चोदु अंकल और छिनाल मम्मी - चोदु अंकल - Complete Kahani Part 1
चोदु अंकल औऱ छिनाल मां
स्नेहा गुप्ता हैं औऱ मे 19 साल कि सुंदर लड़की हूं। मेरे पिता कि जॉब हमारे घऱ सें 50 किमी दूरी पऱ हैं औऱ वोँ घऱ हफ्ते मे सिर्फ़ एक् बार हि आते हें। मेरे पिता जी गोपीनाथ हें औऱ उनकीउमर 50 साल कि हैं जब कि मेरीमा सुमित्रा मात्र 40 साल कि हैं। मेरा एक् भइयाकरण हैं जौ हॉस्टिल मे पढ़ता हैं। उसकीउमर 21 साल हैं। मे अपनीमा कि तरह बहोत सेक्सी हूं। सुमित्रा साँवली हैं औऱ उसका हाइट 5 फीट 4 इंच हैं।
मेरीमा कों चुदाई कि लत हैं औऱ वोँ चुदवाने कां कोई मौका नहि छोड़ती। उसकी चुचि काफ़ी बड़ी हैं औऱ चूतड़ कुच्छ भारी हें जिसको मर्दलोग हसरतभरी नज़र सें घूरते हें। मे अपनीमा जैसी दिखती हूं सिर्फ़ मेरारंग सफ़ेद हैं औऱ बदन कुच्छ पतला.मा कहती हैं कि जवानी मे वोँ बिल्कुल मेरे जैसी दिखती थि.
मुझे अश्लील बुक्स औऱ ब्लू फिल्म्स कां शौक मेरी एक् सहेली नें डाला थां। मे अपने कमरे मे अश्लील किताबें पढ़ती औऱ ब्लू फिल्म्स देखती हूं। मे कॉलेज मे पढ़ती हूं औऱ रात कों 8 बजे ट्यूशन पढ़कर घऱ लौटती हूं। सुमित्रा मुझेकई बार छेड़ती हैं कि मेरा किसी लड़के केँ संग चक्कर तौ नहि चलरहा? मे शरमाकर रह जाती हूं। मा बहोत खुले विचारों वाली महिला हैं। वोँ कहती हैं, ”
अगर तेरा चक्कर हैं तौ मुझे अवश्य बता देना। मुझे अपनीमा नहि सहेली समझना। अपनी तज़ुर्बेकार मा कि सहायता लें लेना नहि तोँ शरमाती रहजाए गी। स्नेहा बेटी, स्त्री तौ तभी संपूर्ण महिला बनती हैं जब उसका संभोग मर्द सें होता हैं। ईश्वर नें इसलिए तोँ मर्द औऱ महिला कों अलगअलग बनाया हैं। तुमने कभी मर्द कां संग लिया हैं? अगर नहि लिया तोँ कुच्छ नहि देखा ज़िंदगी मे.”
मे रात कों अक्सर चुदाई कि कहानियाँ पढ़ती औऱ चूत मे उंगली डालकर मज़े लेती। एक् दिन मेरे टीचर कि पत्नि कि तबीयत खराब होँ गई, औऱ उन्हों नें हम् कों छुट्टी दे दि औऱ मे 6 बजे हि घऱचली आई.घऱ केँ बाहर् मेरे पिताजी केँ मित्र छबरा साहिब कि गाड़ी खड़ी थि। मे चुपचाप अपने कमरे कि तरफचल दि क्योकि मा छबरा अंकल सें बातें कररही होगी.मगर मा कां रूमबंद थां औऱ छबरा अंकल दिखाई नहि देरहे थें.
मैने सोचा कि शायदमा कों पता हि नहि चला कि अंकलआए हुए हें तोँ मे मा कों बताने उसके कमरे मे चली गयीँ,। मे अभि कमरे केँ दरवाज़े कों खटखटाने हि लगी थि कि मा कि आवाज़ सुनाई पड़ी, ” भैया, कितनी देरइस तरहछुप छुप केँ चुदवाति रहूंगी मे तुझ सें? अगर किसी कों पताचल गय़ा तौ मे तौ मारी जाउन्गि, तेरा तौ कुच्छ नहि जाएगा। तूँ तौ अपनी छिनाल पत्नि वीना कों चोद लेगामगर मेराघऱ तबाह हौ जाएगा.
औऱ अगर मेरे ख़सम कों पतालग गय़ा कि जिसको मे भैया कहकर पुकारती हूं, वोँ हि मुझेचोद रहा हैं तोँ मुझेघऱ सें निकाल देगा.” अंकलहंस पड़े औऱ बोले, ” सुमित्रा, मेरी बहना, मेरीजान, गोपी कों मे रोज़ मोबाइल करता हूं औऱ वापिस आने कां प्रोग्राम पुछ लेता हूं औऱ कह देता हूं कि तुम् अपनेघऱ बाद मे जानां, पहले मेरेघऱ आनां क्योंकि मेरी पत्नि वीना तुम् कों बहोत याद करती हैं। गोपी मादरचोद मेरी पत्नि पर्र नज़र रखता हैं औऱ सोचता हैं कि मुझे कुच्छ पता नहि हैं.
वीना भि उसको लिफ्ट देती हैं। शायद दोनो चुदाई भि करतेहों मगर मुझे पूरा यकीन नहि हैं कि वोँ वीना कों चोद चुका हैं याँ नहि। मेरी अपनी पत्नि कों चोदने कि कोई ख़्वाहिश नहि हैं। दिलचस्प बातयह हैं कि मे गोपी कि पत्नि कों चोदना चाहता हूं औऱ वोँ मेरी पत्नि कों। खैर मे तोँ उसकी हसीन पत्नि, यानी अपनी सुमित्रा बहन कों अब भि चोदरहा हूं, गोपी कां पता नहि कि उसने मेरी पत्नि कों चोदा हैं याँ नहि.”
मेरादिल धकधककर रहा थां अपनीमा औऱ अंकल कि बातसुन कर.” तोँ फिन तुम् दोनो वाइफ स्वापिंग क्यो नहि कर लेते? चारों खुश होँ जाएँगे औऱ चोरी चोरी चुदवाने कां डर भि नहि रहेगा, औऱ तुम् अपनी सुमित्रा रानी कों बहनजी कहे बिना मेरे ख़सम केँ सामने चोद लोगे.”मा कि आवाज़ थि.मेरा शरीर पसीना पसीना हौ रहा थां। इसका मतलब हैं कि मा औऱ अंकल प्रेमी थें औऱ शायद अभि भि चुदाई कररहे थें। धड़कते दिल सें मैनेआँख दरवाज़े केँ छेद पऱ लगा दि.
अंदर कां नज़ारा देखकर मेरी बुर सें रस कि नदीबह निकली। सुमित्रा रानीबैड पऱ पीठ केँ बल लेटी हुईँ थि औऱ उसके शरीर पर्र एक् भि कपड़ा नहि थां। मा कि नुकीली चुचि कड़ी थि जिस पर्र अंकल केँ हाथचल रहे थें। मा केँ निपलेस एकदम कड़े हौ चुके थें। अंकल कां हाथकभी कभीमा कि बुर पऱ चलने लगताजिस कों मा नें शायदआज हि शेव किया थां। मेरीमा कि जांघों कों अंकल सहलारहे थें औऱ मा केँ लिप्स कों किसकर रहे थें। छबरा अंकल भि नंगे थें औऱ उनका काला लन्ड पूरीतरह खड़ा होँ चुका थां.
मा उनके लन्ड कों हाथ सें उपर नीचेकर रही थि। तभी अंकलमा केँ कान मे कुच्छ बोले औऱ मा कहनेलगी, ” अच्छा भैया, चाटलो, मैने भि कयि दिनो सें बुर पर्र तेरे होंठ स्पर्श नहि किए.चूस लो अपनी बहन कां छोला, लेकिदेर मत करना, स्नेहा भि आने वाली हैं। उसकेआने सें पहले मे चुदवा लेना चाहती हूं। तेरे जैसा मस्त लन्ड नाँ जानेकब नसीब होगा मुझे इसकेबाद। भैया, मे भि तेरा लन्ड चूसना चाहती हूं। तुम् मेरेउपर क्यो नहि चढ़ जाते औऱ हम् 69 कर लेते हें, मे तेरा लन्ड चूस लेती हूं औऱ तूँ मेरी बुर चाट लें!”
अंकल मुस्कुरा कर बोले, ”ठीक हैं बहना.आज हि मे गोपी सें बातकर केँ बात करता हूं औऱ अगर उसको मेरा विचार पसन्द आया तौ मे अपनी पत्नि कों उस सें चुदवा लूँगा औऱ तुम को उनके सामने चोदुन्गा। मगरअब मुझे पहले अपनीचुत कां नमकीन रस पीलादो मेरी बहना। तेरी बुर कां तौ मे दीवाना बन चुका हूं.” मेरे देखते हि अंकलमा केँ नंगेबदन पर्र चढ़गये औऱ उनका काला लन्ड मा केँ होंठों सें स्पर्श करनेलगा.
चोदु अंकल और छिनाल मम्मी - चोदु अंकल – New Episode
मा नें उनका मोटा सुपाडा मूह मे लेँ लिया औऱ चूसने लगी। अंकल कां मूहमा कि बुर मे छुप गय़ा। मुझे अंकल कां काला शरीर दिखाई देरहा थां जब कि मा केँ जिस्म कि झलक भि मिलरही थि.”अहह….ओह….आआ….उफ़फ्फ़” आवाज़ें मुझे सुनाई पड़रही थि। कुच्छ देर केँ बाद वोँ दोनोअलग हुए तौ मा कि बुर औऱ अंकल कां लोड्ा थूक सें भीग चुका थां। अंकल नें मा कों गहरीकिस करली औऱ फिनमा अपने आप् बिस्तर केँ हेड रेस्ट पऱ हाथरख कर कुतिया कि तरहझुक गयीँ,.
मा केँ मांसल नितंब उपरउठ चुके थें जिन पर्र अंकल नें प्रेम सें हाथ फेरा.सच मे मेरीमा केँ चूतड़ बहोत सेक्सी लगरहे थें औऱ मेरा स्वयं कां मनकररहा थां कि मा केँ गुदाज़ चूतड़ सहलालूँ। अंकल नीचेझुक करमा केँ चूतड़ कों किस करनेलगे। यहा तहाँमा केँ चूतड़ पऱ वोँ किस करतेवहा वहा उनकेथूक कि लाइन नज़रआती। तभीमा बोलउठी” भैया, अबदेर मतकरो, तुम्हारी बहन बहोत गर्म हौ चुकी हैं….ओह्ह्ह्ह भैया अब तौ पेलदो अपना मस्त लन्ड मेरी चूत केँ अंदर….प्यास बुझादो मेरी प्यासी बुर कि मेरे भइया….
मेरी बुर जलरही हैं तेरे लन्ड केँ लिए छॅबू भैया….जल्द सें चोद डालो मुझे!? अंकल नें अपनामूह मा केँ चूतड़ सें अलगकर लिया औऱ लन्ड कों हाथ मे थामकर उसके सुपाडे कों मा केँ चूतड़ कि दरार मे सें उसकी बुर पर्र टिका दिया, ” ओह्ह्ह्ह भैया, धकेलदो मेरी बुर मे….चोदो अपनी बेहन कों, मेरे चुड़क्कड़ भैया….डाल दो अपना लन्ड मेरी बुर मे….बुझा दो मेरी बुर कि प्यास….” अंकल नें अपनी गान्ड आगे कि तरफकर केँ जोरदार धक्का मारा औऱ फ़च कि आवाज़ सें उनका मोटा हथियार मा कि बुर मे घुस गय़ा.
अंकल केँ हाथमा कि चुचि कों दबाने लगे औऱ मा केँ मुख सें अजीब आवाज़ें निकलने लगी, ” उम्म्म….अरगगगगगगगगग….उर्र्र्र्ररर…आअररह….हाय्ाआ……उउउंम”अंकल नें अपना लन्ड आगे बढ़ा दिया औऱ मा केँ चूतड़ आगे पीच्छे होनेलगे। मेराहाथ अपनी बुर पऱ चला गय़ा औऱ मे अपनी बुर कों सहलाने लगी। मेरी बुर सें पानी टपकने लगा। मैने अपनी सलवार सें अपनी बुर मे उंगली डाल दि औऱ मेराहाथ मेरे बुर रस सें भीग गय़ा.
मेरेमन मे ख़्वाहिश जागरही थि कि काश मे मा कि स्थान चुदवा रही होती! वास्तविक चुदाई मेरी नज़र पहलीबार देखरही थि। हैं ईश्वर मेरी बुर कों लन्ड कब मिलेगा? अंकलजोश मे भरगये औऱ तेज़ी सें चुदाई करनेलगे, ” ओह्ह्ह्ह सुमित्रा….मे बहोत प्रेम करता हूं तुझे ही….मे तेरे प्रेम केँ लिए तुझेही बेहन तक कहरहा हूं औऱ यह भि बर्दाश्त कररहा हूं कि तूँ मुझे भैया कहती हैं……तेरे लिए मुझेसभी मंज़ूर हैं मेरी बहना,
मेरी प्रेमिका। तूँ मेरा प्रेम हैं सुमित्रा। तुम्हे चोदते हुएऐसा लगता हैं जैसे तुम् मेरी पत्नि होँ। तुम्हें चोदकर मुझे जन्नत कां मजा मिलता हैं रानी, काश मेरी विवाह तुझ सें हुइ होती!”मा भि भावुक हौ उठी औऱ अपनी गान्ड कों पीछे धकेलने लगी। अंकल कां लन्ड अब तेज़ी सें अंदर बाहर् हौ रहा थां। मा अपने चूतड़ अंकल केँ लन्ड पऱ ज़ोर ज़ोर सें माररही थि। लन्ड औऱ बुर कां म्यूज़िक कमरे मे गूँजरहा थां। मेरी उंगलियाँ मेरी बुर कों चोदरही थि। अंकलझुक करमा कि पीठ कों चूम लेते औऱ मा ”
अफ….हाीइ….एयाया….ह्म्म” कर उठती.अब मेरीदो उंगलियाँ मेऱी बुर मे थि औऱ मे तेज़ी सें अपनी कुँवारी बुर कों चोदरही थि। मेरी साँसें बहोत तेज़ी सें चलरही थि। उधर उतेजना मे आँ कर अंकल नें मा केँ बाल खींचकर उस्खी गर्दन कों पीछे खींच लिया जैसेकोई घोड़ी कि लगाम खींचरहा होँ, ” ओह….सुमित्रा बहोत मजा आँ रहा हैं….मेरा लन्ड तेरी बुर कि गहराई मे पहुँच चुका हैं….ओह…बेह्न्चोद….मे तुम को हमेशा केँ लिएपा लेना चाहता हूं….गोपी मदेर्चोद कितना खुशकिस्मत हैं जिस्खो तेरे जैसी पत्नि मिली हैं!”
मा भि पसीने सें भीग चुकी थि। वोँ चिल्ला रही थि, : हां भैया, पेलो अपनी प्रेमिका कों….अपनी बहन कों चोदो…। मे तुम को अपना पति हि समझती हूं…गोपी तोँ नाम कां हि पति हैं मेरा…असल मे तुम्हें हि अपना पति माना हैं मैने….डाल दो अपना लन्ड मेरी बुर मे। ज़ोर सें चोदो अपनी बहन कों….मेरे छॅब्बू राजा, तेरी सुमित्रा झड़ने कों हैं….मेरी बुर पानी छोड़रही हैं….ओह मेरे बेह्न्चोद दोस्त….चोद लो अपनी बहन कों आज….छोड़ दो अपने लन्ड कां रस मेरी बुर मे.” मा हान्फते हुएबोल रही थि.
अंकल कां भि लन्ड छूटने वाला लगता थां। उनके धक्के औऱ भि तेज़ हौ चुके थें। कुच्छ देर मे अंकल कां लन्ड पानी छोड़ने लगा तौ उन्हों नें लन्ड बाहर् खींच लिया औऱ लन्ड कि मूठ मारने लगे। सफेद क्रीम लन्ड सें निकलकर मा केँ हसीन चुतडो पर्र गिरने लगी। कुच्छ बूँद क्रीम मा कि पीठ पर्र गिरी। मेरीचुत भि उसी वक़्त पानी छोड़ने लगी। मेराहाथ मेरी बुर केँ रस सें भीग गय़ा.
कमरे केँ अंदर कि चुदाई खत्म होँ चुकी थि। मे चुपके सें अपने कमरे मे चली गई,। अंकल औऱ मा नंगे लेटेहुए थें। मेरेसेल पर्र भैया कां मोबाइल आया औऱ करण बोला कि वोँ कलघऱ पहुँच जाएगा। करण 6 फीट लंबा हॅंडसम नौजवान हैं जिस पऱ मेरी सहेलिया लाइन मारती रहती हें। मेरा ध्यान अब अपने भइया कि तरफचला गय़ा औऱ मुझे एक् महीना पहले कां सीनयाद आँ गय़ा जब मेरा भइयानहा कर बाथरूम सें निकला औऱ उसनेटवल लपेटा हुआ थां.
वोँ जब झुका तोँ टवलखुल गय़ा औऱ मैने उसका लन्ड देख लिया थां। उसके लन्ड केँ आसपास कालेघने बाल थें औऱ हसीन लन्ड मुझे नज़र आँ रहा थां। बेशक लन्ड अभि खड़ा नहि थां फिन भि काफ़ी बड़ालग रहा थां। उस नज़ारे कों यादकर केँ मेरी बुर सें पानी बहने लगता हैं। मेरे ख्वाब मे मुझे वोँ हि लन्ड चोदता हैं औऱ असल ज़िंदगी मे मुझेउस लन्ड कि तमन्ना थि.
अब अपनी जवानी कां भारमुझ सें उठाया नहि जारहा थां। मेराहाथ मेरी बुर कों बुरीतरह सें मसलरहा थां। उधर मोबाइल बजउठा औऱ मैनेउठा लिया। उससी टाइम दूसरे कमरे मे मोबाइल मा नें उठा लिया.
“हेलो”मा बोलीं। दूसरी तरफ पिता जी थें, ” हेलो, सुमित्रा कैसी होँ। मेरा मित्र छबरा तोँ नहि आया.उस बेह्न्चोद कों मैनेकहा थां कि तेरादिल लगाकर रखे औऱ बोर नाँ होनेदे। मगरउस बेह्न्चोद कां कुच्छ पता नहि। हौ सकता हैं साला अपनी पत्नि कि गोद मे बैठा होँ, बहोत कमीना हैं वोँ” मा बोलीं, ” नहि, छबरा भैया तौ यहीं हें। बहोत ख्याल रखते हें मेरा। मे उनसे हि बातें कररही थि.
आप् कब आँ रहे हें, मे आपकीबात भैया सें करवाती हूं.” पापा कि आवाज़ सुनाई पड़ी” रानी मे कल दोपहर कों पहुँच जाउन्गा। ऐसा करते हें छबरा औऱ वीना कों डिन्नर पऱ बुला लेते हें। चारों मिलकर सेलेब्रेट करेंगे। हम् सभी कां मन बहालजाए गा, क्यो कैसालगा मेरा विचार?” मा बोलीं “ठीक हैं, लो भैया सें बातकर लो, ”
“अर्रे मदेर्चोद छबरा, आज तौ ठीक सें मेरी पत्नि कि ड्यूटी देरहे होँ, इसलिए क्षमा कररहा हूं। कल कों वीना कों लेकर हमारे घऱ आँ जानां। विस्की पिएँगे औऱ बिवीओ कों भि पीला देंगे फिनमौज करेगे। बोलठीक हैं?” पिता जी नें कहा औऱ अंकलखुश होँ कर बोले”हां दोस्त ठीक हैं। वीना तुम्हे बहोत मिसकर रही थि। उसने तोँ बॅस गोपी भैया कि रटलगा रखी हैं। नां जाने तुमने क्याँ चमत्कार कररखा हैं उस पऱ.
साले कहींउस पर्र नज़र तौ नहि रखी हुईँ तुमने। तेरानाम सुनकर उसके चहरे पऱ रौनक आँ जाती हैं। बहनचोद कोई चक्कर तोँ नहि चलारहा उसकेसंग? मे तोँ सुमित्रा बहन केँ संगबैठ करगॅप माररहा थां। सच दोस्त तेरी पत्नि बहोत अच्छी हैं, ” पापा बोले”ठीक हैं बेह्न्चोद, कल कां प्रोग्राम याद रखना.”
मे कुच्छ समझ नहि रही थि। मगर मुझेलग रहा थां कि कल दोनो जोड़े स्वापिंग करने कि कोशिश करेगे। मेरामन कल्पना कर केँ भड़कउठा। अगरऐसा हुआ तौ मे भि बिना चुदे तोँ नहि रहूंगी। मैने भि अपनी चुदाई कि योजना बना डाली। अगलेदिन भैया औऱ पिता जी दोनो पहुँच गये। भैया अब औऱ भि हॅंडसम दिखरहे थें। उनकी कमीज़ सें उनके बालों भरी छाती बहोत सेक्सी लगरही थि.
चोदु अंकल और छिनाल मम्मी - चोदु अंकल – New Episode
मे झट सें भैया केँ गले सें लिपट गई, औऱ भैया कों आलिंगन मे लेँ लिया। मेरी भरपूर चुचि भैया कि छाती मे धँसरही थि। भैया केँ शरीर केँ स्पर्श सें मेरी बुर मे खुजली होनेलगी औऱ उसने पानी छोड़ना शुरुआत कर दिया। भैया नें मेरे बालों मे हाथ फेरा औऱ उनका दूसरा हाथ मेरे नितंभ सहलाने लगा। उतेज्ना सें मेराबदन ऐंठ गय़ा औऱ मैने अपनी आँखें बंदकर ली.” भैया मे आपको बहोत मिसकर रही थि.
आप् अपनी बहन सें बिल्कुल प्रेम नहि करते। देखो मे आप् सें कितना प्रेम करती हूं। देखो मेरादिल केसेधक धककररहा हैं। भैया मेरेदिल पर्र हाथरख कर तोँ देखो.” मैने भैया सें प्रेम जताने केँ इरादे सें उनकाहाथ पकड़कर अपनी चुचि पऱ टिका दिया। मेरी चुचि कड़ी हौ चुकी थि औऱ भैया मेरी हरकत सें बोखला गये, मगर उन्हों नें अपनाहाथ नहि हटाया। मेरी पतली सि टीशर्ट मे सें मेरी चुचि कि गर्मी भैया कों महसूस होँ रही थि औऱ नां चाहते हुए भि भैया नें मेरी चुचिमसल डाली। मैने अपनी नज़र झुकाली औऱ देखा कि भैया कां लन्ड भि सिर उठाने लगा थां। मैने भैया कि छाती पर्र हाथ फेरना शुरुआत कर दिया औऱ भैया नें मेरी चुचि कों रगड़ना शुरुआत कर दिया.”स्नेहा तुँ तोँ बहोत बड़ी होँ गयीँ, हैं……तेरी चू….बहोत बड़ी होँ गयीँ, हैं….अब तूँ बच्ची नहि रही….अब तोँ तेरी विवाह कर देनी चाहिए….किसी सें तेरा चक्कर तोँ नहि चल रहा….हैं तौ बता देना” भैया बोल पड़े औऱ मे मुस्कुरा पड़ी, ”
भैया कहतेहुए रुक क्योगये कि मेरी चुचि बड़ी होँ गई, हैं….मेरी एक् हि चीज़ बड़ी नहि हुई…….आपका ल…भि तौ बड़ा हौ गय़ा हैं….औऱ हां आप् भि तौ जवान हें….आपका भि चक्कर चलरहा हैं क्याँ? मेरी तोँ सहेलिया आप् पऱ मरती हें….उनको आपका लू….मनपसंद हैं” भैया भि शरत सें हंस पड़े”अब तुँ क्यो मेरा लन्ड कहने सें शरमाती हैं मेरी बहना…….ठीक हैं तेरी चुचि वाकई हि बहोत मस्त हौ चुकी हैं….अगर तेरी सहेलिओं कों मेरा लन्ड मनपसंद हैं तोँ तुमको नहि हैं क्याँ?
अगर तुमको भि मनपसंद हैं तोँ बाहर् क्यो तलाश करें किसी कि। तेरी जवानी भि काफ़ी मस्त हैं बहना। क्यो तेरी बुर कां महुरत हुआ हैं कि नहि अभि तक। अगर नहि हुआ तोँ अपने भैया कों मौकादे दो औऱ तुम को जन्नत कि सैरकरा देता हूं, स्नेहा.” मे जानबुझ कर शरमा गयीँ, औऱ बोलीं, ” भैया, तुम् नहि जानते कि इसघऱ मे क्याँ हौ रहा हैं। मा तोँ छबरा अंकल सें चुदवा रही हैं औऱ शायदआज रात बापू औऱ अंकल अपनी पत्नियाँ बदलने कां प्रोग्राम बनारहे हें। भैया आज हम् छुपकर मां बापू औऱ अंकल आंटी कां चुदाई कार्यकरम देखेंगे औऱ मे तुझेही अपनी जवानी कि पहली चुदाई कां तोहफा दूँगी”
भैया नें मुझे हैरत सें देखा औऱ शरारत सें मुस्कुरा पड़े, ” मेरी छोटी बहना तोँ बहोत जवान होँ गयीँ, हैं औऱ जब सें मैने तुम्हें देखा हैं मेरा लन्ड नहि बैठरहा। चल स्नेहा, मेरे कमरे मे हम् अभि चुदाई करते हें, ” मेरी चुचि कों ज़ोर सें मसल्ते हुए भैया नें कहा। मैने भि भैया कां लन्ड हाथ मे लें लियामगर मुस्कुरा करकहा, ” भैया इतने उतावले क्यो हौ रहे होँ। मे कौन सि भागीजा रही हूं.
अपनी चुदाई रात कों होगी, तुम् रात तक अपनी बहन कां इंतजार नहि कर सकते? मेरी बुर भि चुदने कों उतावली हैं मगररात हि हमारे लिएसेफ समय होगीजब मा पिताजी औऱ अंकल आंटी भि चुदाई मे व्यस्त होंगे.” भैया मानगये औऱ हम् अपने अपनेरूम मे चलेगये। साम कों अंकल आंटी भि पहुँच गये औऱ पिताजी भि आँ गये। पिताजी नें मुझेगले लगा लिया औऱ मैने देखा कि पिताजी कां लन्ड मेरेपेट मे चुभरहा थां.
शायद पिताजी चुदाई केँ लिए बेकरार हौ रहे थें। मैने भि अपनी मस्त चुचियाँ बापू कि छाती सें रगड़ डाली। मे औऱ भैया मेरे कमरे मे बैठकर टेलीविज़न देखरहे थें जब अंकल औऱ आंटीआए। हम् नें चोरी सें देखा कि बापू नें वीना आंटी कों गले सें लिपटकर कहा”हे, मेरी प्यारी बहन वीना, कितनी देर केँ बादमिल रही हौ तुम्। अपने भैया कों एक् प्रेम कि जॅफी तोँ दो.
चोदु अंकल और छिनाल मम्मी - चोदु अंकल - Next part mein bada twist
Relavant source : click here