रसीली की रस भरी राते - Chudai Kahani - Episode 1
मे 40 साल कि हूं। ससुराल मे मुझे रसीली केँ नाम सें बुलाते हें। आज मेरेपास दिल्ली मे अच्छा सां फ्लैट हैं औऱ पति कां लकड़ी कां काम हैं।
आज सें 20 साल पहले कि बात हैं। बिहार केँ एक् शहर मे रहती थि, मम्मी बाप गरीब थें, मेरी एक् बेहन औऱ एक् भइया थां। 19 साल कि उम्र मे सतीश सें प्रेम केँ चक्कर मे पड़ गई थि। सतीश नें वादा किया थां कि वोँ मुझसे विवाह करेगा। प्रेम बढ़ता गय़ा, सतीश इंजीनियरिंग पढ़रहा थां। प्रेम परवान चढ़ने लगा थां। हर इतवार उसकी बाइक पर्र हम् लोग सुनसान इलाके मे पहुँच जाते थें औऱ जवानी केँ मज़े लूटते थें। सतीश केँ लन्ड कों सहलाने औऱ उससे चूचियाँ दबवाने कि आदतपड़ गई थि। एक् महीने केँ अंदर हि एक् रविवार कों सतीश नें मेरी बुर कि सील तोड़ दि, पहली चुदाई मे बड़ा दर्दहुआ।
उसकेबाद तौ हम् जल्द जल्द मिलने लगे थें, जब भि हम् मिलते तोँ सतीश मेरी चुदाई जरुर करता थां। मुझे चुदने मे मजाआने लगा थां। मे अब एक् चुदक्कड़ लड़की होँ गई थि। कुछ दिनों बाद लन्ड मेरे मुँह मे भि घुस गय़ा थां, लन्ड चुसाई मे मुझे बड़ामजा आनेलगा थां।
इसीतरह एक् साल गुजर गय़ा। सतीश कों बंगलौर मे जॉबमिल गई, उसने मुझसे विवाह कों मनाकर दिया, वोँ बोला- तुम् गरीबघऱ सें हौ! मे किसी अमीर लड़की सें विवाह करूँगा।
मेरी तोँ हवा निकल गई मगरअब मे क्याँ कर सकती थि। मे उसके लौड़े कां शिकार होँ चुकी थि। एक् महीने बाद सें हि मेरी बुर कि आग चुदने केँ लिये भड़कने लगी, दो यार औऱ बनाए दोनों नें मेरी बुर केँ मज़ेलिए औऱ एक् साल केँ अंदर हि मुझे छोड़गए।
अब मे स्वयं चुदने केँ लिए मित्र बनाने लगी। एक् दिन होटल मे चुदते हुए पकड़ली गई मगर मे चुदकर हि छुट भि गई। मे बदनाम भि हौ गई थि। घऱ मे सभीलोग दुखी थें। हम् लोग गरीब थें मेरी विवाह केँ लिए दहेज़ भि नहि थां। मेरी मां नें एक् लड़के सें मेरी विवाह तयकर दि, लड़का मुझसे 10 साल बड़ा थां औऱ लड़के केँ चेहरे पऱ जले केँ निशान थें। मे दुखी थि।
विवाह सें पहले मेरी मौसी घऱआईं, उनकी उम्र 35 साल होगी मेरी वोँ एक् अच्छी सहेली भि थीं, रात मे मेरेसंग सोईं औऱ मुझेगले सें लगाती हुई बोलीं- मुझेपता हैं कि तेरी प्रेम मे धोखा मिला हैं। तेरी बुर भि चुद चुकी हैं। बद अच्छा बदनाम बुरा। लड़का अच्छा हैं। एक् दो चेहरे पर्र जले केँ निशान हैं मगर स्वस्थ हैं। घऱ केँ लोगों कां लकड़ी कां औऱ खेती कां काम हैं गाँव केँ अमीर लोगों मे गिनती होती हैं।
मौसी बोलीं- तेरा शरीर औऱ चूचियाँ बड़ी रसभरी हें, एक् बार मस्त होकर अपनी पति कों रस पिलाना औऱ अपनी बुर कां दीवाना बना लेना, तेरा गुलाम होँ जाएगा। पुरानी बातें भूलजा औऱ बुर कि खिलाड़िन बनजा। बुर कि खिलाड़िन औरतें रानीबन जाती हें औऱ इसखेल सें अनजान घऱ मे भोंदू पत्नि याँ रंडियाँ बन जाती हें! इसखेल कों समझ औऱ खेल!मे हज़ारों ऐसी शरीफ औरतों कों जानती हूं जिन्हें लोग सावित्री समझते हें मगर वोँ अपनी बुर मे पचासों लन्ड डलवाए हुइ हें। इसखेल मे ये जानना जरूरी हैं कि किसको मम्मों दिखानी हैं औऱ किस सें छुपानी हैं, किससे लौड़ा घुसवाना हैं औऱ किससे छुलवाना हैं। बुर कि खिलाड़िन बन! जिन्दगी भरखुश रहेगी औऱ गरीबी भि भाग जाएगी। मगरजब भि लौड़ा अंदर लेँ तोँ पूरी रांड बनकरमजे करना! जवानी बारबार नहि आती हैं। अब तुँ सभीकुछ भूलकर विवाह केँ बाद कि रसभरी रातों कां मजा लेने कों सजधजकर रहना।
मौसी कि बातों सें मुझेकुछ राहत मिली। दस दिनबाद मेरी विवाह थि।
दसदिन बाद मेरी विवाह होँ गई मे अपनी ससुराल आँ गई। मेरी ससुराल झुमरी गाँव मे थि। गाँव मे सासू माँ-ससुरजी, देवर जी रहते थें। रात कों ऊपर केँ कमरे मे मेरी सुहागरात मननी थि। नौबजे सज़धज कर मे ऊपर आँ गई। बुर मे एक् सनसनाहट सि मचरही थि, मन मे विचार घूमरहे थें कि इनका लन्ड मेरीफटी बुर मे घुसेगा तौ यह क्याँ सोचेंगे।
दसबजे यह मेरे कमरे मे आँ गए। कुछ देर केँ बाद इन्होंने मेरे जेवर औऱ साड़ी-ब्लाउज उतार दिया। अब मेरी ब्रा खुलने कि देर थि।
ऊपर सें दोतीन बार चूचियाँ दबाने केँ बाद इन्होंने मेरी ब्राखोल दि, मेरीरस भरीकसी हुई चूचियाँ देखते हि यह पगलागए औऱ उन्हें मसलते हुए बोले- सपना रानी, वाउ क्याँ माल संतरियाँ हें।
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इन्होंने मुझेबैड पर्र लेटा दिया औऱ मेरी एक् मम्मों दबाते हुए दूसरी चूसने लगे। इनके मुँह सें दारु कि दुर्गन्ध आँ रही थि। इनका लौड़ा खड़ा होँ गय़ा थां। यह खड़े हौ गए औऱ इन्होंने अपने सारे कपड़े उतारदिए।
‘बाप रे बाप! क्याँ मोटा लन्ड थां!’ देखकर मे हैरान थि। सतीश औऱ मेरे पुराने चोदू दोस्तों केँ 5-6 इंच लन्ड केँ आगेये 8 इंचीगधे जितना मोटा लन्ड देखकर मे हैरान थि, मुझे तौ लगाआज तौ मर जाउंगी।
आगे बढ़कर यह मेरा पेटीकोट उतारने लगे, मे शर्माने कां नाटक करतेहुए बोलि- बिजली बंदकर दीजिए नां!
इन्होंने बत्ती बंदकर दि औऱ मेरा पेटीकोट उतार दिया, अब मेरी लसलसी मचलती बुर लन्ड घुसने कां इंतजार करनेलगी।
मेरी जाँघों कों थोडा चौड़ा करतेहुए इन्होंने अपनी उँगलियों सें मेरी बुर केँ दाने कों जोरों सें रगड़ दिया औऱ उंगली अंदर घुसाकर मेरी बुर कि मालिश करनेलगे, बुर पूरी पानी सें नहाने लगी थि। इसकेबाद मेरेऊपर चढ़कर इन्होंने अपने लन्ड कां सुपारा मेरी बुर केँ मुँह पऱ लगा दिया।
दो तीन धक्के मारने पर्र भि इनका मोटा लन्ड अंदर नहि घुसा, यह जैसे बुदबुदाए- साली, बेहन कि लौड़ी! बड़ीकसी हौ रही हैं!
औऱ इन्होंने अपनेहाथ सें लन्ड पकड़कर मेरी बुर कि फलकों पऱ रगड़ते हुए अंदर घुसा दिया औऱ एक् झटके सें मेरी बुर मे लन्ड पेल दिया। मेरीचीख निकल गई थि मगर लन्ड अब मेरी गुफा केँ अंदर थां।
मेरी चूचियाँ मसलते हुए बोले-बस थोड़ी देर कां दर्द हैं, सहनकरो!
औऱ यह अपना लन्ड अंदर घुसाते गए।
बाप रे बाप! ऐसालग रहा थां जैसे कि बुर चोदी नहि खोदीजा रही होँ! मेरा चिल्लाना जारी थां। लन्ड पूरा अंदर तक घुस गय़ा थां। थोड़ी देर मे लन्ड मेरी बुर चोदने लगा, बड़ा दर्द होँ रहा थां मगरअब मजा आँ रहा थां! अहह.उह। ऊई.ऊई.उह। उह। सें मेरी आनंदमयी आवाजें कमरे मे गूंजने लगीं।
20-25 धक्कों केँ बाद इन्होंने लन्ड बाहर् निकाल लिया औऱ मुझे तिरछा कर दियाअब पीछे सें मेरी बुर मे लन्ड घुसा दिया औऱ मेरी चूचियों कां दबादबा कररस निकालने लगे। इनका मोटा लन्ड बुर फाड़कर अंदर तक घुसाहुआ थां।
मेरे दूधिया थनों कि निप्पलें उमेठते हुएयह बोले- शुरुआत मे दर्द होता हैं! अब तोँ मजा आँ रहा होगा? चुदाई कि मस्ती मे मे नहारही थि, बेशर्म होतेहुए बोल पड़ी- औऱ करिए नाँ!
गालों कों चूमते हुए इन्होंने मेरी बुर मे लन्ड दौड़ाना शुरुआत कर दिया। मुझे चोदते हुए इन्होंने मेरी निप्पलें उमेठ उमेठकर कड़ीकर दीं। बुर बुरीतरह चुदरही थि।
थोड़ी देर मे हि पूरा वीर्य बुर मे गिर गय़ा। मेरी पूरी मटकीरस सें भर गई थि। इसकेबाद मे सो गई।
बहोत हि शानदार एपसोड हैं मित्र
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सुभहछः बजे हि दरवाज़े पर्र खटखट हुइ, बाहर् सें आवाज़ आई- मासीजा रही हें, बाहर् आँ जाओ।
मे औऱ यह नंगे पड़ेहुए थें।
मे उठने कों हुइ तोँ इन्होंने मुझेरोक लिया औऱ मेरेहाथ कों अपने लन्ड पऱ रख दिया, यह बोले-जरा इसको रगड़ो नां!
मैंने हाथ मे लन्ड लेकरउसे सहला दिया, थोड़ी देर मे हि लन्ड तन गय़ा। इसकेबाद इन्होंने मेरीकमर केँ नीचे तकिया रखकर मुझे उल्टा कर दिया औऱ मेरी बुर मे अपना लन्ड पीछे सें घुसा दिया।
“उह!”
क्याँ एक् झटके मे हि लन्ड अंदरघुस गय़ा थां। मुझेसमझ मे आँ गय़ा कि यह भि एक् खेलेखाए मर्द हें।
मुझे पीछे सें दबाते हुएयह मेरी बुर मारने लगे। मुझे चुदाई कां मस्तमजा आँ रहा थां, मे तोँ भूल हि गई थि कि इनका चेहरा जलाहुआ हैं।
इन्होंने चोदना जारीरखा औऱ दस मिनट तक मुझे उल्टा लेटाकर मेरी बुर चोदी। इसकेबाद उठकर इन्होंने मेरी दोनों नंगी चूचियाँ भोंपू कि तरह बजाईं औऱ बोले-अब तौ तुम् महिला बन गई होँ, रोज़ चुदने कों सजधजकर रहना।
इसकेबाद यह बाहर् निकलगए। मे भि अपने कपड़े बदलने लगी औऱ मन हि मनसोच रही थि कि लन्ड तोँ इनका बड़ा मस्त हैं, चुदाई कां मजा तोँ मस्त मिलेगा।
दोपहर मे मुँह दिखाई कां कार्यक्रम थां, लंबा घूँघट डालकर मुझे बैठा दिया गय़ा। सभी औरतें एक् एक् करके उपहार देरही थीं। थोड़ी देरबाद सभी हंसी मजाक करनेलगे। तभी औरतों मे सें एक् बोलि- माधुरी, तेरीबहु तोँ बड़ी चिकनी औऱ रसभरी हैं।
मेरीबगल मे मेरे पति राजू कि मौसी बैठीथीं, मेरी चूचियों पर्र हाथ फिराते हुए मेरी सासू माँ सें बोलीं- दिदी, रंजना सहीकह रही हैं! बहू कि चूचियाँ तौ पूरी रसीली होँ रही हें, राजू केँ तौ मज़े आँ गए, रोज़जी भरकररस पीएगा।
सभी हँसने लगे, तभी उनमें सें एक् बोलीं- रस पिलाना पड़ेगा, तभी तोँ रस निकलेगा।
मासी बोलि- अरे राजू गाँव कां गबरू जवान हैं, पूरी मटकीरस सें भर देगा। तुँ भि कभी ट्राई करलिओ।
हंसी मजाक जारी थां, मेरी सासू बोलीं- मुझे इसका सपनानाम मनपसंद नहि हैं, मे तौ इसे रसीली कहकर बुलाऊँगी!
औऱ उन्होंने मेरानाम रसीली रख दिया। मुझे गाँव मे सभीलोग रसीली कहकर बुलाने लगे।
कार्यक्रम 4 बजे खत्म हौ गय़ा। मे गाँव कि भाभी चंपा केँ संगऊपर केँ कमरे मे आँ गई।
चंपा औऱ मे रूमबंद करके बातें करनेलगे, मैंने अपनी साड़ी उतार दि थि- चंपा कों मैंने बताया कि मेरा शरीरदुख रहा हैं।
चंपा नें मेरे गालों पऱ चुटकी काटी औऱ बोलीं- रातभर आठ इंची लन्ड सें बुर चुदवाई हैं, दर्द तोँ होगा हि!
उसनेतेल कि शीशी उठाई औऱ मुझसे बोलि- चल नंगी हौ! तेरीतेल मालिश कर देती हूं।
मैंने अपने ब्लाउज कों उतारते हुए पूछा- तुझेही केसेपता कि इनका लन्ड आठ इंची लंबा हैं।
चंपा नें मेरी मेरी नंगी चूचियाँ हॉर्न कि तरह बजाईं औऱ हँसते हुए बोलीं- ओह महारानी मुझ पर्र हि शककररही हें।
चंपा बोलि- मेरे पति केँ लंगोटिया दोस्त हें, मुझेओर भि बातें पता हें, सभीबता दूंगी!
औऱ उसने मुझे नंगीकर दिया, मेरी मालिश करनेलगी, मालिश मे मुझे बड़ामजा आँ रहा थां। मेरी मालिश करतेहुए चंपा नें बताया कि मेरे ससुरजी असली ससुरजी नहि हें, वोँ हें राजू केँ चाचा हें। राजू केँ पापा कि मृत्यु राजू केँ जन्म केँ तीनसाल बाद होँ गई थि। राजू केँ चाचा रंगीन किस्म केँ व्यक्ति हें, अवैध संबंधों केँ चलते मेरी सासू माँ कि विवाह देवरु सें होँ गई थि। उनसे मेरी एक् ननदी औऱ एक् देवर जीमनु हैं। ननदी कि विवाह हौ चुकी हैं।
रसीली की रस भरी राते - Chudai Kahani - Kahani ab aur interesting hogi
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