हवस की मारी स्कूल टीचर - स्कूल टीचर - Complete Kahani All Parts
बहोत हि गहरे विचारों मे डूबी, अड़तिस वर्षीया विद्यालय-टीचर, क्लास मे अपनी अपनीमेज पे चढ़कर क्षात्रों कि तरफ मुँह करके बैठी थि। उसने अपनी दाहिनी टाँग अपनी बाँयी टाँग केँ ऊपररखी हुईँ थि औऱ उसका पांव अनजाने मे हि झूलरहा थां। उसके पैरों कि अँगुलियों सें लटका उसका ऊँची एंड़ी कां सैंडल कभी भि नीचेगिर सकता थां पऱ नीरा ढिल्लो कां इसतरफ बिल्कुल भि ध्यान नहि थां। वोह अपने पति केँ बारे मे सोचरही थि जिसकी सेक्स मे रुचि चालीस कि उम्र केँ बाद बहुतकम हौ गयीँ, थि। नीरा नें स्वयं कों ठीक किया - रुचिकम नहि बल्कि एकदमखतम हौ गयीँ, थि औऱ उसे केवल अपने बिज़नेस मे हि रुचि थि।
इसबात सें नीरा बहुत परेशान थि। नीरा जानती थि कि वोह स्वयं बहुत सुंदर थि। वोह अपनी पाँचफुट तीनइंच ऊँचाई औऱ 55 किलोग्राम वजन मे बहुत पतला लगती थि। उसके काले-भूरे लम्बे बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठउसे बहोत हि आकर्षक बनाते थें। नीरा हमेशा सोचती थि कि बढ़ती उम्र केँ संग-संग सेक्स मे रुचिकम होँ जानां स्वाभाविक होता हैं पर्र उसकेसंग तोँ उल्टा हि हुआ थां। 35 साल कि उम्र केँ बाद तौ उसकी स्वयं कि सेक्स वासना किसी जंगल मे लगीआग कि तरहदहक उठी थि। पर्र अपने पति कि मरी हुईँ सेक्स ख़्वाहिश केँ कारण नीरा कि बुर कि भड़कती आग बुझाने वालाकोई नहि थां।
वोह अभि भि जवान, हसीन, सेक्सी औऱ चुदासी थि औऱ अपने पति कों बहलाने-फुसलाने कि कितनी हि कोशिशें करती थि पऱ उसपरकुछ असर नहि होता थां। उसकी चुदाई कि पिपासा दिन-ब-दिन बढ़ती जारही थि पर्र उसनेकभी भि अपने पति सें बे-वफाई नहि कि थि।
नीरा नें येसभी सोचते हुए अचानक अपनी आँखें उठा केँ क्लास कां निरीक्षण किया। उसके सामने बैठे ग्यारहवीं क्लास केँ क्षात्र अपना टेस्ट लिखरहे थें औऱ बीच-बीच मे उनकी निगरानी करना उसकाकाम थां। नीरा नें एक् लड़के कों अचानक अपनी आँखें नीचे करके अपनी नज़रें झुकाते हुए देखा। वोह इतनीदेर सें नीरा कों ताकरहा थां। नीरा मन-हि-मन मुश्कुरा दि क्योंकी ऐसा अक्सर होता थां।
उसेये जानकर बहोत अच्छा लगता थां कि लड़के उसके हसीन सेक्सी शरीर कों ताकते थें। वोह भि उससेआधी उम्र केँ लड़के। कभी-कभी अपने पति केँ संगउसे भि अपनी बढ़ती उम्र कां एहसास होता थां। पर्र जबवोह किसी व्यक्ति याँ किशोर उम्र केँ लड़कों कि आँखों मे अपनेलिए लालसा देखती थि तोँ उसकी बुर भि गीली होँ जाती थि औऱ उसे लगता थां कि उसमें अभि भि बात हैं। अभि भि उसका यौवन उनके लण्ड खड़ेकर सकता हैं।
वही लड़का जिसे नीरा नें अभि नज़रें झुकाते हुए पकड़ा थां, उसनेफिन सें नीरा कि तरफ देखा पर्र फिन जल्द सें ये देखकर नज़रें झुकालीं कि टीचर उसको हि देखरही थि। नीराफिन सें मुश्कुराई। उसकाबदन निश्चित रूप सें बहोत सेक्सी थां जिसे देखकर कितनों केँ हि लण्ड सलामी केँ लिए खड़े हौ जाते थें औऱ नीराउसी हिसाब सें कपड़े भि पहनती थि। वोह अधिकतर टाईट सलवार-कमीज़ याँ साड़ी पहनती थि। उसके ब्लाउज़ याँ कमीज़ हमेशा बहुत लो-कट होते थें औऱ उनके नीचे हमेशा डार्क रंग कि ब्रा होती थि।
संग हि उसेहाई हील केँ सैंडल पहनने कां भि बहोत शौक थां औऱ उन्हें पहनकर वोह बहुत सेक्सी महसूस करती थि औऱ वोह जानती थि लड़के भि उनकीतरफ आकर्षित होते थें क्योंकी उसनेकई बार लड़कों कों अपने सैंडलों कि तरफ ताकते हुए पकड़ा थां। कभी-कभी नीरा स्कर्ट-जैकेट सूट भि पहनती थि क्योंकी ये कानवेंट विद्यालय थां औऱ टीचर्स कों फार्मल स्कर्ट याँ पैंट केँ संग जैकेट सूट पहनने कि इजाज़त थि। पर्र विद्यालय कि पालिसी केँ अनुसार स्कर्ट घुटनों सें कम सें कमदो इन्च नीचे तक होना जरूरी थां।
नीराअब उत्तेजित हौ गयीँ, थि औऱ उसकापेर औऱ भि जोर सें हिलने लगा। इससे उसकी जाँघें आपस मे रगड़रही थीं औऱ… औऱ उसकी बुर पे दबावपड़ रहा थां। औऱ फिन अचानक पांव केँ इतना हिलने सें आखिर मे उसका सैंडल उसके पांव सें नीचेगिर हि गय़ा। नीरा नें आज ग्रेरंग कां फार्मल स्कर्ट सूट पहनाहुआ थां। जबवोह ऊँचीमेज सें नीचे उतरी तोँ उसने महसूस किया कि उसकी स्कर्ट जाँघों पे थोड़ी ऊपर खिसक गयीँ, थि। नीरा नें देखा कि कई लड़कों नें उसेमेज सें नीचे उतरते देखा थां औऱ उसेपता थां क्यूं? नीरा कि गोरी माँसल सेक्सी टाँगें देखने केँ लिए।
पर्र नीरा कों इसका बुरा नहि लगा। उसे इन किशोर लड़कों कों अपनी अदाओं सें छेड़ना अच्छा लगता थां औऱ अबउसे एक् औऱ मौका मिला थां। नीरा बेशरम होकर बहोत हि फूहड़ तरीके सें घुटने मोड़कर सीधीबैठ गयीँ, जिससे उसकी स्कर्ट घुटनों केँ ऊपर खिसक गई,। जबउसे अपनी जाँघों पे हल्की सि ठंडीहवा महसूस हुइ तौ नीरासमझ गयीँ, कि अब उसके स्कर्ट केँ अंदर कां सभीकुछ उन लड़कों कों दिखरहा होगा, जिन्होंने अपनी टेस्ट कि कापियों सें नज़रउठा केँ उसे देखने कां कष्ट किया होगा। नीरा साधारण पैंटियां नहि पहनती थि क्योंकी उसे उनमें आराम नहि लगता थां।
नीरा कों केवल र्फ़ैंच-कट याँ जी-स्ट्रिंग पैंटियां हि मनपसंद थीं। वैसे बैठे-बैठे हि नीरा सोचने लगी कि आज उसनेकौन सें रंग कि पैंटी पहनी थि औऱ फिनउसे यादआया कि उसने हल्के हरेरंग कि बहोत हि छोटी सि पैंटी पहनी हुईँ थि। अपनीइस शरारत पे उसकी हँसी छूटने वाली थि जिसे उसनेदबा लिया औऱ फिनवोह ये सोचकर खड़ी होँ गई, कि लड़कों कों वोह जरूरत सें ज़्यादा हि अपनी नग्नता प्रदर्शित कररही थि। फिनमेज केँ सहारे खड़ी होकर उसने अपना एक् पेरउठा केँ अपना सैंडल पहन लिया। जब उसनेफिन सें क्लास कि तरफदेख तोँ एक् संगकई आँखें नीचेझुक गयीं।
हैल्लो दोस्तो। केसे हौ अपनेपिछली स्टोरी।।।। गर्ल विद्यालय ।।।। पड़ी होगीअब फीमेल टिचर कि स्टोरी पोस्ट कररहा हुआशा करताहु आपको मनपसंद आएगी।।
किस्सा कि शुरुआत तौ बहोत जबरदस्त ढंग सें हुईँ हें । आगे देखते हैं क्याँ क्याँ कांड होंगे
हवस की मारी स्कूल टीचर - स्कूल टीचर – New Episode
2
नीराअब क्लास मे घूमते हुए क्षात्रों पे नज़र रखनेलगी। नीरा कों घूमते देखकर कई लड़के बेचैन होकर अपने-अपने खड़े लण्ड छिपाने केँ लिए अपनी टाँगें डेस्क केँ नीचे औऱ ज़्यादा खिसकाने लगे। लड़कों कि इस हरकत पे नीरा मुश्कुराए बिना नहि रहसकी। उनमें सें एक् लड़काकुछ ज़्यादा हि बौखलाया हुआ थां औऱ नीरा नें उसे थोडा औऱ तंग करने कां सोचा। नीरा अपनी चूचियां उस लड़के केँ कंधे पे दबाते हुए पीछे सें उसके डेस्क पर्र झुकी।
“अनिल…कुछ दिक्कत हौ रही हैं तुम्हें? नीरा अपनी गर्म साँसें उसकेकान पे छोड़ती हुई फुसफुसाई…”
“नं…नहि, मैडम… मे… उह…कोई दिक्कत नहि…” वोह लड़का बौखलाते हुए हकलाने लगा।
नीरा मुश्कुरा केँ आगेबढ़ गयीँ,। उसने अपना घूमना ज़ारी रखा औऱ इसीतरह बीच-बीच मे किसी भि लड़के कों अपनी हरकतों सें बेकरार कर देती थि। घूमती हुईँ नीरा जानबूझ कर लड़कियों कि तरफ भि गई, ताकिऐसा नाँ लगे कि वोह लड़कों पे हि ध्यान देरही हैं। नीरा कों कई लड़कों कि पैंटों मे उनके खड़े लण्ड दिखे औऱ उसकी स्वयं कि बुर मे चींटियां रेंगने लगीं। नीरा कों एहसास थां कि उसकी पैंटी बिल्कुल भीग चुकी थि औऱ उसनेमन मे सोचा कि क्याँ इन लड़कों कों उसकी रिसती बुर कि गंध आँ रही होगी।
उसदिन जब नीराघऱ पहुँची, तौ वोह बहोत चुदासी थि। रात कों नीरा नें अपने पति कों चुदाई केँ लिए रिझाने कि कोशिश कि पर्र उसपेकुछ असर नहि हुआ।
नीरा नें बाथरूम मे नहाते हुए एक् मोटे सें बैंगन सें अपनी बुर कि गरमी शाँत करने कि कोशिश कि। बाथटब मे अपनी एक् टाँगटब केँ साईड सें बाहर् लटका केँ वोह अपनी बुर मे बैंगन अंदर-बाहर् करती हुईँ चोदरही थि औऱ संग मे क्लास केँ तरुण लड़कों कि कल्पना कररही थि। उनके चेहरों कि तरुणाई, उनकी ताकती आँखें, उनके खड़ेहुए जवान लण्ड जोँ हमेशा उसकेलिए रेडी रहते थें।
“नीरा ढिल्लो… साली राँड…” नीरा स्वयं कों डाँटते हुए हुइ बोलि- “अगर तूने अपनेमन कों वश मे नहि रखा तौ बदनामी केँ संग-संग जेल कि हवा खानी पड़ेगी। तूँ आग सें खेलरही हैं छिनाल… ये लड़के बहोत छोटे हें…” मगरफिन उसकेदिल सें आवाज़ आयी कि आखिरवोह इन लड़कों केँ संग सिर्फ़ शरारत हि तोँ करती हैं। उनसे सचमुच चुदवा तौ नहि रही। क्याँ मुझ जैसी चुदाई कि भूखी कों थोड़ी सि शरारत सें स्वयं कों खुश करने कां भि हक नहि? येसभी सोचते हुएउसे जैसे उसकेमन मे आकाशवाणी गूँजी औऱ वोह करीब उछलती हुई बोलि- “मे विद्यालय छोड़ केँ कालेज मे पढ़ाऊँगी…”
अगलेदिन सुभह, नीरा बहुत रोमाँचित महसूस कररही थि। वोहसाम कों विद्यालय केँ बादपास केँ एक् डिप्लोमा कालेज मे लेक्चरर केँ लिए आवेदन करने वाली थि। किसी नाँ-बालिग लड़के केँ संगकोई अनहोनी होने सें रोकने केँ लिएउसे कुछ तौ करना हि थां। ऐसा नहि थां कि उसका सचमुच किसी नाबलिग लड़के केँ संग चुदवाने कां इरादा थां। पर्र उसेडर थां कि कहीं खेल-खेल मे कोई दुघर्टना नां हौ जाये। कुछ भि चुदाई सें सम्बंधित जौ उसे किसी बड़ी मुसीबत मे डालदे। वैसे भि विद्यालय कां येसाल खतम होने वाला थां औऱ डिप्लोमा कालेज मे पढ़ाना शुरुआत करने केँ लिए अच्छा वक्त थां। उसदिन अपने कपड़े चुनते हुए नीरा नें सफेदरंग कां चूड़ीदार सलवार कमीज़ पहनने कां निश्चय किया।
उसने अपनी अँगुलियां अपनी सलवार पे फिराईं। उसकी सलवार बहोत हि पतली काटन कि बनी थि औऱ बहुत पारदर्शी औऱ टाईट थि। उसकी स्लीवलेस कमीज़ भि टाप-नूमा थि औऱ औऱ उसके घुटनों सें बहोत ऊँची थि औऱ सिर्फ़ उसके चूतड़ों तक हि पहुँचती थि मगर कमीज़ उसकी सलवार कि तरह पारदर्शी नहि थि क्योंकी उसमें नीचे लाइनिंग (अस्तर) लगी थि। जब नीरा क्लास मे जाकर खड़ी हुइ तोँ उसे एहसास हुआ कि उसनेये कपड़े पहनने कां सही निर्णय लिया थां, क्योंकी सभी लड़कों कि आँखें नीरा पे हि टिकीथीं औऱ वोह भि उसकीकमर केँ नीचे। नीरा जानती थि कि उसकेचार इंच ऊँची पेंसिल हील केँ सैंडल उसकी सल्वार कों औऱ भि ज़्यादा भड़कीला बनारहे थें।
पढ़ाते हुए नीरा कों जब भि मौका मिलता वोह किसी भि बहाने सें झुक केँ अपने भारी चूतड़ लड़कों कि तरफ उघाड़ रही थि। कमीज़ ऊँची होने कि वजह सें पास सें देखने पर्र नीरा कि पारदर्शी टाईट सलवार मे सें उसकी पिंक पैंटी कां अभास दिखता थां। कईबार नीरा नें बहाने सें किसी लड़के केँ डेस्क पे झुक केँ अपनी गाण्ड संग वाले लड़के केँ चेहरे केँ बिल्कुल सामने ठेल दि। एक् बार तोँ उसने अनजान बनतेहुए अपनी सल्वार कमर सें पकड़कर ऊपर खींची जिससे उसकी टाईट सलवार उसकी बुर पे कसकर जैसे चिपक-सि गई,। फिन नीरा हमेशा कि तरह कुर्सी कि बजायमेज पे आगे बैठकर पढ़ाने लगी। उसनेआज स्कर्ट नहि पहनी थि इसलिये नीरा अपनी टाँगें कुछ अधिक हि चौड़ी करके बैठी थि।
नीरा जानती थि कि उसकी बुर पे कसी हुईँ पतली टाईट सलवार मे सें उसकी पैंटी औऱ बुर कां उभार उसके बिल्कुल सामने बैठे लड़कों कों साफदिख रहा होगा। नीरा बिल्कुल अनजान बनी हुईँ पढ़ारही थि। जब उसने अपने सामने बैठे लड़कों कि तरफ देखा तौ उन मे सें कुछ नें तौ उसकी टाँगों केँ बीच मे गड़ी अपनी नज़रें भि नहि हटायीं।
जब नीरा नें एक् जोर कि सिसकी सुनी तौ अपना लेक्चर रोककर उसने चिंता सें उसओर देखा। एक् लड़का अपने डेस्क पे झुककर अपनी बाहों मे मुँह दबाये हुए थां औऱ उसे हल्के सें झटके लगतेहुए प्रतीत हौ रहे थें। जबउस लड़के नें ऊपर देखा तोँ उसके चेहरे पे लाली औऱ पसीना थां। नीरा कों लगा कि शायदवोह बीमार हैं पर्र जबउस लड़के नें नीरा कों अपनीतरफ देखते हुए देखा तौ उसका चेहरा औऱ भि चुकँदर कि तरहलाल होँ गय़ा। वोह लड़कालपक केँ उठा औऱ सारीबोल केँ क्लास सें बाहर् चला गय़ा। पऱ नीरा कों उसकी ग्रेरंग कि पैंट केँ आगे एक् काला धब्बा दिख गय़ा।
Click too expand. nayee suruvat k liye badhae aapko, aapki likhae kafi aachi h. halanki muze bhartiya school main teacher kaa formal skirt main hnaa ajib laga. Good luck keep writing !
Hadd he bhay ek toh story post karte hein, credit bi nehin dete. Ese pretend karte hein jese kee wohi writer hu. Thanks for revealing about original writer. Saare updates post krr do thank u again.
हवस की मारी स्कूल टीचर - स्कूल टीचर – New Episode
3
जब नीरा नें एक् जोर कि सिसकी सुनी तौ अपना लेक्चर रोककर उसने चिंता सें उसओर देखा। एक् लड़का अपने डेस्क पे झुककर अपनी बाहों मे मुँह दबाये हुए थां औऱ उसे हल्के सें झटके लगतेहुए प्रतीत हौ रहे थें। जबउस लड़के नें ऊपर देखा तौ उसके चेहरे पे लाली औऱ पसीना थां। नीरा कों लगा कि शायदवोह बीमार हैं पऱ जबउस लड़के नें नीरा कों अपनीतरफ देखते हुए देखा तोँ उसका चेहरा औऱ भि चुकँदर कि तरहलाल हौ गय़ा। वोह लड़कालपक केँ उठा औऱ सारीबोल केँ क्लास सें बाहर् चला गय़ा। पर्र नीरा कों उसकी ग्रेरंग कि पैंट केँ आगे एक् काला धब्बा दिख गय़ा।
बेचारा लड़का नीरा कि हरकतों सें उत्तेजित होकर अपनी पैंट मे हि झड़ गय़ा थां।
जब क्लास खतम हुई तौ नीरा सें भि रहा नहि गय़ा औऱ वोह भि करीब-करीब भागती हुईँ स्टाफ-टायलेट मे घुसी औऱ दरवाजा लाक करके फटाफट अपनी सलवार औऱ पैंटी नीचे खींच डाली। बैठने कां कष्टकिए बगैर नीरा केँ हाथ उसकी टाँगों केँ बीच मे पहुँच गए औऱ नीरा ज़ोर-ज़ोर सें अपनी बुर औऱ बुर कां दाना रगड़ने लगी। कुछ हि क्षणों मे जैसे हि नीरा झड़ने कों हुईँ तौ उसे अपना निचला होंठ दाँतों सें काटकर स्वयं कों चीखने सें रोकना पड़ा। फिन नीरा मुँहहाथ धोकर वापिस अपनी अगली क्लास केँ चली गयीँ,। अभि जौ कुछ भि हुआ उसके पश्चात नीरा नें उसदिन किसी भि क्लास मे लड़कों सें शरारत नहि कि।
वोहसोच रही थि कि वोहउस क्लास मे कुछ अधिक हि उत्साही होँ गयीँ, थि औऱ अपनी उत्तेजना मे उसने बहुत बड़ा खतराउठा लिया थां औऱ उसेअब कुछ नाँ कुछकदम उठाना हि पड़ेगा। उसदिन जब विद्यालय खतमहुआ तौ वोह सीधी डिप्लोमा कालेज गई, औऱ लेक्चरर केँ पद केँ लिए आवेदन किया। विद्यालय केँ आखिर केँ दिन बिना किसी मुसीबत मे पड़े निकलगये। उसने अपनी हरकतें ज़ारी रखीथीं पऱ वोहकभी अपनीहद केँ बाहर् नहि गई,। जबउसे डिप्लोमा कालेज सें आफरआया तोँ उसे राहत मिली कि अबउसे अपनी सुलगती बुर केँ संग छोटे नां-बालिग लड़कों केँ आस-पास नहि रहना पड़ेगा। गरमियों कि छुट्टियों केँ बादउसे कालेज मे पढ़ाना शुरुआत करना थां।
गरमियों कि छुट्टियों केँ दौरान ऐसीकई स्थितियां आयींजब नीरा कों अपने सब्र कि परीक्षा देनी पड़ी। क्योंकी उसके पति कां बहोत फैलाहुआ कारोबार थां, इसलिये नीरा कों अपने पति केँ संगकई बार पाटिर्यों मे जानां पड़ता थां औऱ जैसेवोह विद्यालय मे क्षात्रों केँ संग खिलवाड़ करती थि वैसे हि इन पाटिर्यों मे भि दूसरे मर्दों केँ संग फ्लर्ट करती थि। ऐसी हि एक् बर्थडे पार्टी मे, नीरा कों एक् व्यक्ति बहोत हि सेक्सी लगा। नीरा नें जश्न मे थोड़ी अधिक हि पीली थि औऱ वोह हल्के सें नशे कि मस्ती मे थि। नीरा नें अपना बहुत वक्तउस व्यक्ति केँ आसपास हि फ्लर्ट करतेहुए बिताया।
ग्रुप मे उससेबात करतेहुए नीरा उसकेपास हि खड़ी थि औऱ कईबार बात करतेहुए वोह अपनी बगैर ब्रा कि चूचियां उस व्यक्ति सें सटाते हुए उसपर झुकी। वोह लोगों कि बातों पे अपने सेक्सी अंदाज़ मे खिलखिलाती औऱ अपनाहाथ बीच-बीच मे उस आदामी कि कमर पे रख देती। वोह व्यक्ति, जिसका नाम, विक्रम थां, नीरा पे नज़ररख रहा थां। वोह भि नीरा कि नियत कों भाँप गय़ा थां। बाद मे जब उसने नीरा कों हाल सें बाहर् बगीचे मे खुलीहवा मे जाते देखा तोँ वोह भि उसके पीछे होँ लिया। जब नीरा नें उसकाहाथ अपने चूतड़ों सें ज़रा सां ऊपर अपनीकमर पे महसूस किया तोँ चौंक केँ उछल गई,।
“ओह… आप् हें…” नीरा उसकीतरफ घूमते हुए बोलि।
“हाँ… अंदर बहुत भीड़ हैं। नहि?” वोह सिगरेट कां कश लेतेहुए बोला।
“बहुत बड़ी जश्न हैं। थोड़ी ठंडीहवा केँ लिए मे बाहर् आँ गयीँ, …” नीरा अपनेपैग कां घूँट लेतेहुए बोलि।
“जरूर…यहा बाहर् बहुत अच्छा हैं…” विक्रम नें बोल केँ नीरा कि कमर मे हाथडाल दिया।
जब नीरा नें कुछ आपत्ति नहि कि तोँ वोह नीरा कि कमर केँ साइड पे हाथ फिराने लगा औऱ धीरे धीरे उसकेहाथ फिराने कां दायरा तब तक बढ़ाता गय़ा जब तक उसका अँगुठा नीरा कि चूचियों केँ साइड पे टकराने लगा। नीरा उसकाहाथ दूर हटाने हि वाली थि कि विक्रम नें अपनी सिगरेट फेंकते हुएझुक कर अपनेहाथ सें नीरा कि ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा ऊपरउठा दिया। फिन जब विक्रम नें अपने होंठ नीरा केँ होंठों पे रखे तौ नीरा केँ मुँह सें सिसकी निकल गई, औऱ उसके होंठ विक्रम कि जीभ अंदर लेने केँ लिएखुल गये।
नीरा नें अपना ग्लास वहींघास पे गिरा दिया। जब वोह दोनों किसकर रहे थें तौ विक्रम कां एक् हाथ अभि भि नीरा कि कमीज़ केँ ऊपर सें उसकी साईड ऊपर-नीचे सहलारहा थां औऱ दूसरे हाथ सें विक्रम नें उसकीकमर पे रखकर नीरा कों अपने सें सटाया हुआ थां। फिनजब उसकेहाथ नें कमर सें नीचे फिसलकर नीरा केँ चूतड़ों कों पकड़ा तौ नीरा नें विक्रम केँ मुँह मे हि आहभरी औऱ उसे अपनी टाँगें कमजोर होती मालूम पड़ीं। कितने लम्बे वक़्त केँ बाद किसी व्यक्ति नें उसकेसंग ऐसा किया थां।
हवस की मारी स्कूल टीचर - स्कूल टीचर - Kahani ab aur interesting hogi
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