raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ complete - Desi kamuk kahani - Complete Kahani Part 1
raj sharma kahaniyan
मस्त घोड़ियाँ--1
written by RKS
hindi font by mai
मनोहर अपनी गाड़ी सें नीचे उतरता हैं औऱ सामने कि बिल्डिंग मे जाकर सीधे लिफ्ट केँ अंदर पहुचकर 4 दबाता हैं
औऱ कुछदेर मे लिफ्ट 4थ माले पऱ पहुच जाती हैं, सामने एक् व्यक्ति बैठाहुआ तंबाखू रगड़रहा थां औऱ
मनोहर कों देखते हि जल्द सें खड़ा होकर सलाम करता हैं,
मनोहर-सेठ जी अंदर हैं,
जी साहेब अंदर हि हैं, मनोहर सीधे दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल होतेहुए अरे क्याँ दोस्त रतन तुँ यहा ऑफीस
मे घुसा हैं औऱ मे दोदिन सें ठीक सें सो नहींपा रहाहू,
रतन-अरे बैठो मनोहर तुम् तौ हमेशा हि जल्द मे रहते होँ जब कि हमारा काम हैं बिल्डिंग बनवाना औऱ वो
काम तोँ धीरे-धीरे हि होता हैं,
मनोहर- अरे मे वो नहींकह रहाहू जोँ तुम् समझरहे हौ
रतन- मुस्कुराते हुए, अरे मेरे मित्र मे सभीसमझ रहाहू औऱ मैने तेराकाम भि कर दिया हैं, अबकुछ देर
तोँ अपने लन्ड कों संभाल कररख, अब मे तेरेलिए रोज-रोज तौ 17-18 साल कि कुँवारी लोंड़िया चोदने केँ लिए नहींला
सकताहू नाँ, फिन भि जुगाड़ करके एक् मस्तमाल कां अरेंज किया हैं औऱ फिनरतन बेलबजा कर चपरासी कों बुलाता
हैं,
मनोहर- कही तूनेउसे पहले हि चोद तोँ नहीं दिया
रतन- अरे नहीं बाबा वो तौ मैने तेरेलिए हि बचाकर रखा हैं, तेराकाम होँ गय़ा हैं अब ज़रा धंधे कि बात
कर लेँ,
मनोहर- बोल क्याँ करना हैं
रतन- मेरी तौ एक् हि ख़्वाहिश हैं औऱ वो कामबस तुँ हि करवा सकता हैं
मनोहर-हाँ तोँ बोल नाँ
रतन- वोँ जौ तेरा साथी मेहता हैं उसकी एक् नई मार्ग पर्र जोँ ज़मीन हैं वो केसे भि मुझे दिलवा देफिन देखउस
ज़मीन सें मे कहां सें कहां पहुच जाउन्गा,
मनोहर- अबे ड्रीम्स देख्ना छ्चोड़ दे मेहता उस ज़मीन कों किसी कीमत पऱ नहीं बेचेगा
रतन-बेचेगा वो अवश्य बेचेगा अगर एक् बार तूँ उससेकह दे, मे जानता हू वो तेरीबात कभी नहीं टालेगा क्यो कि
उसकेउपर तूने एक् हि इतना बड़ा एहसान कररखा हैं कि वो जीवनभर तुम को अपना खुदा मानता रहेगा,
मनोहर- मगररतन मे इतना ख़ुदग़र्ज़ नहीं कि उस पर्र किए एहसान कि कीमत मांगू, सॉरी साथीकोई औऱ बात होती तोँ
मे तेरेलिए कभीमना नहीं करता पऱ इसबात केँ लिए तूँ मुझे क्षमा करदे,
तभी कॅबिन केँ अंदर एक् 25 साल कि मस्त सुंदर लोंड़िया आती हैं उसने एक् स्कर्ट जौ उसके घुटनो तक थां औऱ उपर एक्
शर्टपहन रखा थां उसकेदूध इतने बड़े औऱ मोटे थें कि मनोहर कां तौ लन्ड खड़ा हौ गय़ा औऱ जब वो
लोंड़िया थोडा आगे जाकर पलटी तौ उसकी मोटीकसी गंददेख कर मनोहर नें टेबल केँ नीचे अपनाहाथ लेजाकर अपने
लन्ड कों सहलाते हुए उसकी गुदाज गंद देख्ना शुरुआत कर दि,
रतन-अरे सपना ज़रा जिंदगी कों मोबाइल लगाकर मेरीबात कर्वाओ
सपना-जी सर
ओरफिन सपना नें जिंदगी कों मोबाइल लगाकर रतन कों दियारतन नें मोबाइल लेकर सपना सें कहा ज़रा चपरासी कों बोल
कर दोकप कॉफ़ी कां बंदोबस्त करदो,
सपना कों जातेहुए मनोहर पीछेमूड कर देखने लगा औऱ उसके भारी फैलेहुए चुतडो कों बड़ीगौर सें
देख-देख कर अपना लन्ड मसलरहा थां,
रतन-ओये बसकर औऱ इधरदेख
मनोहर- वाउरतन क्याँ माल हैं साले कितनी मस्त लोंड़िया कों तूने अपनीपीए बनारखी हैं,
रतन- बहोत मस्त हैं क्याँ
मनोहर- खुदाशपथ एक् बार तुँ तौ इसकी दिलवा दे साली कों रातभर पूरी नंगी करके चोदुन्गा,
रतन- हेलो जिंदगी साम कों उस लोंड़िया कों संग लेकर मेरे फार्महाउस पर्र आँ जानां
रतन- लें तेराकाम हौ गय़ा हैं औऱ अबसाम कों वो अपने ठिकाने पऱ आँ जाएगी,
मनोहर- अरेरतन उसको छ्चोड़ तुँ तौ तेरीइस पीए कों एक् बार मेरी बाँहो मे भेजदे शपथ सें कितनी मस्त चुचिया
औऱ गंद हैं उसकी,
रतन- अबे साले वो मेरी बेटी सपना हैं औऱ उसनेMBआ कर लिया हैं इसलिये उसे अपनेसंग हि बिजनेस मे लगा लिया हैं
अब मेरे सारेकाम कों आरामसे वो संभाल रही हैं,
मनोहर कां मूह एक् दम सें सुख गय़ा उससेकुछ बोलते नहींबन रहा थां पऱ फिन वो रतन कों देखकर
मुस्कुराते हुए अपनेकान पकड़कर सॉरी दोस्त मुझे ज़रा भि नहीं मालूम थां कि वो तेरी बेटी हैं,
रतन- मुस्कुराते हुए इसीलिए तोँ मैने तेरीबात कां बुरा नहीं मानातभी उनकीकप कॉफ़ी आँ जाती हैं औऱ मनोहर औऱ
रतन चुस्किया लेने लगते हैं, मनोहर कां लन्ड अभि तक खड़ाहुआ थां तभी सपना एक् बारफिन सें अंदरआती हैं
औऱ कुछ फिलो कों उठाकर वापस जाने लगती हैं तभी
रतन-सुनो बेटी
सपना-जी पिताजी
रतन-यह मेरेखास मित्र हैं मनोहर औऱ मनोहर ये मेरी एक्लोति बेटी सपना हैं
सपना- नमस्कार अंकल
मनोहर नमस्कार बेटा
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सपना कि नशीली नज़रो औऱ गुलाबी रस सें भरे होंठो कों देखकर मनोहर कां लन्ड फिन सें उसकी पेंट मे तन
चुका थां, मनोहर फिन सें सपना केँ खूबसूरती मे खोने वाला थां तभीरतन नें कहा अच्छा सपना बेटी तुम् जाओ
मुझे ज़रा मनोहर सें कुछ बाते करनी हैं औऱ फिन सपनावहा सें चली जाती हैं,
मनोहर- दोस्त एक् बातबता रतन तेरी बेटी कि उम्र लगभग 25 साल तोँ होगी औऱ तेरी उम्र कों देखकर लगता नहीं हैं कि
तेरीकोई 25 बरस कि बेटी होगी,
रतन- क्यो भइया मे भि तोँ 50 टच करने वालाहू औऱ तुँ भि साले बुढ्ढा होने कि कगार पऱ हि हैं
मनोहर- हाँहाँ ठीक हैं मगर तुझसे तौ दोसाल अभि छ्होटा हि हू, पऱ रतन पहलेकभी तेरी बेटी कों यहा देखा
नहीं,
रतन- मुस्कुराते हुए लगता हैं तुम्हें मेरी बेटी बहोत पसन्द आई हैं,
मनोहर- मुस्कुराते हुए नहीं दोस्त वो बात नहीं हैं,
रतन-अच्छा सुनसाम कों टाइम सें आँ जानां फिन बाकी बाते मेरे फार्महाउस पऱ हि करेगे,
मनोहर-अच्छा ठीक हैं औऱ फिन मनोहर वहा सें उठकरचल देता हैं
मनोहर कि गाड़ी मार्केट केँ ट्रॅफिक सें आहिस्ता गुजररही थि, तभी थोडा आगेरतन कों दो मस्त लोंड़िया स्कर्ट औऱ
वाइट शर्ट पहनेरोड सें अपने भारी भरकम चूतड़ मतकते हुए जाते दिखी,
मनोहर नें जब वाहन थोडा लगभग
लाकर उन्हे देखातभी एक् लड़कीपास केँ सब्जी केँ ठेले पऱ रुककर अपनीगंद खुजलाते हुए सब्जियो केँ भाव
पूछने लगी, मनोहर कां लन्ड उसकी मोटीगंद कों देखकर खड़ा होँ गय़ा औऱ जब वो उसके बिल्कुल पास सें गुजरा तोँ
उसकेहोश उड़गये वो लड़कीकोई औऱ नहीं बल्कि उसकी अपनी बेटी संगीता थि,
संगीता 18 साल कि मस्तभरे शरीर
कि लोंड़िया थि,
मनोहर- अरेये तौ संगीता हैं, पऱ इसकीगंद कितनी मस्त हौ गई हैं मैने तोँ आज तक कभीइस पऱ गौर हि नहीं
किया,
मनोहर नें अपनी गाड़ी साइड सें लगाकर अपनी बेटी कि गुदाज जाँघो औऱ उसकी गदराई गंद कों अपना लन्ड मसल-
मसल कर देखने लगा, थोड़ी देरबाद संगीता उस लड़की केँ संगआगे चलनेलगी औऱ मनोहर नें अपनी गाड़ी अपने
घऱ कि ओरचला दि,
मनोहर कि आँखो केँ सामने अभि तक उसकी बेटी कि गदराई मोटीगंद नज़र आँ रही थि औऱ
उसका लन्ड पूरीतरह तनाहुआ थां वो जबघऱ पहुचा तब उसकीबहू संध्या नें दरवाजा खोला, संध्या जौ कि
23 साल कि मस्त लोंड़िया थि, दरवाजा खोलते हि संध्या नें अपने ससुरजी कों देखा औऱ जैसे हि अपनासर झुकाया अपने
ससुरजी केँ पेंट मे बने बड़े सें तंबू कों देखकर वो सन्नरह गई औऱ जल्द सें दबे पाँव अपनेरूम मे चली
गई,
संध्या- अरे सुनते हौ तब रोहित नें उसकेदूध अपने हाथो सें मसल्ते हुए क्याँ हैं मेरी रानी क्यो बोखलाई हुईँ
होँ,
संध्या- लगता हैं तुम्हारे पिताजी सुभह-सुभह किसी कुँवारी लोंड़िया कि उठी हुईँ गंददेख कर आँ रहे हैं जाकर
देखो उनका लन्ड उनके पेंट कों फाड़कर बाहर् आने कों बेताब हैं,
रोहित- क्याँ बकरही हौ रानी बेचारे बापू केँ बारे मे
संध्या- तुम्हारी शपथ रोहित मैनेसच मैने उनका लन्ड खड़ा देखा हैं,
रोहित- अच्छा ठीक हैं अब खड़ादेख लिया तौ क्याँ तुम्हारी बुर भि फूलने लगी हैं औऱ फिन रोहित नें संध्या कि
बुर कों उसकी साडी केँ उपर सें दबोच लिया, संध्या नें नाभि केँ नीचे सें साडी बँधी हुईँ थि औऱ रोहित उसके गुदाज पेट
कों सहलाते हुए उसके मोटे-मोटे दूध कों दबाकर
रोहित- संध्या कही बापू कि नज़र तुम्हारे इनकसे हुए चुचो पर्र तौ नहींपड़ गई, बापू सें बच केँ रहना तुम्
नहीं जानती वो कितने बड़े चुड़क्कड़ हैं, अभि जब फूफी मां केँ संग बाजार सें लॉटकर आएगीतब देख्ना पिताजी
कां हाल,
संध्या- तुम्हारी फूफी भि तोँ छीनाल कितनी बड़ी रंडी लगती हैं हरदो महीने मे अपनी मोटीगंद उठाकर चली
आती हैं, कहती हैं बेटे कों तोँ हॉस्टिल मे डाल दिया हैं औऱ पति दुबईचला गय़ा हैं अबघऱ मे कोई नहीं हैं तोँ
सोचा भैया भाभी केँ यहा थोडा वक़्त गुज़ार लू,
रोहित- अब छ्चोड़ो भि औऱ क्याँ तुम् जब देखोकही कपड़े धोने कां कामकही उन्हे उठाकर फिन जमा-जमा कर
रखने कां काम तुम्हे मेरेलिए तोँ समय हि नहीं मिलता हैं
संध्या- अच्छा तुम् ये कपड़े उस अलमारी मे डालदो मे बापू कों पानीदे करआती हू औऱ फिन संध्या बाहर्
चली जाती हैं,
रोहित बैठे-बैठे धोएहुए कपड़े घड़ी करने लगता हैं औऱ उसकी नज़र एक् गुलाबी कलर कि छ्होटी सि पेंटी पऱ
चली जाती हैं, तभी संध्या रोहित केँ हाथ मे वो पेंटी देख लेती हैं,
रोहित - अरे संध्या ये छ्होटी सि पेंटी किसकी हैं
संध्या- मुस्कुराते हुएअब जानबुझ कर अंजान मतबनो जैसे अपनी बेहन संगीता कि पेंटी नहीं पहचानते होँ
रोहित - ये संगीता कि पेंटी हैं, कितनी छ्होटी सि हैं नाँ
संध्या- संगीता कि पेंटी कों थोडा फैलाकर रोहित कों दिखाते हुएलो देखलो अपनी बेहन कि पेंटी औऱ सोचो
कैसी लगती होगी तुम्हारी बेहनइस पेंटी मे
रोहित- मुस्कुराते हुए तुम् भि नां संध्या
संध्या- रोहित कां लन्ड उसकी लूँगी केँ उपर सें पकड़ लेती हैं जोँ पूरीतरह तनाहुआ थां, क्योये मोटा डंडा अपनी
बेहन कि पेंटी देखकर इसतरह तन गय़ा हैं नां, कहोकहो
रोहित- संगीता कां मूह पकड़कर चूमते हुए मेरी रानी लगता हैं तुमने बापू कां लन्ड सचमुच खड़ादेख
लिया हैं तभी इतनी चुदासी होँ रही होँ,
क्रमशः.
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MAST GHODIYAN--1
darshaniya apni gaadi सें नीचे utarta h औऱ samne कि building me jakar sidhe lift केँ andar pahuch krr 4 dabata h
औऱ कुछ der me lift 4th male पर्र pahuch jati h, samne एक् banda betha हुआ tambakhu ragad raha thaa औऱ
darshaniya ko dekhte hi juldi सें khada hokar salam krta h,
darshaniya-sethji andar h,
ji saheb andar hi h, darshaniya sidhe darwaja khol krr andar dakhil hote huye are क्याँ yar ratan tu yaha office
me ghusa h औऱ me दोदिन सें thik सें so नहि pa raha ho,
ratan- are betho darshaniya tm too hammesha hi juldi me rahte hu जब कि hamara कम h building banwana औऱ wah
कम too aaram सें hi hotha h,
darshaniya- are me wah नहि kah raha ho joo tm samajh rahe hu
ratan- muskurate huye, are मेरे friend me sab samajh raha ho औऱ mene teraa कम bi krr दिया h, अबकुछ der
too apne land ko sambhal krr रख, अब me tere liye roj-roj too 17-18 sal कि kunwari londiya chodne केँ liye नहि la
sakta ho na, फिन bi jugad karke एक् mast mal kaa arange किया h औऱ फिन ratan bell baja krr chaprasi ko bulata
h,
darshaniya- kahin tune use pehle hi chod too नहि दिया
ratan- are नहि baba wah too mene tere liye hi bacha krr rakkha h, teraa कम hu गय़ा h अब jara dhandhe कि bat
krr le,
darshaniya- bol क्याँ krna h
ratan- मेरी too एक् hi ichcha h औऱ wah कम bus tu hi karwa sakta h
darshaniya-haan too bol na
ratan- vo joo teraa friend mehta h उसकी एक् nai sadak पर्र joo jameen h wah kese bi muze dilwa de फिन dekh us
jameen सें me कहा सें कहा pahuch jaunga,
darshaniya- abe sapne देख्ना chhod de mehta us jameen ko kisi keemat पऱ नहि bechega
ratan-bechega wah jarur bechega अगर एक् bar tu usse kah de, me janta ho wah tairi bat कभी नहि talega kyo कि
उसकेऊपर tune एक् hi itna बड़ा ehsan krr rakkha h कि wah jindagi bhar tuze अपना khuda manta rahega,
darshaniya- मगर ratan me itna khudgarj नहि कि us पऱ kiye ehsan कि kimat mangu, sorry friend कोई औऱ bat hoty too
me tere liye कभी mana नहि krta पर्र iss bat केँ liye tu muze maf krr de,
तभी cabin केँ andar एक् 25 sal कि mast khubsurat londiya aati h usne एक् skirt joo उसके gutno tak thaa औऱ ऊपर एक्
shirt pahan rakkha thaa उसके dudh itne bade औऱ mote the कि darshaniya kaa too land khada hu गय़ा औऱ जब wah
londiya थोडा aage jakar palti too उसकी moti kasi gaand dekh krr darshaniya ne table केँ नीचे अपना hath lejakr apne
land ko sahlate huye उसकी gudaj gaand देख्ना shuru krr di,
ratan- are sapnaa jara jivan ko phone laga krr मेरी bat karwao
sapnaa- jee sir
aur फिन sapnaa ne jivan ko phone laga krr ratan ko दिया ratan ne phone लेकर sapnaa सें कहा jara chaprasi ko bol
krr दो coffee kaa bandobast krr दो,
sapnaa ko jate huye darshaniya piche mud krr dekhne laga औऱ उसके bhari phaile huye chutado ko badi gaur सें
dekh-dekh krr अपना land masal raha thaa,
ratan- oye bus krr औऱ idhar dekh
darshaniya- vah ratan क्याँ mal h sale kitni mast londiya ko tune apni PA bnaa rakhi h,
ratan- बहोत mast h क्याँ
darshaniya- khuda kasam एक् bar tu too iski dilwa de sali ko rat bhar puri nangi karke chodunga,
ratan- hello jivan sham ko us londiya ko sath लेकर मेरे farmhouse पर्र aa jaana
ratan- le teraa कम hu गय़ा h औऱ अब sham ko wah apne thikane पर्र aa jayegi,
darshaniya- are ratan usko chhod tu too tairi iss PA ko एक् bar मेरी banho me bhej de kasam सें kitni mast chuchiya
औऱ gaand h उसकी,
ratan- abe sale wah मेरी beti sapnaa h औऱ usne MBA krr लिया h इसलिये use apne sath hi busines me laga लिया h
अब मेरे sare कम ko dhire-dhire wah sambhal rahi h,
darshaniya kaa muh एक् dum सें anand गय़ा usse कुछ bolte नहि ban raha thaa पऱ फिन wah ratan ko dekh krr
muskurate huye apne kan pakad krr sorry yar muze jara bi नहि malum thaa कि wah tairi beti h,
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