मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta – New Episode
chapter 9
सुभह 10 बजे
दिलीप तैयार थां कुछ दिनों केँ लिये अपनीमा सें दूर जाने केँ लियेकाम केँ लिये जोँ कि झुठ थां
सारिका दिलीप केँ पासआके गाल कों सेहलाते हुवे दिलीप कों प्रेम सें देख - बेटा कुछ दिनों केँ लियेजा रहे होँ फिन भि तुम्हारे बिना मेरादिल नहीं लगेगा पऱ किया हि कर सकते हैं तुम् अपना ख्याल रखता
दिलीप सारिका कों गलेलगा केँ - मा आप् चिंता मतकरो मे अपना अच्छे सें खयालरख सकताहु दूसरी पिताजी कि तरहदूर सेहर थोरिजा रहाहु मोबाइल मे बाते होती रहेगी
सारिका दिलीप केँ गालो पे किस करते हुवे - वोँ तोँ हैं तौ तुम् नें सभी समान लेँ लिया नां
दिलीप - हामाअब मे चलताहु मे रोजशाम कों मोबाइल करता रहुगा
सारिका - ठीक हैं बेटा
सारिका घऱ केँ बाहर् खरी थि अभयमा कों देखता हैं फिनबाय कर जाने लगता हैं औऱ सारिका दिलीप कों जाते देखती रेहती हैं अभयजब चला जाता हैं तब सारिका कमरे मे आके पलंग पे लेत जाती हैं
थोरिदेर अपनेमन कों सांत करती हैं उसकेबाद राजू कों मोबाइल लगा देती हैं दिलीप मुस्कुराते हुवे मोबाइल उठा केँ
राजू - हा मेरीजान कहो
सारिका मुस्कुराते हुवे - दिलीप चला गय़ा आप् आँ रहे हैं नां
दिलीप खुश होते हुवे - यह भि केहने कि बात हैं मे तौ रेडी बैठाहु बस 20 मिनट मे आया
सारिका खुश होते हुवे - ठीक हैं
मोबाइल कट
दिलीप मुस्कुराते हुवे अपनारूप चेंजकर लेता हैं 20 मिनटबाद दिलीप राजू केँ रूप मे धीरे-धीरे सें घऱ मे अंदरआके अपने कमरे मे जाकेबैग कों छुपा देता हैं औऱ कपड़े भि चेंजकर लेता हैं
दिलीप मुस्कुराते हुवे - अब वक्त हैं मा कि चुदाई करने कां
दिलीप कमरे सें बाहर् निकल आँगन मे आके - कहा होँ मेरीजान देखो मे आँ गय़ा
सारिका राजू कि आवाज़ सुन जल्द सें कमरे सें बाहर् आके देखती हैं तोँ सारिका राजू कों देखखुश हौ जाती हैं औऱ जल्द सें राजू केँ गलेलग जाती हैं राजू भि सारिका कों बाहों मे भर लेता हैं
अपनीमा कों बाहों मे लिये दिलीप कों एक् अगल हि मज़ाफिन आँ रहा थां
दिलीप सारिका कों देख - तुम् तौ सच मे बहुत हसीन हौ मेरीजान
सारिका सर्म सें नजरे नीचेकर - आप् भि नां
दिलीप मुस्कुराते - चलो कमरे मे चलते हैं
सारिका यहसुन सर्म सें लाल होते हुवे - जी चलिये
दोनो कमरे मे जाते हैं तोँ राजू सारिका कों पकरखाट पे लेताकर सारिका केँ ऊपरआके सारिका कों देखने लगता हैं तोँ वही सारिका सर्म सें पानी पानी होने लगती हैं सारिका राजू कों सर्म सें नजरे भि नहीं मिलापा रही थि
दिलीप यही वोँ रूम हैं नाँ जहा अंकल नें आप् कि पेहली बार चूत मे लन्ड दाल तुम्हारी चूत कि सील तोरी थि
सारिका सर्म सें लाल होँ जाती हैं तभी सारिका केँ चेहरे कां इइम्प्रेसन बदल जाता हैं जिसेदेख दिलीप हैरान होँ जाता हैं
सारिका राजू कों करक आवाज़ मे मेरेउपर सें हतो राजूसमझ नहीं पातामगर सारिका केँ रूप कों बदलादेख सारिका केँ ऊपर सें हट जाता हैं
सारिका उठकरबैठ राजू कों देखती हैं
राजू सारिका कों देख हैरानी सें - जान किया हुवा किया तुम् नहीं करना चाहती किया
सारिका राजू कि आखो मे देख - मे करना चाहती हुसभी कुछमगर मे उस इंसान केँ संग करुगी जिसको मेने प्रेम किया मेने जिसेदिल शरीरसभी सॉप् दिया
राजू - हैरानी सें तोँ मे कोनहु मे हि तोँ हु जिसे तुमने प्रेम किया मेने तुम्हे प्रेम किया
सारिका राजू कों देख - नहीं तुम् वोँ नहीं तोँ तुम्हारा चेहरा असली नहीं हैं मगर पूरी बॉडी मेरे बेटे दिलीप कि हैं तुम् दिलीप कों मेरालाल मेरा प्यारा बेटा
दिलीप कि सासेरुक जाती हैं दिलीप कों बहुतबरा झकता लगता हैं दिलीप कों यकीन नहीं होँ रहा थां उसकीमा कों सभीपता हैं मगर केसे दिलीप फिन भि अपने आप् कों सांतकर
राजू सारिका कों देख - जान तुम् यह कियाकेह रही हौ मे राजूहु तुम्हारा बेटा नहीं
सारिका दिलीप कि आखो मे देख - खाओमा शपथकहो तुम् मेरे बेटे दिलीप नहीं हौ
दिलीप समझ जाता हैं उसकीमा सभी जानती हैं औऱ दिलीप अपनीमा कि झूठीशपथ नहींखा सकता थां दिलीप सर्म सें नजरे नीचेकर लेता हैं
सारिका दिलीप कों देखते रहती हैं
दिलीप - आप् कों कब केसेपता चला मे राजू नहीं दिलीप हु
सारिका दिलीप कों देख - सचकहु तौ बेटा मे यहराज अभि नहीं खोलने वाली थि कि मुझे तुम्हारे बारे मे पता हैं तुम् राजू नहीं दिलीप हौ
दिलीप नजरे नीचे किये सर्म सें - तोँ आपने अपनीराज कियु खोला औऱ बाद मे कियु खोलना चाहती थि मेराराज
सारिका एक् गेहरि सासू माँ लेते हुवे - कुछ भाईयों कि वजह सें मुझेआज तुम्हारे सामने राज खोलना परा कियुंकी उनको मनपसंद नहीं आँ रहा थां तुम् मेरी चुदाई राजू केँ रूप मे करो वोँ चाहते हैं तुम् दिलीप मेरे बेटे केँ रूप मे हि चुदाई करोकुछ भइया तौ यह भि केहने लगेयह adultery कहानी जबकि उन्हे आगे किया होने वाला हैं तुम् किया चाहते हौ तुम्हारी फैंटेसी किया हैं उन सें उनकोकोई लेना देना नहीं हैं (अजय भइया ) नें बहुतकुछ सोचा थां तुम्हारे बारे मे मगर तुम् अब वोँ सभी नहींकर पाओगे कियुंकी कुछ भइया कों तुम्हारी फैंटसी फीलिंग कि परी हि नहीं हैं जानते होँ कियु कियुंकी वोँ किस्सा कों किस्सा कि तरह नहीं पढ़ते ( अजय भइया ) कुछअलग नया करना चाहते थें मगरअब वोँ भि नहींकर पायेंगे तौ तुम्हारी फैंटसी भि गई ( अजय भइया) जोँ करना चाहते थें वोँ भि नहींकर पायें
दिलीप सारिका कों देख - मगरमा यह तोँ गलत हैं नां मेरा सरीर मेरी आत्मा हर एक् अंग दिलीप कां हि हैं नां फिन कियु कियाकुछ भाइयो कों मेरी फैंटसी मेरी मेरी फीलिंग मे किया चाहता हु उनकीकोई परवाह कियु नहीं हैं
सारिका - कियुंकी कुछ भाइयों कों ऐसी किस्सा पसन्द आती हैं जिसमे हीरो हि सभी कि चुदाई करे अपनीमा कि भि अगर हीरो कि मा कों कोईटच भि कर लेँ तौ वोँ यहदेख नहीं सकतेइस लिये
दिलीप - मगर मे कोई दूसरा नहींहु मे कोई विलन नहींहु किस्सा कां हीरो हि तोँ हुहाबस मेरा तरीका अलग थां आपकी चुदाई केँ अलगमजे कुछदिन मगर लेना चाहता थां बस औऱ मुझे लगता हैं ( अभय भइया ) कों भि वैसी कहानी मनपसंद हैं जिसमे हीरो सबकी चुदाई करेइसी लिये तौ उन्होने जितनी कहानी लिखी उसमे हीरो हि सभी कि चुदाई करते हैं औऱ अभि लिख हि रहे हैं यह किस्सा भि ऐसी हि हैं आप् हैं मे हबस मेरेपास लॉकेट हैं जिससे मे रूपबदल सकता औऱ यहइस लिये हैं कियुंकी xforum पे इसतरह कि कहानी औऱ भि हैं ( अभय भइया) तोँ बसकुछ अगल करना चाहते थें उन भाइयो कों कुछअलग मज़ा देना चाहते मुझे आनंद देना चाहते थें किस्सा तौ मा बेटे केँ बीच हुईँ नां
सारिका - बेटा मगर उनकोऐसा नहीं लगता नाँ इस लिये औऱ ( अजय भइया) नें भि पेहली बार अपने चाहने वालो कि सुनी हैं अपनी कहानी लाइन उनके लियेबदल दि
दिलीप दुःखी होते हुवे - मामगर मेरा किया जोँ मे आपकेसंग करना चाहता थां
सारिका मुस्कुराते हुवे - किया करना चाहते थें मेरेसंग
दिलीप नजरे नीचेकर - मे राजू केँ रूप मे पेहले आप् कि चुदाई करताफिन एक् बूढ़े केँ रूप मे फिनगाव केँ लरके केँ रूप मे
सारिका - वाउ बेटा तुम् चाहते थें मे किसी सें भि चुदवा लू औऱ मे ऐसा करती भि मगरयह सभी कियु करना चाहते थें मेरेसंग जबकि दिलीप केँ रूप मे भि मेरी चुदाई कर सकते हौ नाँ
दिलीप - मा मेने एक् दिन एक् लरके कों आप् कि हि उमर कि ऑन्टी कों चुदाई करते हुवे देखा थां तब मेने सोचायह महिला अपनी पति बेटे कों अपने परिवार सें चुपकर एक् जवान लन्ड सें चुदाई कां मज़ा लेँ रही हैं कैसा मज़ाआता होताउस स्त्री कों कैसा मज़ाउस लरके कां आता होगा किसी कि मा पत्नि कों जौ उसकेमा कि उमर कि हैं चोरी छुपे चुदाई कर केँ तोँ मेरेदिल मे भि ऑन्टी कि चुदाई कि चाहत आँ गई मगरकोई मिली हि नहींफिन आप् कों पटाया औऱ बाबा नें लॉकेट दिया तौ मुझे एक् मोक्का मिला अपनी फैंटेसी पूरी करने कां मगरकुछ भइया कों यह मनपसंद नहींआया
सारिका हस्ते हुवे - पेहली बात तुम् नें मुझे नहीं पटाया मे स्वयं तुम् सें पति दूसरी बात जरूरी नहींहर किसी कां तुम्हारी सोच मनपसंद आये तुम् हर किसी कों खुश नहींकर सकते
दिलीप - जानता हु अच्छे सें जानता हु तौ फिन ( अभय भइया)उन भाइयो कि बात कियु माने औऱ मेरी फैंटेसी केँ L लगा दिये
सारिका हस्ते हुवे - तुम्हारे लिये मुझे बुरालग रहा हैं बेटा औऱ रहीबात ( अभय भइया) कि तोँ उन्होंने पेहली बारऐसा किया हैं कियुंकी उनकोलगा कभीकभी किसी कि सुन लेनी चाहिये
दिलीप- समझ गय़ा मेरी फैंटेसी बाबा कां आनां मुझे लॉकेट देनासभी बेकार मे गय़ा इससे अच्छा होता ( अजय भइया) बाबा कों बीच मे लाते हि नहीं मे औऱ आप् हि रेहते
सारिका - किया हि कर सकते हैं बाबा केँ लिये भि बुरालग रहा हैं हामगर उन्होंने तेरा लन्ड बराकर दिया तुम्हारी कमजोरी भि गायबकर दि नाँ
दिलीप एक् गहरी सासू माँ छोरकर - हायह तौ हैं ( दिलीप सारिका कों देख)मगर जरूरी प्रश्न आपको केसेपता चला मे राजू हि दिलीप हु
सारिका दिलीप कों दुखी आवाज़ मे - मुझेइस बात कां दुख हैं कि तुमने मुझेऐसी स्त्री समझ लिया कि मे अपनीहवस मिटाने केँ लिये किसी अंजान लरके सें चुद जायुगी
दिलीप सर झुका केँ आखो मे आसु लिये - माफकर दोमा
सारिका दिलीप कों देख - बेटा मेने राजू सें दोस्ती कि कियुंकी मुझे एक् यार चाहिये थां ताकि थोरा वक्तपास हौ सकेअगर मुझेयह नहींपता चलता कि तुम् हि राजू होँ तौ भि मे कभी भि राजू सें चुदवाने कि तोँ दूर कि बात हैं जिसदिन राजू मेरे सें एक् भि गंदी बाते करता मे उससे दोस्ती तोर लेती उससेकभी बाते नहीं करतीमगर तुमसे यानी राजू सें बात करने केँ 20 दिनबाद हि मुझेपता चला तुम् हि राजू होँ
दिलीप हैरानी सें सारिका कों देख - कब केसे
सारिका दिलीप कों देख - यहसच हैं सुरु मे मुझेपता नहीं थां राजू हि यानी तुम् होँ मेरे बेटे कियुंकी तुमने बरे अच्छे सें आवाज़ चेंजकर बाते करते थें जिसका सक मुझे भि नहीं हुवा नां पताचला मगर मेरी भाग्य अच्छी थि तुम्हारी बुरी 21 दिन सुभहजब तुम् बाथरूम करनेगये फोन चार्ज मे लगाकर तबउसदिन पता नहीं कियु मेरादिल किया राजू कों मोबाइल करने कां औऱ उसदिन मेने पेहली बार आँगन मे तुम्हारे कमरे केँ सामने खरी होकर राजू कों मोबाइल किया तौ मुझे तुम्हारे मोबाइल बजने कि आवाज़ सुनाई दि मुझेलगा सायद तुम्हारे ठीकेदार नें मोबाइल किया होगाफिन
दिलीप नजरे नीचेकर - फिन आपने 5 बार मोबाइल कियातब आपको यकीन हुवामगर उसकेबाद भि आप् अंदर जाके मेरे मोबाइल कों चेक दिया औऱ फिन मेरी चोरी पकरी गई यही हुवा होँ नां
सारिका मुस्कुराते हुवे - तुमहे केसेपता चला
दिलीप - यकीन नहीं थां आपको मेरे बारे मे पता होगा कियुंकी उसकेबाद भि आपने मुझसे कुछ नहींकहा
दिलीप मन मे - यानी मेरा डरनासही थां उसदिन मेरा मोबाइल चार्ज नहीं थां औऱ अचानक मुझेजोर कि लगी तौ जल्द बाज़ी मे मेने मोबाइल चार्ज मे लगा दियावही मेनेदो गलती कि पेहला मोबाइल छोरकर चला गय़ा दूसरा मेने मोबाइल कां साइलेंट मोड पर्र नहीं किया थां
दिलीप सारिका कों देख - जब आप् कों पता थां मे राजू नहीं दिलीप हुफिन भि आप् नें कुछ कियु नहींकहा कियु अंजान बन बाते करतीरही
सारिका दिलीप कों देख - कियुंकी 20 दिनों मे हि तुम्हारी मस्ती मजाक तुम्हारी फनी कहानिया सुन मुझे बहुत आनंदआता थां इस किये दूसरी मे देख्ना चाहती थि कि आखिर तुम् राजूबन कर मुझसे कियु बातेकर रहे थें हम् दोनोरोज जिसतरह बाते करते थें तुम् राजूमन अलग तरीके सें बात करते थें जौ मुझे अच्छा लगता थां मुझेलगा तुम् राजूइस लियेबने कियुंकी मुझे एक् यार कि जरूरत थि ताकि तुम् मुझेहसा सको ताकि मुझेबोर नाँ लगेमगर जल्द हि मुझे एहसास हुवा तुम् तोँ मेरी लेना चाहते हौ
दिलीप आखो मे आसु लिये - आप् नें कहाअगर राजू मे नहीं होता तोँ आप् राजू केँ संगकुछ नहीं करती आप् नें मात्र राजू सें दोस्ती केँ पर्पस् सें बात कि तौ फिनयह जानने केँ बाद राजू हि दिलीप यानी मे हु तोँ फिन भि आप् इतनीदूर कियुआई कियुयह मुझेसमझ नहीं आँ रहा
सारिका - कियुंकी मुझेबाद मे पताचला तुम् मुझे एक् पति कां प्रेम देना चाहते हौ तुम् मेरे बेटे केँ रूप मे मुझेसभी खुशीदे सकते थें मगर एक् पति कां प्रेम नहींदे सकते थें तुम् मुझेहर खुशी देना चाहते थें तुम् मुझेखुश देख्ना चाहते थें तुम्हे पता थां मे तुम्हारे बापू बिना केसेजी रहीहु जब मुझेयह पतालगा कि तुम् मेरी चुदाई करना चाहते हौ तौ मुझे बहुतबरा झटकालगा थां मगर मेने बहुत सोचा मेनेहर लम्हा तुमपे नजररखी फिन मुझे एहसास हुवाभले हि तुम् मेरेसंग अपनी फैंटसी पुरा करना चाहते थें तुम् मेरी चुदाई करना चाहते थें मगर मेने तुम्हारी आखो मे हवस नहीं प्रेम देखा कियुंकी मेनेकई बार तुम्हे दुखी देखा तुम् जोँ भि कररहे थें वोँ सभी मेरे लियेकर रहे थें मेने स्वयं रात कों तुम्हे अपने आप् मे बाते करते हुवे सुना थां
दिलीप पलंग पे लेता - मामाफ करना मे गलतकर रहाहु मेरा तरीका गलत हैं मेरीसोच गलत हैं मगर मे आपसे बहुत प्रेम करता हुइ मे आपकेसंग जीना चाहता मे आपकोहर खुशी देना चाहता हुईँ पति कां प्रेम भि भले हि यहगलत मुझे नहि पता मे ऐसाकर पाऊगा कि नहीं मुझे नहि पता मे आपकोपा पाऊगा कि नहींमगर मे कोसिस करता रहुंगा मेराबस एक् सपना हैं आपकोहर खुशी देनाभले हि आपकीनजर मे दुनिया कि नजर मे जौ मे कररहा हुपाप हैं मुझेकोई फर्क नहीं परता मुझे आप् कों खुश देख्ना हि बस आप् मेरे सामने खुश रहने कां दिखावा करती हैं मगर मुझेपता हैं एक् पत्नि कों अपने पति सें किया चाहिये होता हैं बस एक् बार आप् कां पालूफिन मे आपको बहुत प्रेम दुगा आपकोहर स्थान घुमाने लें जाउंगा आपकाहर तरीके सें ख्याल रखुंगा
सारिका दिलीप कों देख - तुम् बोलते जारहे थें औऱ मे चोरी छुपे तुम्हारी बातेसुन रही थि तब सें कईदिन तुम्हारी बाते मेने कानों मे गुजति रहीहा तुम् जोँ कररहे थें औऱ आगे जौ करने वाले थें गलत थां पाप थां मगर तुम्हारे दिल मे मेरे लिये बेपनाह प्रेम देखकर आखिर गाड़ी मे हार गई तुम् जीतगये कियुंकी मुझे भि तुमसे प्रेम थां औऱ मेरे लिये तुम् मेरे बेटेसभी कुछ होँ इस लिये मेने तुम्हे अपनासभी कुछसोप दिया तुम्हे मेने सविकार् कर लिया कियुंकी इसतरह तुम्हे मेरी खुशी कि परवाह मेरी थि वैसे हि मुझे तेरी परवाह हैं मेरेलाल कोई फर्क नहीं परतायह पाप हैं जौ भि हैं मगरअब तुम् मेरे प्रेम सभी हौ
दिलीप रोते हुवे सारिका केँ गलेलग जाता हैं सारिका भि दिलीप कों बाहों मे समा लेती हैं सारिका केँ आखो मे भि आसु आँ गये थें
सारिका दिलीप कों बाहों मे लिये बालों कों सेहलाते हुवे प्रेम सें - मेरे बेटेरो मत तुमने जोँ किया समाज कि लियेपाप होगामगर मेरे लिये नहीं मे हर दर्दसेह सकतीहु मगर तेरी दुखी नहींदेख सकती
दिलीप रोते हुवे - मा मेने आपके बारे मे कभी बुरा नहीं सोचा मुझेपता थां आप् दूसरे महिला कि तरह नहीं हैं मुझेपता थां पिताजी कि अलावा आप् किसी औऱ केँ संग सेक्स करने केँ बारे मे सोच भि नहीं सकतीमगर फिन भि मेने किया राजूमन कर आप् सें बात कि मे अपने आप् कों ( चालबाज़ ) समझरहा थां मगर मे भूल गय़ा जौ स्त्री थान चुकी हैं कि वोँ किसीगैर कि संग किसी केँ संगकुछ नहीं करेगी उसकेआगे किसीतरह कि चलबाज़ी नहीं चलती मे बहुत सर्मिंदा हु
सारिका - तुमने यहबात सहीकही बेटा औरतों कि अंदर मर्द सें जायदा सेक्स कि चाह होती हैं मगर औरतो केँ अंदरउस चाह कों दबाने कि ताकत भि होती हैं कुछ औरतें सेक्स कि चाहत कों दबा नहीं पातीकुछ औरते दबाती नहींमगर यहहवस होता हैं बेटा प्रेम नहीं जैसेअगर तुम् केवल मेरे पीछे मेरेसंग सेक्स करने केँ लियेपरे होते उसके अलावा मेरे दर्द कि मेरीकोई परवाह नहीं होती तोँ तुम् भि अपनीहवस पूरी करने केँ लिये हि मेरे पीछे होतेमगर ऐसा नहीं हैं मुझे खुशी हैं सेक्स लाइफ कां हिस्सा हैं मगरउसी केँ संग एक् स्त्री कों प्रेम भि चाहिये होता एक् महिला अपनीरूह बदनसभी जिसेसोप देती हैं उससे चाहती हैं सेक्स केँ अलावा उसकी परवाह करे उसकी चिंता करे उसकेसंग समय बिताये बातेकरे हरतरह सें उसकेसंग खरारहे वही प्रेम होता हैं
दिलीप सारिका कि आखो मे देख - समझ गय़ा मा आपकीहर एक् बात कों मे आपको बहुत प्रेम करताह
सारिका मुस्कुराते हुवे - मे भि मेरेलाल
दिलीप - मा लरका लरकी
सारिका हस्ते हुवे - हा बाबा वोँ वाला प्रेम भि करतीहु
सारिका दिलीप केँ चेहरे कों पकर दिलीप केँ होठो मे होठलगा केँ किस करने लगती हैं दिलीप भि सभीभूल कर सारिका कों बाहों मे लेकेकिस करने लगता हैं
दोनोमा बेटे एक् दूसरे केँ जिब कों मुह मे लेके चूसने मे लग जाते हैं पीनेलग जाते हैं 2 मिनट तक दोनो एक् दूसरे केँ होठो कां रस पीते हैं
सारिका सर्म सें लाल अपनी नजरे नीचेकर लेती हैं दिलीप सारिका कों गले सें लगा केँ - आईलोव यु मेरी प्यारी मा
सारिका भि दिलीप कों बाहों मे लेके - आईलोव यू मेरे बेटे
दोनोअगल होते हैं
दिलीप सारिका कों देख - माअब किया होगा किस्सा चेज होँ चुकी हैं मेरी फैंटसी भि गई औऱ ए update कों जोँ राजआगे खुलने वाला थां आगे जौ होने वाला थां उसी कों बताने मे चला गय़ा जबकि आज हमारे बीच यानी आपके राजू केँ बीच वोँ सभी होने वाला थां
सारिका मुस्कुराते हुवे - कर भि किया सकते हैं मेने तोँ सोचा थां तुम्हारी फैंटसी पूरी करने मे पुरासंग दुगी कियुंकी मुझेपता थां तुम् कोई भि रूप मे आते तुम् मेरे बेटे हि थें फिनबाद मे जब तुम्हारी फैंटेसी पूरी हौ जातीतब मे तुम्हे बताने वाली थि मगरआज बताता परा
दिलीप सारिका कों देख - किसने सोचा थां आपकोसभी पता थां मे हि राजू उर्फ दिलीप भि चलाबाज़ मे नहीं आप् निकली
सारिका मुस्कुराते हुवे - वोँ तौ हैं कियुंकी मे माहु तेरी
दिलीप - मगर ( ajay bhay) नें इसबार सभी कि सुनली आगे कियाफिन ऐसा होगा हि कियुंकी हर लोगो कि सोचअलग होती हैं उन्हे किस्सा अपने हिसाब सें चाहिये होती हैं तब ( ajay bhay) किया करेगे
सारिका मुस्कुराते हुवे - बेटा पेहले भि ऐसा हुवा हैं मगरतब ( ajay bhay) किसी कि नहीं सुने हैं कियुंकी उन्हे भि पता हैं सभी कि इक्छा पूरी करनासभी कों खुश करना मुश्किल हैं उन्होंने इसबार सुनी हैं आगेआगे नहीं सुनेंगे आगेवही होगा जौ ( ajay bhay) चाहेंगे
दिलीप मुस्कुराते हुवे - अच्छा ऐसा हैं
सारिका - बेटा - ajay bhay - कुछअलग करना चाहते थें उन्ही सभी केँ लियेमगर लोग कहानी कों किस्सा केँ करेक्टर कों समझते हि नहीं हैं उन्हे तौ मात्र उनके हिसाब सें नहीं हौ रहा होतावही दिखता हैं तोँ कोई किया हि कर सकता हैं
दिलीप गहरी सासू माँ लेते हुवे - हा आपका बोलना सही हैं मगरआगे किया होगा हमारे बीच
सारिका मुस्कुराते हुवे - वही जोँ इसबार लोग चाहते हैं
दिलीप लॉकेट कों गले सें निकाल उसेतोर देता हैं औऱ सारिका कों देख - इस लॉकेट कां बहुतबरा रोल थां मगर इसकारोल आते हि खतम होँ गय़ा मेरे बाबा कां भि रोल बेकार चला गय़ा
आज केँ लिये इतना हि
मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta – New Episode
Janta ho कुछ logo के kehane pe maine kahani की mummy chod di kiyuki mai bi tang aa gya thaa mai chahta too yahi से kahani phir से nai tarike से suru krr skta thaa लेकिन bhay logo की tarif sun krr dill ❤️ नहीं krr rah jiskane liye poora समय देकर kahani likho एक galati pe suna ki chale jate hain logo की suno too galt naa suno too bi लेकिन एक bat sacch kahin मेरी kahani hain too mai kisi के kehane pe kiyu kahani की L lga di लेकिन muze bakiyo से yeh umid नहीं thi ( kahani yahi mai end hoty hain) chalo accha hain iss से muze bohot bara sabak मिला
मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta – New Episode
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मेरा चालबाज़ बेटा - Incest maa beta - Aage kya hua? Next part padhiye
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