पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे - Padosi Ke Sath Sex - Latest Update 1
पड़ोसियों केँ संग एक् नौजवान केँ कारनामे
परिचय
यह किस्सा कि 2011-12 हैं जोँ वर्तमान वक्त सें करीब-करीब 9-10 साल पहले वर्ष 2011-12 मे सूरत शुरुआत हुइ थि।
पेश हैं एक् नयीकथा जिसमे आपको जिंदगी केँ सबरंग मिलेंगे खासतौर पर्र कामुकता सें भरपूर होगीयह किस्सा l
इसमें मिलेगा आपको पड़ोसियों सें सेक्स, युवतियों सें सेक्स, दफ़्तर मे सेक्स, पार्क मे सेक्स, सिनेमा मे सेक्स, नौकरानी सें सेक्स, ग्रुप सेक्स, कुंवारा सेक्स, कॉलेज सेक्स, डॉक्टर केँ संग सेक्स, बच्चे केँ लिए SEX, गर्भादान, इत्यादिl
किस्सा लम्बी चलेगी औऱ उम्मीद हैं आप् सभी कों मज़ा आएगाl
दीपक कुमार
INDEX
पड़ोसियों केँ संग एक् नौजवान केँ कारनामे
CHAPTER- 1
एक् युवा केँ अपने पड़ोसियों औऱ अन्य महिलाओ केँ संग कारनामे
PART 1- परिचय
PART 2- परिचय
गिफ्ट
PART 1- तोहफा
PART 2- तोहफा
PART 3- तोहफा
CHAPTER- 2
मानवी- मेरी पड़ोसन
PART - 1 सुभह- सुभह
PART- 2 दीवानी
PART- 3 सोनू केँ लिएबड़े दिनों मे ख़ुशी कां दिनआया
PART- 4 स्वपनदोष
PART-5 एक् कपकप कॉफ़ी
PART-6 दर्द कां इलाज
PART-7 मालिश
PART-8 राज
PART-9 सुन्दर बदलाव
PART-10 आशा सें मुलाकात
PART-11 पार्क कां निर्जन कोना
PART-14 छत पऱ सेक्स
CHAPTER- 3
रुसी युवती ऐना
PART-1 होटल मे ऐना सें मुलाकात
PART-5 स्विमिंग पूल केँ किनारे
PART-6 स्विमिंग पूल केँ किनारे चुदाई
PART-7 स्विमिंग पूल केँ अंदर चुदाई
PART-8
PART-9
PART-10
PART-11
CHAPTER- 4
कामदेव कि उपासना
PART-1 कामदेव कि स्टोरी
PART-2 कामदेव हें कौन
PART-3 यज्ञ द्वारा पापों कां प्रायश्चित
PART-5 कामरूप क्षेत्र कि राजकुमारी सें भेंट
PART-6 राजकुमारी - सपनो कि रानी
CHAPTER- 5
रुपाली - मेरी पड़ोसन
PART-1 कामुक दृश्यमं
PART-2 बल्ब फ्यूज होँ गय़ा
PART-3 स्टूल (छोटीमेज)
PART-4 वास्तविकता याँ एक् सपना
PART-5 ( 69 )
PART-8 फिल्म
PART-9 कामुक फिल्म
PART-10 हस्तमैथुन
PART-11 अंतराल
PART-15 सुपर संडे - ईशा
PART-16 सुपर संडे - ईशा कि परख
PART-17 सुपर संडे - ईशा कां विर्जिनिटी टेस्ट
PART-18 सुपर संडे - जाल मे ईशा
PART-20 सुपर संडे - ईशा कि तयारी
PART-21 सुपर संडे - ईशा कां कौमार्य भेदन
PART-22 सुपर संडे - ईशा केँ संग सम्भोग कां खुशी
PART-23 सुपर संडे - शाही हर्बल तेल सें मालिश
PART-25 सुपर संडे - क्लब सैंडविच मालिश
PART-26 सुपर संडे - सुपर लेस्बियन शो
PART-27 सुपर संडे - लेस्बियन त्रिकोण
PART-28 सुपर संडे - सुरक्षा
PART-29 सुपर संडे - मानवी
PART-30 सुपर संडे - रूपाली केँ संग सुहागरात
PART-31 सुपर संडे - रूपाली केँ संग
CHAPTER-6
पश्ताचाप
VOLUME II
शादी, यज्ञ औऱ शुद्धिकरन
CHAPTER-1
शादी सें पहले
PART- 1 /PART- 2/ PART- 3/ PART- 4/ PART -5/PART- 6/ PART- 7/PART- 8/PART- 9/PART-10
PART- 11/PART- 12/PART- 13/PART- 14/PART-15/PART-16/PART-17/PART-18/PART-19/PART-20
PART- 21/PART-22/PART- 23 page 37/PART- 24-page 39/PART- 25/PART- 26/PART -27 Page 40/PART-28/PART-29/ PART-30 page 41 /PART-31/PART-32 page 42 /PART- 33/PART- 34/PART- 35/PART- 36/PART -37/
PART-38/PART-39/PART-40
PART-41/PART- 42/PART -43/PART-44/PART-45/PART-46/PART-47/PART-48/PART-49/PART-50/
PART-51/PART- 52/PART -53/PART-54/PART-55/PART-56/PART-57/PART-58
CHAPTER-2
नयी भाभी कि सुहागरात
PART- 1 (PAGE 48) /PART- 2/ PART- 3/ PART- 4/ PART -5/PART- 6/ PART- 7/PART- 8/PART- 9/PART-10
PART- 11/PART- 12/PART- 13/PART- 14/PART-15/ PART- 16/PART- 17/PART- 18/PART- 19
CHAPTER-3
बैचलर जश्न
PART- 1 /PART- 2/ PART- 3/ PART- 4/ PART -5/PART- 6/ PART- 7/
PART- 8/PART- 9/PART-10 /PART- 11/PART- 12/PART- 13/PART- 14/PART-15/
PART- 16/PART- 17/PART- 18/PART- 19/PART-20/ PART-21/PART-22/
CHAPTER-4
शादी
PART-1/ PART-2/PART-3/ PART- 4/PART-5/
PART-6/PART-7/ PART- 8/PART-9/ PART- 10/
PART-11/
शादी- सुहागरात
PART-1/PART-2/ PART- 3/PART-4/
PART-5/PART-6/ PART- 7/PART-8/
PART-9/PART-10 / PART-11/PART-12/
PART- 13/PART-14/PART-15/PART-16/
PART-17/ PART- 18/PART-19/ PART- 20
CHAPTER-5
मधुमास (हनीमून)
PART-1/ PART-2/PART-3/ PART- 4/PART-5/
PART-6/PART-7/ PART- 8/PART-9/ PART- 10/
PART- 11/PART- 12/PART- 13/PART- 14/PART-15/
PART-16/PART-17/PART-18/PART-19/PART-20
PART- 21/PART- 22/PART- 23/PART- 24/PART-25/
PART-26/PART-27/PART-28/PART-29/PART-30
PART- 31/PART- 32/PART- 33/PART- 34/PART-35/
PART-36/PART-37/PART-38/PART-39/PART-40
PART- 41/
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे - Padosi Ke Sath Sex – New Episode
INDEX
पड़ोसियों केँ संग एक् नौजवान केँ कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे - Padosi Ke Sath Sex – New Episode
पड़ोसियों केँ संग एक् नौजवान केँ कारनामे
001
CHAPTER- 1
एक् युवा केँ अपने पड़ोसियों औऱ अन्य महिलाओ केँ संग कारनामे
आगमन औऱ परिचय
PART 1- परिचय
यहकथा कि 2011-12 हैं जौ वर्तमान वक्त सें करीब-करीब 9-10 साल पहले वर्ष 2011-12 मे सूरत शुरुआत हुईँ थि।
भारत मे सूरत मे आप् जानते हें कि इतनीघनी आबादी हैं, औऱ लोग मधुमखी केँ छत्ते मे मधुमक्खियों केँ झुंड कि तरह रहते हैं। अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार भीड़भाड़ वाले इलाके मे बहुमंजिला अपार्टमेंट मे दो बेडरूम वाले छोटे फ्लैटों मे रहते हैं।
मगरइसी सूरतशहर मे "ला-कासा" एक् 4-मंजिला छोटा अपार्टमेंट थां जिसमें 4 मंजिलें थीं, औऱ प्रत्येक मंजिल मे 3 फ्लैट थें जोँ सूरत केँ बीचोबीच एक् व्यस्त औऱ व्यावसायिक जगह पर्र स्थित थां। मगरये अपार्टमेंट शर कि पागल भीड़ सें बसदूर थां यूनिवर्सिटी केँ पास, आसपास बहुत हरियाली थि औऱ एक् कोने मे स्थित, मुख्य मार्ग सें दूर एक् शांत स्थान मे थां औऱ इसमें मुख्यता मध्यम वर्ग केँ परिवार रहते थें। अपार्टमेंट मे कुल 12 परिवारों, प्रत्येक मंजिल मे 3 फ्लैटों मे रहते थें। बड़े शहरों मे प्रचलित रहने वाली संस्कृति केअनुसार, पड़ोसी शायद हि अपने पड़ोस मे रहने वालों याँ एक् दूसरे कों जानते थें औऱ नं हि वे एक्-दूसरे केँ बारे मे परेशान थें क्योंकि हरकोई सूरत मे व्यस्त थां, किसी केँ पास एक्-दूसरे केँ लिए वक़्त हि नहि थां।
मगरइसी अप्पार्टमेन्ट मे पहली मंजिल पऱ 3 फ्लैटों मे रहने वालेलोग एक् करीबी परिवार कि तरहरह रहे थें, एक्-दूसरे कि समस्याओं कों साझाकर रहे थें औऱ जरूरत औऱ संकट केँ टाइम एक्-दूसरे केँ लिए खड़े थें, उनबीच एक् करीबी बंधन उनकेबीच मौजूद औऱ विकसित थां।
पहली मंजिल पऱ श्री सुरेश सिंह कां फ्लैट फ्लोर केँ बीचोबीच थां जौ बाएं औऱ दाएं हिस्से मे स्थित अन्यदो फ्लैटों सें थोडा बड़ा थां। उनके फ्लैट मे 3 बेडरूम थें औऱ एक् नौकर कां रूम भि थां जबकि अन्यदो फ्लैटों मे 2 बेडरूम थें। वो एक् इंजीनियर थें पऱ विश्वविद्यालय मे प्रोफेसर केँ तौर पर्र कार्यरत 54 साल कां एक् वरिष्ठ आदमी अपनी पत्नि केँ संगरह रहे थें। उनका इकलौता शादीशुदा बेटा अमेरिका मे रहरहा थां औऱ भाग्य सें उन्हें NASA अमरीकी द्वारा उनके विशाल अनुभव औऱ क्षेत्र मे वरिष्ठता कि देखते हुए औऱ भारत सरकार केँ अनुशंसा केँ बाद NASA अमेरिका मे 6 साल केँ लिए एक् शोध कार्य केँ लिए आमंत्रित किया गय़ा थां, जोँ उनकेलिए बड़ी गर्व कि बात थि। इसशोध कार्य केँ लिए उन्हें भारत सरकार सें तत्काल अनुमति भि मिल गई।
उनके बाएं फ्लैट पर्र श्रीटेक चंद कां परिवार रहता थां, जिनकी उम्र 45 वर्ष केँ आसपास थि, जोँ कोलकाता केँ एक् बड़े कॉर्पोरेट हाउस मे चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) थें। वोँ अपने ओफिस केँ काम मे इतना व्यस्त थें कि उसे मेरे परिवार केँ लिएकोई अतिरिक्त वक़्त नहि मिलता थां, औऱ वो अक्सर अपने परिवार कों देखने केँ लिए 4 महीने मे एक् बार हि सूरत आँ पाते थें। उनके परिवार मे 40 साल कि उनकी पत्नि मानवी 18 साल कां एक् युवा लड़का उम्र कां राजन, जौ अभि कॉलेज मे थां, चंदा, मेरी सबसे छोटी बेटी अभि भि विद्यालय मे हैं, 9 वीं कक्षा मे पढ़ती थि शामिल थें। टेकचंद कि पहलीजॉब सूरत मे हि लगी थि यही विवाह हुइ तोँ यहीघऱ लेँ लिए थां औऱ अब चुकी बच्चे भि पढ़नेलग गए थें तोँ जब उन्हें कोलकत्ता मे अच्छी जॉब मिली उन्हें यहीछोड़ टेकचंद अकेले हि कोलकत्ता चलेगए।
श्री सुरेश सिंह केँ दाहिने हाथ वाले फ्लैट मे पर्र श्री सौरव मिश्रा कां परिवार रहता थां जिनकी उम्र 48 वर्ष थि, जोँ एक् शिपिंग कंपनी केँ कर्मचारी थें। सालभर मे, वो समुद्र मे हि रहतेते क्योंकि उसका जहाज दुनिया केँ विभिन्न हिस्सों मे, अधिकतर वक्त सिंगापुर औऱ हांगकांग मे हि रहता थां। वो साल मे एक् याँ दोबार हि घऱआते थें। उनके परिवार मे उनकी 36 साल कि उम्र कि पत्नि रूपाली, उनकी बड़ी बेटी काजल, 11 वीं कक्षा मे पढ़रही थि औऱ 14 साल कि उनकी सबसे छोटी बेटी दीप्ति, 9 वीं कक्षा मे पढ़रही, शामिल थि। दीप्ति (सौरव कि बेटी) औऱ चंदा (श्रीटेक चंद कि बेटी) एक् हि विद्यालय मे थि इसलिये स्वाभाविक रूप सें वे बहोत हि अच्छी यार थि
काजल एक् वयस्क किशोरी लड़की थि जौ युवावस्था मे कदम रखनेजा रही थि, बसइन दोनों लड़कियों सें थोड़ी दूरी बनाएहुए थि, मगर एक् बड़ी बेहन कि तरह दीप्ति औऱ चंदा कां मार्गदर्शन करती रहती थि। राजन, 18 साल कां वयस्क लड़काउन सभी मे सबसेबड़ा थां औऱ वेसब उसका बड़े भइया केँ रूप मे उसकामान सामान करते थें।
चूंकि तीनो परिवार पूर्वांचल यूपी याँ आस-पास केँ बिहार सें सम्बंधित हे, इसलिये उन्होंने एक्-दूसरे केँ परिवार केँ लिए एक् लगाव विकसित हौ गय़ा थां ल चुकी दोनों कि पहलीजॉब इसीशहर सें शुरुआत हुई थि तोँ उनका परिवार यहीबस गय़ा थां। बाद मे श्रीटेक चंद औऱ श्री सौरव मिश्रा अपनीजॉब केँ चक्कर मे सूरत मे नहि रहते थें औऱ पहली मंजिल मे श्रीटेक चंद औऱ श्री सौरव मिश्रा कि अनुपस्थिति मे, श्री सुरेश सिंह एकमात्र पुरुष शख्स थें। अन्यसब परिवार केँ सरदार औऱ महिलाएं श्री सुरेश कों मोटा भइया (गुजराती बोलचाल केँ अनुसार बड़े भइया) केँ रूप मे संबोधित करते थें औऱ बच्चे उन्हें मोटा पिताजी ( ताऊ याँ पिता कां बड़ा भइया ) केँ रूप मे बुलाते थें। श्री सुरेश इनदो परिवारों कि तुलना मे बहोत अमीर थें, वोँ एक् ईमानदार औऱ सरल शख्स थें, औऱ वे अन्यदो परिवारों केँ पुरुष प्रमुखों कि अनुपस्थिति मे एक् संरक्षक आदमी कि तरह थें।
एक् मध्यम-वर्गीय परिवार कि विशिष्ट प्रकृति औऱ विशेष रूप सें परिवार कि एक् स्त्री कि अवसरआने पर्र जितना संभव होँ सके रुपया बचाने कि प्रवृति केँ अनुसार माणवी औऱ रूपाली माखनलगा कर मीठी मीठी बातो द्वारा सुरेश कुमार जैसे एक् सीधे आदमी सें अधिकतम लाभ निकालने कि कोशिश करती रहतीथीl माणवी औऱ रूपाली दोनों एक्-दूसरे केँ संग श्री सुरेश सें लञ्च औऱ डिनर केँ लिए आमंत्रित करने औऱ हरदिन गरमचाय केँ कपपेश करने केँ लिए एक् दूसरे केँ संग प्रतिस्पर्धा मे रहती थि। सुरेश कुमार उन्हें अपने हि परिवार कां हिस्सा मानते थें औऱ इन दोनों परिवारों परिवारों कों विभिन्न तोहफा पेश करके औऱ इन दोनों परिवारों कों अपनी घरेलू सामग्री कां उपयोग करने कि अनुमति देकर भव्यरूप सें खर्च करते थें। कभी-कभी, वो मानवी औऱ रूपाली कों पैसे भि उधारदे दिया करते थें जिसे वसूलना वोँ अक्सर भूल जाया करते थें क्योंकि वोँ कोई हिसाब नहि रखते थें।
श्री सुरेश औऱ उनकी पत्नि 6 साल केँ लिए यूएसए रवाना होने वाले थें। येटेक चंद औऱ सौरव केँ परिवार केँ सदस्यों केँ लिए एक् चौंकाने वाला क्षण थां।
दुःखी चेहरे औऱ टूटे दिलों केँ संग, हर किसी नें दयालु दंपत्ति कों विदाई देने केँ लिए पहली मंजिल केँ खुलेजगह मे इकट्ठा हुए। दोनों परिवार इस तथ्य सें अवगत थें कि वे क्याँ खोरहे थें। वातावरण शांत, शांत औऱ सबकामन अशांत थां।
मानवी अपने बच्चों केँ संग अपने पति श्रीटेक चंद केँ संग खड़ीथीं।
श्रीटेक चंद नें बहोत नरम लहजे मे कहना शुरुआत किया, "मोटा भइया, (बड़े भइया) आपको एक् सुखद यात्रा कि शुभकामनाएं। आप् हमारी अनुपस्थिति केँ दौरान इस मंजिल केँ संरक्षक थें। हम् आपको बहोत याद आएगी.
रूपाली, अपने पति श्री सौरव केँ पास खड़ी होकर रोतेहुए बोलने लगी, "हम् आपके बिनायहा रहने केँ बारे मे नहि सोच सकते, औऱ हमारे पतियों कि अनुपस्थिति केँ दौरान आपकी उपस्थिति सबसे ज्यादा महसूस होगी। "
मानवी नें पूछा, "मोटाभई, आपके खाली फ्लैट मे कौन रहेगा?"
श्री सुरेश नें हर किसी कों सहजता सें देखा औऱ अपने प्रति उनकेदिल मे दर्द, सम्मान औऱ प्रेम महसूस किया।
उन्होंने सब कों संबोधित किया, "सुनो, मेरे प्यारे प्यारे भइया लोगो भाभियो औऱ बच्चो, मे तुम्हारे प्रेम औऱ स्नेह कि सराहना करता हूं, मगर चिंता मतकरो। ईश्वर बहोत दयालु हें। मेरे बचपन केँ यार केँ पुत्र दीपक कुमार पंजाब सें सूरत स्थानांतरित हौ गए हैंl उत्तर भारत केँ एक् परिधान निर्माता केँ कार्यालय मे एक् प्रबंधक केँ रूप मे। वो मेरेयार कां बेटा हैं, बहोत अच्छा, सरल, विनम्र औऱ मददगार सज्जन हैं। वो शादीशुदा नहि हैं, वो पंजाब केँ एक् बहोत अमीर परिवार सें हें औऱ 6 सालबाद जब मे यूएसए सें लौटूंगा। तब तक, वो आपकेसंग रहेगा। चूंकि वो मेरे फ्लैट मे अकेला रहेगा। दोनों परिवारों कि औऱ महिलाएं कि देखभाल वोँ कर लेगा। श्रीचंद औऱ श्री सौरव कि अनुपस्थिति केँ दौरान, मेरेयार कां पुत्र दीपक कुमार इन दोनों परिवारों केँ लिए सबसे अच्छे अभिभावक होंगे, औऱ वे दोनों परिवारों केँ एक् छोटे भइया केँ रूप मे होंगे। "
आप् उन्हें अपने परिवार कां सदस्य हि मानियेगा औऱ बिलकुल चिंता नं करे आप् उन्हें मुझ सें भि बेहतर हि पाएंगे.
दोनों परिवारों नें राहत कि सांसली।
उसकेबाद जब सुरेश कुमार अमेरिका केँ लिए रवाना हुए औऱ दोनों परिवार उन्हें छोड़ने केँ लिए हवाई अड्डे तक गए।
उनके जाने केँ बाद जल्द हि श्रीचंद औऱ श्री सौरव दोनों अपने-अपने कार्य स्थलों केँ लिए रवाना हौ गए औऱ दोनों केँ परिवार वही अकेले रहगए औऱ नए रहने वाले केँ आगमन कां बेसब्री सें प्रतीक्षा कररहे थें।
दीपक कुमार (मे ) एक् जाट (भारत मे पंजाब राज्य सें एक् समुदाय) थें। मुझे पंजाबी लोगों कि आनुवंशिक गुणवत्ता विरासत मे मिली थि। उसका हाइट करीब-करीब 6 फीट, जिसकी उम्र 24 साल थि। वो शारीरिक रूप सें बहोत मजबूत औऱ मर्दाना थां, औऱ इस उम्र मे, मेरेपास व्यापक कंधे औऱ छाती, लंबी, चौड़ी भुजाएँ औऱ हथेलियाँ थीं। वो रंग मे गोरा थां, मेरे चेहरे पऱ घनेबाल औऱ मूंछें थीं जोँ कालेरंग कि थि। मेरी शारीरिक बनावट 20 साल केँ यंगमैन खिलाडी कि तरह थि। हमारा परिवार पंजाब केँ अपने गाँव मे बहोत ज़मीन-जायदाद रखने वाले बहोत अमीर हैं। मैंने अपनीकुछ शिक्षा लंदन मे रहकर भि पायी हैं। चंडीगढ़ मे मेरीतीन इमारतें थीं जिनसे मुझे अच्छा किराया मिलता थां। बस अपना वक्त गुजारने केँ लिए, मे एक् कंपनी मे अधिकारी केँ रूप मे शामिल हौ गय़ा थां औऱ अब मे उस कंपनी मे प्रबंधक केँ पद पऱ थां औऱ मेरा तबदला सूरतक्र दिया गय़ा थां। मे सूरत मे अपने पिता केँ बचपन केँ साथी श्री सुरेश केँ संपर्क मे थां। जब मैंने सुरेश जी कों अपने सूरत स्थानांतरण केँ बारे मे अवगत कराया औऱ उनसे एक् घऱ ढूंढने मे सहायता मांगी, तौ सुरेशजी नें मुझे रहने केँ लिए अपने फ्लैट कि पेशकश कि क्योंकि वो खुद अपनी श्रीमती केँ संग अमेरिका केँ लिए रवाना होँ रहे थें।
मे कुंवारा थां,। मे अपने सेक्स जिंदगी मे बहोत जोश औऱ जीवटता थि औऱ संग मे मेंने योग औऱ ध्यान केँ माध्यम सें अपनी जैविक आवश्यकताओं कों नियंत्रित किया थां। मेरी सबसे अतिरिक्त साधारण गुणवत्ता ये थि कि मे होम्योपैथी मे डॉक्टर कि उपाधि रखता थां, होम्योपैथी उपचार मे पारंगत थां औऱ इस उद्देश्य केँ लिए मेरेपास एक् चमड़े कि किट थि जिसमें सब प्रकार कि होम्योपैथी दवाएं थीं, दूसरी बातये कि मेरेपास एक् लम्बा मोटाबड़ा औऱ भारी लन्ड थां जोँ 10 इंच लंबा थां।
रविवार कि दोपहर कि तेजधूप थि। मे "ला कासा" अपार्टमेंट पहुँचा तौ मे ऊपरी मंजिल कि ओर जाने वाली सीढ़ी पर्र चढ़ गय़ा। लिफ्ट कां उपयोग करने कि कोई आवश्यकता नहि थि क्योंकि सुरेश जी कां फ्लैट पहली मंजिल पऱ हि थां औऱ सीढ़ी पऱ चढ़कर आसानी सें आयाजा सकता थां। जब मे पहली मंजिल पऱ पहुंच गय़ा औऱ पहली मंजिल केँ प्रवेश दरवाज़ा पर्र एक् लोहे कि ग्रिल कों सुरक्षित रूप सें बंद पाया। मुझे सुरक्षा व्यवस्था बढ़िया लगी औऱ मैंने मन हौ मन उसकी सराहना कि। मैंने बेल पर्र अपना अंगूठा लगाया।
जब घंटीबजी तोँ रूपाली, श्री सौरव कि 36 वर्षीय गृहिणी इत्मीनान सें बैठी थि औऱ टेलीविज़न देखरही थि। वो इस विषम टाइम मे आयेहुए किसी अप्रत्याशित आगंतुक याँ घंटी बजाने वाले कों देखने केँ लिए बाहर् आई तौ वहां अटैची लेकर मेरेरूप मे एक् सुन्दर व्यक्तित्व कां लंबा, सज्जन शख्सउसे बाहर् खड़ा मिला।
मे भि अपने सामने एक् हसीन स्त्री कों पाकरदंग रह गय़ा। मैंने उसे भारत कि सबसे हसीन महिलाओं मे सें एक् पाया, मैंने पंजाब मे, लंदन मे औऱ विश्व केँ अन्यकुछ सुंदरियों कों देखा थां, मगरआज, मे उस सुन्दर स्त्री कों बहोत लगभग सें देखरहा थां।
रुपाली अपनेनाम केँ अनुसार रूप कि मूर्त थि बहोत हसीन थि, आकृति अद्भुत औऱ आकर्षक थि गोरारंग थां, ऊँचाई करीब-करीब 5'5 थि, औऱ लंबे रेशमी बाल थें। मेरी पतलीकमर थि, कूल्हे मोटे औऱ गद्देदार थें उसको देखकर आपकोऐसा लगेगा जैसे कि इसे बनाने वाले द्वारा उसे संगमरमर सें उकेरा गय़ा औऱ फिनबड़ी देखभाल सें बाहर् निकाला गय़ा थां, औऱ मुझे उसकी चिकनी त्वचा देखकर ऐसालगा कि चिकनी मिट्टी जैसी त्वचा जिससे कोई कुम्हार कच्चे बर्तन गढ़ता हैं।
उसके कूल्हों कां झुकाव, नितम्बो कि परिपूर्णता औऱ उन्नत वक्ष स्थलसभी पूर्णता केँ विचार कि याद दिलाते थें। जब वो अपने बालों कों ठीककर रही थि, उन लंबी पतली भुजाओं केँ संग, उसकी नग्न नाभि मेरे देखने केँ लिए उजागर हौ गयीँ,, उसकी साड़ी उसके जिस्म पर्र इतनी समग्र रूप सें लिपटी हुईँ थि, कि मेरेबदन कि बनावट औऱ वक्रलाल औऱ कालेरंग कि साड़ी मे प्रमुखता सें स्पष्ट होँ गए, उसकी साडी केँ रंगो नें उसकी आकर्षक सफ़ेद क्रीम आधारित त्वचा केँ रंग कों रेखांकित किया।
उसकी चमकती दमकती दूधिया सफ़ेद चिकनी त्वचा उसकीलाल साडी केँ कारण गुलाबी हौ रही थि जौ किसी कों भि दिल कां दर्द देने केँ लिए पर्याप्त थां, औऱ निश्चित रूप सें मेरादिल भि कुछ टाइम केँ लिए धड़कना भूल गय़ा होगा। उसकी सफ़ेद ब्रा केँ सफेदकप औऱ पट्टियों कों उसके काले पारदर्शी ब्लाउज केँ माध्यम सें आसानी सें दिखरहे थें, औऱ उन्हें देखकर मैंने अनुमान लगाया कि मोहतरमा केँ गोल बूब्ज़ 36 साइज केँ होंगे।
फ़िलहाल मेरेमन मे उसकेबाद इतना हि विचार आया - ओह! मेरे ईश्वर क्याँ सौंदर्य हैं, मे मंत्रमुग्ध थां।
किस्सा जारी रहेगी
दीपक कुमार
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे - Padosi Ke Sath Sex - Next part miss mat karna
बहोत हि जबर्दस्त कथा हैं । शुरुआत बहोत गजब हैं साथी अगलेभाग कां बहोत बेताबी सें इन्तजार हैं ।
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