प्यासी दुल्हन - Hindi Sex Story - Complete Kahani All Parts
Update 1
मे अर्चना हूं औऱ येतब कि बात हैं जब मे नईनई दुल्हन बनी थि। मेरी विवाह कों 3 महीने होँ गए थें। मेरे पति राजीव मुझसे बहोत प्रेम करते थें। उनके 6 इंची मोटे लन्ड कां स्वाद मेरी बुर तीन महीने मे सौ सें अधिकबार चख चुकी थि। जब वोँ घऱ पर्र होते थें तौ चूचियाँ कभी भि दब जातीथीं। रात कों कंप्यूटर पऱ कईबार ब्लू फिल्म मुझे दिखा चुके थें।
एक् दिन बातों बातों मे मैंने पूछ लिया- क्याँ लन्ड इतने लम्बे लम्बे औऱ मोटे भि होते हें?
राजीव बोले- प्यारी, वैसे तौ 5-7 इंची हि लम्बे होते हें मगरकुछ केँ बहोत लम्बे औऱ मोटे भि होते हें मेरे मित्र अतुल कां लन्ड 9 इंची लम्बा हैं।
मैंने पूछ लिया- आपको केसेपता?
हँसते हुए राजीव बोले- हम् लोग एक् हि हॉस्टल मे रहते थें तोँ हम् दोनों नें कईबार एक् दूसरे कि मुठ ब्लू फ़िल्में देखते हुए मारी थि।
बातें करतेहुए उन्होंने मुझे नंगाकर दिया औऱ बोले- तुम् बात बहोत करती हौ ! असल मे लन्ड वही अच्छा होता हैं जोँ बुर कि खुजली मिटादे। चलो, अब घोड़ीबनो औऱ बुर मारने दो।
मे बोलि- घोड़ी बनती हूं मगर पहले आपके कपड़े तौ उतारदूँ !
दो मिनट मे मैंने उनका पजामा औऱ बनियान उतार दि तौ रोज़ कि तरह उनका 6 इंचीकड़क लन्ड मेरी आँखों केँ आगे थां। मेरी आँखों मे कामुक चमक आँ गई थि। मे खाट पऱ घुटने रखकर घोड़ीबन गई, राजीव नें पीछे सें मेरी बुर मे उँगलियाँ घुसाकर घुमानी शुरुआत कि औऱ मेरी बुर केँ संगसंग बुर केँ दाने कों भि रगड़ने लगे।
मुझे लन्ड कि प्यास लगरही थि, मुझसे रहा नहि जारहा थां, मे बोलि- राजीव चोदो नं ! बहोत खुजली हौ रही हैं।
अपनीचिर परिचित आवाज़ केँ संग राजीव बोले- रानी, अभि दोपहर मे हि तोँ तुम्हारी चोदी हैं, इतनी पागल क्यूं हौ जाती हौ?
इसकेबाद उन्होंने अपने लन्ड कों मेरी बुर मे छुला दिया औऱ मेरासर बिस्तर पर्र लगाकर मेरी बुर मे अपने लन्ड कों घुसा दिया औऱ चूचियों कों पकड़कर मुझे चोदने लगे।
अहह ऊहऊह कि आवाज़ों सें रूम गूंजने लगा।
एक् महिला जब अपने अच्छे पति सें चुदती हैं तोँ उसकेमन मे कहीं नं कहींये बात छुपी होती हैं कि ये उसका अपना लन्ड हैं इसलिये उसमें कोई हिचक नहि होती औऱ वोँ खुलकर लन्ड कां मज़ा लेती हैं। मे भि इस टाइमखुल करचुद रही थि। कुछदेर बाद मेरा बुर रस बाहर् आँ गय़ा। राजीव बहोत अच्छे चोदू हें, दोबार तोँ मुझे झड़ा हि देते हें।
फ़िर इन्होंने मुझे सीधा लिटा दिया औऱ मेरी बुर मे अपना लन्ड दुबारा पेल दिया मेरे गालों औऱ चूचों कों दबाते हुए मुझे चोदने लगे औऱ मेरी बुर मे इनका लन्ड दुबारा दौड़ने लगा। दस मिनट चुदने केँ बाद मे दुबारा जब झड़ने कों हुई तौ इन्होने भि अपनारस मेरी बुर मे छोड़ दिया। हम् लोग एक् दूसरे सें चिपकगए। सच अद्भुत चरम आनन्द कां अनुभव थां, आपकी भाभी नें चुदाई कां स्वर्गीय सुख लें लिया थां।
रात कों चुदने केँ बाद अच्छी नींदआती हैं, मे औऱ राजीव सोगए। सुभह 6 बजे हि राजीव केँ बॉस कां फ़ोन आँ गय़ा कि दफ़्तर 8 बजे जानां हैं। मे उठ गई औऱ 7 बजे तक ब्रेकफास्ट सजधजकर कर दिया इसकेबाद दफ़्तर जाने सें पहले रोज़ कि तरह राजीव कां लौड़ा उनकी पैंट कि ज़िप खोलकर बाहर् निकाला औऱ उसे मुँह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया। वीर्य निकलने तक मैंने उनका लौड़ा पूरी मस्ती सें चूसा औऱ वीर्य पूरा अपने मुँह मे गटक लिया।
इसकेबाद राजीव दफ़्तर चलेगए।
साम कों राजीव जब वापसआए तौ बोले- अर्चना, मुझेदो दिनबाद अमेरिका 6 महीने केँ लिए जानां हैं।
हम् सभीलोग जाने कि तैयारी मे लगगए। मेरे सासू ससुरजी भि ये सुनकर देहली आँ गए। सभी लोगों केँ संगदो दिन बड़ी जल्द निकलगए औऱ राजीव अमेरिका केँ लिएउड़ गए। मेरे सासू माँ-ससुरजी देहली मेरेपास रुकगए।
दोदिन ठीकठाक कटेमगर तीसरे दिनरात कों मेरी बुर बुरीतरह खुजियाने लगी, मुझेपता लगनेलगा कि बुर कि प्यास क्याँ होती हैं। उस टाइम मे एक् प्यासी दुल्हन थि जिसे केवलइस वक्त एक् लन्ड कि चाहत थि। अमेरिका सें उनसे 5-7 मिनट सें ज़्यादा रोजबात नहि हौ पाती थि। चैटिंग जरुर 1-2 घंटेरात कों होती थि। मगर बुर कि आग तौ लन्ड सें बुझती हैं। किसीतरह मे रात कों सोपाई।
अगलेदिन राजीव रात कों 12 बजेवेब केम पर्र थें। मैंने उन्हें बताया कि उनके पप्पू कि याद मुझे कितनी आती हैं। पूरीरात हाथ बुर मे घुसा रहता हैं। बुर कि प्यास बुझ नहि रही हैं।
राजीव बोले- रानी, मेरे लन्ड कां भि बुराहाल हैं, देखो तुम्हारी आवाज़ सुनकर पप्पू कैसा हिनहिना रहा हैं।
औऱ उन्होंने अपना नेकर उतार दिया, उनका 6 इंची लन्ड कड़क, तना हुआ मेरे सामने थां।
मुझसे रहा नहि गय़ा, मैंने कहा- राजीव, इसे मेरी बुर मे डालो नाँ !
मैंने अपनी मेक्सी उतार दि, तब मे पूरी नंगी थि। राजीव बोले- अर्चना, तुम्हारी गेंदें देखकर मुझसे रहा नहि जारहा हैं !
औऱ वोँ लन्ड कि मुठ मारने लगे, मुझे पुचकारते हुए बोले- अपनी रानी केँ दर्शन तोँ कराओ !
मैंने अपनी बुर चौड़ीकर ली औऱ कैमरा अपनी बुर सें कुछदूर रख लिया। बुर रानी कों राजीव निहारने लगे औऱ उनकाहाथ लन्ड पऱ जोरों सें चलनेलगा। दो प्यासे, बुद्धू बक्से पर्र बुर औऱ लन्ड देखकर खुश होने कि कोशिश कररहे थें।
एक् बजे लाइटचली गई। कंप्यूटर बंद हौ गय़ा। मेरी बुर गीली होँ गई थि मगर उसकी प्यास नहि बुझी थि। मे किचन मे गरमचाय बनाने चली गई।
लाइटदस मिनटबाद आँ गई थि, राजीव नें फ़ोनकर केँ कहा- मे अब दफ़्तर जारहा हूं।
गरमचाय पीने केँ बाद मे जब मे अपने कमरे कि तरफजा रही थि तौ मुझे अपने सासू-ससुरजी केँ कमरे सें कुछ आवाजें सुनाई दीं। मैंने उनके कमरे मे झांककर देखा। पिताजी जी उठकर टेलीविज़न बंदकर रहे थें शायद मूवी समाप्त हौ गई थि। मेरी सासू जोँ 45 साल केँ लगभग थि, नें अपना ब्लाउज उतार दिया थां, मोटी-मोटी, गोल-गोल थोड़ी लटकती हुईँ चूचियां सासुजी कि बाहर् थीं।
एक् अंगड़ाई लेती हुई बोलीं- जब सें बहूआई हैं, ठन्डे पड़गए हौ, पिछले तीन महीने मे दोबार हि चोदा हैं, पहले तोँ हफ्ते मे एक् बार सवार होँ हि जाते थें।
पिताजी जी नें मम्मीजी केँ गले मे हाथ डालकर उनकी चूचियाँ अपने हाथों मे पकड़ली औऱ उन्हें मसलते हुए बोले- रानी थोड़ी विवाह कि भाग दौड़ होँ गई थि, अब तौ मे फ्री हूं, अब हफ्ते मे दोबार तेरी मुनिया कों ठंडा किया करूँगा, नहि तोँ तेरा भरोसा नहि किसी औऱ कां घुसवा लेँ ! अभि तौ तूँ जवान हैं।
सासु कि चूचियां औऱ निप्पल मसलमसल केँ पापाजी नें खड़ेकर दिए थें। मेरामन किया कि मे वहा सें हट जाऊँ। अपने पति सें तौ मरवाने कां हर महिला कों अधिकार हैं। मगर मेरेमन मे एक् चोर थां, मे पापाजी कां लन्ड देख्ना चाहरही थि। पापाजी नें अपने कपड़े उतारदिए थें औऱ अब केवल एक् अंडरवीयर उनके शरीर पऱ थां। मम्मीजी उर्फ़ मेरी सासु नें अपना पेटीकोट उतार दिया थां औऱ वोँ पूरी नंगी हौ चुकीथीं मगर मुझे उनकी बुर दिख नहि रही थि। मेरीआँख दरवाज़े कि झिरी पऱ थि औऱ हाथ अपनी बुर केँ ऊपर थां।
अगला लम्हा मेरेलिए कभी नं भूलने वाला थां, सासु मां नें पापाजी कि चड्डी उतार दि औऱ उनका लन्ड अपनेहाथ मे लेकर सहला रहींथीं। थोड़ीदेर मे उन्होंने उसे मुँह मे लें लिया औऱ चूसने लगीं। चूसने केँ बादजब ससुरजी कां लन्ड बाहर् निकला तोँ टनाटन कड़क 6 इंच कां होँ रहा थां। बिल्कुल राजीव केँ लन्ड जैसा थां। मेरी बुर गरम भट्टी हौ रही थि, मनकररहा थां कि पापाजी लन्ड मेरी बुर मे डालदें।
मैंने अपनी मेक्सी उतार दि थि औऱ अपनी उंगलियाँ बुर मे घुसालीं थीं। सासू नें 5 मिनट तक ससुरजी जी केँ लौड़े कि चुसाई औऱ चटाई कि। उसकेबाद पापाजी नें उन्हें पलंग पऱ लिटा दिया, मम्मीजी नें दोनों टांगें फ़ैलादीं थीं। पापाजी कोंडोम लेने अलमारी कि तरफचले गए। सासु मां कि चिकनी चमचमाती बुर मेरी आँखों केँ सामने थि। उस पर्र एक् भि बाल नहि थां आज हि शेव कि हुई लगरही थि।
पापाजी नें अपने लन्ड पर्र कोंडोम लगाया औऱ औऱ सासू कों तिरछा कर केँ उनकी बुर मे पेल दिया। सासु मम्मी कि अहहऊह निकलने लगी जोँ बाहर् तक आँ रही थि, पापाजी कां लंड बुर मे दौड़रहा थां, सासू कां मुँह मेरीतरफ थां उनकी चूचियों कि मसलाई औऱ बुर कि चुदाई साफ़दिख रही थि, सासू माँ मज़े लें लेकरचुद रही थि औऱ बहुमुठ माररही थि।
पापाजी अच्छे चोदू थें, 5 मिनट तक उन्होंने सासु मम्मी कि बुर चोदी, उसकेबाद उन्होंने सासु कों घोड़ीबना दिया।
कुतिया सासू माँ बोलि- आज गांड कां सुखदे दो, मुझे बड़ामज़ा आता हैं गांड मरवाने मे।
अगलेसमय जौ थां वोँ मेरेलिए नई चीज़ थि !
ससुरजी नें लन्ड मम्मीजी कि गांड मे डाल दिया थां, मुझे लन्ड गांड मे घुसता हुआ नहि दिखामगर उनकेआसन सें येसाफ़ थां कि लन्ड गांड मे हि घुसा हैं।
ऊपर सें सासू माँ चिल्ला रही थि- कुत्ते, गांड फाड़ दि ! वाउवाउ ! क्याँ मज़ा दिया हैं।
सासू माँ कि गांड मारीजा रही थि औऱ मेरी बुर रोरोकर गीली होँ रही थि।
दस मिनटये खेलचला होगा, उसकेबाद पापाजी बोले- मे ये कोंडोम बाहर् डालकर आता हूं !
औऱ वोँ दरवाज़े कि तरफ आँ गए मे अपनी मेक्सी उठाकर नंगी हि अपने कमरे मे दौड़ली।
कथा जारी रहेगी।
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प्यासी दुल्हन - Hindi Sex Story – New Episode
Update 2
दसदिन बाद मेरा बैंक कां पेपर लखनऊ मे थां। मेरीकोई तैयारी नहि थि। मे घऱ मे बोर हौ रही थि, मैंने सासु मम्मी सें कहा- मे पेपरदे आती हूं।
सासु नें हाँभर दि, सासु मम्मी बोलीं- तुँ अमित केँ घऱ कानपुर चली जानां, वहा सें वोँ लखनऊ पेपर दिला लाएगा। उसकी घर-मकान मालकिन बहोत अच्छी हैं, तेरी कम्पनी भि होँ जाएगी, चाहे तोँ 6-7 दिनरुक भि आनां।
अमित सासु कि बेहन कां लड़का थां औऱ कानपूर मे जॉब करता थां। देवर जी केँ यहा जाने कि बात सुनकर मेरी बुर चुलबुली होँ गई। मन हि मन ख़ुशी भि हौ रही थि।
मे गुरुवार कों शताब्दी सें कानपुर जारही थि। मेरा पेपर रविवार कों थां। अमितबीच मे देहली आया थां, 3-4 दिन रुका थां तोँ हम् लोगआपस मे थोड़ाखुल गए थें। उसने मुझेनॉन वेजजोक भि सुनाए थें औऱ सेक्सी बातें भि कि थीं।
अब मेरेमन केँ किसी कोने मे उसकेसंग मस्ती करने कां मनकररहा थां, आज मंगलवार थां। अभि जाने मे एक् दिनबीच मे थां। बुधवार कों मैंने अपनी बुर केँ बालसाफ़ किये औऱ ब्यूटी पार्लर मे जाकर अपना शरीर चिकना करवाया। रात कों सामन रखते वक्तदो जोड़ी सेक्सी ब्रा-पैंटी औऱ मेक्सी जिनसे पूरी चूचियाँ औऱ बुर चमकती थीं जाने केँ लिएरख लीं। दो छोटी स्कर्ट औऱ 2-3 लो-कट ब्लाउज भि रखे।
रात कों अमित कां फ़ोन 9 बजेआया, मुझसे बोला- औऱ भाभी कैसी होँ?
मैंने कहा- अच्छी हूं ! भाभी केँ स्वागत कि तैयारी कर लेना।
हँसते हुए बोला- मैंने तोँ करली हैं। तुम् क्याँ तोहफ़ा लारही होँ मेरेलिए।
मुस्कराते हुए बोलि- दो संतरे लारही हूं।
देवर जी हँसते हुए बोला-चूस चूसकर खाऊँगा, जल्द लेकरआओ।
अमित बोला-कल मुर्गा खाओगी याँ धीरे-धीरे दोदिन बाद खाओगी?
मे हँसते हुए बोलीं- मुझे मुर्गे कि आवाज़ आँ रही हैं। कुँकङु कूं कुँकङु कूंबोल रहा हैं। अभि इसे सुलादो आकर बताउंगी कि कब खानां हैं।
फ़ोन पर्र बातें करने केँ बाद मे अपनी बुर सहलाती हुइ सो गई।
अगलेदिन मे शताब्दी सें कानपुर पहुँच गई, अमित मुझे लेनेआया थां, उतरते हि उसने मुझेगले लगाया औऱ बोला-घऱ पर्र अच्छी तरह सें गले मिलूँगा, मुझे आप् सें मिलकर बहोत ख़ुशी हौ रही हैं।
मैंने उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ हम् लोग बाहर् आँ गए। अमित कि बाइक सें हम् उसकेघऱ पहुँच गए। वहा उसकी 35 साल कि घर-मकान मालकिन रजनी नें मेरा स्वागत किया औऱ हम् लोगों केँ लिएगरम चाय-ब्रेकफास्ट लेँ आई।
हम् सब नें गरमचाय पी, इसकेबाद रजनी बोलीं- जाकर फ्रेश हौ लोजब तक मे बच्चों कों देख लेती हूं। आजरात कों मेरेसंग सोना, इस नालायक कां भरोसा नहि, रात कों सोने भि नं दे।
मे अमित केँ संग उसकेऊपर वाले किराए केँ टू-रूम सेट मे आँ गई। कमरे कि एंट्री बाहर् औऱ अंदर दोनों तरफ सें थि। पहलारूम बहोत छोटा थां उसमें 4 कुर्सी, मेज औऱ एक् तखत थां, अंदर कां रूम बहुतसाफ़ सुथरा औऱ बड़ा थां उसमें एक् बड़ा बिस्तर पड़ा थां, छोटी सि रसोई औऱ एक् बाथरूम कमरे सें जुड़ा थां।
साम केँ 4 बजरहे थें।
कमरे मे घुसकर मैंने रूमबंद कर लिया। अमित बोला- भाभी, मे बाहर् केँ कमरे मे बैठता हूं, आप् अंदर फ्रेश हौ लो।
मैंने कामुक अंगड़ाई ली औऱ बोलीं- बाहर् क्यूं बैठते हौ? अंदर आँ जाओ। इतना शरमाओगे तौ 5-6 दिन केसे काटेंगे।
अमित औऱ मे अंदर वाले कमरे मे आँ गए। मैंने मुस्कराते हुआकहा- सुभह सें साड़ी लपेटी हुईँ हैं, अबकुछ हल्का हौ लेती हूं !
औऱ मैंने अपनी साड़ी अमित केँ सामने उतार दि मेरीतनी हुई चूचियां अमित कों ललचारही थीं। पेटीकोट थोड़ाठीक करतेहुए मैंने नाभि केँ नीचे सरका दिया। मैंने अपनी बाहें फ़ैलाते हुएकहा- गले तोँ मिललो !
अमित एक् पुतले कि तरह मेरी बाँहों मे आँ गय़ा मैंने उसेकस कर चिपका लिया, अब मेरी चूचियाँ उसके सीने सें दबरही थीं, अमित केँ लन्ड कां उभार मे अपनी नाभि पऱ महसूस कररही थि। मैंने उसे 5 मिनट तक अपने सें चिपके रखा औऱ उसके गालों कों कसकरचूम लिया। ये हमारा पहला सेक्स अनुभव थां।
उसकेबाद मे बाथरूम मे चली गई, मैंने अपनी चड्डी औऱ ब्रा उतार दि औऱ ब्लाउज दुबारा सें पहन लिया। बाहर् आकर अमित कों दिखाती हुइ बोलीं- इन्हें उतारकर बड़ा आरामलग रहा हैं।
अब मेरे शरीर पर्र ब्लाउज औऱ पेटीकोट थां। बैड पर्र अमित कों बैठाकर मे उसकीगोद मे लेट गई औऱ अपने चिकने पेट पर्र उसकाहाथ रख लिया। अमित मेरी नाभि औऱ पेट कों सहलाने लगा। उसका मन मेरेदूध दबाने कां कररहा थां मगर वोँ इसकी हिम्मत नहि करपारहा थां, मे अंदर हि अंदर मुस्करा रही थि। मैंने 2 मिनटबाद अमित केँ गले मे हाथ डालकर उसके होंटों कों 2-3 बार चूमा औऱ बोलि- ये प्रेम अब तुम्हें पूरे हफ्ते मिलेगा।
दस मिनट हम् बात करतेरहे। इसकेबाद मे उसे उठाकर उठ गई। मैंने अपना एक् सलवार-कुरता निकाल लिया। बाथरूम अंदर सें बहोत छोटा थां औऱ उसमें टांगने केँ लिएकुछ नहि थां। मे अंदर मात्र अमित कि टॉवेल लेकरचली गई औऱ अमित सें बोलि- जब मांगूं तोँ सिर्फ मेरा कुरता दे देना वोँ भि आँखें बंद करके।
मैंने बाथरूम मे अपना ब्लाउज औऱ पेटीकोट उतार दियाअब मे पूरी नंगी थि। अमित केँ संग मस्ताने सें मेरी बुर गीली हौ रही थि। मैंने उँगलियों सें हि अपनी बुर कों शांतकर लिया। ये तोँ कुछदेर कि हि शांति थि दोस्तो, असल मे लन्ड खाई बुर लन्ड सें हि शांत होती हैं।
उसकेबाद मे नहाली। अमित कां तौलिया बहोत छोटा थां, बुर ढकती तौ चूचियाँ खुली रहतीं औऱ मम्मों ढकती तौ बुर खुली रहती। मैंने तौलिया अपनीकमर पऱ बाँध लिया औऱ बूब्ज़ खुले छोड़दिए। दरवाज़ा खोलकर बहार झाँका तोँ अमित टेलीविज़न देखरहा थां, मैंने जानबूझ कर बाहर् निकलकर अमित कों आवाज़ दि, अमित तुम् सुन नहि रहे होँ, मेरी कुर्ती दो नं।
अमित नें मुड़कर देखा तौ मेरी नंगी चूचियाँ औऱ भरीभरी चिकनी जांघें देखता हि रह गय़ा। अमित नें मुझे कुरता दे दिया, मैंने चूचियाँ कुरते सें ढकलीं औऱ मुस्कराती हुईँ मुड़कर बाथरूम मे आकर कुरता पहना, कुरता मात्र मेरी जांघें ढकरहा थां। जैसे हि मे दरवाज़े सें बाहर् निकली, मे चौंक गई, अमित अपने लन्ड कि मुठमार रहा थां। उसने मुझे नहि देखा, मे बाथरूम केँ दरवाज़े केँ पीछे छुपकर अमित कां लन्ड देखने लगी।
वाउ ! क्याँ मोटा लन्ड थां, मेरे पति सें थोडा लम्बा हि लगरहा थां, मन किया दौड़कर मुँह मे लेँ लूं औऱ एक् महीने सें तड़परही बुर मे डलवालूँ। दो मिनटबाद मैंने द्वार (दरवाज़ा) आवाज़ करके खोला तोँ अमित नें लन्ड जींस मे डाल लिया औऱ अपनी जींसऊपर चढ़ाली। इसकेबाद मे बाहर् आँ गई।
मे कुरता पहनकर बाहर् आई तौ मेरी गुदाज़ जांघें औऱ चूचियाँ अमित ताड़देख करदेख रहा थां। मैंने अमित कों आँख मारी औऱ बोलीं- ऐसे क्याँ देखरहे हौ? मेरी पजामी दो न्। अमित नें हड़बड़ाते हुए मेरी पजामी मुझेदे दि। अमित केँ सामने हि मैंने अपनी पज़मी बुर छुपाते हुएऊपर चढ़ाली मगर अपनी गुदाज़ जांघें पूरी खोलकर अमित कों दिखलाईं। अमित ललचाई नज़रों सें मेरा शरीरदेख रहा थां।
अमित कों देखकर मे मुस्कराई औऱ शीशे केँ सामने जाकर खड़ी होँ गई। शीशे मे अपने कों देखकर मे चकितरह गई, मेरे गोल-गोल गीले मम्मों औऱ चुचूक कुरते मे सें बिल्कुल साफ़दिख रहे थें। मे समझ गई कि अमित इतना ताड़देख कर चूचियाँ क्यूं देखरहा हैं, अगर मेरे पति इतनादेख लेते तौ मुझेअब तक नंगा करके मेरी बुर मे लन्ड डाल चुके होते।
अमित कों मैंने आवाज़ लगाई औऱ बोलि- अमित, इधर आओ !
अमित मेरे पीछेआकर खड़ा होँ गय़ा।
“अपनी भाभी कों एक् मीठी पप्पी देदो नं !” मैंने उसकेहाथ पकड़कर अपनीकमर मे डलवालिए।
अमितगरम थां, उसने पूरा अपना लंड मेरी गांड कि दरार सें छुलाते हुए मेरे गालों पऱ एक् पप्पी दे दि औऱ हटनेलगा।
मैंने उसे प्रेम सें डांटा- इतना क्यूं शर्मा रहे होँ? चिपके रहो न् ! अच्छा लगरहा हैं। अच्छा इधरकान मे ये बताओ कि जब मे बाहर् आई थि तौ मुझेदेख ताड़कर क्याँ देखरहे थें?
अमित झेंपते हुए बोला-कुछ नहि।
मैंने धीरे-धीरे सें कहा- हूं, झूठ बोलते होँ? सचसच बताओ, अभि तौ 5 दिनसंग रहना हैं।
अमित धीरे-धीरे सें बोला- आपकेदूध देखरहा थां !
मैंने शीशे मे देखते हुएकहा- ऊह ! यह तौ पूरे नंगेदिख रहे हें। तुम् तोँ बहोत शैतान हौ।
मेरी बातों सें अमित पूरागरम होँ रहा थां, उसने मेरी चूचियाँ पीछे सें दबाने कि कोशिश कि मगर मैंने उसकाहाथ कमर पऱ रख दिया औऱ बोलि- थोड़ारुक जाओ ! सारे मज़ेआज हि लेँ लोगे क्याँ? अच्छा अमित। ये बताओ मेरी चूचियाँ कैसी लगीं?
अमित बोला- भाभी, बहोत सुन्दर हें, चूसने कां मनकररहा हैं।
हँसती हुईँ मे बोलीं- चूस लेनामगर पहले एक् रसीला चुम्बन होटों पऱ देदो !
औऱ मुड़कर मैंने उसे बाँहों मे भरा औऱ उसके होंठ अपने होटों मे दबाकर दो मिनट तक उसके होंट चूसे। अमित केँ लन्ड कां उभार मे अपनेपेट पर्र महसूस कररही थि, मेरी चूचियाँ अमित केँ सीने सें दबी हुई थि।
मैंने कहा- मम्मों चूसनी हैं?
अमित बोला- चुसवाओ नं !
मैंने अपना कुरता ऊपर उठाया औऱ बोलीं- केवल एक्-एक् बार दोनों चुचूक चूसलो औऱ काटना नहि। मेरे दोनों चूतड़ों कों दबाते हुए अमित नें दोनों चुचूक एक् एक् करके मुँह मे लिए औऱ लॉलीपोप कि तरह एक् एक् बार चूसे।
इस बीच अमितझड़ गय़ा। मेरी चूत भि पूरी गीली हौ गई थि, मेरा देवर जी केँ संगये पहला खूबसूरत कामुक अनुभव थां। अब हम् दोनों अलग होँ गए। मैंने हल्का सां शृंगार किया औऱ कुरते पर्र चुन्नी डालकर नीचे आँ गई।
कथा जारी रहेगी।
प्यासी दुल्हन - Hindi Sex Story – New Episode
Update 3
रात केँ सातबज रहे थें, भाभी केँ संग मैंने खानां बनाया, भाईसाहब टूर पऱ थें, भाभी नें बताया- मेरे साहब महीने मे 10-12 दिन बाहर् रहते हें।
हम् सभीलोग 9 बजे तक खानां खाकर फ्री होँ गए। इसकेबाद 10 बजे तक हम् गप्पें मारते रहे।
दस बजे भाभी बोलि- चलो अर्चना, अब हम् सोते हें।
मे औऱ भाभी सोने वाले कमरे मे आँ गए, अमितऊपर चला गय़ा, दोनों बच्चे अपने कमरे मे चलेगए। मे औऱ भाभी एक् घंटा बातें करतेरहे।
इसकेबाद भाभी बोलीं- सो जाते हें।
मैंने भाभी सें कहा- भाभी, मेक्सी तौ ऊपर हैं, अमित तोँ सो गय़ा होगा।
भाभी हँसते हुए बोलि- जब मे अकेली होती हूं तौ कईबार नंगी हि सो जाती हूं। ऐसा करते हें, हम् दोनों द्वार (दरवाज़ा) बंद करके नंगी हि सो जाती हें। बच्चों केँ उठने सें पहले मे जाग जाती हूं, तुम्हे भि उठा दूंगी।
उन्होंने मेरी पजामी कां नाड़ाखोल दिया नीचे सरकाने लगी, मैंने रोकने कि कोशीश कि तोँ भाभी बोलि- इतना क्यूं शर्मा रही होँ, अब तोँ तुम्हारी बुर कां गेट भि खुल गय़ा हैं।
मे झेंपती हुई बोलीं- भाभी, आप् भि तोँ उतरिये न्।
‘ओह, येबात हैं !’ औऱ भाभी नें एक् मिनट मे हि अपना पेटीकोट औऱ ब्लाउज उतार दिया।
हलकी काली झांटो वाली भाभी कि बुर मेरी आँखों केँ आगे थि। भाभी कि चूचियाँ मुझसे थोड़ी बड़ी बड़ी औऱ मर्दों कां लन्ड खड़ा करने वालीथीं। उन्होंने मेरा भि कुरता उतरवा दिया, मुझेसंग लेतेहुए वोँ बिस्तर पऱ गिरगईं, मेरीसाफ़ चिकनी बुर देखते हुए बोलीं- वाउ, बिल्कुल दुल्हन जैसी बुर हैं, कोई व्यक्ति देख लें तौ चोदे बिना नहि छोड़ेगा। संतरे भि तनेहुए बिल्कुल ताज़े ताज़े लगरहे हें।
औऱ उन्होंने मेरे दोनों संतरे मसलदिए। भाभी नें मेरी बुर मे अपनी उंगलियाँ डालदीं औऱ मेरी उंगलियाँ अपनी बुर मे डलवालीं अब हम् दोनों एक् दूसरे कि चूत रगड़रहे थें। हम् दोनों खुलगए थें औऱ मस्तिया रहे थें बड़ामज़ा आँ रहा थां। हम् लोगो कि लज्जा उतर गई थि। भाभी मुझे कुतिया कहरही थीं मे भि उन्हें भाभी रांड बोलने लगी थि।
मस्ती मे मे औऱ भाभीनहा रहे थें।, भाभी मेरी चूचियाँ दबाती हुइ बोलि- तेरी बुर परेशान नहि करती? एक् महीने सें बिना चुदेपड़ी हैं। एक् बार लन्ड घुसजाए तौ उसकेबाद कितना हि बैंगन-गाज़र बुर मे डाललो, सुख नहि मिलता। मौका अच्छा हैं, अमित सें चुदवा लेँ, कुत्ते कां लन्ड भि अच्छा मोटा हैं। इनके पीछे महीने मे 5-6 बार मे भि कुत्ते सें चुदवा लेती हूं, बहोत मज़ा देता हैं।
मे भाभी कि बातें सुनकर चकित थि, मैंने भाभी सें कहा- भाभी, विश्वास नहि होता कि आपने भाईसाहब केँ अलावा भि किसी कां लन्ड बुर मे डलवाया हुआ हैं।
भाभी बोलीं- प्यासी बुर पता नहि महिला सें क्याँ क्याँ करवा लेँ, मे तोँ पुरानी रांड हूं !
औऱ उन्होंने अपनी स्टोरी बताना शुरुआत कर दि उन्होंने बताया एक् बार उन्हें 6 महीने अकेले रहना पड़ा थां, उनकेतब तक एक् बच्चा भि हौ चुका थां मगरइस निगोड़ी बुर नें इतनातंग किया कि दसदिन बाद लन्ड-लन्ड चिल्लाने लगी। तब तोँ मे 24 कि थि कितनी आगलगी थि इस बुर मे कि जोँ भि जवान, बूढ़ा दिखता तोँ बसयही मन करता थां कि मेरी बुर मे लन्ड डालदे। मगर सालीजब जरुरत होँ तोँ लन्ड डालने वाला भि नहि मिलता।
भाभी कि बातें सुनसुन कर मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थि। भाभी बोलती जारही थीं उन्होंने मेरीतीन उंगलियाँ बुर मे डलवाली थीं औऱ मुझसे जोरजोर सें अपनी चूत मसलवा रहीथीं।
भाभी कां केहना जारी थां, उन्होंने मुझे बताया कि पहले वोँ कलकत्ता मे रहती थि जब उनके पति 6 महीने कों बाहर् गए तोँ उनकी बुर चुदने कों कुलबुलाती रहती थि। उन्होंने अपनीदो तीन सहेलियों कों जबये बताया तोँ वोँ हँसकर मजाक मे उड़ा देतीथीं। उसकेबाद पड़ोस मे एक् भाभी किराए पऱ रहतीथीं। उनकोजब मैंने अपनी बुर कि खुजली केँ बारे मे बताया उन्होंने मुझे एक् आंटी सें मिलवाया। आंटी नें मेरी बुर कां जुगाड़ करवाया, उन्होंने मेरी एक् महंगे होटल मे सेटिंग करा दि।
मे होटल मे दोपहर मे जबमनआता, चुदने जानेलगी, महीने मे 4-5 बार चुदवा लेती थि। नएनए लन्ड सें चुदने मे बड़ामज़ा आता थां, बुर भि ठंडी होँ जाती थि औऱ ऊपर सें कुछ कमाई भि होँ जाती थि। इन 6 महीनों मे मैंने 18 साल सें लेकर 60 साल तक केँ 22 मर्दों केँ लन्ड खाए। हर लन्ड कां अपना एक् अलगमज़ा होता हैं।
उसकेबाद तेरे भाईसाहब आँ गए हम् लोग कानपुर आँ गए। जीवन धीरे-धीरे चलनेलगी। मेरी लज्जा छूट गई थि, 10-12 आदमियों सें आज भि मेरे सम्बन्ध हें। तुम्हारे देवर जी अमित भि इस सूचि मे हैं, बहोत अच्छा चोदू हैं, कुत्ता 3-4 बार मेरी गांड भि फाड़ चुका हैं मगर मस्तमज़ा देता हैं, तूँ भि चुदवा लें, इससे अच्छा मौका नहि मिलेगा।
मेरी साँसें भाभी कि बातें सुनकर तेज़ होँ गई थि, मे बोलीं- भाभी, मन तौ चुदवाने कां कररहा हैं मगरडर लगता हैं !
भाभी हँसते हुए बोलि- मस्त होकर चुदवा ! यहाकोन देखने वाला हैं? कल अमित केँ संग अकेले ऊपर सोना औऱ रातभर चुदना ! परसों बच्चे चले जाएँगे, तूँ अगर राज़ी होती हैं तोँ हम् दोनों संगसंग चुदेंगी।
मे पहले सें हि अमित सें चुदने कि सोचरही थि। अब मैंने सोच लिया कि कल अमित कां लन्ड डलवा हि लूंगी। तभी भाभी नें घूमकर मेरी बुर कि पलकों पर्र अपना मुँहरख दिया। अहह ! जबरदस्त मज़ा थां, मुझसे भि नहि रहा गय़ा मे भि भाभी कि बुर चूसने लगी। दस मिनटबाद हम् दोनों कां चूतरस एक् दूसरे केँ मुँह मे थां। रात केँ दोबज़ गए थें, भाभी औऱ मे नंगी हि सोगईं।
सुभह 9 बजे मेरी नंगी बुर मे भाभी नें अपनी उंगली घुसा दि, मे हड़बड़ा करउठी, भाभी नें मेरी चूचियाँ दबाते हुए चुटकी ली औऱ बोलीं- अबउठजाओ, देवरु जी दफ़्तर जाने वाले हें, दोबार पूछगए कि भाभी उठीं याँ नहि ! जाओ औऱ थोड़ा अपनी जवानी कां रस पिलाआओ।
मैंने उठकर कुरता-पजामा पहन लिया औऱ ऊपर अमित केँ कमरे मे आँ गई। मे जबऊपर गई अमित मुस्करा कर देखते हुए बोला- आप् तौ बहोत देर तक सोईं? मे आपकेलिए गरमचाय बनाकर लाता हूं।
मैंने कहा- नींद हि नहि खुली।
मैंने आगे बढ़कर अमित कों बाँहों मे भर लिया, कस कर चिपकते हुए बोलि- आजऊपर हि सोऊँगी। पूरीरात तुम्हारी यादआती रही !
हम् दोनों आपस मे एक् दूसरे कि बाँहों मे 5 मिनट सिमटे रहे। इसकेबाद अमितगरम चाय बनाने चला गय़ा औऱ मैंने कुरता पजामा उतारकर स्कर्ट ब्लाउज बिना ब्रा पेंटी केँ पहन लिया। अमितजब गरमचाय लेकरआया तोँ मेरा शवाबउसे ललचारहा थां।
गरमचाय पीने केँ बाद अमित सें बोलीं- थोड़ा मेरीगोद मे लेटलो !
अमित मेरीगोद मे लेट गय़ा। मैंने उसकी टीशर्ट उतरवा दि नीचे वोँ कुछ नहि पहने थां। मे उसकी निप्पल हल्के सें नोचते हुए उसके जवान सीने पर्र हाथ फेरने लगी, उसकेबाद होंटों मे उंगली चुसवाते हुए बोलीं- रात कों मेरीयाद आई थि?
अमित बोला- भाभी, रात भरसो नहि पाया, आपकेदूध चूसने कां मन करतारहा।
मैंने अपने ब्लाउज केँ दोनों बटनखोल दिए औऱ अमित कां मुँह अपने दूधों कि टोंटी मे लगा दिया औऱ बोलीं- लो, जी भरकरचूस लो।
अमित नें मेरा एक् मम्मों अपने मुँह मे भर लिया औऱ दूसरा हाथों सें दबाने लगा, वोँ कभी एक् मम्मों कों चूसता कभी दूसरी कों। मे उसेकस कर अपने स्तनों सें चिपकाए हुए थि।
अमित मेरे स्तनों सें खेलते हुए बोला- भाभी, आज दफ़्तर जाने कां मन नहि कररहा हैं। मगर बहोत जरूरी काम हैं, साला जानां पड़ेगा।
मैंने नेकर केँ ऊपर सें अमित कां लौड़ा सहलाया औऱ बोलीं- चलो, अब उठजाओ, साम कों मस्ती करेंगे।
अमित औऱ मे उठगए।
मे उठी औऱ दरवाज़े केँ पास पड़ा अख़बार उठाने लगी। मेरी स्कर्ट ऊपरउठ गई, अमितदूर सें मेरे नंगे चूतड़, गांड औऱ मस्त हिलती चूचियाँ देखकर पगला गय़ा औऱ दौड़ते हुएआकर घोड़ीबनी मुझे पीछे सें लपक लिया औऱ मेरी चूचियाँ दबाने लगा- भाभी, बहोत मनकररहा हैं !
मे बोलि- थोड़ाहटो न्।
अमित कों हटाकर मैंने उसे बाँहों मे भरा औऱ बेशर्म बनतेहुए पूछा- चोदने कां मनकररहा हैं क्याँ?
अमित बोला-हाँ भाभी, आपकी नंगी गांड देखकर आपको चोदने कां मनकररहा हैं।
मे अपना पानी छोड़रही थि, मे बोलीं अमित- तुम्हारा घोड़ा बहोत टनटना रहा हैं, पहले उससे दोस्ती करती हूं !
औऱ मैंने अमित कि नेकर नीचे सरका दि, अमित कां 8 इंची लम्बा औऱ 4 इंची मोटा लौड़ा फनफनाता हुआ बाहर् आँ गय़ा। एक् महीने बाद इतना हसीन लंड देखकर मे पागल हौ गई, मैंने बिनादेर किएउसे मुँह मे लेँ लिया औऱ चूसने लगी। अमित मेरी स्कर्ट उठाकर मेरी बुर मे उंगलियाँ आगे पीछे करनेलगा।
अहह ! मुझे लोड़ा चूसने कां गजबसुख मिलरहा थां। बहोत देर सें अमित कां लौड़ाटनक रहा थां, 2-3 मिनट केँ बाद लन्ड बाहर् खींचकर अमित नें मेरे मुँह औऱ स्तनों पर्र वीर्य कि बारिश कर दि। इसकेबाद हमने एक् दूसरे कों बाँहों मे भरकर 10-12 प्रेम भरी पप्पियाँ गालों पऱ लीं औऱ मे उससे बोलीं- अब तुम् दफ़्तर जाओ, साम कों अपने लन्ड कों सही स्थान घुसाना। मे औऱ मेरी रानी तुम्हारा इंतज़ार करेंगी।
अमित दफ़्तर चला गय़ा औऱ मे बाथरूम मे घुस गई।
कथा जारी रहेगी।
प्यासी दुल्हन - Hindi Sex Story - Kahani ab aur interesting hogi
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