बदनाम रिश्ते - body-focused teasing - Complete Kahani All Parts
चेतावनी। यह स्टोरी समाज केँ नियमो केँ खिलाफ हैं क्योंकि हमारा समाजमा बेटे औऱ भइया बेहन औऱ बाप बेटी केँ रिश्ते कों सबसे पवित्र नाता मानता हैं अतःजिन भाइयो कों इन रिश्तो कि कहानियाँ पढ़ने सें अरुचि होती हौ वो यह किस्सा नां पढ़े क्योंकि यहकथा एक् पारवारिक सेक्स कि स्टोरी हैं
बदनाम रिश्ते
दोस्तों मे यानि आपका मित्र राज शर्मा बदनाम रिश्ते मे एक् औऱ नई किस्सा लेकर हाजिर हूं
मे उत्तर भारत मे एक् जमींदार परिवार कां हूं। हमारी बहोत बड़ी खेती हैं। हमारे परिवार मे सब मर्द औऱ औरतें अच्छे ऊंचे पूरे हें। हमारे परिवार मे मेरी माँ, मामाजी, मे औऱ मेरी छोटी बेहन प्रीति हैं। पापा बचपन मे हि गुजरगये थें, तब सें हम् लोग मामाजी केँ संग रहते हें। मामाजी भि अकेले हें, विवाह नहि कि.
घऱ केँ काम केँ अलावा मेरी माँ खेतों मे भि काम करती हैं इसलिये उसका जिस्म बड़ा तंदुरुस्त औऱ गठाहुआ हैं। उसका अच्छा कसाहुआ पेट हैं, लंबी लंबी मजबूत टांगें हें औऱ बड़े बड़े चौड़े कूल्हे हें। मम्मे तौ अच्छे भरावदार औऱ मोटे हें.
जब मैंने अम्मा केँ सजीले जिस्म कों एक् मर्द कि निगाह सें देख्ना शुरुआत कियातब मे उन्नीस बरस कां थां। अपनी माँ कों मे बहोत प्रेम करता थां औऱ उसकेरूप कों अपनी जांघों औऱ बांहों मे भर लेना चाहता थां। हमारा घऱ खेतों केँ बीच थां औऱ चारों ओर ऊंची दीवालें थीं जिससे कोई अंदर नां देखसके। इसलिये मम्मी औऱ प्रीति गरमी केँ मौसम मे अधिक कपड़े पहने बिना हि घूमतीं थीं। बारीक कपड़े पहनकर दोनों बिना ब्रेसियर याँ जांघिये केँ हि रहतीथीं.
मेरी अम्मा कां बदन काफ़ी मांसल औऱ भरा पूरा हैं औऱ वो बड़ी टाइट औऱ बारीक कपड़े कि सलवार कमीज़ पहनती हैं। जब माँ गरमी मे किचन मे बैठकर खानां बनाती थि, तब मुझे माँ केँ सामने बैठकर उसकीओर देख्ना बहोत अच्छा लगता थां। अम्मा बिलकुल पतले टाइट पारदर्शक कपड़ों मे चूल्हे केँ सामने बैठ जाती थि। गरमी सें उसे जल्द हि खूब पसीना छूटने लगता थां। मम्मी कि बड़ी बड़ी चूंचियां उसकीलो कट कि कमीज केँ ऊपरउभर आतींथीं। पसीने सें भीगी कमीज मे सें उसके मांसल बूब्ज़ साफ़ दिखने लगते थें.
मे नजर गड़ाकर पसीने कि बहती धारों कों देखता थां जोँ उसकेगले सें चूंचियों केँ बीच कि गहरीखाई मे बहने लगतीथीं। अब तक पसीने सें गीले बारीक कपड़े मे सें उसके उभरेहुए निपल भि दिखने लगते थें औऱ मम्मी केँ मतवाले उरोजों कां पूरा दर्शन मुझे होने लगता थां। पहले अम्मा मुझेइस गरमी मे बैठने केँ लिये डांटती थि पर्र मे उसे प्रेम सें कहता। "मां जब आप् इतनी गर्मी मे बैठ सकती हें हमारे लिये, तौ मे भि आपकी गर्मी मे पूरासंग दूंगा".
माँ इसबात पर्र मुस्कराकर बोलती "बेटा मे तौ गर्म हौ हि गई हूं, मेरेसंग तूँ भि गर्म होँ जायेगा"। अब असली नाटक शुरुआत होता थां। मम्मी मेरीओर बड़े प्रेम सें देखते हुए कहती"देख कितना पसीना आँ गय़ा हैं" औऱ अपनी कमीज कां किनारा उठाकर मुझे वो अपना पसीने सें तरबतर थोडा फ़ूला हुआनरम नरमपेट दिखाती.
वो एक् पटे पर्र पिशाब करने केँ अंदाज़ मे अपनी जांघें खोलकर बैठती औऱ फ़टाफ़ट चपाती बनाती जाती। मे सीधा उसके सामने बैठकर उसकी जांघों केँ बाचटक लगाकर देखता थां। मेरीनजर स्वयं पर्र देखकर अम्मा अपनाहाथ पीछे चूतड़ पर्र रखकर अपनी सलवार खींचती जिससे टाइट होकर वो सलवार उसकी मस्त फ़ूली फ़ुद्दी पऱ सटकर चिपक जाती.
अम्मा कि फ़ुद्दी कमेशा साफ़ रहती थि औऱ झांटें न् होने सें सलवार उस चिकनी चूत पर्र ऐसी चिपकती थि कि फ़ुद्दी केँ बीच कि गहरी लकीर साफ़ दिखती थि। उसकेपेट सें बह केँ पसीना जब फ़ुद्दी पर्र कां कपड़ा गीला करता तौ उस पारदर्शक कपड़े मे सें मुझे माँ कि चूत साफ़ दिखती। उसका खड़ा बाहर् निकला क्लिटोरिस भि मुझे साफ़ दिखता औऱ मे नजरजमा कर सिर्फ़ वहीं देखता रहता.
अब तक मम्मी कि बुर मे सें चिपचिपा पानी निकलने लगता थां औऱ वो उत्तेजित होँ जाती थि। चूत कि गंध सें मेरासिर घूमने लगता। हम् दुहरे अर्थ कि बातें करने लगते थें। माँ मेरी प्लेट पर्र एक् चपाती रखकर पूछतीं "बेटा तेललगा केँ दूं?"। मे कहता "माँ बिनातेल कि हि लेँ लूंगा, तूँ दे तौ"। रात कों ये बातें याद करके मे खाट मे बैठकर अपना लन्ड हाथ मे लेकर माँ केँ बारे मे सोचता औऱ उसकी बुर चोदने कि कल्पना करतेहुए मुठ्ठ मारता.
अब मे असलीबात बताता हूं कि हमारा आपस कां कामकर्म केसे शुरुआत हुआ। मामाजी बीज खरीदने कों बाहर् गये थें, लगभग एक् हफ़्ते केँ लिये। वैसे पहले भि मामाजी ऐसे जाते थें पर्र इसबार पहलीबार मैंने गौर किया कि एक् दोदिन मे हि मम्मी छटपटाने सि लगी। गायें जैसी गर्म होँ कर करती हें बस वैसा हि व्यवहार मम्मी कां हौ गय़ा। एक् छोटेखेत कि जुताई बची थि। सुभह मैंने माँ सें कहा "माँ मे वो छोटाखेत जोत केँ आता हूं"। मम्मी बोलि "बेटा, अभि तोँ बहोत गर्मी होती हैं, वहांकोई भि तौ नहि आता हैं, आजकल तोँ कोई भि खेतों मे नहि जाता हैं, पूरा वीराना होगा."
मैंने उसके बोलने कि तरफ़ ध्यान नहि दिया औऱ ट्रैक्टर सजधजकर करनेलगा। जब मे निकलने हि वाला थां तोँ अम्मा नें पीछे सें कहा "बेटा मे लंच लें केँ आऊंगी"। मे बोला"ठीक हैं मां पर्र देरमत करना"। मे फ़िर खेतों पऱ निकल गय़ा.
बदनाम रिश्ते - body-focused teasing – New Episode
हमारे खेत बहोत बड़े हें औऱ उसदिन काफ़ी गर्मी थि। कोई भि वहां नहि थां। मे जहांकाम कररहा थां वहां चारों बाजू बाजरे कि ऊंची फ़सल थि। मैंने काफ़ी देरकाम किया औऱ फ़िरबैठ कर सुस्ताने लगा। घड़ी मे देखा तौ दोपहर हौ गयीँ, थि। मुझे सहसायाद आया कि मम्मी लंच लेकर आँ रही होगी। मम्मी कां खयालआते हि मेरा लन्ड खड़ा होनेलगा औऱ रोंगटे खड़े होँ गये। मैंने मस्ती सें मचलकर धीरे-धीरे सें कहा "मम्मी तेरी बुर."
अपने मुंह सें ये शब्दसुन कर मुझे इतना रोमांच हुआ कि मैंने अपनाहाथ पैंट केँ ऊपर सें हि अपने लन्ड पर्र रखा औऱ जोर सें बोला " माँ आजखेत मे चुदवा लें अपने बेटे सें." अब मे औऱ उत्तेजित हौ उठा थां औऱ चिल्लाया "मम्मी आज बुर लें केँ आँ मेरेपास देख मां आज तेरा बेटा हाथ मे लन्ड लें केँ बैठा हैं"। अब मे पूरीतरह सें उत्तेजित होँ चुका थां औऱ ऐसे गंदे शब्द अपनी माँ केँ लियेबोल कर अपने आप् कों औऱ जम केँ गर्मकर रहा थां.
अपनी माँ कि बुर कि कल्पना करकर केँ मे पागलहुआ जारहा थां। मेरा लन्ड तन्नाकर पूरीतरह सें खड़ा हौ गय़ा थां। सुनसान स्थान कां फ़ायदा लेकर मे जोरजोर सें स्वयं सें बातें करताहुआ अपनी मम्मी कि बुर कि सुंदरता कां बखान करनेलगा। पांचदस मिनट हि गुजरे होंगे कि मुझेदूर सें अपनी माँ आती दिखायी दि। उसकेहाथ मे खाने कां डिब्बा थां। मैंने ट्रैक्टर चालू किया औऱ फ़िरकाम करनेलगा.
कुछदेर बाद माँ मेरेपास पहुंची औऱ ट्रैक्टर कि आवाज़ केँ ऊपर चिल्लाकर मुझे उतरने कों कहा। मैंने ट्रैक्टर बंद किया औऱ उसकीओर बढ़ा.मन मे माँ केँ प्रति उठरहे गंदे विचारों केँ कारण मुझे उससे आंखें मिलाने कि हिम्मत नहि हौ रही थि। मम्मी नें खेत केँ बीच केँ पेड़ कि ओर इशारा किया औऱ हम् चलकर वहां पहुंचे। वहां पहुंच कर माँ बोलि "बेटा तूँ कितना गर्म हौ गय़ा हैं। देख कैसा पसीना आँ गय़ा हैं। ला मे तेरा पसीना पोंछदूं."
मेरेपास आँ कर उसने प्रेम सें मेरा पसीना पोंछा। फ़िर हम् खाने बैठे। मे तौ माँ कि तरफ़ ज़्यादा नहि देखपा रहा थां पर्र वो नजरजमा कर मेरीओर देखरही थि। खाने केँ बाद मैंने हाथधोए औऱ फ़िर ट्रैक्टर कि ओरचला, इतने मे माँ पीछे सें बोलीं। "बेटा एक् ज़रूरी बात करनी हैं " मे वापस आँ कर उसकेपास बैठ गय़ा। मम्मी काफ़ी परेशान दिखरही थि.
सहसा वो बोलि "बेटा बाजरा बड़ा होँ गय़ा हैं कोई चोरी तोँ नहि करता." मे बोला "नहि माँ अबकौन लेगाइसे." मां बोलीं "नहि कोई भि चोरीकर सकता हैं तूँ देखआस पासकोई हैं तौ नहि। ऐसाकर तुँ पेड़ पे चढ़जा औऱ सभी तरफ़ देख़ " मैंने पेड़ पऱ चढ़कर सभी तरफ़ देखा औऱ उतर केँ बोला "माँ आसपास तोँ कोई भि नहि हैं, हम् दोनों बिल्कुल अकेले हें। दूर तक कोई नहि दिखता"
मम्मी नें मेरी आंखों सें नजर भिड़ा कर पूछा " हम् दोनों अकेले हें क्याँ?" मैंने सिर हिलाकर हामीभरी तौ वो बोलि "तूँ मुझे बाजरे केँ खेत मे लें चल" मे खेत कि सबसेघनी औऱ ऊंची स्थान कि ओरचल दिया, अम्मा मेरे पीछे पीछे आँ रही थि। जैसे हि हम् खेत मे घुसे, हम् पूरीतरह सें बाहर् वालों कि नजरों सें छिपगये, अगरकोई देख भि रहा होता तौ कुछ नं देख पाता.
मैंने माँ कां हाथ पकड़ा औऱ उसे खींचकर औऱ गहरे लेँ जानेलगा। अम्मा धीरे-धीरे सें मेरेकान मे बोलीं "बेटा कोई देखेगा तौ नहि हमें यहां." मे एक् स्थान रुक गय़ा औऱ उसकीओर मुड़कर बोलि "यहांकौन देखेगा हमें, देख्ना तौ दूरकोई हमारी आवाज़ भि नहि सुन सकेगा".
मे माँ कि ओर देखकर बोला "माँ मेरेसंग गंदाकाम करेगी?" फ़िर औऱ पासजा कर बोला"मा चल गंदी गंदीबात कर नाँ?" मम्मी मेरीओर देखकर बोलीं "अच्छा, तुँ अब मुझे गन्दी स्त्री बनने कों बोल" मे अब उत्तेजित हौ रहा थां औऱ मेरा लन्ड फ़िर खड़ा होनेलगा थां। मैंने इधरउधर देखा, हम् लोग बिलकुल अकेले थें.
मे फ़िर बोला। "मां मे व्यक्ति वालाकाम करूंगा तेरेसंग." मम्मी मेरीओर देखकर बोलि। "क्या बात है मेरेसंग गंदीबात कररहा हैं तुँ." मैंने उसकीओर देखकर कहा"चल अब अपने कपड़े उतार केँ नंगी हौ जा." मम्मी कां चेहरा इस पर्र सरम सें लाल होँ गय़ा औऱ वो शर्माकर बोलीं "नहि पहले तूँ अपना लन्ड दिखा".
मैंने अपनी ज़िप खोली औऱ फ़िर अपनी अंडरवियर निकाली। अंदरहाथ डालकर मैंने अपना लंबा तगड़ा लन्ड बाहर् निकाला औऱ अम्मा केँ हाथ पकड़कर उंगलियां खोलकर उनमें थमा दिया "लेँ मेरा लन्ड पकड़" मेरे हि लन्ड पर्र मेरी स्वयं कि माँ केँ नरम हाथों कां स्पर्श मुझे पागलबना रहा थां। मैंने अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे अम्मा केँ कपड़े उतारना शुरुआत कर दिये। उसकी कमीज़ केँ दोनों छोर पकड़कर मैंने ऊपर खींचे औऱ उसने भि दोनों हाथों कों उठाकर मुझे कमीज़ निकाल लेने दि.
अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रेसियर औऱ सलवार मे खड़ी थि। मैंने उसकी सलवार कि नाड़ी खींच दि औऱ सलवार कों खींचकर उसके पैरों मे नीचे उतार दिया। मम्मी नें पांवउठा कर सलवार पूरीतरह सें निकाल दि। अब मेरी माँ सिर्फ़ ब्रा औऱ पैंटी मे मेरा लन्ड पकड़कर मेरे सामने खड़ी थि। मैंने उसका चुंबन लेतेहुए अपनेहाथ उसके नंगे कंधों पर्र रखकरकहा "अम्मा, तुझेही नंगीकर दूं? " मम्मी कुछ नं बोलीं पर्र मेरे लन्ड कों प्रेम सें दबाती औऱ सहलाती रही जौ अब खड़ा होकरखूब बड़ा औऱ मोटा होँ गय़ा थां.
मैने मम्मी कों बांहों मे लिया औऱ उसकी ब्रा केँ हुकखोल दिये। ब्रा नीचेगिर पड़ी औऱ मम्मी केँ सुंदर मोटे बूब्ज़ मेरे सामने नंगे हौ गये। मम्मी नें जल्दी शरमाकर मुझेपास खींच लिया जिससे उसकी चूंचियां नं दिखें। ये देखकर मैंने उसकेकान मे शरारत सें कहा " मम्मी, अपने बेटे कों चूंची दिखाने मे इतना शरमारही हैं तौ तूँ अपनी बुर केसे खोलेगी मेरे सामने?" मां अब बोलीं " चलअब अधिक बातें मतकर, मेरेसंग कामकर"
मुझेअब बड़ा आनंद आँ रहा थां औऱ मम्मी कि शरमकम करने कों मे उससे औऱ गंदी गंदी बातें करनेलगा। मैंने दबी आवाज़ मे पूछा "मरवाएगी?" माँ बोलि "इतनीदूर सें मरवाने केँ लिये हि तौ आई हूं, बाजरे केँ खेत मे नंगी खड़ी हूं तेरे सामने औऱ तुँ पूछरहा हैं कि मरवाएगी?" मैंने उसे औऱ चिढ़ाते हुए पूछा "कच्छी उतारदूं क्याँ"
बदनाम रिश्ते - body-focused teasing – New Episode
माँ अब तक मेरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे सताने वाले व्यवहार सें चिढ़ गयीँ, थि। वो मुझेअलग कर केँ पीछे सरकी, एक् झटके मे अपनी पैंटी उतार केँ फ़ेक दि, अपने कपड़ों कों नीचे बिछाया औऱ उन पऱ लेट गई,। अपने घुटने मोड़कर अपनी जांघें उसने फ़ैलायीं औऱ अपनी बुर कों मेरे सामने खोलकर बोलीं "औऱ कुछ खोलूं क्याँ? अब जल्द सें अपना लन्ड डाल!"
मैंने अपने कपड़े उतारे औऱ माँ कि टांगों केँ बीच घुटने टेककर बैठ गय़ा। मेरी माँ अपनी नजरें गड़ाकर मेरे मस्त तन्नाये हुए लन्ड कों देखरही थि। मैंने हाथ मे लौड़ा लिया औऱ धीरे-धीरे सें चमड़ी पीछे खींची। लाललाल सूजेहुए सुपाड़े कों देखकर माँ कि जांघें अपने आप् औऱ फ़ैल गयीं। हम् दोनों अब असहनीय वासना केँ शिकार हौ चुके थें.
माँ भर्रायी आवाज़ मे बोलि "अबदेर मतकर बेटे, अपना लन्ड मेरे अन्दर करदे जल्द सें"। मैंने लन्ड पकड़कर सुपाड़ा माँ कि बुर केँ दरवाज़ा पऱ रखा। फ़िर उसके घुटने पकड़कर उसकी जांघें औऱ फ़ैलाते हुए आंखों मे आंखें डालकर पूछा"चोद दूं तुम को?"
मम्मी कां पूरा जिस्म मस्ती सें कांपरहा थां। उसने अपनासिर हिलाकर मूक जवाब दिया’हां’, मैंने घुटनों पर्र बैठे बैठेझुक कर एक् धक्का दिया औऱ लन्ड कों उसकी चूत मे घुसेड़ दिया। जैसे हि मोटा ताजा सुपाड़ा उसकी गीली चूत मे घुसा, माँ कि बुर केँ पपोटे पूरेतन कर चौड़े होँ गये। मम्मी सिसककर बोलि "आँ बेटे मेरेऊपर चढ़जा." ये सुनकर लन्ड कों वैसा हि घुसाये हुए मे आगे झुका औऱ अपनी कोहनियां उसकी छाती केँ दोनों ओरटेक दीं। फ़िर अपने दोनों हाथों मे मैंने अम्मा कि चूंचियां पकड़लीं.
हम् दोनों अब एक् दूसरे कि आंखों मे आंखें डालकर देखरहे थें। मैंने अब एक् कसकर धक्का दिया औऱ मेरा पूरा लन्ड माँ कि बुर कि गहराई मे समा गय़ा। लंबी इंतजार औऱ चाहत केँ बाद लन्ड घुसेड़ने कां काम आखिर समाप्त हुआ औऱ हमारा ध्यान अब चुदाई केँ असलीकाम पर्र गय़ा। मे माँ कों चोदने लगा। हम् दोनों वासना मे डूबेहुए थें औऱ एक् दूसरे कि कामपीड़ा कों समझते हुए पूरेजोर सें एक् दूसरे कों भोगने मे लगगये.
माँ कि मतवाली बुर बुरीतरह सें चूरही थि औऱ मेरा लन्ड उसकी चूत केँ रस सें पूरीतरह चिकना औऱ चिपचिपा होँ गय़ा थां। मे पूरेजोर सें धक्के मारमार कर मां कों चोदरहा थां। अपनी मम्मी कों चोदते हुए मुझे जोँ सुखमिल रहा थां वो अवर्णनीय हैं। मैंने उसके गुदाज बड़े बड़े मम्मों अपने पंजों मे जकड़रखे थें औऱ उसकी आंखों मे देखते हुए लंबे लंबे झटकों केँ संग उसकी बुर मे अपना लन्ड अंदर बाहर् कररहा थां.
अम्मा कां चेहरा अब कामवासना सें तमतमा करलाल हौ गय़ा थां औऱ गर्मी सें पसीने कि बूंदें उसके होंठों पऱ चमकने लगीथीं। अब जैसे मे लन्ड उसकी बुर मे जड़ तक अंदर घुसेड़ता, वो जवाब मे अपने चूतड़ उचकाकर उल्टा धक्का मारती औऱ अपनी बुर कों मेरी झांटों पऱ दबा देती। मैंने उसकी आंखों मे झांका तौ उसनेनजर फ़ेरली औऱ बुदबुदायी, "अब तुँ बच्चा नहि रहा, तूँ तौ पूरा व्यक्ति हौ गय़ा हैं." मैंने पूछा "माँ, तुँ चुद तौ रही हैं नाँ अच्छी तरह?" मम्मी कुछ न् बोलीं, बस चूतड़ उचका उचकाकर चुदाती रही.
उस दोपहर मैंने अपनी माँ कों अच्छा घंटेभर चोदा औऱ चोदचोद कर उसकी बुर कों ढीलाकर दिया। आखिर पूरीतरह तृप्त होकर औऱ झड़कर जब मे उसके जिस्म पऱ सें उतरा तौ मेरा झड़ा लन्ड पुच्च सें उसकी गीली चिपचिपी चूत सें निकलआया। अम्मा चुदकर जांघें फ़ैला कर अपनी अपनी चुदी चूत दिखाते हुए हांफ़ते हुए पड़ी थि.
वो धीरे-धीरे सें उठी औऱ कपड़े पहनने लगी। मैंने भि उठकर अपने कपड़े पहन लिये। हम् खेतों केँ बाहर् आँ कर ट्रैक्टर तक आये औऱ अम्मा बर्तन उठाने मे लग गई,। बरतन जमाते जमाते बोलि "रात कों मेरे कमरे मे एक् बार आँ जानां." मैंने पूछा "मम्मी रात कों फिन बुर मरवाएगी?" मम्मी नें जवाब नहि दिया, बोलीं "प्रीति कों तौ तूँ चोदता होगा?"
प्रीति मेरी छोटी बेहन हैं, मुझसे एक् साल छोटी हैं। मैंने आंखें नीचीकर लीं। मां बोलीं "ठीक सें बता नाँ। बेहन कों तोँ बहोत लोग चोदते हें."
मे धीमी आवाज़ मे बोला " नहि माँ अभि तक तोँ नहि"
मम्मी मेरेपास आकर बोलीं "बेटे, अपनी बेहन कों नहि चोदा तूनेआज तक? बेहन कों तोँ सबसे पहले चोदना चाहिये, बेटे, भइया कां लन्ड सबसे पहले बेहन कि बुर खोलता हैं। बेटेपता हैं? देहात मे जितने भि घऱ हें, सभी घरों मे भइया बहनों कि बुर नंगीकर केँ उनमें लन्ड देते हें." मुझे विश्वास हि नहि हुआ कि मेरी मम्मी स्वयं मुझे अपनी बेहन कों चोदने कों कहरही थि.
"मुझे हि देख, तेरे मामाजी रोज चोदते हें मुझे, दो दिन नहि चुदी तोँ क्याँ हालत हौ गयीँ, मेरी। प्रीति कों मतसता, चोदडाल एक् बार" माँ नें फ़िरकहा.
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