मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta - Latest Update 1
मेरा बेटा चाल चालबाज़
( introduction )
दिलीप पाटेल - 18 साल - हैंडसम बॉडी भि कमाल कि हैं अपनी लाइफ मे मस्त रेहता हैं औऱ अपनीमा सें बहुत प्रेम करता हैं
मा - सारिका पाटेल - 41 साल - बहुत हि हसीनभरा जिस्म उपर सें नीचे तक कयामत एक् संस्कारी स्त्री दिलीप उसकीजान हैं घऱ कां एक् लौटा लरका जोँ हैं
दिलीप केँ बापू जगदीश सेहर मे काम करते हैं साल मे एक् याँ दोबार आते हैं दिलीप कि बहन भि हैं उषा सादी हौ गई हैं एक् बच्चे कि मा हैं
( नोट ) कथामा बेटे कि हैं तौ स्टोरी पूरी दोनों पे फोकस होगी
हाकुछ किरदार आयेगे जायेंगे मगर उनकारोल स्पॉट कां होगा
बाकी update रात 9 सें 10 केँ बीचदे दूंगा
उमीद करताहु किस्सा आप् लोगो कों मनपसंद आये
नईकथा केँ लिए शुभकामनाएं। किस्सा मम्मी बेटे केँ ऊपर केंद्रित होगी तौ औऱ मजेदार होगी.
For mai sirf ma beta ekela Acca nehi lagtha he .aur 2 ek admi hnaa chaiye ,then kahani mai Moja atha he ,bcz incest mai Dora prone iss voy hnaa chaiye .
मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta – New Episode
chapter 1
किस्सा एक् गाव सें सुरु होती हैं चारों तरफहरे भरेखेत औऱ बीच मे एक् हसीन सां गावगाव वालो कि जीवन कैसी होती हैं आप् कों पता हि होगा खेतीगाय बकरीयह हि हैं जिनकी वजह सें घऱ चलता हैं
दूसरी अपनेघऱ परिवार कों छोर सेहर मे जाके कमाना जोकि बहुतदुख दाय होतामगर कियाकरे घऱ चलाने केँ लिये जानां परता जिसके पति सेहर जाकेकाम करते हैं उन्होंने कई महीने सालसाल पति केँ बगैर रेहना परता हैं सभी सेहना परता हैं गाव मे चैन होता हैं मगरगाव वालो कि जीवन आसान नहीं होती
सुभह होने वाली थि थोरा थोरा अंधेरा थां गाव मे बाथरूम गिने चुने लोगो केँ पास हि होता हैं जौ अमीर हैं नहीं तोँ अधिकतर गाव कि लरकी याँ औरते सुभह होने सें पेहले जब थोरा अंधेरा होता हैं बाहर् हल्का होने जाते हैं
सारिका भि उठकर हल्का होने अपनेघऱ केँ पीछे थोरीदूर खेतो केँ पार झारियो मे एक् स्थान देखबैठ जाती हैं सारिका कि गांड बहुतबरी बाहर् निकली हुईँ थि कोई भि एक् बारदेख लें तौ बिनाकुछ किये हि उसका पानी निकल जाये
सारिका धीरे-धीरे बैठ हल्का कररही थि औऱ उसकीबरी बाहर् निकली साफदूध जैसी गांड कयामत लगरही थि सारिका घऱ सें कोईकाम होता हैं तब हि बाहर् निकलती हैं नहीं तौ घऱ मे हि रेहती हैं
मगरजब घऱ सें बाहर् निकलती हैं तौ लरके हौ याँ बूढ़े सब कि नजर सारिका केँ दो चीजों मे हि अधिक जाती हैं पेहला आगेबरे बरे चुचे पे जौ सारी केँ अंदर होने केँ बाद भि चुचे केँ उभार बाहर् निकले साफ दिखाई देते हैं कोई भि यहदेख बता सकता हैं बहुतबरे टाइट खरबुज़ हैं रस सें भरे
दूसरी सारिका कि बाहर् निकली हुई बरी गांड सारिका केँ चलने पे दोनों गांडआपस सें टकराते रहते हैं जोँ लरके याँ बूढ़े देखकर हि उनका पानी निकल जाता हैं
सारिका कि मोटीकमर लेकर चर्मि बिल्कुल भि नहीं गेहरि धोरीअगर हवा सें याँ गलती सें सारीकमर सें खिसक जाये तोँ एक् कामुक् सें भरा नजारा सामने आता हैं जिसेदेख किसी कां भि दिल करेगा पकर केँ ढोरीचूम चूमकर लालकर दे
सारिका हुस्न बॉडीसभी मे कयामत थि जिसका दीवाना उसका अपना बेटा भि थां दिलीप
सारिका सोच करने केँ बादआके नहाती हैं औऱ कमरे मे जाके तैयार होने लगती हैं
वही हमारा हीरो दिलीप धीरे-धीरे नींद लेने केँ लगा हुवा थां औऱ ख्वाब मे हि मा कि चुदाई कियेजा रहा थां कियाकरे बेचारा ख्वाब मे हि मा केँ संगकुछ भि कर सकता हैं रियल मे होने सें रहा बेचरा दिलीप भि बात अच्छे सें जानता हैं
दिलीप ख्वाब मे सारिका कों घोरीबना केँ पेलेजा रहा थां अहहमा कियागरम चुत हैं आपकी औऱ आपके बाहर् निकले बरे गांडअहह आनंद आँ रहा हैं मेरा लन्ड आपकीचुत कि गर्मी सि जलाजा रहा हैं
सारिका अहहमा सिसकिया लेते हुवेअहह बेटा बहुत आनंद आँ रहा हैं औऱ जोरजोर सें चोद अपनीमा कों मे झरने वालीहु दिलीप जोरजोर सें धक्के मारते हुवे मेरा भि होने वाला हैं मा दिलीप एक् जोर कां धक्का मार अपना पानी अपनीमा कि चुत मे छोर देता हैं
दिलीप कि नींदखुल जाती हैं औऱ उसे गिला गिला जांघों पे मेहसूस होता हैं दिलीप अपनासर पकरकर
दिलीप - अरे नहीं दोस्त फिन सें नहींऐसे तौ साला मे मर जाउंगा
दिलीप खरा होते हुवे - हद हैं सालाजिस दिनमा कि चुत देखी हैं सालाकई बार ख्वाब मे हि मा कि चुदाई करने लगताहु फिन किया ड्रीम्स मे हि निकल जाता हैं
दिलीप गीली चड्डी निकाल बेड केँ नीचेरख देता हैं
दिलीप अपनीमा केँ बारे मे सोचते हुवे
दिलीप - मेरीमा किया कमाल हैं सुंदर हॉटभरा शरीरइस उमर मे भि स्लिम हैं जब भि उन्हें देखता हु साला मेरा लन्ड फटने लगता हैं बापू कि भाग्य भि कमाल हैं मा केँ कितने मजे लिये होगेमगर उनकी क़िस्मत खराब भि हैं मा कों छोर सेहर रेहते हैं खैर उनको भि दोष नहींदे सकता हमारे लिये हि तौ गये हैं औऱ मा बेचारी अकेली अपनी मस्त जवानी कों बर्बाद कियेजा रहीइस बेटे पे भि ध्यान दे देती तौ मेरा भि भला उनका भि भला हौ जाता पर्र ऐसा नहीं हौ सकताकाश एक् मोक्का मिल जायेमा कों चोदने कां तौ मज़ा हि आँ जाये
तभी सारिका दरवाजे पे आते हुवे - दिलीप बेटा उठजा सुभह होँ गई हैं
दिलीप बाहर् आकेमा कों देखता हैं सारिका हमेसा कि तरह बवाललग रही थि दिलीप सारिका कों देखता हि रेह जाता हैं दिलीप उपर सें नीचे तक हरअंग कों देख देता हैं अंदर कैसा होगासभी अंदर मे
सारिका दिलीप सें - अरेफिन कहाखो गय़ा हा
दिलीप होस मे आते हुवे सारिका कों देख - कही नहींमा बस आप् कि हुस्न मे खो गय़ा थां
सारिका जोरजोर सें हस्ते हुवे - तु भि नाँ बेटा रोजयही केहता कभीअलग तरीके सें भि मेरी तारीफ कर दियाकर
दिलीप - मन मे अलग तरीके सें तारीफ कर तौ दुमगर बेटा मा कों हसीन हि बोल सकता हैं उसकेआगे स्टॉप लग जाता हैं
दिलीप सारिका कों देख - मा नहींकर सकता
सारिका दिलीप कि पासआके - कियु नहींकर सकता
दिलीप सारिका कि आखो मे देख - कां कियुंकी आप् मेरीमा होँ यही एक् बरा रीजन हैं नहीं तोँ आपको किया लगता हैं मे हमेसा आप् कों हसीन हि कियु केहता हु
सारिका दिलीप कों गौर सें देखती हैं - ठीक हैं समझ गई अबजानहा लेँ
दिलीप जाते हुवे - ठीक हैं मा मे जारहा हु
दिलीप घऱ मे पीछे हल्का होनेजा रहा थां
दिलीप - चलते हुवेबस आगे उन्होंने कुछ नहींकहा बातखतम कर दि
वही सारिका मन मे - आखिर औऱ किसतरह सें मेरा बेटा मेरी तारीफ कर सकता हैं अरे मे यह कियासोच रहीहु चल केँ खानां बना लेतीहु
सारिका खानां बनाने मे लग जाती हैं
दिलीप झारियो मे हल्का होनेबैठ जाता हैं औऱ फिनमा केँ बारे मे सोचने लगता हैं केसेमा कों चोदा जायेकोई तरीका कोई मार्ग तोँ होगा हि दिलीप मा केँ बारे मे सोचरहा थां तोँ उसका लन्ड फिनखरा हौ जाता हैं
दिलीप यहदेख - यह कमीना अलगमा केँ मारे मे सोचा नहीं कि खरा हौ जाता हैं इसे केसे समझाऊ मा कि बिल मे यह नहींघुस सकतामगर साला समझता हि नहीं हैं औऱ मुझे परेसान करते रेहता हैं
दिलीप हल्का होने केँ बादघऱ केँ अंदरआता हैं तोँ देखता हैं सारिका खानां बनारही थि दिलीप सारिका कों उपर सें नीचे अच्छे सें देखता हैं फिन नहाने चला जाता हैं नहाने केँ बाद तैयार होँ जाता हैं
खानां तैयार थां तौ सारिका खानां निकाल दिलीप कों आवाज़ देती हैं
सारिका - बेटा आजा खानां खा लेँ लगा दिया हैं मेने
दिलीप कमरे सें बाहर् निकलते हुवे सारिका कों देख
दिलीप - आँ गय़ा माचलो खानां खाते हैं
दोनों मा बेटेबैठ जाते हैं
दिलीप खानां खा तोँ रहा थां मगर तिरछी नजर सें मा केँ गेहरि ढोरी कों देखेजा रहा थां
दिलीप ढोरी कों देखमन मे - मा कि ढोरी कितनी गेहरि हैं जब भि देखता हुदिल करता हैं मा कों खाट मे लेता केँ उनकी गेहरि ढोरी मे रसगुले कां रसदाल जिब सें चाटु कितना आनंद आयेगा नाँ दोस्त सोचकर हि मेराखरा होँ गय़ा पिताजी केसेमा कों चोदते होगे याँ बापूमा सें मोबाइल पे गंदी बाते करते हैं कियामा रात कों चुत मे उंगली करती होगी मेने इतना ध्यान नहीं दियामगर अबरात कों देख्ना पड़ेगा
तभी सारिका दिलीप कों देखते हुवे - कहाखो गय़ा खाने पे ध्यान सें
दिलीप होस मे आते हुवे सारिका कों देख - जीमा
सारिका खानां खाते हुवे दिलीप कों देख - बेटा तेरे पिताजी बाहर् रेहकर काम करते हैं जबतु 12 साल कां तब सें मगर किया तुभी पिताजी कि तरह सेहर जायेगा पैसे कमाने अपनीमा कों छोर सादी होगी तौ पत्नि कों छोरकर
दिलीप सारिका कि आखो मे देख - मे अपनी हसीनमा कों छोर जाने कि सोच नहीं सकताकुछ करुगा ताकियही रेहकर पैसेकमा केँ आपका अच्छे सें ख्याल रखसकु आपकोखुश रखसकु
सारिका दिलीप कों देख इमोसनल होते हुवे - सचकेह रहा हैं नाँ
दिलीप - मुस्कुराते हुवे सच्ची मगर आपको मुझे किस्सी देनी होगी
सारिका - मुस्कुराते हुवे देती तोँ हुरोज
दिलीप - हस्ते हुवेहा मगर एक् बार देती हैं मुझे 5 बार चाहिये
सारिका - हस्ते हुवेठीक हैं 5 बार मिलेगी किस्सी
( गालो पे किस करने कि बात हौ रही हैं )
खानां खाने केँ बाद दिलीप बाहर् अपने दोस्तो सें मिलने निकल परता हैं दिलीप चलतेजा रहा थां संग मे मा कों केसे चोदा जाये सोचेजा रहा थां यहरोज कां थां दिलीप रोज सोचता रेहता हैं केसे कियाकरे कि मा चोदने कों मिलेमगर कोई उपाय मार्ग मिल नहींरहा थां
दिलीप रास्ते सें होते हुवेजा रहा थां सामने रोड साइड थोरा अंदर मे एक् पीपल केँ पैर केँ नीचे बाबा बैठा हुवा थां जिसकी हालात खराब थि फटे हुवे कपड़े पेहने हुवे थें दिलीप बाबा कों देखता हैं औऱ पता नहीं कियु दिलीप जाकर बाबा केँ पासबैठ जाता हैं आसपास कोई नहीं थां
दिलीप बाबा सें थोरी दूरी पे बैठा हुवा थां औऱ बाबा कों बारबार देखेजा रहा थां बाबा बहुत भूखा थां यहसाफ दिखरहा थां
बाबा दिलीप कों देखते हुवे - ऐसे कियादेख रहे हौ इस गरीब भूखे बाबा कों कियु मे गंदा दिखने मे लगरहा हुइस लिये
दिलीप बाबा कि बातसुन बाबा कों देख - अरे नहीं बाबा गरीब तौ मे भि हुबस आप् सें थोरी अच्छी हालत हैं बस
बाबा दिलीप कों देख मुस्कुराते हुवे - अच्छा ऐसा हैं कियाअगर होँ सके तौ इस गरीब कों कुछ खिला पिलादो
दिलीप बाबा कि बातसुन अपने पॉकेट कों चेक करता हैं तोँ 20 रुपये पॉकेट मे थें
दिलीप बाबा कों देख - बाबा मेरेपास 20 रुपये हैं बोलिये किया खानां चाहेंगे इस 20 रुपये मे जोँ आयेगा आप् केँ लियेला दुगा
बाबा दिलीप कों देखते हुवे - समोसे मिल जाता खाने कों तोँ आनंद आँ जाता
दिलीप - मुस्कुराते हुवेठीक हैं मगर आँ जाताहु आप् 10 मिनट इंतजार कीजिये
दिलीप भागते हुवे समोसे लेने केँ लियेचला जाता हैं
बाबा दिलीप कों जातेदेख - कितना अच्छा लरका हैं दिल मे दयाभाव भि हैं लोगो केँ लियेमगर दिल मे किसी केँ पाने कि चाहत भि हैं जिसे वोँ पा नहीं सकता बेचारा ऐसे हि रहा तौ उसकीऐसी हालत होगी कि सादी केँ बाद अपनी पत्नि कों खुश भि नहींरख पायेगा 2 मिनट केँ अंदर हि ठंडा पर्र जायेगा देखते हैं क़िस्मत नें उसे मुझसे मिलाया हैं तोँ कुछ होँ जायेभला उसका
दिलीप भागते हुवे जाता हैं औऱ गरम समोसा पैक करवा केँ लाता हैं औऱ बाबा कों दे देता हैं फिनपास मे बैठ जाता हैं
बाबा समोसा लेते हुवे दिलीप कों देख - बेटा तुम् भि लेलो
दिलीप बाबा कों देख - नहीं बाबा आप् खाइये मे तोँ खाता रेहता हु आप् कों भूख नहीं हैं खा लीजिये
बाबा दिलीप कों देखते हुवे मुस्कुरा केँ - ठीक हैं जैसा तुम् बोलो
बाबा समोसे खाने लगते हैं औऱ दिलीप बाबा कों देखता रेहता हैं
दिलीप बाबा कों देख - बाबा मे घऱजारहा हु आप् आप् अपना ध्यान रखना
बाबा दिलीप कों देख मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं बेटा जा समोसे केँ लिये सुक्रिया
दिलीप खरा होते हुवे बाबा कों देख - अरे नहीं बाबा इसकी जरूरत नहीं हैं जरूरत मंद लोगो कि सहायता करनी चाहिए उसी कों इंसानियत केहते हैं अच्छा अब मे चलताहु दिलीप दोस्तो सें मिलने निकल जाता हैं
बाबा दिलीप कों जातेदेख - दिल मे किसी केँ पाने कि चाहत हैं मगरउसी दिल मे इंसानियत भि हैं मगरबरा दिलचप् बच्चा हैं
( दोपहर 1 बजे )
दिलीप अपने दोस्तो सें मिलकर घऱआता तौ दिलीप अपनीमा केँ कमरे मे जाता हैं अंदर सारिका धीरे-धीरे सोरही होती हैं मगर दिलीप अंदर नहीं जाता औऱ अपने कमरे मे आकेखाट पे लेतकर फिन सोचना सुरुकर देता हैं
दिलीप मन मे - मा कों सोचसोच कर उन्हें देखदेख करकईबार मुठमार देताहु तौ कईबार ड्रीम्स मे हि निकल जाता हैं मुझेसाफ फिल हौ रहा हैं मे कमजोर होताजा रहाहु दूसरी मे लन्ड कों केसे हि छुटाहु लगता हैं जैसे जल्द हि पानी निकल जायेगा ऐसे तौ अगरमान लिया मुझेपता हैं ऐसा नहीं होगामगर मान देते हैं मानने मे किया जाता हैं हा तोँ मान लिया मुझेमा कि चुत मारने कों मिल भि गई तौ मुझे नहीं लगता मे 1 मिनट भि ठीक पाऊगा ऐसे मे मा केँ सामने मेरी बेज़ती हौ जाइयेगी उपर सें फिन मुझेमा कि चुत नहीं मिलेगी कियुंकी मा कों जब मज़ा आयेगा हि नहीं तौ कियु मेरा लन्ड लेगीखैर यह तौ मे सोचरहा हु मेरा दिमाग़ सोचरहा हैं मगरसच यह हैं ऐसा नहीं होगा साला कियु बेटा मा कि चुदाई नहींकर सकता
दिलीप सोचते सोचते सो जाता हैं
शाम कों उठ दिलीप बाहर् फिन दोस्तो सें मिलने जाता हैं बाते करता हैं औऱ घऱ आँ जाता हैं
दिलीप देखता हैं उसकीमा बैठ बर्तन साफकर रही हैं मगर सारिका केँ सीने सें सारी नीचे गिरा हुवा थां तौ दोनों बरे उजले चुचेआधे झूलते हुवे ब्लाउस मे कैद दिलीप कों साफ दिखाई पर्र जाते हैं सारिका कों पता नहीं थां दिलीप उसके सामने खरा होकर उसकी चुचे कां दिलदार कररहा हैं मजे लें रहा हैं सारिका कां ध्यान बर्तन साफ करने मे थां
1
दिलीप अपनी कां केँ बरे टाइट चुचे कों देखता हैं तोँ उसका लन्ड फिन सें खरा होँ जाता हैं दिलीप नीचेनजर करता हैं तोँ दिलीप कों अपनीमा कि मोटी जांघे दिखाई देती हैं सारिका कां हरअंग दूध जैसा उजला थां दिलीप केँ गले सूखने लगते हैं सासेतेज होने लगती हैं लन्ड फटने जैसा होने लगता हैं लन्ड सें पानी कां एक् बूंद निकल परता हैं
सारिका थि हि कयामत हर स्थान सें पूरे कपरो मे भि सारिका कों देख किसी कां पानी निकल जाये औऱ यहा तोँ सारिका टांगे फैलाये झुकी हुई थि सीन बहुत कामुक् थां किसी केँ लिये भि औऱ एक् बेटे केँ लिये अपनीमा कों ऐसे देख्ना सभी सें जायदा कामुक् थां
तभी सारिका कों एहसास होता हैं कोई हैं सारिका अपनीनजर उठा केँ सामने देखती हैं तौ दिलीप जल्दी कमरे मे तरफ निकलपरा थां दिलीप कभी भि अपनीमा कों सक नहीं होने दिया कि उसका बेटा उसे गंदीनजर सें देखता हैं दिलीप हमेसा चौकना रेगता हैं
सारिका अपने बेटे कों देख पेहले अपने सीने पे सारीरख अपने दोनों बरे खरबूज हौ धकती हैं फिन बर्तन साफ करने लगती हैं
( रात 9 बजे )
खानां खाने केँ बाद सारिका दिलीप दोनों आगन मे बैठ बातेकर रहे होते हैं दिलीप सारिका कों देख
दिलीप - मा आपको बापू कि याद बहुतआती होगी नां
अपने बेटे कि बातसुन सारिका दिलीप कों देखती हैं औऱ फिन अपनेमन मे - कोन पत्नि अपने पति कों याद नहीं करेगी उनको बहुतयाद करतीहु मगर मे समझ सकतीहु उनकी मजबूरी हैं मगर उनके बिना मुझे अपने खोवाइस कों दबा केँ जीना पऱ रहा हैं अब तौ आदतलगा लिया हैं उनके बिनामगर रात कों कभीकभी मुझे उनकी बहुतयाद आती हैं औऱ ( मेरी वोँ भि उनको बहुतयाद करती हैं ) मगरअब लगता हैं मुझे वोँ सभी नहींमिल सकताउमर केँ संग वोँ सभी नहींकर पाते हैं आते हैं तोँ कभीकभी कर लेते हैं मगर ज़्यादा देरठीक नहीं पाते मेरी भाग्य मे सायदऐसे हि जीना लिखा हैं मुझे लगता हैं अब मुझेभूल हि जानां चाहिये कि ( मेरीबिल मे कभी उनका साप् जायेगा ) पिछली बारआये थें तौ एक् महीने रहे थें उस एक् महीने मे उन्होंने 6 बार हि किया वोँ भि मेरे केहने पे उस मे भि मुझे मेरीबिल कों सांती नहीं मिलती अब तौ मुझेबदन कां सुख मिलने सें रहा
दिलीप अपनीमा कों सोच मे डूबादेख समझ जाता हैं कि उसकीमा बापू कों बहुतयाद करती हैं दिलीप कों यह भि अच्छे सें पता थां उसकीमा सरीर केँ सुख केँ लियेतरप रही हैं दिलीप कों अपनीमा केँ लिये बहुत बुरा लगता हैं
दिलीप मन मे - अपनी मुठीकस केँ मुझे आपकी चुदाई करनी थि केसे भि मगरअब मुझे आप् कों पूरीतरह सें पाना हैं औऱ आप् कों हर खुशी देनी हैं अब तक मे हारमान कर सचाई कों कों समझचल रहा थां मगरअब ऐसा नहीं होगाअब मुझसे जौ होगा करुगा आपको पाने केँ लियेहार नहीं मानुगा रिजल्ट एंड मे जौ निकले
दिलीप होस मे आते हुवे सारिका कों देख - मा
दिलीप कि आवाज़ सुन सारिका होस मे आती हैं
सारिका दिलीप कों देख - माफ करना बेटा मे.
दिलीप - मुझेपता हैं मा आप् पिताजी कों मिस करती हैं
सारिका - मुस्कुराते हुवेहा करतीहु मगर तुम् मेरेसंग मेरेआखो केँ सामने हौ तौ यही मेरे लिये बहुत हैं
दिलीप - मुस्कुराते हुवेहा मे आपका लाडला जौ हु
सारिका आगेझुक दिलीप केँ गालो केँ दोनों साइड 6 बारकिस करने केँ बाद दिलीप कों देख
सारिका - सहीकहा तुम् मेरे प्यारे लाल हौ अबचलो सोते हैं
दिलीप - मुस्कुराते हुवेआज तौ अच्छी नींद आयेगी 6 मीठी किस्सी जौ मिली हैं
सारिका - हस्ते हुवे शैतान कही कां
दोनों अपने कमरे मे आकेलेत जाते हैं
दिलीप बैड मे लेत अपनेमन मे - मेनेठान तोँ लियामा कों पाना हैं मगरमा कों पाना आसान नहीं औऱ अगर भाग्य नें संग दिया भि तोँ सबसेबरी प्रोबल मे अंदर हैं मे स्वयं मा कों किया किसी कों खुश नहींकर पाऊगा दूसरी मेरा लन्ड कों मेरे दोस्तो सें भि छोटा हैं
दिलीप कां सर दर्द करने लगता हैं यहसोच कर
दिलीप - टेंसन मे कियाकरू ऐसे हौ मे कभी भि अपनीमा कों सरीर कां सुख औऱ जौ प्रेम खुशी देना चाहता हु वोँ भि नहींदे पाऊगा यहा तक कि मेरी लाइफ बर्बाद हैं
दिलीप कों यहसोच बहुत टेंसन हौ रहा थां बेचारा सोचते सोचते सो जाता हैं
अगलेदिन सुभह 10 बजे
दिलीप खानां पीना खाने केँ बादफिन निकल परता हैं दोस्तो केँ पास दिलीप रास्ते सें होते हुवेजा रहा थां तभी दिलीप कि नजरफिन पीपल केँ पैर केँ नीचे जाती हैं तौ देखता हैं बाबावही पे बैठे हुवे हैं
दिलीप मन - मे बाबा अभि भि यही हैं गये नहीं कियारात कों यही सोये हुवे थें खैर कों जोँ जाके स्वयं पूछ लेताहु
बाबा कि नजर दिलीप पे जाती हैं दिलीप कों अपनीतरफ आतादेख बाबा मुस्कुराते हुवेमन मे - क़िस्मत फिन दुबारा हमे मिलवा रही हैं बेटा याँ कहु क़िस्मत तुम को मेरेपास भेजरहा हैं याँ भाग्य मुझे तेरेपास भेजा हैं जौ भि हौ देखते हैं भाग्य तेरी लाइफ चेंजकर पाती हैं याँ नहीं भाग्य मे किसी केँ जोँ लिखा होता हैं जोँ उसेमिल हि जाता हैं मगर एक् सचयह भि हैं क़िस्मत केँ भरोसे जोँ बैठा रेहता हैं उसे जौ मिलने वाला होता हैं वोँ भि नहीं मिलता इंसान अपनी भाग्य बदल सकता हैं बस जिसेकुछ पाने कि खोवाईस हौ उसे पाने कि कोसिस नहीं करेगा तोँ केसेउसे कुछ मिलेगा
आज केँ लिये इतना हि
मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta – New Episode
( chapter 2 )
दिलीप बाबा केँ पास जाकेबैठ जाता हैं औऱ बाबा कों देख - बाबा लगता हैं रातयही पर्र सोये हैं
बाबा दिलीप कों देख मुस्कुराते हुवे - सहीकहा बेटा मे तोँ बाबाहु मेरा अपनाकोई नहीं हैं नाँ कोईघऱ नाँ ठिकाना जहादिल कियासो गये जौ मिलाखा लियाबस यही जीवन हैं मेरी
दिलीप - बाबा किया आपको अपनी जीवन सें कोई सिकवा नहीं हैं
बाबा दिलीप कों देख मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल नहीं किया तुम्हे हैं
दिलीप - नहीं मुझे भि अपनी जीवन सें कोई सिकवा नहीं हैं गरीबघऱ मे पैदा हुवामगर मे खुशहु कियुंकी मेरीमा बहन पिताजी मुझे बहुत प्रेम करते हैं मगर - दिलीप बहुत दुखी होँ जाता हैं)
बाबा दिलीप कों देखसमझ जाते हैं बाबा - मगर किया बेटा
दिलीप बाबा कों देख दुखी आवाज़ मे - बाबासभी मुझे बहुत प्रेम करते हैं औऱ मे भि सब कों बहुत प्रेम करतामगर मे उनके लियेकुछ करना चाहता हुखास कर अपनीमा केँ लियेमगर लगता हैं मे उनके लियेकुछ नहींकर पाऊगा मे एक् बेकार लरकाहु ( दिलीप दुखी नजरे नीचे किये बैठा रेहता हैं )
बाबा दिलीप कों गौर सें देखते हैं औऱ मन मे - लरकादिल कां अच्छा मगर क़िस्मत नें उसके L लगारखे हैं औऱ उसने स्वयं भि अपनी L लगवाली हैं
बाबा दिलीप सें - देखो बेटा हर किसी केँ जीवन मे एक् ऐसामोर आता हि हैं जहा लगता हैं वोँ कुछ नहींकर सकतामगर असल सें हर एक् प्रॉब्लम कर सलूसन् होता हैं बस जरूरत हैं कोसिस करते रेहने कि
दिलीप बाबा कि देखता - बाबा कि बाते बहुत कमाल कि होती हैं हार तौ मे भि नहीं मानुगा जोँ कर सकताहु जरूर करुगा
दिलीप - खरा होतेठीक हैं बाबा मे आताहु घऱ सें
बाबा - अरे अभि आये औऱ जारहे होँ
दिलीप - बाबा कों देख अभि आँ जाउंगा 5 मिनट मे
बाबा - ठीक हैं फिनजाओ
दिलीप घऱआता तोँ सारिका खेतो मे गई थि दिलीप जाके 3 रोटी सब्ज़ी थैली मे लेकर सीधा बाबा केँ पास आँ जाता हैं
दिलीप बाबा कों खानां देते हुवे - यह लीजिये बाबा मे आपके लिये खानां लेकरआया हु आप् भूके होगेखा लीजिये
बाबा हैरान दिलीप कों देखते हैं फिन मुस्कुराते हुवे - तुम्हारा सुक्रिया बेटा तुम् बहुत अच्छे होँ
दिलीप - गरीबहु बाबामगर जितना कर सकताहु जरूर करुगा औऱ किसी कि सहायता करना तौ अच्छी बात होती हैं
बाबा मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल सहीकहा तुमने
बाबा रोटीतोर एक् निवाला खाते हैं तोँ बाबा कों बहुत स्वादिस्ट लगता हैं
बाबा - मान गय़ा बेटा तुम्हारी मा खानां बहुत अच्छा बनाती हैं
दिलीप खुश होते हुवे - सहीकहा मा बहुत अच्छा खानां बनाती हैं खाके मज़ा आँ जाता हैं
बाबामन मे - तुम् मुझे खानां खिला केँ मुझे मजबूर कररहे हौ तुम्हारी सहायता करने केँ लिये
बाबा कां खानां पीना हौ जातायह देख दिलीप - अच्छा बाबा मे चलताहु
बाबा दिलीप कों रोकते हुवे रुको बाबा अपने थैले सें एक् छोटी सें सीसी जिसमे लालकलर कां कुछ थां बाबाउस लालकलर कि सीसी कों दिलीप केँ आगे करते हुवे
बाबा - इसे लेँ लो औऱ दूध मे एक् बूंददाल सुभहशाम पीते रेहना
दिलीप सीसी कों लेकरगौर सें देखते हुवे - यह किया हैं कोई जेहर तौ नहीं हैं नाँ कही आप् मुझे तपकाना तौ नहीं चाहते हैं नां
दिलीप कि बातसुन बाबाजोर जोर सें हसने लगते
बाबा हस्ते हुवे - तुम् जोक अच्छा मार लेते हौ नहींयह जेहर नहीं हैं औऱ भला मे तुम्हे कियु मारुंगा जौ मुझे खानां देता हैं किया तुम्हे मे कोई हत्यारा लगताहु
दिलीप बाबा कों देख हस्ते हुवे - अरे नहीं बाबा मेनेसच मे मजाक किया थां वैसेइस सीसी मे लाललाल हैं किया औऱ आपने मुझे कियु दिया इससे मेरा किया फायेदा होगा
बाबा दिलीप कों देख - मेने जैसाकहा वैसा हि करना तुम्हे स्वयं पताचल जायेगा
दिलीप सीसी कों अपनेपास रखते हुवे - ठीक हैं आप् नें कहा हैं वैसा हि करुगा
बाबा मुस्कुराते हुवे - यह हुइ नां बातअब बताओ अपनी लाइफ मे किया करने केँ बारे मे सोचा हैं
दिलीप - बस मुझे अपनीमा कों खुश रखना हैं मगर उसके लिये बहुतकुछ करना हैं मुझेपता नहींकर भि पाऊगा याँ नहीं
बाबा - तुम् कर लोगे मुझे तुमपे पुरा भरोसा हैं
दिलीप बाबा कों देख - आपकोऐसा लगता हैं मे कुछकर पाऊगा
बाबा - हा कोसिस करने वालो कि हार नहीं होती
दिलीप - अगरहार मिली तौ
बाबा मुस्कुराते हुवे - फिन सें खरा हौ जानां जब तक तुम्हे जौ चाहिये मिल नहीं जाता जीवनऐसे हि चलती हैं उतार चढ़ाओ आते रेहते हैं लाइफ मे
दिलीप बाबा कों देख - आपकी बातेसुन पता नहीं कियु अंदर सें मोटिवेट हौ रहाहु
बाबा - अगरऐसा हैं तौ कुदजाओ मैदान मे
दिलीप खरा होते हुवे बाबा कों देख - थैंक्स बाबा आपकेकहे गयेबात मुझे हिम्मत देरहे हैं मे हार नहीं मानुगा अब मे चलताहु
दिलीप घऱ केँ लिये निकल परता हैं औऱ बाबा दिलीप कों जातेदेख मुस्कुराते हुवे - तुम्हारी लाइफ बदलने वाली हैं बच्चे
दिलीप घऱ आँ चुका थां औऱ अपने कमरे मे खाट लेँ लेट बाबा कि दि गई सीसी कों देनेजा रहा थां दिलीप सीसी कों देख
दिलीप - आखिर इसके अंदर हैं कियाकोई दवा हैं याँ किया हैं बाबा नें कहा हैं स्वयं टाइम केँ संगपता चल जायेगा
तभी सारिका आँ जाती हैं खेतो सें औऱ हाथपेर धोने केँ बाद दिलीप केँ कमरे मे आती तोँ दिलीप कों खाट पे लेता पाती हैं दिलीप कि नजरमा पे चली जाती हैं
सारिका दिलीप केँ पास बैठते हुवे - कियाकर रहा हौ मेरालाल
दिलीप सारिका कों देखते हुवे - किया करुगा माबससोच रहाहु अपनीमा कों केसे एक् अच्छी लाइफदे सकताहु
सारिका दिलीप कों देखते हुवे - जायदा मतसोच जैसी भि लाइफचल रही हैं उसी मे बहुतखुश हु कियुंकी तु मेरेसंग हैं
दिलीप सारिका कों देखते हुवेमन मे - झूठे कियुबोल रही हैं आप् प्रेम केँ लियेतरस रही हैं हर पत्नि चाहती हैं उसका पति उसकेसंग रहे प्यारी बातेकरे कही घुमाने लेकर जाये
सारिका दिलीप कों सोचता देखकहा खो गय़ा
दिलीप होस मे आते हुवे - कही नहींमा वैसे आप् इतनी हसीन केसे हैं कहीकोई राज तोँ नहीं हैं हुस्न कां
सारिका दिलीप कि बातसुन जोरजोर सें हस्ते हुवे - तुम् भि नां बेटा कोईराज नहीं हैं
दिलीप - हस्ते हुवे अच्छा मुझेलगा कोईराज होगा
सारिका - हसीन बनने कां कोई नुस्का नहीं होता बेटा पैर पे पकाआम औऱ पकाये गयेआम मे बहुतबरा अंतर होता हैं
दिलीप हस्ते हुवे - समझ गय़ा नेचुरल हैं
सारिका - मुस्कुराते हुवेहा अच्छा अब मे चलतीहु
दिलीप - मा एक् किस्सी तोँ देदो
सारिका मुस्कुराते हुवे दिलीप केँ गाल पे अपनेहोठ सता केँ किस करते हुवे दिलीप कों देख - अब मे जातीहु
दिलीप सारिका कों जातेदेख देख - कम होगा हमारा मिलन
( रात 10 बजे )
सारिका नाइटी पेहने खाट पे लेती अपने पति जगदीश सें बातेकर रही होती हैं
जगदीश - कैसी हौ मेरी रानी
सारिका - मुह फुलाते हुवे कैसी रहूगी आप् केँ बिन आप् तौ सेहर मे पैसे कमाने मे लगे हुवे हैं
जगदीश - अरे भग्यवान मुझेकोई शोक थोरी चढ़ा हैं तेरी तुम् सभी कों छोर सेहर मे रेहने कां मजबूरी हैं औऱ यहसभी तुम् लोगो केँ लिये हि तौ कररहा हु दिलीप हि एक् लौटा बेटा हैं हमारा उसकी सादी भि तोँ करनी हैं
सारिका - जानती हुइसी लिये आपको ज़्यादा कुछ नहीं बोलती
जगदीश - यहसभी छोरो बताओ तुम् कैसी होँ दिलीप कैसा हैं
सारिका - हम् दोनों अच्छे हैं आप् बताओकब आँ रहे होँ 6 महीने होँ गये हैं घऱ सें गये हुवे
जगदीश - बसकुछ महीने केँ बादसोच रहाहु घऱआने कां फिन एक् महीने रेहकर वापस आऊगामगर इसबार आखरी होगाफिन दिलीप कि सादी करने केँ बाद मे तुम् लोगो केँ संग हि रहुंगा खेती बारीकर बाकी जीवन गुजार दूगा
सारिका करवट बदलते हुवे - अच्छा हैं जल्द जाइये आप् कि बहुतयाद आती हैं
जगदीश - आँ जाउंगा मेरीजान बसकुछ महीने मे यह बताओ किया पेहना हैं अभि
सारिका - टाइटी पेहनी हैं
जगदीश - अंदर मे किया पेहना हैं
सारिका - मुह बनाते हुवेपता तौ हैं फिन भि पूछते रेहते हैं
जगदीश - हस्ते हुवे आनंदआता हैं बताओ नाँ
सारिका - अंदरकुछ नहीं पेहना हैं आपकोपता हैं नाँ
जगदीश - हस्ते हुवे जानता हुयह बताओ तुम्हारी मुनिया पे जंगल हैं याँ साफकर दिया
जगदीश कि बातसुन सारिका केँ अंदर एक् लेहर सि दोर जाती हैं दबी चाहता जागने लगती हैं सारिका कां हाथपेट सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनीचुत पे चली जाती हैं सारिका अपनीचुत कों उपर सें सेहलाने लगती हैं
जगदीश - किया हुवाकुछ बोलोगी
सारिका होस मे आते हुवे - हा वोँ किया हैं नाँ बिल मे अबसाप जाता नहीं हैं तोँ बिल जंगल सें घिर गय़ा हैं
जगदीश - अरेसाप नहीं जाता तोँ किया हुवासाफ रखना तोँ चाहिये
सारिका अपनीचुत कों सेहलाते हुवे - जबसाप बिल मे जाता नहीं तोँ साफ करने सें किया फायेदा
जगदीश - समझ गय़ा बाबा मे आऊगातब साफ रखना अपनासाफ तुम्हारे बिल मे जरूर घुसाउगा
सारिका जगदीश कि बातेसुन जोस मे आने लगती हैं सोई हुई अरमान जाग जाते हैं चूत गीली होने लगती हैं सारिका पलंग पे बचलने लगती हैं
सारिका मदहोसी मे - आप् केँ साप मे जोँ दम नहींरहा जोँ मेरेबिल सें पानी निकाल सके ( सारिका पूरी गर्म हौ चुकी थि अपनी नाइटी उतार पूरी नंगी होकर पलंग पे लेट जाती हैं )
सारिका पूरी नंगीबैड पे लेती हुइ थि औऱ मचलरही थि सारिका कों सरीर कां सुख चाहिये थां मगरमिल नहींरहा थां बेचारी
जगदीश - कियाकरू रानी वक्त केँ संगसाप भि ढीला पऱ हि जाता हैं
सारिका - समझ सकतीहु अब मे रखतीहु सोना भि हैं
जगदीश - ठीक हैं सोजाओ
मोबाइल कट
सारिका मोबाइल बगल मे रख अपनीचुत सें उंगली करते हुवे महीने मे एक् बारइस तरह कि बाते करते हैं जब उनका मुंड होता हैं मगर मेरेसो रहे अरमान कों जगा देते हैं सारिका अहह उह्ह् मा करते हुवेजोर जोर सें अपनीचुत मे उंगली करने लगती हैं
सारिका तेजी सें सें अपनीचुत मे उंगली करते हुवे मेरीबिल कों साप चाहिये मगर मेरेबिल कां जौ मालिक हैं उसकेसाप मे वोँ दमअब नहींरहा मेराबिल तरप केँ रेहरहा हैं सारिका अहहमा आने वाला हैं अहह उह्ह् मर गई सारिका झर जाती हैं सारिका कि चुत बहुत पानी निकालती हैं
सारिका अपनी उंगली कों देखती हैं जौ उसकीचुत सें भीगी हुइ थि सारिका खाट पे देखती हैं तौ चुत कां पानीखाट केँ गिरा हुवाबैड कों गिलाकर चुका थां
सारिका बैड पे लेतीजोर जोर सें सासे लेते हुवे - अरेरे मेरी क़िस्मत चुत मे उंगली करने सें वोँ आनंद वोँ फीलिंग नहीं मिलती अब तोँ ऐसे हि जीना हैं मुझे लगता हैं
( सारिका अपनीचुत मे उंगली अपनी मर्ज़ी सें कभी नहीं करती हैं मगरकभी कभी जगदीश मोबाइल पे गन्दी बातेकर लेता हैं तौ सारिका केँ दबाये गये अरमान जाग जाते हैं औऱ मजबुरन सारिका कों चुत मे उंगली करनी परती हैं )
सारिका थकी हारीबैड पे लेतसो जाती हैं मगरकोई थां जोँ सारिका जगदीश कि सारी बातेसुन लिया थां सारिका कि सिसकिया चुत सें फच् कि आँ रही आवाजे सभीकोई कमरे केँ सामने खरा होकरसुन चुका थां हायह दिलीप थां
कमरे केँ बाहर् दिलीप खरा थां पेंट नीचे थां लन्ड गिला थां भइया नें मुठीमार पानी गिरा लिया थां मगरफिन दिलीप कां लन्ड खरा हौ जाता हैं
दिलीप मन मे - साला सोचा नहीं थां पिताजी भि गन्दी बाते करते होगे मोबाइल पे मगरमा हाय उनकी सिसकिया चुत मे उंगली करने कि फच् वाली आवाजे मा कि कामुक् आवाजे मेरेरोम रोम कों जलारही थि काश वोँ सीनदेख बापूमगर सालाकही एक् छेद भि नहीं हैं
दिलीप अपने कमरे मे आकेलेत जाता हैं औऱ आखेमंद कर दिमाग़ मे अपनीमा कि बाते ( बिल मे जंगल हैं) इसका मतलबमा कि चुत पे बाल हैं ( दिलीप अपने लन्ड कों हिलाते हुवे)मा केँ चुत पे बाल हैं काश एक् बार देखने कां मोक्का मिल जाता हैं सोचकर हि मेरी हालत खराब होँ रही हैं वोँ सीन कैसा होगामा कि चुत वालीबाल देखने मे
मा कि सिसकिया अहहमा मेरेरोम रोम मे करेंट डोर गय़ा दिलकर रहा थां अंदर जाकेमा कि टांगे फैलाके चुत मे लन्ड दालदु मगरऐसा कर नहीं सकतामगर मा कि फूली गर्मचुत मे लन्ड डालने कां एहसास कैसा होगा कैसाफिल आयेगा कितना आनंद आयेगा कितनी गरम होगी मेरीमा कि चुत कितनी फूली हुई होगीमा कि चुत कां छेद कैसा होगाबरा होगा याँ छोटा होगा
दिलीप अपने लन्ड कों अंदरकर लेता हैं औऱ कोई आईडिया सोचने लगता हैं अपनीमा कों पाने कां 10 मिनट सोचने केँ बाद दिलीप कों एक् आईडिया आता हैं दिलीप खुशी सें उठकरबैठ जाता हैं
दिलीप मन मे - सायदयह कामकर जायेमगर मेने जोँ सोचा वोँ आईडिया सायदकाम नां करे कियुंकी मेरीमा सती सावित्रि हैं मगर कियापता कामकर भि जाये मे हार नहींमान सकता मुझेहर एक् कोसिस करनी चाहिये बाबा नें भि कहा थां कोसिस करते रहने कों हार नां मानने कों समझ गय़ा तौ कल सें इसीकाम पे लग जाउंगा चांस बहुतकम हैं मगर कोसिस करने मे किया जाता हैं
दिलीप बैड पे फिनलेत कल किया केसे करना हैं आखेबंद किये सोचते हुवेसो जाता हैं
( सुभह केँ 10 बजे )
दिलीप फिन बाबा केँ लिये खानां पैक करके बाबा केँ पास जाता हैं
बाबा दिलीप कों देख मुस्कुराते हुवे - आया गय़ा बच्चा
दिलीप बाबा कों खानां देते हुवे - आँ गय़ा बाबा कियाकरू आप् सें बाते करना अच्छा लगता हैं अंदर मे हिम्मत आती हैं आपकी बातो सें
बाबा खानां लेते हुवे - अच्छा यहबात हैं मगरकई लोग तौ मुझे पागल भीखारी केहते हैं
दिलीप बाबा केँ पासबैठ - वोँ लोग चुतिये हैं बाबा जोँ आपकी बातो कां अर्थसमझ नहीं पाते आपकीहर बाते हिम्मत नाँ हारने लाइफ मे आगे बरने कि पेर्ना देता हैं हिम्मत देता हैं
बाबा दिलीप कों देखते हैं बाबा जोँ आज दिलीप मे कुछ बदलाव दिखाई देता हैं यहदेख बाबा मुस्कुराते हुवे खानां निकाल खाने लगते हैं
दिलीप बाबा कों खाते हुवे देखने लगता हैं
बाबा - वाउ मज़ा आँ गय़ा कियाखीर हैं बहुत मीठी हैं स्वयं केँ गाय केँ दूध कां लगता हैं कियुंकी मुझेदूध मे कोई मिलावट नहीं लगती
दिलीप मुस्कुराते हुवे - सहीकहा बाबा अपनीगाय कि दूध कि खीर बनाई हैं मा नें
बाबा - सुक्रिया बेटा इतनी मीठी अच्छी खीर खिलाने केँ लिये
दिलीप - मुझे खुशी हैं आप् कों मनपसंद आई
बाबाखीर खाते हुवे - कोई मार्ग मिला मंजिल पाने कां जिसे तुम् पाना चाहते होँ
दिलीप बाबा कि तरफ देखता फिन - हा मिला तोँ मगर चांस बहुतकम नजर आँ रहे हैं सायद मंजिल मे नां जापाऊ सायद जोँ हासिल करना हैं नां करपाऊ
बाबा दिलीप कों देख - मार्ग मिला हैं तौ चलतेरहो बेटा हारमत मानोकम सें कमकोई मार्ग तोँ मिला हौ सकता हैं वही मार्ग तुम्हारी मंजिल तक जाती होँ
दिलीप - मगर किया होगाउस रास्ते पे कोई औऱ मोर आँ जाये तौ
बाबा दिलीप कों देखते हैं दिलीप बाबा कों
बाबा मुस्कुराते हुवे - तौ पेहले एक् रास्ते केँ एंड तक चलोअगर उस रास्ते पे तुम्हारी मंजिल नहीं हैं तौ फिन दूसरे रास्ते पे चलोकोई नाँ कोई मार्ग तुम्हे तुम्हारे मंजिल तक पहुँच हि देगाबस यादरहे हर एक् रास्ते मे एंड तक जानां बीच मे मतहार मानकर बैठ जानां
दिलीप बाबा कि बातसुन मुस्कुराते हुवे - सच मे आप् मुझे बहुत ज्ञानी बाबा मालूम परते हैं आप् कि हर बातेजब जब सुनता हुई मेरे अंदर हिम्मत औऱ बढ़ती जाती हैं
बाबा मुस्कुराते हुवे - अगर तुम्हे ऐसा लगता हैं तोँ मुझे खुशी हुइ कोई तौ हैं जौ मेरे बातो कां मतलब अच्छे सें समझरहा हैं अमलकर रहा हैं
दिलीप खरा होते हुवे - बाबाहर किसी कि अपनीसोच होती हैं अब मे चलता हैं
बाबा - रुको जौ मेनेकहा थां दूध मे दालकर पीने केँ लियेपी तौ रहे हौ नाँ
दिलीप बाबा कों देख - जी बाबापी रहाहु जैसा आप् नें कहा वैसेबता भि दीजिये किया हैं वोँ सीसी मे कियु पीने कों कहा किया होगा
बाबा - मुस्कुराते हुवे नाँ नां नां स्वयं पताचल जायेगा कुछ दिनों बाद
दिलीप - हस्ते हुवेसमझ गय़ा आप् नहीं बताने वालेठीक हैं चलताहु
दिलीप घऱ कि तरफ निकल परता हैं बाबा दिलीप कों जातेदेख मुस्कुराते हुवे - पेहले हि बता दूगा तोँ मज़ा खराब हौ जायेगा बच्चे
दिलीप घऱआके देखता हैं माघास लेके नहींआई हैं तौ दिलीप कों यही एक् मोक्का दिखता हैं दिलीप घास हि बनी दीवार मे एक् छेदकर देता हैं दिलीप अंदरछेद सें देखता हैं तौ सारिका कां पलंगसाफ दिखरहा थां
दिलीप यहदेख - चलोकाम हौ गय़ा अब बाकीकाम पे ध्यान देना होगामगर मेरे लन्ड कां किया सबसेपरी परोबलम् तौ यह हैं जोँ 1 मिनट भि ठीक नहीं पाता
( शाम 3 बजे )
दिलीप सभी सें दूर एक् सांत स्थान पे बैठा अपनेफोन निकाल करकुछ करने मे लगा हुवा थां 10 मिनटबाद दिलीप घऱआता हैं
( रात 8 बजे )
सारिका दिलीप बैठ खानां खाने मे लगे हुवे थें
सारिका खानां खाते हुवे - बेटा तूने पढाईछोर मजदूरी करनेलगा पढ़ने कि उमर मे पढ़ लेता तौ कामआता नां
दिलीप सारिका कों देख - मा पढाई तौ कर लेतामगर आगे बहुत कर्चा होगा हौ पढाई मे दूसरी पढाई करने केँ बाद भि नोकरी मिलेगी उसकाकोई गरांति नहीं तीसरा मे जीवनभर किसी केँ अंदर मे रेहकर काम नहीं करना चाहता
सारिका दिलीप कों देखते हुवे - तौ किया करेगा
दिलीप - सोचरहा हु जल्द हि आप् कोईबता दूगा
सारिका - ठीक हैं जैसा तुम्हे ठीकलगे
खानां खाने केँ बाद दोनों अपने कमरे मे चले जाते हैं
दिलीप अपनीमा केँ बारे मे सोचेजा रहा थां 30 मिनटबाद दिलीप धीरे-धीरे सें आकेछेद सें अंदर देखता हैं तोँ सारिका धीरे-धीरे सोरही होती हैं दिलीप कों कुछ देखने कों नहीं मिलता दिलीप गौर सें देखता हैं तौ सारिका केँ बरे चुचे केँ उभार नाइटी केँ ऊपर सें हि दिखाई देरहे थें
दिलीप कमरे मे आकेखाट पे लेतमन मन मे - मा केँ चुचे केँ उभार तोँ हरदिन देखता रेहता हु मेने सोचा थां आज भि माचुत मे उंगली मगरमा तोँ सो गई क़िस्मत हि खराब हैं
( सुभह 9 बजे ) दिलीप बाबा केँ पासफिन खानां लेकर जाता हैं औऱ खानां देकरबैठ बाते करता हैं
( शाम 3 बजे) दिलीप फिन अपनेघऱ सें निकलदूर सांतजहा आप् पासकोई नहीं होतावहा बैठफोन निकाल कुछ करने लगता हैं
अगलेदिन सुभह 10 बजे
दिलीप बाबा केँ पासफिन खानां लेकर जाता हैं औऱ बाबा केँ संगबैठ बाते करने लगता हैं
बाबा खानां खाते हुवे - बेटा कुछ दिनों केँ लिये मे पास केँ गाव मे जारहा हुकुछ दिनबाद आँ जाउंगा
दिलीप हैरानी सें बाबा कों देख - मगर बाबा आप् कियुजा रहे हैं आप् सें बाते करने मे मुझे अच्छा लगता हैं
बाबा दिलीप कों देख मुस्कुराते हुवे - मुझे भि बच्चे मगर एक् जरूरी काम सें जारहा हुमगर कुछदिन मे आँ जाउंगा
दिलीप दुःखी होते हुवे - ठीक हैं बाबा मे समझ गय़ा
बाबा दिलीप केँ कंधे पे हाथरख - दुःखी मत हौ मे जल्द हि आँ जाउंगा दूसरी एक् नां एक् दिन मुझेयहा सें जानां हि होगा मे तोँ बाबाहु एक् स्थान रुक नहीं सकता
दिलीप बाबा कों देख - समझ सकताहु बाबा
थोरीदेर बातेकर दिलीप फिनघऱ आँ जाता हैं
बाबा केँ जाने केँ बाद दिलीप कां दिललग नहींरहा थां आदत पर्र गई थि बाबा सें बात करने कि मगर दिलीप लगारहा
दिलीप रोजशाम 3 बजेजहा कोई इंसान नहीं होतावहा फोन निकाल कुछ करताऐसे हि 40 दिन गुजर जाते हैं
40 दिनबाद
दिलीप कमरे पूरीतरह सें हैरान नँगाखरा अपने लन्ड कों देखेजा रहा थां दिलीप कां लन्ड 10 इंच लम्बा 5 इंच मोटा होँ चुका थां
दिलीप सरपकर केँ- बाप रे पेहले मुझेलग हि रहा थां मेरा लन्ड मोटा लम्बा हुवेजा रहा हैं मगर मेने ध्यान नहीं दियामगर आज मेरा लन्ड इतना मोटा लम्बा हौ गय़ा हैं एक् मिनट यानी जरूर बाबा कि दि गई दवा कां कमाल हैं मगर बाबा कों पता केसेचला मेरी प्रोब्लम
दिलीप मन मे सोचते हुवे - औऱ क्याँ क्याँ पता हैं बाबा कों जाकेपूछ भि नहीं सकताकुछ दिनकेह केँ गये थें अभि तक नहींआये लौट केँ
दिलीप अपने लन्ड कों पकरता हैं तोँ बहुतगरम मोटाफिल कर दिलीप खुश होते हुवे - मेरी सबसेबरी प्रोबलम खतम हौ गई ( तभी दिलीप केँ दिमाग़ मे एक् बातआती हैं) लन्ड तोँ मोटा लम्बा हौ गय़ा मगर टाइमिंग कां कियाऐसा नाँ हौ मात्र मोटा लम्बा होँ गय़ा मगर लन्ड मे दम हि नां होँ इसकापता तोँ मुठी मारने सें पताचल जायेगा
दिलीप आखेबंद कर अपनीमा कि चुत केँ बारे मे सोचता हैं कि वोँ अपनीमा कों घोरीबना कि चोदरहा हैं औऱ सारिका मर गई हामा कियेजा रही हैं दिलीप यह सोचने केँ संग तेजी सें मुठी भि मारेजा रहा थां
दिलीप जोरजोर सें धक्का माररहा हैं सारिका बस बेटा अब नहीं लेँ पाउंगी रुकजा कहेजा रही हैं सारिका कि हालत खराब हैं मगर दिलीप पेलेजा रहा हैं दिलीप मा मेरा निकलने वाला हैं सारिका बेटा मेरा भि अहह केँ बाद दिलीप एक् जोर कि पिचकारी मारते हुवेझर जाता हैं
दिलीप फोन मे वक्त देखता हैं तौ दिलीप पूरीतरह सें हैरान होँ जाता हैं
दिलीप अपनासर पकर चिल्ला केँ - किया 51 मिनटबाद मेरा पानी निकला बाप रे बाबा नें मुझे किया दिया थां जौ मेरे लन्ड मे इतनी ताकत आँ गई
सारिका घऱ पे नहीं थि खेत मे गई हुईँ थि दिलीप कपड़े पेहनकर वही बाबा केँ पासमगर बाबा अभि तक नहींआये थें दिलीप पैर केँ पास जाकेखरा होँ जाता हैं तभी दिलीप कि नजरजर केँ एक् छेद मे रखे काजल पे जाती हैं दिलीप उससोच पे पर्र जाता हैं उसकी कागज कों देखकर साफपता चलरहा थां कि उसेरखा गय़ा हैं
दिलीप कों रहा नहीं जाता औऱ जाके कागज निकाल खोलकर देखता हैं तोँ कुछ लिखा हुवा थां
बाबा - बेटा माफ करना मे तुमसे मिल नहीं पाया तुम् बहुत अच्छे लरके हौ तुमसे मुझे खानां दिया मुझसे अच्छे सें बाते करते थें मुझे भि तुमसे बाते करने मे अच्छा लगता थां चिंता मतकरो एक् नां एक् दिन हम् जरूर मिलेंगे दूसरी तुम्हे पताचल गय़ा होगा मेने सीसी मे तुम्हे किया दिया थां तुम्हारे मन मे कई प्रश्न होगे मुझेपता हैं बस इतनासमझ लो मुझे तुम्हारे बारे मे सभीपता हैं मेने तौ बस मुझे खानां खिलाने केँ बदले तुम्हारी सहायता कर दि तुम् जौ पाना चाहते होँ तुम् पा लोगेबस कोसिस करते रेहना बाकी मिलेंगे किसीदिन
दिलीप लेटरपढ़ इमोसनल होँ जाता हैं दिलीप बैठते हुवे
दिलीप - बाबा कों पता थां सभी मेरे बारे मे औऱ बाबा सुरु सें हि मेरी सहायता कररहे थें बाबा आप् बहुत अच्छे हैं आप् नें मेरे लिये जौ किया उसके लिये आप् कां दिल सें सुक्रिया मुझे नहींपता जोँ मे पाना चाहता हुउसे पा पाऊगा कि नहींमगर आपने मेरी जीवन बर्बाद होने सें बचाली नहीं तौ आगे मेरी लाइफ बुरी होने वाली थि थैंक्स बाबा
10 दिनबाद - दिलीप अकेला एक् स्थान मे बैठाफोन निकाल आवाजे सुनरहा थां आवाज़ सुनने केँ बाद - हाअबसही हैं आज सें अपना मिसन सुरु
( दिलीप अकेले मे रोजआके अपनी आवाज़ चेंजकर बोलने कि परेस्टिक कररहा थां औऱ आजसफल होँ गय़ा हैं)
( रात 9 बजे)
दिलीप अपने कमरे मे थां पलंग पे बैठा हुवा दिलीप एक् नयासिम लेकरआया थां दिलीप नयेसिम कों मोबाइल मे लगा केँ अपनीमा कां नंबर डायलकर मोबाइल करने कों होता हैं दिलीप कररही पाताडर लगने लगता हैं घबराहट होने लगती हैं दिलीप फिन कोसिस करतामगर फिनडर जाता हैं 30 मिनट तक ऐसे हि चलता रेहता हैं
दिलीप मन मे - डरलगरहा हैं मगर मुझे करना हि होगा बाबा नें मेरे लिये इतनासभी कियामगर जब वापस आयेगे तौ मे उनकेपास केसेजा पाऊगा उनका सामना कर पाऊगा नहीं डरने सें काम नहीं चलेगा मा कों पाना हैं मा कों खुशी देनी हैं तोँ करना हि पड़ेगा
दिलीप हिम्मत कर अपनीमा कों मोबाइल लगा देता हैं रिंग जाने लगती हैं दिलीप अभि भि डररहा थां मगर हिम्मत जुटाये हुवे थां
सारिका बैड पे लेती हुइ थि मोबाइल कां रिंगसुन सारिका मोबाइल उठा केँ नंबर देखती हैं तोँ कोईनया नंबरदेख - यहनया नंबर किसका हैं
सारिका - हेलो
दिलीप आवाज़ बदल केँ - हैलो राकेश कहा हैं भइया तुम् तोँ मोबाइल भि नहीं करते दोस्त साथी कों भूल गय़ा
सारिका - मे कोई राकेश नहींहु बेटा रोंग नंबरलग गय़ा हैं नंबरचेक कर केँ मोबाइल कियाकरो
दिलीप - सॉरी सॉरी ऑन्टी माफ करना लगता हैं मेनेगलत नंबर डायलकर दिया
सारिका - कोईबात नहींकभी कभी गलती होँ जाती हैं
दिलीप - थैंक्स ऑन्टी समझने केँ लिये वैसे आप् कि आवाज़ बहुत मीठी हैं ( दिलीप यहकेह मोबाइल कटकर देता हैं )
सारिका मोबाइल कों देखते हुवे - हद हैं जान नां पेह्चान किसी कों ऐसे केसेकुछ बोल सकता हैं कोई
सारिका मोबाइल रखआखे बंदकर लेती हैं
वही दिलीप जोरजोर सें सासे लियेजा रहा थां पसीने भि डर केँ मारे निकलआये थें दिलधक धककररहा थां दिलीप अपने सीने पे हाथरख - बाप रेडर केँ मारेलग रहा थां मेरी गांडफट जायेगी मगरचलो अच्छा हुवामा मेरी आवाज़ पहचान नहींपाई मेहनत करनासफल रहामगर अभि भि मेनखेल सुरु होना बाकी हैं पता नहींआगे किया होगा
( आज कों लिये इतना हि )
मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta - Continue reading next part
Relavant source : click here





