स्वामीजी से ठुकाई - arz ki zaroorat - Complete Kahani Part 1
हेलो। ऑल द रीडर्स। मेरानाम साक्षी हैं औऱ मे एक् 39 साल कि शादीशुदा स्त्री
हूं। मेरे परिवार मे मेरे पति अरुण केशव, शेजल औऱ शीना हैं। हमारी
अरेंन्ज मैरिज हुई थि। हमारी विवाह कों 19 सालहुए हैं। इसीबीच हमारी 2
बेटियाँ हुईँ। बड़ी कां नाम हमने बड़े प्रेम सें शेजल औऱ छोटी कां नाम शीना
रखा। मेरे पति एक् मिडिल क्लास व्यक्ति हैं। वोँ प्राइवेट कंपनी मे जॉब करते
थें मगर कंपनी मे छटनी केँ दौरान उनकीजॉब जातीरही।
हम् भोपाल शिफ्ट हुए थें काम कि तलाश मे। मेरे पति कों कोईकाम नहींमिल रहा
थां। वोँ कई दफ़्तरों मे इंटरव्यू देनेगये पर्र फिन भि उन्हे जॉब नहींमिल
पारही थि। इसी कारण हमारे घऱ मे आयेदिन झगड़े होने शुरुआत हौ गये। अब
घऱ तोँ पैसो सें हि चलता हैं। आम व्यक्ति कि ज़रूरत कभी ख़त्म नहीं होती। लिमिटेड
पैसे होने कि वजह सें हम् काफ़ी समय टेंशन मे हि रहते थें।
फिन मुझे मार्केट जाते टाइम एक् विज्ञापन दिखा। वोँ विज्ञापन किसी स्माइल
बाबा केँ नाम सें थां जिसे लोगो नें काफ़ी बड़ा दर्ज़ा दियाहुआ हैं। कहते थें
कि वोँ मन कि शक्ति प्रदान करते हैं औऱ समस्याओं कां निवारण निकालते हैं पूजा
कर केँ मैनेघऱ जा केँ अपने पति सें येबात कि। मेरे पति इनसभी बातो मे
विश्वास नहीं करते थें। उन्होने मुझसे कहां, “तुम्हें अगर जानां हैं तोँ जाओ पर्र
मुझको इनसभी केँ लिए फोर्स नहीं करना। ”
मैने भि सोचा कि उन्हे अधिक फोर्स नाँ करूँ औऱ वैसे भि उन्होने मुझे
जाने कि अनुमति दे हि दि थि। मैने एक् दोबार औऱ सोचा क्याँ करूँ। चूँकि घऱ
कि हालत बहोत बिगड़ गयीँ, थि मैने मजबूरन स्वामीजी सें संपर्क करने कि सोच
लिया थां। शायद उनकेपास हमारी तकलीफ़ कां उपाय हौ।
अगलेदिन मे नहा केँ अच्छी सि साड़ी पहन केँ स्वामी जी केँ आश्रम मे गई,।
स्वामी जी देखने मे 56 सें 60 केँ उम्र केँ लगरहे थें। उनकेआस पास भक्तजन
बैठे थें। उनके दोनो बाजू मे 2 लडकियाँ लगभग 30 कि उम्र कि सफेद साड़ी
मे खड़ी थि। स्वामीजी ईश्वर औऱ शक्ति कि बातें कररहे थें। सत्संग समाप्त
होने केँ बादसभी लोग एक् एक् करके स्वामी जी सें मिलने जाने लगे। जब मे उनके
पास पहुँची तौ वोँ मुस्कुराये औऱ मुझे आशीर्वाद दिया, “पुत्री तुम्हारे
माथे कि लकीरदेख केँ लगता हैं कि तुम् घोर कष्ट सें गुजररही हौ। बताओ क्याँ
कष्ट हैं। स्वामीजी तेरा कष्टदूर कर देंगे। कल्याण होँ पुत्री तेरा सारा
कष्टदूर होँ जायेगा। ”
स्वामीजी सें मिलने केँ बाद उन्होने मुझे इंतजार करने कों कहां। मे साइड
मे जा केँ इंतजार कररही थि। सभी केँ जाने केँ बाद स्वामीजी नें मुझे बुलावा
भेजा। मे उनकेपास गई,। स्वामीजी केँ संग उनकी 2 सेविका भि थि जिन्होने
सफ़ेद साड़ी पहनरखी थि। एक् शिष्य भि थां जिसने धोती पहना थां।
स्वामीजी नें मुझे अपने सामने बैठाया औऱ पूजा करनेलगे। वोँ कुछ मन्त्र कां
जापकर रहे थें औऱ उनकी सेविका पीछे दीया लें केँ खड़ी थि। स्वामीजी कि आँखे
बंद थि औऱ वोँ अपने होंठ हिलाते जारहे थें जैसे कि मन मे कोई मन्त्र कां
जापकर रहे हौ। फिन स्वामीजी नें आँखे खोली।
फिन उन्होने मुझे गंभीरता सें देख केँ कहां” जिसका डर थां वोँ हि हुआ पुत्री,
तुम्हारी जन्म पत्रिका मे दोष हैं। जिसकी वजह सें तुम्हारे परिवार केँ
विकास मे बाधा आँ रही हैं। इसकेलिए यज्ञ करवाना होगा। इसका उपचार करना
पड़ेगा। पूजा करवानी होगी। ”
स्वामीजी कि बातसुन केँ मे थोडा घबरा गई, थि। मैने स्वामीजी सें कहा
“स्वामीजी इसकाकोई उपाय बताइये। मे कोई भि पूजा करने केँ लिए रेडी
हूं”।
फिन स्वामीजी नें कहां “कल तुम् नहा केँ नये वस्त्र पहन केँ बिना सिंदूर लगाऐ
औऱ बिना मंगलसूत्र पहने आश्रम मे आँ जानां लगभग 12:30 बजे। हम् कल सें पूजा
शुरुआत कर देंगे। ध्यान रहे, किसी कों भि इस पूजन केँ बारे मे मत बताना
वरना विघ्न पड़ जायेगा। “फिन मे वहा सें निकल केँ अपनेघऱ आँ गयीँ,। पूरी
रात मे सो नहींपा रही थि, यहसोच केँ कि मेरे कुंडली मे दोष हैं। मेरी
वजह सें घऱ पर्र मुसीबत आई हैं तोँ मे हि इसे सुधारुगी भि।
अगली सुभह मे अपने पति कों ब्रेकफास्ट करा केँ अपने बच्चो कों विद्यालय छोड़ने केँ
बाद वापसघऱ आई। मेरे पति भि ब्रेकफास्ट कर केँ ऑफिस केँ लिए निकल चुके थें।
मैनेघऱ कां साराकाम समाप्त कियाफिन नहाने चली गयीँ,। मे अच्छे सें नहा केँ
एक् पीलेरंग कि साड़ी मे रेडी हुईँ। मे फिन बिना सिंदूर लगाऐ औऱ बिना
मंगलसूत्र केँ स्वामीजी केँ आश्रम चली गई,। आज आश्रम मे कोई नहीं थां।
गुरुजी केँ शिष्यो नें सबकोकॉल आई करकेबता दिया थां कि आज आश्रम मे कोई
अनोखी पूजा हैं जिसके कारण वोँ आज किसी सें नहीं मिलेंगे। मे वहा पहुँची तौ
गुरुजी कि सेविकाओं नें मुझे अंदर कां मार्ग दिखाया। वोँ मुझे अंदर कमरे
मे लेँ केँ गये। वहा अंदर एक् बेड थां औऱ उसबेड केँ सामने वाली स्थान मे
स्वामीजी नें एक् यज्ञ कां वेदी खड़ा किया थां। मैने सोचा कि यही स्वामीजी
यज्ञ भि करते होंगे औऱ फिनरात मे सोते होंगे।
मेरीसोच कों रोकते हुए उनकी एक् शिष्या बोलीं, “तुम् बिल्कुल सही स्थान आई हौ….
स्वामीजी तुम्हारी हर ख़्वाहिश पूरीकर देंगे। उनकेपास बहोत बड़ी शक्ति हैं।
अभि तुम् उनकेसंग पूजन मे बैठो, हम् लोग बाहर् जाते हैं। तुमने किसी कों
बताया तौ नहीं नाँ कि तुम् यहाआई होँ। ”
मैने नाँ मे सर हिलाया। स्वामीजी नें मुझे बैठने केँ लिए कहां। हम् सभीवही
फर्श पे बैठगये। स्वामीजी मन्त्र बोल केँ अग्नि मे घीडाल रहे थें। व
मंत्रो कां उच्चारण करतेजा रहे थें। फिन एक् सेविका बाहर् सें दूध कां ग्लास
लें केँ आई। बाबा नें थोडा दूध अग्नि मे डाला औऱ फिनदूध कों हाथ मे पकड़
केँ कुछ मन्त्र बोला औऱ फिन वोँ दूध मुझे पीने कों कहां।
बोले, “इसे पीजाओ……। इससे तुम्हारी आत्मा शुद्ध होगी। ”मुझे डरलगा मगर
मैंने डरते डरतेदूध कां ग्लास हाथ मे लेँ लिया। मैनेदुध एक् हि बार मे
पूरापी लिया। दूध पीने केँ बाद मुझेकुछ अजीब सां लगनेलगा। अचानक हि मुझे
नशा सां चड़ने लगा। मेरी आँखो केँ आगे अंधेरा छानेलगा। मे बेहोश सि होने
लगी। मे फर्श पे हि गिर पड़ी। मुझेहोश तौ थां कि क्याँ क्याँ हौ रहा हैं पऱ
मे उसका विरोध नहींकर पारही थि। मुझे महसूस हुआ कि कुछजने मिलके मुझे
उठा रहे हैं औऱ फिन उन्होने मुझे बिस्तर पे लेटा दिया। मे आँखें खोल केँ सभी
देख रही थि मगरकुछ कर नहींपा रही थि।
फिनउस स्वामी नें अपने शिष्यो कों बाहर् इंतजार करने केँ लिए कहां।
स्वामीजी नें फिन जाके कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दिया औऱ अंदर सें कुण्डी लगा
दि। फिन स्वामीजी मेरेपास आये औऱ उन्होने मेरी साड़ी कां पल्लू खींच केँ
हटा दिया। वोँ मेरे सीने पे हाथफेर रहे थें औऱ कुछ मन्त्र बोलते जारहे
थें। फिन उन्होने मेरी साड़ी कों मेरे शरीर सें अलगकर दिया। अब वोँ मेरे सीने
औऱ पेट दोनो स्थान हाथ फेरते जारहे थें।
मुझे उत्तेजना हौ रही थि। फिन मेरे शरीर मे एक् अजीब सि सिहरन होनेलगी।
मेरेपेट पे हाथ फेरते-फेरते वोँ मेरी नाभि मे अपनी उंगली बार-बार घुसा
रहे थें। फिन वोँ ऊपरआये औऱ एक्-एक् कर केँ मेरी ब्लाउज कां हुक खोलने लगगये।
मेरी आँखे अपने आप् बंद होनेलगी। उसकेबाद वोँ मेरे सें लिपटगये औऱ अपना
हाथ पीछे लें जाके ब्रा कां हुक पीछे सें खोल दिया।
फिन उन्होने मेरी ब्लाउज औऱ मेरी ब्रा कों निकाल केँ मेरे सें अलगकर दिया।
मे लज्जा सें मरीजा रही थि मगर बेबस थि उस नशीली ड्रिंक कि वजह सें। मे
कमर सें ऊपर बिल्कुल नंगी होँ गयीँ, थि। उन्होने हाथ मे कोई सुगंधित तेल
लिया थां औऱ वोँ मेरे सीने पे मलनेलगे। मेरी धड़कन तेजी सें धड़करही थि।
मेरी साँसे ऊपर नीचे हौ रही थि। मेरे शरीर सें सुगंधित तेल कि वजह सें एक्
खुशबू आनेलगी।
स्वामीजी मेरेपास मे बैठगये औऱ मेरे मम्मों कों दबाने लगगये औऱ मेरी
निपल कों अपनी उंगलियो सें मसलने लगे औऱ पुल करनेलग गये। वोँ मेरी बिगड़ती
हालत कों देखरहे थें औऱ समझरहे थें। मुझेनशे मे उनकीये हरकत अच्छी लगने
लगी। मेरे शरीर मे अजीब सि हलचल होनेलगी। वोँ मेरे बूब्ज़ कों बार-बार दबा
रहे थें औऱ मेरी निपल सें बारी-बारी खेलरहे थें।
फिन वोँ औऱ लगभगआये औऱ मेरी चुचि कों अपने मुहँ मे लेकर चूसने लगगये थें।
स्वामीजी मेरी चुचि चूसते–चूसते उसे बीच-बीच मे काट भि रहे थें। चुचि
चूसते–चूसते वोँ मेरी नाभि मे भि उंगली घुसाते जारहे थें। मुझे उनकी सारी
हरकते अच्छी लगरही थि। लगरहा थां मानो मे बहोत दिनबाद कोई मेरी निपल
चूस रहा थां। अरुण नें कईदिन सें मुझेछुआ भि नहीं थां। क्योकि वोँ अपनी
परेशानियो सें घिरा रहता थां। आजपता लगरहा थां कि मेरे शरीर मे आज भि
आकर्षण हैं। यानी मे आज भि किसी कों पागलबना सकती हूं।
स्वामीजी बोलते जारहे थें, “तुम् एकदम शांत होँ केँ इस पूजा कां खुशी
लो……….मे तुम्हारी सभी तकलीफ़ दूरकर दूँगा। तुम्हारे जिस्म कों शुद्ध करना
पड़ेगा…….”फिन स्वामीजी नें मेरी गर्दन पे होंठलगा दिए औऱ चूमने लगे,
फिन दाया मम्मों चूमना शुरुआत किया औऱ मेरे बाये बूब्ज़ दबाते जारहे थें। वोँ
संगसंग कुछ मन्त्र भि बोलते जारहे थें। बहोत मादक माहौल थां। रूम मे एक्
दीयाजल रहा थां औऱ अग्नि वेदी सें निकलने वाली रोशनी सें रूमनहा रहा थां।
पूरारूम सुगंधित थां। मेरेऊपर स्वामीजी नंगे शरीर झुकेहुए थें। मेरा भि
जिस्म नंगा थां।
फिन उन्होने मेरे होठों पे अपनेहोठ रखे औऱ मेरेहोठ कों चूसना शुरुआत कर
दिया। मेरेहोठ चूसते चूसते उन्होने अपनीजीभ मेरे मुहँ मे घुसा दि।
उनकीजीभ मे एक् अजीब सां स्वाद थां। वोँ मेरीजीभ चूसने लगे। मुझे महसूस होँ
रहा थां कि वोँ मेरे मुँह केँ अंदरचाट रहे हैं। वोँ उठ केँ मेरे चेहरे कों
देखने लगेकही मे परेशान तौ नहींलग रही। मगर मेरे चेहरे सें एक् खुशी कि
झलक मिली उन्हे।
स्वामीजी बोले, “कैसालग रहा हैं पुत्री तुम्हारे दिल मे जोँ भि तकलीफ़
हैं दिल सें निकाल दो मे दिल पे मन्त्रो सें उपचार कररहा हूं।
फिन ज़ोर ज़ोर सें मन्त्र उच्चारण करनेलगे। बाहर् बैठे उनके शिष्य भि ज़ोर
ज़ोर सें मंत्रोचर करनेलगे। मुझेलगा कि मैकिसी स्वर्ग मे हूं औऱ मेरा
रेप होने वाला हैं। मुझेलगा अब स्वामीजी मुझेचोद केँ हि छोड़ेंगे। शायद
उनके शिष्य भि मेरीइस नशे कि हालत कां फायदा उठाऐगे। मुझसे बहोत बड़ी
भूल होँ गई कि मैने किसी कों बताया नहींयहा आने केँ बारे मे अगर मे विरोध
करती हूं तौ यह मुझेमार डालेंगे औऱ किसी कों कुछपता भि नहीं चलेगा। मे
वहा सें दौड़ना चाहती थि मगरनशे कि वजह सें मे कुछकर नहींपा रही थि।
चुपचाप लेट केँ उनकी क्रिया कां मजा लें रही थि।
स्वामीजी बोले, “अभि तुम्हारा मुख शुद्ध हौ गय़ा अब बाकीबदन कों शुद्ध
करना हैं। अब मे नीचे बडूगा। तुम् मेरासंग देतीरहो फिन तुम् बिल्कुल उलझन
मुक्त जिंदगी जी लोगी। ”
मे नशे मे थि। हिल नहींपा रही थि। दुबारा तेल लेकर मेरी नाभि मे मलने
लगे। स्वामीजी मेरे पुरे जिस्म पऱ हाथफेर रहे थें औऱ तेल कि मालिश भि कर
रहे थें। वोँ मेरे होठों कों चूमते चूमते नीचे कि तरफआने लगगये औऱ फिन
मेरे दोनों स्तनो कों चुसना औऱ दबाना शुरुआत किया। फिन वोँ आहिस्ता मेरे
पेट कि तरफ बड़े। अब उन्होने मेरेपेट पे चूमना शुरुआत किया। पास मे पड़ी
कटोरी सें थोडा शहद निकाल केँ मेरी नाभि मे डाल दिया। फिन उनका मुहँ मेरी
नाभि पे आया। फिन वोँ मेरी नाभि कों चूसने लगे। वोँ मेरी नाभि केँ अंदर अपना
लिंग घुसा केँ अंदर झटके मारने लगगये। इतने मे मेरी बुर मे भि हलचल
मचनेलग गयीँ,। तेल कि सुगंध औऱ दूध मे मिलानशा मुझे मस्तकर रहा थां। मे
स्वयं चूतवाने कों उत्सुक हौ रही थि। मेरी आँखे रह-रह केँ बंद हौ जारही थि।
स्वामीजी बोले, “शाबाश पुत्री। तुम् बहोत अच्छे सें पूजन मे हिस्सा लेँ रही
हौ। मे इसीतरह तुम्हारे जिस्म कों शुद्ध करूँगा। “मेरी नाभि चाटते। वोँ
मेरे पेटिकोट कां नाडा खोलने लगगये। बंधन खोलने केँ बाद उन्हे मेरी पिंक
पेंटी दिखी। फिन उन्होने मेरे पेटीकोट औऱ मेरी पेंटी खींच केँ ऊतार फेंकी।
फिन ज़ोर ज़ोर सें मंत्रोचर करनेलगे। अब मे बिल्कुल नंगी उनके सामने
लेटी थि औऱ वोँ लगातार मेरीसाफ बुर कों देखरहे थें औऱ मन्त्र बोलरहे थें।
फिन अपनाहाथ मेरी नंगी बुर पे फेरने लगे।
वोँ बोले, “अब वक्त आँ गय़ा हैं कि मे तुम्हारे अंदर कि गंदगी कों साफ करूँ।
मे अंदरइस पवित्र तेल कि मालिश करता हूं। तुम् दिल सें उपरवाले कों याद
करो। तुम्हे पता हैं योनि देवी पार्वती कां रूप हैं। अपनी टाँगे खोलो
पुत्री। ”
उन्होने मेरे पांव पकड़ केँ फैला दिया औऱ मेरे पैरो केँ बीच मे आँ केँ बैठ
गये। वोँ मेरी बुर पे अपनाहाथ फेररहे थें औऱ कुछ बडबडाते जारहे थें। फिन
हाथ मे तेल लेकर बुर केँ उपर लगाया औऱ मालिश करनेलगे। बुर केँ होंठ उनके
छूने सें कांपरहे थें। मानो उनमें भि जान आँ गई होँ। वोँ उंगली सें बुर केँ
होंठ पे मालिश किएजा रहे थें।
फिन मुझे महसूस हुआ कि वोँ मेरी बुर मे अपनी उंगली घुसारहे थें। औऱ अपनी
उंगली कों मेरी बुर केँ अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया थां। फिन वोँ मेरे बुर
केँ दाने कों छेड़ने लगगये थें। फिन दुबारा शहद लेँ कर बुर पे उंड़ेल दिया।
शहद औऱ तेलमिल केँ कयामत ढारहे थें। वोँ फिन नीचे झुके औऱ अपनी उंगलियो सें
मेरी बुर कि पलके फैला दि औऱ छेद पे किस करना शुरुआत कर दिये। बीच-बीच मे
वोँ अपनीजीभ मेरी बुर केँ अंदर भि डालरहे थें औऱ फिन वोँ मेरी बुर केँ बहोत
अंदर तक लीककर रहे थें। अंदर मेरी बुर सें गीलापन निकलने लगा। शहद औऱ बुर
कां रस दोनो स्वामीजी मज़े सें चाटरहे थें।
स्वामीजी बोले, “बहोत लजीज हैं पुत्री तुम्हारी योनि कां रसजी करता
हैं हमेशा पीता रहूँ। मगर पहले तेरी मुश्किल कां हल ढूँढना हैं बच्चा। ”
मुझेऐसी ख़्वाहिश हौ रही थि जैसे वोँ मेरी बुर कों चूसते रहे, हटे नहीं। फिन
उन्होने अपनीतेल सें भीगी उंगली मेरे गांड मे घुसेड दि। एक् हि झटके मे
उनकीबीच वाली उंगली मेरे गांड मे समा गयीँ,। वोँ मेरी बुर चूसरहे थें औऱ
संग-संग गांड मे उंगली भि कररहे थें। मुझ पऱ दोहरा वार हौ रहा थां। काम
अग्न सें मैने आँखेबंद कररखी थि। अब मेरी बुर पानी छोड़ने वाली थि। मे
उन्हे हटाना चाहती थि मगरमुझ मे इतनी शक्ति नहीं थि कि मे ऐसाकर सकूँ।
मे आँखें बंद करके उनके बुर चूसने कां मजा लें रही थि।
उन्होने मेरी बुर कों काफ़ी देर तक चूसाई कि औऱ वोँ घड़ी आँ गई जिसका
इंतजार थां। मैंने बहोत ज़ोर सें पानी छोडा स्वामीजी केँ मुँह पे। मुझे
लज्जा भि आनेलगी मगर स्वामीजी पुरे मज़े सें मेरी बुर कां पानी पीनेलग
गये। मे उनके मुहँ मे हि झड़ गई,। स्वामीजी नें मेरे बुर कां पानी कों
पूरापी लियाफिन वोँ उठे औऱ मेरेऊपर लेटगये। उनका होंठ मेरे होंठ पे
रखा थां। मे स्वयं उनका होंठ चूसने लगी। उनके मुँह सें मुझे अपनी बुर केँ
पानी कां स्वाद मिलने लगा।
स्वामीजी फिन बोले, “बहोत मज़ेदार थां तेरा योनिरस तुम् क्याँ खाती होँ कि
तुम्हारा बुर इतना मीठा हैं। तेरा पति कितना किस्मतवाला होगा जोँ रोज़ इसका
रसस्वादन करता होगा। ”
स्वामीजी कों क्याँ मालूम कि अरुणकभी मेरी बुर नहीं चूसता। बुर कों बहोत
गंदा मानता हैं अरुण औऱ चूसना तोँ दूर वोँ कभी बुर पे किस भि नहीं करता हैं।
आज स्वामीजी नें मुझे ज़न्नत दिखा दि। उन्होने अपनेहाथ सें अपने लन्ड कों
मेरी बुर पे रखा औऱ फिन ज़ोर सें धक्का लगाया। स्वामीजी कां मोटा लन्ड एक् हि
बार मे मेरी बुर मे पूराघुस गय़ा। मुझेयाद नहीं कि उनके लन्ड कां साइज़
क्याँ हैं मे नशे मे थि पुरेसमय।
स्वामीजी फिन मन्त्र बोलने लगे औऱ मम्मों चूसने लगे। मे नीचे सें धक्के
मारने कों इशारा करनेलगी। फिन स्वामीजी नें मेरी बुर कि चुदाई शुरुआत कर दि।
वोँ ज़ोर ज़ोर सें अपने मोटे लन्ड कों मेरी बुर केँ अंदर बाहर् धक्के लगारहे
थें। स्वामीजी मेरी बुर कि चुदाई करते करते मेरे होठों कों चूमरहे थें औऱ
संगसंग मेरे मम्मों दबाते जारहे थें। औऱ मेरी निपल कों अपनी उंगलियो केँ बीच
मसलते जारहे थें। मुझे बहोत दर्द हौ रहा थां पर्र मे कुछकर नहींपा रही थि।
वोँ नशा भि ऐसा थां कि मेरे पुरे जिस्म मे गर्मी छा गयीँ, थि। मुझे उनका जिस्म
भि गीला महसूस होतेजा रहा थां जैसे कि वोँ पसीने मे भीगेहुए हैं। वोँ
मुझे स्थान स्थान चूमते जारहे थें औऱ मेरी बुर मे ज़ोर सें अंदर बाहर् करतेजा
रहे थें। उन्होने ऐसा करीब 15 मिनिट तक किया होगा। फिन मुझे महसूस हुआ कि
मे दोबारा झड़ने वाली हूं। मैने आँखेबंद कि औऱ ज़ोर सें जिस्म कड़ा किया।
मे बोल पड़ी, “ओओओओओओओओऊऊऊऊऊऊऊऊओह्ह्ह्ह्ह।।।।।। आआआआाअगगगगगगगगगगगगघह।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। माआआआआआआअ।।।।।।।।।।।।। मे
पानी छोड़रही हूं। ”
स्वामीजी नें भि अपना जिस्म कड़ा किया मे समझ गई, वोँ भि झड़ने वाले हैं। फिन
अचानक मुझे मेरेपेट केँ अंदर गर्म पानी भरने जैसा महसूस हुआ औऱ मे समझ
गयीँ, कि वोँ मेरे अंदर हि झड़गये हैं। झड़ने केँ बाद वोँ मेरेऊपर हि कुछ
देर लेटेरहे। फिन वोँ मेरेउपर सें उठे औऱ बाथरूम मे चलेगये। मुझे अंदर
सें पानी कि आवाज़ आँ रही थि। थोड़े समयबाद स्वामी जीनहा धो केँ बाथरूम
सें बाहर् निकले। मुझे वैसा हि छोड़ केँ वोँ स्वयं कपड़े डाल केँ बाहर् चलेगये
औऱ मे वहा अंदर नंगी लेटी हुईँ थि।
मुझेपता हि नहींचला कि कब मेरीआँख लग गई। जब मुझेहोश आयातभी भि मेरा
सर घूमरहा थां। पर्र अब मे अपनेहाथ पेरमूव करपारही थि। मेरे दोनों
पेरो मे दर्द होँ रहा थां। बदन अकड़ गय़ा थां। दिलकर रहा थां कि कोई मुझे
मालिश कर देतामगर वहाऐसा कौन मिलता। मे अपनी हालत पे रोरही थि। मुझे
यह भि होश नहीं थां कि मे उस वक्त तक नंगी हि थि। मैने अपनी योनि कों
सहलाया तोँ दर्द सें बहाल हौ गई,। योनि केँ लिप्स फुलगये थें औऱ दर्द भि थां,
योनि केँ ऊपर स्वामीजी कां चिप चिपा सां वीर्य थां जोँ बहोत हद तक सूख गय़ा थां।
स्वामीजी कां लन्ड लगता हैं बहूत मोटा थां जिसने मेरी बुर कां भरताबना दिया
थां। मे अपनी बुर कों सहलाने लगी। मुझेकुछ आराम सां मिला।
मे औऱ बुर मसलने लगी औऱ एक् उंगली कों बुर केँ छेद मे घुसेड दिया। अंदर
स्वामीजी कां वीर्य बहरहा थां। मेरी उंगली अंदर तक चली गई,। मुझे इतना
मजा आनेलगा कि मे उंगली सें योनि कि चुदाई करनेलगी। मेरी आँखों केँ
सामने स्वामीजी कि चुदाई घूमने लगी। मुझे बहोत दर्द हौ रहा थां। मगर मे
कुछ नहि कर सकती थि। मै पूरीतरह मग्न होँ केँ योनि मे उंगली कररही थि
तभी हल्की सि आवाज़ हुई। मे चौंक सि गयीँ,। तभी मेरा पानी निकलने वाला थां।
मैंने योनि कों सहलाना जारीरखा औऱ आँख खोली तोँ क्याँ देखती हूं। ….
अगर कमेन्ट आये तोँ
कथाआगे भि चालू रहेगी ?
mast kahani brother samne swami ji kaa sewak khada thaa yahi na
स्वामीजी से ठुकाई - arz ki zaroorat – New Episode
गातांक सें आगे ……
मे उठने कि कोशिश करनेलगी तभी देखा स्वामीजी कां एक् शिष्य दरवाजे पे
खड़ा मुझेदेख रहा थां। उंगली सें योनि सहलाने औऱ चोदने सें मुझ कों मजाआने
लगा थां औऱ जिससे मेरी आवाज़ निकल गई। स्वामीजी कां वोँ शिष्य बगल केँ कमरे
सें उठ केँ मेरे कमरे मे आँ गय़ा। मुझे नग्न हालत मे देखकर वोँ घबरा गय़ा,
मगरजब उस कि नज़र मेरी नंगी टागों कि तरफ गई तौ वोँ देखता हि रह गय़ा।
मेरी चमकती योनिउसे अपनीओर खींचरही थि। मे भि बिना रुके उंगली तेज़ी
सें अपनी योनि मे अंदर बाहर् करतीरही।
वोँ दिन मेरेलिए बहोत खास थां। पहलीबार आज सुभह मुझे किसी पराये पुरुष नें
चोदा थां औऱ अभि पहलीबार एक् पराये पुरुष नें मुझे नंगी हालत मे देखा वोँ
भि अपनी उंगली सें बुर चोदते हुए। अब मुझे भि मजाआने लगा थां। मैने अपनी
टांगे औऱ फैला दि औऱ उसे अपनी योनि कां दर्शन कराती रही।
कुछ देरबाद वोँ बोला, “आप् स्वामीजी कि प्रिय भक्त हैं। आपकोऐसा नहीं करना
चाहिऐ। बाहर् स्वामीजी आपकी इंतज़ार कररहे हैं। ”
मैनेकहा, “स्वामीजी कि प्रिय भक्त आपको आदेश देती हैं कि मुझेकुछ वक़्त
दे। आप् वहा क्योखडे हौ, आओ औऱ मेरेसंग यहाबैठ केँ देखो। ”
मेरे लगभग आँ गय़ा औऱ ध्यान सें मेरी योनि देखने लगा। उसी समय मे ज़ोर सें
चिल्लाई, “उउइईईईईईईईईई माआआआआआअ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मैन्न्नन्न्न्नन्न्न्न आआआआआआययययीईईईईइ। ”
औऱ मे जिस्म कों कड़ा करकेझड़ गई,। यह नज़ारा देख केँ शिष्य जिसका नाम
विशेष थां, उसकी आँखेफटी कि फटीरह गयीँ,। वोँ अपनाहाथ अपने लन्ड पे रगड़ने
लगा। मैने उसकी धोती कि तरफ देखा तोँ उसका लन्ड धोती सें बाहर् झाँकरहा थां।
एकदम कड़क। मे उसका खड़ा लन्ड देख केँ औऱ गर्म होनेलगी औऱ विशेष केँ संग
बेड पऱ बैठ गयीँ,। मुझे उसका लन्ड पकड़ने कां दिल करनेलगा। उसकी साँसे तेज़
चलनेलगी औऱ मेरी भि जबकि मे दोबार आजझड़ चुकी थि।
मैने आँखेबंद कि औऱ अपना चेहरा विशेष कि तरफ बढ़ाया ताकिउसे मेरेमन कि
बातपता चले। उसने मेरा इशारा समझा औऱ अपने होंठ मेरे होंठ पे रखदिए। हम्
दोनो एक् दूसरे केँ होंठ चूमने औऱ चूसने लगे। उसने अपनीजीभ मेरे मुँह मे
घुसा दि औऱ मे मज़े सें उसे चूसने लगी। मेरे पति अरुण नें कभी मुझेऐसे
किस नहीं किया थां। फिन उसकाहाथ मेरे बूब्ज़ पे पहुँच गय़ा। मे शांत होके
उसके अगलेकदम कि इंतज़ार करनेलगी औऱ उसकीजीभ तौ चूसती रही। वोँ मेरे
स्तनो कों जोरजोर सें दबाने लग गय़ा उसकेहोठ मेरे होठों पर्र थें। कुछदेर केँ
बाद विशेष नें मेरे स्तनो कों मसलना शुरुकर दिया। मेरे निपल्स एकदम खड़े
हौ गये औऱ सामने कों तनगये। विशेष नें अपना मुँह मेरे होंठ सें हटाया औऱ
मेरे निपल कों चूसने लगा। वोँ पाँच मिनिट तक मेरे निपल्स कों चूसता रहा। कभी
बाया निपल तौ कभी दाया निपल। मैने उसकासर पकड़ा हुआ थां औऱ मे वैसा
महसूस कररही थि जैसा एक् मां अपने बच्चे कों दूध पिलाते वक्त महसूस करती
हैं। उसकीइन हरक़तो सें मे अपने जिस्म मे उठता दर्दभूल सां गई, औऱ मे
उसकी आगोश मे खो गई,। तभी विशेष नें अपने मुँह कों मेरे बूब्ज़ सें अलग किया।
मे उसकीतरफ प्यासी निगाहो सें देखने लगी।
उसकेबाद वोँ मेरे सामने खड़ा होँ गय़ा औऱ अपनी धोती कों खोल केँ अलगकर दिया।
वोँ मेरे सामने नंगे खड़ा थां औऱ उसका फनफनाता लन्ड मेरी आँखो केँ सामने
हिचकोले खारहा थां। मे उसके मोटे लन्ड कों देखती रही। दिल किया कि उसे
मुँह मे लेकर चूसने लगूं।
उसने अपने लन्ड कों मेरे मुहँ केँ सामने कर केँ कहां, “इसको चूसो। लें लो इसको
अपने प्यारे मुँह मे चूसलो इसे। बहूतमजा आयेगा। ”
पहले तोँ मुझको बहोत अजीब सां लगा कि इतनी गंदी चीज़ कों मे मुहँ मे केसे
लू। मैने मुँह सिकोड केँ कहां, “मगरयह तोँ गंदा होता हैं, मे इसे मुँह मे
नहीं लें सकती। कक्चहिईीईईईईईईईईई।।।।।।।।।। ” यह तोँ बहोत गन्दा होताहे
मैने कहां।
विशेष बोला, “तुम् इसको एक् बार मुँह मे लो तोँ ऐसामजा आयेगा कि तुम् लन्ड
कों मुँह सें निकालने कों सजधजकर हि नहीं होगी। देखोयह केसेफन फ़नारहा हैं। ”
विशेष नें अपने लन्ड कों मेरे मुँह सें लगा दिया तोँ मे उसको मुँह मे लेँ केँ
चूसने लगी। शायद स्वामीजी नें जोँ दवा पिलाई थि उसकाअसर अभि तक बाकी थां।
विशेष कों बहोत मजा आँ रहा थां ओर उसके केँ मुहँ सें आवाज़ें निकलने लगी,
“ऊऊऊऊऊओ।।।।।। आआआ ऊऊऊ जोऊऊऊऊर सेस्स्स्सस्स्स्सईईए। ”
मेरी योनि सें भि पानी निकलरहा थां, यह सोच-सोच केँ कि मे पहलीबार किसी
कां लन्ड चूसरही थि वोँ भि एक् पराये मर्द कां। विशेष नें मेरासर पकड़ लिया
औऱ धक्के मारने लगा। विशेष मेरे मुहँ मे अपने लन्ड कों अन्दर बाहर् करनेलगा
औऱ दस मिनिट केँ बाद मुझे उसके लन्ड मे अजीब सि सिहरन महसूस होनेलगी। मे
समझ गयीँ, कि अब वोँ पानी छोड़ेगा, औऱ मे अपने मुँह सें उसका लन्ड हटाने लगी
मगर विशेष नें मुझेऐसा करने नहीं दिया। उसने मेरासर दोनो हाथों सें पकड़
रखा थां। उसका लन्ड मेरे मुहँ मे हि रहा औऱ वोँ झड़ने लगा। उसकेलंड सें
वीर्य निकलने लगा।
मे उसके लन्ड कां वीर्य पीना नहीं चाहती थि, मगरतब तक देर होँ चुकी थि।
उसने मेरे मुहँ मे वीर्य कां फव्वारा ज़ोर सें छोड़ा औऱ उसके लन्ड सें पानी
निकल केँ मेरे मुहँ मे भरनेलगा। उसके वीर्य कां स्वाद उतना बुरा नहीं थां तोँ
मैंने लन्ड कों अपने होठों सें जोर सें दबा लिया। उसका सारा पानी मेरे मुहँ
मे चला गय़ा औऱ मे पी गयीँ,। उसके लन्ड कां पानी पीने केँ बाद मे दोबारा सें
उसके लन्ड कों चूसने लगी। मेरामन नहींभरा थां। हे ईश्वर, मे एक् हि दिन मे
सती सावित्री नारी सें एकदम हलकट खूबसूरत औरतबन गयीँ, थि। पता नहीं स्वामीजी नें
दूध मे मिला केँ मुझे क्याँ पिलाया थां।
कुछदेर बाद विशेष नें कहां, “अब तुम् लेटजाओ। मे तुम्हारी बुर कों
चुसूगा। इतनी मस्त बुर बहोत कम लोगो कों नसीब होती हैं। ”
मे बिस्तर पर्र लेट गई। विशेष नें मेरी टाँगों कि तरफआके मेरी टाँगों कों
फैलाया। वोँ मन्त्र मुग्ध सां मेरी बुर कों देखता रहा। मेरीसाफ सुथरी औऱ
चिकनी बुर जौ स्वामीजी कि चुदाई केँ बाद भि होंठ हिलारही थि। विशेष नें
अपना मुँह मेरी योनि पे रख दिया औऱ योनि केँ होंठ चूमने लगा। उसने अपनी
जीभ निकाली औऱ अपनी जुबान सें मेरी बुर कों चाटने लगा। उसकी ज़ुबान मेरी
बुर केँ दाने कों लगरही थि। वोँ बारबार अपनी ज़ुबान सें मेरी बुर केँ दाने
कों सहलाता औऱ चूसता। हरबार मे दुगुने जोश सें उसकेसर कों अपनी बुर पे
धकेलती। मे भि उससे बोलने लगी, “ऊऊऊऊहह।।।।।। तुम् बहोत मज़ेदार हौ। इस
योनि नें इतनामजा पहलेकभी नहीं लिया।।।।।।।।।।।।
अआआआअम्म्म्मममममममिईीईईईईईई।।।।।।। चूसो मेरे राजा ज़ोर सें चूसो तुम् आज
मेरी बुर कों ज़ोर सें चाटो, पता नहींफिन मौका मिले नाँ मिले।।।।।।।।।।।।
आआहह दोस्त तुम् ग्रेट हौ।।।।।।। ऊऊहह।।।।।।।।।। ऊओह यस बड़ामजा आँ रहा हैं
बहोत अच्छा लगरहा हैं। बहोत गर्म हौ दोस्त तुम् तौ। ”
मेरीऐसी बातें सुनकर वोँ औऱ ज़ोरजोर सें मेरी योनि चूसने लगाओर जुबान सें
बुर चोदने लगा। मे इतनी मस्ती सें अपनी बुर चुसवा रही थि कि मे भूल गई,
थि कि मे एक् शादीशुदा महिला हूं। औऱ वोँ पराया मर्द हैं। थोड़ी हि देर मे वोँ
समय आँ गय़ा औऱ योनि मे छटपटाहट होनेलगी। मैने ज़ोर सें सांस लिया औऱ
मेरी बुर नें पानी छोड़ दिया। मेरी बुर सें पानी निकलने लगा। मेरी योनि केँ
रस कों विशेष अपनी जुबान सें चाटने औऱ चूसने लगा। उसकीइस हरक़त सें मे तोँ
मज़े मे पागल हौ गई। मैने उसके बालों कों ज़ोर सें पकड़ लिया औऱ खींचने
लगी। उसे दर्द भि हुआ होगा तौ उसनेकुछ कहां नहीं औऱ मेराकाम रस चूसता
रहा।
क़रीब पाँच मिनिट केँ बाद विशेष नें मुझे नीचे लेटा दिया औऱ स्वयं मेरेऊपर आँ
गय़ा। उसने मेरी टाँगों कों अपने कंधों पऱ रखा औऱ लन्ड बुर केँ मुँह पे रख
दिया। फिन अपने लन्ड कों बुर केँ होल पऱ सेट करने केँ बाद अन्दर कि तरफ
धक्का दिया। मेरी बुर कां छेद उसके मोटे लन्ड कों अन्दर नहीं लें पाया। वोँ जोर
जोर सें धक्के मारने लगा आखिरकार उसका लन्ड मेरी बुर मे पुरे तरीके सें सेट
होँ चुका थां जिससे मेरी बुर कां छेद पूरीतरह सें फैल गय़ा तौ मे दर्द सें
चीखने लगी, “ऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईई।। माआआआआआआअम्म्म्मममममममम। मे मर
गइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई। निकालो अपने लन्ड कों निकालो इसे। ”
फिन उसने मेरेपेर कंधे सें उतारे औऱ फैलाकर अपने दोनो साइड पऱ कर दिये
औऱ फिन अपना लन्ड मेरी योनि मे डाल दिया। उसने अपने लन्ड कों मेरी बुर मे
डाला तोँ लगा जैसे किसी नें गर्म लोहे कां सरिया मेरी छोटी सि बुर मे घुसेड
दिया होँ। अब तक मेरी बुर बिल्कुल खुश हौ चुकी थि औऱ ऐसालग रहा थां जैसे
किसी कुँवारी लड़की कि बुर हौ। मुझे दर्द भि होनेलगा मगर मुझेमजा भि
लेना थां। फिन थोड़ी देरबाद मुझको मजाआने लगा औऱ मे भि विशेष कों सलाह
देनेलगी।
मे बोलि, “छोड़ो मुझे जल्दकरो। ओह तुम् बहोत ज़ालिम होँ मगर बहोत हि
अच्छे भि। आआआआआआहह……….धीरे-धीरे करो औऱ प्लीज़ अपने लन्ड पर्र तेल(ऑयल) लगा
लो, ऐसे सूखा लन्ड अंदर जाने सें परेशानी होती हैं। आअहह ……….आहम्म……। तुमने
कहां सें सीखायह सभी बड़ामजा आँ रहा हैं औऱ ऐसामजा कभी भि नहींआया मुझे।
तुम् रियली एक्सपर्ट होँ चोदने मे। आआआआआआः………। धीरे-धीरे एक् हि दिन मे सभी
बर्बाद कर दोगे क्याँ मुझेघऱ भि जानां हैं। मेरे पति नें मुझेऐसे देख लिया
तौ गजब होँ जायेगा। मे उन्हे क्याँ जवाब दूँगी साले। मे तुम्हारे
स्वामीजी कि प्रिय भक्त हूं दोस्त कुछ तौ रहमकरो। फकमी स्लोली……। आअहह…….
गो इजी दोस्त………। प्लीज़, सच्ची कहरही हूं दर्द होँ रहा हैं। ………। टेकइट
ईज़ी………। दोस्त ईज़ी………… आहिस्ता करो नां हाईईईईईईईईई………….”मगर विशेष नें
अपनी स्पीड कम नहीं कि क्योकी अब मेरी योनि कुँवारी लड़की कि योनिबन चुकी
थि औऱ उसे बहोत मजा आँ रहा थां चोदने मे। वोँ दुगनी स्पीड सें मुझे चोदता
जारहा थां।
मे उससे मिन्नते कररही थि, “आअहह…… दोस्त आज मे बहोत टाइट हूं क्याँ वजह
हैं हाईईईईईईईईईईईईई ओईईईईईईई हां मुझे चोदो दोस्त औऱ चोदो आहह-आहह। ज़ोर सें करो
औऱ ज़ोर सें पूरा अन्दर डालो ऊऊउईईई करो औऱ ज़ोर सें। ”
विशेष रुकरुक कर धक्के मारने लगा। 15 मिनिट बाद मे झड़ गई मगर विशेष
कां लन्ड अभि भि खड़ा हि थां। वोँ पूरे ज़ोर सें हिलता रहा। 10 मिनिट बाद मेरी
बुर नें फिन पानी छोड़ दिया औऱ संग हि विशेष केँ लन्ड सें भि पानी निकलने
लगा। उसने अपनीपीठ कों कड़ा किया औऱ वीर्य कां फव्वारा छोड़ दिया।
मैनेउसे ज़ोर सें जकड़ लिया औऱ बोलि, “ऊऊओमाआ, इतनी गर्म वीर्य। इटइजसो
हॉटएंड वॉर्म……। आअहहअब तोँ रुकजाओ मेरी निकल चुकी हैं जानू। बहोत पॉवर
हैं जनाब मे ह्ह्हम्म्म्म ……”
विशेष लगभग 2 मिनिट तक मेरी बुर मे अपना वीर्य छोड़ता रहा। वोँ थक गय़ा औऱ
मेरेऊपर हि लेट गय़ा। थोड़ी देरबाद हम् उठे तोँ मैने देखा मेरी टाँगों पर्र
औऱ बिस्तर पर्र खूनलगा थां। विशेष नें मेरी बुर फाड़ दि थि।
अपनीऐसी हालतदेख केँ मे घबरा गई। तौ विशेष नें कहां, “कोईबात नहीं, कभी
कभीऐसा होता हैं। चलो मे चलता हूं स्वामीजी बुलारहे हैं। तुम् भि सजधजकर
होके आँ जानां। अच्छे सें धो लेनाइसे खून बहनाबंद होँ गय़ा हैं। ”
मे इतनाथक गई थि कि मे दोबारा सो गई,। दो घंटे केँ बाद मे उठी, ओर
बाथरूम गई तोँ मुझ सें चला नहींजा रहा थां। फिन भि मैने अपने आप् कों संभाला
ताकि किसी कों कोईशक नाँ हौ जाये। मे उठी औऱ बाथरूम मे गई। मेरी बुर कां
होंठफुल गय़ा थां। मुझसे ठीक सें चला नहींजा रहा थां। मे किसीतरह सें दीवार
कां सहारा लेकर बाथरूम तक पहुँची।
शावर चालू करके नहाने लग गयीँ,। बुर सें अभि तक वीर्य निकलरहा थां। मुझे नहीं
पता वोँ स्वामीजी कां थां याँ विशेष कां। मेरी आँखो सें आँसू बहनेलग गये पिछली
बातो कों याद करके। मैने बुर कों अच्छे सें साफ किया अंदर उंगली डाल-डाल केँ
स्वयं कों साफ करने केँ बाद मैने अपने कपड़े पहने औऱ बाहर् आँ गयीँ,।
बाहर् स्वामीजी अपनेसब शिष्यो केँ संग बैठे थें। जैसे हि मे बाहर् आई,
स्वामीजी मेरेपास आये। स्वामीजी मुझसे बड़े प्रेम सें बोले “पूजासफल
हुईँ, अभि केँ लिएदोष दूर होँ गय़ा हैं, तुम् चिंता मतकरो औऱ रोमत। तेराकाम
हौ गय़ा पुत्री। अगरकाम हौ जाऐ। तोँ एक् किलो लड्डू कों चडाने
अवश्य आनां। ”
स्वामीजी नें नम्रता सें मेरे आँसू पूछे। प्रसाद बोल केँ उन्होंने मेरे हाथो
मे कुछ मिठाइया दि औऱ कहां कि वोँ मे स्वयं भि खाऊ औऱ अपनेघऱ मे सबको
खिलाऊ। मे 5 बजेवहा सें निकल केँ वापस अपनेघऱ आँ गई, थि। पुरे वक्त मेरे
मन मे विचार आँ रहे थें। मे सोच नहींपा रही थि कि क्याँ येबात मे अपने
पति कों बताऊ कि नहीं। मे सोचने लगी कि अब सें मे उस स्वामी केँ पास नहीं
जाउंगी।
साम कों जब मेरे पति आये तोँ वोँ बहोत खुशलग रहे थें। उन्होने कहा कि उन्हे
किसी बड़ी कंपनी मे मैनेजर कि जॉबमिल गई, औऱ उनकी पगार 50000/- महीने
हैं। येबात सुन केँ मे हैरान रह गयीँ,। मैने सोचा कि ये तौ जादू हौ
गय़ा। अब मुझे स्वामीजी पे विश्वास होँ गय़ा। अगलेदिन सें मेरे पति रोज
जॉब पऱ जानेलग गये थें। मे स्वामीजी केँ पास गयीँ, औऱ उन्हे खुश खबरी
सुनाई।
उन्होने कहां, “ये मे जानता हि थां, एक् बारकल दोषहट गय़ा तौ सभीठीक हौ
हि जायेगा। अगर तुम् चाहती हौ कि यहऐसा हि चलतारहे तोँ तुम् अक्सर आतीरहा
करो। मे मन सें तुम्हारे लिए पूजन करता रहूँगा। ”
मे फिन सें स्वामीजी कि बातो मे आँ गयीँ,। अब स्वामीज़ हफ्ते मे 4 बार
मुझे पूजा केँ बहाने बुलाते औऱ उसीतरह केँ नाटक सें मुझे चोदते रहते थें। औऱ
मे उनकी बातो मे आती गयीँ,। घऱ मे सभीठीक होतेजा रहा थां इसलिये मुझेअब
फरक भि नहीं पड़ता। उधर अरुण, मेरे पति अपनीनई जॉब मे इतने मशगूल होँ
गये कि मुझ पे ज्यादा ध्यान भि नहीं देते। कभी-कभी मुझे विशेष भि चोदता
हैं जब स्वामीजी किसीकाम मे व्यस्त होते हैं। मेरी बुर कां भोंसड़ा बन
चुका हैं मगर स्वामीजी कों मेरी बुर बहोत पसन्द आती हैं।
खत्म
स्वामीजी से ठुकाई - arz ki zaroorat - Aage kya hua? Next part padhiye
nice kahani
Relavant source : click here