मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story – New Episode
भाग 4
किचन सें बाहर् आँ उसने तौलिया लिया औऱ मेरीओर पीठ करके अपनी बुर साफ करने लगी.उसकी कमर सें लेकर चूतड़ों तक पारस कां वीर्य फैला थां। वोँ जल्द जल्द साफ़ करतेहुए पीछे मुड़कर बाथरूम कि ओर भि देखरही थि.उसकी इस स्थिति कों देखते हुए मेरे लण्ड नें भि पानी छोड़ दिया.अब मे नीचेउतर बिना नहाये सिर्फ हाथ मुंह धोकर हि बाहर् आँ गय़ा। हाँ, थोड़े सें बाल जरूर भिगोलिए जिससे नहाया हुआ लगूँ.बाहर् एक् बार फ़िरसभी कुछ सामान्य थां, सलोनी फिन सें किचन मे थि औऱ पारस शायद अपने कमरे मे थां.हाँ बाहर् एक् कुर्सी पऱ सलोनी कि ब्रा जरुर पड़ी थि जोँ उनकी किस्सा वयांकर रही थि.वोँ कितना भि छुपाएँ पर्र सलोनी ब्रा कों बाहर् हि भूल गई थि.मैंने उससे थोड़ी मस्ती करने कि सोची औऱ पूछा- सलोनी, क्याँ हुआ? तुम्हारी ब्रा कहां गई.मगर बहोत चालाक होँ गई थि वोँ अब ! कहते हें नं कि जबऐसा वैसाकोई काम किया जाता हैं तोँ चालाकी अपने आप् आँ जाती हैं.वोँ तुरन्र बोलि- अरेकाम करतेहुए तनीटूट गई तौ निकाल दि.मैंने फिन उसको सताया- कौन सां काम बेबी?वोँ अब भि सामान्य थि- अरे, ऊपर स्लैब सें सामान उतारते हुएजान !मे अबकुछ नहि कह सकता थां, हाँ, उसके चूसेहुए होंटों कों एक् बार चूमा औऱ अपने कमरे मे आँ गय़ा.तोँ ये थां मेरा पहला कड़वा याँ मीठा अनुभव, कि मेरी प्यारी जान मेरी सीधी सि लग वाली पत्नि सलोनी नें केसे मेरे भइया सें अपनी नन्ही-मुन्नी चुदवाई.हाँ, एक् अफ़सोस जरूर थां मुझे कि मे उसकोदेख नहि पाया ! मगरफिन भि सभीकुछ लाइव हि तोँ थां, देख नहि पाया, सुना तोँ सभी थां मैंने, अपनी पत्नि कि सीत्कारें किचन मे मेरे भइया सें चुदवाते हुए !मे सजधजकर होकर बाहर् आया, ब्रेकफास्ट लग चुका थां.पारस भि रेडी होँ गय़ा थां.मे- पारस, आज कहां जानां हैं, मे छोड़ दूँ.पारस- नहि भैया, कहीं नहि, आज आराम हि करूँगा, आजरात कि वाहन सें तौ वापसी हैं मेरी.मे- हाँ, आज तोँ तुझको जानां हि हैं, कुछदिन औऱ रुक जाता.पारस- आऊँगा नां भैया, अगली छुट्टी मिलते हि यहीं आऊँगा। अब तौ आप् लोगों केँ बिनामन हि नहि लगेगा.कह मेरे सें रहा थां जबकि देख सलोनी कों रहा थां.फिन सलोनी नें हि कहा- सुनो, मुझेजरा बाज़ार जानां हैं, कुछ कपड़े लेने हें.मे- दोस्त, मेरेपास तोँ समय हि नहि हैं, तुम् पारस केँ संगचली जानां.सलोनी- ठीक हैं, थोड़े पैसेदे जानां.मे- ठीक हैं, क्याँ लेना हैं, कितने दे दूँ.सलोनी- अबदोतीन जोड़ी तौ अंडरगार्मेन्ट्स हि लाने हें, एक् तोँ अभि हि टूट गई, अबकोई बची हि नहि, थोड़े अधिक हि दे देना.वोँ मुस्कुराते हुए पारस कों हि देखरही थि.पहले तोँ मे कोई ध्यान नहि देता थां मगरअब उन दोनों कि यह बातें सुनसभी समझरहा थां.सलोनी- अच्छा 5000 दे देना, अबकीबार अच्छी औऱ महंगे वाले चड्डी ब्रा लाऊँगी.वोँ बिना शरमाये अपने कपड़ो केँ नामबोल रही थि.मे-ठीक हैं जान, ज़रा अच्छी क्वालिटी कि लाना औऱ पहन भि लिया करना.पारस- हा…हा…हा… भैया, ठीककहा आपने.हाँ भाभी…ऐसे लाना जिनको पहन भि लो… आपको तौ पता नहि, पऱ ऐसे कपड़ों मे दूसरों कों कितनी तकलीफ़ होती होगी.सलोनी उसकेकान पकड़ते हुए- अच्छा बच्चू ! बहोत बड़ा हौ गय़ा हैं तुँ अब.ऐसी नजर रखता हैं अपनी भाभी पर्र? बेटा सोच साफ़ होनी चाहिए, कपड़ों सें कोई फर्क नहि पड़ता.पारस- हाँ भाभी, आपनेठीक कहा, मैंने तौ मजाक किया थां.मे उन दोनों कि नोकझोंक सुनकर मुस्कुरा रहा थां, कुछ बोला नहि, बससोच रहा थां कि केसेइन दोनों कि आज कि हरकतें जानी जाएँ.अब घऱ पऱ मेरा टिकना तोँ सम्भव नहि थां.तभी मेरे दिमाग़ मे एक् आईडिया आया, मैंने सलोनी केँ पर्स मे रु० रखतेहुए सोचा, उसकाये पर्स मेरी समस्या कुछहद तक दूरकर सकता हैं.मैंने कुछ वक़्त पहले एक् आवाज़ रिकॉर्ड करने वालापेन voice recorder लिया थां, मैंने उसकोऑन करके सलोनी केँ पर्स मे नीचे कि ओरडाल दिया.उसकी क्षमता करीब 8 घंटे कि थि, अब जौ कुछ भि होगा, कम सें कम उनकी आवाजें तौ रिकॉर्ड हौ हि जाएंगी.मैंने पहले भि येचेक किया थां, जबर्दस्त पॉवर वाला थां औऱ एक् सौ मीटर कि रेंज कि आवाजें रिकॉर्ड कर लेता थां.अब मे निश्चिंत होँ सबकोबाय कर दफ़्तर केँ लिए निकल गय़ा.सोचा किअबसाम कों आकर देखते हें क्याँ होता हैं पूरे दिन…मे साम 7 बजे वापसआया, घऱ कां माहौल थोडा शांत थां, सलोनी कुछपैक कररही थि, पारस अपने कमरे मे थां.मे भि अपने कमरे मे जाकर कपड़े बदलने लगा कि तभी मुझे सलोनी कां पर्सदिख गय़ा.मैंने जल्दी उसे खोलकर वोँ पेन निकाला, वोँ अपने आप् ऑफ होँ गय़ा थां.पर्स मे मुझे 3-4 बिल दिखे हें, मैंने उनकोचेक किया, सलोनी नें बहुत शॉपिंग कि थि.उसकी 2 लायेन्ज़री Lingerie, कुछ कॉस्मेटिक औऱ पारस कि टी-शर्ट, नेकर औऱ अंडरवियर भि थें.आमतौर पऱ मे कभीयह सभी नहि देखता थां पऱ जब सलोनी कि सभी हरकतें आसानी सें दिखरही थि तौ अब मेरादिल उनकीसब बातें जानने कां थां, आज तोँ उनकेबीच बहोत कुछहुआ होगा.मगर
मगरये सभी अभि सम्भव नहि थां, मैंने पेन सें मेमरी चिप निकाल कर अपने पर्स मे रखली, सोचा कि बाद मे सुनुँगा.बाहर् पारस सलोनी कों मनारहा थां- मत दुःखी हौ भाभी, फिन जल्द हि आऊँगा.ओह ! सलोनी इसलिये दुःखी थि !मैंने भि उसको हंसाने कि कोशिश कि मगर वोँ वैसी हि बनीरही उदासमना.मे- पारस, कितने बजे कि ट्रेन हैं तेरी?पारस- भैया, 8:50 कि हैं, मे 8 बजे हि निकल जाऊँगा.मे- पागल हैं क्याँ? मे छोड़ दूँगा तुझेही स्टेशन पऱ, आहिस्ता चलेंगे, चल खानां खा लेते हें.पारस- आप् क्यूं परेशान होते हौ भैया, मे चला जाऊँगा.मे- नहि, तुझसे कहा नां ! सलोनी तुम् भि चलोगी नाँ.सलोनी- नहि, मुझे अभि बहोत काम हें, औऱ मे इसको जाते नहि देख पाऊँगी, इसलिये तुम् हि जाओ.मे मन हि मन मुस्कुरा उठा-ओह… इतना प्रेम…!!औऱ तभीमन मे एक् कौतुहल भि जागा कि पारस कों छोड़ने केँ बाद मेरेपास इन दोनों कि बात सुनने कां वक़्त होगा.औऱ हम् जल्द जल्द खानां खाने लगे.मैंने बाथरूम मे जाकरचिप अपने फ़ोन मे लगाली औऱ रिकॉर्डिंग चेक कि.थैंक्स गॉड ! सभीकुछ ठीक थां औऱ उसमें बहोत कुछ मसाला लगरहा थां.फिन सभीकुछ जल्द हि हौ गय़ा औऱ हम् जाने केँ लिए रेडी हौ होँ गए.मे बाहर् व्हीकल निकालने आँ गय़ा, पारस अपनी भाभी कों अच्छी तरह मिलकर दस मिनटबाद बाहर् आया.मे- क्याँ हुआ? बड़ीदेर लगा दि?पारस- हाँ भैया, भाभी रोनेलगी थीं.मे- हाँ, वोँ तोँ पागल हैं, सब कों दिल सें चाहती हैं.पारस- हाँ भैया, भाभी बहोत अच्छी हें, उनका पूरा ख्याल रखना.मे- अच्छा बच्चू, अभि तक कौनरख रहा थां?पारस- नहि भैया, मेराये मतलब नहि थां। आप् काम मे बिजी रहते होँ नां, इसलिये कहरहा थां.मे- हाँ वोँ तौ हैं ! चल अच्छा, अपना ध्यान रखना औऱ किसीचीज कि जरूरत होँ तौ बता देना.पारस- हाँ भैया, आपसे नहि तौ किससे कहूँगा.मुझे उसके जाने कि बहोत जल्द थि, मे उसटेप कों सुनना चाहरहा थां.किस्सा जारी रहेगी.
बढ़िया भाग..
मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story – New Episode
एपसोड 5
कुछ हि देर मे पारस कि ट्रेन चली गई, मे जल्द सें कार मे आकरबैठ गय़ा औऱ फ़ोन निकाल कर रिकॉर्डिंग ऑन कि…इसटेप कों सुनने मे पूरे 3 घंटेलगे, टेप सुनने मे हि मेरी हालत खराब हौ गई औऱ मैंने दोबार मुठ मारी.मे ड्रीम्स मे भि नहि सोच सकता थां कि सलोनी इसकदर सेक्सी हौ सकती हैं, उसने एक् भारतीय नारी कि सारी हदेंपार कर दि थीं.मुझे लगा कि शायद मे अपने बिज़नेस मे कुछ अधिक हि व्यस्त हौ गय़ा थां जौ उसकी इच्छाएँ नहि समझ पाया.तोँ आप् भि सुन लीजिए मेरेसगे भइया पारस औऱ मेरी ब्याहता पत्नि सलोनी कि बातचीत, एक् एक् शब्दआगे वर्णित हैं……
मे- अच्छा जान मे चलता हूं, पारस रेडी रहनासाम कों मिलते हें.सलोनी- बायजान अपना ध्यान रखना.सलोनी- ओह पारस, क्याँ करते होँ रुको तौ… अरे, दरवाजा तोँ बंद करनेदो… लगता हैं… आज तोँ पगलागए होँ.पारस- हाँ भाभी, आज मेरा आखरीदिन हैं, तुमको तौ पता हैं फिन 6 महीने केँ बाद आँ पाऊँगा.सलोनी- ओह मुझेपता हैं बेबी, मे स्वयं दुःखी हूं पऱ ओह… रुको नाँ… उताररही हूं नां… क्याँ पजामी फ़ाड़ोगे? यहलो…आज तुम्हारा जौ दिल चाहेकर लो…आज मेरीओर सें तुमको हरतरह कि आजादी.पारस- यूआर ग्रेट भाभी…आई लवयू…पुच… पुच…सलोनी- अब तुमने मुझे पूरी नंगी तोँ कर दिया हैं… देखो सुभह तुमने कितना गन्दा कर दिया थां… पहले मे नहालूँ… फिन जोँ तुम्हारी मर्जी कर लेना.पारस- आज तौ मे आपको एक् लम्हा भि नहि छोड़ूँगा… चलो… मे आपको नहलाता हूं.सलोनी- क्याँ करते हौ पारस… अभि तोँ नहाये होँ तुम्… फिन सें गीले हौ जाओगे… आआअ… ऊऊऊ…उईईईईई… क्याँ कररहे होँ…ह्ह्ह्ह्हाआआआ… खिलखिलाने कि आवाजें आओहूऊऊओ…पारस- भाभीसच बताओ, तुम्हारी बुर इतनी प्यारी केसे हैं… कितनी छोटी… वाउउउउ… कितनी चिकनी… यह तोँ बिल्कुल छोटी सि बच्ची जैसी हैं… पुचपुच… च…च…च…पुच च च…सलोनी- अहाआआ… ह्हह्हाआ… अब नहाने भि दे… याँ चाटता हि रहेगा… ओहूऊऊ… ओह…हा…हा… हे…हेह… हि… हि…पारस- पुच…चाप… चप…चपर… पुच…सलोनी- अच्छा यहबता… तूने कितनी बच्ची कि बुर देखी हें जौ तुझेही पता हैं कि वोँ ऐसी होती हैं.पारस- क्याँ भाभी…यह तोँ पता हि हैं न्… औऱ मैंने तौ कई कि देखी हैं औऱ…सलोनी- अच्छा बच्चू… इसका भि दीवाना हैं मगरगलत बातअब ऐसा नहि करना…पारस- ओह भाभी…ठीक हैं… नहि करूँगा मगरकान तोँ छोड़ो.सलोनी- नहि छोड़ूंगी… तुम् छोड़ते होँ जब मेरेदूध पकड़ लेते होँ… तोँ हाहा…अब मे भि नहि छोड़ती…पारस- ठीक हैं… मत छोड़ो… लो मे भि पकड़ लेता हूं…सलोनी- हीईई… हूऊऊऊऊ… अहाआआ… उईईईईइ…पारस- अहाआ… आआअ…सलोनी- ओहूऊऊ… यहा नहि राजा…ओहू… होँ… अहाआआ… निकाल नं… अहाआआ… नहा तौ लेनेदे… नअहाआआ…पारस- नहला हि तोँ रहा हूं… ये तौ आपकी बुर कि अंदर कि सफाईकर रहा हैं… आहा… आहा…सलोनी- हाँहाँ… मुझेसभी पता हैं येकौन सि सफाईकर रहा हैं… आहा…आअ… अआ…अआ…ओह… ओह…अहाआआ… आहा…आअ… आअ… आहाहा… हाआह…पारस- ओह भाभी… कितनी गरम हैं बुर आपकी…आहा हा…ओहआहा… हाओह… अह्ह्हा… ओह… हह…सलोनी- बस्स्स्स्स्स्स्स… राजाआआआ… ओहोहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…पारस- आआआह्हह्हह्हह्ह… बस्स… भाभी हौ गय़ा… आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआअह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह…पारस- आहा भाभी… मज़ा आँ गय़ा, तुम् बहोत हॉट हौ जानम, तुम्हारी इस बुर कों चोदकर मेरे लण्ड कों पूरा करारमिल जाता हैं.सलोनी- हाँ लाला… तुमने भि मेरी जीवन मे पूरेरंग भरदिए हें। तुम्हारे भैया तौ बेडरूम औऱ बैड केँ अलावा मुझे कहींहाथ भि नहि लगाते, अहा औऱ तुमने इसघऱ मे हर स्थान मुझे चोदा हैं। मे निहाल होँ गई तुम्हारी चुदाई पऱ.पारस- हाँ भाभी… चुदाई कां आनंद तोँ स्थान औऱ तरीके बदलबदल कर करने मे हि आता हैं.सलोनी- सहीकहा तुमने… आजयहा बाथरूम मे आनंद आँ गय़ा.पारस- अच्छा औऱ कलजब बालकोनी मे किया थां?सलोनी- धत्त पागल… वोँ तोँ मे बहोत डर गई थि। मगरसच बोलूँ तोँ बहोत मज़ाआया थां। सूरज कि रोशनी मे खुले मे, नां जानेकिस किसने देखा होगा.पारस- अरे भाभी…वही तौ मज़ा हैं… औऱ आपने देखा नहि कल आपकी बुर सबसे ज़्यादा गर्म थि औऱ कितना पानी छोड़रही थि.सलोनी- हाँहाँ… चलअब तेरी सारी ख़्वाहिश पूरी होँ गई नां, बेडरूम सें लेकर बाथरूम, बालकोनी, किचनसभी स्थान तूने अपनेमन कि करली नां, औऱ मुझेये गन्दी भाषा भि सिखा दि, अब तोँ तूँ खुश हैं नाँ?पारस- अभि कहां मेरीजान… अभि तोँ दिल मे सैकड़ों अरमान हें… आप् तोँ बस देखती जाओ…हा… हा… हा…सलोनी- तुँ पूरा पागल हैं… चलअब हट…ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्नसलोनी- अरेकौन आयाइस टाइम…?पारस- लगता हैं कूरियर वाला हैं.सलोनी- जा तूँ लें लेँ… तौलिया बांध लेनाकमर मे… याँ होनेइसी पेन सें साइन करेगा… हा…हा…हा… हाहा…पारस- हेहे… हंसोमत भाभी…आज आपको एक् औऱ आनंद कराता हूं… जाओ कूरियर आप् लो… बहोत आनंद आएगा.सलोनी- पागल हैं क्याँ… मुझे कपड़े पहनने मे आधा घंटालग जायेगा, जल्दजा नाँ… तुँ लें लेँ.ट्रनन्न्नन
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एपसोड 6
ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्नपारस- नहि भाभी… देखो नं… बहोत आनंद आएगा… तुमको कपड़े नहि पहनने… ऐसे हि लेना हैं कूरियर.सलोनी- हट पागल… मारूंगी तुम को… नंगी जाऊँगी मे उस व्यक्ति केँ सामने? कभी नहि करुँगी मे ऐसा… तूँ तौ पूरा पगला गय़ा हैं। हाएराम क्याँ हौ गय़ा हैं तुझको, मुझे क्याँ समझा हैं तूने?पारस- पुचपुच… तुम् तौ मेरीजान हौ… अगरमुझ पर्र विश्वास हैं औऱ मुझसे जरा भि प्रेम हैं तौ आज सारीबात आप् मानोगी… चलो जल्द करो.सलोनी- अरे बुद्धू… केसे वोँ पागल हौ जायेगा.ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्नसलोनी- कौन?कौन हैं भइया?…कूरियर हैं…सलोनी- रुको भैया, अभि आती हूं, मे नहा रहीं हूं.हाँ… अबबोल केसे जाऊं…?पारस- लोये तौलिया ऐसे बाँधलो जैसे बांधती हौ अपनी मम्मों सें औऱ गीली तौ हौ हि, वोँ यही समझेगा कि नहाते हुएआई हौ। औऱ घबराती क्यूं हौ… वोँ कौन कां किसी सें कहेगा… उसकी तोँ आज क़िस्मत खुल जायेगी.सलोनी- तूँ वाकई पूरा पागल हैं… मरवाएगा तुँ आज, मे पूरादिन अकेली हि रहती हूं अगर किसीदिन चढ़आया नं वोँ तौ मे क्याँ करुँगी.पारस- अरेकुछ नहि होगा… तुम् देख्ना कितना आनंद आएगा… औऱ आपको एक् बार उसके सामने ये तौलिया सरका देना…फिन देख्ना आनंद.सलोनी- पागल हैं… धत्त… मे ऐसाकुछ नहि करुँगी। चलहटअब तूँ.ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्नसलोनी- आई भैया…दरवाजा खुलने कि आवाज़…पारस कि मर्जी पूरी करने केँ लिए सलोनी आज वोँ करने वाली थि जोँ उसनेकभी नहि किया थां.वोँ नहाकर पूरी नंगी, उसके संगमरमरी बदन पऱ एक् भि वस्त्र नहि थां, मात्र एक् तौलिया लपेट जोँ उसके बड़े औऱ ऊपर कों तने बूब्ज़ पर्र बंधी थि औऱ उसके मोटे गद्देदार चूतड़ों पऱ आकर खत्म हौ गई थि, उसी कों बाँध, एक् अजनबी केँ सामने आने वाली थि। पता नहि इस रोमांच केँ खेल मे क्याँ होने वाला थां…अब आगे…दरवाजा खुलने कि आवाज़…सलोनी- ओह आप्… क्याँ थां भैया? सॉरीदेर हौ गई वोँ क्याँ थां कि मे नहारही थि न्…अजनबी- कोईबात नहि मैडमजी, आपका कूरियर हैं। लीजिये यहा साइनकर दीजिये…सलोनी- ओह। कहां… अच्छा… क्याँ हैं इसमें.अजनबी- पता नहि मैडम… मुम्बई सें आया हैं.सलोनी- ओह बहोत भारी हैं… आहआआआ… आईईईईईईई… उफ्फ्फ्फ्फ… पकड़िये प्ल्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श… प्लीज यह क्याँ हुआअ…अजनबी- वाउ… मेमश्ाााााबबब…हाँह्हह्ह्ह… लाईईईई… यह अहाआआआअ…सलोनी- सॉरी भाईसाब… न् जाने केसेखुल गय़ा। कृपया आप् अंदररख दीजिये……खट खटबसकुछ आवाजें…अजनबी- अच्छा मेमसाब, चलता हूं। आपका धन्यवाद… एक् बात कहूँ मेमसाब… आप् बहोत सुन्दर हें… अब किसी औऱ केँ सामने ऐसे दरवाजा मत खोलना.सलोनी- सॉरी भैया, किसी औऱ सें मत कहना.अजनबी- ठीक हैं मेमसाब…दरवाजा बंद होने आवाज़…सलोनी- हाहाहा हामाय गॉड, यह क्याँ हौ गय़ा…पारस- हाहा…हाहाहाहा…हाहा होहोहोहो… मज़ा आँ गय़ा भाभी… क्याँ सीन थां, गजब, आज तोँ उसकादिन सफल होँ गय़ा…सलोनी- होँ होँ होँ होँ हेहे…रुक अभि… कितना मज़ा आयायया… वाउरुक… अभि हाहाहा हा…पेट दर्द करने लगा…पारस- हाँ भाभी, देखा आपने उसकी पैंट कितनी फूल गई थि… बेचारा कुछकर भि नहि पाया। केसे भूखे कि तरह ताड़रहा थां…पारस- वाउ भाभी… आपने तोँ कमालकर दिया, मैंने तोँ मात्र यह मम्मों दिखाने कों कहा थां। औऱ आपने तोँ उसको पूरा जलवा दिखा दिया?माय गॉड… देखो…यहा मेरे लण्ड कां क्याँ हाल हौ गय़ा… उस बेचारे कां तौ क्याँ हुआ होगा.सलोनी- हहहहःपारस- जैसे हि आपका तौलिया गिरा मे तौ चोंक हि गय़ा थां… मे तौ डर गय़ा कि कहीं आप् पैकेट नाँ गिरादो। पर्र आपनेकिस अदा सें उसको पैकेट पकड़ाया.वाउ भाभीमान गय़ा आपको…सलोनी- हे…हेहे… हे…चल पागल… वोँ तोँ अपने आप् हौ गय़ा। मैंने नहि किया… तौलिया स्वयं खुल गय़ा…पारस- जौ भि हुआ पऱ बहोत गर्महुआ, जोँ मे सोचता थां वैसे हि हुआ…पारस- केसेफटी आँखों सें वोँ आपकी बुर ताड़रहा थां। औऱ आपने भि उसकोसभी खुलकर दिखाई…सलोनी- धत्त मैंने कुछ नहि दिखाया… चलहट मुझे लज्जा आँ रही हैं…पारस- हाएहाए… मेरीजान… अब लज्जा आँ रही हैं। मुझे तौ मज़ा आँ गय़ा.सलोनी- अच्छा बता न्… वोँ क्याँ क्याँ देखरहा थां?पारस- हाँ भाभी, आपसे पैकेट लेतेहुए उसकीनजर आपकी हिमालय कि तरहउठी इन चूचियों पऱ थि। आप् जब बैठकर तौलिया उठारही थीं, तब वोँ बिनापलक झपकाए आपकीइस चिकनी मुनिया कों ताड़रहा थां जोँ शायद अपने होंट खोले उसको चिढ़ा रही थि। औऱ तौ औऱ फिन आप् उसकीतरफ पीठकर जब तौलिया बांधने लगीं तोँ जनाब नें आपकेइन सेक्सी चूतड़ों कों भि घूर लिया.मे तोँ सोचसोच करमरा जारहा हूं कि क्याँ हुआ होगा बेचारे कां…सलोनी- हाहा… एक् बात बताऊँ, पैकेट लेतेहुए उसके दोनों हाथों कि रगड़ मेरेइन पर्र थि… मे तोँ सही मे घबरा गई थि.पारस- वाओ भाभी… चूचियों कों भि रगड़वा लिया, फिन तौ गय़ा वोँ…सलोनी- तुम् सहीकह रहे थें… वाकयी बहोत आनंद आया.पारस- मे तोँ आपसे कहता हि हूं भाभी…जरा सां जिंदगी हैं खूब आनंद किया करो.सलोनी- अच्छा चलअब सजधजकर होँ जा, ओह…अब मत छेड़ न् इसको.चल बाजार चलते हें… बाहर् हि कुछखा लेंगे… मुझे शॉपिंग भि करनी हैं.पारस- ठीक हैं भाभी… पर्र एक् शर्त हैं !सलोनी- अब क्याँ हैं, बाजार भि नंगी चलूँ क्याँ…पारस- नहि भाभी, यह इंडिया हैं, काशऐसा हौ सकता… पर्र आप् स्कर्ट पहनकर चलो.सलोनी- अरे वोँ तोँ मैंने वही निकाली हैं देख…यह स्कर्ट पहनकर हि चलूंगी.पारस- वाओ भाभी… बहोत सेक्सी लगोगी। पऱ प्लीज इसके नीचेकुछ मत पहनना, मतलब कच्छी ब्रा वगैरा कुछ नहि !सलोनी- अबफिन तूँ पगला गय़ा हैं। ब्रा तोँ पहले भि कईबार नहि पहनी हैं मगर कच्छी भि नहि? बहोत अजीब लगेगा.पारस- प्लीज भाभी…सलोनी- ओके बेबी… पर्र यह स्कर्ट कुछ छोटा हैं… ऐसा करती हूं, लॉन्ग स्कर्ट पहन लेती हूं.पारस- नहि भाभी…यही… … प्लीज…सलोनी- ओके बेबी…अब पीछे सें तौ हट…जब देखो… कहीं न् कहीं घुसाता रहेगा… अब इसको बाज़ार मे जरा संभाल कर रखना… ओके?पारस- भाभीयही तौ कंट्रोल मे नहि रहता, अब तोँ खुला मार्ग हैं… बस स्कर्ट उठाई औऱ अंदर… हाहा…हाहा…सलोनी- अच्छा जी… तोँ ये तेरा प्लान हैं… मारूंगी… हाँ…देख ऐसाकुछ बाज़ार मे मत करना…कभी मुझे सबके सामने रुसवा कर दे?पारस- अरे नहि भाभी… आप् तौ मेरी सबसे प्यारी भाभी हौ…सलोनी- अच्छा चलअब जल्द कर…ओके…मेरे पाठक दोस्तो, मे खुश थां… रिकॉर्डर सलोनी केँ संग थां मगर अगले 3 घंटेसही रिकॉर्ड नहि हुए। यहींआकर ये आधुनिक मशीनें भि फ़ेल होँ जाती हें.
कथा जारी रहेगी.
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