट सीडी, डVड & आल्बम रखी हें पर्र तुम् उन्हे देख्ना नहीं उन्होने मुस्कराते हुए चाभी पकड़ा दि थि।
जीजाजी शुक्रवार कों सुभह 8 बजे आँ गये। जल्द-जल्द सजधजकर हुए नस्ता किया औऱ अपने ऑफीसचले गये। दोपहर ढाईबजे वे ऑफीस सें लौटे, खानां खाकर उप्पेर दिदी केँ कमरे मे जाकरसो गये।
उसकेबाद माँ मुझसे बोलि, बबुआसो रहे हैं, मे सोचती हूं जाकरकथा सुनऔन। चमेली आती होगी बरतन धुल्वा लेना। बबुआजी सोकरउठ जाएँ तौ गरमचाय पीला देना औऱ अलमारी सें नस्ता निकाल कर करवा देन.ये कहकर वोँ कथा सुनने चली गई हमारी बरतन माँजने वालीबाई चंपा मेरी हम् उम्र हैं औऱ हमेशा हँसती बोलती रहती हैं
मां केँ जाते हि मे उपर गई देखा जीजाजी अस्त व्यस्त हालत मे सोरहे हैं उनकी लूँगी सें उनका लिंग झाँक
रहा थां। ड्रीम्स मे वे अवश्य चूत (पुसी) कां दीदार कररहे होंगे तभी उनका लॉरा(कॉक) खरा थां। मेरे पूरे जिस्म मे झुरजुरी फॅल गई,। मे कमरे सें निकलकर बर्जे पऱ आँ गई,। सामने पार्क मे एक् कुत्ता कुतिया कि चूत चाटरहा थां फिन थोरीदेर बाद वो कुतिया केँ उपरचढ़ गय़ा औऱ अपना लॉरा उसकी चूत मे अंदर बाहर् करनेलगा। ओह क्याँ चुदाई थि। उनकी चुदाई देखकर मेरी चूत पनिया गयीँ, औऱ मे अपनी चूत कों सहलाने लगी। थोरीदेर बाद कुत्ता केँ लन्ड कों कुतिया नें अपनी चूत मे फँसा लिया। कुत्ता उससे च्छुटने कां प्रयास करनेलगा इस प्रयास मे वो उलट गय़ा। वो च्छुटने कां प्रयत्न कररहा थां मगर कुतिया उसके लौरे कों छोड़ नहींरही थि। येसभी देखकर मन बहोत खराब हौ गय़ा। फिन जीजाजी कि तरफ ध्यान गय़ा औऱ मे जीजाजी केँ कमरे मे आँ गयीँ,।
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जीजाजी जाग चुके थें। मैने पुचछा, गरमचाय (टी) लेँ आउवो बोले नहीं! अभि नहीं.सर दर्दकर रहा हैं थोरीदेर बादफिन मुस्करा कर बोले, साली केँ रहतेहुए गरमचाय कि क्याँ ज़रूरत?
मैनेकहा हटिए भि! लाइए आप् कां सरदबा दूं मे उनकासर अपनीगोद मे लेकर आहिस्ता दबाने लगी.फिन उनकेगाल कों सहलाते हुए बोलि, क्याँ सालीगरम चाय होती हैं कि उसकोपी जाएँगे जीजाजी मेरी आँखों मे आँखडाल कर बोले, गर्म होँ तौ पीने मे क्याँ हर्ज हैं? औऱ उन्होने मुझे थोरा झुकाकर कपड़े केँ उपर सें मेरे चूचियों (बूब्स) कों चूम लिया। मे शरमा उनके सीने पऱ सिर च्छूपा लिया.उस वक्त मे शर्त & स्कर्ट पहनी थि औऱ अंदर कुच्छ भि नहीं। उनके सीने पर्र सर रखते हि मेरे बूब्स उनकेमूह केँ पास आँ गये औऱ उन्होने कोई ग़लती नहीं कि, उन्होने स्कर्ट केँ बटनखोल कर मेरी करारी चूंचियों केँ निपल कों मूह मे लेँ लिया। मेरी सहेलियों मे आप् कों बतादू मेरी सहेली कामिनी नें कईबार मेरी चूंचियों कों मूह मे लेकर चूसा हैं मगर जीजाजी सें चुसवाने सें मेरे जिस्म मे एक् तूफान उठखरा हुआ।
मैने जीजाजी कों चूंची ठीक सें चूसने केँ उद्देश्य सें अपना शरीर उठाया तोँ पाया कि जीजाजी कां लन्ड लूँगी हटाकर खरा होकरहिल रहा थां जैसे वो बुलारहा हौ, आओ मुझे प्रेम करो.ओह मा! कितना मोटा औऱ कारक। मैनेउसे अपने हाथो मे लेलिया। हाथ लगते हि वो मचल गय़ा कि मुझे अपने ओठों मे लेकर प्रेम करो मे क्याकरती उसकीतरफ बढ़ना पड़ा क्योकि मेरी मुनिया (पुसी) भि जीजाजी कां प्रेम चाहरही थि। जैसे हि मैने लन्ड तक पहुचने केँ लिएगोद सें जीजाजी कां सर हटाया औऱ उपरआई, जीजाजी नें स्कर्ट हटाकर मेरी चूत पर्र हाथलगा दिया.फिन चूमकर उसेजीब सें सहलाने लगे.ओह जीजाजी कां लॉरा कितना प्यारा लगरहा थां उसके छ्होटे सें होंठ पर्र चमकरही बूँद (पीकुं) कितना अच्छा लगरहा थां कि मे बता नहीं सकती, लॉरा इतना गर्म थां कि जैसे वो लावा फेकने वाला होँ। उसे ठंडा करने केँ लिए मैनेउसे अपने मुँह मे लेँ लिया। लॉरा लंबा औऱ मोटा थां इसलिए हाथ मे लेकर पूरे सुपरे कों चूसने लगी। जीजाजी चूत कि चुसाइ बड़ेमन सें कररहे थें औऱ मे जीजाजी केँ लौरे कों ज्यादा सें ज्यादा अपनेमूह मे लेने कि कोशिश कररही थि पर्र वो मेरेमूह मे समा नहींरहा थां।
मैने जीजाजी केँ लौरे कों मूह सें निकाल करकहा, हे जीजाजी! ये तौ बहोत हि लंबा औऱ मोटा हैï¿1/2
तुम्हे उससे क्याँ करना हैं? जीजाजी बुर सें जीभहटा कर बोले।
अब मे अपनेआपे मे नाँ रहसकी, उठी औऱ बोलि अभि बताती हूं चोदुलाल मुझे क्याँ करना हैï¿1/2
मे अब तक चुदवाने केँ लिए पगला चुकी थि। मैने उनको पूरीतरह नगाकर दिया औऱ अपने सारे कपरे उतारकर उनकेउपर आँ गयीँ,, चूत कों उनके लौरे केँ सीध मे कर अपने यौवन दरवाज़ा पऱ लगाकर नीचे धक्का लगा बैठीमगर चीख मेरेमूह सें निकली, ओहमा! मे मरी जीजाजी नें झट मेरे चूतरको दोनो हाथो सें दबोच लिया जिससे उनकाआधा लन्ड मेरी चूत मे धसारह गय़ा औऱ वे मेरी चून्चि कों मूह मे डालकर चूसने लगे। चूंची चूसे जाने सें मुझेकुछ राहत मिली औऱ मेरी बुर चुदाई केँ लिएफिन तैय्यार होनेलगी औऱ चूतर हरकत करनेलगे। ताव-ताव मे इतनासभी कुछकर गयीँ, मगरमगर अबआगे बढ़ने कि हिम्मत नहींपड़ रही थि मगर मुनिया (चूत) चुदवाने केँ लिएमचल रही थि।
मे जीजाजी केँ होंठचूम कर बोलीं, जीजाजी उपर आँ जाओï¿1/2
क्याँ चोदोगी नहीï¿
नहीं चुदवाउन्गि अपने चुदक्कर राजा सें
बिना चूत सें लॉरा निकाले वेबरी सफाई सें पलते औऱ मे नीचे औऱ वेउपर औऱ लन्ड मेरी चूत मे जोँ अब थोरीनरम होँ गयीँ, थि। उन्होने मेरे होंठ अपने होंठ मे लें लिया औऱ चूत सें लॉरा निकाल कर एक् जबारजस्ट शॉटलगा दिया। उनका पूरा लॉरा सरसराते हुए मेरी चूत मे घुस गय़ा। दर्द सें मे बहाल होँ गयीँ,। मेरी आवाज़ मेरेमूह मे हि घुटकर रह गई, क्योकि मेरे होंठ तोँ जीजाजी केँ होंठो मे थें। होंठ चूसने केँ संगवे मेरी चूंचियो कों प्रेम सें सहलारहे थें फिन चूंचियों कों एक्-एक् कर चूसने लगे जिससे मेरी चूत कां दर्दकम होनेलगा।
प्रेम सें उनकेगाल कों चूमते हुए मे बोलीं, तुमने अपनी साली केँ चूत कां कबाड़ा कर दियानाï¿1/2
क्याँ करता साली अपनी चूत केँ झांट कों साफकर चुदवाने केँ लिए सजधजकर थीï¿1/2
जीजाजी आप् कों ग़लतफहमी होँ गई, मेरे चूत पर्र बाल हैं हि नहीï¿1/2
ये केसे हौ सकता हैं तुम्हारी दिदी केँ तोँ बहोत बाल हैं, मुझे हि उनकोसाफ करना परता हैï¿1/2
हाँ!ऐसा हि हैं मगर वो सभीबाद मे पहले जोँ कररहे होँ उसेकरोï¿1/2
मेरे चूत कां दर्द गायब होँ चुका थां औऱ मे चूतर हिलाकर जीजाजी केँ मोटे लन्ड कों एडजुस्ट करनेलगी थि जोँ आहिस्ता अंदर बाहर् होँ रहा थां।
जीजाजी नें रफ़्तार बढ़ाते हुए पूछा, क्याँ करूँ?
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मे समझ गई, जीजाजी कुछ गंदीबात सुनना चाहरहे हें मे अपनी गान्ड कों उच्छाल कर बोलीं, हाईरे सालीचोद! इतना जालिम लॉरा चूत कि जर तक घुसाकर पुंच्छ रहे होँ क्याँ करूँहाई रे चूत चोद अपने मोटे लौरे सें मथकर मेरी मुतनी कां शुधा-रस निकालना हैं अब समझे चुदक्कर राजा मैने उनके होंठचूम लिए।
अब तोँ जीजाजी तूफान मैल कि तरह चुदाई करनेलगे। चूत सें पूरा लन्ड निकालते औऱ पूरी गहराई तक पेल देते थें। मे स्वर्ग कि हवओ मे उरनेलगी।
हाई राज्ज्ज्जा ! औऱ ज़ोर सीईईबरा मज्ज़ज़ज्ज्ज्ज्जा एयाया आँ रहा हैं औऱ जूऊर्ररर सीईओह माआ! हाईईईईई मेरी बुर्र्र्र्ररर झरने वाली हैं.मेरी बुर्र्र्र्ररर कीयेयी चितारे यूरा डूऊऊऊऊï¿। हाईईईईई मई गइईईई
रुक्कको मेरी चुदासी राआअनि मे भीईए आआआआअ रहा हूं जीजाजी नें दस बारह धक्के लगाकर मेरी चूत कों अपने गर्म लावा सें भर दिया। मेरी चूत उनके वीर्य ईक-एक् कतरे कों चूसकर खुस हौ गई,।
मेरे चूंचियों केँ बीचसर रखकर मेरेउपर थोरीदेर परेरह कर अपने सांसो कों शांत करने केँ बाद मेरेबगल मे आकर लेटने केँ बाद मेरी वीर्य सें सनी चूत पऱ हाथ फेरते हुए बोलेहाँ! अब बताओ अपनी बिनाबाल वाली चूत कां राज
मे इसराज कों जल्द बताने केँ मूड मे नहीं थि, मैनेबात कों टालते हुएकहा, अरे ! पहले सफाई तोँ करनेदो, चूत चिपचिपा रही हैं। इस साले लौरे नें पूरा भीगा दिया हैं मे उठकर बाथरूम मे चलीआई
.बाथरूम मे मेरे पिछे-पिछे जीजाजी भि आँ गये। मैने पहले जीजाजी केँ
लौरे कों धोकरसाफ कियाफिन अपनी चूत कों साफ करनेलगी। जीजाजी गौर सें
देखारहे थें, शायदवे चूत पऱ बाल नां उगाने कां राज जानने केँ पहलेये
यकीनकर लेनाचाह रहे थें कि बालउगे नहीं हें कि उन्हे साफ किया गय़ा हैं।
उन्होने कहा"लाओ मे ठीक सें साफकर दूं"वे चूत कों धोतेगुए अपनी तसल्ली
करने केँ बादउसे चूमते हुए बोले, "वाकाई तुम्हारे चूत कां कोई जवाब नहीं हैं"
औऱ वे मेरी चूत कों चूसने लगे। मैने अपने पैरो कों फैला दिया औऱ उनकासर
पकरकर चूत चुसवाने लगी."ओह जीजाजी। क्य्ाआअ कार्रर्ररर रहीईई हें।
ओह."
तभी फोन-बेल बजउठा। मैने जीजा सें अपने कों च्छूराते हुए बोलि, "बर्तन
माँजने वाली चमेली होगी" औऱ उल्टे सीधे कपरेपहन कर नीचे दरवाजा
खोलने केँ लिए भागी। दरवाजा खोला तौ देखा चमेली हि थि। मैने राहत कि
सांसली।
अंदरआने केँ बाद चमेली मुझे ध्यान सें देखकर बोलीं, "क्याँ बात हैं दिदी! कुछ
घ्हबराई कुच्छ सरमाई, याँ खुदायह माजरा क्याँ हैं" फिनबात बदलकर बोलीं
"सुभह जीजाजी आए थें, कहां हें" मे बोलि, "उपरसो रहे हें मे भि सो गई,
थि"
"जीजाजी केँ संग?" हसतेहुए वो बोलि।
"तुँ भि सोएगी" मैनेपलट वॉर कियामगर वो भि मंजी हुई खिलाड़ी थि बोलि,
"हे दिदी! हमारा इतनाबरा क़िस्मत मेरा कहां?"
उससेपार पाना मुश्किल थां, बात बढ़ाने सें कोई फ़ायदा भि नहीं थां, क्योकि वो
हमराज़ थि, इसलिए बोलि, "जा अपनाकाम कर, काम ख़तमकर जीजाजी केँ लिए
गरमचाय बना देना, मे देखती हूं कि जीजाजी जागे कि नहीं"
नीचे कां मैनगेट (दरवाजा) बंदकर उपर आँ गई,, चमेली सें मे निसचिंत
थि वो बचपन सें हि इसघऱ मे आँ रही हैं औऱ सभीकुछ जानती औऱ समझती
हैं।
दिदी केँ कमरे मे लूँगी पहनकर बैठे जीजाजी मेरा प्रतीक्षा कररहे थें,
जैसे हि मे उनकेपास गई, मुझे दबोच लिया। मे उनसे छूटने कि नाकाम
कोशिस करतेहुए बोलीं, "चमेली बर्तन धोरही हैं अब उसके जाने तक प्रतीक्षा
करना परेगा"
जीजाजी बोले, "अरे! उसे टाइम लगेगा तब तक एक् बाजी क्याँ दो(टू) बाजी होँ
सकती हैं" वे मेरी बूब्स कों खोलकर एक् बूब केँ निपल कों मूह मे लेकर चूसने
लगे औऱ उनका एक् हाथ मेरी चूत तक पहुँच गय़ा। बाथ-रूम मे जीजाजी चूत
चूसकर पहले हि गरमा चुके थें। अब मे अपने कों नां रोकसकी औऱ लूँगी कों
हटाकर लौरे कों हाथ मे लें लिया। मे बोलि, "जीजाजी ये तोँ पहले सें भि
मोटा होँ गय़ा हैं"
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