देसी भाभी - Gaon ki bhauji - Real Story Continue Part 1
येनई स्टोरी गाँव कि एक् भाभी कि हैं, उनकानाम सुनीता हैं, उनकी उम्र 28 साल हैं, वोँ दो बच्चों कि मम्मी हैं।
वे हाइट मे थोड़ी छोटी हें।
गाँव मे विवाह जल्द हौ जाने केँ कारण उनकी उम्र बहोत कम लगती हैं। गाँव मे खेतीबाड़ी करने केँ कारण जिस्म हमेशा मस्तबना रहता हैं।
सलवार-कमीज मे तौ उनका गदराया हुआ जिस्म कुवारी लड़कियों कों भि फेलकर दे। उनकी चूचियां कुछ बड़ीथीं, जोँ किसी कां भि लौड़ा खड़ा करने केँ लिए बहुत हें।
एक् बारजब मे गाँव गय़ा तोँ वोँ मुझे एक् गाँव कि विवाह मे मिलीं। देखने मे अच्छी लगीं.मन किया कि काशये मालपट जाए, तौ इसकी लेने मे बहोत मज़ा आएगा।
दोस्तों सें पता किया तोँ पताचला कि वोँ हमारी दूर कि रिश्तेदारी मे सें हि थीं.बस मेराकाम बन गय़ा।
मैंने उनसेजान पहचान बढ़ाई औऱ विवाह केँ माहौल मे थोड़ी हि देर मे वोँ मुझसे घुल-मिल गईं।
थोड़ी हि देर केँ हँसी-मजाक मे हम् दोनों बहुतखुल गए, फिन मैंने उनका नम्बर माँगा।
तोँ बोलीं- क्याँ करोगे नम्बर कां?
मैंने बोला- भाभीजी पहले नम्बर दो तोँ सही.रोज आपसे मीठी-मीठी बातें करूँगा, जैसे अभि कररहा हूं। जिससे दोनों कां मनलगा रहेगा।
कुछदेर कि आनकानी केँ बाद उन्होंने अपना नम्बर दे दिया।
इस बीच मे उनसे हँसी-मजाक करतारहा।
इसीबीच मौकादेख कर मैंने पीछे सें उनके चूतड़ सहलादिए।
एक् बार कों तोँ वोँ चौंकगईं। फिन मुस्कुराने लगीं।
अब मार्ग साफ होँ गय़ा थां।
मे उनसेसट करबैठ गय़ा औऱ उनकी जाँघों कों सहलाने लगा। पर्र स्थान ठीक नहि थि, गाँव मे इससे ज़्यादा कुछ नां हौ सका।
वहा सब मुझे पहचानते थें, इसलिये इतने मे हि सन्तोष करके मे दिल्ली वापस आँ गय़ा।
अगले हि दिन मैंने उन्हें मोबाइल किया।
वोँ बोलीं- कौन हें आप्?
मे बोला- आपका प्यारा देवर जी। इतनी जल्दभूल गईं मुझे, आप् परसों हि तौ मिलीथीं।
सुनीता- ओह आप् हौ। बोलो केसेयाद किया।
मे बोला- भाभी आपको भूला हि कब थां जौ याद किया। आप् होँ हि इतनी सुन्दर कि आपको भुलाया हि नहि जारहा।
सुनीता- ओह जनाबमुझ पऱ लाइनमार रहे हें। क्याँ इरादा हैं।
मे बोला- इरादा तोँ नेक हैं भाभी। सच कहरहा हूं आपका चेहरा हरसमय नजरों केँ सामने थां, सपनों मे भि आप् हि आप् नजरआती होँ। क्याँ करूँ आपसेबात किए बिनामन हि नहि माना।
फिन इसतरह हमारी रोज बातें होने लगीं। उनकी औऱ मेरी अच्छी बननेलगी।
आरामसे बातें सेक्स कि तरफ भि जाने लगीं- भाभी, आपकी सेक्स लाइफ कैसीचल रही हैं?
सुनीता- क्याँ बताएं राज। मे गाँव मे सासू-ससुरजी केँ संग रहती हूं। तुम्हारे भइया वहीं दिल्ली मे काम करते हें। छः महीने मे 20 दिन केँ लिएआते हें। बाकी टाइम तोँ स्वयं पर्र कन्ट्रोल करती हूं।
मैंने कहा- अच्छा। ‘मन’ नहि करता क्याँ आपका।
सुनीता- करता तौ हैं। पर्र क्याँ करूँ, वोँ पास तौ हें नहि। तोँ उंगली सें हि काम चलाना पड़ता हैं।
मे- भाभीजी उसमें ‘वोँ’ आनंद कहां। जोँ असली लौड़े कों बुर केँ अन्दर लेने मे आता हैं।
‘हम्म.सो तोँ हैं.’
‘तौ किसी औऱ सें करवालो। ’
सुनीता- नहि दोस्त यहाऐसा नहि कर सकती। कहीं पकड़ी गई तोँ पूरे गाँव मे बदनामी होँ जाएगी।
मे- अच्छा मन तौ हैं। पर्र गाँव मे चुदवाने सें डरती होँ।
सुनीता- हाँजी, यहीसमझ लो।
मे- अच्छा चुदाई कि बात करने मे तौ कोईडर नहि हैं नाँ।
सुनीता- नहि। इसमें कैसाडर। तुम् मुझसे रोज खुलकर चुदाई कि बातें कर सकते हौ।
फिन हम् रोज हि सेक्स कि बातें करनेलगे। दोनों बातों-बातों मे रोज एक्-दूसरे कां पानी गिराने लगे।
एक् बार मैंने पूछा- भाभी आपकी बुर कैसी हैं।
वोँ बोलीं- एकदम गुलाबी हैं।
मे- भाभीजी इतनेसाल चुदने केँ बाद भि गुलाबी केसे रहेगी। मे नहि मान सकता।
सुनीता- तोँ आकरदेख लो। गुलाबी नां निकली तोँ कहना।
मे- अच्छा अगर देखने केँ बाद पसन्द आँ गई तोँ।
सुनीता- तोँ जोँ मरजीकर लेनाजी।
मे- भाभीजी तब तौ देखनी हि पड़ेगी आपकी गुलाबी बुर। भाभी एक् बात कहूँ मोबाइल मे आपको बहोत चोद लिया, मे आपको सचमुच मे चोदना चाहता हूं। मेरा लौड़ा अब आपकी बुर मे जाने कों तड़फरहा हैं। कब तक ऐसे एक्-दूसरे कां पानी निकालेंगे। मे सचमुच मे आपकी बुर मे पानी निकालना चाहता हूं। आपकोहचक कर चोदना चाहता हूं।
सुनीता- राज, मे भि तुमसे चुदना तोँ चाहती हूं, पर्र गाँव मे यह संभव नहि हैं। कहीं बाहर् हि यह होँ सकता हैं। देखोकब मुलाकात होती हैं।
कहावत हैं नं कि जब सच्चे मन सें किसी कि लेनी चाहो तोँ ऊपर वाला भि स्वयं हि जुगाड़ कर देता हैं।
इसीबीच यूपी मे हमारे एक् रिश्तेदार कि लड़की कि विवाह फिक्स हौ गई। भाभीजी कों भि निमंत्रण थां, मैंने उन्हें वहाआने केँ लिएमना लिया।
बस भाभी केँ मेरे लण्ड केँ नीचेआने केँ दिन नजदीक आनेलगे।
nice hot & sexy kahani brother
superb very hot kahani
bohot acchi story
देसी भाभी - Gaon ki bhauji – New Episode
आखिरकार वोँ दिन भि आँ हि गय़ा। मे एक् दिन पहले हि लड़की वालों केँ घऱ पहुँच गय़ा औऱ वहा कां पूरा इन्तजाम देखा।
आखिर मुझे भाभी कों चोदने कि स्थान भि तोँ फिक्स करनी थि ताकि उन्हें चोदने मे कोई तकलीफ़ नाँ होँ औऱ वोँ बिनाडर केँ चुदवा सकें।
उनकेघऱ केँ थोड़ी हि दूरी पर्र गन्ने केँ खेत थें। मे पहलेदिन हि जाकरखेत केँ अन्दर चोदने कि स्थान बनाकर आँ गय़ा थां।
वहा हम् दोनों कों कोई नहि देख सकता थां।
वैसे भि विवाह केँ माहौल मे कौन खेतों केँ अन्दर तक आएगा।
अगलेदिन सुभह-सुभह वोँ भि आँ गईं।
पूरेदिन हम् विवाह कि तैयारियों मे व्यस्त रहे। फिन साम कों मे उन्हें घुमाने केँ बहाने अपनेसंग लेँ गय़ा औऱ वहा सें कुछदूर पैदल चलने केँ बाद पीछे मुड़कर देखा कि कोई हमारा पीछा तौ नहि कररहा हैं। जब पक्का होँ गय़ा कि सब विवाह मे हि उलझेहुए हें। तौ मैंने उनकाहाथ पकड़ा औऱ उन्हें गन्ने केँ खेतों केँ बीच लें गय़ा।
सुनीता- देवर जीजी मुझेयहा क्यूं लेकरआए होँ।
मे- भाभीजी आपको मालूम तोँ हैं। मुझे आपकी गुलाबी बुर देखनी हैं।
सुनीता- नहि नहि। यहा नहि। यहाकोई आँ गय़ा औऱ किसी नें देख लिया तोँ?
मे- भाभीजी यहा खेतों केँ बीच मे कोई नहि आता हैं। वैसे भि यहा हम् दोनों कों कोई नहि जानता, मानजाओ नां। फिनऐसा मौकाकभी नहि मिलेगा औऱ आपकी बुर देखने कों हि तोँ आपकोयहा विवाह मे बुलाया हैं। किसी कों पता नहि चलेगा, तुम् चिन्ता नाँ करो।
थोड़ी देर मनाने केँ बाद वोँ मानगईं। वैसे भि उन्हें पता तोँ चल हि गय़ा थां कि आजकुछ न् कुछ तोँ होकर हि रहेगा।
मैंने अपना गमछा बिछाकर उन्हें अपनेपास बिठाया। थोड़ी देर हाथों कों सहलाकर उनके होंठों मे अपने होंठरख दिए। वोँ भि महीनों कि प्यासी थीं औऱ अपने गाँव सें चुदने हि आईथीं।
उन्होंने मुझे जकड़ लिया, मैंने भि अपने हाथों सें उनकी चूचियों कों दबाना शुरुआत किया औऱ कपड़ों केँ ऊपर सें हि उनकी बुर सहलाने लगा।
वोँ भि बहोत ज़्यादा गरम होँ गई थीं।
कुछ हि मिनट कि चुसाई केँ बाद हम् दोनों अलगहुए। दोनों कां बुराहाल थां, मेरा लण्ड पैंट मे तम्बू बन गय़ा थां, दोनों नें फटाफट अपने-अपने कपड़े उतारकर साइड मे रखलिए।
आग दोनों तरफ बराबर लगी थि।
फिन मैंने देखा वाकयी उनकी बुर गुलाबी थि।
मे- वाउ भाभी। आपकी बुर तोँ सचमुच मे गुलाबी हैं। इसे देखकर तौ मज़ा आँ गय़ा।
सुनीता- राज क्याँ करूँ। अधिक चुदी नहि हैं नाँ। पूरेसाल मे 30 दिन तोँ कुल चुदती हैं यह, बाक़ी सालभर सूखी रहती हैं। तोँ गुलाबी तोँ होगी हि।
मे- चिन्ता नं करो भाभी.आज मे इसे पूरीतरह सें तरकर दूँगा। देखो मेरा लौड़ा इसे सींचने केँ लिएकब सें रेडी खड़ा हैं।
फिन हम् दोनों 69 मे आँ गए। वोँ मेरा लौड़ा चूसरही थीं औऱ मे उनकी गुलाबी बुर कों चूसरहा थां। वोँ मेरा लौड़ा लगातार ऐसे चूसेजा रहीथीं, जैसे मूलीसमझ करखा जानां चाहती हों।
उनकी बुर चूसने मे औऱ उनके चूचियां दबाने मे बहोत आनंद आँ रहा थां। बुर मे जीभ कि रगड़ सें वोँ कुछ हि देर मे झडने लगीं। मैंने उनका सारा पानीपी लिया।
मैंने भि उनके मुँह मे हि धक्के लगाने शुरुआत करदिए। कुछ हि टाइम मे मेरा लावा भि उनके मुँह मे गिरने लगा जिसे वोँ पूरा चाट-चाट करसाफ करगईं।
हम् दोनों कों हि इसओरल सेक्स चूसा चुसाई मे बहोत आनंदआया।
थोड़ी देर सुस्ताने केँ बाद वोँ फिन सें मेरा लौड़ा सहलाने लगीं, मेरा हथियार फिन सें खड़ा होँ गय़ा थां।
सुनीता- अब नाँ तड़पाओ राज, डाल दोइसे मेरी बुर केँ अन्दर। यह लण्ड खाने कों कब सें तड़फरही हैं।
वोँ अपनी टांगें फैलाकर जमीन पर्र लेटगईं।
मैंने भि अपने लौड़े पर्र थूक लगाया औऱ उनकी बुर केँ दाने पर्र रगड़ने लगा।
वोँ तोँ पागल सि हौ गईं। उन्होंने स्वयं मेरा लण्ड पकड़कर अपनी बुर केँ मुहाने पर्र लगा लिया औऱ ऊपर कों जोर लगाने लगीं।
मैंने भि लण्ड कों बुर पर्र दबाना शुरुआत किया। चिकनी बुर होने केँ कारण लण्ड कों मार्ग बनाने मे ज़्यादा वक्त नहि लगा।
लण्ड पूरा अन्दर जाते हि उनके मुँह सें एक् लम्बी ‘अहह.’ निकली।
बुर वाकयी मे टाइट थि, शायद बहोत वक़्त बाद चुदने केँ कारणऐसा थां। मैंने आरामसे धक्के लगाने शुरुआत किए।
दोनों कों बहोत आनंद आँ रहा थां।
वोँ उछल-उछल कर मेरासंग देरही थीं, हर धक्के केँ संग उनकी मादक सिसकारियाँ निकलरही थीं- आहह-आहह आहह-आहह। राज औऱ जोर सें। मे कब सें इसे अपने अन्दर लेने कों तड़फरही थि। आहहह आहह-आहह। जोर सें पेलोराज.
‘आहह-आहह। भाभी। मे स्वयं कईदिन सें तुम्हें चोदना चाहरहा थां। आखिरआज आप् मेरे लण्ड केँ नीचे आँ हि गईं.शपथ सें लाजवाब हौ भाभी। आपने तोँ दिलखुश कर दिया.लो औऱ लो.’
मे उन्हें हचककर चोदने लगा।
उन्होंने भि चुदाई केँ खूबमजे लिए, फिन एकदम सें वोँ अकड़गईं- आहह-आहह आहहह। मे आँ रही हूं राज। औऱ जोर सें चोदो.
कुछ हि देर मे उन्होंने पानी छोड़ दिया।
देसी भाभी - Gaon ki bhauji – New Episode
अब तोँ उन्हें चोदने मे औऱ भि आनंदआने लगा, उनकी बुर मे लण्ड केँ अन्दर-बाहर् होते वक़्त ‘फच्च। फच्च.’ कि आवाज़ गूंजरही थि औऱ उनके मुँह सें कामुक सिसकारियाँ माहौल कों मस्तबना रहीथीं।
मैंने उन्हें हर तरीके सें चोदा। उन्होंने दोबार औऱ पानी छोड़ दिया।
अब मेरा लौड़ा भि जवाब देनेलग गय़ा, मेरा भि होने वाला थां- भाभी मेरा होने वाला हैं। कहो कहां गिराऊँ।
मैंने धक्के तेजकर दिए।
सुनीता- राज, अन्दर हि गिरादो। कब सें बुर सूखी पड़ी हैं। इसे अपने पानी सें सींचदो। मे तुम्हें अपने अन्दर महसूस करना चाहती हूं। डरने कि कोईबात नहि, मैंने आपरेशन करारखा हैं।
मे- दिलखुश कर दिया भाभी आपने तौ। बुर केँ अन्दर माल गिराने कां तोँ आनंद हि औऱ हैं। वैसे भि मुझे अन्दर गिराने मे बहोत आनंदआता हैं।
मैंने कुछ हि झटकों केँ बाद अपना सारा पानी उनकी बुर केँ अन्दर भर दिया औऱ थोड़ी देरबाद लण्ड बाहर् निकाल कर उनकेबगल मे लेट गय़ा।
मे- कहो भाभीजान। आनंदआया कि नहि। बुर कि खुजली मिटी कि नहि.
सुनीता- राजआज बड़े दिनों बाद बुर कों इतनाचैन मिला। मेरीकई दिनों सें बंजर जमीनआज तुम्हारे पानी सें तर हौ गई। सच मे बहोत मज़ाआया तुम् बहोत अच्छा चोदते होँ। कहां सें सीखायह सभी?
मे- आप् जैसी भाभियों कि हि दुआ हैं। उन्होंने हि सिखाया। भाभी मज़ाआया हौ तोँ एक् राउण्ड औऱ होँ जाए। देखो मेरा लण्डफिन सें खड़ा हौ गय़ा। इसे एक् बार औऱ अपनी बुर कि सवारी कर लेनेदो।
अब भाभी कां उतावलापन देखने लायक थां
उन्होंने हँसते हुएफिन सें बुर पसार दि मैंने उनकी दोनों टांगों कों कन्धे पऱ रखकरफिन उन्हें दबाकर चोदा औऱ एक् बारफिन उनकी बुर तरकर दि।
उसकेबाद हम् दोनों नें अपने कपड़े पहनने शुरुआत किए औऱ वापस बारात मे आँ गए।
यहा आकर देखासभी नार्मल थां। किसी कों भनक भि नहि थि कि भाभी मेरे सें चुदकर आँ गई हें।
रात मे भाभी मेरेपास आई औऱ बोलीं- आज तौ बहोत आनंदआया। अब केसे मिलेंगे। मे तुमसे औऱ चुदना चाहती हूं।
मे बोला- भाभी इसकेलिए तोँ तुम्हें कुछ महीनों केँ लिए दिल्ली आनां पड़ेगा। भइया कों कुछ महीने दिल्ली घूमने आने केँ लिएमना लो, बाक़ी कि कसर वहीं पूरीकर दूँगा।
अगलेदिन बारात कि विदाई केँ संग हि हम् लोग भि अपने-अपने रास्ते आँ गए।
कुछ दिनों केँ बाद भाभी नें भइया कों दिल्ली आने केँ लिएमना लिया औऱ फिन दिल्ली आकर भाभी नें मोबाइल करकर बताया कि वोँ दिल्ली आँ चुकी हें औऱ दो महीनों केँ लिए अपने बच्चों कों सासू माँ-ससुरजी केँ पास गाँव मे छोड़कर औऱ अब आप् जल्द मिलने कां जुगाड़ लगाकर मिलने केँ लिएआओ।
मे भि अगले हि दिन भाभी सें मिलने उनके कमरे मे जा पहुंचा औऱ भइया सें जान-पहचान बढ़ाई।
आखिर थें तोँ वोँ हमारी हि रिश्तेदारी मे हि, सो जल्द हि वोँ मुझसे सधगए।
दो दिनबाद हि मैंने उन्हें अपनेरूम मे बुलाया औऱ वोँ आँ गए।
भइया पीने केँ शौकीन थें मैंने उन्हें पिलाकर मस्तकर दिया।
भइया बोले- दोस्त तेरी भाभी दिल्ली घूमने केँ लिएआई हैं। पर्र मेरी तोँ ड्यूटी हि ऐसी हैं। इस महीने तोँ मे घुमा हि नहि सकता हूं। हाँ अगले महीने सें मेरी नाईट-ड्यूटी हैं, फिनबात बन सकती हैं। बड़ी टेंशन मे हूं। दोस्त केसे करूँ।
मैंने बोला- टेंशन काहे कि, यह तोँ कोई बड़ीबात नहि हैं। अगर आप् बुरा नाँ माने तौ मे उनको घुमा देता हूं। आखिर भाभी केँ लिए अपना भि तोँ कोई फर्ज बनता हैं।
भइया बाले-अरे यह तौ बहोत बढि़या हैं। तुम् इस महीने, अगर तुम्हें समय मिले तोँ कुछ स्थान तुम् घुमा देना। बाक़ी स्थान अगले महीने मे घुमा दूँगा। औऱ हाँ कभी-कभी हमारे रूम केँ भि चक्कर लगा लेना। दिन मे तुम्हारी भाभी अकेली रहेगी। तोँ तुम्हारे आने सें उसका भि मनलगा रहेगा।
यही तौ हम् दोनों चाहते थें, अबआने- जाने कां मार्ग भि साफ होँ गय़ा थां।
अगलेदिन हि मे सुभह कि ड्यूटी करके सीधा उनकेरूम मे चला गय़ा।
भाभी नें गले लगाकर मेरा स्वागत किया, मैंने भि जोर सें उनके दोनों चूचे दबाकर उन्हें जोर कि झप्पी मारी।
भाभी- बड़े उतावले लगरहे हौ देवर जीजी.आते हि शुरुआत होँ गए।
मे बोला- भाभी तुम् चीज हि ऐसी हौ। तुम्हें देखते हि तुम्हारी लेने कों मन करता हैं।
सुनीता- ओहोयह बात हैं। मेरी भि लेँ लेना। पहलेगरम चाय-ब्रेकफास्ट तोँ करलो।
देसी भाभी - Gaon ki bhauji - Next part miss mat karna
- 1
- 2
Relavant source : click here