घर का मर्द - बाप के बगल में - Real Kahani Part 1
Update 01
"क्यूं री बिमला लड़की अच्छी नहींलगी क्याँ बिटवा कों"
"क्याँ कहूं भाभी बोलता हैं पहलेनया घऱ नाएगा। बोलता हैं घऱ मे जगा हि कहा हैं"
"बात तौ उसकीसही हैं। मगर लड़का जवान होँ गय़ा हैं। रोजसहर भि जाता हैं। देख तूँ भि समझदार हे। मर्द कों रात मे कुछ नहीं मिलेगा तो दिन मे कही औऱ मुंह मारते हे औऱ तेरा तौ बेटा भि उतना गबरू जवान हैं"
"औऱ क्याँ वोँ सरपंच कां बेटा पता नहीं रांड़ कों बिया लाया। उसकी माँ कि उम्र कि होगी रण्डी"
"मेरा बेटा ऐसा वैसा नहीं हैं समझदार हैं"
"हैं तौ मर्द हि। औऱ औरतों कां तौ तूझेपता हि हैं अच्छा मर्द देखा नहीं कि."
"देख बिमला रवि पूरादिन सहर मे काम करता हैं औऱ यहांआके भि खेतो मे देर तक काम करता हैं। तेरेघऱ कां तौ मर्दबन गय़ा हैं वोँ। इतनाकाम करेगा तौ थकान कितनी होती होगी"
"वोँ तो भाभीसही बोलरही होँ मगरअब क्याँ करू मे"
"बिमला मर्द कि दिनभर कि थकान केवल एक् महिला हि मिटा सकती हें। औऱ घऱ कि महिला तुँ हैं"
"भाभी बेटा हैं मेरा आप् क्याँ बोलरही हौ"
"बेटा हेतभी तौ बोलरही हूं देख.एक् महिला कां पहला फर्ज होता हैं अपनेघऱ केँ मर्द केँ संग सोने कां। चाहे वोँ बेटा पति होँ याँ ससुरजी"
"हा नहीं तोँ वोँ किसी राण्ड केँ चक्कर मे नां पड़जाय"
"वोँ तौ ठीक हैं मगर मे माँ हु उसकी मे केसे उसकेसंग हि"
"बिमला तूँ नं बड़ी भोलीहे। आज नहीं सोएगा। जब उसकी विवाह होगीतब तौ उसकेसंग सोना हि पड़ेगा तब भि माना करेगी क्याँ पगली"
सभी औरते हसनेलगी.
"भाभीतब तौ मात्र सोना होता हि बस एक् रात। वोँ सभीकहा होता हैं" बिमला कां मुंह लज्जा सें लाल होँ गय़ा थां अपने बेटे केँ बारे मे ऐसी बाते करतेहुए.
"तुझेही क्याँ लगताहे कि तेरा बेटा बस तेरेसंग एक् बंद कमरे मे बस सोया रहेगा पूरीरात। अरे पगलीकोई बेटा उसरात कों जैसे जाया नहीं करता। बेटे अपनी माँ कों उसरात तोड़ केँ रख देते हैं। इस सें अच्छा हि अभि सें उसकेसंग सोयाकर"
"भाभीऐसा बेटा सभी केँ नसीब मे कहा होता हैं जौ अभि सें पूराघऱ अपने कंधे पे चलारहा हैं। क्याँ बस उसके पेसो सें मजे हि करेगी। कुछ तेरा भि तो फर्ज बनता हैं"
बिमला
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बिमला एक् मध्यम हाइट कि महिला थि उसके स्तनों कां कोई जवाब नं थां छोटे छोटेमगर हमेशा उसके सीने सें उठेहुए रहते थें.इतना कसाव थां कि उसे ब्रा कि कोई जरूरत नहीं पड़ती थि। खेतो मे कामदिन रातकाम करने सें उसके पूरे शरीर पे कोई चर्बी नहीं थि। बाहर् सें बिमला कां जिस्म सावला दिखता थां मगरजब वोँ अपने सीने सें ब्लाउस औऱ नितंभ सें अपना पेटीकोट उतार दिया करतीतब पता चलता थां कि बिमला कितनी गोरीरही होगी एक् जमाने मे। उसके छुपेहुए अंग जैसे कि चूचे औऱ कमर सें लेके पैरो तक सभीदूध जैसा गोरा थां.
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Update 02
बिमला कों भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे अहसास होता हैं कि इसका बेटा कितना अकेला हैं बिमला अपनामन मना लेती हैं बेटे कों यौनसुख देगीमगर केसेउसे नहींपता थां। बिमला एक् देसी स्त्री थि औऱ उस केँ लिए उसके बेटे केँ संग सोना आसान नहि होने वाला थां मगरफिन भि वोँ एक् रात कों अपनी सारी लज्जा हया पिछे छोड़ केँ रात कों सोते वक्त अपने बेटे केँ पास जानेलगी.
बिमला कां घऱ कच्चा थां औऱ घऱ मे केवलतीन कमरे थें आगे आंगनफिन एक् रूमजहा बिमला औऱ उसका मर्द सोते थें औऱ फिन किचनघऱ.
वीर आंगन मे सोयाहुआ थां। बिमला अपनी खटिया इसकेबगल मे लगा देती हैं। उसका मर्द अंदरसो चुका थां.औऱ बिमला कां दिल जोरो सें धड़करहा थां कि वीर सें केसे क्याँ बातकरे.
"अरेमाई तुँ यहां पिताजी केँ संग नहीं सोएगी क्याँ" वीर नें अपनी माँ कों खड़िया लातेदेख कहा.
"बेटा वोँ गर्मी होँ रही थि तौ सोचा तेरेसंग सोजाऊ यहां अच्छी हवाचल रहीहे" बिमला कि नज़रे बेटे कि नंगे शरीर पऱ जाकेरुक गए.वीर नें बस लुंगी पहनीहुए थि.औऱ उसका शरीर खेतो मे काम करने सें किसी पहलवान जैसा मजबूत दिखरहा थां। बिमला कों यकीन नहीं होँ रहा थां कि वोँ उसके बेटे कों देख केँ हि गर्म हौ चुकी थि.
कुछदेर बाद दोनोसो जाते हैं। दोनोअलग अलग खटिया पे थें औऱ बिमला कि कोई हिम्मत नहि होती कि क्याँ बातकरे औऱ दोनोसो जाते हैं.
बिमला रोज कि तरह अपनी सारी कों निकल केँ रख दि औऱ बस पेटीकोट ब्लाउज मे लेट गई.उसकी हुस्न पुरुतरह सें उभारमार रही थि। बिमला कों ऐसी हालत मे देखकोई भि उसेपटक केँ चोद देता.
जब सुभह बिमला कि नींद खुली वोँ उसकेहोस उड़ गई.उसे अपनी आखों पे यकीन नहीं हुआ.उसके ब्लाउज केँ बटन खुलेहुए थें औऱ उसके दोनो मम्मों बाहर् निकल गई थें। वोँ अपने बेटे कि औऱ देख केँ लज्जा सें पानी पानी होँ गई। उसे यकीन नहीं हौ रहा थां कि उसका बेटा एक् रात भि संभाल नहीं पाया स्वयं कों। वोँ आगे क्याँ होगायह सोच केँ हि पानी छोड़ दि। औऱ अपने ब्लाउस केँ बटन लगाने लगी.
बिमला खटिया सें उठी औऱ अपने बेटे कों ध्यान सें देखने लगी तोँ उसकेहोस उड़ गई.वीर कां लिंग पूरीतरह सें तनाहुआ थां औऱ उसकी लुंगी मे तम्बू बनाहुआ थां बिमला नें इतना बड़ा लिंग कां उभार पहलीबार देखा थां.उसकी रूहकाप गई सोच केँ कि यह अंदर जायेगा तौ उसका क्याँ होगा.
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Update 03
बिमला कि आखेंफटी कि फटीरह गई थि अपने हि बेटे केँ लिंग कां उभारदेख केँ.वोँ नहाने तौ चली गई मगर उसके अपने आप् हि उसकी योनि कों सहलाने लगे.वोँ बहुतदेर तक अपनी लम्बे लम्बे झाटो वाली योनि केँ संग खेलती रही.
वीर भि अपनेकाम केँ लिएसहर निकल गय़ा। रविमन आज बिलकुल भि काम मे नहींलग रहा थां उसकेआगे बारबार उसकी माँ केँ बूब्ज़ आँ रहे थें। कभी वोँ स्वयं कों कोसता गाली देता कि उसने कितना बड़ापाप किया हैं.औऱ अगले हि समय उसका लिंग खड़ा हौ जाता अपनी मम्मी केँ लिए। औऱ वोँ स्वयं कों कहता उसने केवल ब्लाउज क्यूं खोला उसकी माँ इतनी गहरी नींद मे थि कि पूरा ब्लाउस खुलने पे भि नहींउठी। नाँ सुभहउसे कुछकहा। उसे तोँ उन्हे चूसना चाइए थां.अब पता नहींफिन सें कब मोका मिलेगा.वीर अपने मोबाइल मे उसकी मम्मी कि तस्वीर कों झूमकर केँ उसके शरीर कों गौर सें देखने लगा.
"माई तुम् इतनी हसीन इतनी हसीन हौ यह मुझे क्याँ होँ जाता हैं तुम कोदेख केँ."
वीर कां मनघूम रहा थां औऱ काम तौ उस सें आज हौ हि नहींरहा थां.
मैनेजर – वीर क्याँ तबियत तो ठीक हें नाँ.
वीर – जीजी। मैडम वोँ सभीकुछ नहीं.
अनीता जी – तुम् मेरी कैबिन मे आओ.
वीर मिस अनिता कि केबिन मे गय़ा। अनिता एक् नई जमाने कि खुले विचार रखने वालीऔरत थां.अनिता औऱ बिमला कि उम्र मे कोई अंतर नहीं थां मगर अनीता एक् मॉर्डन महिला थि औऱ बिमला एक् देसी महिला थि.
अनीता जी – वीरअब कहो क्याँ बात हैं बेटा। देखरही हुआजमन नहींलग रहाकाम मे.
अनीता एक् बहुत हसीन स्त्री थि उसकेलिए कोई अपनीजान भि दे सकता थां। औऱ अनीता हि थि जिस कि वजह सें स्टाफ कां हर मर्द रोजाना सुभह जल्द दफ़्तर आता थां औऱ देर तक काम भि करता थां। अनिता कों अच्छे सें आता थां मर्दों सें काम केसे लेना हैं.
वीर – मैमकुछ नहींबस अच्छा नहींलग रहा थां.
अनिता अपनेबाल कों अदा केँ संग मस्ती भरी मुस्कान केँ संग थोडा सही करतेहुए कहती हैं.
अनिता जी – मे कैसी लगतीहु तुम्हे.
वीर एक् दमदंग रह गय़ा.
"अच्छी मैडम आप् सभी कां ख्याल रखती होँ काम मे सपोर्ट भि करती हौ"
"अरे बुधु मे वैसे नहींपूछ रही मुझे देखो" मैडम अपना सीना थोडा दिखाते हुए बोलि.
वीरकुछ नहीं बोला.
"मेनेदेख लिया थां तुम् किसी स्त्री कि फोटो कों जब सें देखरहे थें। होताहे तुम्हारी उम्र मे यहसभी। मगर तुम् अपनेकाम पे फोकसकरो यहां। औऱ देखने केँ लिए यहां भि तौ."
वीर – आप् गलतसमझ रही होँ मैम वैसाकुछ नहीं.
अनिता फट सें वीर कां मोबाइल चीज लेती हैं औऱ उसकालोक भि खुला थां.औऱ अभि भि वोँ फोटो खुलीहुए थि। फोटो कों पूरा देखने सें अनीता समझ गई कि यहवीर कि माँ हैं.अनिता नें गहरी सासू ली.कुछ देरसोच केँ बोलि.
"Veer You Have Feelings for your mummi" यहसुन केँ वीर पसीना पसीना हौ गय़ा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई होँ। उसेलगा जैसेयह सभी उसका बुरा सपनाहे केसेकोई इतना आसानी सें ऐसा प्रश्न पूछ सकता थां.
"You wanted too have sex with her haan haan poor boy" अनिता मुस्करा रही थि.जैसे यहकोई आमबात होँ.
वीर – मैम आप् क्याँ बोलरही होँ.
अनिता जी – Wow she has sundar Ones। अच्छा तभी तुम्हारा यहहाल हुआ हैं.
औऱ अनीता नें मोबाइल वीर कि औऱ किया.उस मे बिमला कि खुले ब्लाउज वाली तस्वीर थि जोँ वीर नें कलरात खींची थि।
वीर अपनी गलती पे पछतारहा थां कि वोँ केसेभूल गय़ा वोँ तस्वीर कों छुपाना.वीर कां मुंह लज्जा सें लाल औऱ पूरा जिस्म डर सें पसीना पसीना होँ चुका थां.उसकी जैसे सासू हि रुक गई थि.
अनीता – बेटा डरोमत मे किसी कों नहि बोलूंगी तुम् मुझ सें खुल केँ बातकर सकते हौ मे शायद तुम्हारी ममद भि कर सकती हूं.
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