हवस की प्यासी दो कलियाँ completee - भाभी - Latest Update 1
हवस कि प्यासी दो कलियाँ
दोस्तो तुषार कि लिखी हुईँ एक् औऱ स्टोरी लेकर हाजिर हूं। औऱ उम्मीद करता हूं आपकोयह कथा भि पसन्द आएगी
मे बदहवास सि बेड पऱ लेटी हुईँ उन दोनो कि तरफदेख रही थि….मेरे सामने मेरी भाभी अपनी टाँगे कों राज कि कमर पर्र लपेटे हुए अपनी गान्ड कों ऊपेर कि ओर उछालरही थि….औऱराज कां लन्ड भाभी कि बुर केँ पानी सें भीगाहुआ बुर केँ अंदर बाहर् हौ रहा थां….औऱ जैसे हि राज कां लन्ड भाभी कि बुर मे जाता। तोँ भाभी अपनी गान्ड कों ऊपेर कि ओरउठा लेती….यह देखते हुए मेराहाथ कब मेरी बुर पऱ जा पहुंचा मुझेपता हि नहीं चली…औऱ मे अपनी बुर कों धीरे-धीरे-2 मसलने लगी…
भाभी नें अपनी बाहों कों राज कि पीठ पऱ कसरखा थां…औऱ राज भाभी कि नेक कों मदहोशी केँ आलम मे चूसरहा थां….तभी भाभी नें मेरीओर अपनीअध खुली मस्ती सें भरी आँखों सें मेरीओर देखा औऱ काँपती हुइ आवाज़ मे बोलीं….”ओह्ह डॉली तुम्हारा स्टूडेंट तोँ सभीअहह सीईईई अब एक्सपर्ट हौ गय़ा हैं….”
राज नें भाभी कि बातसुन कर मेरीतरफ देखा औऱ फिन भाभी कि एक् टाँग कों ऊपेरउठा लिया…जिससे मुझे भाभी कि बुर औऱ राज कां लन्ड औऱ सॉफ दिखाई देने लगा….औऱ उसने अपने लन्ड कों बाहर् निकाल-2 कर भाभी कि बुर मे घस्से लगाने शुरुआत करदिए….
वोँ भाभी कि बुर मे घस्से मारते हुए लगतार मुस्कुराते हुए मेरीओर देखेजा रहा थां…औऱ फिन एक् दम सें भाभी कि बुर मे अपना लन्ड पूरा उतारकर रुक गय़ा। उसकी साँसे उखड चुकी थि….सॉफ थां कि, राज नें भाभी कि बुर कों अपने लन्ड केँ रस सें सरोबार करदया थां.लंबे चौड़े जिस्म वाली भाभी कि टाँगो केँ बीच मे लेटाहुआ राज बहोत छोटा सां लगरहा थां…छोटा होता भि क्यूं नाँ…अभि उसकी उम्र हि क्याँ थां…वोँ 11थ क्लास मे थां….औऱ महज ***5 साल कां थां….
फ्रेंड्स वोँ क्याँ वजह थि….जिसकी वजह सें नां चाहते हुए भि मे अपने हि स्टूडेंट केँ लन्ड कि दीवानी हौ गई, थि….मे हि नहीं…मेरी भाभी भि….मेदो बार प्रेगएनेट हुई, औऱ दोनोबार मुझे ऑपरेशन करवाना पड़ा…पर्र वोँ थां कि, वोँ मुझेहर बार कॉंडम केँ बिना हि चोदता…अपनी मरज़ी सें ज़बरदस्ती यह मेरी बुर कि मजबूरी थि…जौअब उसके लन्ड कों देखते हि पिघल जाती थि….
सो फ्रेंड्स इस राज़ सें परदा उठेगा आगेआने वाले अपडेट्स मे….इसमे कुछ वोँ लम्हा भि शामिल हैं…जोँ मेरेसंग नहीं घटे…औऱ नाँ हि मेने देखा…पऱ बाद मे जोँ कुछ भि मुझेपता चला वोँ सभी मे आपकोयहा बताउन्गी….सो फ्रेंड्स आगेआने वाले अपडेट्स कां प्रतीक्षा कीजिए….पऱ अभि आपकोइस किस्सा केँ कुछ ख़ास करेक्टर केँ बारे मे बता देती हूं….
1। राज-एज:*** साल… हॅंडसम डॅशिंग रिच (उसकेमोम & डॅड अब्रॉड मे हैं। पिछले 4 सालो सें…औऱ वोँ अपने अंकल हेमंत शर्मा केँ पास रहता हैं। जोँ कि हमारे इलाक़े केँ सबसे बड़े विद्यालय केँ ओनर हैं…उनका सारा परिवार गाड़ी आक्सिडेंट मे मारा गय़ा थां….अब वोँ अकेले हैं….इसीलिए उन्होने नें राज कों अपनेपास रख लिया थां…क्योंकि राज केँ डॅड हेमंत केँ बहोत अच्छे साथी हैं….)
2। पायल: मेरी भाभीएज 29 साल….कद 5 फीट 10 इंच….भरे हुए जिस्म कि मालकिन….बूब्स साइज़ 34फ एक् दमकसे हुए बूब्स हमेशा तनेहुए रहते हैं। वेस्ट 28 औऱ गान्ड 38 पीछे कि तरफ बाहर् निकली हुईँ…पेट पऱ हल्की सें चर्बी कि परत हैं….पऱ लंबाई कि वजह सें एक् सेक्स बॉम्ब लगती हैं….अभि कोई बच्चा नहीं हैं….इसीलिए अभि भि एक् दम स्लिम रहती हैं….रंग एक् दम गोरा हैं…मंसूरी मे पली बढ़ी हैं…पर्र हैं पंजाबी…हम् सभी पंजाब सें हि बिलॉंग करते हैं.
3। डॉली:यह मेराघऱ कां नाम हैं….घऱ मे मां पिताजी मुझेइसी नाम सें बुलाते थें…जब वोँ जिंदा थें…मेरी एज 27 साल हैं…औऱ मेरी 21 साल कि उम्र मे विवाह हुइ थि….जौ यूएस मे सेट्ल थां….औऱ विवाह केँ 10 दिनबाद हि डाइवोर्स होँ गय़ा थां…क्योंकि जिससे मेरी विवाह हुईँ, तोँ अब्रॉड मे रहकर नौकरी कररहा थां….औऱ मुझे पहले हि हफ्ते मे यहपता चल गय़ा थां कि, उस सख्स नें पहले सें हि यूएसए मे विवाह कि हुई हैं…औऱ उसकी एक् बेटी भि हैं…मेरी लंबाई 5 फीट 8 इंच हैं…आम भारतीय औरतों केँ आवरेज लंबाई सें ज्यादा हैं.फिगर बल्कुल भाभी कि कॉपी हि लगती हैं…पऱ भाभी सें लंबाई मे दोइंच कम हूं…वैसे रंग तोँ मेरा भि सफ़ेद हैं….पऱ भाभी सें थोडा कम हैं….
4। चेतन: मेरे भैया….उम्र 34 साल….नशे केँ आदि होँ चुके हैं…काम काजकुछ नहीं करते…घऱ कि हालतउन दिनो बहोत ख़राबा चलरही थि….भाभी केँ मयके सें हर महीने उनके माता पिता कुछ पैसेभेज देते थें….जिससे घऱचलरहा थां। औऱ मे बच्चों कों घऱ पर्र ट्यूशन पढ़ाती थि….भैया कां काम सारादिन अपने नशेड़ी दोस्तो केँ संग घूमना औऱ नशे बाजी करना थां…कई बार तोँ 2-3 दिन तक घऱ हि नहींआते थें….
5। ललिता: एजराज कि हमउमर हैं….उसी कि क्लास मे हैं…औऱ क्लास कि हि नहीं विद्यालय कि सबसे होशयार औऱ ब्राइट स्टूडेंट हैं…पूरे विद्यालय केँ टीचर औऱ स्टूडेंट्स उस पऱ नाज़ करते हैं….औऱ विद्यालय कि सबसे हसीन स्टूडेंट एक् दम क्यूट सि स्माइल औऱ उतना हि क्यूट उसकाफेस…
6। कुछ औऱ कॅरक्टर भि हैं…जोँ समयबसमय आते रहेंगे औऱ जाते भि रहँगे…
तोँ जैसे कि मेने बताया कि, हमारे घऱ कि आर्थिक दशा बहोत खराबचल रही थि….मेरी ट्यूशन कि कमाई औऱ भाभी केँ घऱ वालों सें मिलहुए पैसे सें हमारा घऱकरखरच बड़ी मुस्किल सें चलता थां…औऱ उस पर्र भि भैया केँ नशों कां बोझ थां…दिन भरयही सोचते निकल जाता थां कि, आजघऱ मे खानां पकेगा भि नहीं….मेरी भाभी सें अधिक नहीं बनती थि…क्योंकि वोँ मुझे भि अपने ऊपेरबोझ समझती थि…पर्र मेने समाज कि सब मुसबीतों कां सामना करने कि ठानली थि…
अपने पति सें धोखा खाने औऱ भैया कि करतूतों कों देखने केँ बाद मुझे मर्दजात सें चिढ़ सि होँ गई, थि….कईबार रिश्तेदारों नें मेरेलिए रिस्ते देखेबात कि, पर्र मेनेहर बारमना कर दिया.अब मे अपनी जीवन कों किसी औऱ भरोसे पऱ नहीं छोड़ना चाहती थि। डाइवोर्स केँ बाद हि, माँ पिताजी कि मौत होँ गई, ….औऱ उसकेबाद मेनेफिन सें कॉलेज जाय्न कर लिया…तब मेरीएज 21 साल कि थि…इंग्लीश मे बीए करने केँ बाद मेने बी.एड कि…औऱफिन उसकेबाद नोकरि तलाश करने लगी.बहोत स्थान ट्राइ किया…पऱ बात नहीं बनी…हर कॉलेज औऱ विद्यालय कां गेटनॉक करकेदेख लिया…पऱ सभी व्यर्थ थां.
मे घऱ पऱ बच्चों कों पढ़ाकर कुछ पैसे कमाने लगी….फिन मुझे अपने मोहल्ले मे हि एक् घऱ मे ट्यूशन मिल गयीँ, …उनके जुड़वा बच्चे थें.एक् लड़का औऱ लड़की। मे उनको ट्यूशन देने केँ लिए उनकेघऱ जाने लगी….वोँ दोनो ***** विद्यालय मे पढ़ते थें। जोँ हमारे इलाक़े कां सबसे बड़ा मशहूर औऱ महँगा विद्यालय थां…मेने उन दोनोखूब लगन सें पढ़ाया…जब उनके बच्चों कां रिज़ल्ट आया तौ, वोँ मुझसे बहोत खुशहुए, औऱ उन्होने नें हि मेरी सिफारिश जिसस विद्यालय मे उनके बच्चे पढ़ते थें, उसके प्रिन्सिपल जयसर सें कि, औऱ फिन मेरा इंटरव्यू करवाया….
मुझेउस विद्यालय मे इंग्लीश टीचर कि नौकरी मिल गये….सल्लेरी पॅकेज इतना अच्छा थां कि, मेने सोचा भि नहीं थां….मेरी सॅलरी स्टार्टिंग मे हि 14000 पऱ मंत फिक्स हौ गई, थि…मे बेहदखुस थि…अब मे अपने पैरो पऱ खड़ी हौ चुकी थि…अप्रेल कां मंत थां…रिज़ल्ट्स केँ बाद अभि क्लासस शुरुआत हुए हि थें…औऱ मे पहलेदिन पढ़ाकर विद्यालय सें बाहर् निकली थि…कि बाहर् गर्महवा केँ झोंको नें मेरा स्वागत किया.
गर्महवा केँ थपेडे मुझे अपने चेहरे पऱ बर्दास्त नहीं होँ रहे थें.मेने अपने दुपट्टे सें अपने चेहरे कों ढक लिया, औऱ बस स्टॉप कि तरफ बढ़ने लगी.रोड सुनसान सां हौ गय़ा थां.आस पास कि सब दुकाने भि बंद थि.मे नीचे मार्ग कि ओर देखते हुएआगे बढ़रही थि, कि तभी मुझे मेरे पीछे सें आवाज़ आई."मेडम क्यूं धूप मे परेशान हौ रही होँ.बोलो तौ घऱ छोड़दूं"
aabhar friends
हवस की प्यासी दो कलियाँ completee - भाभी – New Episode
यह तौ आमबात हैं.पऱ अक्सर मेरेसंग ऐसा नहीं होता.मेने उसतरफ ध्यान नाँ देकरआगे बढ़ना जारी रखा.उसने मुझेफिन सें आवाज़ दि.पऱ मे नां रुकी.इसकी इतनी हिम्मत कि वोँ मेरे सामने आकर मेरा मार्ग रोककर खड़ा होँ गय़ा.
"अर्रे मेडमइस ग़रीब पर्र भि तोँ ध्यान दो.कब सें एक् गुज़ारिश कररहा हूं" दिलकर रहा थां कि, अभि उसकामूह तोड़ दूं.पऱ फिलहाल इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी.मेने नज़रउठा कर उसकीतरफ देखा, वोँ लड़का विद्यालय यूनिफॉर्म मे खड़ा थां…मेने उसकीतरफ देखा औऱ अपने चेहरे सें अपना दुपट्टा हटा दिया.मुझे देखते हि उसकी आँखें फेल गये.औऱ वोँ अपने पांवसर पर्र रखकर भागा.
चाहते हुए भि मे अपनी हँसी नाँ रोक पे.चलो उस उल्लू कि वजह सें आज मे कई दिनोबाद हँसी तोँ.वरना मुझेकई बार लगता, कि मे हंस भि सकती हूं याँ नहीं.मेने अपने चेहरे कों फिन सें दुपट्टे सें ढाका.औऱ बस स्टॉप कि ओरचल पड़ी। जैसे हि बस स्टॉप केँ पास पहुँची, तोँ देखा कि बस आँ गई, हैं.मे तेज कदमों सें चलतेहुए बस मे चढ़ गई,.औऱसीट पऱ बैठ गयीँ,.घऱ पहुँचने मे भि 30 मिनिट तोँ लग हि जाते हैं.मेने अपनेबॅग सें अपनाफोन मोबाइल निकाला, औऱ एअर मोबाइल लगाकर सॉंग सुनने लगी.
विंडो सें आँ रही गर्महवा सें बस मे बैठेहुए सभी लोगो कां बुराहाल थां.क्याँ मुसीबत हैं.इतनी अच्छी जॉबमिल गयीँ, हैं कुछ महीनो बाद मे अपनेलिए स्कूटी खरीद लूँगी….स्कूटी क्यूं मज़ाक कररही हैं डॉली अपने आप् सें.घऱ कां गुज़ारा औऱ निकम्मे भइया केँ नशे केँ बादकुछ बचेगा तोँ उसे संभाल लेना। मे अपनेमन मे यहीसभी ख्वाब लिएसोच रही थि….
क्यूं नहीं लें सकती मे स्कूटी मेने क्याँ ठेका लेँ रखा हैं, जोँ उस नाकमजाब इंसान कां बोझ सारी उम्र मे हि उठाती रहूं.यह सोचते-2 कब मेरी आँखें भीग गई,.उसका अहसास मुझेतब हुआ, जब बस मे खड़ी एक् स्त्री कों मेने अपनीतरफ देखते हुए पाया.मेने जल्द सें अपनी आँखें पोन्छि.औऱ दूसरी तरफफेस घुमा लिया.
औऱ स्वयं कों कोसने लगी."हां अब तुझेही हि यहसभी बोझ उठाना होगा.क्योंकि तूने अपनेलिए स्वयं यह मार्ग चुना हैं" औऱ तूँ चाहकर भि अपने भइया कों नज़रअंदाज़ तोँ नहींकर सकती.आख़िर हैं तौ वोँ भइया नां" सोचते-2 कब मार्ग बीत गय़ा पता नहीं चला.मेरा स्टॉप आँ गय़ा थां। मे अपने स्टॉप पर्र उतरी, औऱ उसरोड पर्र चलतेहुए, अपनेघऱ कि तरफचल पड़ी.10 मिनिट औऱ चिलचिलाती धूप मे झुलसने केँ बाद मे घऱ केँ बाहर् पहुँची, औऱ डोरबेल बजाई.
"ओह क्याँ मुसबीत हैं" यह भाभी भि नाँ सो गयीँ, होगी." मेनेफिन सें डोरबेल बजाई, तोँ थोड़ी देरबाद भाभी नें डोर खोला.औऱ डोर सें पीछेहट गई,.जैसे हि मे घऱ केँ अंदरआई तोँ, उसनेडोर बंदकर दिया…
भाभी : खानां लगाउ क्याँ दिदी.औऱ आपके विद्यालय कां पहलादिन कैसारहा….
मे: बहोत बढ़िया भाभी…….
भाभी: तोँ सॅलरी कितनी फिक्स हुई तुम्हारी….
मे: पता नहीं भाभी अभि दोदिन बादपता चलेगा….(मेने भाभी सें अपनी सॅलरी कि बात छुपाली….)
"हां भाभी खानां लगा दो…मे ज़रा फ्रेश होकरआती हूं…" औऱ मे अपनेरूम कि तरफ बढ़ने लगी। तौ अचानक सें भैया केँ रूम मे मुझे हलचल महसूस हुई.मेरा क्रोध सातवें आसमान पर्र पहुँच गय़ा.मेने भाभी सें पूछा."भैया आजकाम पऱ नहींगये थें क्याँ"
भाभी:ओ गये थें पर्र शायद उनके ऑफीस मे स्ट्राइक होँ गयीँ, आज.
यह आदमीकब सुधरेगा.रोज नये बहाने होते हैं इसकेपास.मुझे तौ शक हैं कि वोँ काम पऱ जाते हैं याँ नहीं.अब इनसेबहस करनारोज मेरेबस कि बात नहीं हैं.वोँ कहते हैं नाँ भैंस केँ आगेबीन बजाने सें क्याँ फ़ायदा। मे मन मे बुदबुदाते हुए अपनेरूम मे चली गई,.
हमारे घऱ मे सिर्फ़ तीन हि रूम थें….एक् किचिन औऱ बाहर् गेट केँ पास बाथरूम औऱ टाय्लेट थां….मे मां बापू केँ दहनत केँ बाद सें हि उनकेरूम मे रहनेलगी थि….अब मेरेरूम मे सिर्फ़ एक् चारपाई थि…एक् छोटा सां स्टडी टेबल औऱ एक् परुआना टेलीविज़न रूम भि छोटा सां थां….मैने रूम मे पहुँचने केँ बाद, अपना पर्सरखा औऱ घऱ पऱ पहनने वाले पुराने सें सलवार कमीज़ लेकर बाथरूम कि तरफचली गयीँ, …ताजे ठंडे पानी सें नहाने केँ बाद मेरेबदन मे थोड़ी सि जान आई….औऱ अपनेरूम मे आए, तोँ देखा भाभी नें खानां डालकर मेरी स्टडी टेबल पऱ रखाहुआ थां….
इस सारी खिदमत कां राज़ मे जानती थि, क्योंकि अब मुझे नोकारी जौ मिल गई, थि…मेने बैठकर खानां शुरुआत कर दिया….भाभी जाकर चारपाई पऱ बैठ गई, ….” डॉली मे क्याँ बोलरही थि, कि तूँ नाँ अच्छे सें उस विद्यालय मे सेट हौ जा…सुना हैं बहोत अच्छा विद्यालय हैं….वहा टीचर्स कों काफ़ी अच्छी सॅलरी मिल जाती हैं….”
मे: (खानां खातेहुए) हां भाभीसही सुना हैं आप् नें…
भाभी: तौ फिनबस तुँ अपनी स्थान पक्की कर लें वहा पऱ…एक् बारजब तुँ सेट हौ जाए तोँ, मेरेलिए भि वहा केँ प्रिन्सिपल सें नौकरी कि बातकर लेना….
मे: नौकरी औऱ आप्….आप् पढ़ा लेंगी बच्चों कों….?
भाभी:हां क्यूं नहीं मे कॉन सां पढ़ी लिखी नहीं हूं….माना कि तुमसे थोडा कम पढ़ी लिखी हूं….
मे: भाभीवहा नौकरी पाना इतना आसानकाम नहीं हैं…मुझे लगता कि वोँ आपकोवहा पर्र नौकरी पऱ रखेंगे….
भाभी: क्यूं नहीं रखेंगे….अच्छा एक् बातबता तुम् कॉन सि क्लास कों पढ़ाती हौ…
मे: कॉन मे….मे तौ 8थ सें लेकर12थ तक….पर्र आप् क्यूं पूछरही हौ….?
भाभी:देख भले हि मे बड़ी क्लासस केँ बच्चों कों नां पढ़ा सकूँ…पऱ छोटी क्लासस केँ बच्चों कों तौ धीरे-धीरे पढ़ा सकती हूं…वहा छोटी क्लासस हैं नां…?
मे: हां हैं…वैसे भाभीकह तौ तुम् ठीकरही हौ…छोटी क्लासस कों पढ़ाना मुश्किल तौ नहीं होगा आपकेलिए….
भाभी:देख डॉली तुझेही तेरे भैया कों तोँ पता हैं…कुछ काम धंधा तौ करते हैं नहीं…औऱ मेरे बेचारे मम्मी बाप पता नहींकब तक इस दुनिया मे हैं…देख मुझे ज्यादा लालच नहीं हैं….अगर 5000-6000 भि मिलजाए तौ क्याँ बुराई हैं…कम सें कमकुछ तौ घऱ केँ हालात सुधरेंगे…तुम् अपनेलिए औऱ मे अपनेलिए कुछ तौ पैसे जोड़ सकेंगे.
मे सोचने लगी कि, भाभीकह तोँ सहीरही हैं….इंसान पैदा होते हि बुरा नहीं होँ जाता…उसे बुरा बनाता हैं समाज औऱ बुरा वक्त…शायद भैया कि वजह सें हि भाभी कां रवईया अभि तक मेरेसंग ठीक नहीं थां…एक् वजह औऱ भि थि कि, भाभी नें मेरी दोबारा विवाह करवाने केँ लिए बहोत कॉसिश कि थि….पऱ मेरे अपनेमन मे जौ मर्दो केँ प्रति नफ़रत थि…उसके चलते विवाह सें मनाकर दिया थां….फिन शायद भाभी कि यहसोच थि कि, मे उन पऱ ज़बरदस्ती बोझबन रही हूं…
भाभी: क्याँ हुआ डॉलीकिस सोच मे डूबी हुइ हौ….?
मे: कुछ नहीं भाभी….मे कॉसिश करूँगी कि आपको भि वहा नौकरी मिलजाए….
भाभी: अर्रे इतनी भि जल्द नहीं हैं…तुम्हारी भाभी इतनी भि लालची नहीं। पहले तुँ स्वयं आपने आप् कों वहा पऱ बेस्ट टीचर साबित कर दे….ताकि वहा कां प्रिन्सिपल तुम्हे मना हि नां कर सके….तब तक मे भि कुछ प्रॅक्टीस कर लूँगी…
मे: ठीक हैं भाभी….तोँ आज सें आप् साम कों जोँ छोटी क्लासस केँ बच्चे आते हैं। उनको ट्यूशन देना शुरुआत कर दो….आपको थोडा एक्सपीरियेन्स भि हौ जाएगा…
भाभी: तूनेयह बातठीक कही डॉली…अच्छा अब तुँ खानां खा औऱ आरामकर 5 बजे बच्चे भि आजाएँगे….
हवस की प्यासी दो कलियाँ completee - भाभी – New Episode
खानां खाने केँ बाद मे अपनेरूम मे आकरबेड पर्र लेट गयीँ,.औऱ लेटते हि, उस लड़के कि वोँ हरकतयाद आँ गई,.वोँ लड़का मेरी11थ क्लास कां स्टूडेंट थां.जिसने मुझे रास्ते मे रोका थां.जब मेने अपनेफेस कों बेपरदा किया तोँ, अपनी टीचर कों सामने देखकर यानि केँ मुझेदेख करडर गय़ा थां.
उसके चेहरे केँ हावभाव उससमय जोँ थें.उन्हे सोचते हि, मेरे होंटो पर्र एक् बारफिन मुस्कान फेल गये.यूँ इधरउधर कि बातें सोचते हुए, कब नींद आँ गयीँ,.पता नहींचला। 5 बजे प्यास लगने केँ कारणफिन सें मेरी नींद खुली, औऱ मे पानी पीने केँ लिएरूम सें निकलकर नीचे आँ गई,.
अभि मे किचिन कि तरफजा हि रही थि, कि मुझे चेतन भैया केँ रूम सें हल्की सि सिसकने कि आवाज़ आई.उस आवाज़ कों मे झट सें पहचान गई,.आवाज़ पायल भाभी कि थि। पऱ वोँ इस वक्त भैया केँ संग क्याँ कररही थि.उत्सकता वश मेरेकदम स्वयं-ब स्वयं भैया केँ रूम कि तरफमूड गये.
डोर अंदर सें बंद थां.पर्र रूम केँ डोर केँ पास पहुँचते हि, भाभी कि आवाज़ औऱ सॉफ सुनाई देने लगी.यह इस वक्त भैया केँ रूम मे क्याँ होँ रहा हैं.भाभी दबी हुई आवाज़ मे भैया कों कुछकह रही थि…मेने डोर पऱ कानलगा कर सुनने कि कॉसिश कि तौ मुझेकुछ सॉफ सुनाई देने लगा…”देखो चेतन मे तुम्हे कहरही हूं…मेरे ऊपेर सें हट जाओ….तुम्हे नशे नें इतना खोखला कर दिया हैं कि तुम् दो मिनिट भि नहींटिक पाते…औऱ मुझे सुलगती हुई छोड़कर बाहर् अपने नशेड़ी दोस्तो केँ पासचले जाते होँ….”
एक् बार तोँ दिल किया अभि चीखकर दोनो कों बाहर् आने कों कहूँ। पर्र नज़ाने क्यूं मेरी हिम्मत जवाबदे गयीँ,.मे अपने कानो कों डोर सें सटाकर अंदर कि बातें सुनने कि कॉसिश करनेलगी.
"अहह क्याँ कररहे होँ छोड़ो मुझे.दिदी घऱ पऱ हैं.
"तौ क्याँ हुआ.वोँ अभि साम तक नहीं उठने वाली.एक् बार अपनी चुनमुनियाँ चोदने दे नाँ"
कथा जारी रहेगी.
हवस की प्यासी दो कलियाँ completee - भाभी - Continue reading next part
Congratulations Raj for a greatest stori
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