पापा तुम गंदे हो Complete Hindi Sex Story Rohit Ki Raatein: Premaa Ki Chahat Mein in hindi. Enjoy the best sex stories in hindi with gif adultery desi sex story stories on DesiChudaiKahani.
पापा तुम गंदे हो Complete - Hindi Sex Story - Real Story Continue Part 1
ट्रिन… ट्रिन… ट्रिन… ” टेबल पऱ पड़े मेरेफोन कि रिंग सें मे चिहुंका, मैंने फोन उठाकर स्क्रीन पऱ नज़र डाली औऱ वापसरख दिया, ये मेरे द्वारा सेट कियाहुआ डेली अलार्म थां।
मेरानाम रोहित सक्सेना हैं औऱ मेरा ट्रेवल एजेंसी कां बिज़नेस हैं, वैसे तौ मेरा बिज़नेस बहोत बड़ा नहि हैं कुल 4 लोग नौकरी करते हें मगरइस काम मे व्यस्तता बहोत रहती हैं, मे अक्सर अपनेकाम मे इतनाखो जाता हूं कि मुझे टाइम कां ध्यान हि नहि रहता औऱ 10 बजे केँ बाद मुझेकाम करना बहोत मनपसंद नहि, इसलिये मैंने अपनेफोन पर्र अलार्म लगारखा हैं, दरअसल ऐसा मैंने अपनी पत्नि प्रेमा केँ कहने पऱ किया हैं.
जब मेरीनयी नयी विवाह हुई थि, तब मेरेपास रहने केँ लिए अपनाघऱ भि नहि थां, उन दिनों हम् लोग किराए केँ घर-मकान मे रहते थें, जिसकी वजह सें मेरी कमाई कां एक् बड़ाभाग किराया देने मे चला जाता थां, परिणाम स्वरूप मे प्रेमा केँ लिए ज्यादा कुछ नहि कर पाता थां। मुझेइस बात कां हमेशा अफ़सोस रहता थां.
फिन मैंने एक् दिन अपनीजॉब छोड़ दि औऱ ट्रेवल एजेंसी कां काम शुरुआत कर दिया, तकदीर नें मेरासंग दिया औऱ मे कामयाब होताचला गय़ा। चंद सालों बाद हमारे पास अपनाघऱ औऱ अपनी वाहन दोनों होँ गयीँ,, मे खुश थां सभीकुछ ठीकचल रहा थां।
बस जैसे जैसे मेरी कमाई बढ़ती गई,, मे अपनी पत्नि औऱ बेटे सें दूर होताचला गय़ा, मे रोज़देर सें आनेलगा।
एक् दिन प्रेमा नें मुझे समझया औऱ उसकेकहे मुताबिक मैंने कुछ स्टाफ बढ़ा दिया औऱ घऱ जल्दआने कि कोशिश करनेलगा, इसबात पर्र कईबार मेरा औऱ प्रेमा कां झगड़ा भि होँ जाता थां। फिन एक् दिनउसी नें मेरेफोन मे यह डेली अलार्म सेटकर दिया, तब सें आज तक मे अपने नियमित टाइम पऱ दफ़्तर सें निकल जाता हूं, हालाँकि अबघऱ पऱ मेरा इंतजार करने वालाकोई नहि हैं, प्रेमा कि 5 साल पहले एक् हादसे मे जानचली गई,, तब मेरी उम्र 37 थि औऱ मेरा बेटा संजय किशोरावस्था मे थां।
प्रेमा कि मौत केँ बाद मैंने दोबारा विवाह नाँ करने कां निर्णय किया, कुछ दिनों तक मैंने संजय कों किसीतरह कि कमी नहि होने दि मगर जैसे जैसे वक्त गुज़रता गय़ा प्रेमा कि याद धुँधली होतीचली गई,, उसकेबाद मुझे स्त्री कि कमी महसूस होनेलगी.
मैंने अपने एक् साथी कों अपनी समस्या बताई तोँ उसनेकहा- तुम्हें इसआयु मे विवाह करने कि ज़रूरत हि क्याँ हैं… संजयअब इतना बड़ा होँ चुका हैं कि वोँ अब मम्मी केँ बगैर भि रह सकता हैं। बात तेरी… तौ तुम् बाहर् सें कामचला सकते हौ!
“बाहर् सें मतलब?” मैंने उससे पूछा।
“अबे गधे… मे एस्कॉर्ट यानि कालगर्ल कि बातकर रहा हूं, इस उम्र मे विवाह करने सें अच्छा हैं नयीनयी लड़कियों कि जवानी कां मज़ा लूटो। तुम् तोँ लकी हौ प्यारे… कोई रोकने वाला भि नहि हैं!” उसने हंसते हुएकहा।
उसकीबात सुनकर मेरामन भि गदगद होँ गय़ा।
“मगर… संजय कों पताचला तोँ?” मैंने डरतेहुए पूछा।
“उसका भि हल हैं… उसे बोर्डिंग भेजदे पढ़ने केँ लिये…फिन लड़कियों केँ लिए बाहर् जाने कि भि जरूरत नहि… घऱ पऱ बुलाओ पत्नि कि तरहरात भर मज़ेलो औऱ सुभह तक भूलजाओ!” उसने आँखें चमकाते हुएकहा।
मे उसके प्रभाव मे आँ गय़ा औऱ अगलेदिन हि मे संजय कों लेकर बैंगलोर चला गय़ा औऱ उसे बोर्डिंग मे डाल दिया। तब सें आज तक मेरानयी नयी लड़कियों कों घऱ बुलाकर भोगने कां सिलसिला चालू हैं। फिरभी मे ऐसा रोज़ नहि करता, सप्ताह मे 1 याँ 2 बार हि ऐसा करता हूं।
मैंने दफ़्तर बंद किया औऱ अपनी वाहन मे घुस गय़ा… अगले हि लम्हा मेरीकार हवा सें बात करती हुइ मार्ग पर्र दोड़ने लगी, आज मेरेमन मे किसी कमसिन लड़की कों चोदने कां विचार थां। मे जल्द सें जल्दघऱ पहुंचना चाहता थां इसलिये मैंने कार कों हाईवे पऱ डाल दिया औऱ तेज़ रफ़्तार सें जानेलगा।
अचानक हि मेरी नज़र हाईवे पऱ खड़ी एक् लड़की पर्र पड़ी, वोँ ऐसी स्थान खड़ी थि जहाँ नं तोँ बस स्टॉप थां, नं हि कोई सिगनल, मुझेउसे अकेले देखकर आश्चर्य हुआ, जैसे जैसे मेरीकार उसके नज़दीक होती गई,, मे कार कां रफ़्तार भि कम करताचला गय़ा, उस लड़की केँ पहनावे सें लगता थां कि वोँ किसी अच्छे घऱ कि लड़की हैं।
मेरीकार अब उसके नज़दीक पहुँच चुकी थि, मगर इससे पहले कि मे कुछसमझ पाता, उस लड़की नें एक् छलांग मारी औऱ मेरी वाहन केँ आगे आँ गई,। मे करीब-करीब व्हीकल केँ ब्रेक पऱ चढ़ गय़ा, कार चर्राती हुइ एक् झटके मे रुक गयीँ,.
यारनई किस्सा केँ लिए हार्दिक शुभकामनाएँ
पापा तुम गंदे हो Complete - Hindi Sex Story – New Episode
इससे पहले कि मे उसेकुछ कहता, उसने एक् औऱ अचम्भित कर देने वाली हरकत कि, वोँ लड़कीपलक झपकते हि मेरी व्हीकल कां द्वार (दरवाज़ा) खोलकर अंदर आँ गई,। मे हैरत औऱ फटीफटी नज़रों सें उसे देखने लगा, मेरेसमझ मे कुछ भि नहि आँ रहा थां, मे भय औऱ बैचेनी सें मराजा रहा थां।
“कौन हें आप्?” बड़ी मुश्किल सें मेरे मुंह सें यह शब्द निकले।
“तुम्हारे घऱ मे कौनकौन हैं?” उसने उल्टा सवाल किया, उसकी आवाज़ मे एक् कठोरता थि।
“कोई नहि, मे अकेला रहता हूं, औऱ मेराघऱ भि बहोत छोटा हैं, औऱ मे धनी व्यक्ति भि नहि हूं.” मैंने हकलाते हुएकहा।
“डरोमत… मे कोई लूटेरन नहि हूं… बस तुम्हारे संग तुम्हारे घऱ मे एन्जॉय करना चाहती हूं। ” उसने मेरे गालों कों सहलाते हुए मुस्कुरा करकहा।
“घऱ मे क्यूं? हम् होटल चलते हें… ये ज्यादा अच्छा रहेगा। ” मे उसबला कों अपनेघऱ नहि लें जानां चाहता थां।
“हरामी कि औलाद…जान सें मार डालूँगी तुम को। अगर तूँ अपनेघऱ केँ बजाये कहीं औऱ लेँ गय़ा तौ!” उसने गुस्से सें मेरा गर्दन दबाते हुएकहा। उसकी पकड़ इतनी तेज़ थि कि मेरादम घुटने लगा। मैंने बाहर् निकलती आँखों सें उसकीओर देखा, उसने मेरा गर्दन छोड़ दि, मे अपनी उखड़ी हुइ सांसों कों नियंत्रित करनेलगा।
“बोलघऱ जाएगा याँ होटल?” उसने गुर्रा कर मुझसे कहा।
“घऱ…” मैंने हकलाते हुए जवाब दिया।
“आज तुँ कटने वाला हैं बेटा!” मेरेदिल नें सरगोशी कि… ‘यह पागल लड़की तेरे हि घऱ मे तेरा बिरयानी बनाकर खाने वाली हैं। ’
मे रास्ते भर सोचता जारहा थां कि केसेइस मुसीबत सें छुटकारा पाऊं, मगर मुझेकोई मार्ग नज़र नहि आँ रहा थां। मैंने वाहन कि गतिइस उम्मीद सें धीमीकर दि कि कहीं रास्ते मे इस लड़की कां दिमाग़ ठिकाने मे आँ जाए औऱ ये मेरी व्हीकल सें उतरजाए।
पऱ ऐसाकुछ नहि हुआ… करीब 15 मिनट वाहन दोड़ने केँ बाद मे अपनेघऱ पहुँच गय़ा।
मैंने गेट कां लॉक खोला औऱ अंदरघुस गय़ा। वोँ लड़की भि मेरेआगे हि अंदर आँ गई,, अन्दर पहुँचते हि वोँ रहस्मयी लड़की सोफ़े पर्र धम्म सें जा बैठी औऱ मुझसे बोलि- इतने बड़ेघऱ मे तुँ अकेला रहता हैं? तुम कोडर नहि लगता?
“पहले नहि लगता थां मगरअब लगनेलगा हैं, कल सें अकेला नहि रहूँगा.” मैंने अपने सूखे होंठों पऱ जीभ फेरते हुए जवाब दिया।
वो लड़की मेरीबात सुनकर जोर सें हंसने लगी।
“तुँ खानां कहां खाता हैं? मेरा मतलब हैं तूँ होटल मे खाता हैं याँ स्वयं बनाता हैं?” उसने मेरी औऱ मुस्कुरा कर देखते हुए पूछा।